रूस ने भारत-ब्राजील को दिया UNSC स्थायी सदस्यता का समर्थन, जर्मनी-जापान विरोध में

Russia backs India, Brazil for permanent UN Security Council seats, opposes Germany, Japan — diagram

रूस ने भारत-ब्राजील को दिया UNSC स्थायी सदस्यता का समर्थन, जर्मनी-जापान विरोध में

Map of India, Brazil, Germany, Japan, Russia highlighted on the map of India — UN सुरक्षा परिषद सुधार 2026
मानचित्र व माइंड-मैप: रूस का भारत-ब्राजील को समर्थन, जर्मनी-जापान के विरोध के कारण

✎ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार और भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी वैश्विक भू-राजनीतिक परिवर्तनों को दर्शाती है, जिसमें रूस का समर्थन भारत की स्थिति को मजबूत करता है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS Paper II — शासन व्यवस्था
  • Prelims: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), स्थायी सदस्य, अस्थायी सदस्य, G4 समूह, L.69 समूह, वीटो शक्ति, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA)
  • Essay: बदलती वैश्विक व्यवस्था में संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता, भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार की आवश्यकता

त्वरित पुनरावृत्ति: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार और भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी वैश्विक भू-राजनीतिक परिवर्तनों को दर्शाती है, जिसमें रूस का समर्थन भारत की स्थिति को मजबूत करता है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, रूस ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में भारत और ब्राजील को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता देने का समर्थन किया है। रूस ने जर्मनी और जापान को स्थायी सदस्यता देने का विरोध किया, जबकि ये दोनों देश G4 समूह में भारत और ब्राजील के साथ स्थायी सदस्यता के लिए संयुक्त रूप से अभियान चला रहे हैं। इस घटनाक्रम ने UNSC सुधारों पर बहस को फिर से तेज कर दिया है और भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को केंद्र में ला दिया है।

पृष्ठभूमि

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंगों में से एक है, जिस पर अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
  • UNSC में 15 सदस्य होते हैं, जिनमें से 5 स्थायी सदस्य (चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका) हैं और 10 अस्थायी सदस्य हैं, जिन्हें महासभा द्वारा दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है।
  • स्थायी सदस्यों के पास वीटो शक्ति होती है, जिसका अर्थ है कि वे किसी भी प्रस्ताव को पारित होने से रोक सकते हैं, भले ही उसे अन्य सभी सदस्यों का समर्थन प्राप्त हो।
  • भारत लंबे समय से UNSC में स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है, यह तर्क देते हुए कि वह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र, एक प्रमुख अर्थव्यवस्था और एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति है, जिसकी वैश्विक शांति और सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका है।
  • G4 समूह में भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान शामिल हैं, जो UNSC में स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार की मांग कर रहे हैं ताकि इसे अधिक प्रतिनिधि बनाया जा सके।
  • अफ्रीकी देश भी UNSC में स्थायी प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं, यह तर्क देते हुए कि 1945 की शक्ति संरचना अब प्रासंगिक नहीं है।
  • L.69 समूह विकासशील देशों का एक समूह है जो UNSC के विस्तार और सुधार का समर्थन करता है, जिसमें भारत की स्थायी सदस्यता भी शामिल है।
  • UNSC में सुधार की आवश्यकता इसलिए महसूस की जा रही है क्योंकि इसकी वर्तमान संरचना 1945 के भू-राजनीतिक परिदृश्य को दर्शाती है और यह वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) क्या है?

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संयुक्त राष्ट्र का सबसे शक्तिशाली अंग है, जो अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है।
  • इसके 15 सदस्य होते हैं: 5 स्थायी सदस्य और 10 अस्थायी सदस्य।
  • स्थायी सदस्य (P5) चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका हैं, जिनके पास वीटो शक्ति है।
  • अस्थायी सदस्यों को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दो साल के कार्यकाल के लिए क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के आधार पर चुना जाता है।
  • UNSC के प्रस्ताव सभी सदस्य देशों पर बाध्यकारी होते हैं, और यह प्रतिबंध लगा सकता है, शांति अभियानों को अधिकृत कर सकता है, और सैन्य कार्रवाई को अधिकृत कर सकता है।
  • UNSC की अध्यक्षता इसके सदस्यों द्वारा बारी-बारी से एक महीने के लिए की जाती है।
  • यह संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अध्याय VII के तहत कार्रवाई कर सकता है, जिसमें शांति के लिए खतरों, शांति भंग और आक्रामकता के कृत्यों के संबंध में उपाय शामिल हैं।
  • UNSC की संरचना में सुधार की मांग इसलिए की जा रही है ताकि यह वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित कर सके।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
रूस का समर्थन भारत और ब्राजील के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता हेतु रूस का स्पष्ट समर्थन उनके दावों को मजबूती प्रदान करता है।
G4 में मतभेद रूस का यह रुख G4 (भारत, ब्राजील, जर्मनी, जापान) गठबंधन के भीतर एक दरार को उजागर करता है, क्योंकि वह जर्मनी और जापान की उम्मीदवारी का विरोध करता है।
एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व रूस ने सुरक्षा परिषद में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के व्यापक प्रतिनिधित्व का समर्थन किया है, जो वैश्विक शक्ति संतुलन को दर्शाता है।
अन्य देशों का समर्थन मॉरीशस और पुर्तगाल जैसे देशों ने भी भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है, जो भारत की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है।
अफ्रीकी देशों की मांग अफ्रीकी देशों ने भी सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की मांग की है, जो 1945 की शक्ति संरचना को बदलने की आवश्यकता पर बल देता है।

महत्व

सामरिक महत्व

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता भारत को वैश्विक निर्णयों में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करेगी, जिससे उसकी सामरिक स्थिति मजबूत होगी।
  • यह भारत की ‘विश्व गुरु’ बनने की आकांक्षाओं को बल देगा और उसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी चिंताओं और हितों को बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने में सक्षम बनाएगा।

आर्थिक महत्व

  • सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट भारत को वैश्विक आर्थिक नीतियों और व्यापार समझौतों को प्रभावित करने की अधिक शक्ति देगी, जिससे उसके आर्थिक हितों की रक्षा होगी।
  • यह भारत को विकासशील देशों के मुद्दों को उठाने और उनके लिए अनुकूल नीतियां बनाने में मदद करेगा, जिससे वैश्विक आर्थिक न्याय को बढ़ावा मिलेगा।

बहुपक्षवाद और वैश्विक शासन

  • सुरक्षा परिषद का विस्तार और उसमें भारत जैसे देशों का समावेश बहुपक्षीय संस्थानों को अधिक लोकतांत्रिक और प्रतिनिधिक बनाएगा, जिससे उनकी वैधता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।
  • यह वैश्विक शासन (Global Governance) संरचनाओं में सुधार की आवश्यकता पर बल देता है ताकि वे समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित कर सकें।

अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर प्रभाव

  • रूस का समर्थन भारत के साथ उसके द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगा, विशेषकर ऐसे समय में जब वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं।
  • यह G4 समूह के भीतर भारत के संबंधों को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि जर्मनी और जापान के साथ उसकी साझा उम्मीदवारी पर सवाल उठ सकते हैं।

चुनौतियाँ

1. सर्वसम्मति का अभाव

  • सुरक्षा परिषद के विस्तार और स्थायी सदस्यों के चयन पर सदस्य देशों के बीच व्यापक सर्वसम्मति का अभाव है।
  • विभिन्न गुटों (जैसे G4, कॉफी क्लब/यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस) के अलग-अलग प्रस्तावों के कारण सुधार प्रक्रिया धीमी है।

2. वीटो शक्ति का मुद्दा

  • नए स्थायी सदस्यों को वीटो शक्ति (Veto Power) दी जाए या नहीं, यह एक बड़ा विवादास्पद मुद्दा है।
  • वर्तमान स्थायी सदस्य अपनी वीटो शक्ति को साझा करने के इच्छुक नहीं हैं, जिससे सुधार प्रक्रिया बाधित होती है।

3. क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व

  • विभिन्न क्षेत्रों (जैसे अफ्रीका, लैटिन अमेरिका) से कौन से देश स्थायी सदस्य बनें, इस पर क्षेत्रीय स्तर पर भी सहमति का अभाव है।
  • कई देश एक-दूसरे की उम्मीदवारी का समर्थन नहीं करते, जिससे सर्वसम्मति बनाना मुश्किल हो जाता है।

4. भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता

  • कुछ प्रमुख शक्तियां अपने भू-राजनीतिक हितों के कारण विशिष्ट देशों की उम्मीदवारी का विरोध करती हैं।
  • यह प्रतिद्वंद्विता सुरक्षा परिषद सुधार को एक जटिल और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बनाती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
वर्तमान संरचना सुरक्षा परिषद की वर्तमान संरचना 1945 की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को दर्शाती है, जो समकालीन विश्व का प्रतिनिधित्व नहीं करती।
वीटो शक्ति का दुरुपयोग स्थायी सदस्यों द्वारा वीटो शक्ति का बार-बार उपयोग महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर निर्णय लेने में बाधा डालता है।
प्रतिनिधित्व का अभाव अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया के बड़े हिस्से का स्थायी प्रतिनिधित्व न होना परिषद की वैधता पर सवाल उठाता है।
सुधार प्रक्रिया की धीमी गति संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच सुधारों पर आम सहमति की कमी के कारण प्रक्रिया बहुत धीमी है।
G4 में मतभेद रूस द्वारा जर्मनी और जापान की उम्मीदवारी का विरोध G4 समूह की एकजुटता और साझा लक्ष्य को कमजोर करता है।

आगे की राह

  • भारत को अपनी स्थायी सदस्यता की दावेदारी को मजबूत करने के लिए अन्य विकासशील देशों, विशेषकर अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के साथ अपने संबंधों को और गहरा करना चाहिए।
  • संयुक्त राष्ट्र के भीतर और बाहर विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर सुरक्षा परिषद सुधार के लिए निरंतर राजनयिक प्रयास जारी रखने चाहिए।
  • G4 समूह के भीतर मतभेदों को दूर करने और एक साझा रणनीति विकसित करने के लिए जर्मनी और जापान के साथ रचनात्मक संवाद करना चाहिए।
  • भारत को अपनी बढ़ती आर्थिक और सामरिक शक्ति का उपयोग वैश्विक शांति और सुरक्षा में योगदान देने के लिए करना चाहिए, जिससे उसकी दावेदारी को बल मिले।
  • सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए एक समयबद्ध और परिणाम-उन्मुख प्रक्रिया के लिए दबाव डालना चाहिए, जिसमें वीटो शक्ति के मुद्दे पर भी समाधान खोजा जा सकें।
  • भारत को संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों और उद्देश्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को लगातार प्रदर्शित करना चाहिए, जिससे वैश्विक समुदाय में उसकी स्वीकार्यता बढ़े।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद · स्थायी सदस्यता · G4 देश · L.69 समूह · वीटो शक्ति · संयुक्त राष्ट्र सुधार · बहुपक्षवाद · अंतर्राष्ट्रीय संबंध · भारत की विदेश नीति · अफ्रीकी प्रतिनिधित्व

अवधारणा प्रवाह

रूस ने भारत और ब्राजील की UNSC स्थायी सदस्यता का समर्थन किया।  →  यह UNSC सुधार की बहस को फिर से केंद्र में लाता है।  →  भारत की वैश्विक भूमिका और बढ़ती शक्ति को मान्यता मिलती है।  →  UNSC की संरचना पर सवाल उठते हैं (1945 बनाम वर्तमान)।  →  वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद में सुधार की आवश्यकता पर बल मिलता है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाँच स्थायी सदस्य और दस अस्थायी सदस्य होते हैं।
2. स्थायी सदस्यों के पास किसी भी प्रस्ताव को वीटो करने की शक्ति होती है।
3. भारत G4 समूह का सदस्य है, जो UNSC की स्थायी सदस्यता के लिए एक-दूसरे का समर्थन करते हैं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। UNSC में 5 स्थायी सदस्य (चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका) और 10 अस्थायी सदस्य होते हैं, जिन्हें महासभा द्वारा दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है। कथन 2 सही है। स्थायी सदस्यों के पास वीटो शक्ति होती है, जिसका अर्थ है कि वे किसी भी ‘सारभूत’ प्रस्ताव को पारित होने से रोक सकते हैं। कथन 3 सही है। G4 समूह में भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान शामिल हैं, जो UNSC में स्थायी सीटों के लिए एक-दूसरे की उम्मीदवारी का समर्थन करते हैं।

Q2. अभिकथन (A): संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता है ताकि यह वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित कर सके।
कारण (R): 1945 में अपनी स्थापना के बाद से UNSC की स्थायी सदस्यता में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि वैश्विक शक्ति संतुलन में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — अभिकथन (A) सही है। कई देश और समूह UNSC में सुधार की मांग कर रहे हैं ताकि यह अधिक प्रतिनिधि और प्रभावी बन सके। कारण (R) भी सही है। UNSC के स्थायी सदस्य द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की शक्ति संरचना को दर्शाते हैं, और तब से वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य काफी बदल गया है। R, A का सही स्पष्टीकरण है क्योंकि स्थायी सदस्यता में बदलाव न होने के कारण ही सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, UNSC सुधारों के मार्ग में आने वाली प्रमुख बाधाओं पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और भारत की स्थायी सदस्यता की आकांक्षा का संक्षिप्त परिचय।
2. भारत के दावे के पक्ष में तर्क:
* जनसंख्या और भौगोलिक प्रतिनिधित्व (विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र)।
* आर्थिक शक्ति (विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था)।
* अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा में योगदान (संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक)।
* जिम्मेदार परमाणु शक्ति।
* लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता।
* G4, L.69 जैसे समूहों का समर्थन।
3. भारत के दावे के विपक्ष में तर्क/चुनौतियाँ:
* वीटो शक्ति का मुद्दा (क्या भारत को वीटो मिलेगा?)।
* G4 के भीतर मतभेद (जर्मनी और जापान को रूस का विरोध)।
* ‘कॉफी क्लब’ (यूनाइटेड फॉर कंसेंसस) जैसे समूहों का विरोध।
* चीन का विरोध।
* सर्वसम्मति का अभाव।
4. UNSC सुधारों के मार्ग में प्रमुख बाधाएँ:
* स्थायी सदस्यों की वीटो शक्ति (वे अपने विशेषाधिकारों को छोड़ना नहीं चाहते)।
* सदस्य देशों के बीच राष्ट्रीय हितों का टकराव।
* विभिन्न क्षेत्रीय समूहों के बीच असहमति (जैसे अफ्रीकी संघ की एज़ुलविनी सहमति)।
* सुधार प्रक्रिया के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन की आवश्यकता (दो-तिहाई बहुमत और सभी स्थायी सदस्यों की सहमति)।
* स्थायी और अस्थायी सीटों की संख्या पर मतभेद।
5. निष्कर्ष: भारत के दावे की प्रासंगिकता को दोहराते हुए, UNSC सुधारों की धीमी प्रगति और बहुपक्षवाद के भविष्य पर इसके निहितार्थों पर एक संतुलित दृष्टिकोण।

स्रोत: orissapost.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


Related guides on our sites

No Comments

Post A Comment