अमित शाह भोपाल में गौपालक सम्मेलन को संबोधित करेंगे, न्याय संहिता प्रदर्शनी का उद्घाटन

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अमित शाह भोपाल में गौपालक सम्मेलन को संबोधित करेंगे, न्याय संहिता प्रदर्शनी का उद्घाटन

डेयरी सहकारिता विकास प्रक्रियानिवेश एवं योजना₹255 करोड़अनावरण एवं भूमिपूजनपरियोजनाएँडेयरी प्रसंस्करणक्षमता वृद्धिआय एवं भागीदारीमहिला पशुपालकोंग्रामीण अर्थव्यवस्थासशक्तिकरण
डेयरी सहकारिता विकास प्रक्रिया

✎ सहकारिता क्षेत्र, विशेषकर डेयरी सहकारिता, ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जबकि न्याय संहिता सुशासन और प्रभावी न्याय वितरण के लिए आवश्यक है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, नागरिक चार्टर  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय; कृषि मुख्य फसलें, विभिन्न प्रकार की सिंचाई प्रणालियाँ, कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएँ; पशुपालन का अर्थशास्त्र
  • Prelims: सहकार से समृद्धि, डेयरी सहकारिता, न्याय संहिता, गौपालक सम्मेलन, दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र, KRIBHCO, डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना, सहकारी समितियाँ
  • Essay: ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्तिकरण: सहकारिता की भूमिका, न्याय और सुशासन: आधुनिक भारत की चुनौतियाँ और समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: सहकारिता क्षेत्र, विशेषकर डेयरी सहकारिता, ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जबकि न्याय संहिता सुशासन और प्रभावी न्याय वितरण के लिए आवश्यक है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने भोपाल में गौपालक सम्मेलन को संबोधित किया और न्याय संहिता पर राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने मध्य प्रदेश में डेयरी और सहकारिता क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया, जिसमें दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्रों का विकास और गौशालाओं को सहायता राशि का वितरण शामिल है।

पृष्ठभूमि

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विज़न के तहत देश के सहकारिता क्षेत्र को सशक्त, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनेक पहल की जा रही हैं।
  • सहकारी संस्थाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की समृद्धि का प्रभावी माध्यम बनाने पर विशेष बल दिया जा रहा है।
  • डेयरी सहकारिता के माध्यम से पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और विशेष रूप से महिला सदस्यों की आय एवं आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
  • न्याय संहिता (Nyaya Sanhita) के क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश पुलिस की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए एक राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया।
  • मध्य प्रदेश में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता और डेयरी क्षेत्र से जुड़े बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने के लिए ₹255 करोड़, ₹16.5 करोड़, ₹12.42 करोड़ और ₹6.5 करोड़ की लागत वाली परियोजनाओं का अनावरण किया गया।
  • भोपाल में ‘मोरवन प्रोजेक्ट’ के तहत नगर वन विकसित करने के लिए KRIBHCO और मध्य प्रदेश राज्य जैवविविधता बोर्ड (MP State Biodiversity Board) के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) का आदान-प्रदान किया गया।

भारत में सहकारिता और डेयरी क्षेत्र

  • सहकारिता (Cooperation) एक ऐसा संगठन है जहाँ व्यक्ति स्वेच्छा से आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एकजुट होते हैं।
  • भारत में सहकारिता आंदोलन का एक लंबा इतिहास रहा है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना है।
  • डेयरी सहकारिता भारत में कृषि क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो लाखों किसानों, विशेषकर महिलाओं को आजीविका प्रदान करती है।
  • भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है, और डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
  • राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) जैसी पहलें ऊर्जा क्षेत्र में सहकारिता के नए आयाम खोल सकती हैं।
  • सहकारी समितियों के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों को उचित मूल्य, प्रसंस्करण सुविधाएँ और विपणन सहायता मिलती है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होती है।
  • न्याय संहिता भारतीय न्याय प्रणाली में सुधारों का एक हिस्सा है, जिसका उद्देश्य न्याय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्रों का लोकार्पण/भूमिपूजन मध्य प्रदेश में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता में वृद्धि और डेयरी क्षेत्र के बुनियादी ढाँचे का सुदृढ़ीकरण।
अत्याधुनिक राज्य स्तरीय केंद्रीय प्रयोगशाला दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता नियंत्रण और मानक सुनिश्चित करने में सहायक।
गौपालक सम्मेलन और गौपालक दीदियों का सम्मान पशुपालकों, विशेषकर महिला पशुपालकों (गौपालक दीदियों) की भूमिका को रेखांकित करना और उन्हें प्रोत्साहित करना।
दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्यों को लाभांश और बोनस वितरण सहकारी समितियों के सदस्यों की आर्थिक भागीदारी और आय में वृद्धि।
न्याय संहिता पर राज्य स्तरीय प्रदर्शनी नवीन न्यायिक संहिताओं के बारे में जागरूकता बढ़ाना और उनके क्रियान्वयन में पुलिस की उपलब्धियों को प्रदर्शित करना।
मोरवन प्रोजेक्ट के तहत नगर वन विकास हेतु MoU शहरी वानिकी को बढ़ावा देना और जैव विविधता संरक्षण में योगदान।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • डेयरी क्षेत्र में निवेश और बुनियादी ढाँचे के विकास से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
  • दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता में वृद्धि से दुग्ध उत्पादकों को बेहतर मूल्य और बाजार पहुँच प्राप्त होगी, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी।
  • सहकारी समितियों के माध्यम से लाभांश और बोनस वितरण से सदस्यों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और सहकारिता मॉडल को बल मिलेगा।

सामाजिक महत्व

  • महिला पशुपालकों (गौपालक दीदियों) के सम्मान से डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • गौशालाओं को सहायता राशि के वितरण से पशु कल्याण और संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
  • सहकारिता के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों तथा पशुपालकों को संगठित होकर सामूहिक लाभ प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

शासन और नीतिगत महत्व

  • प्रधानमंत्री के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को साकार करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सहकारिता क्षेत्र को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है।
  • नवीन न्यायिक संहिताओं पर प्रदर्शनी के माध्यम से कानून और व्यवस्था के क्षेत्र में सुधारों तथा उनके क्रियान्वयन के प्रति जागरूकता फैलेगी।
  • राज्य स्तरीय केंद्रीय प्रयोगशाला की स्थापना से खाद्य सुरक्षा मानकों को बनाए रखने और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

पर्यावरणीय महत्व

  • मोरवन प्रोजेक्ट के तहत नगर वन विकसित करने के समझौता ज्ञापन से शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ेगी, वायु गुणवत्ता में सुधार होगा और जैव विविधता का संरक्षण होगा।

चुनौतियाँ

1. डेयरी क्षेत्र में गुणवत्ता और मानक

  • दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को बनाए रखना एक चुनौती है, विशेषकर छोटे उत्पादकों के लिए।
  • मिलावट और अस्वच्छ उत्पादन पद्धतियों पर नियंत्रण रखना आवश्यक है।

2. सहकारी समितियों का प्रबंधन

  • सहकारी समितियों के प्रभावी और पारदर्शी प्रबंधन को सुनिश्चित करना, ताकि सभी सदस्यों को समान लाभ मिल सके।
  • राजनीतिक हस्तक्षेप और कुप्रबंधन की समस्याओं से निपटना।

3. पशुधन स्वास्थ्य और उत्पादकता

  • पशुओं के स्वास्थ्य, पोषण और नस्ल सुधार पर ध्यान देना, ताकि दुग्ध उत्पादकता में निरंतर वृद्धि हो सके।
  • पशुधन रोगों का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करना।

4. बाजार पहुँच और मूल्य निर्धारण

  • छोटे दुग्ध उत्पादकों के लिए उचित बाजार पहुँच और लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना।
  • बिचौलियों की भूमिका को कम करना और मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
दुग्ध गुणवत्ता नियंत्रण छोटे उत्पादकों के लिए गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करना और मिलावट पर अंकुश लगाना।
सहकारी समितियों की दक्षता प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही और सभी सदस्यों के लिए समान लाभ सुनिश्चित करना।
पशुधन स्वास्थ्य प्रबंधन पशु रोगों की रोकथाम, पोषण और नस्ल सुधार के लिए पर्याप्त संसाधनों की कमी।
डेयरी किसानों की आय स्थिरता बाजार की अस्थिरता, बिचौलियों की भूमिका और उचित मूल्य निर्धारण की कमी।
बुनियादी ढाँचे का विस्तार दूरदराज के क्षेत्रों तक प्रसंस्करण और शीत श्रृंखला (cold chain) सुविधाओं का विस्तार।

आगे की राह

  • डेयरी सहकारी समितियों को और अधिक सशक्त बनाने के लिए वित्तीय सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन और क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना।
  • दुग्ध प्रसंस्करण इकाइयों में आधुनिक तकनीकों और स्वचालन को बढ़ावा देना ताकि दक्षता और उत्पादकता बढ़ाई जा सके।
  • पशुधन स्वास्थ्य और नस्ल सुधार कार्यक्रमों को मजबूत करना, जिसमें टीकाकरण, पोषण और उन्नत प्रजनन तकनीकें शामिल हों।
  • दुग्ध उत्पादों के लिए एक मजबूत गुणवत्ता नियंत्रण और प्रमाणन प्रणाली विकसित करना, जिससे उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़े।
  • छोटे और सीमांत दुग्ध उत्पादकों को बाजार से सीधे जोड़ने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और ई-कॉमर्स समाधानों का लाभ उठाना।
  • महिलाओं को डेयरी क्षेत्र में उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण व वित्तीय सहायता प्रदान करना।
  • पर्यावरण-अनुकूल डेयरी प्रथाओं को बढ़ावा देना, जैसे कि अपशिष्ट प्रबंधन और ऊर्जा दक्षता।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

सहकारिता मंत्रालय · सहकार से समृद्धि · डेयरी सहकारिता · ग्रामीण अर्थव्यवस्था · पशुपालक आय · महिला सशक्तिकरण · दुग्ध प्रसंस्करण · बुनियादी ढाँचा विकास · न्याय संहिता · डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(c)’, ‘note’: ‘सहकारी समितियाँ बनाने का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 43B’, ‘note’: ‘सहकारी समितियों को बढ़ावा देना (राज्य नीति)’}

अवधारणा प्रवाह

सहकारी समितियों का गठन और सुदृढ़ीकरण  →  दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता का विस्तार और आधुनिकीकरण  →  पशुपालकों, विशेषकर महिलाओं की आय में वृद्धि  →  ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्तिकरण  →  खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों में सुधार  →  ‘सहकार से समृद्धि’ के लक्ष्य की प्राप्ति

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सहकारिता मंत्रालय का गठन वर्ष 2021 में ‘सहकार से समृद्धि’ के विज़न को साकार करने के लिए किया गया था।
2. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) का उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।
3. डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना का संबंध डेयरी और पशुपालन क्षेत्र से है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। सहकारिता मंत्रालय का गठन जुलाई 2021 में किया गया था। कथन 2 सही है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। कथन 3 सही है। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना डेयरी और पशुपालन क्षेत्र से संबंधित है, जिसका उद्देश्य पशुपालकों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘सहकार से समृद्धि’ विज़न का सबसे अच्छा वर्णन करता है?

  1. यह शहरी क्षेत्रों में सहकारी बैंकों के विस्तार पर केंद्रित है।
  2. यह सहकारी संस्थाओं के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और किसानों की आय बढ़ाने पर बल देता है।
  3. यह केवल कृषि ऋण सहकारी समितियों के डिजिटलीकरण से संबंधित है।
  4. यह बड़े औद्योगिक समूहों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है।
  5. यह सहकारी संस्थाओं के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और किसानों की आय बढ़ाने पर बल देता है।

उत्तर: यह सहकारी संस्थाओं के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और किसानों की आय बढ़ाने पर बल देता है। — ‘सहकार से समृद्धि’ विज़न का मुख्य उद्देश्य सहकारी संस्थाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की समृद्धि का प्रभावी माध्यम बनाना है, जिसमें डेयरी सहकारिता के माध्यम से पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों की आय बढ़ाने पर विशेष बल दिया जाता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में डेयरी सहकारिता की भूमिका का परीक्षण कीजिए। ‘सहकार से समृद्धि’ विज़न के तहत डेयरी क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए सरकार द्वारा की जा रही पहलों पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय: डेयरी सहकारिता की संक्षिप्त परिभाषा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इसके महत्व का उल्लेख।
मुख्य भाग:
1. ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डेयरी सहकारिता की भूमिका:
– किसानों और पशुपालकों की आय में वृद्धि।
– ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन।
– महिला सशक्तिकरण (विशेषकर ‘गौपालक दीदियों’ का संदर्भ)।
– दुग्ध उत्पादों के लिए स्थिर बाजार प्रदान करना।
– बुनियादी ढाँचे का विकास (दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र, प्रयोगशालाएँ)।
– मूल्य संवर्धन और आपूर्ति श्रृंखला दक्षता।
2. ‘सहकार से समृद्धि’ विज़न के तहत सरकारी पहलें:
– सहकारिता मंत्रालय का गठन और उसके उद्देश्य।
– दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने के लिए नई परियोजनाओं का भूमिपूजन/लोकार्पण (जैसे उज्जैन, भोपाल, शिवपुरी में संयंत्र)।
– अत्याधुनिक केंद्रीय प्रयोगशालाओं की स्थापना।
– दुग्ध संघों के सदस्यों को बोनस और लाभांश का वितरण।
– गौशालाओं को सहायता राशि प्रदान करना।
– डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना जैसी योजनाओं का क्रियान्वयन।
– KRIBHCO और राज्य जैवविविधता बोर्ड के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) जैसे सहयोगात्मक प्रयास।
निष्कर्ष: डेयरी सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण समृद्धि और आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में इन पहलों के महत्व पर बल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Madhya Pradesh PCS (MPPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह द्वारा भोपाल में आयोजित गौपालक सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?

  1. गायों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए राज्य स्तरीय कार्यक्रमों का शुभारंभ
  2. न्याय संहिता पर राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन
  3. मध्य प्रदेश में सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए नीतिगत सुझाव
  4. राज्य में पशुपालन क्षेत्र के लिए केंद्रीय सहायता की घोषणा

उत्तर: गायों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए राज्य स्तरीय कार्यक्रमों का शुभारंभ — गौपालक सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य गायों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए राज्य स्तरीय कार्यक्रमों का शुभारंभ करना था।

Mains: मध्य प्रदेश में गाय संरक्षण एवं पशुपालन क्षेत्र के विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों का वर्णन कीजिए। साथ ही, न्याय संहिता पर राज्य स्तरीय प्रदर्शनी के महत्व पर प्रकाश डालिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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