आईडीबीआई बैंक का निजीकरण: केंद्र की बड़ी बिक्री नीति को मिलेगा बल?

आईडीबीआई बैंक का निजीकरण: केंद्र की बड़ी बिक्री नीति को मिलेगा बल?

आईडीबीआई बैंक का निजीकरण: केंद्र की बड़ी बिक्री नीति को मिलेगा बल?

IDBI बैंक विनिवेश प्रक्रियासरकारी निर्णय60.72% हिस्सेदारी बेचनेबोलियाँ आमंत्रितदो दौरमूल्य निर्धारण₹75.99 प्रति शेयरFairfax बोली₹81 प्रति शेयरनियामकीय अनुमोदनमार्च 2027 तकलक्ष्य पूरा₹80,000 करोड़
IDBI बैंक विनिवेश प्रक्रिया

✎ विनिवेश में सरकार सार्वजनिक उपक्रमों की हिस्सेदारी बेचती है, जबकि निजीकरण में प्रबंधन नियंत्रण भी निजी हाथों में जाता है; 2026-27 में IDBI बैंक सौदे से कुल विनिवेश ₹82,301 करोड़ अनुमानित है, जो अब तक का तीसरा सर्वोच्च स्तर है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था (राजकोषीय प्रबंधन, विनिवेश और सार्वजनिक उपक्रम)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (बैंकिंग क्षेत्र सुधार और गैर-निष्पादित आस्तियाँ)  |  GS Paper II — शासन (सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप; नियामक संस्थाओं की भूमिका)
  • Prelims: विनिवेश (Disinvestment) और निजीकरण (Privatisation) में अंतर, दीपम (DIPAM — निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग), वित्त मंत्रालय, लाभांश (Dividend) बनाम विनिवेश से प्राप्त राशि, रणनीतिक विनिवेश (Strategic Disinvestment) और प्रबंधन नियंत्रण का हस्तांतरण, ऑफर फॉर सेल (Offer for Sale — OFS) का तरीका, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की भूमिका और IDBI बैंक का 2019 का अधिग्रहण, गैर-निष्पादित आस्तियाँ (Non-Performing Assets — NPA), राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) और सरकारी व्यय में विनिवेश राशि का अनुपात
  • Essay: सरकार का व्यवसाय में क्या स्थान है? विनिवेश, निजीकरण और सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका, सार्वजनिक संपत्ति की बिक्री: राजकोषीय लाभ बनाम दीर्घकालिक सार्वजनिक हित

त्वरित पुनरावृत्ति: विनिवेश में सरकार सार्वजनिक उपक्रमों की हिस्सेदारी बेचती है, जबकि निजीकरण में प्रबंधन नियंत्रण भी निजी हाथों में जाता है; 2026-27 में IDBI बैंक सौदे से कुल विनिवेश ₹82,301 करोड़ अनुमानित है, जो अब तक का तीसरा सर्वोच्च स्तर है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार ने IDBI बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी प्रेम वत्सा के नेतृत्व वाली Fairfax Financial को बेचने का निर्णय लिया है। इस सौदे के पूरा होने पर वित्त वर्ष 2026-27 का ₹80,000 करोड़ का विनिवेश लक्ष्य पूरा हो जाएगा, जबकि वर्ष की दूसरी छमाही अभी शेष है। सरकार को इस वर्ष अब तक विनिवेश से ₹55,757 करोड़ प्राप्त हो चुके हैं और IDBI बैंक की हिस्सेदारी बिक्री से ₹26,544 करोड़ मिलने की उम्मीद है, जिससे कुल राशि ₹82,301 करोड़ हो जाएगी। इस सौदे का अंतिम पूरा होना आवश्यक नियामकीय अनुमोदनों पर निर्भर है और इसकी समय-सीमा मार्च 2027 बताई गई है। इसी संदर्भ में यह प्रश्न उठा है कि क्या इस बड़े सौदे से शेष विनिवेश कार्यक्रम को नई गति मिलेगी।

पृष्ठभूमि

  • IDBI बैंक में जनवरी 2019 में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने बहुमत हिस्सेदारी अधिग्रहित की थी और संकटग्रस्त बैंक को पूंजी उपलब्ध कराई थी। इसी के साथ बैंक का प्रबंधन नियंत्रण LIC के पास आया।
  • Air India में Tata Sons की खरीद की पुष्टि लगभग पाँच वर्ष पहले हुई थी, जो हाल के वर्षों का सबसे बड़ा विनिवेश माना गया। इस बीच नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड, फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड और इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्यूटिकल्स कॉरपोरेशन लिमिटेड जैसे छोटे सौदे हुए, परंतु उनकी राशि सीमित रही।
  • इस सौदे के लिए बोलियाँ दो बार आमंत्रित करनी पड़ीं, क्योंकि पहले दौर की बोलियाँ अपेक्षा से काफी कम थीं। दो अलग-अलग मूल्यांकन पद्धतियों के औसत से प्रति शेयर मूल्य ₹75.99 निर्धारित हुआ, जबकि Fairfax की सफल बोली ₹81 प्रति शेयर रही।
  • भारतीय बैंकों की तरह IDBI बैंक का गैर-निष्पादित आस्तियों का अनुपात भी बढ़ा था, अर्थात् दिए गए ऋणों में से बड़े हिस्से की वसूली नहीं हो पा रही थी। इससे बैंक की वित्तीय स्थिति कमजोर हुई।
  • वर्ष 2017-18 में विनिवेश से ₹1 लाख करोड़ और 2018-19 में ₹84,972 करोड़ प्राप्त हुए थे। इस सौदे के साथ 2026-27 की राशि इन दोनों वर्षों के बाद तीसरी सबसे अधिक मानी गई है।
  • पिछले 12 वर्षों में से नौ वर्षों में केंद्र सरकार को कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी से विनिवेश की तुलना में अधिक लाभांश प्राप्त हुआ, जो दर्शाता है कि विनिवेश से होने वाली आय हर वर्ष स्थिर नहीं रहती।

विनिवेश (Disinvestment) क्या है?

  • विनिवेश का अर्थ है सरकार द्वारा सार्वजनिक उपक्रमों (Public Sector Enterprises) में अपनी इक्विटी हिस्सेदारी का आंशिक या पूर्ण बिक्री द्वारा हस्तांतरण।
  • निजीकरण (Privatisation) में सरकार कंपनी का प्रबंधन नियंत्रण निजी हाथों में सौंपती है, जबकि सामान्य विनिवेश में सरकार नियंत्रण रख सकती है। इसलिए दोनों अवधारणाओं को अलग समझना आवश्यक है।
  • रणनीतिक विनिवेश (Strategic Disinvestment) में सरकार किसी कंपनी की प्रबंधन नियंत्रण वाली हिस्सेदारी किसी रणनीतिक खरीदार को बेचती है, जैसे IDBI बैंक और Air India के मामले।
  • विनिवेश का प्रबंधन वित्त मंत्रालय के दीपम (DIPAM) विभाग द्वारा किया जाता है, जो सार्वजनिक उपक्रमों की हिस्सेदारी बिक्री की योजना और क्रियान्वयन देखता है।
  • बाजार के माध्यम से हिस्सेदारी बेचने का एक तरीका ऑफर फॉर सेल (OFS) है, जिसमें शेयर स्टॉक एक्सचेंज के जरिये बेचे जाते हैं।
  • विनिवेश से प्राप्त राशि को सरकार राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने और सार्वजनिक पूंजीगत व्यय के लिए उपयोग कर सकती है, परंतु यह आय सामान्यतः एक बार की प्रकृति की होती है।
  • लाभांश (Dividend) सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा अपने लाभ से शेयरधारकों को दिया जाने वाला हिस्सा है। कई वर्षों में यह विनिवेश राशि से अधिक रहा है, जिससे नीति-निर्माण में दोनों स्रोतों का संतुलन महत्वपूर्ण हो जाता है।
  • बड़े बैंकिंग सौदों में नियामकीय अनुमोदन और अधिग्रहण से जुड़े प्रावधानों का पालन आवश्यक होता है, इसलिए ऐसे सौदों को पूरा होने में समय लगता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
आईडीबीआई बैंक में 60.72% हिस्सेदारी की बिक्री (Fairfax Financial को) सरकार के वर्ष 2026-27 के विनिवेश लक्ष्य (80,000 करोड़ रुपये) की पूर्ति में सबसे बड़ा योगदान
वर्ष 2026-27 में कुल विनिवेश प्राप्ति 82,301 करोड़ रुपये (55,757 करोड़ रुपये पहले से प्राप्त और आईडीबीआई बैंक से 26,544 करोड़ रुपये) लक्ष्य पूरा होने के बाद भी वर्ष की दूसरी छमाही शेष है, इसलिए सरकार ने आगे भी विनिवेश जारी रखने के संकेत दिए हैं
प्राप्ति का ऐतिहासिक क्रम: यह अब तक की तीसरी सर्वोच्च विनिवेश प्राप्ति है वर्ष 2017-18 (1 लाख करोड़ रुपये) और 2018-19 (84,972 करोड़ रुपये) के बाद इसका स्थान है
बोली और मूल्यांकन की प्रक्रिया: बोली दो बार आमंत्रित की गई पहले दौर की बोलियाँ अपेक्षा से काफी कम थीं; दो पद्धतियों से औसत मूल्यांकन 75.99 रुपये प्रति शेयर रहा और Fairfax की बोली 81 रुपये प्रति शेयर थी
लाभांश बनाम विनिवेश: पिछले 12 में से 9 वर्षों में सरकार को लाभांश से अधिक राशि मिली सार्वजनिक उपक्रमों से नियमित आय का महत्व दिखता है और विनिवेश को केवल एकमुश्त प्राप्ति मानने की सीमा स्पष्ट होती है
पिछला बड़ा विनिवेश एयर इंडिया (Tata Sons को) था, जिसके लगभग पाँच वर्ष बाद यह सौदा हुआ है बड़े विनिवेश सौदों के बीच लंबा अंतराल रहा और छोटे सौदों से इसकी तुलना नहीं की जा सकती

महत्व

आर्थिक

  • विनिवेश प्राप्ति से राजकोषीय घाटे के प्रबंधन में सहायता मिलती है; यह राशि वार्षिक व्यय के लगभग 1.5% (53 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित व्यय के संदर्भ में) है
  • एकमुश्त प्राप्ति के साथ सरकार की पूँजीगत आय के स्रोतों में विविधता आती है

बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र

  • आईडीबीआई बैंक का जनवरी 2019 में LIC द्वारा बहुमत अधिग्रहण हुआ था, और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने इसके बाद इसे निजी क्षेत्र का बैंक घोषित किया
  • जिस बैंक की गैर-निष्पादित आस्तियाँ (Non-Performing Assets – NPA) बढ़ी थीं, उसके नए स्वामित्व से पूँजी और प्रबंधन सुधार की संभावना बनती है

नीतिगत और प्रशासनिक

  • विनिवेश की पूरी प्रक्रिया निवेश और सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (Department of Investment and Public Asset Management – DIPAM), वित्त मंत्रालय, के माध्यम से संचालित होती है
  • इस सौदे से यह संकेत मिलता है कि सरकार लोक उपक्रमों में अपनी भूमिका की समीक्षा कर रही है, परंतु यह आगे के सौदों की गति की गारंटी नहीं है

निवेश और बाज़ार

  • बड़े विनिवेश सौदे की सफलता से निजी निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच भारतीय परिसंपत्तियों के प्रति भरोसे का संकेत जाता है
  • विनिवेश से पूँजी बाज़ार में नए सार्वजनिक निर्गम और ब्लॉक डील की संभावनाएँ भी प्रभावित होती हैं

चुनौतियाँ

1. विनिवेश लक्ष्य की अनिश्चितता और दोबारा बोली

  • पहले दौर की बोलियाँ अपेक्षा से कम रहीं, जिससे दो बार बोली आमंत्रित करनी पड़ी
  • बड़े सौदों पर निर्भर रहने से लक्ष्य पूर्ति की दिशा अनिश्चित रहती है, क्योंकि छोटे सौदे इस अंतर को कम नहीं कर सकते

2. बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता की समस्या

  • भारत के अधिकांश बैंकों की तरह आईडीबीआई बैंक में भी गैर-निष्पादित आस्तियों का अनुपात बढ़ा था
  • खराब ऋण का बोझ कम किए बिना बैंक का मूल्यांकन और उसकी बिक्री कठिन रहती है

3. नियामकीय अनुमोदन और समय-सीमा

  • सौदे को पूरा होने के लिए अंतिम नियामकीय अनुमोदन आवश्यक हैं, और इसका पूरा होना मार्च 2027 तक अपेक्षित है
  • अनुमोदन में देरी होने पर राजकोषीय लक्ष्य और प्राप्ति का समय प्रभावित हो सकता है

4. एकमुश्त प्राप्ति बनाम स्थायी आय

  • पिछले 12 में से 9 वर्षों में लाभांश से अधिक आय हुई, जिससे यह प्रश्न उठता है कि विनिवेश कितना दीर्घकालिक राजकोषीय उपाय है
  • लगातार बिक्री से सार्वजनिक उपक्रमों की स्थायी आय का स्रोत घट सकता है

5. रणनीतिक और वित्तीय विनिवेश के बीच संतुलन

  • वित्तीय विनिवेश में केवल राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य होता है, जबकि रणनीतिक विनिवेश में प्रबंधन नियंत्रण का हस्तांतरण भी शामिल होता है
  • दोनों उद्देश्यों के बीच स्पष्ट नीति न होने पर सौदों की दिशा पर प्रश्न उठते हैं

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
बोली की विफलता और दोबारा आमंत्रण मूल्यांकन और बाज़ार की माँग के बीच अंतर से लक्ष्य पूर्ति में देरी
गैर-निष्पादित आस्तियाँ (NPA) बढ़े हुए खराब ऋण से बैंक का वास्तविक मूल्य और पूँजी पर्याप्तता प्रभावित होती है
नियामकीय अनुमोदन अनुमोदन में देरी से सौदे की समय-सीमा और प्राप्ति का समय बदल सकता है
लाभांश से कम प्राप्ति का चलन विनिवेश पर निर्भरता से सार्वजनिक उपक्रमों से मिलने वाली नियमित आय पर असर पड़ सकता है
बड़े सौदों पर निर्भरता एक बड़े सौदे का प्रभाव सीमित समय के लिए रहता है और आगे के छोटे सौदे अपेक्षित लक्ष्य पूरा नहीं कर पाते

आगे की राह

  • विनिवेश मूल्यांकन में पारदर्शी और स्वतंत्र पद्धति अपनाई जाए, ताकि बोली दोबारा आमंत्रित करने की आवश्यकता कम हो
  • नियामकीय अनुमोदन की प्रक्रिया की समय-सीमा पहले से तय की जाए और उसकी नियमित निगरानी हो
  • बैंक के खराब ऋण के समाधान और पूँजी सुदृढ़ीकरण को सौदे के साथ जोड़कर देखा जाए
  • विनिवेश से प्राप्त राशि के उपयोग के लिए स्पष्ट लेखा-जोखा और सार्वजनिक प्रकटीकरण सुनिश्चित किया जाए
  • लाभांश नीति और विनिवेश नीति के बीच संतुलन बनाया जाए, ताकि सार्वजनिक उपक्रमों से स्थायी आय बनी रहे
  • रणनीतिक और वित्तीय विनिवेश के उद्देश्यों को अलग-अलग परिभाषित किया जाए और प्रत्येक सौदे के लिए मानदंड सार्वजनिक हों
  • जमाकर्ताओं और कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए स्वामित्व-परिवर्तन के बाद के प्रावधान स्पष्ट किए जाएँ
  • बैंकिंग क्षेत्र के निजीकरण के बाद पर्यवेक्षण और जोखिम-प्रबंधन पर RBI की निगरानी को सुदृढ़ रखा जाए

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

विनिवेश (Disinvestment) · रणनीतिक विनिवेश (Strategic Disinvestment) · लाभांश आय (Dividend Income) · पूंजीगत प्राप्तियाँ (Capital Receipts) · राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) · सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (CPSE) · निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) · सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक · गैर-निष्पादनकारी आस्तियाँ (NPA) · भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) · राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (National Monetisation Pipeline) · एफआरबीएम अधिनियम (FRBM Act)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 298: संघ की व्यापार और कारोबार की कार्यपालिका शक्ति
  • अनुच्छेद 112: वार्षिक वित्तीय विवरण में विनिवेश प्राप्ति का अनुमान
  • अनुच्छेद 266: समेकित निधि में सरकारी प्राप्तियों का वैधानिक ढाँचा

अवधारणा प्रवाह

बैंक में गैर-निष्पादित आस्तियों का बढ़ना और वित्तीय दबाव  →  जनवरी 2019 में LIC द्वारा बहुमत अधिग्रहण; RBI द्वारा निजी क्षेत्र के बैंक के रूप में वर्गीकरण  →  वर्ष 2026-27 के लिए 80,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य; पहली बोलियाँ कम रहने पर दोबारा बोली  →  Fairfax Financial का चयन (81 रुपये प्रति शेयर की बोली) और 60.72% हिस्सेदारी का हस्तांतरण प्रस्तावित  →  नियामकीय अनुमोदन के बाद 26,544 करोड़ रुपये की प्राप्ति और कुल 82,301 करोड़ रुपये का विनिवेश  →  राजकोषीय घाटे के प्रबंधन पर सकारात्मक प्रभाव; सरकार द्वारा आगे विनिवेश जारी रखने के संकेत  →  भविष्य में विनिवेश नीति, लाभांश आय और सार्वजनिक उपक्रमों के प्रदर्शन के बीच संतुलन की परीक्षा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए, जो भारत में विनिवेश से संबंधित हैं:
1. विनिवेश से प्राप्त राशि सामान्यतः पूंजीगत प्राप्ति (Capital Receipt) के रूप में लेखांकित की जाती है।
2. सरकारी शेयरधारिता पर प्राप्त लाभांश को गैर-कर राजस्व प्राप्ति (Non-tax Revenue Receipt) के रूप में लिया जाता है।
3. विनिवेश से प्राप्त राशि संघ बजट में राजस्व प्राप्तियों के अंतर्गत दिखाई जाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: विनिवेश से प्राप्त राशि बजट में पूंजीगत प्राप्ति के रूप में दिखाई जाती है, क्योंकि इससे सरकार की परिसंपत्तियों में कमी होती है। कथन 2 सही है: सरकारी कंपनियों से मिला लाभांश गैर-कर राजस्व प्राप्ति है। कथन 3 गलत है, क्योंकि विनिवेश राशि राजस्व प्राप्तियों में नहीं गिनी जाती। अतः केवल दो कथन सही हैं।

Q2. कथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए:
कथन (A): कुछ वर्षों में भारत सरकार को विनिवेश की बिक्री से मिली राशि की तुलना में अपनी कंपनियों की शेयरधारिता से अधिक लाभांश प्राप्त हुआ है।
कारण (R): लाभांश सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों के लाभ से दिया जाता है, जबकि विनिवेश सरकारी इक्विटी की एकमुश्त बिक्री है।

नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, किंतु (R) सही है।

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है। — लाभांश कंपनी के वार्षिक लाभ से घोषित होता है, जो बार-बार मिलने वाली आय है, जबकि विनिवेश शेयरों की एकमुश्त बिक्री से मिलने वाली पूंजीगत राशि है। इसी अंतर के कारण कुछ वर्षों में लाभांश की राशि विनिवेश से अधिक हो सकती है, इसलिए (R) (A) की सही व्याख्या है।

Q3. भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अंतर्गत विनिवेश की नीति, प्रक्रिया और सरकारी परिसंपत्तियों के प्रबंधन का कार्य किस विभाग द्वारा संभाला जाता है?

विकल्प:
(A) निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM)
(B) नीति आयोग (NITI Aayog)
(C) भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI)
(D) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)

  1. निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM)
  2. नीति आयोग (NITI Aayog)
  3. भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI)
  4. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)

उत्तर: निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) — DIPAM वित्त मंत्रालय का विभाग है, जो सार्वजनिक उपक्रमों में विनिवेश और सरकारी परिसंपत्तियों के प्रबंधन की नीति व क्रियान्वयन देखता है। नीति आयोग नीति-सलाह देने वाली संस्था है, SEBI पूंजी बाज़ार का नियामक है और RBI बैंकिंग एवं मौद्रिक नीति का नियामक है; ये विनिवेश का प्रशासन नहीं करते।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में विनिवेश का उद्देश्य केवल राजकोषीय संसाधन जुटाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र की दक्षता और संसाधनों के बेहतर आवंटन को सुनिश्चित करना भी है। IDBI बैंक में हिस्सेदारी की बिक्री के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या दीर्घकालिक राजकोषीय स्थिरता की दृष्टि से लाभांश आय पर निर्भरता, एकमुश्त विनिवेश की तुलना में अधिक टिकाऊ विकल्प हो सकती है? (15 Marks)

रूपरेखा: MODEL-ANSWER SKELETON: (1) भूमिका: IDBI बैंक में 60.72% हिस्सेदारी की बिक्री; LIC द्वारा जनवरी 2019 में बहुमत हिस्सेदारी लेने से शुरू हुई प्रक्रिया; 2026-27 का विनिवेश लक्ष्य 80,000 करोड़ रुपये; अब तक 55,757 करोड़ रुपये प्राप्त और IDBI से अपेक्षित 26,544 करोड़ रुपये, कुल 82,301 करोड़ रुपये। (2) विनिवेश के उद्देश्य: राजकोषीय घाटे का प्रबंधन, सार्वजनिक क्षेत्र में निजी प्रबंधन और प्रतिस्पर्धा, पूंजी का उत्पादक उपयोग; 1996 के विनिवेश आयोग (अध्यक्ष: जी.वी. रामकृष्ण) की सिफारिशें; नरसिम्हम समिति (1991 और 1998) की सिफारिशें, जिनमें सार्वजनिक बैंकों में सरकारी हिस्सेदारी घटाने पर बल दिया गया। (3) संवैधानिक एवं वैधानिक आधार: अनुच्छेद 298 के अंतर्गत संघ की व्यापार करने की कार्यकारी शक्ति; अनुच्छेद 266 के अंतर्गत संचित निधि; बजट में पूंजीगत प्राप्तियों का वर्गीकरण; एफआरबीएम अधिनियम 2003 और एन.के. सिंह समिति (2017) की राजकोषीय सिफारिशें; बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 के अंतर्गत RBI की भूमिका। (4) विनिवेश बनाम लाभांश: विनिवेश एकमुश्त और अस्थिर है, जबकि लाभांश आवर्ती पर बाज़ार-निर्भर है; नौ में से बारह वर्षों के आंकड़ों में कुछ वर्षों में लाभांश अधिक रहा है, जो CPSE की लाभप्रदता पर निर्भर करता है; लाभांश नीति, परिसंपत्ति मुद्रीकरण (राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन) और विनिवेश के बीच संतुलन। (5) आलोचनात्मक पक्ष: बोली दो बार आमंत्रित करनी पड़ी, प्रारंभिक बोलियाँ अपेक्षा से काफी कम थीं; दो मूल्यांकन पद्धतियों से औसत मूल्य 75.99 रुपये प्रति शेयर; विजेता बोली 81 रुपये प्रति शेयर; बैंक के गैर-निष्पादनकारी आस्तियों (NPA) का बढ़ना; ऋण-संस्कृति और नियामकीय अनुमोदन की आवश्यकता। (6) विभिन्न दृष्टिकोण: निजीकरण समर्थक तर्क (दक्षता, पूंजी, प्रबंधन) बनाम सार्वजनिक हित और रोज़गार/सामाजिक दायित्व की चिंता; सार्वजनिक बैंक के रूप में वित्तीय समावेशन की भूमिका। (7) निष्कर्ष: विनिवेश को राजकोषीय उपाय के बजाय संरचनात्मक सुधार के रूप में देखने, पारदर्शी मूल्यांकन, नियामकीय सुदृढ़ता और लाभांश व विनिवेश के संतुलित मिश्रण पर बल।

स्रोत: The Indian Express


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