22 Sep पेरियार टाइगर रिजर्व में 6 नई प्रजातियाँ खोजी गईं, जानिए क्या हैं विशेषताएँ
✎ पेरियार बाघ अभयारण्य में छह नई प्रजातियों की खोज भारत के समृद्ध जैव विविधता हॉटस्पॉट के महत्व और व्यवस्थित संरक्षण सर्वेक्षणों की आवश्यकता को दर्शाती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण, जैव विविधता, संरक्षण
- Prelims: पेरियार बाघ अभयारण्य, जैव विविधता सर्वेक्षण, गोल्डन-हेडेड सिस्टिकोला, कॉमन ओनिक्स बटरफ्लाई, ओडोनेट प्रजातियाँ, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण
- Essay: भारत में जैव विविधता का संरक्षण: चुनौतियाँ और समाधान, पर्यावरण संतुलन और सतत विकास में बाघ अभयारण्यों की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: पेरियार बाघ अभयारण्य में छह नई प्रजातियों की खोज भारत के समृद्ध जैव विविधता हॉटस्पॉट के महत्व और व्यवस्थित संरक्षण सर्वेक्षणों की आवश्यकता को दर्शाती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केरल के पेरियार बाघ अभयारण्य (Periyar Tiger Reserve) में हाल ही में किए गए चार दिवसीय जीव-जंतु सर्वेक्षण में छह नई प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं। इनमें एक पक्षी, एक तितली और चार ओडोनेट (ड्रैगनफ्लाइज़ और डैम्सेलफ्लाइज़) प्रजातियाँ शामिल हैं, जिन्हें पहले इस अभयारण्य में प्रलेखित नहीं किया गया था। यह खोज अभयारण्य की समृद्ध जैव विविधता और इसके पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित करती है।
पृष्ठभूमि
- पेरियार बाघ अभयारण्य केरल के थेक्कडी में स्थित है और पश्चिमी घाट के एक महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है, जो जैव विविधता हॉटस्पॉट के रूप में जाना जाता है।
- यह अभयारण्य अपनी विविध स्थलाकृति, सदाबहार वनों, घास के मैदानों और संक्रमणकालीन आवासों के लिए प्रसिद्ध है, जो विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों का समर्थन करते हैं।
- सर्वेक्षण में गोल्डन-हेडेड सिस्टिकोला (Cisticola exilis) नामक पक्षी प्रजाति, कॉमन ओनिक्स बटरफ्लाई (Horaga onyx) और चार ओडोनेट प्रजातियाँ (पैराकीट डार्नर, फ्रेज़र क्लबटेल, स्पाइनी हॉर्नटेल, नीलगिरि क्लॉटेल) दर्ज की गईं।
- इस सर्वेक्षण के बाद अभयारण्य में पक्षियों की कुल संख्या 347, तितलियों की 284 और ओडोनेट की 111 हो गई है।
- नियमित रूप से किए जाने वाले ऐसे सर्वेक्षण प्रजातियों के वितरण और आवास उपयोग में होने वाले परिवर्तनों को समझने में मदद करते हैं, जिससे दीर्घकालिक संरक्षण प्रबंधन के लिए एक मजबूत साक्ष्य आधार तैयार होता है।
भारत में जैव विविधता संरक्षण और बाघ अभयारण्य
- भारत विश्व के 17 मेगा-विविधता वाले देशों में से एक है, जहाँ वैश्विक जैव विविधता का लगभग 7-8 प्रतिशत हिस्सा पाया जाता है।
- जैव विविधता संरक्षण का अर्थ है पृथ्वी पर जीवन की विविधता को बनाए रखना, जिसमें विभिन्न प्रकार के पौधे, जानवर, सूक्ष्मजीव और उनके पारिस्थितिकी तंत्र शामिल हैं।
- भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) वन्यजीवों और उनके आवासों के संरक्षण के लिए एक व्यापक कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
- बाघ अभयारण्य (Tiger Reserves) भारत में बाघों और उनके आवासों के संरक्षण के लिए स्थापित विशेष संरक्षित क्षेत्र हैं, जो ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के तहत आते हैं।
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority – NTCA) भारत में बाघ संरक्षण प्रयासों की निगरानी और समन्वय के लिए जिम्मेदार शीर्ष निकाय है।
- बाघ अभयारण्य न केवल बाघों का संरक्षण करते हैं, बल्कि वे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को भी बचाते हैं, जिसमें विभिन्न प्रकार के अन्य जीव और वनस्पतियाँ शामिल हैं, जैसा कि पेरियार में नई प्रजातियों की खोज से स्पष्ट है।
- जैव विविधता सर्वेक्षण और निगरानी संरक्षण रणनीतियों के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे प्रजातियों की स्थिति, उनके आवास की गुणवत्ता और संरक्षण प्रयासों की प्रभावशीलता का आकलन करने में मदद करते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| छह नई प्रजातियों की खोज | पेरियार टाइगर रिजर्व की समृद्ध जैव विविधता को उजागर करता है। |
| गोल्डन-हेडेड सिस्टिकोला (पक्षी) | एक दुर्लभ प्रजाति जो आमतौर पर अधिक ऊंचाई पर पाई जाती है, जो रिजर्व के विविध आवासों को दर्शाती है। |
| कॉमन ओनिक्स बटरफ्लाई | तितली प्रजातियों की सूची में वृद्धि, परागण और पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण। |
| चार ओडोनेट प्रजातियाँ (ड्रैगनफ्लाइज़ और डैमसेल्फ़्लाइज़) | जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य और कीट नियंत्रण में उनकी भूमिका को रेखांकित करता है। |
| नियमित सर्वेक्षण | प्रजातियों के वितरण और आवास के उपयोग में परिवर्तनों को समझने के लिए आवश्यक, दीर्घकालिक संरक्षण प्रबंधन को मजबूत करता है। |
| सहयोगात्मक प्रयास | गैर-सरकारी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और वन विभाग के बीच साझेदारी, संरक्षण में सामूहिक दृष्टिकोण का महत्व। |
महत्व
पर्यावरण और पारिस्थितिकी
- पेरियार टाइगर रिजर्व (Periyar Tiger Reserve – PTR) की अनूठी जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन को उजागर करता है।
- नई प्रजातियों की खोज स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र और अप्रदूषित जल निकायों का प्रमाण है।
- ऊंचाई वाले ढाल, सदाबहार वन, घास के मैदान और इकोटोनल आवासों के महत्व पर प्रकाश डालता है जो विविध वन्यजीवों का समर्थन करते हैं।
संरक्षण और प्रबंधन
- व्यवस्थित जैव विविधता सर्वेक्षणों की आवश्यकता को पुष्ट करता है, विशेष रूप से गहन अध्ययन वाले क्षेत्रों में।
- प्रजातियों के वितरण और आवास के उपयोग में परिवर्तनों को समझने के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य आधार प्रदान करता है, जिससे दीर्घकालिक संरक्षण प्रबंधन मजबूत होता है।
- संरक्षण प्रयासों में विभिन्न हितधारकों (गैर-सरकारी संगठन, अकादमिक संस्थान, वन विभाग) के बीच सहयोगात्मक दृष्टिकोण के महत्व को दर्शाता है।
वैज्ञानिक और अनुसंधान
- जैव विविधता के दस्तावेजीकरण और निगरानी के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करता है।
- भविष्य के वैज्ञानिक अध्ययनों और अनुसंधान के लिए नए रास्ते खोलता है, विशेष रूप से इन नई खोजी गई प्रजातियों के पारिस्थितिक महत्व को समझने के लिए।
- क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर जैव विविधता संरक्षण रणनीतियों को सूचित करने में मदद करता है।
चुनौतियाँ
1. आवास का नुकसान और विखंडन
- मानवीय गतिविधियों जैसे कृषि, शहरीकरण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण वन्यजीव आवासों का सिकुड़ना और खंडित होना।
- यह प्रजातियों के आवागमन को बाधित करता है और उनकी आबादी को अलग-थलग कर देता है, जिससे उनकी भेद्यता बढ़ जाती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी: जैव विविधता संरक्षण
2. जलवायु परिवर्तन
- बदलते मौसम पैटर्न, तापमान में वृद्धि और चरम मौसमी घटनाओं से प्रजातियों के आवास और जीवन चक्र प्रभावित होते हैं।
- यह प्रजातियों के भौगोलिक वितरण को बदल सकता है और कुछ प्रजातियों के विलुप्त होने का कारण बन सकता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी: जलवायु परिवर्तन के प्रभाव
3. अवैध शिकार और वन्यजीव व्यापार
- दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियों का अवैध शिकार और उनके अंगों का व्यापार जैव विविधता के लिए एक गंभीर खतरा है।
- यह प्रजातियों की आबादी को कम करता है और पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बाधित करता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी: वन्यजीव संरक्षण
4. संसाधनों का अत्यधिक दोहन
- वन उत्पादों, जल संसाधनों और भूमि का अनियंत्रित और अत्यधिक दोहन प्राकृतिक आवासों को नष्ट करता है।
- यह पारिस्थितिकी तंत्र की वहन क्षमता को कम करता है और जैव विविधता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी: प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| पर्यावास क्षरण | मानवीय अतिक्रमण और विकास परियोजनाओं के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों का सिकुड़ना और गुणवत्ता में कमी। |
| प्रदूषण | जल निकायों और मिट्टी में रसायनों और अपशिष्टों का जमाव, जो जलीय और स्थलीय प्रजातियों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। |
| आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ | गैर-देशी प्रजातियों का प्रवेश जो स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को बाधित करती हैं और देशी प्रजातियों के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं। |
| पर्याप्त धन और मानव संसाधन | संरक्षण प्रयासों और वैज्ञानिक सर्वेक्षणों के लिए आवश्यक वित्तीय और मानव संसाधनों की कमी। |
| नीति कार्यान्वयन में अंतराल | जैव विविधता संरक्षण से संबंधित नीतियों और कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन में चुनौतियाँ। |
| स्थानीय समुदायों की भागीदारी | संरक्षण प्रयासों में स्थानीय समुदायों को प्रभावी ढंग से शामिल करने और उनके सहयोग को सुरक्षित करने में कठिनाई। |
आगे की राह
- जैव विविधता सर्वेक्षणों को नियमित रूप से और व्यापक रूप से आयोजित करना, विशेष रूप से कम खोजे गए क्षेत्रों में।
- संरक्षण प्रयासों में स्थानीय समुदायों को शामिल करना और उन्हें जैव विविधता के महत्व के बारे में शिक्षित करना।
- पर्यावास बहाली और संरक्षण कार्यक्रमों को मजबूत करना, जिसमें वनीकरण और आर्द्रभूमि का पुनरुद्धार शामिल है।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए अनुकूलन और शमन रणनीतियों को लागू करना।
- अवैध शिकार और वन्यजीव व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए कानून प्रवर्तन को मजबूत करना।
- संरक्षण अनुसंधान और निगरानी के लिए पर्याप्त धन और तकनीकी सहायता सुनिश्चित करना।
- विभिन्न सरकारी विभागों, गैर-सरकारी संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पेरियार बाघ अभयारण्य · जैव विविधता संरक्षण · प्रजाति खोज · पारिस्थितिकी तंत्र स्वास्थ्य · वन्यजीव प्रबंधन · संरक्षण सर्वेक्षण · पश्चिमी घाट · पर्यावास विविधता · पर्यावरण सुरक्षा · जलवायु परिवर्तन अनुकूलन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
नियमित जैव विविधता सर्वेक्षण → नई प्रजातियों की खोज → जैव विविधता का दस्तावेजीकरण → संरक्षण प्रबंधन के लिए साक्ष्य आधार → दीर्घकालिक संरक्षण रणनीतियों का विकास → पारिस्थितिकी तंत्र का स्वास्थ्य और स्थिरता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पेरियार बाघ अभयारण्य केरल में स्थित है और पश्चिमी घाट का हिस्सा है।
2. हाल ही में, इस अभयारण्य में गोल्डन-हेडेड सिस्टिकोला नामक एक नई पक्षी प्रजाति की खोज की गई है।
3. ओडोनेट प्रजातियों में ड्रैगनफ्लाइज़ और डैमसेल्फ़्लाइज़ शामिल हैं।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि पेरियार बाघ अभयारण्य केरल में स्थित है और पश्चिमी घाट के समृद्ध जैव विविधता क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कथन 2 भी सही है क्योंकि गोल्डन-हेडेड सिस्टिकोला हाल ही में पेरियार बाघ अभयारण्य में खोजी गई नई पक्षी प्रजातियों में से एक है। कथन 3 भी सही है क्योंकि ओडोनेट प्रजाति में ड्रैगनफ्लाइज़ और डैमसेल्फ़्लाइज़ दोनों शामिल होते हैं, जो जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण संकेतक हैं।
Q2. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. गोल्डन-हेडेड सिस्टिकोला : पक्षी
2. कॉमन ओनिक्स : तितली
3. पैराकीट डार्नर : स्तनपायी
उपर्युक्त युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — युग्म 1 सही सुमेलित है क्योंकि गोल्डन-हेडेड सिस्टिकोला एक पक्षी प्रजाति है। युग्म 2 भी सही सुमेलित है क्योंकि कॉमन ओनिक्स एक तितली प्रजाति है। युग्म 3 गलत सुमेलित है क्योंकि पैराकीट डार्नर एक ओडोनेट प्रजाति (ड्रैगनफ्लाई) है, न कि स्तनपायी।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में जैव विविधता संरक्षण में संरक्षित क्षेत्रों, विशेषकर बाघ अभयारण्यों, की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। पेरियार बाघ अभयारण्य में हाल ही में खोजी गई नई प्रजातियों के संदर्भ में, ऐसे सर्वेक्षणों के महत्व और उनके दीर्घकालिक संरक्षण प्रबंधन पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारत की समृद्ध जैव विविधता और उसके संरक्षण में संरक्षित क्षेत्रों (Protected Areas) के महत्व का संक्षिप्त परिचय। बाघ अभयारण्यों (Tiger Reserves) को ‘कीस्टोन’ प्रजाति (Keystone Species) बाघ के संरक्षण के माध्यम से व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण के रूप में प्रस्तुत करना।
2. **संरक्षित क्षेत्रों की भूमिका:**
* **आवास संरक्षण:** वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और विखंडन (Fragmentation) से बचाव।
* **प्रजाति संरक्षण:** लुप्तप्राय प्रजातियों (Endangered Species) की रक्षा और उनके प्रजनन के लिए सुरक्षित वातावरण प्रदान करना।
* **पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं:** जल संरक्षण, मृदा संरक्षण, कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration) जैसी पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को बनाए रखना।
* **वैज्ञानिक अनुसंधान:** वन्यजीवों और उनके आवासों पर अध्ययन के लिए मंच प्रदान करना।
* **मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी:** बफर जोन (Buffer Zones) और गलियारों (Corridors) के माध्यम से संघर्ष को कम करना।
3. **पेरियार बाघ अभयारण्य का संदर्भ:**
* हाल ही में खोजी गई छह नई प्रजातियों (पक्षी, तितली, ओडोनेट) का उल्लेख।
* अभयारण्य के उन्नत ढाल, सदाबहार वनों, घास के मैदानों और पारिस्थितिक संक्रमणकालीन आवासों (Ecotonal Habitats) के महत्व पर प्रकाश डालना।
* स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र और प्रदूषण रहित जल निकायों की भूमिका।
4. **जैव विविधता सर्वेक्षणों का महत्व:**
* **प्रजाति वितरण और आवास उपयोग की समझ:** यह समझना कि प्रजातियाँ कैसे वितरित होती हैं और वे विभिन्न आवासों का उपयोग कैसे करती हैं।
* **संरक्षण प्रबंधन के लिए साक्ष्य आधार:** दीर्घकालिक संरक्षण रणनीतियों के लिए विश्वसनीय डेटा प्रदान करना।
* **परिवर्तन का पता लगाना:** जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण या अन्य मानवीय गतिविधियों के कारण प्रजाति वितरण और जनसंख्या में होने वाले परिवर्तनों की निगरानी करना।
* **नई प्रजातियों की पहचान:** अज्ञात या दुर्लभ प्रजातियों की खोज करना, जिससे जैव विविधता सूची में वृद्धि होती है।
* **नीति निर्माण में सहायता:** संरक्षण नीतियों और योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करना।
5. **दीर्घकालिक संरक्षण प्रबंधन पर प्रभाव:**
* **प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का निर्धारण:** संरक्षण प्रयासों के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान करना।
* **अनुकूली प्रबंधन:** सर्वेक्षणों से प्राप्त जानकारी के आधार पर प्रबंधन रणनीतियों को समायोजित करना।
* **सामुदायिक भागीदारी:** स्थानीय समुदायों और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को संरक्षण प्रयासों में शामिल करना।
* **क्षमता निर्माण:** वन विभाग के कर्मचारियों और शोधकर्ताओं के लिए कौशल विकास।
6. **निष्कर्ष:** भारत में जैव विविधता संरक्षण के लिए संरक्षित क्षेत्रों और नियमित सर्वेक्षणों के महत्व को दोहराना, तथा सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) की प्राप्ति में इनकी भूमिका पर बल देना।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Best economics services coaching
- Anthropology VS PSIR
- Best PSIR optional coaching
- Best PSIR optional coaching online
- UKPSC to Recruit Assistant Professors in Uttarakhand Aided Colleges: Draft Policy - September 22, 2026
- हिमाचल में नदियों से रेत-बजरी निकालने पर सरकार ने लगाई रोक, जानिए नए नियम - September 22, 2026
- Himachal Govt Cracks Down on Illegal Sand Mining by Hydropower Firms - September 22, 2026

No Comments