28 Sep महाराष्ट्र में सूखा: 265 तालुकों में फसल निरीक्षण शुरू, एल नीनो की चिंता
✎ अल नीनो प्रशांत महासागर के गर्म होने से जुड़ा एक मौसमी पैटर्न है जो भारत में कमजोर मानसून और सूखे की स्थिति को बढ़ा सकता है, जैसा कि महाराष्ट्र में वर्तमान स्थिति से परिलक्षित होता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (भारत एवं विश्व का भौतिक, सामाजिक, आर्थिक भूगोल) | GS Paper III — आपदा प्रबंधन, कृषि, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
- Prelims: सूखा घोषणा मानदंड, अल नीनो प्रभाव, ला नीना, भारतीय मानसून, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF), फसल बीमा योजनाएँ
- Essay: जलवायु परिवर्तन और भारत पर इसके प्रभाव, आपदा प्रबंधन में सरकार की भूमिका और चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: अल नीनो प्रशांत महासागर के गर्म होने से जुड़ा एक मौसमी पैटर्न है जो भारत में कमजोर मानसून और सूखे की स्थिति को बढ़ा सकता है, जैसा कि महाराष्ट्र में वर्तमान स्थिति से परिलक्षित होता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की 358 तालुकों में से 265 को सूखा-प्रभावित घोषित किया है, जो राज्य के लगभग 74 प्रतिशत हिस्से को कवर करता है। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने अल नीनो (El Niño) के फरवरी में चरम पर पहुँचने की संभावना पर चिंता व्यक्त की है, जिससे भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है। सरकार ने प्रभावित किसानों को सहायता प्रदान करने के लिए फसल निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करने का काम शुरू कर दिया है और विभिन्न राहत उपायों की घोषणा की है।
पृष्ठभूमि
- महाराष्ट्र में वर्षा की कमी के कारण व्यापक सूखे की स्थिति उत्पन्न हुई है।
- राज्य सरकार ने 26 सितंबर, 2026 को 265 तालुकों को सूखा-प्रभावित घोषित किया है।
- सूखा-प्रभावित क्षेत्रों के लिए फसल ऋण पुनर्गठन, भू-राजस्व में छूट और बिजली बिल सब्सिडी जैसे राहत उपाय घोषित किए गए हैं।
- मुख्यमंत्री ने अल नीनो के फरवरी 2027 में चरम पर पहुँचने की संभावना का उल्लेख किया है, जिससे सूखे की स्थिति और बिगड़ सकती है।
- सरकार ने फसल निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करने का काम शुरू कर दिया है ताकि प्रभावित किसानों को उचित सहायता प्रदान की जा सके।
- प्रत्येक जिले को अपनी जल योजना तैयार करने और उपलब्ध जल भंडार का विवेकपूर्ण उपयोग करने का निर्देश दिया गया है।
अल नीनो क्या है?
- अल नीनो एक जटिल मौसम पैटर्न है जो प्रशांत महासागर में भूमध्यरेखीय क्षेत्र के साथ सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने से उत्पन्न होता है।
- यह ‘अल नीनो-दक्षिणी दोलन’ (El Niño-Southern Oscillation – ENSO) चक्र का एक गर्म चरण है, जिसका वैश्विक मौसम पैटर्न पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
- अल नीनो के दौरान, पूर्वी और मध्य प्रशांत महासागर में सतही जल सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है, जिससे पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में ठंडे जल का स्थान ले लेता है।
- यह भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में वर्षा पैटर्न, तापमान और चरम मौसमी घटनाओं को प्रभावित करता है।
- भारत में, अल नीनो आमतौर पर कमजोर मानसून और सूखे की स्थिति से जुड़ा होता है, जिससे कृषि उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- इसके विपरीत, ला नीना (La Niña) ENSO चक्र का ठंडा चरण है, जिसमें पूर्वी प्रशांत महासागर का सतही जल सामान्य से अधिक ठंडा हो जाता है और अक्सर भारत में सामान्य या अधिक मानसून वर्षा से जुड़ा होता है।
- अल नीनो की तीव्रता और अवधि हर बार भिन्न हो सकती है, जिससे इसके प्रभावों का सटीक अनुमान लगाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| सूखाग्रस्त तालुकों की घोषणा | महाराष्ट्र सरकार ने 265 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया है, जो राज्य के कुल 358 तालुकों का 74 प्रतिशत है। यह किसानों को सहायता प्रदान करने का आधार है। |
| फसल निरीक्षण रिपोर्ट | सरकार ने फसल निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करना शुरू कर दिया है ताकि प्रभावित किसानों को उचित सहायता प्रदान की जा सके। यह क्षति आकलन का एक महत्वपूर्ण चरण है। |
| एल नीनो की संभावना | मुख्यमंत्री ने अगले फरवरी में एल नीनो (El Niño) के चरम पर पहुंचने की संभावना जताई है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है। यह भविष्य की तैयारियों के लिए एक चेतावनी है। |
| राहत उपाय | सूखाग्रस्त क्षेत्रों के लिए फसल ऋण पुनर्गठन, भू-राजस्व में रियायतें और बिजली बिलों में सब्सिडी जैसे 12 आपातकालीन उपाय अनुमोदित किए गए हैं। |
| जिला-वार जल योजना | प्रत्येक जिले को अपनी जल योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है ताकि उपलब्ध जल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- सूखाग्रस्त क्षेत्रों में फसल क्षति से कृषि उत्पादन में गिरावट आती है, जिससे किसानों की आय प्रभावित होती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- सरकारी राहत उपायों जैसे ऋण पुनर्गठन और सब्सिडी से किसानों को तात्कालिक वित्तीय सहायता मिलती है, लेकिन इससे राजकोष पर भी बोझ पड़ता है।
सामाजिक महत्व
- सूखा ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा और आजीविका को गंभीर रूप से प्रभावित करता है, जिससे पलायन और सामाजिक तनाव बढ़ सकता है।
- जल संकट से पेयजल की कमी होती है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
पर्यावरणीय महत्व
- एल नीनो जैसी मौसमी घटनाएं जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को उजागर करती हैं, जिससे सूखे की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ सकती है।
- जल संसाधनों के कुप्रबंधन और अत्यधिक दोहन से भूजल स्तर में गिरावट आती है, जिससे दीर्घकालिक पर्यावरणीय असंतुलन पैदा होता है।
शासनिक महत्व
- सूखा घोषणा और राहत उपायों का प्रभावी क्रियान्वयन सरकार की आपदा प्रबंधन क्षमताओं का परीक्षण करता है।
- जिला-वार जल योजनाएं स्थानीय स्तर पर जल प्रबंधन को सुदृढ़ करने और भविष्य के संकटों से निपटने की तैयारी में महत्वपूर्ण हैं।
चुनौतियाँ
1. सूखा आकलन और घोषणा की सटीकता
- कुछ तालुकों को सूखाग्रस्त मानदंड से बाहर रखने की शिकायतें मिली हैं, जिससे प्रभावित किसानों को सहायता से वंचित होने का जोखिम है।
- सूखा आकलन के लिए सटीक और समय पर डेटा संग्रह एक चुनौती है, विशेषकर बड़े भौगोलिक क्षेत्रों में।
यूपीएससी लिंक: आपदा प्रबंधन, कृषि नीतियाँ
2. एल नीनो का बढ़ता प्रभाव
- एल नीनो के अगले फरवरी में चरम पर पहुंचने की संभावना से सूखे की स्थिति और गंभीर हो सकती है, जिससे जल संकट और कृषि क्षति बढ़ सकती है।
- दीर्घकालिक मौसमी पूर्वानुमानों के आधार पर अग्रिम तैयारी और अनुकूलन रणनीतियों का अभाव एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण
3. जल संसाधनों का प्रबंधन
- कुछ सुविधाओं में पानी की बर्बादी की शिकायतें मिली हैं, जो उपलब्ध जल संसाधनों के अक्षम उपयोग को दर्शाती हैं।
- बड़े जलाशयों में पर्याप्त पानी होने के बावजूद, उसका न्यायसंगत वितरण और विभिन्न उपयोगों (रबी फसल, उद्योग, पेयजल) के लिए आवंटन एक जटिल कार्य है।
यूपीएससी लिंक: जल संसाधन, कृषि
4. किसानों को समय पर सहायता
- फसल निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करने और वित्तीय सहायता जारी करने की प्रक्रिया में देरी से किसानों की कठिनाइयाँ बढ़ सकती हैं।
- सभी प्रभावित किसानों को ‘ट्रिगर थ्री’ के तहत शामिल करना सुनिश्चित करना और किसी को भी छूटने न देना एक प्रशासनिक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: कृषि कल्याण, सामाजिक न्याय
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| सूखाग्रस्त तालुकों का निर्धारण | कुछ क्षेत्रों के छूटने की शिकायतें, जिससे सहायता से वंचित होने का जोखिम। |
| एल नीनो का प्रभाव | आगामी महीनों में सूखे की तीव्रता बढ़ने की संभावना। |
| जल का अपव्यय | कुछ सुविधाओं में पानी की बर्बादी, जल प्रबंधन की अक्षमता। |
| राहत वितरण में देरी | फसल निरीक्षण और सहायता वितरण प्रक्रियाओं में समय लगना। |
| दीर्घकालिक जल सुरक्षा | भविष्य के सूखे से निपटने के लिए स्थायी जल प्रबंधन योजनाओं का अभाव। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- फसल ऋण पुनर्गठन योजना
- भू-राजस्व रियायतें
- बिजली बिल सब्सिडी
आगे की राह
- सूखा आकलन मानदंडों की समीक्षा कर उन्हें अधिक समावेशी और सटीक बनाया जाए, ताकि कोई भी प्रभावित क्षेत्र सहायता से वंचित न रहे।
- एल नीनो जैसी मौसमी घटनाओं के लिए अग्रिम चेतावनी प्रणाली और दीर्घकालिक अनुकूलन रणनीतियों को मजबूत किया जाए।
- जल संरक्षण और कुशल जल उपयोग के लिए जन जागरूकता अभियान चलाए जाएं और आधुनिक सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा दिया जाए।
- प्रत्येक जिले के लिए एक व्यापक और एकीकृत जल योजना तैयार की जाए, जिसमें जल उपलब्धता, मांग और विभिन्न उपयोगों के लिए आवंटन शामिल हो।
- फसल निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करने और किसानों को वित्तीय सहायता वितरित करने की प्रक्रिया को डिजिटल और समयबद्ध बनाया जाए।
- सूखा-प्रतिरोधी फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया जाए और किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रेरित किया जाए।
- भूजल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन जैसी तकनीकों को बड़े पैमाने पर लागू किया जाए ताकि दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सूखा प्रबंधन · अल नीनो प्रभाव · फसल निरीक्षण रिपोर्ट · आपदा राहत उपाय · कृषि ऋण पुनर्गठन · भू-राजस्व रियायतें · बिजली बिल सब्सिडी · जल योजना · जलवायु परिवर्तन · राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष · कृषि संकट · खाद्य सुरक्षा
अवधारणा प्रवाह
कम वर्षा और सूखे की स्थिति → राज्य सरकार द्वारा सूखाग्रस्त क्षेत्रों की घोषणा → फसल क्षति और किसानों की आजीविका पर प्रभाव → राहत उपायों की घोषणा (ऋण पुनर्गठन, सब्सिडी) → एल नीनो की संभावना से स्थिति बिगड़ने का डर → फसल निरीक्षण और सहायता वितरण की प्रक्रिया → जिला-वार जल योजनाओं की आवश्यकता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अल नीनो (El Niño) प्रशांत महासागर में एक आवधिक गर्म महासागरीय धारा है जो वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करती है।
2. अल नीनो की घटना आमतौर पर भारत में मानसूनी वर्षा को बढ़ाती है, जिससे सूखे का खतरा कम होता है।
3. भारत में सूखा घोषित करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है। अल नीनो एक जलवायु पैटर्न है जो पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने का वर्णन करता है।
कथन 2 गलत है। अल नीनो की घटना अक्सर भारत में कमजोर मानसून और सूखे से जुड़ी होती है।
कथन 3 गलत है। भारत में सूखा घोषित करने का अधिकार राज्य सरकारों के पास होता है, जो केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों का पालन करती हैं।
Q2. भारत में सूखा घोषित होने पर किसानों को प्रदान की जाने वाली राहत उपायों में निम्नलिखित में से कौन-कौन से शामिल हो सकते हैं?
1. फसल ऋण का पुनर्गठन
2. भू-राजस्व में छूट
3. बिजली बिलों पर सब्सिडी
4. पेयजल आपूर्ति के लिए विशेष प्रावधान
सही विकल्प चुनिए:
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — सूखा घोषित होने पर किसानों को फसल ऋण पुनर्गठन, भू-राजस्व में छूट, बिजली बिलों पर सब्सिडी और पेयजल आपूर्ति के लिए विशेष प्रावधान सहित कई राहत उपाय प्रदान किए जाते हैं। ये सभी उपाय किसानों को सूखे के प्रतिकूल प्रभावों से निपटने में मदद करते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में सूखे के कारणों और परिणामों का विश्लेषण कीजिए। सूखे के प्रभावों को कम करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न उपायों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत में सूखे की आवधिक प्रकृति और कृषि तथा अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव का संक्षिप्त परिचय।
2. सूखे के कारण: भारत में सूखे के प्रमुख कारणों को सूचीबद्ध करें और समझाएं:
क. मानसूनी वर्षा की अनिश्चितता और स्थानिक-कालिक भिन्नता।
ख. अल नीनो (El Niño) और ला नीना (La Niña) जैसे वैश्विक जलवायु पैटर्न का प्रभाव।
ग. वनों की कटाई और पर्यावरणीय क्षरण।
घ. भूजल का अत्यधिक दोहन।
ङ. जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के पैटर्न में बदलाव।
3. सूखे के परिणाम: सूखे के बहुआयामी परिणामों का विश्लेषण करें:
क. कृषि पर प्रभाव: फसल उत्पादन में कमी, पशुधन हानि, किसानों की आय में गिरावट।
ख. आर्थिक प्रभाव: खाद्य मुद्रास्फीति (Inflation), ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव, GDP वृद्धि पर असर।
ग. सामाजिक प्रभाव: ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन, कुपोषण, पेयजल संकट, स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे।
घ. पर्यावरणीय प्रभाव: जैव विविधता का नुकसान, मरुस्थलीकरण।
4. सरकार द्वारा उठाए गए उपाय: सूखे के प्रभावों को कम करने के लिए सरकार के विभिन्न स्तरों पर किए गए उपायों पर चर्चा करें:
क. आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority – NDMA) की भूमिका।
ख. राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (National Disaster Response Fund – NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (State Disaster Response Fund – SDRF) के माध्यम से वित्तीय सहायता।
ग. फसल बीमा योजनाएं: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana – PMFBY)।
घ. जल संरक्षण और प्रबंधन: मनरेगा (MGNREGA) के तहत जल संचयन संरचनाओं का निर्माण, अटल भूजल योजना (Atal Bhujal Yojana), हर खेत को पानी।
ङ. कृषि सहायता: फसल ऋण पुनर्गठन, भू-राजस्व में छूट, बिजली बिलों पर सब्सिडी, बीज और उर्वरक सब्सिडी।
च. सूखा प्रतिरोधी फसलों को बढ़ावा देना और कृषि पद्धतियों में सुधार।
छ. पूर्व चेतावनी प्रणाली और मौसम पूर्वानुमान में सुधार।
5. निष्कर्ष: सूखे के प्रबंधन में एक समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल देते हुए, दीर्घकालिक रणनीतियों और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन उपायों के महत्व पर प्रकाश डालें।
स्रोत: The Hindu
Maharashtra PCS (MPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: महाराष्ट्रातील सध्याच्या दुष्काळाच्या पार्श्वभूमीवर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी व्यक्त केलेल्या ‘एल निनो’च्या संभाव्य परिणामाबाबत खालीलपैकी कोणते विधान अयोग्य आहे?
- एल निनोमुळे महाराष्ट्रातील पर्जन्यमानात घट होण्याची शक्यता आहे.
- एल निनो हा प्रशांत महासागरातील समुद्राच्या पृष्ठभागाच्या तापमानातील बदल आहे.
- एल निनोचा प्रभाव फक्त महाराष्ट्रावरच मर्यादित आहे.
- राज्यातील पीक पाहणी अहवालाचे काम हे दुष्काळाच्या तीव्रतेचे मूल्यांकन करण्यासाठी सुरू करण्यात आले आहे.
उत्तर: एल निनोचा प्रभाव फक्त महाराष्ट्रावरच मर्यादित आहे. — एल निनोचा प्रभाव केवळ महाराष्ट्रापुरताच मर्यादित नाही, तर तो जगभरातील हवामानावर परिणाम करतो.
Mains: महाराष्ट्रातील सध्याच्या दुष्काळाच्या पार्श्वभूमीवर राज्य सरकारने सुरू केलेल्या पीक पाहणी अहवालाच्या कार्यपद्धतीचे विश्लेषण करा. या प्रक्रियेतून राज्याच्या कृषी अर्थव्यवस्थेला कोणत्या प्रकारे मदत होऊ शकते, यावर आपले मत मांडा.
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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