30 Sep जम्मू-कश्मीर: अनुच्छेद 370 से राज्यत्व तक का संवैधानिक सफर

✎ जम्मू-कश्मीर का संवैधानिक दर्जा अनुच्छेद 370 के तहत विशेष स्वायत्तता से लेकर 2019 के पुनर्गठन अधिनियम के माध्यम से केंद्र शासित प्रदेश बनने तक विकसित हुआ है, और अब राज्य के दर्जे की बहाली की मांग एक प्रमुख राजनीतिक और संवैधानिक…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS पेपर II — भारतीय संविधान, संघवाद, राज्य पुनर्गठन | GS पेपर II — केंद्र-राज्य संबंध
- Prelims: अनुच्छेद 370, अनुच्छेद 35A, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019, अधिमिलन पत्र, दिल्ली समझौता 1952, संघवाद, राज्य का दर्जा
- Essay: भारतीय संघवाद की चुनौतियाँ और विकास, भारत में क्षेत्रीय स्वायत्तता और राष्ट्रीय एकता का संतुलन
त्वरित पुनरावृत्ति: जम्मू-कश्मीर का संवैधानिक दर्जा अनुच्छेद 370 के तहत विशेष स्वायत्तता से लेकर 2019 के पुनर्गठन अधिनियम के माध्यम से केंद्र शासित प्रदेश बनने तक विकसित हुआ है, और अब राज्य के दर्जे की बहाली की मांग एक प्रमुख राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य के दर्जे की तत्काल बहाली की मांग करने वाला एक प्रस्ताव पेश किया गया। इस प्रस्ताव में कुछ संशोधनों का भी उल्लेख किया गया था, जिनमें 5 अगस्त, 2019 से पहले मौजूद अनुच्छेद 370 और 35A को शामिल करने की मांग की गई थी। हालाँकि, इन संशोधनों को बाद में वापस ले लिया गया, लेकिन इसने जम्मू-कश्मीर से जुड़े विभिन्न संवैधानिक प्रावधानों को एक बार फिर से चर्चा में ला दिया है।
पृष्ठभूमि
- अक्टूबर 1947 में, जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन शासक राजा हरि सिंह ने भारत के साथ अधिमिलन पत्र (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बन गया।
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान किया, जिसके तहत संसद केवल रक्षा, विदेश संबंध और संचार जैसे तीन विषयों पर ही कानून बना सकती थी।
- जम्मू-कश्मीर को अपना अलग संविधान रखने की अनुमति थी, जो संघ के अन्य राज्यों से अलग था।
- 5 अगस्त, 2019 को, भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के माध्यम से राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों – जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया।
- इस कदम के बाद से, जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग लगातार उठाई जा रही है।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने 1948 में संकल्प 47 पारित किया था, जिसमें जम्मू-कश्मीर के लोगों की इच्छा निर्धारित करने के लिए जनमत संग्रह कराने हेतु दोनों पक्षों को विसैन्यीकरण (demilitarise) करने को कहा गया था। हालाँकि, विसैन्यीकरण कभी नहीं हुआ, जिससे यह प्रस्ताव अप्रभावी रहा।
जम्मू-कश्मीर का संवैधानिक दर्जा: एक विस्तृत अवलोकन
- अनुच्छेद 370: यह भारतीय संविधान का एक अस्थायी प्रावधान था जो जम्मू-कश्मीर को विशेष स्वायत्तता प्रदान करता था। इसके तहत, भारतीय संसद के कानून केवल रक्षा, विदेश मामले और संचार तक ही सीमित थे, जब तक कि राज्य सरकार की सहमति न हो।
- अनुच्छेद 35A: यह अनुच्छेद 370 से निकला था और जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासियों को विशेष अधिकार और विशेषाधिकार प्रदान करता था।
- अधिमिलन पत्र (Instrument of Accession): यह कानूनी दस्तावेज था जिस पर राजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर, 1947 को हस्ताक्षर किए थे, जिसके माध्यम से जम्मू-कश्मीर रियासत भारत संघ में शामिल हुई।
- दिल्ली समझौता 1952: यह भारत सरकार और जम्मू-कश्मीर सरकार के बीच एक समझौता था जिसने राज्य के विशेष दर्जे को बनाए रखते हुए कुछ भारतीय संवैधानिक प्रावधानों को जम्मू-कश्मीर तक विस्तारित किया।
- जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019: इस अधिनियम ने अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया और जम्मू-कश्मीर राज्य को जम्मू-कश्मीर (विधानमंडल सहित) और लद्दाख (विधानमंडल रहित) नामक दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया।
- राज्य का दर्जा: यह एक पूर्ण राज्य होने की स्थिति को संदर्भित करता है, जिसमें एक निर्वाचित विधानसभा और राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाने की शक्ति होती है, जो केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में अधिक स्वायत्तता प्रदान करती है।
- संघवाद (Federalism): यह सरकार की एक प्रणाली है जिसमें शक्ति केंद्र सरकार और विभिन्न क्षेत्रीय सरकारों (राज्यों) के बीच विभाजित होती है। जम्मू-कश्मीर का मामला भारतीय संघवाद के भीतर विशेष व्यवस्थाओं का एक उदाहरण रहा है।
- न्यायिक समीक्षा (Judicial Review): भारतीय न्यायपालिका के पास विधायी और कार्यकारी कार्यों की संवैधानिकता की जांच करने की शक्ति है, जैसा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के संबंध में विभिन्न याचिकाओं में देखा गया।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अनुच्छेद 370 | जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करता था, जिससे संसद केवल रक्षा, विदेश संबंध और संचार जैसे विषयों पर कानून बना सकती थी। |
| जम्मू और कश्मीर का अपना संविधान | यह राज्य को संघ के अन्य राज्यों से अलग पहचान देता था। |
| प्रवेश पत्र (Instrument of Accession) | जम्मू और कश्मीर रियासत को भारत का हिस्सा बनाने का आधार, जिसमें रक्षा, विदेश संबंध और संचार विषय शामिल थे। |
| अनुच्छेद 1 का अनुप्रयोग | भारत के क्षेत्र को परिभाषित करने वाला अनुच्छेद 1, अनुच्छेद 370 के साथ जम्मू और कश्मीर पर लागू होता था। |
| बाहरी लोगों के लिए प्रतिबंध | राज्य में बाहरी लोगों को भूमि खरीदने या बिना परमिट के यात्रा करने पर प्रतिबंध था। |
महत्व
संवैधानिक महत्व
- अनुच्छेद 370 ने जम्मू और कश्मीर को भारतीय संघ के भीतर एक अद्वितीय संवैधानिक स्थिति प्रदान की, जो अन्य राज्यों से भिन्न थी।
- इसने राज्य को अपना संविधान और कानून बनाने की स्वायत्तता दी, जिससे केंद्र के विधायी अधिकार सीमित हो गए।
राजनीतिक महत्व
- राज्य के दर्जे की बहाली की मांग जम्मू और कश्मीर की राजनीतिक पहचान और स्वायत्तता की आकांक्षाओं को दर्शाती है।
- अनुच्छेद 370 और 35A को हटाने के बाद राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं, जिससे विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
ऐतिहासिक महत्व
- अनुच्छेद 370 का निर्माण जम्मू और कश्मीर के भारत में विलय की विशिष्ट परिस्थितियों और तत्कालीन राजनीतिक-सुरक्षा चुनौतियों से जुड़ा था।
- यह भारत के विभाजन और संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दे के समाधान के प्रयासों के साथ-साथ विकसित हुआ।
चुनौतियाँ
1. राज्य के दर्जे की बहाली
- जम्मू और कश्मीर के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग एक प्रमुख राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती है।
- इस बहाली की समय-सीमा और प्रक्रिया पर विभिन्न हितधारकों के बीच आम सहमति का अभाव है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संघ और उसके क्षेत्र
2. संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या
- अनुच्छेद 370 और 35A को निरस्त करने की संवैधानिक वैधता पर कानूनी चुनौतियां जारी हैं।
- भविष्य में ऐसे संवैधानिक परिवर्तनों के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण होंगी।
यूपीएससी लिंक: संविधान की मूल संरचना
3. सुरक्षा और विकास
- राज्य में सुरक्षा स्थिति बनाए रखना और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना एक सतत चुनौती है।
- स्थानीय आबादी की आकांक्षाओं को पूरा करते हुए शांति और स्थिरता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा चुनौतियाँ
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| राज्य के दर्जे की बहाली | स्थानीय आबादी की राजनीतिक आकांक्षाओं और पहचान का प्रश्न। |
| अनुच्छेद 370 का निरसन | संवैधानिक वैधता और भविष्य में ऐसे परिवर्तनों के लिए मिसाल। |
| राजनीतिक एकीकरण | जम्मू और कश्मीर को मुख्यधारा में पूरी तरह से एकीकृत करने की प्रक्रिया। |
| विकास और निवेश | क्षेत्र में आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन की आवश्यकता। |
आगे की राह
- जम्मू और कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने के लिए विधानसभा चुनाव शीघ्र आयोजित किए जाएं।
- राज्य के दर्जे की बहाली पर एक स्पष्ट रोडमैप और समय-सीमा प्रस्तुत की जाए।
- स्थानीय आबादी की राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक आकांक्षाओं को संबोधित करने के लिए व्यापक संवाद स्थापित किया जाए।
- क्षेत्र में आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए विशेष नीतियां और निवेश आकर्षित किए जाएं।
- सुरक्षा स्थिति को और बेहतर बनाने और आतंकवाद को समाप्त करने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएं।
- जम्मू और कश्मीर के लोगों के बीच विश्वास बहाली के उपायों को प्राथमिकता दी जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अनुच्छेद 370 · जम्मू और कश्मीर का विशेष दर्जा · अधिमिलन पत्र · राज्य का दर्जा · संघवाद · संवैधानिक संशोधन · जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम · अनुच्छेद 35A · संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 47 · दिल्ली समझौता 1952
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 370’, ‘note’: ‘जम्मू और कश्मीर का विशेष दर्जा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 1’, ‘note’: ‘भारत के क्षेत्र को परिभाषित करता है’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 35A’, ‘note’: ‘राज्य के स्थायी निवासियों के अधिकार’}
अवधारणा प्रवाह
राजा हरि सिंह द्वारा भारत में विलय → अनुच्छेद 370 का संविधान में शामिल होना → जम्मू और कश्मीर को विशेष संवैधानिक दर्जा → अनुच्छेद 370 और 35A का निरसन → जम्मू और कश्मीर का केंद्र शासित प्रदेश बनना → राज्य के दर्जे की बहाली की मांग
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370 जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करता था, जिसके तहत संसद केवल रक्षा, विदेश संबंध और संचार जैसे विषयों पर कानून बना सकती थी।
2. जम्मू और कश्मीर का अपना संविधान था, जो संघ के अन्य राज्यों से अलग था।
3. राजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर, 1947 को अधिमिलन पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। अनुच्छेद 370 जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देता था और संसद की विधायी शक्तियों को रक्षा, विदेश संबंध और संचार तक सीमित करता था। कथन 2 भी सही है। जम्मू और कश्मीर का अपना संविधान था। कथन 3 भी सही है। राजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर, 1947 को अधिमिलन पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।
Q2. अभिकथन (A): अनुच्छेद 370 को संविधान सभा द्वारा 17 अक्टूबर, 1949 को अपनाया गया था।
कारण (R): उस समय जम्मू और कश्मीर राज्य का एक हिस्सा विद्रोहियों और दुश्मनों के हाथों में था, और संयुक्त राष्ट्र के साथ उलझा हुआ था।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है कि अनुच्छेद 370 को 17 अक्टूबर, 1949 को अपनाया गया था। कारण (R) भी सही है और यह अभिकथन की सही व्याख्या करता है, जैसा कि मसौदा समिति के सदस्य एन. गोपालस्वामी आयंगर ने संविधान सभा में बताया था कि राज्य उस समय पूर्ण एकीकरण के लिए तैयार नहीं था क्योंकि उसका एक हिस्सा विद्रोहियों के नियंत्रण में था और संयुक्त राष्ट्र के साथ मामला लंबित था।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ जम्मू और कश्मीर के संवैधानिक दर्जे के विकास में अनुच्छेद 370 और अधिमिलन पत्र की भूमिका का परीक्षण कीजिए। क्या राज्य के दर्जे की बहाली संघवाद के सिद्धांतों को मजबूत करेगी? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय में जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे का संक्षिप्त उल्लेख करें। पहले भाग में, अनुच्छेद 370 के प्रावधानों (रक्षा, विदेश संबंध, संचार तक सीमित संसद की शक्ति, जम्मू-कश्मीर का अपना संविधान) और अधिमिलन पत्र (राजा हरि सिंह द्वारा हस्ताक्षर, भारत में विलय का आधार) की भूमिका का विस्तार से परीक्षण करें। इसमें 2019 से पहले की स्थिति और इसके ऐतिहासिक संदर्भ को शामिल करें। दूसरे भाग में, राज्य के दर्जे की बहाली के मुद्दे पर चर्चा करें। संघवाद (federalism) के सिद्धांतों (शक्तियों का विकेंद्रीकरण, राज्यों की स्वायत्तता) के संदर्भ में विश्लेषण करें कि कैसे राज्य का दर्जा बहाल करना इन सिद्धांतों को मजबूत कर सकता है। इसमें जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के प्रभावों और केंद्र शासित प्रदेश के रूप में वर्तमान स्थिति का भी उल्लेख करें। निष्कर्ष में, संवैधानिक विकास और संघवाद के भविष्य पर एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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