ग्रीनलैंड समझौता: अमेरिका को मिले अतिरिक्त रक्षा क्षेत्र, जानिए पूरा मामला

Greenland deal allows US to establish additional defence areas — diagram

ग्रीनलैंड समझौता: अमेरिका को मिले अतिरिक्त रक्षा क्षेत्र, जानिए पूरा मामला

Map of United States, Denmark, Greenland highlighted on the map of India — ग्रीनलैंड अमेरिका रक्षा समझौता 2026
मानचित्र व माइंड-मैप: अमेरिका-डेनमार्क-ग्रीनलैंड रक्षा समझौता

✎ ग्रीनलैंड समझौता आर्कटिक क्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका की सैन्य उपस्थिति का विस्तार करता है, जबकि ग्रीनलैंड के स्व-निर्धारण और डेनमार्क की संप्रभुता को बनाए रखता है, जो बदलती भू-राजनीतिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS Paper III — सुरक्षा
  • Prelims: ग्रीनलैंड, आर्कटिक क्षेत्र, नाटो (NATO), पिटुफिक स्पेस बेस, स्व-निर्धारण का अधिकार, भू-राजनीति
  • Essay: बदलती वैश्विक व्यवस्था में आर्कटिक क्षेत्र का बढ़ता रणनीतिक महत्व, छोटे राष्ट्रों की संप्रभुता और बड़े शक्तियों के भू-राजनीतिक हित

त्वरित पुनरावृत्ति: ग्रीनलैंड समझौता आर्कटिक क्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका की सैन्य उपस्थिति का विस्तार करता है, जबकि ग्रीनलैंड के स्व-निर्धारण और डेनमार्क की संप्रभुता को बनाए रखता है, जो बदलती भू-राजनीतिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए महत्वपूर्ण है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, संयुक्त राज्य अमेरिका (United States), डेनमार्क (Denmark) और ग्रीनलैंड (Greenland) के नेताओं ने आर्कटिक द्वीप की स्थिति को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता अमेरिका को ग्रीनलैंड में अतिरिक्त रक्षा क्षेत्र स्थापित करने और अपनी सैन्य उपस्थिति का विस्तार करने की अनुमति देता है, जो आर्कटिक क्षेत्र में बदलती सुरक्षा स्थिति के जवाब में किया गया है। यह समझौता ग्रीनलैंड की स्व-निर्धारण के अधिकार और डेनमार्क की क्षेत्रीय अखंडता को भी मान्यता देता है।

पृष्ठभूमि

  • ग्रीनलैंड डेनमार्क साम्राज्य का एक स्वायत्त क्षेत्र है, जो आर्कटिक और अटलांटिक महासागरों के बीच स्थित है।
  • यह दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है और अपने रणनीतिक स्थान के कारण भू-राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
  • आर्कटिक क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फ पिघलने से नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं और प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच आसान हो रही है, जिससे इस क्षेत्र का रणनीतिक महत्व बढ़ गया है।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका की ग्रीनलैंड में लंबे समय से सैन्य उपस्थिति रही है, जिसमें पिटुफिक स्पेस बेस (Pituffik Space Base) भी शामिल है, जो मिसाइल चेतावनी और अंतरिक्ष निगरानी के लिए महत्वपूर्ण है।
  • नाटो (NATO) सदस्य के रूप में, डेनमार्क और अमेरिका आर्कटिक में सुरक्षा हितों को साझा करते हैं, विशेष रूप से रूस और चीन जैसे गैर-नाटो देशों की बढ़ती गतिविधियों के संदर्भ में।
  • यह समझौता पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा व्यक्त करने के बाद कई महीनों की बातचीत का परिणाम है, जिसने क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया था।

ग्रीनलैंड समझौता क्या है?

  • यह समझौता संयुक्त राज्य अमेरिका को ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य उपस्थिति का विस्तार करने और पिटुफिक स्पेस बेस में अपनी गतिविधियों का आधुनिकीकरण व विस्तार करने की अनुमति देता है।
  • अमेरिका ग्रीनलैंड के दक्षिण में नार्सार्सुआक (Narsarsuaq) और पूर्व में मेस्टर्सविग (Mestersvig) में ‘रक्षा क्षेत्र’ स्थापित कर सकता है, साथ ही अतिरिक्त रक्षा क्षेत्र भी स्थापित कर सकता है।
  • समझौता आर्कटिक में बदलती सुरक्षा स्थिति को स्वीकार करता है और भविष्य में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल देता है।
  • यह डेनमार्क साम्राज्य की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की पुष्टि करता है, और ग्रीनलैंडवासियों के ‘स्व-निर्धारण के अधिकार’ को मान्यता देता है।
  • समझौता आर्कटिक में नाटो (NATO) की मजबूत भागीदारी का समर्थन करता है, जिसमें योजना, उपस्थिति, अभ्यास और संयुक्त खुफिया जानकारी जुटाना शामिल है।
  • यह स्पष्ट करता है कि किसी भी गैर-नाटो देश को ग्रीनलैंड में अपने सैन्य प्रतिष्ठान स्थापित करने या सैन्य बलों की स्थायी उपस्थिति रखने की अनुमति नहीं होगी।
  • समझौता ग्रीनलैंड के पर्यावरण और पारंपरिक जीवन शैली की रक्षा की आवश्यकता पर जोर देता है, जिसमें शिकार, मछली पकड़ना और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियाँ शामिल हैं।
  • यदि ग्रीनलैंड भविष्य में डेनमार्क से स्वतंत्र होने का विकल्प चुनता है, तो वह नाटो में बने रहने और इस समझौते के तहत डेनमार्क के अधिकारों और दायित्वों को संभालने पर सहमत होगा।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
अमेरिकी सैन्य उपस्थिति का विस्तार आर्कटिक में अमेरिका की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करता है।
नए रक्षा क्षेत्र स्थापित करने की अनुमति ग्रीनलैंड के विभिन्न हिस्सों में अमेरिकी सैन्य पहुँच और संचालन को बढ़ाता है।
आर्कटिक में बदलती सुरक्षा स्थिति का संदर्भ क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा चिंताओं को दर्शाता है।
डेनमार्क की क्षेत्रीय अखंडता और ग्रीनलैंड के आत्मनिर्णय पर जोर समझौते के तहत संप्रभुता और स्थानीय अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करता है।
आर्कटिक में नाटो की मजबूत भागीदारी का समर्थन नाटो के सामूहिक रक्षा प्रयासों को आर्कटिक क्षेत्र तक विस्तारित करता है।
गैर-नाटो देशों के सैन्य प्रतिष्ठानों पर प्रतिबंध आर्कटिक में नाटो के प्रभाव क्षेत्र को सुरक्षित करता है और बाहरी हस्तक्षेप को रोकता है।

महत्व

भू-रणनीतिक महत्व

  • यह समझौता आर्कटिक क्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका की सैन्य और रणनीतिक उपस्थिति को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाता है।
  • ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति इसे उत्तरी अटलांटिक और आर्कटिक महासागरों में सैन्य अभियानों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाती है।
  • यह आर्कटिक में रूस और चीन जैसे अन्य प्रमुख शक्तियों के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने में मदद करता है।

सुरक्षा और रक्षा

  • समझौता नाटो (NATO) के सदस्य देशों की सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करता है, विशेष रूप से आर्कटिक में।
  • यह अमेरिका को ग्रीनलैंड और अमेरिकी महाद्वीप की रक्षा के लिए ‘गोल्डन डोम रक्षा प्रणाली’ सहित अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने की अनुमति देता है।
  • गैर-नाटो देशों को ग्रीनलैंड में सैन्य प्रतिष्ठान स्थापित करने से रोकने का प्रावधान क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में सहायक है।

अंतर्राष्ट्रीय संबंध

  • यह समझौता अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच राजनयिक संबंधों की मजबूती को दर्शाता है।
  • यह आर्कटिक में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है।
  • समझौता ग्रीनलैंड के भविष्य में संभावित स्वतंत्रता की स्थिति में भी नाटो के साथ उसके संबंधों को परिभाषित करता है।

चुनौतियाँ

1. पर्यावरणीय चिंताएँ

  • बढ़ती सैन्य गतिविधियों से ग्रीनलैंड के प्राचीन पर्यावरण और संवेदनशील आर्कटिक पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • सैन्य अभ्यास और बुनियादी ढांचे के विकास से प्रदूषण और वन्यजीवों के आवासों को नुकसान पहुँचने का जोखिम है।

2. स्थानीय समुदायों पर प्रभाव

  • सैन्य उपस्थिति में वृद्धि से ग्रीनलैंड के स्वदेशी लोगों की पारंपरिक जीवन शैली, शिकार और मछली पकड़ने की गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।
  • स्थानीय संस्कृति और सामाजिक-आर्थिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।

3. भू-राजनीतिक तनाव

  • आर्कटिक में नाटो की मजबूत उपस्थिति से अन्य गैर-नाटो शक्तियों, जैसे रूस और चीन के साथ तनाव बढ़ सकता है।
  • यह क्षेत्र में हथियारों की होड़ को बढ़ावा दे सकता है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है।

4. कानूनी और संप्रभुता के मुद्दे

  • ग्रीनलैंड की भविष्य की स्वतंत्रता की स्थिति में समझौते के प्रावधानों को लागू करना जटिल हो सकता है।
  • डेनमार्क की संप्रभुता और ग्रीनलैंड के आत्मनिर्णय के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
पर्यावरणीय प्रभाव सैन्य विस्तार से आर्कटिक के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को संभावित नुकसान।
स्थानीय जीवन शैली बढ़ती सैन्य गतिविधियों से ग्रीनलैंड के स्वदेशी समुदायों की पारंपरिक जीवन शैली पर असर।
भू-राजनीतिक प्रतिक्रिया आर्कटिक में नाटो की मजबूत उपस्थिति से अन्य शक्तियों के साथ तनाव बढ़ने की संभावना।
दीर्घकालिक स्थिरता समझौते के बिना किसी समाप्ति तिथि के होने और ग्रीनलैंड की स्वतंत्रता की स्थिति में इसके कार्यान्वयन की जटिलता।
संसाधन प्रतिस्पर्धा आर्कटिक में सैन्यीकरण से क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।

आगे की राह

  • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment) को सख्ती से लागू किया जाए ताकि सैन्य गतिविधियों से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
  • स्थानीय समुदायों के साथ नियमित परामर्श और सहयोग सुनिश्चित किया जाए ताकि उनकी चिंताओं को दूर किया जा सके और उनके अधिकारों की रक्षा की जा सके।
  • आर्कटिक में सैन्यीकरण को नियंत्रित करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए अंतर्राष्ट्रीय संवाद और कूटनीति को बढ़ावा दिया जाए।
  • ग्रीनलैंड के आत्मनिर्णय के अधिकार का सम्मान किया जाए और भविष्य में उसकी स्वतंत्रता की स्थिति में समझौते के प्रावधानों को लचीले ढंग से लागू किया जाए।
  • आर्कटिक में वैज्ञानिक अनुसंधान और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अध्ययन को प्राथमिकता दी जाए ताकि क्षेत्र की संवेदनशीलता को बेहतर ढंग से समझा जा सके।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए ताकि सैन्य गतिविधियों के प्रभावों की निगरानी की जा सके और आवश्यक सुधार किए जा सकें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

आर्कटिक क्षेत्र · भू-राजनीति · ग्रीनलैंड समझौता · नाटो · अमेरिकी सैन्य उपस्थिति · सामरिक महत्व · स्व-निर्धारण का अधिकार · अंतर्राष्ट्रीय संबंध · रक्षा सहयोग · ध्रुवीय सुरक्षा

अवधारणा प्रवाह

आर्कटिक में बदलती सुरक्षा स्थिति  →  अमेरिका की सुरक्षा चिंताएँ  →  अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच समझौता  →  ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति का विस्तार  →  आर्कटिक में नाटो की मजबूत भागीदारी  →  क्षेत्रीय भू-राजनीतिक संतुलन पर प्रभाव

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ग्रीनलैंड डेनमार्क के साम्राज्य का एक स्वायत्त क्षेत्र है।
2. हालिया समझौते के तहत, संयुक्त राज्य अमेरिका को ग्रीनलैंड में अतिरिक्त रक्षा क्षेत्र स्थापित करने की अनुमति मिली है।
3. यह समझौता आर्कटिक क्षेत्र में नाटो की भूमिका को मजबूत करने का समर्थन करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है। कथन 2 सही है क्योंकि समझौते के तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने और नए रक्षा क्षेत्र स्थापित करने की अनुमति मिली है। कथन 3 भी सही है क्योंकि यह समझौता आर्कटिक में नाटो की मजबूत भागीदारी का समर्थन करता है।

Q2. कथन (A): आर्कटिक क्षेत्र का भू-राजनीतिक महत्व हाल के वर्षों में बढ़ा है।
कारण (R): आर्कटिक में बर्फ पिघलने से नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं और प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच आसान हो रही है।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — कथन (A) सही है क्योंकि जलवायु परिवर्तन के कारण आर्कटिक का सामरिक और आर्थिक महत्व बढ़ रहा है। कारण (R) भी सही है और यह कथन (A) की सही व्याख्या करता है, क्योंकि नए समुद्री मार्ग और संसाधनों तक पहुंच ही इसके बढ़ते भू-राजनीतिक महत्व का मुख्य कारण है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ आर्कटिक क्षेत्र में बदलती भू-राजनीतिक गतिशीलता के संदर्भ में, ग्रीनलैंड समझौते के सामरिक महत्व का विश्लेषण कीजिए। यह समझौता आर्कटिक सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को कैसे प्रभावित कर सकता है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: आर्कटिक क्षेत्र के बढ़ते भू-राजनीतिक महत्व और ग्रीनलैंड की रणनीतिक स्थिति का संक्षिप्त परिचय।
2. ग्रीनलैंड समझौता: समझौते के प्रमुख प्रावधानों का उल्लेख करें (जैसे अमेरिकी सैन्य उपस्थिति का विस्तार, नए रक्षा क्षेत्र, नाटो की भूमिका)।
3. सामरिक महत्व:
क. आर्कटिक में सैन्य संतुलन: अमेरिका और नाटो की उपस्थिति का विस्तार, रूस और चीन जैसे अन्य प्रमुख खिलाड़ियों के साथ संभावित प्रभाव।
ख. समुद्री मार्ग और संसाधन: आर्कटिक समुद्री मार्गों (जैसे उत्तरी समुद्री मार्ग) की सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण का महत्व।
ग. ध्रुवीय सुरक्षा: जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न नई सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में समझौते की भूमिका।
4. अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर प्रभाव:
क. नाटो की मजबूती: आर्कटिक में नाटो की सामूहिक रक्षा क्षमताओं का सुदृढीकरण।
ख. क्षेत्रीय स्थिरता: आर्कटिक परिषद जैसे मंचों पर सहयोग और प्रतिस्पर्धा का संतुलन।
ग. संप्रभुता और स्व-निर्धारण: डेनमार्क की संप्रभुता और ग्रीनलैंड के स्व-निर्धारण के अधिकार का सम्मान।
5. निष्कर्ष: समझौते के दीर्घकालिक निहितार्थों और आर्कटिक क्षेत्र की भविष्य की भू-राजनीतिक तस्वीर पर इसके संभावित प्रभावों का सारांश।

स्रोत: orissapost.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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