29 Sep भारत-अमेरिका संबंधों में सीमापार आतंकवाद की चिंता क्यों है महत्वपूर्ण? जानिए क्या बोले एस. जयशंकर
✎ भारत की विदेश नीति में सीमा-पार आतंकवाद एक केंद्रीय चिंता का विषय है, और इस पर अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों की समझ द्विपक्षीय संबंधों की गहराई को प्रभावित करती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा
- Prelims: भारत-अमेरिका संबंध, सीमा-पार आतंकवाद, आतंकवाद का वित्तपोषण, संयुक्त राष्ट्र महासभा, भारत की विदेश नीति
- Essay: अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में आतंकवाद का प्रभाव, भारत की विदेश नीति के समक्ष चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत की विदेश नीति में सीमा-पार आतंकवाद एक केंद्रीय चिंता का विषय है, और इस पर अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों की समझ द्विपक्षीय संबंधों की गहराई को प्रभावित करती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के समापन के बाद न्यूयॉर्क में एक विशेष वार्ता के दौरान कहा कि यदि भारत के साझेदार देश, विशेष रूप से अमेरिका, सीमा-पार आतंकवाद (Cross-border terrorism) के प्रति भारत की चिंताओं को पूरी तरह से नहीं समझते हैं, तो इसका द्विपक्षीय संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान से होने वाला आतंकवाद भारत के लिए एक प्राथमिक चिंता का विषय है, और इस मुद्दे पर समझ की कमी से भारत-अमेरिका संबंधों में बाधा उत्पन्न हो सकती है, खासकर जब अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में हाल ही में सुधार देखा गया है।
पृष्ठभूमि
- भारत दशकों से अपने पड़ोसी देश से प्रायोजित सीमा-पार आतंकवाद का सामना कर रहा है, जिसे भारत अपनी सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा मानता है।
- भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र में, आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की है और इसके खिलाफ वैश्विक सहयोग का आह्वान किया है।
- भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी में हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है, जिसमें रक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग शामिल है।
- हालांकि, कुछ मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं, जिनमें व्यापार शुल्क, रूस से ऊर्जा खरीद और पाकिस्तान के साथ अमेरिका का फिर से जुड़ाव शामिल है।
- अमेरिका ने ऐतिहासिक रूप से आतंकवाद विरोधी प्रयासों में भारत का समर्थन किया है, लेकिन पाकिस्तान के साथ उसके अपने रणनीतिक संबंध भी रहे हैं, जो कभी-कभी भारत की चिंताओं के साथ टकराते हैं।
सीमा-पार आतंकवाद क्या है?
- सीमा-पार आतंकवाद (Cross-border terrorism) से तात्पर्य उस आतंकवाद से है जो एक देश की सीमा से निकलकर दूसरे देश में संचालित होता है।
- इसमें आतंकवादी समूहों को एक राज्य द्वारा समर्थन, प्रशिक्षण, वित्तपोषण या सुरक्षित पनाहगाह प्रदान करना शामिल हो सकता है ताकि वे पड़ोसी देश में हमले कर सकें।
- यह अक्सर राजनीतिक, वैचारिक या क्षेत्रीय विवादों से प्रेरित होता है, और इसका उद्देश्य लक्ष्य देश में अस्थिरता पैदा करना होता है।
- भारत के संदर्भ में, यह मुख्य रूप से पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों द्वारा भारत में किए जाने वाले हमलों को संदर्भित करता है।
- इस प्रकार के आतंकवाद से प्रभावित देशों को आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों, आर्थिक नुकसान और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में तनाव का सामना करना पड़ता है।
- अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत, किसी भी देश को दूसरे देश के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने या समर्थन देने की अनुमति नहीं है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| सीमा पार आतंकवाद | भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए प्राथमिक चिंता का विषय। |
| द्विपक्षीय संबंध | आतंकवाद पर समझ की कमी भारत-अमेरिका संबंधों को प्रभावित करती है। |
| साझेदार देशों की संवेदनशीलता | प्रत्येक देश की प्राथमिक चिंताओं को समझना द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है। |
| अमेरिका-पाकिस्तान संबंध | हाल के वर्षों में अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में सुधार देखा गया है, जिससे भारत की चिंताएँ बढ़ी हैं। |
| व्यापार और शुल्क | भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापार और शुल्क से संबंधित मुद्दे भी तनाव का कारण रहे हैं। |
महत्व
सामरिक महत्व
- भारत के लिए सीमा पार आतंकवाद एक गंभीर सुरक्षा चुनौती है, जो दशकों से पड़ोसी देश द्वारा प्रायोजित है।
- अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की स्थिति को समझना और उसका समर्थन करना वैश्विक आतंकवाद विरोधी प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण है।
द्विपक्षीय संबंधों पर प्रभाव
- साझेदार देशों द्वारा भारत की प्राथमिक सुरक्षा चिंताओं की अपर्याप्त समझ द्विपक्षीय संबंधों में विश्वास और सहयोग को कमजोर कर सकती है।
- अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में सुधार भारत के लिए चिंता का विषय है, खासकर जब यह आतंकवाद विरोधी सहयोग को प्रभावित करता हो।
भू-राजनीतिक निहितार्थ
- भारत-अमेरिका संबंध हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और शक्ति संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- आतंकवाद पर मतभेद क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।
चुनौतियाँ
1. सीमा पार आतंकवाद की चुनौती
- भारत दशकों से एक पड़ोसी देश से प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद का सामना कर रहा है, जिसे भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा मानता है।
- आतंकवादी समूहों द्वारा किए गए हमलों से जान-माल का नुकसान होता है और क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन
2. साझेदारों की समझ का अभाव
- भारत की प्राथमिक सुरक्षा चिंताओं, विशेष रूप से आतंकवाद के मुद्दे पर, उसके प्रमुख साझेदारों द्वारा पर्याप्त समझ या सहानुभूति की कमी संबंधों में समस्याएँ पैदा करती है।
- यह संबंधों में विश्वास और सहयोग के स्तर को प्रभावित करता है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, भारत की विदेश नीति
3. अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में उतार-चढ़ाव
- अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में हालिया सुधार भारत के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि पाकिस्तान का आतंकवाद का इतिहास रहा है।
- यह भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, भारत और उसके पड़ोसी
4. व्यापार और आर्थिक मुद्दे
- व्यापार शुल्क और अन्य आर्थिक मुद्दों पर मतभेद भी भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव का कारण रहे हैं।
- ये मुद्दे समग्र द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति को बाधित कर सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, भारत की अर्थव्यवस्था
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सीमा पार आतंकवाद | भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा। |
| साझेदारों की समझ की कमी | द्विपक्षीय संबंधों में विश्वास और सहयोग पर नकारात्मक प्रभाव। |
| अमेरिका-पाकिस्तान संबंध | क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी प्रयासों पर संभावित प्रभाव। |
| व्यापार और शुल्क | द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों में तनाव और बाधाएँ। |
| संवेदनशीलताओं की उपेक्षा | प्रत्येक देश की प्राथमिक चिंताओं को पर्याप्त महत्व न देना। |
आगे की राह
- भारत को सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर अपने साझेदारों के साथ निरंतर और गहन संवाद बनाए रखना चाहिए, जिसमें ठोस सबूत और खुफिया जानकारी साझा की जाए।
- आतंकवाद विरोधी सहयोग को मजबूत करने के लिए बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय रूप से भागीदारी करनी चाहिए और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों को लागू करने पर जोर देना चाहिए।
- साझेदार देशों को भारत की सुरक्षा चिंताओं की गंभीरता को समझने और उन्हें प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
- अमेरिका के साथ व्यापार और आर्थिक मुद्दों को रचनात्मक संवाद के माध्यम से हल करने का प्रयास करना चाहिए, ताकि समग्र संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
- क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए समान विचारधारा वाले देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना चाहिए।
- आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित पनाहगाहों को खत्म करने के लिए वैश्विक प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
भारत-अमेरिका संबंध · सीमा पार आतंकवाद · द्विपक्षीय संबंध · राष्ट्रीय सुरक्षा · अंतर्राष्ट्रीय संबंध · कूटनीति · आतंकवाद का वित्तपोषण · आतंकवाद विरोधी सहयोग · क्षेत्रीय स्थिरता · सामरिक साझेदारी · संयुक्त राष्ट्र महासभा · पाकिस्तान
अवधारणा प्रवाह
पड़ोसी देश से सीमा पार आतंकवाद → भारत की प्राथमिक सुरक्षा चिंता → साझेदारों द्वारा अपर्याप्त समझ/सहानुभूति → द्विपक्षीय संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव → समग्र सहयोग में बाधा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच ‘2+2’ मंत्रिस्तरीय वार्ता दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच आयोजित की जाती है।
2. संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत को ‘प्रमुख रक्षा भागीदार’ (Major Defence Partner) का दर्जा दिया है।
3. भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का स्थायी सदस्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। ‘2+2’ वार्ता भारत और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक तंत्र है, जिसमें दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री शामिल होते हैं। कथन 2 भी सही है। अमेरिका ने भारत को ‘प्रमुख रक्षा भागीदार’ का दर्जा दिया है, जिससे उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण की सुविधा मिलती है। कथन 3 गलत है। भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य नहीं है, बल्कि वह अस्थायी सदस्य के रूप में कई बार चुना गया है।
Q2. अभिकथन (A): सीमा पार आतंकवाद भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती है।
कारण (R): भारत के पड़ोसी देश से प्रायोजित आतंकवाद ने भारत के आंतरिक सुरक्षा परिदृश्य को लगातार प्रभावित किया है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि सीमा पार आतंकवाद भारत के लिए एक प्रमुख सुरक्षा चिंता है। कारण (R) भी सही है और यह A की सही व्याख्या करता है, क्योंकि भारत को दशकों से एक पड़ोसी देश से प्रायोजित आतंकवाद का सामना करना पड़ा है, जिसने इसकी आंतरिक सुरक्षा को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत-अमेरिका संबंधों में सीमा पार आतंकवाद की समझ की कमी द्विपक्षीय संबंधों को कैसे प्रभावित करती है? इस चुनौती का समाधान करने के लिए भारत द्वारा अपनाई जा सकने वाली कूटनीतिक रणनीतियों का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: भारत-अमेरिका संबंधों के महत्व और सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर संक्षिप्त पृष्ठभूमि दें।
पहला भाग: सीमा पार आतंकवाद की समझ की कमी का प्रभाव
* राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव: भारत की आंतरिक सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा।
* द्विपक्षीय विश्वास में कमी: यदि एक प्रमुख भागीदार भारत की प्राथमिक चिंताओं को पूरी तरह से नहीं समझता है तो विश्वास में कमी आती है।
* सामरिक साझेदारी पर असर: रक्षा, व्यापार और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर नकारात्मक प्रभाव।
* क्षेत्रीय भू-राजनीति: अमेरिका के अन्य क्षेत्रीय भागीदारों, विशेष रूप से पाकिस्तान के साथ संबंधों का भारत पर प्रभाव।
* कूटनीतिक असंतुलन: भारत की चिंताओं को पर्याप्त महत्व न दिए जाने से उत्पन्न असंतुलन।
दूसरा भाग: कूटनीतिक रणनीतियाँ
* निरंतर संवाद और स्पष्टीकरण: उच्च-स्तरीय वार्ताओं (जैसे ‘2+2’ वार्ता) में भारत की चिंताओं को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना।
* खुफिया जानकारी साझाकरण: आतंकवाद से संबंधित खुफिया जानकारी और साक्ष्य को नियमित रूप से साझा करना ताकि अमेरिकी नीति निर्माताओं को स्थिति की गंभीरता का एहसास हो।
* बहुपक्षीय मंचों का उपयोग: संयुक्त राष्ट्र (UN), FATF (वित्तीय कार्रवाई कार्य बल) जैसे मंचों पर आतंकवाद के मुद्दे को उठाना और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से समर्थन प्राप्त करना।
* आतंकवाद विरोधी सहयोग का विस्तार: संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभ्यास, क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाना।
* क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर: यह समझाना कि सीमा पार आतंकवाद न केवल भारत बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए खतरा है, जिससे अमेरिकी हितों पर भी असर पड़ सकता है।
* आर्थिक और रणनीतिक लाभ: भारत की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति का लाभ उठाते हुए अमेरिका को अपनी चिंताओं को गंभीरता से लेने के लिए प्रेरित करना।
निष्कर्ष: भारत-अमेरिका संबंधों के महत्व को दोहराते हुए, आतंकवाद के मुद्दे पर आपसी समझ और सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दें ताकि एक मजबूत और स्थायी साझेदारी का निर्माण हो सके।
स्रोत: orissapost.com
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