24 Sep वस्त्र मंत्रालय ने शुरू किया ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान: जाने प्रमुख पहल
✎ 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान 'स्वच्छ भारत अभियान' का एक अभिन्न अंग है, जो जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को बढ़ावा देने और व्यवहार परिवर्तन लाने पर केंद्रित है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष | GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी | GS Paper IV — नीतिशास्त्र तथा मानवीय सह-संबंध
- Prelims: स्वच्छता ही सेवा अभियान, वस्त्र मंत्रालय, भारतीय कपास निगम लिमिटेड, राष्ट्रीय पटसन बोर्ड, वस्त्र समिति, राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान, कबाड़ से जुगाड़, 3R सिद्धांत, अपशिष्ट प्रबंधन, वृक्षारोपण अभियान
- Essay: स्वच्छता और जनभागीदारी: एक स्वच्छ भारत की ओर, सतत विकास और पर्यावरणीय नैतिकता: चुनौतियाँ और समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान ‘स्वच्छ भारत अभियान’ का एक अभिन्न अंग है, जो जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को बढ़ावा देने और व्यवहार परिवर्तन लाने पर केंद्रित है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
वस्त्र मंत्रालय (Ministry of Textiles) ने ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान के तहत देश भर में बड़े पैमाने पर स्वच्छता अभियान, हरित पहल और सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इन गतिविधियों में मंत्रालय के विभिन्न संगठनों जैसे भारतीय कपास निगम लिमिटेड (Cotton Corporation of India Limited), राष्ट्रीय पटसन बोर्ड (National Jute Board), वस्त्र समिति (Textiles Committee), सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (Central Cottage Industries Corporation of India Limited) और राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (National Institute of Fashion Technology – NIFT) ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
पृष्ठभूमि
- ‘स्वच्छता ही सेवा’ (Swachhta Hi Seva – SHS) अभियान भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक पहल है जिसका उद्देश्य स्वच्छता को एक जन आंदोलन बनाना है।
- यह अभियान ‘स्वच्छ भारत अभियान’ (Swachh Bharat Abhiyan) का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो महात्मा गांधी की जयंती पर 2 अक्टूबर, 2014 को शुरू किया गया था।
- स्वच्छता ही सेवा का मुख्य लक्ष्य लोगों को स्वच्छता गतिविधियों में स्वेच्छा से भाग लेने और अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित करना है।
- वस्त्र मंत्रालय के तहत विभिन्न संगठनों ने अपने कार्यालयों, परिसरों और आसपास के समुदायों में स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन और हरित पहलों पर ध्यान केंद्रित किया।
- इन अभियानों में ‘कबाड़ से जुगाड़’ जैसी पहलें भी शामिल थीं, जो ‘कम करें, पुन: उपयोग करें, पुनर्चक्रण करें’ (Reduce, Reuse, Recycle – 3R) के सिद्धांतों को बढ़ावा देती हैं।
- वृक्षारोपण अभियान और स्वच्छता शपथ जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिनका उद्देश्य पर्यावरणीय जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देना था।
स्वच्छ भारत अभियान क्या है?
- स्वच्छ भारत अभियान भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक राष्ट्रव्यापी स्वच्छता अभियान है।
- इसका प्राथमिक उद्देश्य पूरे देश में स्वच्छता और खुले में शौच मुक्त (Open Defecation Free – ODF) स्थिति प्राप्त करना है।
- यह अभियान ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वच्छता के बुनियादी ढांचे में सुधार पर केंद्रित है।
- इसमें ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन, शौचालयों का निर्माण और सार्वजनिक स्थानों की सफाई जैसे घटक शामिल हैं।
- स्वच्छ भारत अभियान का लक्ष्य व्यवहार परिवर्तन लाना और नागरिकों के बीच स्वच्छता की आदतों को बढ़ावा देना है।
- यह जनभागीदारी (public participation) के माध्यम से स्वच्छता को एक सामाजिक आंदोलन बनाने पर जोर देता है।
- अभियान के तहत विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को स्वच्छता गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
- इसका दीर्घकालिक लक्ष्य एक स्वच्छ, स्वस्थ और सतत भारत का निर्माण करना है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| व्यापक स्वच्छता अभियान | कार्यस्थलों, परिसरों और सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता सुनिश्चित करना, जिससे स्वस्थ वातावरण को बढ़ावा मिलता है। |
| हरित पहल | वृक्षारोपण और 3R (रिड्यूस, रीयूज, रीसायकल) सिद्धांतों को बढ़ावा देकर पर्यावरणीय स्थिरता में योगदान। |
| सामुदायिक भागीदारी | स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और नागरिकों को स्वच्छता गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल करना। |
| कबाड़ से जुगाड़ | अपशिष्ट पदार्थों का रचनात्मक उपयोग करके राजस्व सृजन की संभावनाओं की खोज करना और अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देना। |
| स्वच्छता शपथ | छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को स्वच्छता के महत्व के प्रति जागरूक करना और इसे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाना। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- स्वच्छता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी को बढ़ावा मिलता है, जिससे समुदाय में स्वच्छता की संस्कृति विकसित होती है।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, क्योंकि स्वच्छ वातावरण बीमारियों के प्रसार को कम करता है।
- बच्चों और युवाओं में स्वच्छता की आदतों को विकसित करने में मदद करता है, जिससे वे भविष्य के जिम्मेदार नागरिक बनते हैं।
पर्यावरणीय महत्व
- अपशिष्ट प्रबंधन के सिद्धांतों (रिड्यूस, रीयूज, रीसायकल) को बढ़ावा देकर पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करने में मदद करता है।
- वृक्षारोपण अभियानों के माध्यम से हरित आवरण बढ़ता है, जिससे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में सहायता मिलती है।
- अपशिष्ट पदार्थों के उचित निपटान से भूमि और जल प्रदूषण पर नियंत्रण होता है।
आर्थिक महत्व
- कबाड़ से जुगाड़ जैसी पहल के माध्यम से अपशिष्ट से धन सृजन की संभावनाओं का पता चलता है।
- स्वच्छ कार्यस्थल उत्पादकता में वृद्धि करते हैं और कर्मचारियों के स्वास्थ्य संबंधी खर्चों को कम करते हैं।
शासनिक महत्व
- सरकारी मंत्रालयों और संस्थानों के बीच समन्वय और सहयोग को दर्शाता है, जिससे नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है।
- जनभागीदारी के माध्यम से सरकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी और समावेशी बनाता है।
चुनौतियाँ
1. व्यवहार परिवर्तन में चुनौतियाँ
- लोगों की आदतों और मानसिकता को बदलना एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है, जिसके लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता होती है।
- स्वच्छता को केवल एक अभियान तक सीमित न रखकर उसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चुनौतीपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, शासन
2. अपशिष्ट प्रबंधन की अवसंरचना
- ठोस अपशिष्ट के संग्रहण, पृथक्करण और निपटान के लिए पर्याप्त और आधुनिक अवसंरचना का अभाव।
- विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाओं की कमी।
यूपीएससी लिंक: शहरीकरण, अवसंरचना
3. निगरानी और प्रवर्तन
- स्वच्छता मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र की कमी।
- नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रवर्तन में ढिलाई।
यूपीएससी लिंक: शासन, जवाबदेही
4. संसाधनों की कमी
- स्वच्छता अभियानों और अवसंरचना के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों का अभाव।
- स्थानीय निकायों की वित्तीय बाधाएँ।
यूपीएससी लिंक: स्थानीय स्वशासन, संसाधन जुटाना
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| जनभागीदारी की निरंतरता | अभियानों के बाद जनभागीदारी का स्तर बनाए रखना कठिन होता है। |
| अपशिष्ट का पृथक्करण | घरों और संस्थानों में अपशिष्ट के स्रोत पर ही पृथक्करण (सेग्रीगेशन) की कमी। |
| पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) क्षमता | पुनर्चक्रण योग्य अपशिष्ट के प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण के लिए पर्याप्त सुविधाओं का अभाव। |
| खुले में शौच | कुछ ग्रामीण और शहरी स्लम क्षेत्रों में अभी भी खुले में शौच की समस्या का पूरी तरह समाधान न होना। |
| प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन | एकल-उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध के बावजूद इसके प्रभावी प्रबंधन में चुनौतियाँ। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- स्वच्छता ही सेवा
- स्वच्छ भारत अभियान
आगे की राह
- स्वच्छता अभियानों को केवल एक घटना न मानकर एक सतत प्रक्रिया के रूप में बढ़ावा दिया जाए।
- अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों और अवसंरचना में निवेश बढ़ाया जाए, जिसमें पृथक्करण, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण शामिल हो।
- जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए स्थानीय समुदायों, स्वयं सहायता समूहों और गैर-सरकारी संगठनों को सक्रिय रूप से शामिल किया जाए।
- स्वच्छता शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग बनाया जाए ताकि बच्चों में बचपन से ही स्वच्छता की आदतें विकसित हों।
- स्वच्छता मानकों का उल्लंघन करने वालों के लिए प्रभावी दंड और प्रोत्साहन प्रणाली लागू की जाए।
- अपशिष्ट से ऊर्जा और अपशिष्ट से धन जैसी पहलों को बढ़ावा देकर चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के सिद्धांतों को अपनाया जाए।
- विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाए ताकि स्वच्छता प्रयासों में दोहराव से बचा जा सके और संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
स्वच्छता ही सेवा अभियान · स्वच्छ भारत अभियान · अपशिष्ट प्रबंधन · हरित पहल · सामुदायिक भागीदारी · पुनर्चक्रण · पर्यावरण संरक्षण · सतत विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण जीवन के अधिकार का हिस्सा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण संरक्षण राज्य का नीति निर्देशक तत्व’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A(g)’, ‘note’: ‘पर्यावरण की रक्षा नागरिक का मूल कर्तव्य’}
अवधारणा प्रवाह
स्वच्छता ही सेवा अभियान का आयोजन → विभिन्न मंत्रालयों/विभागों की सक्रिय भागीदारी → स्वच्छता, वृक्षारोपण और अपशिष्ट प्रबंधन गतिविधियाँ → जनजागरूकता में वृद्धि और व्यवहार परिवर्तन → स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण का निर्माण → सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थिरता में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. स्वच्छता ही सेवा (SHS) अभियान के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह अभियान केवल शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता गतिविधियों पर केंद्रित है।
2. ‘कबाड़ से जुगाड़’ पहल 3R सिद्धांतों (रिड्यूस, रीयूज, रीसायकल) को बढ़ावा देती है।
3. वस्त्र मंत्रालय के तहत विभिन्न संगठनों ने इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लिया।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि स्वच्छता ही सेवा अभियान शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्वच्छता को बढ़ावा देता है। कथन 2 सही है, ‘कबाड़ से जुगाड़’ पहल कचरे को कम करने, पुन: उपयोग करने और पुनर्चक्रण करने के 3R सिद्धांतों पर आधारित है। कथन 3 सही है, जैसा कि समाचार में बताया गया है, वस्त्र मंत्रालय के तहत भारतीय कपास निगम लिमिटेड, राष्ट्रीय पटसन बोर्ड, वस्त्र समिति, सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान और भारतीय पटसन निगम लिमिटेड जैसे विभिन्न संगठनों ने इस अभियान में भाग लिया।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान का प्राथमिक उद्देश्य नहीं है?
- सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को बढ़ावा देना।
- कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखना।
- केवल सरकारी भवनों में अपशिष्ट प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करना।
- पर्यावरण संरक्षण और हरित पहलों को प्रोत्साहित करना।
उत्तर: केवल सरकारी भवनों में अपशिष्ट प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करना। — स्वच्छता ही सेवा अभियान का उद्देश्य व्यापक है, जिसमें सामुदायिक भागीदारी, कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता, तथा पर्यावरण संरक्षण शामिल है। यह केवल सरकारी भवनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें स्कूलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी जागरूकता और सफाई गतिविधियां शामिल हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ स्वच्छ भारत अभियान के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। यह अभियान किस प्रकार सामुदायिक भागीदारी और सतत अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देता है? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: स्वच्छ भारत अभियान और ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान का संक्षिप्त परिचय।
मुख्य भाग:
1. ‘स्वच्छता ही सेवा’ की भूमिका: स्वच्छ भारत अभियान के लक्ष्यों को प्राप्त करने में इसकी पूरक भूमिका।
2. सामुदायिक भागीदारी: जनभागीदारी, शपथ ग्रहण, स्वयंसेवकों की भूमिका, विभिन्न संगठनों की सक्रिय भागीदारी (जैसे वस्त्र मंत्रालय के तहत)।
3. सतत अपशिष्ट प्रबंधन: 3R सिद्धांत (रिड्यूस, रीयूज, रीसायकल), ‘कबाड़ से जुगाड़’ पहल, अपशिष्ट पृथक्करण, पुनर्चक्रण के माध्यम से राजस्व सृजन की संभावना।
4. हरित पहल: वृक्षारोपण अभियान (‘एक पेड़ मां के नाम’), पर्यावरण संरक्षण में योगदान।
5. जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन: व्यक्तिगत और सार्वजनिक स्वच्छता के महत्व पर जागरूकता बढ़ाना।
निष्कर्ष: अभियान की सफलता, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर संतुलित दृष्टिकोण।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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