19 Sep ‘नशा मुक्त युवा अभियान’: 100 सप्ताह के राष्ट्रव्यापी अभियान का शुभारंभ, जानिए प्रमुख तथ्य
✎ नशा मुक्त युवा अभियान, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा 'माय भारत-राष्ट्रीय सेवा योजना' (NSS) के सहयोग से शुरू किया गया एक 100-सप्ताह का राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य युवाओं में नशीली दवाओं के दुरुपयोग की…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — सामाजिक सशक्तिकरण, भारतीय समाज पर भूमंडलीकरण का प्रभाव | GS Paper II — स्वास्थ्य, मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा
- Prelims: नशा मुक्त युवा अभियान, राष्ट्रीय संकल्प समारोह, माय भारत-राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, विकसित भारत, नशीली दवाओं का दुरुपयोग
- Essay: नशा मुक्त युवा: विकसित भारत की नींव, भारत में युवा शक्ति और नशीली दवाओं का दुरुपयोग: चुनौतियाँ एवं समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: नशा मुक्त युवा अभियान, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा ‘माय भारत-राष्ट्रीय सेवा योजना’ (NSS) के सहयोग से शुरू किया गया एक 100-सप्ताह का राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य युवाओं में नशीली दवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम और जागरूकता बढ़ाना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने 18 सितंबर 2026 को ‘राष्ट्रीय संकल्प समारोह’ के साथ 100-सप्ताह के ‘नशा मुक्त युवा अभियान’ का शुभारंभ किया। इस देशव्यापी कार्यक्रम में ‘माय भारत-राष्ट्रीय सेवा योजना’ (NSS) के सहयोग से सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के 259 संस्थानों ने भाग लिया, जिसमें 1.47 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने सामूहिक शपथ ग्रहण, हस्ताक्षर अभियान और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से नशा मुक्ति का संकल्प लिया। यह अभियान युवाओं में नशीली दवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम और जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित है।
पृष्ठभूमि
- भारत में नशीली दवाओं का दुरुपयोग एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य समस्या बन गया है, जो विशेष रूप से युवा आबादी को प्रभावित कर रहा है।
- राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, नशीली दवाओं से संबंधित अपराधों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।
- नशीली दवाओं का दुरुपयोग न केवल व्यक्तियों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि परिवारों और समाज पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है, जिससे उत्पादकता में कमी और अपराध दर में वृद्धि होती है।
- सरकार ने ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ जैसे कई कार्यक्रम शुरू किए हैं, जो जागरूकता, उपचार और पुनर्वास पर केंद्रित हैं।
- युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय युवाओं के सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पहल करता रहा है।
- विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक स्वस्थ और उत्पादक युवा आबादी का होना अनिवार्य है, जिसके लिए नशा मुक्ति एक महत्वपूर्ण कदम है।
नशा मुक्त युवा अभियान क्या है?
- यह ‘विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा’ थीम पर आधारित एक 100-सप्ताह का राष्ट्रव्यापी अभियान है, जिसे युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है।
- अभियान का प्राथमिक उद्देश्य युवाओं में नशीली दवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम करना और उनमें जागरूकता बढ़ाना है।
- यह अभियान ‘माय भारत-राष्ट्रीय सेवा योजना’ (NSS) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है, जिसमें देश भर के शिक्षण संस्थान और युवा संगठन शामिल हैं।
- अभियान का पहला चरण ‘मेरा स्वास्थ्य, मेरा गर्व’ पर केंद्रित होगा, जिसके बाद ‘फिट युवा’, ‘नशा-मुक्त युवा’ और ‘जीवन कौशल माह’ जैसी गतिविधियां होंगी।
- इसमें सामूहिक शपथ ग्रहण, हस्ताक्षर अभियान, नुक्कड़ नाटक, चर्चाएं और संगोष्ठियां जैसे विभिन्न माध्यमों से युवाओं को जोड़ा जाएगा।
- अभियान का लक्ष्य युवाओं को स्वस्थ और सकारात्मक विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित करना तथा उन्हें एक जिम्मेदार जीवन शैली अपनाने के लिए मंच प्रदान करना है।
- यह कार्यक्रम सेहत, फिटनेस, जागरूकता और जीवन कौशल से जुड़ी गतिविधियों के ज़रिए युवाओं को सशक्त बनाने पर केंद्रित है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| 100-सप्ताह का अभियान | यह अभियान निरंतरता और दीर्घकालिक प्रभाव पर केंद्रित है, जो एक स्थायी नशा मुक्त समाज के निर्माण में सहायक होगा। |
| युवाओं की व्यापक भागीदारी | देश भर के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों से 1.47 लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी, अभियान को जन आंदोलन का रूप देती है। |
| विविध गतिविधियाँ | शपथ ग्रहण, हस्ताक्षर अभियान, नुक्कड़ नाटक और चर्चाएँ जैसे विविध माध्यम युवाओं को रचनात्मक रूप से जोड़ने में मदद करते हैं। |
| ‘माय भारत-राष्ट्रीय सेवा योजना’ (NSS) का सहयोग | NSS जैसे स्थापित युवा संगठनों का समर्थन अभियान की पहुँच और प्रभावशीलता को बढ़ाता है। |
| रोकथाम पर विशेष ध्यान | अभियान का प्रारंभिक चरण जागरूकता बढ़ाने और स्वस्थ विकल्पों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, जो नशे की लत को रोकने में महत्वपूर्ण है। |
| चरणबद्ध दृष्टिकोण | ‘मेरा स्वास्थ्य, मेरा गर्व’, ‘फिट युवा’, ‘नशा-मुक्त युवा’ और ‘जीवन कौशल माह’ जैसे चरण युवाओं के समग्र विकास को लक्षित करते हैं। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- यह अभियान युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर एक स्वस्थ और जिम्मेदार जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
- युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों में शामिल करके उन्हें समाज के सक्रिय और उत्पादक सदस्य बनने में सहायता मिलती है।
- सामूहिक भागीदारी और शपथ ग्रहण से समुदाय में नशा मुक्ति के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता बढ़ती है।
मानव पूंजी विकास
- नशा मुक्त युवा देश की मानव पूंजी को मजबूत करते हैं, जिससे उनकी उत्पादकता और रचनात्मकता बढ़ती है।
- स्वस्थ युवा बेहतर शिक्षा और कौशल विकास के अवसरों का लाभ उठा सकते हैं, जो देश के आर्थिक विकास में योगदान देगा।
- यह अभियान युवाओं में जीवन कौशल (Life Skills) को बढ़ावा देता है, जिससे वे चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनते हैं।
शासन और नीति का महत्व
- यह अभियान सरकार की युवा-केंद्रित नीतियों और कार्यक्रमों को दर्शाता है, जो युवाओं के कल्याण को प्राथमिकता देते हैं।
- विभिन्न मंत्रालयों और संगठनों के बीच समन्वय से नशा मुक्ति के प्रयासों को बल मिलता है।
- यह ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देता है, क्योंकि स्वस्थ और सशक्त युवा ही राष्ट्र निर्माण का आधार हैं।
चुनौतियाँ
1. नशे की बढ़ती प्रवृत्ति
- युवाओं में विभिन्न प्रकार के नशीले पदार्थों, विशेषकर सिंथेटिक ड्रग्स का बढ़ता प्रचलन एक गंभीर चुनौती है।
- नशे की आसान उपलब्धता और साथियों के दबाव (Peer Pressure) के कारण युवा अक्सर इसकी चपेट में आ जाते हैं।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे: भारतीय समाज पर वैश्वीकरण का प्रभाव
2. जागरूकता और शिक्षा का अभाव
- नशे के दीर्घकालिक स्वास्थ्य और सामाजिक प्रभावों के बारे में युवाओं में पर्याप्त जानकारी का अभाव।
- नशे की लत से बाहर निकलने के लिए उपलब्ध सहायता प्रणालियों और पुनर्वास सुविधाओं के बारे में जानकारी की कमी।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन: शिक्षा और स्वास्थ्य
3. पुनर्वास और उपचार की सुविधाएँ
- देश भर में पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नशा मुक्ति केंद्रों तथा पुनर्वास सुविधाओं की कमी।
- नशे की लत से पीड़ित व्यक्तियों के लिए सामाजिक स्वीकृति और मुख्यधारा में वापसी की चुनौती।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: कमजोर वर्गों का उत्थान
4. कानूनी और प्रवर्तन चुनौतियाँ
- नशीले पदार्थों की तस्करी और वितरण को रोकने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने चुनौतियाँ।
- सीमा पार से होने वाली नशीले पदार्थों की आपूर्ति पर नियंत्रण एक बड़ी समस्या है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा: संगठित अपराध और आतंकवाद
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| नशे की आसान उपलब्धता | नशीले पदार्थों की आसान पहुँच, विशेषकर ऑनलाइन माध्यमों से, युवाओं को इसकी ओर आकर्षित करती है। |
| मानसिक स्वास्थ्य मुद्दे | कई बार युवा मानसिक तनाव, अवसाद या चिंता से निपटने के लिए नशे का सहारा लेते हैं। |
| सामाजिक कलंक | नशे की लत से पीड़ित व्यक्तियों और उनके परिवारों को सामाजिक कलंक (Social Stigma) का सामना करना पड़ता है, जिससे वे मदद मांगने से हिचकिचाते हैं। |
| पारिवारिक विघटन | नशे की लत परिवारों में तनाव, हिंसा और विघटन का कारण बनती है, जिससे बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। |
| आर्थिक बोझ | नशे की लत व्यक्तियों और परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डालती है, जिससे गरीबी और ऋणग्रस्तता बढ़ती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- नशा मुक्त भारत अभियान
- राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS)
आगे की राह
- नशे के खिलाफ जागरूकता अभियानों को निरंतर और प्रभावी बनाना, जिसमें डिजिटल माध्यमों का भी उपयोग किया जाए।
- स्कूल और कॉलेज स्तर पर जीवन कौशल शिक्षा (Life Skills Education) को पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग बनाना, ताकि युवा चुनौतियों का सामना कर सकें।
- नशा मुक्ति केंद्रों और पुनर्वास सुविधाओं की संख्या और गुणवत्ता में सुधार करना, साथ ही उनकी पहुँच को बढ़ाना।
- नशीले पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को और सशक्त बनाना तथा अंतर-राज्यीय समन्वय को मजबूत करना।
- मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाना और युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए सहायता प्रदान करना।
- नशे की लत से उबर चुके व्यक्तियों के लिए सामाजिक पुनर्समायोजन (Social Reintegration) कार्यक्रमों को बढ़ावा देना, ताकि उन्हें मुख्यधारा में वापस लाया जा सके।
- समुदाय-आधारित पहलों को प्रोत्साहित करना और स्थानीय स्तर पर नशा मुक्ति समितियों का गठन करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
नशा मुक्त युवा अभियान · युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय · माय भारत-राष्ट्रीय सेवा योजना · विकसित भारत · जनभागीदारी · जागरूकता अभियान · जीवन कौशल · सामाजिक उत्तरदायित्व
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘राज्य का कर्तव्य: पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊपर उठाना तथा लोक स्वास्थ्य का सुधार करना।’}
अवधारणा प्रवाह
नशे की बढ़ती समस्या → युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव → नशा मुक्त युवा अभियान का शुभारंभ → जागरूकता और रोकथाम पर जोर → स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा → विकसित भारत का निर्माण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘नशा मुक्त युवा अभियान’ का उद्देश्य केवल नशीली दवाओं के सेवन से संबंधित अपराधों को रोकना है।
2. यह अभियान युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा ‘माय भारत-राष्ट्रीय सेवा योजना’ (NSS) के सहयोग से चलाया जा रहा है।
3. ‘राष्ट्रीय संकल्प समारोह’ इस अभियान के 100-सप्ताह के कार्यक्रम का प्रारंभिक चरण था।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि अभियान का उद्देश्य केवल अपराधों को रोकना नहीं, बल्कि जागरूकता बढ़ाना, स्वस्थ विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित करना और युवाओं की भागीदारी को मजबूत करना भी है। कथन 2 सही है क्योंकि यह अभियान युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा ‘माय भारत-राष्ट्रीय सेवा योजना’ (NSS) के सहयोग से चलाया जा रहा है। कथन 3 सही है क्योंकि ‘राष्ट्रीय संकल्प समारोह’ 100-सप्ताह के ‘नशा मुक्त युवा अभियान’ की शुरुआत का प्रतीक है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से ‘नशा मुक्त युवा अभियान’ के ‘रोकथाम’ वाले हिस्से का/के प्रमुख केंद्र बिंदु है/हैं?
1. जागरूकता बढ़ाना
2. स्वस्थ और सकारात्मक विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित करना
3. युवाओं की भागीदारी को मजबूत करना
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — दिए गए समाचार के अनुसार, अभियान के ‘रोकथाम’ वाले हिस्से में जागरूकता बढ़ाने, स्वस्थ और सकारात्मक विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित करने और युवाओं की भागीदारी को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में युवा आबादी के बीच नशीली दवाओं के दुरुपयोग की बढ़ती समस्या को देखते हुए, ‘नशा मुक्त युवा अभियान’ जैसे कार्यक्रमों की प्रासंगिकता और प्रभावशीलता का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संबंध में सरकार द्वारा उठाए गए अन्य प्रमुख कदमों पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत में नशीली दवाओं के दुरुपयोग की समस्या की गंभीरता और युवा आबादी पर इसके प्रभावों का संक्षिप्त विवरण। ‘नशा मुक्त युवा अभियान’ का उल्लेख।
2. ‘नशा मुक्त युवा अभियान’ की प्रासंगिकता: यह कैसे युवाओं को लक्षित करता है, जागरूकता बढ़ाता है, स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देता है और जनभागीदारी सुनिश्चित करता है।
3. अभियान की प्रभावशीलता का समालोचनात्मक परीक्षण: इसकी संभावित सीमाएँ (जैसे केवल जागरूकता पर जोर, निरंतरता की चुनौती, जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन की चुनौतियाँ) और इसे और अधिक प्रभावी बनाने के सुझाव (जैसे पुनर्वास और परामर्श सेवाओं का एकीकरण, कानून प्रवर्तन के साथ समन्वय, दीर्घकालिक रणनीतियाँ)।
4. सरकार द्वारा उठाए गए अन्य प्रमुख कदम: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की भूमिका, ‘नशा मुक्त भारत अभियान’, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की योजनाएँ (जैसे नशा मुक्ति केंद्रों को सहायता), राष्ट्रीय कार्य योजना (National Action Plan) आदि का उल्लेख।
5. निष्कर्ष: एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल, जिसमें रोकथाम, उपचार और पुनर्वास शामिल हो, ताकि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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