29 Sep यूएन ने नस्लवाद के खिलाफ 25 साल बाद फिर उठाया अभियान, जानिए क्या है नया प्रस्ताव
✎ डरबन घोषणा और कार्य योजना नस्लवाद, भेदभाव और ज़ेनोफ़ोबिया के सभी रूपों का मुकाबला करने के लिए एक वैश्विक खाका है, जो ऐतिहासिक अन्याय और उभरती चुनौतियों दोनों को संबोधित करती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध, सामाजिक न्याय | GS Paper I — भारतीय समाज
- Prelims: डरबन घोषणा और कार्य योजना, नस्लीय भेदभाव उन्मूलन पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा, मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा, नस्लवाद, भेदभाव, ज़ेनोफ़ोबिया
- Essay: नस्लवाद और भेदभाव: वैश्विक चुनौतियाँ और समाधान, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और मानवाधिकारों का संरक्षण
त्वरित पुनरावृत्ति: डरबन घोषणा और कार्य योजना नस्लवाद, भेदभाव और ज़ेनोफ़ोबिया के सभी रूपों का मुकाबला करने के लिए एक वैश्विक खाका है, जो ऐतिहासिक अन्याय और उभरती चुनौतियों दोनों को संबोधित करती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
संयुक्त राष्ट्र के नेताओं ने नस्लवाद (Racism), भेदभाव (Discrimination) और ज़ेनोफ़ोबिया (Xenophobia) के खिलाफ वैश्विक प्रयासों को फिर से सक्रिय करने का आह्वान किया है। इस संदर्भ में एक नई घोषणा को महासभा में औपचारिक रूप से अपनाने के लिए प्रस्तुत किया जाएगा, जो नस्लीय भेदभाव के स्थायी प्रभावों और नई चुनौतियों का सामना करने पर केंद्रित है।
पृष्ठभूमि
- संयुक्त राष्ट्र के गठन के बाद से उपनिवेशवाद (Colonialism) और दक्षिण अफ्रीका में 46 वर्षों के रंगभेद (Apartheid) सहित नस्लवाद की गहरी जड़ें चिंता का विषय रही हैं।
- 1948 में मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (Universal Declaration of Human Rights) को अपनाया गया, जिसने सभी मनुष्यों के लिए समानता और गरिमा के सिद्धांतों को स्थापित किया।
- 1963 में नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा (UN Declaration on the Elimination of All Forms of Racial Discrimination) को अपनाया गया, जो नस्लीय भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
- 1978 में नस्लवाद और नस्लीय भेदभाव का मुकाबला करने के लिए पहला विश्व सम्मेलन (First World Conference to Combat Racism and Racial Discrimination) आयोजित किया गया था।
- 2001 में दक्षिण अफ्रीका में डरबन घोषणा और कार्य योजना (Durban Declaration and Programme of Action) को अपनाया गया, जो नस्लवाद, भेदभाव, ज़ेनोफ़ोबिया और संबंधित असहिष्णुता को समाप्त करने के लिए एक व्यापक खाका प्रदान करता है।
- हाल के वर्षों में नस्लीय भाषणों में वृद्धि और उपनिवेशवाद तथा गुलामी के लिए मुआवजे (Reparations) की मांगों ने वैश्विक स्तर पर इन मुद्दों पर नए सिरे से ध्यान आकर्षित किया है।
डरबन घोषणा और कार्य योजना क्या है?
- डरबन घोषणा और कार्य योजना (DDPA) को 2001 में दक्षिण अफ्रीका के डरबन में नस्लवाद, नस्लीय भेदभाव, ज़ेनोफ़ोबिया और संबंधित असहिष्णुता के खिलाफ विश्व सम्मेलन में अपनाया गया था।
- यह नस्लवाद और भेदभाव के सभी रूपों का मुकाबला करने के लिए एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय ढाँचा प्रदान करता है।
- यह घोषणा नस्लवाद के ऐतिहासिक और समकालीन रूपों को स्वीकार करती है, जिसमें गुलामी (Slavery), उपनिवेशवाद और रंगभेद शामिल हैं, और उनके स्थायी परिणामों पर प्रकाश डालती है।
- DDPA सदस्य राष्ट्रों से नस्लीय भेदभाव को रोकने, उसका मुकाबला करने और उसे समाप्त करने के लिए विधायी, न्यायिक, प्रशासनिक और अन्य उपाय करने का आह्वान करता है।
- यह शिक्षा, जागरूकता और प्रतिनिधित्व की शक्ति पर जोर देता है, विशेष रूप से युवाओं को इन प्रयासों में शामिल करने के लिए।
- घोषणा में नस्लीय भेदभाव के नए और उभरते रूपों, जैसे कि ऑनलाइन घृणास्पद भाषण (Hate Speech) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) द्वारा बढ़ाए गए दुष्प्रचार का भी उल्लेख किया गया है।
- यह घोषणा नस्लीय भेदभाव के पीड़ितों के लिए न्याय और प्रभावी उपचार सुनिश्चित करने के महत्व पर भी बल देती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| डरबन घोषणा और कार्य योजना | नस्लवाद, भेदभाव, ज़ेनोफ़ोबिया और संबंधित असहिष्णुता को समाप्त करने के लिए एक ऐतिहासिक खाका। |
| नई घोषणा | संयुक्त राष्ट्र महासभा में औपचारिक रूप से अपनाई जाने वाली है, जो नस्लवाद के खिलाफ वैश्विक प्रयासों को पुनर्जीवित करेगी। |
| युवाओं की भागीदारी | नस्लवाद के स्थायी प्रभावों का सामना करने और डरबन घोषणा के पूर्ण कार्यान्वयन में युवाओं की केंद्रीय भूमिका पर ज़ोर। |
| प्रौद्योगिकी का प्रभाव | ऑनलाइन घृणास्पद भाषण और दुष्प्रचार के प्रसार में AI जैसी नई प्रौद्योगिकियों की भूमिका पर चिंता। |
| औपनिवेशिक क्षतिपूर्ति | कुछ प्रतिनिधियों द्वारा उपनिवेशवाद और दासता के लिए क्षतिपूर्ति की तत्काल आवश्यकता पर बल। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- यह वैश्विक स्तर पर नस्लवाद और भेदभाव के खिलाफ लड़ाई को मज़बूत करता है, जिससे सभी के लिए गरिमा, समानता और न्याय सुनिश्चित होता है।
- यह युवाओं को इतिहास के बारे में शिक्षित करने और उन्हें नस्लवाद विरोधी प्रयासों में शामिल करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है, जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण है।
मानवाधिकारों का संरक्षण
- यह मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (Universal Declaration of Human Rights) और नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा (UN Declaration on the Elimination of All Forms of Racial Discrimination) जैसे पिछले प्रयासों को आगे बढ़ाता है।
- यह व्यवस्थित नस्लवाद (Systemic Racism) को खत्म करने और समावेशी समाज बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
- यह नस्लवाद, घृणास्पद भाषण और धार्मिक असहिष्णुता से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है, विशेष रूप से ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से।
- यह उपनिवेशवाद और दासता के ऐतिहासिक अन्याय को स्वीकार करने और उनके स्थायी परिणामों को संबोधित करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।
चुनौतियाँ
1. नस्लवाद का पुनरुत्थान
- नस्लवाद के सभी रूपों का खतरनाक पुनरुत्थान, जिसमें घृणास्पद भाषण और धार्मिक असहिष्णुता शामिल है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, मानवाधिकार
2. डिजिटल चुनौतियाँ
- सोशल मीडिया और AI द्वारा घृणास्पद संदेशों का तेज़ी से प्रसार, जो मौजूदा असमानताओं को बढ़ा सकता है।
यूपीएससी लिंक: साइबर सुरक्षा, सामाजिक सशक्तिकरण
3. ऐतिहासिक अन्याय
- दासता और उपनिवेशवाद की स्थायी विरासत और उनके लिए क्षतिपूर्ति की मांग।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, सामाजिक न्याय
4. शिक्षा और प्रतिनिधित्व
- युवाओं को इतिहास के उन पहलुओं से अवगत न कराना जिन्होंने संस्थानों और समाजों को आकार दिया है, और प्रतिनिधित्व की कमी।
यूपीएससी लिंक: शिक्षा, सामाजिक सशक्तिकरण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| नस्लवाद और भेदभाव | वैश्विक स्तर पर नस्लवाद, भेदभाव और ज़ेनोफ़ोबिया का खतरनाक पुनरुत्थान। |
| ऑनलाइन घृणास्पद भाषण | सोशल मीडिया और AI के माध्यम से घृणास्पद संदेशों और दुष्प्रचार का तेज़ी से प्रसार। |
| ऐतिहासिक अन्याय | दासता और उपनिवेशवाद के स्थायी परिणाम और क्षतिपूर्ति की आवश्यकता। |
| युवाओं की शिक्षा | युवाओं को उन ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में शिक्षित करने की कमी जिन्होंने वर्तमान समाजों को आकार दिया है। |
| प्रौद्योगिकी का दुरुपयोग | नई प्रौद्योगिकियों का उपयोग मौजूदा संरचनात्मक असमानताओं को बनाए रखने या बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। |
आगे की राह
- डरबन घोषणा और कार्य योजना के सिद्धांतों का पूर्ण और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
- नस्लवाद, घृणास्पद भाषण और धार्मिक असहिष्णुता से निपटने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से मज़बूत कानूनी और नीतिगत ढाँचे विकसित करना।
- युवाओं को नस्लवाद विरोधी प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल करना और उन्हें इतिहास की सटीक और सुलभ शैक्षिक सामग्री प्रदान करना।
- नई प्रौद्योगिकियों, विशेष रूप से AI के नैतिक और ज़िम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना ताकि वे सतत विकास में योगदान दें और असमानताओं को न बढ़ाएँ।
- उपनिवेशवाद और दासता के ऐतिहासिक अन्याय को स्वीकार करना और उनके स्थायी परिणामों को संबोधित करने के लिए संवाद और तंत्र स्थापित करना।
- प्रतिनिधित्व और समावेशिता को बढ़ावा देना ताकि सभी समुदायों को समाज के हर पहलू में समान अवसर मिलें।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मज़बूत करना ताकि नस्लवाद और भेदभाव के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में सामूहिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
डरबन घोषणा और कार्य योजना · नस्लीय भेदभाव · मानव अधिकार · उपनिवेशवाद · दासता · घृणास्पद भाषण · डिजिटल शिक्षा · संयुक्त राष्ट्र · सामाजिक न्याय · प्रौद्योगिकी का दुरुपयोग · क्षतिपूर्ति
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 14’, ‘note’: ‘कानून के समक्ष समानता’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 15’, ‘note’: ‘धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 17’, ‘note’: ‘अस्पृश्यता का उन्मूलन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण’}
अवधारणा प्रवाह
नस्लवाद और भेदभाव का पुनरुत्थान → अंतर्राष्ट्रीय चिंता और संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया → डरबन घोषणा और नई घोषणा का मसौदा → युवाओं की भागीदारी और शिक्षा का महत्व → डिजिटल चुनौतियों और ऐतिहासिक अन्याय का समाधान
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. डरबन घोषणा और कार्य योजना (Durban Declaration and Programme of Action) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इसे 2001 में दक्षिण अफ्रीका में अपनाया गया था।
2. यह नस्लवाद, भेदभाव, ज़ेनोफोबिया और संबंधित असहिष्णुता को समाप्त करने के लिए एक खाका है।
3. हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक नई घोषणा प्रस्तुत की गई है जो डरबन घोषणा के सिद्धांतों को सुदृढ़ करती है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि डरबन घोषणा को 2001 में दक्षिण अफ्रीका में अपनाया गया था। कथन 2 भी सही है क्योंकि यह नस्लवाद, भेदभाव, ज़ेनोफोबिया और संबंधित असहिष्णुता को समाप्त करने के लिए एक व्यापक खाका प्रदान करता है। कथन 3 भी सही है क्योंकि हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों ने नस्लवाद, भेदभाव और ज़ेनोफोबिया के खिलाफ वैश्विक प्रयासों को फिर से सक्रिय करने के लिए एक नई घोषणा प्रस्तुत की है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन सा/से संयुक्त राष्ट्र का/के नस्लीय भेदभाव के उन्मूलन से संबंधित प्रयास है/हैं?
1. मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (Universal Declaration of Human Rights) (1948)
2. नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा (UN Declaration on the Elimination of All Forms of Racial Discrimination) (1963)
3. नस्लवाद और नस्लीय भेदभाव का मुकाबला करने के लिए पहला विश्व सम्मेलन (First World Conference to Combat Racism and Racial Discrimination) (1978)
सही विकल्प चुनें:
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — दिए गए सभी विकल्प संयुक्त राष्ट्र के नस्लीय भेदभाव के उन्मूलन से संबंधित प्रयासों का हिस्सा हैं। मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा ने सभी मनुष्यों के लिए समानता और गरिमा के सिद्धांत स्थापित किए। 1963 की घोषणा ने नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों को समाप्त करने के लिए विशिष्ट प्रावधान किए। 1978 का सम्मेलन नस्लवाद के खिलाफ वैश्विक प्रयासों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ नस्लवाद और नस्लीय भेदभाव के खिलाफ वैश्विक प्रयासों में डरबन घोषणा और कार्य योजना (Durban Declaration and Programme of Action) के महत्व का परीक्षण करें। साथ ही, चर्चा करें कि आधुनिक तकनीकें, जैसे कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सोशल मीडिया, इन प्रयासों के लिए नई चुनौतियाँ कैसे प्रस्तुत करती हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: डरबन घोषणा और कार्य योजना (DDPA) का संक्षिप्त परिचय दें – कब और कहाँ अपनाया गया, इसका मुख्य उद्देश्य।
2. DDPA का महत्व: नस्लवाद और नस्लीय भेदभाव के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में इसके महत्व को विस्तार से समझाएँ। इसमें शामिल बिंदु हो सकते हैं:
a. नस्लवाद के विभिन्न रूपों (ज़ेनोफोबिया, संबंधित असहिष्णुता) को संबोधित करना।
b. उपनिवेशवाद और दासता की स्थायी विरासत को स्वीकार करना।
c. सदस्य देशों के लिए एक व्यापक खाका और प्रतिबद्धता प्रदान करना।
d. शिक्षा और प्रतिनिधित्व के महत्व पर जोर देना।
e. संयुक्त राष्ट्र के पूर्ववर्ती प्रयासों (जैसे 1948 की मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा, 1963 की नस्लीय भेदभाव के उन्मूलन पर घोषणा) के साथ इसका संबंध।
3. आधुनिक तकनीकों द्वारा प्रस्तुत चुनौतियाँ:
a. घृणास्पद भाषण (hate speech) और गलत सूचना का तेजी से प्रसार: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भूमिका।
b. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा सूचना और दुष्प्रचार का प्रवर्धन।
c. मौजूदा संरचनात्मक असमानताओं को बनाए रखने या बढ़ाने में प्रौद्योगिकी का संभावित दुरुपयोग।
d. ऑनलाइन और ऑफलाइन नस्लवाद का मुकाबला करने की आवश्यकता।
4. समाधान और आगे का रास्ता: इन चुनौतियों का सामना करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, जिम्मेदार प्रौद्योगिकी उपयोग, डिजिटल शिक्षा और युवा भागीदारी के महत्व पर प्रकाश डालें।
5. निष्कर्ष: नस्लवाद के खिलाफ लड़ाई में DDPA की प्रासंगिकता और बदलते वैश्विक परिदृश्य में इसके सिद्धांतों को लागू करने की निरंतर आवश्यकता पर बल दें।
स्रोत: news.un.org
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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