24 Sep यूएनजीए81 में भारत: यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज और हेपेटाइटिस उन्मूलन की उपलब्धियां
✎ भारत सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को बढ़ावा देने और हेपेटाइटिस व सिकल सेल रोग जैसे रोगों को खत्म करने के लिए 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर', 'AB-PMJAY' और 'ई-संजीवनी' जैसी पहलों के माध्यम से अपनी स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत कर रहा है…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — स्वास्थ्य, सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय | GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध, महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, एजेंसियां और मंच, उनकी संरचना, अधिदेश
- Prelims: सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC), आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY), आयुष्मान आरोग्य मंदिर, ई-संजीवनी, सिकल सेल रोग उन्मूलन मिशन, राष्ट्रीय हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA)
- Essay: सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज: एक स्वस्थ राष्ट्र की नींव, भारत की डिजिटल स्वास्थ्य क्रांति और वैश्विक स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को बढ़ावा देने और हेपेटाइटिस व सिकल सेल रोग जैसे रोगों को खत्म करने के लिए ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’, ‘AB-PMJAY’ और ‘ई-संजीवनी’ जैसी पहलों के माध्यम से अपनी स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत कर रहा है, जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा में उजागर किया गया।
यह खबर चर्चा में क्यों?
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान, भारत ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (Universal Health Coverage – UHC) को आगे बढ़ाने, हेपेटाइटिस को खत्म करने और सिकल सेल रोग (Sickle Cell Disease – SCD) की देखभाल में हुई अपनी प्रगति को उजागर किया। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने भारत के ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिरों’, ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ (AB-PMJAY) और ‘ई-संजीवनी’ जैसी पहलों को प्रदर्शित किया, जो देश में स्वास्थ्य सेवा वितरण को मजबूत कर रही हैं।
पृष्ठभूमि
- भारत ने ‘वनएससीडी’ (OneSCD) वैश्विक साझेदारी शुरू करने के लिए वैश्विक भागीदारों के साथ हाथ मिलाया है, जिसका उद्देश्य समान और सुलभ सिकल सेल देखभाल को बढ़ावा देना है।
- भारत ने 2047 तक सिकल सेल रोग को खत्म करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके लिए एक व्यापक प्रतिक्रिया रणनीति अपनाई गई है।
- देश में 1.8 लाख से अधिक ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ स्थापित किए गए हैं, जो समुदायों के करीब स्वास्थ्य सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करते हैं।
- 90 करोड़ से अधिक नागरिकों के पास अब ‘यूनिक हेल्थ आइडेंटिटी’ (Unique Health Identity) है, जो भारत के बढ़ते डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है।
- ई-संजीवनी मंच के माध्यम से 49.7 करोड़ से अधिक टेली-कंसल्टेशन (Tele-consultation) किए गए हैं, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ी है।
- भारत ने ‘निशुल्क दवा और डायग्नोस्टिक्स सेवा पहल’ और ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम’ जैसी पहलों के माध्यम से मरीजों पर आर्थिक बोझ कम करने और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर बनाने पर जोर दिया है।
सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) और भारत के प्रयास
- सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) का अर्थ है कि सभी लोगों को बिना किसी वित्तीय कठिनाई के आवश्यक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्राप्त हो। इसमें स्वास्थ्य संवर्धन, रोकथाम, उपचार, पुनर्वास और उपशामक देखभाल शामिल है।
- भारत का दृष्टिकोण ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिरों’ के माध्यम से व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा को रेफरल लिंक के साथ सेकेंडरी (Secondary) और टर्शियरी (Tertiary) केयर से जोड़ता है।
- आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्रजनन और बाल स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोगों की जांच और प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य, बुजुर्गों और उपशामक देखभाल सहित विभिन्न सेवाएं प्रदान करते हैं।
- आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) एक सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित स्वास्थ्य आश्वासन योजना है जो समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के लिए वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करती है।
- भारत का डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र, जिसमें ‘यूनिक हेल्थ आइडेंटिटी’, डिजिटल रजिस्ट्री और ‘आभा-इनेबल्ड हेल्थ रिकॉर्ड’ शामिल हैं, देखभाल की निरंतरता को मजबूत करने और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाने में मदद कर रहा है।
- ई-संजीवनी जैसी टेलीमेडिसिन (Telemedicine) पहल भौगोलिक बाधाओं को दूर करती है और दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाती है।
- भारत ने 2030 तक हेपेटाइटिस को खत्म करने और 2047 तक सिकल सेल रोग को खत्म करने का लक्ष्य रखा है, जो वैश्विक स्वास्थ्य लक्ष्यों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| आयुष्मान आरोग्य मंदिर | समुदायों के करीब व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करते हैं, जिनमें प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोगों की जाँच, मानसिक स्वास्थ्य आदि शामिल हैं। |
| आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) | कमजोर और वंचित वर्गों के लिए वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करती है, जिससे उन्हें आर्थिक तंगी के बिना स्वास्थ्य सेवाएँ मिल सकें। |
| डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम | 90 करोड़ से अधिक यूनिक हेल्थ आईडी, इंटरऑपरेबल डिजिटल रजिस्ट्री और आभा-सक्षम हेल्थ रिकॉर्ड के माध्यम से देखभाल की निरंतरता और पहुँच को सुगम बनाता है। |
| ई-संजीवनी | 49.7 करोड़ से अधिक टेली-कंसल्टेशन की सुविधा प्रदान कर भौगोलिक बाधाओं को दूर करती है और दूरदराज के क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाती है। |
| निशुल्क दवा और डायग्नोस्टिक्स सेवा पहल | मरीजों पर आर्थिक बोझ कम करती है और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बेहतर बनाती है। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करके और सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा को सुलभ और किफायती बनाकर सामाजिक समानता को बढ़ावा देना।
- कमजोर और वंचित वर्गों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करके स्वास्थ्य संबंधी खर्चों के कारण होने वाली गरीबी को कम करना।
- मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने तथा गैर-संचारी रोगों के प्रबंधन में सुधार करके समग्र सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाना।
आर्थिक महत्व
- स्वास्थ्य देखभाल पर होने वाले जेब खर्च को कम करके परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना, जिससे उनकी बचत और उत्पादकता में वृद्धि हो।
- स्वस्थ कार्यबल के निर्माण में योगदान देना, जो अंततः देश की आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) और विकास को गति देता है।
- डिजिटल स्वास्थ्य समाधानों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा वितरण की दक्षता में सुधार करना, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।
अंतर्राष्ट्रीय संबंध
- वैश्विक स्वास्थ्य मंचों पर भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को मजबूत करना, विशेषकर यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (Universal Health Coverage – UHC) और हेपेटाइटिस उन्मूलन जैसे क्षेत्रों में।
- सिकल सेल रोग (Sickle Cell Disease – SCD) जैसी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देना।
- संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals – SDGs) को प्राप्त करने की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करना।
चुनौतियाँ
1. स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच में असमानता
- ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं और योग्य कर्मियों की कमी।
- शहरी और ग्रामीण आबादी के बीच स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता और उपलब्धता में अंतर।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: स्वास्थ्य
2. स्वास्थ्य सेवा का वित्तपोषण
- स्वास्थ्य पर सार्वजनिक व्यय का अपर्याप्त स्तर।
- जनसंख्या के बड़े हिस्से के लिए जेब से होने वाले खर्च का उच्च बोझ।
यूपीएससी लिंक: शासन: स्वास्थ्य नीतियाँ
3. मानव संसाधन की कमी
- डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता में कमी, विशेषकर विशेषज्ञ डॉक्टरों की।
- स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन: स्वास्थ्य क्षेत्र
4. बुनियादी ढाँचा और प्रौद्योगिकी
- स्वास्थ्य सुविधाओं में आधुनिक उपकरणों और बुनियादी ढाँचे की कमी।
- डिजिटल स्वास्थ्य समाधानों को अपनाने में तकनीकी साक्षरता और कनेक्टिविटी संबंधी बाधाएँ।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: स्वास्थ्य में अनुप्रयोग
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा का सुदृढ़ीकरण | आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की संख्या में वृद्धि के बावजूद, उनकी गुणवत्ता और सेवाओं की व्यापकता सुनिश्चित करना एक चुनौती है। |
| वित्तीय सुरक्षा का विस्तार | AB-PMJAY द्वारा कवर न की गई आबादी के लिए स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना। |
| डिजिटल स्वास्थ्य का समावेशी उपयोग | डिजिटल डिवाइड को पाटना और यह सुनिश्चित करना कि ग्रामीण और कम साक्षर आबादी भी डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सके। |
| रोगों का उन्मूलन | 2030 तक हेपेटाइटिस और 2047 तक सिकल सेल रोग को खत्म करने के लिए व्यापक और सतत प्रयासों की आवश्यकता। |
| स्वास्थ्य प्रणाली की क्षमता | बढ़ती जनसंख्या और उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने के लिए स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे और मानव संसाधन को बढ़ाना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY)
- आयुष्मान आरोग्य मंदिर
- ई-संजीवनी
- निशुल्क दवा और डायग्नोस्टिक्स सेवा पहल
- प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम
आगे की राह
- प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के नेटवर्क का विस्तार और उनकी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना।
- स्वास्थ्य पर सार्वजनिक व्यय को बढ़ाना और जेब से होने वाले खर्च को कम करने के लिए वित्तीय सुरक्षा तंत्रों को और मजबूत करना।
- डिजिटल स्वास्थ्य समाधानों की पहुँच और उपयोग को बढ़ाने के लिए डिजिटल साक्षरता और कनेक्टिविटी में सुधार करना, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
- स्वास्थ्य कर्मियों की कमी को दूर करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार करना और ग्रामीण तथा दूरदराज के क्षेत्रों में उनकी तैनाती को प्रोत्साहित करना।
- हेपेटाइटिस और सिकल सेल रोग जैसे विशिष्ट रोगों के उन्मूलन के लिए लक्षित कार्यक्रमों और अनुसंधान को बढ़ावा देना।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) को प्रोत्साहित करना ताकि स्वास्थ्य सेवा वितरण में नवाचार और दक्षता लाई जा सके।
- स्वास्थ्य डेटा के संग्रह, विश्लेषण और उपयोग में सुधार करना ताकि साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा मिल सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज · आयुष्मान आरोग्य मंदिर · आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना · डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र · ई-संजीवनी · हेपेटाइटिस उन्मूलन · सिकल सेल रोग · वनएससीडी वैश्विक साझेदारी · प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा · संयुक्त राष्ट्र महासभा
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषाहार स्तर और जीवन स्तर में सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
भारत द्वारा वैश्विक मंचों पर स्वास्थ्य प्रगति का प्रदर्शन → यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के लिए घरेलू पहलों पर जोर → आयुष्मान आरोग्य मंदिर, AB-PMJAY, ई-संजीवनी का सफल कार्यान्वयन → स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच और वित्तीय सुरक्षा में सुधार → जनसंख्या के स्वास्थ्य परिणामों में सकारात्मक प्रभाव
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आयुष्मान आरोग्य मंदिर व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करते हैं जिनमें प्रजनन और बाल स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोगों की जांच और प्रबंधन शामिल हैं।
2. आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है।
3. ई-संजीवनी एक टेली-परामर्श सेवा है जो भौगोलिक बाधाओं को दूर करने में मदद करती है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि AB-PMJAY का उद्देश्य कमजोर वर्गों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। कथन 3 सही है क्योंकि ई-संजीवनी टेली-परामर्श के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने में सहायक है।
Q2. भारत में सिकल सेल रोग (SCD) के उन्मूलन का लक्ष्य किस वर्ष तक निर्धारित किया गया है?
- 2030
- 2035
- 2047
- 2050
उत्तर: 2047 — भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा 81 में वनएससीडी ग्लोबल पार्टनरशिप लॉन्च के दौरान 2047 तक सिकल सेल रोग को खत्म करने के लक्ष्य पर प्रकाश डाला।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा 81 में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को बढ़ावा देने में अपनी प्रगति को उजागर किया है। भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने में आयुष्मान भारत कार्यक्रम के विभिन्न घटकों और डिजिटल स्वास्थ्य पहलों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में इसकी प्रस्तुति का संक्षिप्त उल्लेख।
2. आयुष्मान भारत कार्यक्रम के घटक और भूमिका:
a. आयुष्मान आरोग्य मंदिर: प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा वितरण, सेवाओं की विस्तृत श्रृंखला (प्रजनन और बाल स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोग, मानसिक स्वास्थ्य, बुजुर्गों और पैलिएटिव केयर) और समुदाय के करीब पहुँच।
b. आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY): कमजोर वर्गों के लिए वित्तीय सुरक्षा, माध्यमिक और तृतीयक देखभाल तक पहुँच, जेब से होने वाले खर्च में कमी।
c. निशुल्क दवा और डायग्नोस्टिक्स सेवा पहल और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम: आवश्यक सेवाओं तक पहुँच और आर्थिक बोझ में कमी।
3. डिजिटल स्वास्थ्य पहल की भूमिका:
a. यूनिक हेल्थ आइडेंटिटी (आभा): 90 करोड़ से अधिक नागरिकों को लाभ, देखभाल की निरंतरता और पहुँच में सुधार।
b. ई-संजीवनी: 49.7 करोड़ से अधिक टेली-परामर्श, भौगोलिक बाधाओं को दूर करना, दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुँच।
c. टेली-रेडियोलॉजी, एआई-इनेबल्ड एक्स-रे और मोबाइल मेडिकल यूनिट: प्रौद्योगिकी का उपयोग और नवाचार।
4. समालोचनात्मक विश्लेषण: इन पहलों की सफलताएँ, चुनौतियाँ (जैसे ग्रामीण-शहरी असमानताएँ, मानव संसाधन की कमी, डिजिटल डिवाइड) और आगे की राह।
5. निष्कर्ष: भारत के UHC लक्ष्यों को प्राप्त करने में इन पहलों के महत्व और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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