24 Sep अरुणाचल में सियांग मेगा बाँध सर्वेक्षण के लिए कैबिनेट ने किया पैनल का गठन
✎ सियांग ऊपरी बहुउद्देशीय परियोजना अरुणाचल प्रदेश में एक रणनीतिक जलविद्युत परियोजना है, जिसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया है, और इसके सर्वेक्षण के लिए राज्य मंत्रिमंडल ने एक उच्च-स्तरीय समिति को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (भारत का भौतिक भूगोल) | GS Paper II — शासन (सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (ऊर्जा, अवसंरचना), पर्यावरण (पर्यावरण प्रभाव आकलन)
- Prelims: सियांग ऊपरी बहुउद्देशीय परियोजना (SUMP), अरुणाचल प्रदेश, ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली, जलविद्युत परियोजनाएँ, राष्ट्रीय परियोजनाएँ, पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA), यारलुंग त्सांगपो
- Essay: भारत में विकास बनाम विस्थापन: एक संतुलनकारी कार्य, जल सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी परियोजनाओं की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: सियांग ऊपरी बहुउद्देशीय परियोजना अरुणाचल प्रदेश में एक रणनीतिक जलविद्युत परियोजना है, जिसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया है, और इसके सर्वेक्षण के लिए राज्य मंत्रिमंडल ने एक उच्च-स्तरीय समिति को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा, बाढ़ नियंत्रण और क्षेत्रीय विकास है, जबकि स्थानीय चिंताओं को दूर करना भी महत्वपूर्ण है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
अरुणाचल प्रदेश मंत्रिमंडल ने सियांग ऊपरी बहुउद्देशीय परियोजना (Siang Upper Multipurpose Project – SUMP) के लिए पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट सर्वेक्षण और संबंधित गतिविधियों का मार्गदर्शन और समन्वय करने हेतु एक अधिकार प्राप्त उच्च-स्तरीय समिति के गठन को मंजूरी दी है। यह निर्णय ग्रामीणों के विरोध के बीच आया है, जो परियोजना के संभावित प्रभावों को लेकर चिंतित हैं। इस परियोजना का उद्देश्य लगभग 11,000 मेगावाट जलविद्युत उत्पन्न करना है और इसे केंद्र सरकार द्वारा 2008 में एक राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था, जो देश के लिए इसके रणनीतिक महत्व को रेखांकित करता है।
पृष्ठभूमि
- सियांग ऊपरी बहुउद्देशीय परियोजना (SUMP) को 2008 में केंद्र सरकार द्वारा एक राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था।
- इस परियोजना का उद्देश्य जल और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, सियांग-ब्रह्मपुत्र बेसिन में बाढ़ को कम करना, रोजगार सृजित करना और सियांग क्षेत्र के दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक विकास में सहायता करना है।
- ग्रामीणों द्वारा परियोजना की पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने के प्रयासों का विरोध किया जा रहा है, विशेष रूप से सियांग और ऊपरी सियांग जिलों में।
- राज्य मंत्रिमंडल ने ‘गलत सूचना और दुष्प्रचार’ पर चिंता व्यक्त की है और परियोजना प्रभावित परिवारों तथा स्थानीय समुदायों की आवाज़ों, कल्याण और आकांक्षाओं को प्रक्रिया के केंद्र में रखने का संकल्प लिया है।
- केंद्र और राज्य सरकारें इस परियोजना का बचाव कर रही हैं, उनका कहना है कि चीन द्वारा यारलुंग त्सांगपो (Yarlung Tsangpo) पर बनाई जा रही 60,000 मेगावाट की परियोजना का मुकाबला करने के लिए यह आवश्यक है।
- यारलुंग त्सांगपो नदी अरुणाचल प्रदेश में सियांग के रूप में प्रवेश करती है, जो असम में ब्रह्मपुत्र बनाने के लिए दिबांग और लोहित नदियों से मिलती है।
सियांग ऊपरी बहुउद्देशीय परियोजना (SUMP) क्या है?
- यह अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर प्रस्तावित एक विशाल जलविद्युत परियोजना है।
- परियोजना का लक्ष्य अनुमानित 11,000 मेगावाट या उससे अधिक जलविद्युत उत्पन्न करना है।
- केंद्र सरकार ने 2008 में इसे ‘राष्ट्रीय परियोजना’ घोषित किया था, जो इसके रणनीतिक महत्व को दर्शाता है।
- परियोजना के तीन निर्दिष्ट स्थलों में से दो सियांग जिले में और एक ऊपरी सियांग जिले में हैं।
- इसके प्रमुख उद्देश्यों में जल और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना, ब्रह्मपुत्र बेसिन में बाढ़ नियंत्रण, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय विकास शामिल हैं।
- परियोजना के लिए एक पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट (Pre-Feasibility Report) तैयार की जा रही है, जो किसी भी बड़ी परियोजना का प्रारंभिक चरण होता है।
- यह परियोजना चीन द्वारा यारलुंग त्सांगपो पर निर्मित की जा रही परियोजनाओं के जवाब में भारत की जल और ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का एक हिस्सा मानी जाती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| सियांग ऊपरी बहुउद्देशीय परियोजना (Siang Upper Multipurpose Project – SUMP) | अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित एक वृहद जलविद्युत परियोजना, जिसकी अनुमानित क्षमता 11,000 MW है। |
| उच्च-स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति का गठन | परियोजना की पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट (pre-feasibility report) सर्वेक्षण और संबंधित गतिविधियों का मार्गदर्शन व समन्वय करने के लिए। |
| राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा | केंद्र सरकार द्वारा 2008 में SUMP को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया, जो इसकी रणनीतिक महत्ता को दर्शाता है। |
| उद्देश्य | जल एवं ऊर्जा सुरक्षा सुदृढ़ करना, सियांग-ब्रह्मपुत्र बेसिन में बाढ़ नियंत्रण, रोजगार सृजन और क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक विकास। |
| जन-केंद्रित दृष्टिकोण | राज्य सरकार का यह सुनिश्चित करने पर जोर कि सर्वेक्षण पारदर्शी, शांतिपूर्ण और लोगों की भागीदारी से हो। |
महत्व
ऊर्जा सुरक्षा
- 11,000 MW की अनुमानित क्षमता वाली यह परियोजना देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
- जलविद्युत स्वच्छ ऊर्जा का एक स्रोत है, जो जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने में सहायक है।
रणनीतिक महत्व
- यह परियोजना चीन द्वारा यारलुंग त्सांगपो (Yarlung Tsangpo) नदी पर निर्मित की जा रही 60,000 MW की परियोजना का मुकाबला करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
- सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह की बड़ी अवसंरचना परियोजनाएं भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करती हैं।
बाढ़ नियंत्रण और जल प्रबंधन
- सियांग-ब्रह्मपुत्र बेसिन में बाढ़ को कम करने में सहायता कर सकती है, जिससे असम और अरुणाचल प्रदेश के निचले इलाकों में जान-माल के नुकसान को रोका जा सकता है।
- जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित कर सकती है, जो कृषि और अन्य उद्देश्यों के लिए महत्वपूर्ण है।
क्षेत्रीय विकास
- परियोजना से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे, जिससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
- बुनियादी ढांचे के विकास से क्षेत्र का समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास होगा, जिससे जीवन स्तर में सुधार आएगा।
चुनौतियाँ
1. स्थानीय विरोध और विस्थापन
- परियोजना से प्रभावित होने वाले गांवों के निवासियों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
- बड़े बांधों से अक्सर स्थानीय समुदायों का विस्थापन होता है, जिससे उनकी आजीविका और सांस्कृतिक पहचान पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, आपदा प्रबंधन
2. पर्यावरणीय प्रभाव
- बड़े बांधों के निर्माण से पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता और नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
- वनोन्मूलन, जलीय जीवन पर प्रभाव और भूकंपीय गतिविधियों में वृद्धि की आशंकाएं जुड़ी होती हैं।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी, आपदा प्रबंधन
3. अंतर-राज्यीय जल विवाद
- ब्रह्मपुत्र नदी के निचले प्रवाह वाले राज्यों, विशेषकर असम पर परियोजना के संभावित प्रभावों को लेकर चिंताएं उत्पन्न हो सकती हैं।
- जल बंटवारे और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव को लेकर विवाद उत्पन्न हो सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, अंतर-राज्यीय संबंध
4. चीन का नदी पर नियंत्रण
- चीन द्वारा यारलुंग त्सांगपो पर बड़े बांधों का निर्माण भारत के लिए जल सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा करता है।
- ऊपरी प्रवाह में चीन की गतिविधियों से भारत में नदी के जल स्तर और प्रवाह पर असर पड़ सकता है, जिससे भारत की परियोजना की प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, भारत की सुरक्षा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| स्थानीय समुदायों का विरोध | परियोजना से विस्थापन और आजीविका के नुकसान की आशंका। गलत सूचना और दुष्प्रचार का प्रसार। |
| पर्यावरणीय प्रभाव | जैव विविधता, पारिस्थितिकी तंत्र और नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर संभावित नकारात्मक प्रभाव। |
| चीन की गतिविधियां | यारलुंग त्सांगपो पर चीन के बड़े बांधों का निर्माण, जिससे भारत में जल प्रवाह प्रभावित हो सकता है। |
| पारदर्शिता और जनभागीदारी | स्थानीय लोगों की चिंताओं को दूर करने और उन्हें निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने की आवश्यकता। |
आगे की राह
- प्रभावित परिवारों और स्थानीय समुदायों के साथ निरंतर, सार्थक और पारदर्शी संवाद स्थापित करना।
- परियोजना के सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों का व्यापक तथा निष्पक्ष आकलन करना।
- विस्थापन और पुनर्वास के लिए एक न्यायसंगत और प्रभावी नीति तैयार करना, जिसमें प्रभावित लोगों के अधिकारों और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
- परियोजना के लाभों और संभावित जोखिमों के बारे में स्थानीय आबादी को सही और सटीक जानकारी प्रदान करने के लिए जागरूकता अभियान चलाना।
- निचले प्रवाह वाले राज्यों के साथ सहयोग और समन्वय स्थापित करना ताकि अंतर-राज्यीय जल विवादों को टाला जा सके।
- चीन के साथ जल प्रबंधन और सूचना साझाकरण पर द्विपक्षीय तंत्र को मजबूत करने का प्रयास करना।
- परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने के लिए नवीनतम तकनीकों और सर्वोत्तम प्रथाओं का उपयोग करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सियांग ऊपरी बहुउद्देशीय परियोजना · जलविद्युत परियोजनाएँ · पर्यावरणीय प्रभाव आकलन · जनजातीय अधिकार · अंतर्राष्ट्रीय जल विवाद · ब्रह्मपुत्र नदी बेसिन · राष्ट्रीय परियोजनाएँ · सतत विकास · आपदा न्यूनीकरण · ऊर्जा सुरक्षा
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 246’: ‘संघ, राज्य और समवर्ती सूची’}
- {‘अनुच्छेद 262’: ‘अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद’}
- {‘सातवीं अनुसूची’: ‘संघ सूची (जल शक्ति), राज्य सूची (जल)’}
अवधारणा प्रवाह
अरुणाचल प्रदेश मंत्रिमंडल ने सियांग ऊपरी बहुउद्देशीय परियोजना के लिए समिति को मंजूरी दी। → परियोजना का उद्देश्य जलविद्युत उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण और क्षेत्रीय विकास है। → स्थानीय समुदायों द्वारा विस्थापन और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर विरोध। → केंद्र सरकार ने इसे रणनीतिक महत्व की राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया है। → चीन द्वारा यारलुंग त्सांगपो पर बांध निर्माण से भारत की चिंताएं बढ़ी हैं। → परियोजना के लिए पारदर्शी और जन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर। → उच्च-स्तरीय समिति पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट सर्वेक्षण का मार्गदर्शन करेगी।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. सियांग ऊपरी बहुउद्देशीय परियोजना (SUMP) का उद्देश्य अरुणाचल प्रदेश में 11,000 MW से अधिक जलविद्युत उत्पन्न करना है।
2. केंद्र सरकार ने 2008 में SUMP को एक राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया था।
3. यारलुंग त्सांगपो नदी अरुणाचल प्रदेश में सियांग के नाम से प्रवेश करती है और असम में ब्रह्मपुत्र नदी बनाने के लिए दिबांग और लोहित नदियों से मिलती है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि परियोजना का लक्ष्य 11,000 MW से अधिक जलविद्युत उत्पन्न करना है। कथन 2 भी सही है क्योंकि केंद्र सरकार ने 2008 में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया था। कथन 3 भी सही है, यह ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली का एक महत्वपूर्ण भौगोलिक तथ्य है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सियांग ऊपरी बहुउद्देशीय परियोजना के संभावित लाभों का सबसे अच्छा वर्णन करता है?
- यह केवल अरुणाचल प्रदेश के लिए रोजगार सृजित करेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा।
- यह जल और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, ब्रह्मपुत्र बेसिन में बाढ़ को कम करेगा और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में सहायता करेगा।
- इसका प्राथमिक उद्देश्य चीन द्वारा यारलुंग त्सांगपो पर बनाए जा रहे बांध का मुकाबला करना है।
- यह परियोजना केवल क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
उत्तर: यह जल और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, ब्रह्मपुत्र बेसिन में बाढ़ को कम करेगा और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में सहायता करेगा। — विकल्प B परियोजना के बहुआयामी लाभों को सटीक रूप से दर्शाता है, जिसमें जल और ऊर्जा सुरक्षा, बाढ़ न्यूनीकरण और सामाजिक-आर्थिक विकास शामिल हैं, जैसा कि राज्य मंत्रिमंडल ने उल्लेख किया है। अन्य विकल्प आंशिक रूप से सही हो सकते हैं लेकिन परियोजना के समग्र लाभों को पूरी तरह से कवर नहीं करते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। सियांग ऊपरी बहुउद्देशीय परियोजना के संदर्भ में, इन परियोजनाओं से संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** भारत में जलविद्युत परियोजनाओं के महत्व का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **पर्यावरणीय प्रभाव:**
* वनों की कटाई और जैव विविधता का नुकसान (वन संरक्षण अधिनियम, 1980 का उल्लेख)।
* नदी पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव (मछली प्रवास, गाद)।
* जलवायु परिवर्तन और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (जलाशयों से मीथेन)।
* भूकंपीय संवेदनशीलता (हिमालयी क्षेत्र में)।
3. **सामाजिक प्रभाव:**
* विस्थापन और पुनर्वास (भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन अधिनियम, 2013 का उल्लेख)।
* आजीविका का नुकसान (कृषि, मत्स्य पालन)।
* जनजातीय अधिकारों का उल्लंघन (Panchayats (Extension to Scheduled Areas) Act, 1996 – PESA Act, वन अधिकार अधिनियम, 2006 का उल्लेख)।
* स्थानीय समुदायों की सांस्कृतिक पहचान पर प्रभाव।
4. **सियांग ऊपरी बहुउद्देशीय परियोजना के संदर्भ में चिंताओं को दूर करने के लिए कदम:**
* **पारदर्शिता और जन-केंद्रित दृष्टिकोण:** पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट सर्वेक्षण में स्थानीय समुदायों के साथ सार्थक जुड़ाव।
* **पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA):** मजबूत और स्वतंत्र EIA, जिसमें संचयी प्रभाव आकलन शामिल हो।
* **पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन:** प्रभावित परिवारों के लिए उचित और समयबद्ध पुनर्वास पैकेज, जिसमें आजीविका बहाली भी शामिल हो।
* **क्षतिपूर्ति और लाभ-साझाकरण:** परियोजना से प्रभावित समुदायों के साथ लाभ-साझाकरण तंत्र।
* **तकनीकी और भूवैज्ञानिक अध्ययन:** हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए व्यापक भूवैज्ञानिक और भूकंपीय अध्ययन।
* **अंतर्राष्ट्रीय सहयोग:** सीमा पार नदियों के लिए निचले तटवर्ती देशों के साथ सहयोग और डेटा साझाकरण।
* **वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर विचार:** बड़े बांधों के पर्यावरणीय पदचिह्न को कम करने के लिए छोटे जलविद्युत और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा विकल्पों का मूल्यांकन।
5. **निष्कर्ष:** संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता – ऊर्जा सुरक्षा और विकास की आवश्यकता बनाम पर्यावरणीय स्थिरता और सामाजिक न्याय।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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