बेंगलुरु की रक्षा फर्म ने 100 घंटे की उड़ान परीक्षण पूरी की: देश का पहला AI-संचालित लड़ाकू विमान

Bengaluru defence firm’s combat aircraft hits 100-hour flight test milestone — labelled illustration

बेंगलुरु की रक्षा फर्म ने 100 घंटे की उड़ान परीक्षण पूरी की: देश का पहला AI-संचालित लड़ाकू विमान

✎ काल भैरव लाइट भारत का पहला स्वदेशी, AI-संचालित मध्यम ऊंचाई लंबी सहनशक्ति (MALE) स्वायत्त युद्धक विमान है, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और नवाचार का प्रतीक है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS पेपर III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  |  GS पेपर III — आंतरिक सुरक्षा  |  GS पेपर III — अर्थव्यवस्था (रक्षा विनिर्माण)
  • Prelims: काल भैरव लाइट, फ्लाइंग वेज डिफेंस एंड एयरोस्पेस (FWDA), मानवरहित हवाई वाहन (UAV), मध्यम ऊंचाई लंबी सहनशक्ति (MALE), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रक्षा विनिर्माण, आत्मनिर्भर भारत, रक्षा निर्यात
  • Essay: भारत में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और तकनीकी नवाचार का महत्व, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और राष्ट्रीय सुरक्षा: अवसर और चुनौतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: काल भैरव लाइट भारत का पहला स्वदेशी, AI-संचालित मध्यम ऊंचाई लंबी सहनशक्ति (MALE) स्वायत्त युद्धक विमान है, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और नवाचार का प्रतीक है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

बेंगलुरु स्थित रक्षा फर्म फ्लाइंग वेज डिफेंस एंड एयरोस्पेस (FWDA) के स्वदेशी, AI-संचालित मध्यम ऊंचाई लंबी सहनशक्ति (MALE) मानवरहित युद्धक विमान ‘काल भैरव लाइट’ ने 100 घंटे के संचयी उड़ान परीक्षण पूरे कर लिए हैं। यह उपलब्धि भारत के स्वदेशी रक्षा क्षमताओं और मानवरहित हवाई वाहन (UAV) प्रौद्योगिकी में बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाती है।

पृष्ठभूमि

  • FWDA भारत की पहली फर्म है जिसे स्वदेशी मानवरहित हवाई वाहन (UAV) के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से टाइप प्रमाणन प्राप्त हुआ है।
  • भारत सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और नवाचार को बढ़ावा दे रही है, जिसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू विनिर्माण को सशक्त बनाना है।
  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और निजी क्षेत्र दोनों ही मानवरहित प्रणालियों के विकास में सक्रिय रूप से शामिल हैं, जो भविष्य के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
  • हाल के वैश्विक संघर्षों ने रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी AI प्रणालियों के महत्व को रेखांकित किया है, जिससे भारत भी इस क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को मजबूत कर रहा है।
  • भारत सरकार ने रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भी कई नीतियां लागू की हैं, जिससे भारतीय रक्षा कंपनियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिल रहा है।

‘काल भैरव लाइट’ क्या है?

  • ‘काल भैरव लाइट’ भारत का पहला स्वदेशी, AI-संच-चालित मध्यम ऊंचाई लंबी सहनशक्ति (MALE) स्वायत्त युद्धक विमान है।
  • इसे खुफिया, निगरानी और टोही (ISR) मिशनों के साथ-साथ लंबी दूरी के सटीक-हमले वाले लोइटरिंग म्यूनिशन (loitering munition) के रूप में भी कॉन्फ़िगर किया जा सकता है।
  • इसकी डिज़ाइन समुद्री निगरानी और हमले के कार्यों के लिए एक सामान्य जहाज-तैनात करने योग्य प्लेटफॉर्म प्रदान करने के लिए की गई है।
  • यह 1,000 किलोमीटर से अधिक की लक्षित पहुंच और आठ से दस घंटे की सहनशक्ति प्रदान करता है।
  • उड़ान परीक्षणों के दौरान, विमान ने 7-8 मीटर/सेकंड की चढ़ाई दर, 100-120 किमी/घंटा की क्रूज़ गति और 120 मीटर से कम में टेक-ऑफ और लैंडिंग क्षमताओं का प्रदर्शन किया है।
  • FWDA ‘काल भैरव लाइट’ के लिए एक वायवीय-सहायता प्राप्त लॉन्च कॉन्फ़िगरेशन भी विकसित कर रहा है, जिससे इसे जहाजों और दूरस्थ स्थानों से पारंपरिक रनवे बुनियादी ढांचे पर निर्भर किए बिना तैनात किया जा सके।
  • यह भारतीय नौसेना की लंबी दूरी के जहाज- और तट-लॉन्च किए गए लोइटरिंग म्यूनिशन की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता रखता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
100 घंटे की उड़ान परीक्षण स्वदेशी विमान वास्तुकला की व्यापक जांच और विश्वसनीयता का प्रमाण।
AI-संचालित ‘काल भैरव लाइट’ भारत का पहला स्वदेशी, AI-संचालित मध्यम ऊंचाई लंबी सहनशक्ति (MALE) स्वायत्त लड़ाकू विमान।
दोहरी भूमिका सिद्धांत खुफिया, निगरानी और टोही (ISR) मिशन या लंबी दूरी के सटीक-स्ट्राइक लोटेरिंग युद्ध सामग्री के रूप में उपयोग।
1,000 किमी से अधिक की लक्षित पहुंच और 8-10 घंटे की सहनशक्ति समुद्री निगरानी और हमले के कार्यों के लिए एक सामान्य जहाज-तैनात मंच प्रदान करता है।
DGCA-प्रकार प्रमाणन किसी स्वदेशी मानवरहित हवाई वाहन (UAV) के लिए यह प्रमाणन प्राप्त करने वाली पहली भारतीय फर्म।
न्यूमेटिक-असिस्टेड लॉन्च कॉन्फ़िगरेशन पारंपरिक रनवे के बिना जहाजों और दूरस्थ स्थानों से तैनाती में सक्षम।

महत्व

रक्षा आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण

  • यह उपलब्धि भारत की रक्षा क्षमताओं में आत्मनिर्भरता (Self-reliance) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्वदेशी रूप से विकसित AI-संचालित लड़ाकू विमान (Combat aircraft) आयात पर निर्भरता कम करेगा और महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों में देश की क्षमता को मजबूत करेगा।
  • यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को बढ़ावा देता है, जिससे घरेलू रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र (Manufacturing ecosystem) को प्रोत्साहन मिलता है।

सामरिक महत्व

  • ‘काल भैरव लाइट’ जैसे MALE UAVs समुद्री निगरानी (Maritime surveillance), टोही और सटीक-स्ट्राइक क्षमताओं को बढ़ाते हैं, जो भारतीय नौसेना (Indian Navy) की परिचालन आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • यह मंच चुनौतीपूर्ण परिचालन स्थितियों में भी कार्य करने की क्षमता रखता है, जैसा कि बंगाल की खाड़ी और जम्मू-कश्मीर में परीक्षणों से पता चला है, जिससे विभिन्न भूभागों में इसकी उपयोगिता सिद्ध होती है।

आर्थिक और निर्यात क्षमता

  • इस तरह के उन्नत रक्षा उत्पादों का सफल विकास भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजारों में निर्यात के अवसर खोलता है, जैसा कि दक्षिण एशियाई देश से प्राप्त निर्यात ऑर्डर और पुर्तगाल में विनिर्माण इकाई की स्थापना से स्पष्ट है।
  • यह रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान और विकास (Research and Development) को बढ़ावा देता है, जिससे उच्च-कुशल रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।

तकनीकी प्रगति

  • AI-संचालित युद्ध प्रणालियों और अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानन समाधानों पर ध्यान केंद्रित करना भारत को रक्षा प्रौद्योगिकी में अग्रणी देशों में से एक के रूप में स्थापित करता है।
  • DGCA-प्रकार प्रमाणन प्राप्त करना स्वदेशी UAVs के लिए नियामक मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन को दर्शाता है, जो भविष्य के विकास के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।

चुनौतियाँ

1. अनुसंधान और विकास में निवेश

  • उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों के लिए निरंतर और पर्याप्त वित्तीय निवेश की आवश्यकता है।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना और सरकारी वित्त पोषण के साथ तालमेल बिठाना।

2. अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा

  • वैश्विक रक्षा बाजार में स्थापित खिलाड़ियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना।
  • उत्पाद की गुणवत्ता, लागत-प्रभावशीलता और तकनीकी श्रेष्ठता बनाए रखना।

3. विनियामक और प्रमाणन प्रक्रियाएँ

  • रक्षा उत्पादों के लिए कठोर सुरक्षा और प्रदर्शन मानकों को पूरा करना।
  • DGCA जैसे नियामक निकायों से समय पर प्रमाणन प्राप्त करना।

4. मानव संसाधन और कौशल विकास

  • AI, एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और रक्षा प्रौद्योगिकी में कुशल कार्यबल की कमी।
  • इन क्षेत्रों में प्रतिभा को आकर्षित करना और बनाए रखना।

5. साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता

  • AI-संचालित प्रणालियों को साइबर हमलों और डेटा उल्लंघनों से बचाना।
  • संवेदनशील रक्षा डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
तकनीकी जटिलता AI-संचालित प्रणालियों का विकास और एकीकरण उच्च विशेषज्ञता और संसाधनों की मांग करता है।
उत्पादन का पैमाना बड़े पैमाने पर उत्पादन और तैनाती के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और आपूर्ति श्रृंखला का विकास।
निर्यात नियंत्रण दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकियों के निर्यात के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय नियमों और प्रतिबंधों का पालन।
रखरखाव और उन्नयन दीर्घकालिक परिचालन के लिए उन्नत रक्षा प्रणालियों का रखरखाव, मरम्मत और नियमित उन्नयन।
लागत-प्रभावशीलता अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धियों की तुलना में लागत-प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखते हुए उच्च प्रदर्शन प्रदान करना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • मेक इन इंडिया (Make in India)
  • आत्मनिर्भर भारत अभियान (Atmanirbhar Bharat Abhiyan)

आगे की राह

  • रक्षा अनुसंधान और विकास में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) को और मजबूत करना।
  • उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों के लिए एक मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला (Supply chain) और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना।
  • AI, रोबोटिक्स और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में कौशल विकास कार्यक्रमों और अनुसंधान संस्थानों को बढ़ावा देना।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और संयुक्त उद्यमों (Joint ventures) के माध्यम से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology transfer) और विशेषज्ञता साझाकरण को प्रोत्साहित करना।
  • निर्यात को बढ़ावा देने के लिए रक्षा उत्पादों के विपणन और ब्रांडिंग रणनीतियों को मजबूत करना।
  • रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (Defence acquisition process) को सुव्यवस्थित और तेज करना ताकि स्वदेशी नवाचारों को समय पर शामिल किया जा सके।
  • साइबर सुरक्षा उपायों को मजबूत करना और AI-संचालित रक्षा प्रणालियों के लिए नैतिक दिशानिर्देश (Ethical guidelines) स्थापित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

आत्मनिर्भर भारत · रक्षा विनिर्माण · ड्रोन प्रौद्योगिकी · कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) · मेक इन इंडिया · रक्षा निर्यात · सामरिक स्वायत्तता · भारतीय नौसेना · मध्यम ऊंचाई लंबी सहनशक्ति (MALE) · मानव रहित हवाई वाहन (UAV) · रक्षा अनुसंधान एवं विकास · सार्वजनिक-निजी भागीदारी

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 51: अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना
  • अनुच्छेद 246: संघ सूची में रक्षा का विषय

अवधारणा प्रवाह

स्वदेशी रक्षा फर्म द्वारा AI-संचालित लड़ाकू विमान का विकास।  →  100 घंटे के उड़ान परीक्षण मील के पत्थर को प्राप्त करना।  →  DGCA-प्रकार प्रमाणन प्राप्त करना।  →  भारतीय नौसेना की आवश्यकताओं और अंतर्राष्ट्रीय निर्यात के लिए स्थिति।  →  रक्षा आत्मनिर्भरता और सामरिक क्षमताओं में वृद्धि।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. ‘काल भैरव लाइट’ भारत का पहला स्वदेशी, AI-संचालित मध्यम ऊंचाई लंबी सहनशक्ति (MALE) स्वायत्त लड़ाकू विमान है।
2. नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से स्वदेशी मानव रहित हवाई वाहन (UAV) के लिए टाइप प्रमाणन प्राप्त करने वाली फ्लाइंग वेज डिफेंस एंड एयरोस्पेस (FWDA) पहली भारतीय फर्म है।
3. ‘काल भैरव लाइट’ को केवल खुफिया, निगरानी और टोही (ISR) मिशनों के लिए डिज़ाइन किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि ‘काल भैरव लाइट’ वास्तव में भारत का पहला स्वदेशी, AI-संचालित MALE स्वायत्त लड़ाकू विमान है। कथन 2 भी सही है क्योंकि FWDA DGCA से स्वदेशी UAV के लिए टाइप प्रमाणन प्राप्त करने वाली पहली भारतीय फर्म है। कथन 3 गलत है क्योंकि ‘काल भैरव लाइट’ को ISR मिशनों के साथ-साथ लंबी दूरी के सटीक-स्ट्राइक लोइटरिंग म्यूनिशन के रूप में भी कॉन्फ़िगर किया जा सकता है, जो इसे दोहरी भूमिका वाला मंच बनाता है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने का एक प्रमुख उद्देश्य है/हैं?
1. रक्षा आयात पर निर्भरता कम करना।
2. घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षमता को बढ़ाना।
3. रक्षा निर्यात को बढ़ावा देना।
4. अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों का विकास करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण का उद्देश्य रक्षा आयात पर निर्भरता कम करना, घरेलू विनिर्माण क्षमता को बढ़ाना, रक्षा निर्यात को बढ़ावा देना और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों का विकास करना है। ये सभी उद्देश्य भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत के रक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों के विकास में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहलों के महत्व पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत के रक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी का संक्षिप्त परिचय दें, जिसमें हाल के वर्षों में नीतिगत बदलावों और इसके पीछे के कारणों का उल्लेख हो।
2. निजी क्षेत्र की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण:
– सकारात्मक पहलू: नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, रोजगार सृजन, निर्यात क्षमता वृद्धि, लागत-दक्षता, अनुसंधान एवं विकास में निवेश। उदाहरण के तौर पर FWDA जैसी कंपनियों और उनके उत्पादों (जैसे ‘काल भैरव लाइट’) का उल्लेख करें।
– चुनौतियाँ/आलोचनात्मक बिंदु: पूंजी निवेश की कमी, अनुसंधान एवं विकास में जोखिम, सरकारी खरीद प्रक्रियाओं की जटिलता, छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) के लिए बाधाएँ, विदेशी सहयोग पर निर्भरता।
3. ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का महत्व:
– स्वदेशीकरण को बढ़ावा: रक्षा आयात में कमी, घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन।
– प्रौद्योगिकी विकास: AI, ड्रोन, एयरोस्पेस जैसी नई प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता।
– निर्यात क्षमता: वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की स्थिति मजबूत करना।
– रणनीतिक स्वायत्तता: बाहरी निर्भरता कम करके राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करना।
– नीतिगत उपाय: रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP), रक्षा औद्योगिक गलियारे, FDI नीति में ढील।
4. निष्कर्ष: निजी क्षेत्र की भूमिका को संतुलित करते हुए, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सरकार और निजी क्षेत्र के बीच सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दें।

स्रोत: The Indian Express

Karnataka PCS (KPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: बेंगलुरु स्थित किस रक्षा फर्म द्वारा विकसित लड़ाकू विमान ने हाल ही में 100 घंटे की उड़ान परीक्षण उपलब्धि हासिल की है?

  1. A. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL)
  2. B. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL)
  3. C. टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL)
  4. D. अशोक लेलैंड डिफेंस सिस्टम्स

उत्तर: A. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) — हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा विकसित लड़ाकू विमान ने 100 घंटे की उड़ान परीक्षण पूरी की है, जो रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

Mains: बेंगलुरु स्थित रक्षा फर्म द्वारा विकसित लड़ाकू विमान के 100 घंटे के उड़ान परीक्षण सफलता के संदर्भ में, कर्नाटक राज्य में रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के विकास पर प्रकाश डालते हुए, राज्य की अर्थव्यवस्था एवं रोजगार सृजन में इसके योगदान का विश्लेषण कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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