16 Oct वस्त्र मंत्रालय ने विशेष अभियान 6 के अंतर्गत आयोजित की साइबर सुरक्षा एवं ई-कचरा प्रबंधन कार्यशालाएं

✎ ई-कचरा प्रबंधन में विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) और ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के अधिकृत संग्रह व पुनर्चक्रण तंत्र से संसाधन संरक्षण और चक्रीय अर्थव्यवस्था संभव होती है, जबकि साइबर सुरक्षा में मानव सतर्कता सबसे निर्णायक…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन (सरकारी योजनाएँ और जागरूकता अभियान; मंत्रालयों की भूमिका) | GS Paper III — पर्यावरण (ई-कचरा प्रबंधन, चक्रीय अर्थव्यवस्था, प्रदूषण नियंत्रण) | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा (साइबर सुरक्षा, साइबर अपराध और उसकी रोकथाम) | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (डिजिटल प्रौद्योगिकी का सुरक्षित उपयोग)
- Prelims: ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022, विस्तारित उत्पादक दायित्व (Extended Producer Responsibility — EPR), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, CERT-In और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 70B, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल, फ़िशिंग (Phishing) और मैलवेयर (Malware), चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) और शहरी खनन (Urban Mining)
- Essay: डिजिटल भारत में साइबर सुरक्षा: तकनीक, मानव व्यवहार और जागरूकता की भूमिका, इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट: समस्या से संसाधन तक — चक्रीय अर्थव्यवस्था की ओर
त्वरित पुनरावृत्ति: ई-कचरा प्रबंधन में विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) और ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के अधिकृत संग्रह व पुनर्चक्रण तंत्र से संसाधन संरक्षण और चक्रीय अर्थव्यवस्था संभव होती है, जबकि साइबर सुरक्षा में मानव सतर्कता सबसे निर्णायक कड़ी है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
वस्त्र मंत्रालय ने विशेष अभियान 6 के अंतर्गत 15 अक्टूबर 2026 को ई-कचरा प्रबंधन और साइबर सुरक्षा पर कार्यशालाएँ आयोजित कीं, जिनमें सभी नोडल अधिकारियों सहित 85 से अधिक अधिकारियों ने भाग लिया। साइबर सुरक्षा सत्रों में फ़िशिंग, मैलवेयर, धोखाधड़ी वाले संदेशों और डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों जैसे खतरों से अवगत कराया गया, जबकि ई-कचरा सत्रों में अप्रचलित उपकरणों के पृथक्करण, सुरक्षित प्रबंधन और अधिकृत माध्यमों से निपटान पर बल दिया गया। मंत्रालय ने अपने परिसर में उत्पन्न ई-कचरे के संग्रह और निपटान की पहल भी की है, जिससे यह समाचार सरकारी कार्यालयों में संस्थागत स्तर पर सतत कार्यालय प्रथाओं का उदाहरण बनता है।
पृष्ठभूमि
- ई-कचरे से संबंधित वर्तमान नियामक ढाँचा ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 है, जो पूर्ववर्ती नियमों का स्थान लेता है और उत्पादकों पर विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) की व्यवस्था लागू करता है।
- इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में सीसा, पारा, कैडमियम जैसे खतरनाक पदार्थ होते हैं; अनौपचारिक तरीके से जलाने या तोड़ने पर ये मिट्टी और जल को प्रदूषित करते हैं तथा मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।
- डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर अपराध बढ़े हैं। इनसे निपटने के लिए भारत सरकार ने संस्थागत ढाँचा विकसित किया है, जिसमें CERT-In और I4C प्रमुख हैं।
- सरकारी कार्यालयों में सूचना सुरक्षा के लिए मानव व्यवहार सबसे कमजोर कड़ी माना जाता है, इसलिए कर्मचारियों का प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान नीति का अनिवार्य हिस्सा हैं।
- सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में उत्तरदायी उपभोग और उत्पादन (SDG 12) तथा सतत शहर एवं समुदाय (SDG 11) से ई-कचरा प्रबंधन जुड़ा है।
ई-कचरा प्रबंधन और साइबर सुरक्षा क्या हैं?
- ई-कचरा से तात्पर्य उन बेकार या अप्रचलित इलेक्ट्रॉनिक और विद्युत उपकरणों से है जो अब उपयोग में नहीं आते, जैसे कंप्यूटर, कीबोर्ड, प्रिंटर, फोटोकॉपी मशीन और एयर प्यूरीफायर।
- ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के तहत उत्पादकों, उपभोक्ताओं, संग्राहकों, पुनर्चक्रणकर्ताओं और सरकारी संस्थाओं की जिम्मेदारियाँ तय की गई हैं; इसमें अधिकृत संग्रह और पुनर्चक्रण प्रणाली पर जोर है।
- विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) का अर्थ है कि उत्पादक अपने उत्पाद के जीवनचक्र के अंत तक उसके निपटान की जिम्मेदारी लें, जिसमें संग्रह और पुनर्चक्रण के लक्ष्य शामिल हैं।
- ई-कचरे के उचित पुनर्चक्रण से तांबा, सोना, चांदी और एल्युमीनियम जैसी मूल्यवान धातुएँ पुनः प्राप्त होती हैं, जिसे शहरी खनन कहा जाता है। इससे कच्चे माल की मांग और खनन दबाव घटता है।
- साइबर सुरक्षा का अर्थ है कंप्यूटर, नेटवर्क और डेटा को अनधिकृत पहुँच, क्षति और चोरी से बचाना। फ़िशिंग में नकली संदेशों से ओटीपी या पासवर्ड चुराए जाते हैं, जबकि मैलवेयर उपकरण को संक्रमित करता है।
- डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले में अपराधी स्वयं को पुलिस या जाँच एजेंसी का अधिकारी बताकर भय पैदा करते हैं और पीड़ित से धन मांगते हैं। साइबर घटनाओं की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) और हेल्पलाइन 1930 पर की जा सकती है।
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 70B के अंतर्गत CERT-In साइबर घटनाओं की प्रतिक्रिया और समन्वय के लिए नोडल एजेंसी है, जबकि I4C गृह मंत्रालय के अधीन साइबर अपराध की रोकथाम के लिए समन्वय करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| आयोजन एवं प्रतिभागी | वस्त्र मंत्रालय ने 15 अक्टूबर 2026 को विशेष अभियान 6 (Special Campaign 6) के अंतर्गत कार्यशालाएँ आयोजित कीं, जिनमें सभी नोडल अधिकारियों सहित 85 से अधिक अधिकारी शामिल हुए |
| दोहरा विषय | ई-कचरा प्रबंधन जागरूकता और साइबर सुरक्षा एवं सुरक्षित डिजिटल निपटान को एक ही कार्यक्रम में जोड़ा गया, जो पर्यावरण और डिजिटल सुरक्षा को एकीकृत दृष्टि से देखने का उदाहरण है |
| साइबर खतरे | फ़िशिंग (Phishing), मैलवेयर (Malware), धोखाधड़ी वाले व्हाट्सएप संदेश और डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले; ओटीपी या व्यक्तिगत जानकारी माँगने वाले संदेशों की पहचान पर बल |
| ई-कचरे के पर्यावरणीय प्रभाव | अनुचित निपटान से मिट्टी एवं जल का प्रदूषण, खतरनाक पदार्थों का रिसाव तथा मानव स्वास्थ्य और परितंत्र पर जोखिम |
| प्राथमिकता का क्रम | पुन: उपयोग, मरम्मत और पुनर्चक्रण के माध्यम से संसाधन संरक्षण; इसके बाद अधिकृत चैनलों से निपटान, ताकि लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा घटे |
| परिसर-स्तरीय पहल | मंत्रालय के परिसर में उत्पन्न डेस्कटॉप कंप्यूटर, कीबोर्ड, फोटोकॉपी मशीन और एयर प्यूरीफायर जैसे बेकार उपकरणों के संग्रह, पृथक्करण और उचित निपटान की व्यवस्था |
महत्व
पर्यावरणीय
- ई-कचरे में सीसा, पारा और कैडमियम जैसे विषैले तत्व होते हैं, इसलिए उचित प्रबंधन से मिट्टी और भूजल प्रदूषण रोका जा सकता है
- जिम्मेदार निपटान से जैव-विविधता और परितंत्र की रक्षा होती है तथा मानव स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक जोखिम घटते हैं
संसाधन एवं आर्थिक
- पुनर्चक्रण से तांबा, सोना, चाँदी और एल्युमीनियम जैसी मूल्यवान सामग्रियों की पुनर्प्राप्ति संभव होती है, जिसे शहरी खनन (Urban Mining) कहा जाता है
- चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) में कच्चे माल की मांग घटती है और आयात पर निर्भरता में कमी आने की संभावना रहती है
शासन एवं प्रशासनिक
- सरकारी कार्यालयों में ई-कचरा प्रबंधन नियमों का व्यवहार में पालन लोक प्रशासन में अनुकरणीय उदाहरण बन सकता है
- कर्मचारियों को पृथक्करण और अधिकृत निपटान की प्रक्रिया से परिचित कराने से नियामक अनुपालन सुदृढ़ होता है
साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल शासन
- सरकारी डेटा और अधिकारियों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा के लिए साइबर स्वच्छता अनिवार्य है
- साइबर घटनाओं की समय पर रिपोर्टिंग से जाँच और प्रतिक्रिया तंत्र प्रभावी होता है, जिससे डिजिटल शासन पर भरोसा बढ़ता है
चुनौतियाँ
1. असंगठित क्षेत्र में ई-कचरे का अनौपचारिक पुनर्चक्रण
- अनौपचारिक क्षेत्र में ई-कचरे को खुले में जलाने और तोड़ने से श्रमिकों और आसपास की आबादी के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा रहता है
- वैज्ञानिक तरीके से पुनर्चक्रण करने वाली अधिकृत इकाइयों की संख्या और क्षमता अभी सीमित है
यूपीएससी लिंक: GS-3: पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण; असंगठित क्षेत्र की समस्याएँ
2. विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility) का क्रियान्वयन
- उत्पादकों के संग्रह और पुनर्चक्रण लक्ष्यों की निगरानी और लेखा-परीक्षा की व्यवस्था को सुदृढ़ करना आवश्यक है
- उपभोक्ता से उत्पादक तक ई-कचरे के प्रवाह का पता लगाने वाली ट्रेसेबिलिटी व्यवस्था अभी पूरी तरह विकसित नहीं है
यूपीएससी लिंक: GS-3: पर्यावरण नीति एवं नियामक तंत्र; GS-2: शासन में नीति का क्रियान्वयन
3. डिजिटल धोखाधड़ी और साइबर जागरूकता की कमी
- डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले और परिचित संपर्कों का रूप धारण करने वाले संदेश उच्च शिक्षित और पदस्थ व्यक्तियों को भी प्रभावित कर रहे हैं
- एक बार की जागरूकता कार्यशाला से व्यवहार परिवर्तन स्थायी होने के लिए निरंतर प्रशिक्षण की आवश्यकता है
यूपीएससी लिंक: GS-3: आंतरिक सुरक्षा में साइबर सुरक्षा की चुनौतियाँ
4. निपटान के समय डेटा सुरक्षा का जोखिम
- पुराने कंप्यूटर और स्मार्टफोन में संग्रहीत संवेदनशील डेटा का पूर्ण मिटाव किए बिना निपटान गोपनीयता का उल्लंघन कर सकता है
- डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (Digital Personal Data Protection Act, 2023) के अनुरूप डेटा-प्रबंधन की स्पष्ट प्रक्रिया आवश्यक है
यूपीएससी लिंक: GS-3: साइबर सुरक्षा; GS-2: डेटा संरक्षण से जुड़े विधिक ढाँचे
5. सीमा पार ई-कचरे का अवैध व्यापार
- विकसित देशों से पुराने और खतरनाक ई-कचरे का अवैध आयात घरेलू पर्यावरणीय दबाव बढ़ाता है
- हानिकारक अपशिष्टों के सीमा पार आवागमन को नियंत्रित करने वाले बेसल कन्वेंशन (Basel Convention) के प्रावधानों का प्रभावी पालन आवश्यक है
यूपीएससी लिंक: GS-2: अंतरराष्ट्रीय संधियाँ; GS-3: पर्यावरण एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| प्रमाणित पुनर्चक्रण इकाइयों की सीमित उपलब्धता | अधिकृत चैनल कम होने पर उपकरण अनौपचारिक क्षेत्र में चले जाते हैं, जिससे प्रदूषण और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ते हैं |
| पृथक्करण की आदत का अभाव | कार्यालयों और घरों में बेकार उपकरण सामान्य कचरे के साथ फेंक दिए जाते हैं |
| साइबर घटनाओं की कम रिपोर्टिंग | भय या जानकारी के अभाव में पीड़ित समय पर शिकायत नहीं करते, जिससे अपराधियों की पहचान कठिन होती है |
| एकल सत्रों से व्यवहार परिवर्तन की सीमा | जागरूकता सत्र के बाद निरंतर अभ्यास और निगरानी न होने पर प्रभाव अल्पकालिक रहता है |
| निपटान के समय डेटा मिटाने की अनदेखी | संवेदनशील जानकारी वाले उपकरण बिना सुरक्षित मिटाव के बेच या फेंक दिए जाते हैं |
आगे की राह
- ई-कचरा प्रबंधन नियमों के अनुपालन के लिए सभी सरकारी कार्यालयों में नियमित पृथक्करण और अधिकृत निपटान की समयबद्ध व्यवस्था लागू की जाए
- अधिकृत पुनर्चक्रण इकाइयों की क्षमता और पहुँच बढ़ाकर अनौपचारिक क्षेत्र से श्रमिकों के औपचारिक रोजगार की ओर संक्रमण को प्रोत्साहित किया जाए
- विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व के तहत संग्रह लक्ष्यों की डिजिटल निगरानी और ट्रेसेबिलिटी व्यवस्था विकसित की जाए
- निपटान से पहले डेटा सुरक्षित रूप से मिटाने की मानक प्रक्रिया बनाई जाए और उसका पालन अनिवार्य किया जाए
- साइबर स्वच्छता पर त्रैमासिक पुनश्चर्या प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि एकल सत्र के बाद भी व्यवहार में स्थायी सुधार हो
- साइबर घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (National Cyber Crime Reporting Portal) और हेल्पलाइन 1930 की जानकारी कार्यालयों में प्रसारित की जाए
- ई-कचरे के सीमा पार अवैध व्यापार पर बेसल कन्वेंशन के दायित्वों के अनुरूप निगरानी और प्रवर्तन सुदृढ़ किया जाए
- पुन: उपयोग और मरम्मत को बढ़ावा देने के लिए कार्यालयों में उपकरणों के जीवनकाल-प्रबंधन की नीति अपनाई जाए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
ई-कचरा प्रबंधन · विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility) / EPR · चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) · ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 · पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 · बेसल कन्वेंशन (Basel Convention) · साइबर सुरक्षा · साइबर स्वच्छता · CERT-In (भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल) · सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 · डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 · संसाधन दक्षता और असंगठित क्षेत्र
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 48A: पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन का राज्य का दायित्व
- अनुच्छेद 51A(g): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का मौलिक कर्तव्य
- अनुच्छेद 21: स्वच्छ पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़ा जीवन का अधिकार
अवधारणा प्रवाह
अप्रचलित और बेकार इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कार्यालयों और घरों में जमा होते हैं → बिना पृथक्करण के निपटान से सीसा, पारा जैसे खतरनाक पदार्थ मिट्टी और जल में रिसते हैं → ई-कचरा प्रबंधन नियमों के तहत पहचान, पृथक्करण और अधिकृत चैनलों से निपटान अनिवार्य होता है → पुन: उपयोग, मरम्मत और पुनर्चक्रण से मूल्यवान सामग्रियाँ पुनः प्राप्त होती हैं → चक्रीय अर्थव्यवस्था में कच्चे माल की मांग और लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा घटती है → साथ ही साइबर स्वच्छता और डेटा सुरक्षित मिटाव से डिजिटल जोखिम कम होते हैं, जो सुरक्षित कार्यस्थल का आधार है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ये नियम पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत बनाए गए हैं।
2. इनमें विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility) की अवधारणा अपनाई गई है।
3. बल्क उपभोक्ता (Bulk Consumers) इन नियमों के दायरे से बाहर रखे गए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है, क्योंकि ई-कचरा नियम पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 6 और 25 के अंतर्गत बनाए गए हैं। कथन 2 सही है, क्योंकि उत्पादकों पर अपने उत्पादों से निकले ई-कचरे के संग्रह और पुनर्चक्रण के लक्ष्य का दायित्व डाला गया है। कथन 3 गलत है, क्योंकि बल्क उपभोक्ता भी नियमों के दायरे में आते हैं और उन्हें अधिकृत निपटान सुनिश्चित करना होता है।
Q2. निम्नलिखित अभिकथन (A) और तर्क (R) पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): कार्यालय के पुराने कंप्यूटर और हार्ड डिस्क को सामान्य कचरे में फेंकने के बजाय अधिकृत चैनल के माध्यम से निपटाना चाहिए।
तर्क (R): हटाए गए भंडारण उपकरणों में डेटा की पुनर्प्राप्ति संभव हो सकती है, यदि उसे सुरक्षित रूप से मिटाया न गया हो।
नीचे दिए गए कूटों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — ई-कचरे के अनुचित निपटान से पर्यावरणीय हानि के साथ-साथ व्यक्तिगत और आधिकारिक डेटा के रिसाव का जोखिम भी रहता है। इसलिए अधिकृत चैनल से निपटान करना और डेटा को सुरक्षित रूप से मिटाना दोनों आवश्यक हैं। यहाँ तर्क (R) अभिकथन (A) का कारण स्पष्ट करता है।
Q3. निम्नलिखित सूचियों का सुमेलन कीजिए:
सूची-I (संस्था/विधि)
A. CERT-In
B. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB)
C. डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023
सूची-II (कार्य/विषय)
1. ई-कचरा नियमों के अनुपालन की निगरानी और पर्यावरणीय मानक
2. साइबर सुरक्षा घटनाओं के लिए राष्ट्रीय आपात प्रतिक्रिया एजेंसी
3. व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण से संबंधित विधिक ढांचा
नीचे दिए गए कूटों में से सही उत्तर चुनिए:
- A-1, B-2, C-3
- A-2, B-1, C-3
- A-3, B-1, C-2
- A-2, B-3, C-1
उत्तर: A-2, B-1, C-3 — CERT-In सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 70B के अंतर्गत साइबर सुरक्षा घटनाओं के लिए राष्ट्रीय एजेंसी है (A-2)। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ई-कचरा नियमों के अंतर्गत निगरानी और मानक-निर्धारण की प्रमुख संस्था है (B-1)। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण का विधिक ढांचा देता है (C-3)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ ई-कचरा प्रबंधन को केवल पर्यावरणीय दायित्व मान लेना अपर्याप्त है; इसे संसाधन-दक्षता और डिजिटल सुरक्षा के साथ जोड़कर देखना होगा। ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 में अपनाए गए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) के ढांचे का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि असंगठित क्षेत्र की भूमिका और डेटा-सुरक्षित निपटान के अभाव में यह ढांचा किन व्यावहारिक सीमाओं का सामना करता है। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर-संरचना: (1) भूमिका: ई-कचरा नियम, 2022 पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत बने; ये पुराने नियमों (2016) का स्थान लेते हैं। उत्पादक, पुनर्चक्रक (Recycler), विघटक (Dismantler), पुनर्निर्माता (Refurbisher) और बल्क उपभोक्ता इनके दायरे में हैं। (2) विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व की अवधारणा स्वीडिश पर्यावरण विद् थॉमस लिंडक्विस्ट से जुड़ी है; उत्पादक पर संग्रह और पुनर्चक्रण के लक्ष्य का दायित्व डालकर ‘प्रदूषक भुगतान करे’ सिद्धांत को व्यवहार में लाया जाता है। (3) संस्थागत ढांचा: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी, ऑनलाइन पंजीकरण और वार्षिक रिटर्न; राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की भूमिका; अधिकृत पुनर्चक्रकों का नेटवर्क। (4) चक्रीय अर्थव्यवस्था: पुनर्प्राप्ति, पुनः उपयोग और कच्चे माल की मांग में कमी; लैंडफिल में जाने वाले कचरे में कमी। (5) समालोचना: असंगठित क्षेत्र (कबाड़ी और अनौपचारिक विघटन) का समावेश; उत्पादक-आधारित लक्ष्यों का सत्यापन; घाना के अग्बोग्ब्लोशी (Agbogbloshie) स्थल जैसे उदाहरण से अनौपचारिक विघटन के स्वास्थ्य-जोखिम का चित्रण; पुनर्चक्रण क्षमता और वित्तीय व्यवहार्यता। (6) डिजिटल आयाम: उपकरणों का डेटा-सुरक्षित निपटान, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66C (पहचान की चोरी) और 66D (कंप्यूटर संसाधन द्वारा छल), डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के अंतर्गत डेटा-न्यासी के दायित्व, तथा CERT-In के निर्देशों के अनुसार साइबर घटनाओं की छह घंटे के भीतर रिपोर्टिंग। (7) अंतरराष्ट्रीय संदर्भ: बेसल कन्वेंशन के अंतर्गत खतरनाक अपशिष्ट के सीमापारीय आवागमन पर नियंत्रण। (8) संतुलित निष्कर्ष: नियमों की रूपरेखा उन्नत है, पर प्रवर्तन, सूचना-पारदर्शिता और अनौपचारिक क्षेत्र के औपचारीकरण पर सुधार आवश्यक है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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