27 Sep रबी अभियान 2026: राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्र-राज्य तालमेल पर होगा जोर
✎ रबी अभियान 2026 पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य आगामी रबी मौसम के लिए केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करना, कृषि उत्पादन, उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक परिणाम-उन्मुख रणनीति तैयार करना तथा दलहन, तिलहन और ऑयल पाम में…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध, सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, कृषि, कृषि उत्पादकता, खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन
- Prelims: रबी अभियान, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती, डिजिटल कृषि, पीएम फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, आत्मनिर्भरता, खाद्य सुरक्षा
- Essay: भारत में कृषि क्षेत्र का आधुनिकीकरण और किसानों की आय दोगुनी करना, खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में केंद्र-राज्य सहयोग की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: रबी अभियान 2026 पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य आगामी रबी मौसम के लिए केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करना, कृषि उत्पादन, उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक परिणाम-उन्मुख रणनीति तैयार करना तथा दलहन, तिलहन और ऑयल पाम में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा रबी अभियान 2026 के लिए राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन का आयोजन 28-29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में किया जा रहा है। इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य आगामी रबी मौसम की मुख्य प्राथमिकताओं और तैयारियों पर विचार-विमर्श करना, केंद्र-राज्य तालमेल को मजबूत करना तथा कृषि उत्पादन, उत्पादकता, स्थिरता और किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक समन्वित एवं परिणाम-उन्मुख रणनीति तैयार करना है।
पृष्ठभूमि
- भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है, जो देश की एक बड़ी आबादी को आजीविका प्रदान करती है।
- देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और ग्रामीण आय बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र का सतत विकास आवश्यक है।
- कृषि उत्पादन में वृद्धि और किसानों की आय में सुधार के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच मजबूत समन्वय महत्वपूर्ण है।
- जलवायु परिवर्तन, मिट्टी के स्वास्थ्य में गिरावट और पानी की कमी जैसी चुनौतियाँ भारतीय कृषि के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं।
- सरकार ने दलहन, तिलहन और ऑयल पाम में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए विभिन्न मिशन शुरू किए हैं, जो आयात पर निर्भरता कम करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- किसानों को सशक्त बनाने और कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल कृषि, कृषि मशीनीकरण और वित्तीय समावेशन पर जोर दिया जा रहा है।
रबी अभियान और संबंधित पहलें
- रबी अभियान: यह एक वार्षिक पहल है जिसका उद्देश्य रबी फसलों (जैसे गेहूं, जौ, चना, मटर, सरसों) की बुवाई से पहले राज्यों के साथ मिलकर आगामी मौसम की तैयारियों, चुनौतियों और रणनीतियों पर चर्चा करना है।
- केंद्र-राज्य तालमेल: सम्मेलन का मुख्य फोकस केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को मजबूत करना है ताकि कृषि नीतियों और योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
- आत्मनिर्भरता और विविधीकरण: दलहन, तिलहन और ऑयल पाम में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के मिशन पर विशेष जोर दिया जा रहा है, साथ ही फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है.
- स्थिरता और जलवायु-अनुकूल कृषि: प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने पर विचार-विमर्श किया जा रहा है ताकि कृषि को अधिक टिकाऊ बनाया जा सके।
- डिजिटल कृषि: डिजिटल कृषि मिशन, किसान रजिस्ट्री, डिजिटल फसल सर्वेक्षण और एग्रीस्टैक जैसी पहलें कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा दे रही हैं।
- वित्तीय समावेशन और जोखिम प्रबंधन: किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) कवरेज, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और कृषि बुनियादी ढांचे के लिए वित्तपोषण पर चर्चा की जा रही है ताकि किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान की जा सके।
- विपणन सुधार: कृषि उत्पादों के लिए बेहतर विपणन तंत्र और बुनियादी ढांचे में सुधार पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR): यह कृषि अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रमुख संस्था है, जो कृषि विकास के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और सम्मेलन में एक प्रमुख हितधारक है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| केंद्र-राज्य समन्वय | कृषि उत्पादन, उत्पादकता और स्थिरता बढ़ाने के लिए एक समन्वित रणनीति आवश्यक है। |
| परिणाम-उन्मुख रणनीति | किसानों की आय बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कार्ययोजना का निर्माण। |
| विषयगत समूह चर्चाएँ | आत्मनिर्भरता, विविधीकरण, जलवायु-अनुकूल कृषि और डिजिटल कृषि जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित विचार-विमर्श। |
| क्षेत्रीय सम्मेलनों के निष्कर्ष | जमीनी स्तर की चुनौतियों और राज्य-विशिष्ट प्राथमिकताओं को समझने में सहायक। |
| हितधारकों की भागीदारी | राज्यों के कृषि मंत्री, केंद्र-राज्य अधिकारी, ICAR और अन्य विशेषज्ञों की सामूहिक विशेषज्ञता का लाभ। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- रबी फसलों का उत्पादन बढ़ाने से देश की खाद्य सुरक्षा (Food Security) मजबूत होगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।
- दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता (Self-Reliance) के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- किसानों की आय में वृद्धि होगी, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करेगी और गरीबी उन्मूलन में सहायक होगी।
रणनीतिक महत्व
- केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय से कृषि नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा।
- जलवायु-अनुकूल कृषि (Climate-Resilient Agriculture) पद्धतियों को बढ़ावा देकर कृषि क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचाया जा सकेगा।
- डिजिटल कृषि (Digital Agriculture) पहलों के माध्यम से कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी।
सामाजिक महत्व
- खाद्य एवं पोषण सुरक्षा (Food and Nutritional Security) सुनिश्चित होगी, जिससे कुपोषण की समस्या को दूर करने में मदद मिलेगी।
- कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित होंगे, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
- किसानों को सशक्त बनाने से ग्रामीण समुदायों का समग्र विकास होगा।
चुनौतियाँ
1. जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
- बदलते मौसम पैटर्न, अनियमित वर्षा और चरम मौसमी घटनाएँ रबी फसलों की उत्पादकता को प्रभावित करती हैं।
- जलवायु-अनुकूल किस्मों और कृषि पद्धतियों को अपनाने में किसानों के बीच जागरूकता और संसाधनों की कमी।
यूपीएससी लिंक: कृषि, जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन
2. बीज और उर्वरक प्रबंधन
- उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की समय पर उपलब्धता और उनकी मूल्य श्रृंखला में सुधार की आवश्यकता।
- उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देना और उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: कृषि निवेश, मृदा स्वास्थ्य
3. डिजिटल कृषि का क्रियान्वयन
- डिजिटल कृषि मिशन, किसान रजिस्ट्री और डिजिटल फसल सर्वेक्षण जैसी पहलों को जमीनी स्तर पर लागू करने में चुनौतियाँ।
- किसानों के बीच डिजिटल साक्षरता और प्रौद्योगिकी तक पहुँच का अभाव।
यूपीएससी लिंक: ई-गवर्नेंस, कृषि में प्रौद्योगिकी
4. बाजार और वित्तपोषण
- किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए विपणन सुधारों की आवश्यकता।
- छोटे और सीमांत किसानों के लिए संस्थागत ऋण (Institutional Credit) और बीमा कवरेज तक पहुँच बढ़ाना।
यूपीएससी लिंक: कृषि विपणन, कृषि वित्त
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता | उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि के बावजूद, मांग-आपूर्ति के अंतर को पाटना अभी भी एक चुनौती है। |
| मृदा स्वास्थ्य | रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मृदा स्वास्थ्य का क्षरण और उत्पादकता पर दीर्घकालिक प्रभाव। |
| कृषि मशीनीकरण | छोटे जोत वाले किसानों के लिए कृषि मशीनीकरण की पहुँच और सामर्थ्य एक बाधा है। |
| किसान क्रेडिट कार्ड कवरेज | सभी पात्र किसानों तक किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की पहुँच सुनिश्चित करना। |
| पादप संरक्षण | फसलों को कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए प्रभावी और टिकाऊ पादप संरक्षण रणनीतियों की आवश्यकता। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- PM धन-धान्य कृषि योजना
- PM फसल बीमा योजना (PMFBY)
- खाद्य तेलों पर राष्ट्रीय मिशन (National Mission on Edible Oils)
- किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)
आगे की राह
- केंद्र और राज्यों के बीच प्रभावी समन्वय तंत्र स्थापित करना ताकि कृषि नीतियों का सुचारु क्रियान्वयन हो सके।
- दलहन, तिलहन और ऑयल पाम में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए विशिष्ट मिशन-मोड कार्यक्रम लागू करना।
- जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों, प्राकृतिक खेती और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाना।
- डिजिटल कृषि पहलों जैसे किसान रजिस्ट्री, डिजिटल फसल सर्वेक्षण और एग्रीस्टैक (AgriStack) को तेजी से लागू करना।
- कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देने और छोटे किसानों के लिए इसे सुलभ बनाने हेतु वित्तीय सहायता और सब्सिडी प्रदान करना।
- किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए विपणन सुधारों को लागू करना और कृषि-बुनियादी ढांचे का विकास करना।
- PM फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं का कवरेज बढ़ाना ताकि अधिक किसानों को लाभ मिल सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
रबी अभियान · कृषि उत्पादन · किसानों की आय · केंद्र-राज्य समन्वय · आत्मनिर्भरता · जलवायु-अनुकूल कृषि · डिजिटल कृषि · मृदा स्वास्थ्य · फसल विविधीकरण · खाद्य सुरक्षा
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘कृषि राज्य सूची का विषय’}
अवधारणा प्रवाह
रबी अभियान सम्मेलन का आयोजन → केंद्र-राज्य समन्वय और हितधारक चर्चा → प्राथमिकताओं और चुनौतियों की पहचान → परिणाम-उन्मुख रणनीति का निर्माण → रबी फसलों का उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि → किसानों की आय में वृद्धि और खाद्य सुरक्षा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. रबी अभियान 2026 का राष्ट्रीय सम्मेलन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
2. इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करना और कृषि के लिए परिणाम-उन्मुख रणनीति तैयार करना है।
3. सम्मेलन में केवल केंद्र सरकार के अधिकारी और कृषि वैज्ञानिक भाग लेंगे।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि सम्मेलन में राज्यों के कृषि मंत्री, केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) तथा अन्य हितधारक भी शामिल होंगे।
Q2. रबी अभियान 2026 के राष्ट्रीय सम्मेलन में निम्नलिखित में से किन प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा?
1. दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता मिशन
2. प्राकृतिक खेती और मृदा स्वास्थ्य
3. PM धन-धान्य कृषि योजना
4. पादप संरक्षण और कृषि सांख्यिकी
सही विकल्प चुनें:
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — दिए गए सभी चार मुद्दे (दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता मिशन, प्राकृतिक खेती और मृदा स्वास्थ्य, PM धन-धान्य कृषि योजना, पादप संरक्षण और कृषि सांख्यिकी) रबी अभियान 2026 के राष्ट्रीय सम्मेलन में विचार-विमर्श के प्रमुख विषयों में शामिल हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ रबी अभियान 2026 के राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्देश्यों पर चर्चा कीजिए। भारत में कृषि क्षेत्र में केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने में ऐसे सम्मेलनों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** रबी अभियान 2026 राष्ट्रीय सम्मेलन का संक्षिप्त परिचय दें, जिसमें इसके आयोजक (कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय) और आयोजन का समय/स्थान शामिल हो।
2. **सम्मेलन के उद्देश्य:** सम्मेलन के प्रमुख उद्देश्यों को विस्तार से समझाएं, जैसे केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करना, कृषि के लिए परिणाम-उन्मुख रणनीति तैयार करना, उत्पादन, उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाना, आत्मनिर्भरता, विविधीकरण, स्थिरता और जलवायु-अनुकूल कृषि पर ध्यान केंद्रित करना।
3. **केंद्र-राज्य समन्वय में भूमिका:** कृषि क्षेत्र में केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने में ऐसे सम्मेलनों की सकारात्मक भूमिका का विश्लेषण करें। इसमें नीति निर्माण, कार्यान्वयन चुनौतियों की पहचान, राज्य-विशिष्ट प्राथमिकताओं का समावेश, योजनाओं के बीच तालमेल, वितरण तंत्र को मजबूत करना और जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम सुनिश्चित करना शामिल हो। उदाहरण के तौर पर दलहन, तिलहन और ऑयल पाम में आत्मनिर्भरता मिशन, प्राकृतिक खेती, डिजिटल कृषि, PM फसल बीमा योजना आदि का उल्लेख करें।
4. **समालोचनात्मक परीक्षण:** केंद्र-राज्य समन्वय में चुनौतियों और सीमाओं पर भी प्रकाश डालें। इसमें राज्यों के बीच संसाधनों की असमानता, राजनीतिक इच्छाशक्ति में भिन्नता, कार्यान्वयन में देरी, विभिन्न राज्यों की विशिष्ट कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप नीतियों को ढालने की चुनौती और योजनाओं के प्रभावी मूल्यांकन तथा निगरानी की आवश्यकता जैसे बिंदु शामिल हो सकते हैं।
5. **निष्कर्ष:** एक समन्वित और परिणाम-उन्मुख रणनीति के माध्यम से ‘आत्मनिर्भरता एवं विकसित भारत’ के विजन को साकार करने में ऐसे सम्मेलनों के महत्व को दोहराते हुए एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Anthropology VS PSIR
- Best PSIR optional coaching
- Best PSIR optional coaching online
- Best PSIR optional teacher
- Exercise Tarang Shakti 2026: India’s Mega Multi-Nation Air Power Showcase - September 27, 2026
- रबी अभियान 2026: राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्र-राज्य तालमेल पर होगा जोर - September 27, 2026
- Himachal CM Sukhu: All Doctor Vacancies to be Filled by March - September 27, 2026

No Comments