17 Sep आईआईटीएम पुणे ने विश्व ओजोन दिवस 2026 पर नागांव बीच पर मेगा सफाई अभियान आयोजित किया
✎ विश्व ओजोन दिवस और 'स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर' अभियान समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए जनभागीदारी तथा जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन के महत्व को रेखांकित करते हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण, प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन | GS Paper I — भूगोल: समुद्री संसाधन
- Prelims: विश्व ओजोन दिवस, स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर अभियान, समुद्री कूड़ा, तटीय पारिस्थितिकी तंत्र, भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
- Essay: पर्यावरण संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी का महत्व, सतत विकास और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण
त्वरित पुनरावृत्ति: विश्व ओजोन दिवस और ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ अभियान समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए जनभागीदारी तथा जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन के महत्व को रेखांकित करते हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राष्ट्रव्यापी ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर (SSSS) 5.0’ अभियान के तहत मुंबई के नागांव समुद्र तट पर एक बड़े समुदाय-संचालित समुद्र तट सफाई और प्लास्टिक संग्रह अभियान का आयोजन करके विश्व ओजोन दिवस 2026 मनाया। इस पहल में आईआईटीएम अधिकारियों, स्थानीय प्रतिनिधियों, छात्रों और सामुदायिक स्वयंसेवकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखी गई, जिसका उद्देश्य समुद्री कूड़े से निपटना और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना था।
पृष्ठभूमि
- विश्व ओजोन दिवस (World Ozone Day) प्रतिवर्ष 16 सितंबर को मनाया जाता है, जो ओजोन परत के संरक्षण के महत्व और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (Montreal Protocol) की सफलता पर प्रकाश डालता है।
- ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ अभियान एक राष्ट्रव्यापी पहल है जिसका उद्देश्य महासागर संरक्षण को बढ़ावा देना, समुद्री कूड़े को कम करना और जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन पर जोर देना है।
- यह अभियान 12 से 19 सितंबर, 2026 तक पूरे देश में चलाया गया, जिसका समापन 19 सितंबर, 2026 को अंतर्राष्ट्रीय तटीय सफाई दिवस (International Coastal Cleanup Day) पर हुआ।
- समुद्री कूड़ा, विशेष रूप से प्लास्टिक कचरा, समुद्री जीवन और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक गंभीर खतरा है, जिससे खाद्य श्रृंखला और मानव स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत एक प्रमुख अनुसंधान संस्थान है जो उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान में अनुसंधान करता है और पर्यावरणीय जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेता है।
- नागांव समुद्र तट पर आयोजित इस कार्यक्रम में 200 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा एकत्र किया गया, जिसे स्थानीय नगरपालिका अधिकारियों और अधिकृत रीसाइक्लिंग एजेंसियों को सौंप दिया गया।
‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ अभियान क्या है?
- ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ (SSSS) अभियान पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा शुरू की गई एक राष्ट्रव्यापी पहल है।
- इसका मुख्य उद्देश्य भारत के समुद्र तटों को स्वच्छ रखना, समुद्री प्रदूषण को कम करना और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
- यह अभियान जनभागीदारी पर केंद्रित है, जिसमें स्थानीय समुदायों, छात्रों और विभिन्न संगठनों को समुद्र तट सफाई गतिविधियों में शामिल किया जाता है।
- यह जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management) और प्लास्टिक प्रदूषण (Plastic Pollution) के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर जोर देता है।
- अभियान का लक्ष्य तटीय और समुद्री पर्यावरण के नाजुक संतुलन को बनाए रखना और सतत विकास (Sustainable Development) लक्ष्यों में योगदान करना है।
- यह अंतर्राष्ट्रीय तटीय सफाई दिवस जैसे वैश्विक प्रयासों के साथ समन्वय स्थापित करता है ताकि समुद्री संरक्षण के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाया जा सके।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| समुदाय-संचालित सफाई अभियान | यह सुनिश्चित करता है कि स्थानीय समुदाय समुद्री पर्यावरण के संरक्षण में सक्रिय रूप से शामिल हो, जिससे स्थायी व्यवहार को बढ़ावा मिले। |
| प्लास्टिक कचरा संग्रह और पृथक्करण | समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाता है और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है। |
| स्थानीय अधिकारियों को सौंपना | एकत्रित कचरे के उचित पुनर्चक्रण और निपटान को सुनिश्चित करता है, जिससे ‘स्वच्छ सागर’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलती है। |
| सामूहिक संकल्प | समुद्री प्रदूषण को रोकने और स्थायी पर्यावरणीय प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए दीर्घकालिक सामुदायिक प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। |
| विश्व ओजोन दिवस 2026 के साथ जुड़ाव | ओजोन परत संरक्षण के वैश्विक प्रयासों के साथ समुद्री पर्यावरण संरक्षण को जोड़ता है, जिससे समग्र पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ती है। |
महत्व
पर्यावरण संरक्षण
- समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को प्लास्टिक और अन्य मलबे से होने वाले प्रदूषण से बचाता है, जो समुद्री जीवन और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है।
- तटीय क्षेत्रों की पारिस्थितिक अखंडता को बनाए रखने में मदद करता है, जो कई प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण आवास हैं।
- ओजोन परत के क्षरण और समुद्री प्रदूषण जैसे परस्पर जुड़े पर्यावरणीय मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाता है।
सामाजिक प्रभाव
- समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा देता है, जिससे नागरिकों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और स्वामित्व की भावना पैदा होती है।
- छात्रों और युवाओं को पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों में शामिल करके भविष्य के पर्यावरण संरक्षकों की एक पीढ़ी तैयार करता है।
- स्थानीय निकायों और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करता है, जिससे प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन और संरक्षण रणनीतियाँ बनती हैं।
नीति और शासन
- पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ अभियान के उद्देश्यों को आगे बढ़ाता है, जो राष्ट्रीय स्तर पर समुद्री संरक्षण पर केंद्रित है।
- जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं के महत्व पर प्रकाश डालता है, जो ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए महत्वपूर्ण है।
- अंतर्राष्ट्रीय तटीय सफाई दिवस जैसे वैश्विक अभियानों के साथ भारत के प्रयासों को संरेखित करता है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर देश की प्रतिबद्धता प्रदर्शित होती है।
चुनौतियाँ
1. समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण
- समुद्र में प्लास्टिक कचरे का बढ़ता स्तर समुद्री जीवन, पारिस्थितिकी तंत्र और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।
- सूक्ष्म प्लास्टिक (microplastics) खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे दीर्घकालिक पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी प्रभाव पड़ते हैं।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण
2. अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना
- समुद्री तटों और तटीय क्षेत्रों से एकत्र किए गए कचरे के प्रभावी प्रसंस्करण और निपटान के लिए पर्याप्त अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाओं की कमी।
- पुनर्चक्रण (recycling) और गैर-पुनर्चक्रण योग्य कचरे के पृथक्करण और उपचार में चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
3. जन जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन
- समुद्री प्रदूषण के कारणों और प्रभावों के बारे में जनता के बीच जागरूकता की कमी, जिससे अनुचित निपटान प्रथाएँ होती हैं।
- एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और स्थायी विकल्पों को अपनाने के लिए व्यवहार परिवर्तन को प्रेरित करने में कठिनाई।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण नैतिकता और जागरूकता
4. अंतर-एजेंसी समन्वय
- समुद्री संरक्षण और अपशिष्ट प्रबंधन में विभिन्न सरकारी एजेंसियों, स्थानीय निकायों और नागरिक समाज संगठनों के बीच प्रभावी समन्वय की आवश्यकता।
- अभियानों की निरंतरता और दीर्घकालिक प्रभावशीलता सुनिश्चित करने में चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| समुद्री प्लास्टिक | समुद्री जीवन को नुकसान, पारिस्थितिकी तंत्र का क्षरण, सूक्ष्म प्लास्टिक का खाद्य श्रृंखला में प्रवेश। |
| अपशिष्ट निपटान | एकत्रित कचरे के लिए पर्याप्त पुनर्चक्रण और सुरक्षित निपटान सुविधाओं की कमी। |
| समुदाय की भागीदारी | अभियानों के बाद भी स्थायी व्यवहार और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता बनाए रखना। |
| कानूनी प्रवर्तन | समुद्री प्रदूषण को रोकने वाले नियमों और कानूनों का कमजोर प्रवर्तन। |
| वित्तीय संसाधन | तटीय सफाई और अपशिष्ट प्रबंधन कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त और निरंतर धन की आवश्यकता। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर अभियान
आगे की राह
- समुद्री प्रदूषण के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने और स्थायी व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान जारी रखना।
- समुद्री तटों और तटीय क्षेत्रों में अपशिष्ट संग्रह, पृथक्करण और पुनर्चक्रण के लिए मजबूत अवसंरचना विकसित करना।
- एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और उनके विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए नीतियों को कड़ाई से लागू करना।
- समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर प्लास्टिक प्रदूषण के प्रभावों का अध्ययन करने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान और निगरानी को मजबूत करना।
- समुद्री संरक्षण प्रयासों में स्थानीय समुदायों, गैर-सरकारी संगठनों और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
- समुद्री प्रदूषण को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना।
- स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में पर्यावरण शिक्षा को शामिल कर युवाओं में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर अभियान · समुद्री प्रदूषण · तटीय पारिस्थितिकी तंत्र · प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन · विश्व ओजोन दिवस · सामुदायिक भागीदारी · सतत पर्यावरणीय कार्यप्रणालियाँ · अपशिष्ट पृथक्करण · पुनर्चक्रण · पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 48A: पर्यावरण का संरक्षण और सुधार
- अनुच्छेद 51A(g): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार
अवधारणा प्रवाह
समुद्री प्रदूषण (विशेषकर प्लास्टिक) → तटीय पारिस्थितिकी तंत्र और समुद्री जीवन को खतरा → समुदाय-संचालित सफाई अभियान (जैसे SSSS 5.0) → कचरा संग्रह और जिम्मेदार निपटान → स्वच्छ समुद्र तट और स्वस्थ समुद्री पर्यावरण → दीर्घकालिक सामुदायिक प्रतिबद्धता और जागरूकता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर’ अभियान का उद्देश्य समुद्री कूड़े को कम करना और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना है।
2. यह अभियान पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तत्वावधान में चलाया जाता है।
3. विश्व ओजोन दिवस प्रतिवर्ष 16 सितंबर को मनाया जाता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 और 2 सही हैं क्योंकि ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर’ अभियान का मुख्य उद्देश्य समुद्री प्रदूषण को कम करना और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को बचाना है, तथा यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की एक पहल है। कथन 3 भी सही है क्योंकि विश्व ओजोन दिवस मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर की याद में प्रतिवर्ष 16 सितंबर को मनाया जाता है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा संस्थान ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर’ अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेता है और पर्यावरण संरक्षण के लिए वैज्ञानिक आउटरीच करता है?
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
- भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM)
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)
- भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII)
उत्तर: भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) — भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर’ अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेता है और समुद्री तथा तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए सामुदायिक सफाई अभियान आयोजित करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ समुद्री प्रदूषण और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन भारत के तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर चुनौतियाँ प्रस्तुत करते हैं। ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर’ जैसे अभियानों के संदर्भ में इन चुनौतियों से निपटने में सामुदायिक भागीदारी और सतत कार्यप्रणालियों के महत्व का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: समुद्री प्रदूषण और प्लास्टिक अपशिष्ट की वर्तमान स्थिति तथा भारत के तटीय क्षेत्रों पर इसके प्रभावों का संक्षिप्त विवरण।
मुख्य भाग:
1. समुद्री प्रदूषण और प्लास्टिक अपशिष्ट से उत्पन्न चुनौतियाँ: पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव, जैव विविधता को खतरा, मानव स्वास्थ्य पर असर।
2. ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर’ अभियान: इसके उद्देश्य, कार्यप्रणाली और अब तक की उपलब्धियाँ।
3. सामुदायिक भागीदारी का महत्व: जन जागरूकता बढ़ाना, जमीनी स्तर पर कार्रवाई को बढ़ावा देना, स्थानीय निकायों के साथ समन्वय। उदाहरण के तौर पर नागांव समुद्र तट पर हुए अभियान का उल्लेख।
4. सतत कार्यप्रणालियाँ: अपशिष्ट पृथक्करण, पुनर्चक्रण, एकल-उपयोग प्लास्टिक का बहिष्कार, दीर्घकालिक पर्यावरणीय जिम्मेदारी को बढ़ावा देना।
5. सरकारी नीतियाँ और पहलें: प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 और अन्य संबंधित योजनाएँ।
निष्कर्ष: इन चुनौतियों से निपटने के लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता, जिसमें सरकारी प्रयासों के साथ-साथ नागरिक समाज और व्यक्तिगत स्तर पर भागीदारी का समन्वय शामिल हो।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Maharashtra PCS (MPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: आईआईटीएम पुणे द्वारा आयोजित ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर 5.0’ अभियान के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- A. यह अभियान विश्व ओजोन दिवस 2026 के अवसर पर महाराष्ट्र के नागांव समुद्र तट पर आयोजित किया गया था।
- B. अभियान का मुख्य उद्देश्य समुद्र तटों पर प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करना और ओजोन परत के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
- C. आईआईटीएम पुणे द्वारा आयोजित यह अभियान केवल महाराष्ट्र राज्य तक सीमित था।
- D. अभियान के दौरान महाराष्ट्र सरकार द्वारा समुद्र तटों पर वृक्षारोपण अभियान भी चलाया गया था।
उत्तर: B. अभियान का मुख्य उद्देश्य समुद्र तटों पर प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करना और ओजोन परत के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। — आईआईटीएम पुणे द्वारा आयोजित ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर 5.0’ अभियान का मुख्य उद्देश्य समुद्र तटों पर प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करना और ओजोन परत के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
Mains: विश्व ओजोन दिवस 2026 के अवसर पर महाराष्ट्र के नागांव समुद्र तट पर आयोजित ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर 5.0’ अभियान के महत्व और इसके महाराष्ट्र राज्य की पर्यावरण नीति तथा तटीय प्रबंधन में योगदान का विश्लेषण कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Anthropology VS PSIR
- Best PSIR optional coaching
- Best PSIR optional coaching online
- Best PSIR optional teacher
- नवीनतम: Nvidia ने AI एजेंटों को नियंत्रित करने के लिए नया सुरक्षा टूल लॉन्च किया - September 29, 2026
- Anthropic Warns AI Could Pose Existential Risks in IPO Filing - September 29, 2026
- भारत-अमेरिका संबंधों में सीमापार आतंकवाद की चिंता क्यों है महत्वपूर्ण? जानिए क्या बोले एस. जयशंकर - September 29, 2026

No Comments