कर्नाटक का डेटा सेंटर नीति: 2031 तक 1 गीगावाट IT लोड का लक्ष्य

Karnataka data centre policy targets 1 GW IT load by 2031 — diagram

कर्नाटक का डेटा सेंटर नीति: 2031 तक 1 गीगावाट IT लोड का लक्ष्य

Data centre componentsIT load1 GW by 2031AI-ready capacityEnergyRenewable focusHigh consumptionCoolingAdvanced systemsWater managementEcosystemInvestment hubJob creationPolicySustainabilityDigital sovereignty
Data centre components

✎ कर्नाटक की नई डेटा सेंटर नीति का लक्ष्य 2031 तक 1 GW IT लोड प्राप्त करना और नवीकरणीय ऊर्जा, उन्नत शीतलन तथा जल प्रबंधन के माध्यम से संधारणीय डिजिटल अवसंरचना को बढ़ावा देना है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण  |  GS Paper II — शासन और नीतियाँ
  • Prelims: डेटा सेंटर, एज सेंटर, केबल लैंडिंग स्टेशन, PUE, WUE, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया
  • Essay: भारत में डिजिटल क्रांति: अवसर और चुनौतियाँ, धारणीय विकास और तकनीकी प्रगति: एक सामंजस्यपूर्ण दृष्टिकोण

त्वरित पुनरावृत्ति: कर्नाटक की नई डेटा सेंटर नीति का लक्ष्य 2031 तक 1 GW IT लोड प्राप्त करना और नवीकरणीय ऊर्जा, उन्नत शीतलन तथा जल प्रबंधन के माध्यम से संधारणीय डिजिटल अवसंरचना को बढ़ावा देना है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

यह खबर चर्चा में क्यों?

कर्नाटक मंत्रिमंडल ने हाल ही में ‘धारणीय डेटा सेंटर नीति 2026-2031’ (Sustainable Data Centre Policy 2026-2031) को मंजूरी दी है। इस पाँच वर्षीय नीति का उद्देश्य राज्य को अगली पीढ़ी के डिजिटल अवसंरचना के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है। यह नीति 2031 तक 1 GW के संचयी डेटा सेंटर IT लोड को प्राप्त करने और भारत की AI-तैयार डेटा सेंटर क्षमता का 10-12 प्रतिशत हिस्सा बनने का लक्ष्य रखती है। इस नीति में संधारणीयता और विकास के बीच संतुलन पर विशेष जोर दिया गया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण डेटा केंद्रों की आवश्यकता में तेजी से वृद्धि हुई है।
  • डेटा केंद्र बड़ी मात्रा में ऊर्जा और पानी का उपभोग करते हैं, जिससे पर्यावरणीय चिंताएँ बढ़ती हैं।
  • कर्नाटक, विशेष रूप से बेंगलुरु, भारत के प्रौद्योगिकी और नवाचार केंद्र के रूप में जाना जाता है, जिसके कारण यहाँ डेटा सेंटर उद्योग के विकास की अपार संभावनाएँ हैं।
  • राज्य सरकार ने पहले ही डेटा केंद्रों के उच्च पानी और बिजली के उपयोग से संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए एक संधारणीय नीति की आवश्यकता महसूस की थी।
  • यह नीति कर्नाटक को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और धारणीय डिजिटल अवसंरचना के लिए एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने का प्रयास करती है।
  • डिजिटल इंडिया (Digital India) और मेक इन इंडिया (Make in India) जैसी केंद्र सरकार की पहलें देश में डिजिटल अवसंरचना के विकास को बढ़ावा दे रही हैं।

डेटा सेंटर क्या हैं और इस नीति की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?

  • डेटा सेंटर एक समर्पित सुविधा है जहाँ कंप्यूटर सिस्टम और संबंधित घटक, जैसे दूरसंचार और डेटा स्टोरेज सिस्टम, रखे जाते हैं। ये इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसंरचना प्रदान करते हैं।
  • ‘धारणीय डेटा सेंटर नीति 2026-2031’ का लक्ष्य 2031 तक 1 GW का संचयी डेटा सेंटर IT लोड प्राप्त करना है।
  • यह नीति निवेश सुविधा प्रदान करती है, जिसमें डेटा सेंटर पार्क, एज सेंटर (Edge Centres), केबल लैंडिंग स्टेशन (Cable Landing Stations) और संबद्ध अवसंरचना शामिल हैं।
  • धारणीयता पर विशेष जोर दिया गया है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) को अपनाना, उन्नत शीतलन प्रौद्योगिकियाँ (Advanced Cooling Technologies), बेहतर जल प्रबंधन और पावर यूसेज इफेक्टिवनेस (PUE) तथा वाटर यूसेज इफेक्टिवनेस (WUE) की निगरानी शामिल है।
  • नीति के तहत धारणीय डेटा सेंटर जोन/पार्क और अनुसंधान एवं नवाचार के लिए उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) स्थापित किए जाएंगे।
  • कर्नाटक इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी सोसाइटी (Karnataka Innovation and Technology Society) पंजीकरण और कार्यान्वयन इंटरफ़ेस के रूप में कार्य करेगी, जबकि कर्नाटक उद्योग मित्र (Karnataka Udyoga Mitra) प्रस्तावों के लिए एकल खिड़की निकासी एजेंसी (Single Window Clearance Agency) होगी।
  • इस नीति का उद्देश्य विकास और संधारणीयता के बीच संतुलन स्थापित करना है, जिससे सही स्थानों पर सही अवसंरचना का निर्माण हो सके।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
1 GW IT लोड का लक्ष्य 2031 तक डेटा सेंटर IT लोड में 1 गीगावाट (GW) की संचयी क्षमता प्राप्त करना, जो भारत की AI-तैयार डेटा सेंटर क्षमता का 10-12% होगा।
सतत विकास पर जोर नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) को अपनाना, उन्नत शीतलन प्रौद्योगिकियों (Advanced Cooling Technologies) का उपयोग, बेहतर जल प्रबंधन (Water Management) और पावर यूसेज इफेक्टिवनेस (PUE) तथा वाटर यूसेज इफेक्टिवनेस (WUE) की निगरानी।
निवेश सुविधा डेटा सेंटर इकोसिस्टम (Data Centre Ecosystem) में निवेश को बढ़ावा देना, जिसमें डेटा सेंटर पार्क (Data Centre Parks), एज सेंटर (Edge Centres), केबल लैंडिंग स्टेशन (Cable Landing Stations) और संबद्ध बुनियादी ढाँचा शामिल है।
उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना अनुसंधान और नवाचार (Research and Innovation) के लिए एक उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) की स्थापना, जिससे राज्य को अगली पीढ़ी के डिजिटल बुनियादी ढाँचे के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सके।
एकल खिड़की निकासी प्रस्तावों के लिए कर्नाटक उद्योग मित्र (Karnataka Udyoga Mitra) को एकल खिड़की निकासी एजेंसी (Single Window Clearance Agency) के रूप में कार्य करना, जिससे अनुमोदन प्रक्रिया सरल और तेज हो।
बजट आवंटन अगले पाँच वर्षों में नीति के कार्यान्वयन के लिए 1,300.45 करोड़ रुपये का संशोधित बजट निर्धारित किया गया है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • यह नीति कर्नाटक को डिजिटल बुनियादी ढाँचे में एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करेगी, जिससे राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।
  • डेटा सेंटर इकोसिस्टम के विकास से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे, विशेष रूप से तकनीकी और संबद्ध क्षेत्रों में।
  • राज्य की AI-तैयार डेटा सेंटर क्षमता में वृद्धि से भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा।

सामरिक महत्व

  • डेटा केंद्रों का विकास डिजिटल संप्रभुता (Digital Sovereignty) और डेटा सुरक्षा (Data Security) के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह देश के भीतर डेटा भंडारण और प्रसंस्करण को सुनिश्चित करता है।
  • यह नीति भारत को वैश्विक डिजिटल आपूर्ति श्रृंखला (Global Digital Supply Chain) में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी, विशेष रूप से डेटा भंडारण और प्रसंस्करण के क्षेत्र में।
  • उन्नत डिजिटल बुनियादी ढाँचा राष्ट्रीय सुरक्षा और महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए आवश्यक है, जिससे डेटा केंद्रों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

पर्यावरणीय महत्व

  • नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने और उन्नत शीतलन प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर जोर देने से डेटा केंद्रों के कार्बन पदचिह्न (Carbon Footprint) को कम करने में मदद मिलेगी।
  • बेहतर जल प्रबंधन और वाटर यूसेज इफेक्टिवनेस (WUE) की निगरानी से पानी की खपत को कम किया जा सकेगा, जो डेटा केंद्रों के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चिंता है।
  • सतत डेटा केंद्र क्षेत्रों/पार्कों की स्थापना से पर्यावरण के अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा मिलेगा और अन्य उद्योगों के लिए एक मॉडल स्थापित होगा।

सामाजिक महत्व

  • बेहतर डिजिटल बुनियादी ढाँचा नागरिकों को डिजिटल सेवाओं तक अधिक पहुँच प्रदान करेगा, जिससे ई-गवर्नेंस (e-Governance) और डिजिटल समावेशन (Digital Inclusion) को बढ़ावा मिलेगा।
  • अनुसंधान और नवाचार के लिए उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना से स्थानीय प्रतिभाओं को बढ़ावा मिलेगा और कौशल विकास के अवसर पैदा होंगे।
  • यह नीति कर्नाटक को एक ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था (Knowledge-Based Economy) के रूप में मजबूत करेगी, जिससे शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में प्रगति होगी।

चुनौतियाँ

1. उच्च ऊर्जा और जल की खपत

  • डेटा केंद्र अत्यधिक ऊर्जा और पानी का उपभोग करते हैं, जिससे पर्यावरणीय स्थिरता (Environmental Sustainability) पर दबाव पड़ता है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाना और कुशल शीतलन तकनीकों को अपनाना एक चुनौती है, जिसके लिए महत्वपूर्ण निवेश और तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।

2. बुनियादी ढाँचे का विकास

  • डेटा सेंटर पार्क, एज सेंटर और केबल लैंडिंग स्टेशन जैसे संबद्ध बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए पर्याप्त भूमि, बिजली और कनेक्टिविटी की आवश्यकता होती है।
  • तेजी से बढ़ते डिजिटल माँगों को पूरा करने के लिए इस बुनियादी ढाँचे को समय पर और कुशल तरीके से विकसित करना एक बड़ी चुनौती है।

3. तकनीकी विशेषज्ञता और कौशल

  • उन्नत डेटा केंद्रों के संचालन और प्रबंधन के लिए उच्च कुशल कार्यबल की आवश्यकता होती है।
  • राज्य में आवश्यक कौशल सेट (Skill Set) वाले पेशेवरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और निरंतर प्रशिक्षण प्रदान करना एक चुनौती है।

4. नियामक और नीतिगत ढाँचा

  • डेटा केंद्रों के लिए एक सुदृढ़ नियामक और नीतिगत ढाँचा (Regulatory and Policy Framework) स्थापित करना महत्वपूर्ण है, जो निवेश को आकर्षित करे और साथ ही पर्यावरणीय तथा सामाजिक मानकों को भी बनाए रखे।
  • विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय और अनुमोदन प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना एक चुनौती हो सकती है।

5. साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता

  • बढ़ते डेटा भंडारण के साथ, साइबर हमलों (Cyber Attacks) और डेटा उल्लंघनों (Data Breaches) का जोखिम बढ़ जाता है, जिससे डेटा सुरक्षा और गोपनीयता (Data Privacy) सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
  • डेटा केंद्रों को मजबूत साइबर सुरक्षा उपायों और डेटा गोपनीयता कानूनों का पालन करना होगा, जो निरंतर विकसित हो रहे हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
ऊर्जा की खपत डेटा केंद्रों द्वारा भारी मात्रा में बिजली की खपत, जिससे ग्रिड पर दबाव और कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि होती है।
जल की खपत शीतलन प्रणालियों के लिए बड़ी मात्रा में पानी का उपयोग, विशेषकर जल-तनाव वाले क्षेत्रों में।
बुनियादी ढाँचा विकास डेटा सेंटर पार्क, एज सेंटर और केबल लैंडिंग स्टेशनों के लिए पर्याप्त भूमि और कनेक्टिविटी की आवश्यकता।
कौशल अंतर उन्नत डेटा केंद्रों के संचालन और प्रबंधन के लिए आवश्यक तकनीकी विशेषज्ञता और कुशल कार्यबल की कमी।
पर्यावरणीय प्रभाव ई-कचरा (e-waste) प्रबंधन और डेटा केंद्रों के निर्माण से होने वाले पर्यावरणीय प्रभाव।
साइबर सुरक्षा डेटा उल्लंघनों और साइबर हमलों से डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

आगे की राह

  • नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों (जैसे सौर और पवन ऊर्जा) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन और सब्सिडी प्रदान करना, जिससे डेटा केंद्रों की ऊर्जा लागत कम हो और कार्बन पदचिह्न घटे।
  • उन्नत शीतलन प्रौद्योगिकियों (जैसे तरल शीतलन) और कुशल जल प्रबंधन प्रणालियों को अपनाने के लिए अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश करना, जिससे पानी की खपत कम हो।
  • डेटा सेंटर इकोसिस्टम के लिए एक मजबूत और स्पष्ट नियामक ढाँचा विकसित करना, जिसमें पर्यावरणीय मानक, डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल और निवेश प्रोत्साहन शामिल हों।
  • स्थानीय शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा देकर डेटा सेंटर प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और AI-तैयार बुनियादी ढाँचे में कौशल विकास कार्यक्रमों को शुरू करना।
  • डेटा सेंटर पार्क और विशेष आर्थिक क्षेत्रों (Special Economic Zones) की स्थापना के लिए भूमि अधिग्रहण और बुनियादी ढाँचे के विकास को सुव्यवस्थित करना, जिससे निवेश के लिए अनुकूल माहौल बने।
  • डेटा गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा उपायों को लागू करना और नियमित सुरक्षा ऑडिट (Security Audits) आयोजित करना।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnerships) को प्रोत्साहित करना ताकि डेटा सेंटर बुनियादी ढाँचे के विकास और संचालन में निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और निवेश का लाभ उठाया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

डेटा सेंटर नीति · डिजिटल अवसंरचना · नवीकरणीय ऊर्जा · सतत विकास · कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) · निवेश प्रोत्साहन · जल प्रबंधन · ऊर्जा दक्षता · सिंगल विंडो क्लीयरेंस · ई-शासन

अवधारणा प्रवाह

कर्नाटक सरकार द्वारा नई डेटा सेंटर नीति की घोषणा  →  1 GW IT लोड और AI-तैयार क्षमता का लक्ष्य  →  नवीकरणीय ऊर्जा, उन्नत शीतलन और जल प्रबंधन पर जोर  →  निवेश सुविधा और उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना  →  राज्य में डिजिटल बुनियादी ढाँचे का विकास  →  आर्थिक संवृद्धि, रोजगार सृजन और पर्यावरणीय स्थिरता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. डेटा सेंटर डिजिटल अवसंरचना के महत्वपूर्ण घटक हैं जो बड़ी मात्रा में डेटा को स्टोर, प्रोसेस और वितरित करते हैं।
2. कर्नाटक की नई डेटा सेंटर नीति का लक्ष्य 2031 तक 1 GW आईटी लोड प्राप्त करना है।
3. डेटा सेंटरों में उच्च ऊर्जा खपत और जल उपयोगिता एक प्रमुख चिंता का विषय है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि डेटा सेंटर आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। कथन 2 सही है क्योंकि कर्नाटक की नीति का मुख्य लक्ष्य 2031 तक 1 GW आईटी लोड हासिल करना है। कथन 3 भी सही है क्योंकि डेटा सेंटरों की उच्च ऊर्जा और जल खपत पर्यावरणीय चिंताओं को बढ़ाती है, जिसे नई नीति में संबोधित किया गया है।

Q2. कर्नाटक की ‘सतत डेटा सेंटर नीति 2026-2031’ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से प्रावधान सही है/हैं?
1. यह नीति मुख्य रूप से राज्य को अगली पीढ़ी के डिजिटल अवसंरचना के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने पर केंद्रित है।
2. नीति में नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने और उन्नत शीतलन प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर जोर दिया गया है।
3. ‘कर्नाटक उद्योग मित्र’ को प्रस्तावों के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस एजेंसी के रूप में कार्य करने के लिए नामित किया गया है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि नीति का प्राथमिक उद्देश्य कर्नाटक को डिजिटल अवसंरचना का वैश्विक केंद्र बनाना है। कथन 2 सही है क्योंकि नीति में नवीकरणीय ऊर्जा, उन्नत शीतलन और जल प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया है। कथन 3 भी सही है क्योंकि ‘कर्नाटक उद्योग मित्र’ को सिंगल विंडो क्लीयरेंस एजेंसी के रूप में नामित किया गया है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ डिजिटल अवसंरचना के विकास में डेटा सेंटरों की भूमिका का परीक्षण कीजिए। कर्नाटक की ‘सतत डेटा सेंटर नीति 2026-2031’ किस प्रकार आर्थिक संवृद्धि और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करती है, चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: डेटा सेंटरों की परिभाषा और आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था में उनकी केंद्रीय भूमिका का संक्षिप्त परिचय।
2. डिजिटल अवसंरचना में डेटा सेंटरों की भूमिका:
– डेटा भंडारण, प्रसंस्करण और वितरण।
– क्लाउड कंप्यूटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी प्रौद्योगिकियों का आधार।
– ई-कॉमर्स, डिजिटल भुगतान और ई-शासन सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण।
– आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन में योगदान।
3. कर्नाटक की ‘सतत डेटा सेंटर नीति 2026-2031’:
– नीति का लक्ष्य (1 GW आईटी लोड, AI-तैयार क्षमता)।
– निवेश प्रोत्साहन (डेटा सेंटर पार्क, एज सेंटर, केबल लैंडिंग स्टेशन)।
– ‘सिंगल विंडो क्लीयरेंस’ तंत्र (कर्नाटक उद्योग मित्र)।
4. आर्थिक संवृद्धि और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन:
– संवृद्धि पक्ष: राज्य को वैश्विक डिजिटल हब बनाना, निवेश आकर्षित करना, रोजगार सृजन।
– स्थिरता पक्ष: नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाना, उन्नत शीतलन प्रौद्योगिकियों का उपयोग, बेहतर जल प्रबंधन, पावर यूसेज इफेक्टिवनेस (PUE) और वाटर यूसेज इफेक्टिवनेस (WUE) की निगरानी।
– सतत डेटा सेंटर जोन/पार्क और उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना।
5. चुनौतियाँ और आगे की राह: भूमि अधिग्रहण, कुशल जनशक्ति, ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता और वित्तीय व्यवहार्यता जैसी चुनौतियों का संक्षिप्त उल्लेख।
6. निष्कर्ष: नीति के महत्व और भारत के डिजिटल भविष्य के लिए इसके निहितार्थों पर एक संतुलित निष्कर्ष।

स्रोत: The Indian Express

Karnataka PCS (KPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: कर्नाटक राज्य द्वारा प्रस्तावित ‘डेटा सेंटर नीति’ के अंतर्गत वर्ष 2031 तक कितने मेगावाट आईटी लोड स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है?

  1. 500 मेगावाट
  2. 1 गीगावाट (1000 मेगावाट)
  3. 1.5 गीगावाट
  4. 2 गीगावाट

उत्तर: 1 गीगावाट (1000 मेगावाट) — कर्नाटक सरकार की ‘डेटा सेंटर नीति’ में वर्ष 2031 तक 1 गीगावाट (1000 मेगावाट) आईटी लोड स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

Mains: कर्नाटक सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘डेटा सेंटर नीति’ के प्रमुख उद्देश्यों एवं इसके राज्य के अर्थव्यवस्था एवं तकनीकी विकास पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


Related guides on our sites

No Comments

Post A Comment