दिल्ली हाईकोर्ट ने बदले ‘वरिष्ठ अधिवक्ता’ के नियम, 100-प्वाइंट प्रणाली हुई खत्म

Delhi High Court changes rules for who gets ‘senior advocate’ tag, 100-point system out — labelled illustration

दिल्ली हाईकोर्ट ने बदले ‘वरिष्ठ अधिवक्ता’ के नियम, 100-प्वाइंट प्रणाली हुई खत्म

✎ दिल्ली उच्च न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम के लिए 100-बिंदु मूल्यांकन प्रणाली को समाप्त कर दिया है, और अब पूर्ण न्यायालय सर्वसम्मति या दो-तिहाई बहुमत से मतदान के माध्यम से निर्णय लेगा, जो उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान, न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्यप्रणाली
  • Prelims: वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम, दिल्ली उच्च न्यायालय, उच्चतम न्यायालय का निर्णय, पूर्ण न्यायालय (Full Court), न्यायिक प्रक्रिया, अधिवक्ता अधिनियम, 1961
  • Essay: भारतीय न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही, न्यायिक सुधारों की आवश्यकता और चुनौतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: दिल्ली उच्च न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम के लिए 100-बिंदु मूल्यांकन प्रणाली को समाप्त कर दिया है, और अब पूर्ण न्यायालय सर्वसम्मति या दो-तिहाई बहुमत से मतदान के माध्यम से निर्णय लेगा, जो उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने हाल ही में ‘वरिष्ठ अधिवक्ता’ (Senior Advocate) पदनाम के लिए अपने नियमों में संशोधन किया है। इन नए नियमों के तहत, पहले से चली आ रही 100-बिंदु मूल्यांकन प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है। अब पूर्ण न्यायालय (Full Court) सर्वसम्मति से या दो-तिहाई बहुमत से मतदान के माध्यम से वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम पर निर्णय लेगा। यह परिवर्तन उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के मई 2025 के एक निर्णय के बाद आया है, जिसमें 100-बिंदु मूल्यांकन प्रणाली की प्रभावकारिता पर सवाल उठाया गया था।

पृष्ठभूमि

  • वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम एक सम्मानजनक उपाधि है जो उन अधिवक्ताओं को दी जाती है जिनके पास विशेष योग्यता, अनुभव और कानूनी ज्ञान होता है। यह पदनाम उन्हें न्यायालय में कुछ विशेष विशेषाधिकार प्रदान करता है।
  • अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (Advocates Act, 1961) की धारा 16 के तहत उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय को अधिवक्ताओं को वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित करने का अधिकार है।
  • पहले, दिल्ली उच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम के लिए एक स्थायी समिति द्वारा 100-बिंदु मूल्यांकन प्रणाली का पालन किया जाता था। इस प्रणाली में प्रकाशनों, अभ्यास के वर्षों और एक साक्षात्कार जैसे विभिन्न पहलुओं पर अंक दिए जाते थे।
  • यह प्रक्रिया 2024 में विवादों में घिर गई थी जब 302 आवेदनों में से केवल 70 को वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किया गया था, और प्रक्रिया को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई थी।
  • उच्चतम न्यायालय ने मई 2025 में अपने निर्णय में 100-बिंदु मूल्यांकन प्रणाली को ‘वांछित उद्देश्यों को प्राप्त नहीं करने’ वाला बताया और इसमें सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।
  • उच्चतम न्यायालय ने फरवरी में नई प्रक्रिया के लिए दिशानिर्देश अधिसूचित किए, जिसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने नियमों में संशोधन किया है।

वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम क्या है और नई प्रक्रिया क्या है?

  • वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम एक प्रतिष्ठित उपाधि है जो भारतीय न्यायपालिका में उन अधिवक्ताओं को प्रदान की जाती है जिन्होंने कानूनी पेशे में असाधारण योग्यता और अनुभव का प्रदर्शन किया है।
  • यह पदनाम अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 16 के तहत दिया जाता है, जो उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय को यह शक्ति प्रदान करता है।
  • वरिष्ठ अधिवक्ताओं को न्यायालय में विशेष सम्मान और कुछ विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, जैसे कि वे किसी अन्य अधिवक्ता के बिना अकेले पेश नहीं हो सकते।
  • पुरानी 100-बिंदु मूल्यांकन प्रणाली में, स्थायी समिति द्वारा विभिन्न मानदंडों पर अंक दिए जाते थे, जिसमें प्रकाशन, अनुभव और साक्षात्कार शामिल थे।
  • नई संशोधित ‘दिल्ली उच्च न्यायालय (वरिष्ठ अधिवक्ता का पदनाम) नियम’ के तहत, 100-बिंदु प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है।
  • अब ‘स्थायी सचिवालय’ (Permanent Secretariat), जो एक रजिस्ट्रार रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में होगा, उम्मीदवारों के बारे में जानकारी और डेटा संकलित करेगा।
  • स्थायी सचिवालय आवेदकों के बारे में विभिन्न हितधारकों, न्यायाधिकरणों के अध्यक्षों और जिला न्यायाधीशों से राय और सुझाव भी आमंत्रित करेगा।
  • संकलित डेटा के आधार पर, नामों को पूर्ण न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा।
  • पूर्ण न्यायालय सर्वसम्मति से या कम से कम दो-तिहाई बहुमत से मतदान के माध्यम से वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम पर निर्णय लेगा।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम प्रक्रिया में बदलाव दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) के पदनाम के लिए 100-पॉइंट मूल्यांकन प्रणाली को समाप्त कर दिया है।
पूर्ण न्यायालय द्वारा निर्णय नई प्रणाली के तहत, पूर्ण न्यायालय (Full Court) सर्वसम्मति या दो-तिहाई बहुमत से मतदान के माध्यम से वरिष्ठ पदनाम का निर्णय करेगा।
स्थायी समिति का उन्मूलन पिछली 100-पॉइंट प्रणाली में शामिल स्थायी समिति (Permanent Committee) को हटा दिया गया है।
स्थायी सचिवालय की भूमिका एक स्थायी सचिवालय (Permanent Secretariat), जो एक रजिस्ट्रार (Registrar) रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में होगा, उम्मीदवारों के बारे में जानकारी और डेटा संकलित करेगा।
सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप यह बदलाव सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के मई 2025 के फैसले के बाद आया है, जिसने पिछली मूल्यांकन प्रक्रिया को ‘वांछित उद्देश्यों को प्राप्त नहीं करने वाला’ बताया था।

महत्व

न्यायिक प्रशासन में सुधार

  • यह परिवर्तन न्यायिक प्रशासन में पारदर्शिता (Transparency) और निष्पक्षता (Fairness) को बढ़ावा देने का प्रयास करता है, विशेष रूप से वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में।
  • यह सुनिश्चित करता है कि पदनाम प्रक्रिया में व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों (Personal Biases) और व्यक्तिपरक मूल्यांकन (Subjective Evaluation) की गुंजाइश कम हो।

वकीलों के लिए समान अवसर

  • नई प्रणाली का उद्देश्य विभिन्न वर्गों के वकीलों और पहली पीढ़ी के अधिवक्ताओं (First Generation Advocates) को समान अवसर प्रदान करके प्रक्रिया को अधिक समावेशी (Inclusive) बनाना है।
  • यह बार (Bar) के सभी सदस्यों के लिए एक स्तरीय खेल का मैदान बनाने में मदद कर सकता है, जिससे योग्यता और अनुभव को अधिक महत्व मिल सके।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन

  • दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले के अनुरूप है, जिसने पिछली 100-पॉइंट प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल उठाया था।
  • यह न्यायिक पदानुक्रम में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के सम्मान और अनुपालन को दर्शाता है।

चुनौतियाँ

1. सर्वसम्मति/बहुमत प्राप्त करना

  • पूर्ण न्यायालय में सर्वसम्मति या दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करना एक चुनौती हो सकती है, खासकर जब बड़ी संख्या में उम्मीदवारों पर विचार किया जा रहा हो।
  • मतदान प्रक्रिया में भी आंतरिक मतभेद और गुटबाजी की संभावना हो सकती है, जिससे निर्णय लेने में देरी हो सकती है।

2. निर्णयों के लिए कारणों का अभाव

  • नई प्रणाली के तहत, पूर्ण न्यायालय को अपने निर्णयों के लिए कारण दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही (Accountability) पर सवाल उठ सकते हैं।
  • कारणों के अभाव में, अस्वीकृत उम्मीदवारों के लिए अपील या समीक्षा का आधार कमजोर हो सकता है।

3. स्थायी सचिवालय की भूमिका

  • स्थायी सचिवालय द्वारा डेटा संकलन और सुझाव आमंत्रित करने की प्रक्रिया में भी व्यक्तिपरकता या पक्षपात की संभावना हो सकती है, यदि दिशानिर्देश स्पष्ट न हों।
  • सचिवालय द्वारा संकलित जानकारी की गुणवत्ता और निष्पक्षता अंतिम निर्णय को प्रभावित कर सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
पूर्ण न्यायालय में निर्णय सर्वसम्मति या दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करने में कठिनाई, आंतरिक मतभेद की संभावना।
निर्णयों के लिए कारणों का अभाव पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी, अस्वीकृत उम्मीदवारों के लिए अपील का कमजोर आधार।
स्थायी सचिवालय की भूमिका डेटा संकलन और सुझावों में व्यक्तिपरकता या पक्षपात की संभावना।
समावेशिता सुनिश्चित करना विभिन्न वर्गों और पहली पीढ़ी के अधिवक्ताओं को समान अवसर देने के प्रयास में वास्तविक सफलता प्राप्त करना।

आगे की राह

  • पूर्ण न्यायालय द्वारा लिए गए निर्णयों के लिए स्पष्ट, हालांकि संक्षिप्त, कारण दर्ज करने पर विचार किया जाना चाहिए ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
  • स्थायी सचिवालय द्वारा डेटा संकलन और हितधारकों से राय लेने के लिए विस्तृत और वस्तुनिष्ठ दिशानिर्देश (Objective Guidelines) तैयार किए जाने चाहिए।
  • वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम प्रक्रिया की नियमित समीक्षा की जानी चाहिए ताकि इसकी प्रभावशीलता और निष्पक्षता का मूल्यांकन किया जा सके।
  • प्रक्रिया को और अधिक समावेशी बनाने के लिए, विशेष रूप से पहली पीढ़ी के अधिवक्ताओं और हाशिए पर पड़े समुदायों के वकीलों के लिए, सक्रिय उपाय किए जाने चाहिए।
  • मतदान प्रक्रिया को यथासंभव वस्तुनिष्ठ और पूर्वाग्रह-मुक्त बनाने के लिए स्पष्ट मानदंड और प्रक्रियाएं स्थापित की जानी चाहिए।
  • वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम के लिए योग्यता और अनुभव के अलावा, नैतिक आचरण (Ethical Conduct) और पेशेवर अखंडता (Professional Integrity) को भी महत्वपूर्ण मानदंड के रूप में शामिल किया जाना चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम · दिल्ली उच्च न्यायालय नियम · न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता · पूर्ण न्यायालय की भूमिका · सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देश · अधिवक्ता अधिनियम, 1961 · न्यायिक स्वतंत्रता · न्यायिक जवाबदेही · अधिवक्ताओं का वर्गीकरण · न्यायिक सुधार

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 124: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति
  • अनुच्छेद 217: उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति
  • अनुच्छेद 142: सर्वोच्च न्यायालय की पूर्ण न्याय करने की शक्ति
  • अनुच्छेद 227: उच्च न्यायालयों की अधीनस्थ न्यायालयों पर अधीक्षण की शक्ति

अवधारणा प्रवाह

सर्वोच्च न्यायालय ने 100-पॉइंट प्रणाली को अवांछित बताया।  →  दिल्ली उच्च न्यायालय ने नियमों में संशोधन किया।  →  स्थायी समिति को समाप्त कर दिया गया।  →  स्थायी सचिवालय डेटा संकलित करेगा।  →  पूर्ण न्यायालय सर्वसम्मति/दो-तिहाई बहुमत से निर्णय लेगा।  →  वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम प्रदान किया जाएगा।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत में वरिष्ठ अधिवक्ता का पदनाम केवल सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किया जा सकता है। 2. अधिवक्ता अधिनियम, 1961 वरिष्ठ अधिवक्ता के पदनाम के लिए नियम बनाने का अधिकार उच्च न्यायालयों को देता है। 3. दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा हाल ही में संशोधित नियमों में 100-बिंदु मूल्यांकन प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है। उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि वरिष्ठ अधिवक्ता का पदनाम सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय दोनों द्वारा किया जा सकता है। कथन 2 सही है क्योंकि अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 16 उच्च न्यायालयों को वरिष्ठ अधिवक्ता के पदनाम के लिए नियम बनाने का अधिकार देती है। कथन 3 सही है क्योंकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपनी नई नियमावली में 100-बिंदु मूल्यांकन प्रणाली को समाप्त कर दिया है।

Q2. अभिकथन (A): दिल्ली उच्च न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम के लिए अपनी नियमावली में संशोधन किया है। कारण (R): सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्ववर्ती 100-बिंदु मूल्यांकन प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल उठाया था।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सत्य है क्योंकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल ही में वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम के लिए अपनी नियमावली में संशोधन किया है। कारण (R) भी सत्य है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने मई 2025 में 100-बिंदु मूल्यांकन प्रणाली को ‘वांछित उद्देश्यों को प्राप्त नहीं करने’ वाला बताया था, जिसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपनी नियमावली में संशोधन किया। इस प्रकार, R, A की सही व्याख्या है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम के नियमों में किए गए परिवर्तनों की पृष्ठभूमि में, भारत में अधिवक्ताओं के वर्गीकरण की प्रक्रिया का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या ये परिवर्तन न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देंगे? (15 अंक)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना: परिचय में वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम और दिल्ली उच्च न्यायालय के हालिया परिवर्तनों का संक्षिप्त उल्लेख करें। अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 16 के तहत वरिष्ठ अधिवक्ता के पदनाम की वैधानिक प्रक्रिया का वर्णन करें। सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों (जैसे इंदिरा जयसिंह बनाम भारत संघ) का उल्लेख करें जिन्होंने इस प्रक्रिया को प्रभावित किया है। पुरानी 100-बिंदु प्रणाली की कमियों और नई प्रणाली (सर्वसम्मति या दो-तिहाई बहुमत) के प्रावधानों की तुलना करें। न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और वस्तुनिष्ठता पर इन परिवर्तनों के संभावित प्रभावों का विश्लेषण करें। प्रथम पीढ़ी के अधिवक्ताओं और विभिन्न वर्गों के सदस्यों को समान अवसर देने के प्रावधानों पर चर्चा करें। निष्कर्ष में, इन सुधारों के महत्व और भविष्य की चुनौतियों पर प्रकाश डालें।

स्रोत: The Indian Express

Delhi PCS (DSSSB) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा ‘वरिष्ठ अधिवक्ता’ पदनाम के लिए लागू किए गए नए 100-अंक प्रणाली में निम्नलिखित में से किस कारक को सर्वाधिक भार दिया गया है?

  1. A. न्यायिक निर्णयों में योगदान
  2. B. कानूनी लेखन एवं प्रकाशन
  3. C. समाज सेवा एवं कानूनी जागरूकता
  4. D. वकालत में अनुभव एवं विशेषज्ञता

उत्तर: D. वकालत में अनुभव एवं विशेषज्ञता — नई प्रणाली में ‘वकालत में अनुभव एवं विशेषज्ञता’ को 100 में से सर्वाधिक 30 अंक दिए गए हैं, जो इस पदनाम के लिए प्रमुख मानदंड बन गया है।

Mains: दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा ‘वरिष्ठ अधिवक्ता’ पदनाम के लिए लागू की गई नई 100-अंक प्रणाली के प्रमुख लाभ एवं चुनौतियाँ क्या हैं? अपने उत्तर में इस प्रणाली के संदर्भ में दिल्ली राज्य लोक सेवा आयोग (DSSSB) के अधीनस्थ सेवाओं में कार्यरत कानूनी पदों (जैसे विधि अधिकारी, कानूनी सहायक) पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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