26 Sep अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने IISc बेंगलुरु में प्रमुख संस्थानों के साथ साझेदारी की
✎ अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने PM VIKAS और PMJVK योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन के साथ-साथ अल्पसंख्यक समुदायों में उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के साथ रणनीतिक…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
- Prelims: अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, PM VIKAS योजना, PMJVK योजना, IIM बेंगलुरु, IIT मद्रास, IISc बेंगलुरु, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (NMDFC), कौशल विकास, उद्यमिता, स्वतंत्र तृतीय-पक्ष मूल्यांकन
- Essay: समावेशी विकास: चुनौतियाँ और समाधान, भारत में सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में नवाचार की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने PM VIKAS और PMJVK योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन के साथ-साथ अल्पसंख्यक समुदायों में उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के साथ रणनीतिक साझेदारी की है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय (Ministry of Minority Affairs) ने 25 सितंबर 2026 को भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) बेंगलुरु में कई प्रमुख शैक्षणिक, अनुसंधान और नवाचार संस्थानों के साथ सहमति पत्रों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए। इन साझेदारियों का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता, स्वतंत्र निगरानी, उद्यमिता (Entrepreneurship), नवाचार (Innovation), कौशल विकास और सतत आर्थिक अवसरों को मजबूत करना है। यह कदम मंत्रालय की प्रमुख पहलों के कार्यान्वयन और प्रभाव को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है।
पृष्ठभूमि
- अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय भारत सरकार का एक मंत्रालय है जिसका गठन अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित मुद्दों को देखने के लिए किया गया था।
- मंत्रालय का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों के समग्र विकास और सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और आर्थिक अवसर शामिल हैं।
- PM VIKAS (प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन) योजना का लक्ष्य अल्पसंख्यक समुदायों के कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देना है, ताकि उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
- प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK) एक क्षेत्र-आधारित योजना है जिसका उद्देश्य अल्पसंख्यक केंद्रित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के अंतर को कम करना है, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास।
- इन योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन और परिणामों की पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र मूल्यांकन और निगरानी की आवश्यकता महसूस की गई है।
- नवाचार और उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को मजबूत करना आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण है, विशेषकर वंचित समुदायों के लिए।
- रणनीतिक संस्थानों के साथ साझेदारी से मंत्रालय को विशेष तकनीकी और शैक्षणिक विशेषज्ञता तक पहुँच प्राप्त होगी, जिससे साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया मजबूत होगी।
- यह सहयोग सेंटर फॉर अर्बनाइजेशन, बिल्डिंग्स एंड एनवायरनमेंट (CUBE), IIT मद्रास; फाउंडेशन फॉर साइंस इनोवेशन एंड डेवलपमेंट (FSID), IISc बेंगलुरु; भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) बेंगलुरु और IIMB इनोवेशंस (NSRCEL) की संस्थागत क्षमताओं को एक साथ लाता है।
- राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (NMDFC) अल्पसंख्यक समुदायों के आर्थिक विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने वाली एक प्रमुख संस्था है।
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की प्रमुख साझेदारियाँ और उनके उद्देश्य
- **PM VIKAS प्रशिक्षण की स्वतंत्र तृतीय-पक्ष निगरानी:** अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और IIM बेंगलुरु के बीच एक समझौता हुआ है। इसके तहत IIM बेंगलुरु दक्षिण क्षेत्र में PM VIKAS के तहत दिए जाने वाले प्रशिक्षण की स्वतंत्र तृतीय-पक्ष निगरानी करेगा। इसका उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है।
- **PMJVK इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का स्वतंत्र तृतीय-पक्ष मूल्यांकन:** मंत्रालय ने CUBE, IIT मद्रास के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता PMJVK के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का स्वतंत्र तृतीय-पक्ष गुणवत्ता (तकनीकी और सामाजिक) मूल्यांकन करेगा। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और महिला एवं बाल विकास क्षेत्रों की परियोजनाएँ शामिल होंगी।
- **उद्यमिता और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना:** अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने IISc बेंगलुरु द्वारा संवर्धित ‘फाउंडेशन फॉर साइंस इनोवेशन एंड डेवलपमेंट’ (FSID) और IIM बेंगलुरु के उद्यमिता एवं इनक्यूबेशन केंद्र ‘IIMB इनोवेशंस’ (NSRCEL) के साथ दो समझौते किए हैं। इनका लक्ष्य स्टार्टअप और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना तथा अल्पसंख्यक समुदायों के आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
- **साझेदारी के लाभ:** ये साझेदारियाँ मंत्रालय को विशेष तकनीकी और शैक्षणिक विशेषज्ञता तक पहुँच प्रदान करेंगी, साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत करेंगी, निगरानी और मूल्यांकन तंत्र में सुधार करेंगी, नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देंगी, तथा क्षमता विकास और उद्यम विकास के लिए अधिक मजबूत संस्थागत मार्ग तैयार करेंगी।
- **गुणात्मक सुधार:** इन समझौतों से कार्यान्वयन की गुणवत्ता मजबूत होगी, कमियों की पहचान और उन्हें दूर करने में मदद मिलेगी, निगरानी तंत्र में सुधार होगा तथा PM VIKAS और PMJVK योजनाओं के तहत परिणामों में बेहतर सुधार होगा।
- **सतत विकास:** यह पहल इंफ्रास्ट्रक्चर परिसंपत्तियों (Assets) की कार्यप्रणाली और उपयोगिता की समझ को गहरा करेगी तथा अधिक सतत परिणामों में योगदान देगी, जिससे अल्पसंख्यक समुदायों का दीर्घकालिक सशक्तिकरण सुनिश्चित होगा।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| रणनीतिक संस्थानों के साथ साझेदारी | अल्पसंख्यक समुदायों के लिए बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता, उद्यमिता, नवाचार और आर्थिक अवसरों को मजबूत करना। |
| पीएम विकास प्रशिक्षण की स्वतंत्र थर्ड-पार्टी निगरानी | प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन (पीएम विकास) योजना के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना। |
| पीएमजेवीके इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का स्वतंत्र थर्ड-पार्टी मूल्यांकन | प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके) के तहत बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की गुणवत्ता, कार्यक्षमता और उपयोगिता का आकलन। |
| उद्यमिता और नवाचार इकोसिस्टम को मजबूत करना | अल्पसंख्यक समुदायों के बीच स्टार्टअप और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना। |
| तकनीकी और शैक्षणिक विशेषज्ञता तक पहुँच | साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने, निगरानी और मूल्यांकन तंत्र में सुधार तथा क्षमता विकास को बढ़ावा देना। |
महत्व
सामाजिक-आर्थिक महत्व
- यह पहल अल्पसंख्यक समुदायों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और महिला एवं बाल विकास जैसे क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता में सुधार करेगी, जिससे उनके सामाजिक-आर्थिक उत्थान में मदद मिलेगी।
- उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देने से अल्पसंख्यक युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में सहायता मिलेगी, जिससे समावेशी विकास को बल मिलेगा।
- योजनाओं की स्वतंत्र निगरानी और मूल्यांकन से पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ेगी, जिससे सरकारी संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होगा और लाभार्थियों तक लाभ पहुँच सकेगा।
शासन और नीति निर्माण
- रणनीतिक संस्थानों के साथ साझेदारी से मंत्रालय को विशेषज्ञ तकनीकी और शैक्षणिक जानकारी मिलेगी, जिससे साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और कार्यान्वयन में सुधार होगा।
- थर्ड-पार्टी मूल्यांकन और निगरानी तंत्र योजनाओं के कार्यान्वयन में कमियों की पहचान करने और उन्हें दूर करने में मदद करेगा, जिससे भविष्य की परियोजनाओं की योजना अधिक सटीक होगी।
- यह पहल सरकारी योजनाओं के प्रभाव और दक्षता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जिससे सुशासन (Good Governance) के सिद्धांतों को बल मिलेगा।
संस्थागत क्षमता निर्माण
- आईआईएमबी, आईआईटी मद्रास और आईआईएससी जैसे प्रमुख संस्थानों के साथ सहयोग से मंत्रालय की संस्थागत क्षमताएं मजबूत होंगी, विशेषकर निगरानी, मूल्यांकन और उद्यमिता विकास के क्षेत्रों में।
- यह साझेदारी ज्ञान के आदान-प्रदान और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने में मदद करेगी, जिससे मंत्रालय की कार्यप्रणाली में नवाचार और दक्षता आएगी।
- यह मॉडल अन्य मंत्रालयों और विभागों के लिए भी एक उदाहरण स्थापित कर सकता है कि कैसे बाहरी विशेषज्ञता का लाभ उठाकर सरकारी कार्यक्रमों के परिणामों को बेहतर बनाया जा सकता है।
चुनौतियाँ
1. कार्यान्वयन में समन्वय
- विभिन्न शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करना ताकि परियोजनाओं का सुचारु और एकीकृत कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।
- साझेदार संस्थानों की विविध कार्यप्रणालियों और अपेक्षाओं को एक साझा लक्ष्य के तहत संरेखित करना।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. डेटा की गुणवत्ता और उपलब्धता
- स्वतंत्र मूल्यांकन और निगरानी के लिए सटीक, विश्वसनीय और समय पर डेटा की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- डेटा संग्रह और विश्लेषण में मानकीकरण बनाए रखना ताकि मूल्यांकन के परिणाम तुलनीय और कार्रवाई योग्य हों।
यूपीएससी लिंक: ई-गवर्नेंस, डेटा गवर्नेंस
3. स्थानीय स्तर पर स्वीकार्यता और भागीदारी
- अल्पसंख्यक समुदायों के बीच इन पहलों के प्रति जागरूकता और स्वीकार्यता बढ़ाना ताकि उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
- स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं को मूल्यांकन और उद्यमिता विकास कार्यक्रमों में शामिल करना।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, कमजोर वर्गों का उत्थान
4. वित्तीय और मानव संसाधन
- इन व्यापक साझेदारियों और मूल्यांकन गतिविधियों के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का आवंटन और उनका प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना।
- परियोजनाओं की निगरानी और कार्यान्वयन के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधनों की उपलब्धता बनाए रखना।
यूपीएससी लिंक: सरकारी बजट, संसाधन जुटाना
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| संस्थागत समन्वय | विभिन्न संस्थानों के बीच प्रभावी तालमेल और कार्यप्रणाली का एकीकरण। |
| डेटा की प्रामाणिकता | मूल्यांकन के लिए विश्वसनीय और सटीक जमीनी डेटा का संग्रह। |
| लाभार्थियों की भागीदारी | योजनाओं में अल्पसंख्यक समुदायों की सक्रिय और सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करना। |
| दीर्घकालिक प्रभाव | परियोजनाओं के अल्पकालिक परिणामों से परे दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को बनाए रखना। |
| तकनीकी क्षमता का अभाव | मंत्रालय के भीतर तकनीकी मूल्यांकन और निगरानी के लिए आंतरिक क्षमता का विकास। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन (पीएम विकास) योजना
- प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके)
आगे की राह
- मंत्रालय और साझेदार संस्थानों के बीच एक मजबूत समन्वय तंत्र स्थापित किया जाए ताकि सूचना का सुचारु प्रवाह और संयुक्त निर्णय लेने की प्रक्रिया सुनिश्चित हो सके।
- मूल्यांकन और निगरानी के लिए एक मानकीकृत ढाँचा (Standardized Framework) विकसित किया जाए, जिसमें स्पष्ट संकेतक (Indicators) और रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल शामिल हों।
- अल्पसंख्यक समुदायों के बीच इन पहलों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक आउटरीच कार्यक्रम चलाए जाएं, ताकि उनकी सक्रिय भागीदारी और स्वामित्व सुनिश्चित हो सके।
- उद्यमिता और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए लक्षित कौशल विकास कार्यक्रम और मेंटरशिप सहायता प्रदान की जाए, जो स्थानीय बाजार की जरूरतों के अनुरूप हों।
- मूल्यांकन रिपोर्टों के आधार पर नीतिगत परिवर्तनों और कार्यान्वयन रणनीतियों में नियमित समायोजन किया जाए ताकि योजनाओं की प्रभावशीलता को अधिकतम किया जा सके।
- दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए परियोजनाओं के वित्तपोषण और रखरखाव के लिए एक सतत मॉडल विकसित किया जाए, जिसमें सामुदायिक भागीदारी भी शामिल हो।
- मंत्रालय के भीतर मूल्यांकन और डेटा विश्लेषण के लिए आंतरिक क्षमता निर्माण पर जोर दिया जाए ताकि बाहरी निर्भरता कम हो सके और निरंतर सुधार की संस्कृति विकसित हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय · रणनीतिक साझेदारी · पीएम विकास योजना · पीएमजेवीके · उद्यमिता विकास · स्वतंत्र निगरानी · गुणवत्ता मूल्यांकन · कौशल विकास · साक्ष्य-आधारित नीति · संस्थागत सहयोग
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 29’, ‘note’: ‘अल्पसंख्यकों के हितों का संरक्षण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 30’, ‘note’: ‘शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘कमजोर वर्गों के शैक्षिक व आर्थिक हितों को बढ़ावा’}
अवधारणा प्रवाह
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा रणनीतिक संस्थानों से साझेदारी → पीएम विकास और पीएमजेवीके योजनाओं का स्वतंत्र मूल्यांकन → उद्यमिता और नवाचार इकोसिस्टम को मजबूती → साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और कार्यान्वयन में सुधार → अल्पसंख्यक समुदायों का सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण → समावेशी विकास और सुशासन को बढ़ावा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने पीएम विकास योजना के तहत प्रशिक्षण की स्वतंत्र थर्ड-पार्टी निगरानी के लिए आईआईएम बेंगलुरु के साथ समझौता किया है।
2. प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके) के तहत इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के गुणवत्ता मूल्यांकन के लिए आईआईटी मद्रास के CUBE के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
3. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (एन. एम. डी. एफ. सी.) उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आईआईएससी बेंगलुरु और आईआईएमबी इनोवेशंस के साथ सहयोग कर रहा है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीनों
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 सही है। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने पीएम विकास योजना के तहत प्रशिक्षण की स्वतंत्र थर्ड-पार्टी निगरानी के लिए आईआईएम बेंगलुरु के साथ समझौता किया है। कथन 2 सही है। पीएमजेवीके के तहत इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के गुणवत्ता मूल्यांकन के लिए आईआईटी मद्रास के CUBE के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। कथन 3 सही है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (एन. एम. डी. एफ. सी.) उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आईआईएससी बेंगलुरु के एफएसआईडी और आईआईएमबी इनोवेशंस (एनएसआरसीईएल) के साथ त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा संस्थान अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के साथ रणनीतिक साझेदारी में शामिल नहीं है?
- आईआईएम बेंगलुरु
- आईआईटी मद्रास (CUBE)
- आईआईएससी बेंगलुरु (एफएसआईडी)
- आईआईटी दिल्ली
उत्तर: आईआईटी दिल्ली — अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने आईआईएम बेंगलुरु, आईआईटी मद्रास (CUBE) और आईआईएससी बेंगलुरु (एफएसआईडी) के साथ साझेदारी की है। आईआईटी दिल्ली इस साझेदारी में शामिल नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ अल्पसंख्यक समुदायों के सशक्तिकरण में रणनीतिक संस्थागत साझेदारियों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, पीएम विकास और पीएमजेवीके जैसी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में निगरानी और मूल्यांकन तंत्र के महत्व पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा हाल ही में प्रमुख शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के साथ की गई साझेदारियों का संक्षिप्त उल्लेख।
2. रणनीतिक संस्थागत साझेदारियों की भूमिका:
– बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता में सुधार (CUBE, IIT मद्रास के साथ पीएमजेवीके).
– उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देना (NMDFC, FSID-IISc बेंगलुरु, IIMB इनोवेशंस के साथ).
– कौशल विकास और आर्थिक अवसरों का सृजन.
– तकनीकी विशेषज्ञता और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सहायता.
3. निगरानी और मूल्यांकन तंत्र का महत्व:
– पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना (IIM बेंगलुरु के साथ पीएम विकास की थर्ड-पार्टी निगरानी).
– कार्यान्वयन की गुणवत्ता का मूल्यांकन (जमीनी सत्यापन, हितधारक परामर्श).
– कमियों की पहचान और सुधारात्मक उपाय.
– बेहतर परिसंपत्ति प्रबंधन और भविष्य की परियोजनाओं की योजना.
– योजना के परिणामों और प्रभाव को बढ़ाना.
4. चुनौतियाँ और समाधान: इन साझेदारियों के प्रभावी कार्यान्वयन में संभावित चुनौतियाँ (जैसे समन्वय, धन, जमीनी स्तर पर पहुंच) और उन्हें दूर करने के उपाय।
5. निष्कर्ष: समावेशी विकास और अल्पसंख्यक समुदायों के उत्थान में ऐसी साझेदारियों के दीर्घकालिक लाभों पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Karnataka PCS (KPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा 25 सितंबर 2026 को आईआईएससी बेंगलुरु में आयोजित होने वाले कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- A. अल्पसंख्यक समुदायों के लिए कौशल विकास केंद्र स्थापित करना
- B. रणनीतिक संस्थानों के साथ साझेदारी के माध्यम से बुनियादी ढांचे, उद्यमिता और निगरानी क्षमताओं को मजबूत करना
- C. आईआईएससी बेंगलुरु में एक नया अनुसंधान केंद्र स्थापित करना
- D. अल्पसंख्यक छात्रों के लिए विदेशी शिक्षा योजनाओं का शुभारंभ
उत्तर: B. रणनीतिक संस्थानों के साथ साझेदारी के माध्यम से बुनियादी ढांचे, उद्यमिता और निगरानी क्षमताओं को मजबूत करना — कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रणनीतिक संस्थानों के साथ साझेदारी के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदायों के बुनियादी ढांचे, उद्यमिता और निगरानी क्षमताओं को मजबूत करना है।
Mains: अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा आईआईएससी बेंगलुरु के साथ की जा रही साझेदारी के माध्यम से राज्य में अल्पसंख्यक समुदायों के विकास के लिए प्रस्तावित रणनीतिक उपायों का विश्लेषण करते हुए एक नीति प्रस्ताव तैयार कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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