महाराष्ट्र में त्योहार जुलूसों पर बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पटाखे, लेजर और संगीत पर रोक

High Court bans firecrackers, laser lights and music in festival processions in Maharashtra — diagram

महाराष्ट्र में त्योहार जुलूसों पर बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पटाखे, लेजर और संगीत पर रोक

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Firecracker ban order

✎ बॉम्बे उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र में त्योहारों के जुलूसों में आतिशबाजी, लेजर लाइट और संगीत पर प्रतिबंध लगाकर ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के सख्त अनुपालन पर जोर दिया है, जो नागरिकों के स्वच्छ पर्यावरण के…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान – महत्वपूर्ण प्रावधान, न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्यप्रणाली  |  GS Paper III — पर्यावरण – प्रदूषण और अवक्रमण, पर्यावरण प्रभाव आकलन
  • Prelims: ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000, सुओ मोटो संज्ञान (Suo Motu Cognizance), मौलिक अधिकार – अनुच्छेद 21, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism), डेसिबल मीटर
  • Essay: पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन: न्यायपालिका की भूमिका, नागरिकों के स्वास्थ्य का अधिकार और सार्वजनिक उत्सवों का विनियमन

त्वरित पुनरावृत्ति: बॉम्बे उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र में त्योहारों के जुलूसों में आतिशबाजी, लेजर लाइट और संगीत पर प्रतिबंध लगाकर ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के सख्त अनुपालन पर जोर दिया है, जो नागरिकों के स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार की रक्षा करता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने हाल ही में महाराष्ट्र में त्योहारों के दौरान जुलूसों में आतिशबाजी, लेजर लाइट और संगीत प्रणालियों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है। यह आदेश ध्वनि और वायु प्रदूषण से संबंधित एक स्वतः संज्ञान (suo motu cognisance) मामले के बाद आया है। न्यायालय ने आयोजकों के लिए ₹1 लाख और व्यक्तियों के लिए ₹50,000 की जमा राशि अनिवार्य की है, जिसका उल्लंघन होने पर forfeiture (जब्ती) का प्रावधान है। यह निर्णय सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के प्रति न्यायिक सक्रियता को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में त्योहारों और सार्वजनिक समारोहों के दौरान ध्वनि और वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन गई है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 (Noise Pollution (Regulation and Control) Rules, 2000) ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करते हैं, लेकिन अक्सर इनका उल्लंघन होता है।
  • उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय ने पहले भी विभिन्न अवसरों पर ध्वनि और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्देश जारी किए हैं, जिसमें अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के तहत स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार को शामिल किया गया है।
  • पटाखों से निकलने वाले धुएं की विषाक्तता (toxicity) और वायु गुणवत्ता पर इसके प्रभाव को लेकर कोई विशिष्ट मानदंड नहीं हैं, जिसे न्यायालय ने ‘अनियमित क्षेत्र’ बताया है।
  • न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया है कि त्योहारों के दौरान भी ध्वनि प्रदूषण नियमों का पालन करना आवश्यक है और ये प्रावधान केवल कागजों पर नहीं रहने चाहिए।
  • अधिकारियों को डेसिबल स्तर मापने, अनुमति का आकलन करने और उल्लंघन होने पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें उपकरणों की जब्ती भी शामिल है।

ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000

  • ये नियम पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 (Environment (Protection) Act, 1986) के तहत बनाए गए हैं, जिसका उद्देश्य ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना और विनियमित करना है।
  • ये नियम विभिन्न क्षेत्रों (जैसे औद्योगिक, वाणिज्यिक, आवासीय और शांत क्षेत्र) के लिए दिन और रात के समय ध्वनि के स्वीकार्य डेसिबल स्तर (decibel levels) निर्धारित करते हैं।
  • इन नियमों के तहत, लाउडस्पीकर या सार्वजनिक संबोधन प्रणाली के उपयोग के लिए संबंधित अधिकारियों से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य है।
  • रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच लाउडस्पीकर या किसी भी ध्वनि-उत्पादक उपकरण का उपयोग प्रतिबंधित है, सिवाय बंद परिसरों जैसे सभागार, सामुदायिक हॉल या बैंक्वेट हॉल के।
  • राज्य सरकारें कुछ विशेष अवसरों पर, जैसे कि धार्मिक या सांस्कृतिक त्योहारों के दौरान, रात 10 बजे से 12 बजे तक लाउडस्पीकर के उपयोग की अनुमति दे सकती हैं, लेकिन यह प्रति वर्ष 15 दिनों से अधिक नहीं हो सकता।
  • नियमों का उल्लंघन करने पर पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत दंड का प्रावधान है, जिसमें जुर्माना और कारावास शामिल हो सकता है।
  • पुलिस और अन्य संबंधित अधिकारी इन नियमों को लागू करने और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अधिकृत हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
पटाखों पर प्रतिबंध वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना, सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करना।
लेजर लाइट और संगीत प्रणालियों पर प्रतिबंध ध्वनि प्रदूषण को कम करना और त्योहारों के दौरान शांतिपूर्ण वातावरण सुनिश्चित करना।
आयोजकों के लिए ₹1 लाख और व्यक्तियों के लिए ₹50,000 की जमा राशि नियमों के उल्लंघन पर जवाबदेही तय करना और अनुपालन सुनिश्चित करना।
डेसिबल मीटर लगाना और ध्वनि सीमा प्रदर्शित करना ध्वनि स्तरों की निगरानी करना और निर्धारित सीमाओं का पालन सुनिश्चित करना।
प्राधिकरणों द्वारा डेसिबल स्तरों का मापन और कार्रवाई अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाना और नियमों का प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित करना।

महत्व

पर्यावरण

  • यह आदेश त्योहारों के दौरान होने वाले अत्यधिक ध्वनि और वायु प्रदूषण को कम करने में मदद करेगा, जिससे पर्यावरण की गुणवत्ता में सुधार होगा।
  • पटाखों से निकलने वाले जहरीले धुएं से होने वाले वायु प्रदूषण पर नियंत्रण से नागरिकों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

सामाजिक

  • ध्वनि प्रदूषण में कमी से वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों और रोगियों को राहत मिलेगी, जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
  • यह आदेश त्योहारों को अधिक शांतिपूर्ण और समावेशी बनाने में मदद करेगा, जिससे सभी समुदायों के लोग बिना किसी परेशानी के उत्सव मना सकें।

शासन और कानून का शासन

  • यह न्यायिक सक्रियता का एक उदाहरण है जो यह सुनिश्चित करता है कि कानून और नियम केवल कागजों पर न रहें बल्कि प्रभावी ढंग से लागू हों।
  • जमा राशि और जवाबदेही तय करने के प्रावधान नियमों के उल्लंघन को रोकने और कानून का पालन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

चुनौतियाँ

1. प्रवर्तन की चुनौतियाँ

  • बड़े पैमाने पर त्योहारों और जुलूसों के दौरान प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू करना एक बड़ी चुनौती हो सकती है, खासकर भीड़भाड़ वाले इलाकों में।
  • अधिकारियों को पर्याप्त जनशक्ति और संसाधनों की आवश्यकता होगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि डेसिबल स्तरों की निगरानी की जा सके और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

2. जन जागरूकता और सहयोग

  • जनता के बीच इन प्रतिबंधों के बारे में जागरूकता पैदा करना और उनका सहयोग प्राप्त करना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि बिना जनभागीदारी के कोई भी नियम सफल नहीं हो सकता।
  • कुछ वर्गों द्वारा सांस्कृतिक या धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के रूप में इन प्रतिबंधों का विरोध किया जा सकता है, जिससे सामाजिक तनाव पैदा हो सकता है।

3. तकनीकी और बुनियादी ढाँचागत मुद्दे

  • डेसिबल मीटरों की उपलब्धता, उनके सही अंशांकन और उनके उपयोग के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की आवश्यकता होगी।
  • अवैध ध्वनि प्रणालियों और पटाखों को जब्त करने और संग्रहीत करने के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होगी।

4. न्यायिक समीक्षा और संतुलन

  • न्यायालय को पर्यावरण संरक्षण और नागरिकों के उत्सव मनाने के अधिकार के बीच संतुलन बनाना होगा, ताकि किसी भी अधिकार का अत्यधिक उल्लंघन न हो।
  • भविष्य में ऐसे मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा और उसके प्रभावों पर विचार करना महत्वपूर्ण होगा।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण श्रवण हानि, तनाव, नींद में बाधा और हृदय संबंधी समस्याओं का कारण बनता है।
वायु प्रदूषण (पटाखों से) श्वसन संबंधी बीमारियाँ, आँखों में जलन और समग्र वायु गुणवत्ता में गिरावट।
नियमों का अप्रभावी प्रवर्तन ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 जैसे कानूनों का केवल कागजों पर रहना।
जवाबदेही की कमी आयोजकों और व्यक्तियों द्वारा नियमों के उल्लंघन के लिए कोई स्पष्ट जिम्मेदारी न होना।
सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पटाखों से निकलने वाले जहरीले धुएं और अत्यधिक शोर से नागरिकों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य को खतरा।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 (Noise Pollution (Regulation and Control) Rules, 2000)

आगे की राह

  • जन जागरूकता अभियान चलाए जाएँ ताकि नागरिकों को ध्वनि और वायु प्रदूषण के खतरों और नियमों के महत्व के बारे में शिक्षित किया जा सके।
  • स्थानीय प्रशासन को पर्याप्त जनशक्ति और तकनीकी उपकरण (जैसे डेसिबल मीटर) प्रदान किए जाएँ ताकि नियमों का प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित हो सके।
  • त्योहार आयोजकों और मंडलों के साथ नियमित संवाद स्थापित किया जाए ताकि उन्हें नियमों का पालन करने और पर्यावरण-अनुकूल उत्सव मनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
  • अवैध ध्वनि प्रणालियों और पटाखों के निर्माण और बिक्री पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए।
  • प्रदूषण-मुक्त और कम शोर वाले विकल्पों को बढ़ावा दिया जाए, जैसे कि ग्रीन पटाखे और डिजिटल लेजर शो।
  • नियमों के उल्लंघन के लिए त्वरित और पारदर्शी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि एक निवारक प्रभाव पैदा हो सके।
  • स्थानीय निकायों और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए ताकि प्रवर्तन में कोई कमी न रहे।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

ध्वनि प्रदूषण · वायु प्रदूषण · मौलिक अधिकार · पर्यावरण संरक्षण · न्यायिक सक्रियता · उच्च न्यायालय के निर्देश · शोर प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 · सार्वजनिक स्वास्थ्य · जवाबदेही · सतत विकास

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार (स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार इसमें निहित है)
  • अनुच्छेद 48A: पर्यावरण का संरक्षण और सुधार तथा वन एवं वन्य जीवों की रक्षा (राज्य नीति के निदेशक सिद्धांत)
  • अनुच्छेद 51A(g): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और उसमें सुधार करना (मौलिक कर्तव्य)

अवधारणा प्रवाह

त्योहारों में अत्यधिक ध्वनि और वायु प्रदूषण  →  नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव  →  बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा स्वतः संज्ञान  →  पटाखों, लेजर लाइट और संगीत पर प्रतिबंध का आदेश  →  नियमों का प्रभावी प्रवर्तन और जवाबदेही सुनिश्चित करना  →  पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 केवल जीवन के अधिकार की गारंटी देता है, स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार की नहीं।
2. शोर प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित किए गए हैं।
3. भारत में, उच्च न्यायालयों को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी करने का अधिकार है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार के दायरे में स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार को शामिल किया है। कथन 2 सही है। कथन 3 सही है क्योंकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी करने का अधिकार है।

Q2. अभिकथन (A): महाराष्ट्र में त्योहारों के जुलूसों के दौरान पटाखों, लेजर लाइटों और संगीत पर बॉम्बे उच्च न्यायालय का प्रतिबंध न्यायिक सक्रियता का एक उदाहरण है।
कारण (R): न्यायालय ने नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा के लिए स्वतः संज्ञान लिया और मौजूदा नियमों को लागू करने का निर्देश दिया।

  1. A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दे पर हस्तक्षेप किया है, जो न्यायिक सक्रियता का एक विशिष्ट उदाहरण है। कारण (R) भी सही है और A की सही व्याख्या करता है, क्योंकि न्यायालय का हस्तक्षेप नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा के उद्देश्य से था, और उसने मौजूदा नियमों को लागू करने का निर्देश दिया।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में ध्वनि प्रदूषण के बढ़ते खतरे को देखते हुए, बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा त्योहारों के जुलूसों में पटाखों, लेजर लाइटों और संगीत पर लगाए गए प्रतिबंध के निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, पर्यावरण संरक्षण में न्यायिक सक्रियता की भूमिका पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: ध्वनि और वायु प्रदूषण के बढ़ते खतरे तथा बॉम्बे उच्च न्यायालय के हालिया निर्णय का संक्षिप्त उल्लेख।
2. निर्णय के निहितार्थ (सकारात्मक): सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव (श्रवण हानि, तनाव), पर्यावरण संरक्षण (वायु और ध्वनि प्रदूषण में कमी), नागरिकों के मौलिक अधिकारों का संरक्षण (स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार), जवाबदेही तय करना (आयोजकों पर जुर्माना, डेसिबल मीटर), नियमन का प्रवर्तन।
3. निर्णय के निहितार्थ (संभावित चुनौतियाँ/नकारात्मक): धार्मिक/सांस्कृतिक स्वतंत्रता पर संभावित प्रभाव, प्रवर्तन में चुनौतियाँ, जनता के बीच जागरूकता की कमी, वैकल्पिक समाधानों की आवश्यकता।
4. पर्यावरण संरक्षण में न्यायिक सक्रियता की भूमिका: अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार का विस्तार, ‘पर्यावरण न्यायशास्त्र’ का विकास, महत्वपूर्ण मामलों का उल्लेख (जैसे एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ), कार्यपालिका और विधायिका की निष्क्रियता की स्थिति में न्यायालयों का हस्तक्षेप, ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ और ‘सतत विकास’ जैसे सिद्धांतों का प्रवर्तन।
5. निष्कर्ष: न्यायालय के निर्णय का महत्व, संतुलन बनाने की आवश्यकता (अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण के बीच), सरकार, नागरिक समाज और न्यायपालिका के सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता।

स्रोत: The Hindu

Maharashtra PCS (MPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: महाराष्ट्राच्या उच्च न्यायालयाने राज्यातील उत्सव मिरवणुकांमध्ये खालीलपैकी कोणत्या गोष्टींवर बंदी घातली आहे?

  1. A. फटाके, लेझर लाईट्स आणि संगीत
  2. B. फटाके आणि लेझर लाईट्स पण संगीत नव्हे
  3. C. फक्त लेझर लाईट्स आणि संगीत
  4. D. फक्त फटाके आणि संगीत

उत्तर: A. फटाके, लेझर लाईट्स आणि संगीत — उच्च न्यायालयाने महाराष्ट्रातील उत्सव मिरवणुकांमध्ये फटाके, लेझर लाईट्स आणि संगीतावर पूर्ण बंदी घातली आहे.

Mains: महाराष्ट्रातील उत्सव मिरवणुकांमध्ये उच्च न्यायालयाने फटाके, लेझर लाईट्स आणि संगीतावर बंदी घातली आहे. या निर्णयामागील कारणे आणि त्याचे महाराष्ट्राच्या सांस्कृतिक, पर्यावरणीय आणि सामाजिक जीवनावर होणारे परिणाम यांचे विश्लेषण करा.


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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