16 Sep रोडीटीईपी योजना का विस्तार, 2026-27 के लिए 23,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव

✎ RoDTEP योजना निर्यातकों को उन शुल्कों और करों की वापसी प्रदान करती है जो वस्तुओं के उत्पादन और वितरण के दौरान भुगतान किए जाते हैं, जिससे भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS पेपर III — भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों का संग्रहण, वृद्धि, विकास और रोजगार से संबंधित मुद्दे। | GS पेपर III — उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक संवृद्धि पर इनके प्रभाव।
- Prelims: RoDTEP योजना, निर्यात प्रोत्साहन, वाणिज्य मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, राजकोषीय घाटा, MSMEs, विश्व व्यापार संगठन (WTO), उत्पाद शुल्क और करों की वापसी
- Essay: भारत की निर्यात संवृद्धि: चुनौतियाँ और अवसर, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था का लचीलापन
त्वरित पुनरावृत्ति: RoDTEP योजना निर्यातकों को उन शुल्कों और करों की वापसी प्रदान करती है जो वस्तुओं के उत्पादन और वितरण के दौरान भुगतान किए जाते हैं, जिससे भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्र सरकार निर्यात को बढ़ावा देने के लिए निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट (Remission of Duties and Taxes on Exported Products – RoDTEP) योजना का विस्तार करने पर विचार कर रही है। वाणिज्य मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग से इस प्रोत्साहन योजना को अगले पाँच वर्षों के लिए बढ़ाने पर चर्चा की है और 2026-27 के लिए इसके कार्यान्वयन हेतु ₹23,000 करोड़ की राशि की मांग की है। यह कदम वैश्विक बाजारों में मौजूदा अनिश्चितता और शिपिंग व्यवधानों के कारण निर्यातकों द्वारा सामना की जा रही कठिनाइयों के बीच आया है, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) में रोजगार के नुकसान को रोकना है।
पृष्ठभूमि
- RoDTEP योजना को पहली बार 2021 में लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य निर्यातकों को उन शुल्कों, करों और लेवी की वापसी प्रदान करना था जो वस्तुओं के उत्पादन और वितरण के दौरान भुगतान किए जाते हैं।
- यह योजना उन केंद्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर के करों, शुल्कों और लेवी की प्रतिपूर्ति करती है जो किसी अन्य कार्यक्रम के तहत वापस नहीं किए जाते हैं, लेकिन निर्यात उत्पादों के निर्माण और वितरण के दौरान खर्च होते हैं।
- इस योजना का उद्देश्य भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजारों में अन्य देशों के निर्यातकों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए एक समान अवसर प्रदान करना है।
- चालू वित्त वर्ष के लिए योजना का बजट ₹10,000 करोड़ था, जबकि 2025-26 के लिए ₹18,232 करोड़ का बजट आवंटन किया गया था।
- योजना के तहत वापसी की दर 0.3 प्रतिशत से 3.9 प्रतिशत तक है, जो विभिन्न उत्पादों पर लागू होती है।
RoDTEP योजना क्या है?
- RoDTEP (निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट) योजना भारत सरकार द्वारा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई एक निर्यात प्रोत्साहन योजना है।
- यह योजना उन सभी अप्रत्यक्ष करों और शुल्कों की वापसी प्रदान करती है जो निर्यात किए गए उत्पादों के निर्माण और वितरण में शामिल होते हैं, लेकिन किसी अन्य मौजूदा योजना के तहत वापस नहीं किए जाते हैं।
- इसमें केंद्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर पर लगाए गए कर शामिल हैं जैसे कि मूल्य वर्धित कर (VAT) जो ईंधन पर लगाया जाता है, बिजली पर शुल्क, मंडी शुल्क, स्टांप शुल्क आदि।
- इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारतीय निर्यातकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में समान अवसर प्रदान करना है, क्योंकि यह उन्हें उन लागतों से मुक्त करती है जो अन्य देशों के निर्यातकों को नहीं उठानी पड़तीं।
- यह योजना विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के अनुरूप है, क्योंकि यह केवल उन करों और शुल्कों की वापसी करती है जो निर्यात प्रक्रिया में पहले ही भुगतान किए जा चुके हैं, न कि कोई नई सब्सिडी प्रदान करती है।
- RoDTEP योजना ने पहले की मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (MEIS) का स्थान लिया है, जिसे WTO के नियमों के उल्लंघन के कारण चुनौती दी गई थी।
- इस योजना के तहत वापसी सीधे निर्यातकों के लेजर खाते में क्रेडिट के रूप में जमा की जाती है, जिसका उपयोग वे सीमा शुल्क के भुगतान के लिए कर सकते हैं या इसे अन्य आयातकों को हस्तांतरित कर सकते हैं।
- यह योजना विशेष रूप से MSMEs जैसे श्रम-गहन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उन्हें वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद करती है और रोजगार सृजन को बढ़ावा देती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| कर और शुल्क वापसी | निर्यातकों को केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर लगने वाले उन करों, शुल्कों और लेवी की वापसी प्रदान करता है, जो किसी अन्य योजना के तहत वापस नहीं किए जाते हैं। |
| व्यापक कवरेज | उत्पादन और वितरण प्रक्रिया में लगने वाले विभिन्न अप्रत्यक्ष करों और शुल्कों को शामिल करता है। |
| निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता | भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजारों में अन्य देशों के निर्यातकों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए एक समान अवसर प्रदान करता है। |
| MSME को लाभ | सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को विशेष रूप से लाभ पहुंचाता है, जो बड़े पैमाने पर रोजगार प्रदान करते हैं। |
| दरें | योजना के तहत वापसी की दरें 0.3 प्रतिशत से 3.9 प्रतिशत तक होती हैं। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- निर्यात को प्रोत्साहन देकर देश की आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा देता है।
- निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में मदद करता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होती है।
- विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) को बढ़ावा देता है और रोजगार सृजन में सहायक होता है, विशेषकर MSME क्षेत्र में।
व्यापार संतुलन
- निर्यात में वृद्धि से व्यापार घाटे (Trade Deficit) को कम करने में मदद मिलती है, जिससे भुगतान संतुलन (Balance of Payments) में सुधार होता है।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समझौतों के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में सहायक।
नीतिगत निरंतरता
- योजना का विस्तार निर्यात नीति में स्थिरता और निरंतरता का संकेत देता है, जिससे निवेशकों और निर्यातकों का विश्वास बढ़ता है।
- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों के बीच निर्यात क्षेत्र को समर्थन प्रदान करता है।
चुनौतियाँ
1. राजकोषीय दबाव
- योजना के लिए आवश्यक भारी बजटीय आवंटन सरकार के राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) पर दबाव डाल सकता है।
- बढ़ती सब्सिडी लागत अन्य विकासात्मक व्ययों के लिए संसाधनों को सीमित कर सकती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: सरकारी बजट और राजकोषीय नीति
2. WTO संगतता
- योजना को विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के अनुरूप बनाए रखना एक चुनौती है, खासकर जब निर्यात सब्सिडी की बात आती है।
- यह सुनिश्चित करना कि वापसी की दरें WTO के ‘अनुमेय सब्सिडी’ (Permissible Subsidies) के दायरे में रहें।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: WTO और भारत
3. प्रशासनिक जटिलताएँ
- विभिन्न स्तरों पर लगने वाले करों और शुल्कों की पहचान और उनकी वापसी की प्रक्रिया में प्रशासनिक जटिलताएँ हो सकती हैं।
- दावों के सत्यापन और समय पर वापसी सुनिश्चित करने में चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: शासन: सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप
4. वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता
- मध्य पूर्व संघर्ष और अन्य भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बनी हुई है।
- शिपिंग लागत में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान निर्यात प्रोत्साहन प्रयासों को प्रभावित कर सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| बजटीय आवंटन | योजना के विस्तार के लिए 2026-27 तक 23,000 करोड़ रुपये की मांग से राजकोषीय बोझ में वृद्धि। |
| राजकोषीय स्थिरता | बढ़ती सब्सिडी लागत से सरकार के वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में बाधा आ सकती है। |
| WTO अनुपालन | निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं को WTO के नियमों के अनुरूप बनाए रखने की आवश्यकता। |
| वैश्विक व्यापार बाधाएँ | भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान निर्यात प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं। |
| प्रशासनिक दक्षता | दावों के त्वरित और पारदर्शी निपटान को सुनिश्चित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट (Remission of Duties and Taxes on Exported Products – RoDTEP) योजना
आगे की राह
- राजकोषीय स्थिरता बनाए रखने के लिए योजना के बजटीय आवंटन का विवेकपूर्ण प्रबंधन किया जाए।
- WTO के नियमों के अनुरूप योजना को और अधिक सुदृढ़ किया जाए ताकि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विवादों से बचा जा सके।
- निर्यातकों के लिए वापसी प्रक्रिया को सरल और अधिक पारदर्शी बनाया जाए ताकि प्रशासनिक बोझ कम हो।
- निर्यात क्षेत्र में विविधीकरण (Diversification) को बढ़ावा दिया जाए ताकि वैश्विक झटकों के प्रति लचीलापन बढ़े।
- MSME क्षेत्र को विशेष समर्थन और तकनीकी सहायता प्रदान की जाए ताकि वे वैश्विक बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकें।
- निर्यात अवसंरचना (Export Infrastructure) में सुधार किया जाए, जिसमें लॉजिस्टिक्स और बंदरगाह क्षमताएँ शामिल हैं।
- अन्य व्यापार समझौतों और मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) का लाभ उठाया जाए ताकि भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार खुलें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
RoDTEP योजना · निर्यात प्रोत्साहन · व्यापार संतुलन · वैश्विक प्रतिस्पर्धा · सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) · राजकोषीय सहायता · आर्थिक संवृद्धि · भुगतान संतुलन · शुल्क और करों की वापसी · अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
अवधारणा प्रवाह
निर्यातकों द्वारा करों और शुल्कों का भुगतान → RoDTEP योजना के तहत वापसी का दावा → सरकार द्वारा करों और शुल्कों की वापसी → निर्यात लागत में कमी → भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि → निर्यात में वृद्धि और आर्थिक संवृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. RoDTEP (Remission of Duties and Taxes on Exported Products) योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना निर्यातकों को उन शुल्कों और करों की वापसी प्रदान करती है जो उत्पादन और वितरण के दौरान चुकाए जाते हैं और किसी अन्य योजना के तहत वापस नहीं किए जाते हैं।
2. यह योजना केवल केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए करों और शुल्कों को कवर करती है, राज्य और स्थानीय स्तर के करों को नहीं।
3. इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाना है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि RoDTEP योजना उन शुल्कों, करों और लेवी की वापसी प्रदान करती है जो उत्पादन और वितरण के दौरान चुकाए जाते हैं और किसी अन्य योजना के तहत वापस नहीं किए जाते हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि यह योजना केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर लगाए गए सभी करों, शुल्कों और लेवी को कवर करती है। कथन 3 सही है क्योंकि इसका प्राथमिक लक्ष्य भारतीय निर्यातकों के लिए एक समान अवसर प्रदान करके वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना है।
Q2. कथन (A): सरकार RoDTEP योजना का विस्तार करने पर विचार कर रही है।
कारण (R): यह योजना निर्यातकों को वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद करती है और आर्थिक अनिश्चितता के समय रोजगार के नुकसान को रोकने में सहायक है।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — कथन (A) सही है क्योंकि सरकार RoDTEP योजना का विस्तार करने पर विचार कर रही है। कारण (R) भी सही है और कथन (A) की सही व्याख्या करता है, क्योंकि यह योजना निर्यातकों को अप्रतिपूर्ति योग्य शुल्कों और करों की वापसी करके वैश्विक बाजारों में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाती है, जिससे आर्थिक अनिश्चितता के दौरान निर्यात और रोजगार को बनाए रखने में मदद मिलती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ निर्यात संवर्धन में RoDTEP (Remission of Duties and Taxes on Exported Products) योजना के महत्व का परीक्षण कीजिए। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के संदर्भ में यह योजना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किस प्रकार सहायक हो सकती है? (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर में RoDTEP योजना की मूल अवधारणा, इसके उद्देश्यों और कार्यप्रणाली को स्पष्ट किया जाना चाहिए। इसके महत्व को निर्यातकों के लिए प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, व्यापार संतुलन में सुधार और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को समर्थन देने के संदर्भ में विश्लेषित करें। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, जैसे कि भू-राजनीतिक संघर्ष और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, के प्रभावों को रेखांकित करते हुए यह बताएं कि कैसे यह योजना निर्यात को बनाए रखने, रोजगार सृजन और समग्र आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसमें योजना के तहत प्रदान की जाने वाली वित्तीय सहायता (जैसे ₹23,000 करोड़ का आवंटन) और इसके विस्तार के औचित्य का उल्लेख भी शामिल होना चाहिए।
स्रोत: orissapost.com
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