राष्ट्रीय खेल महासंघों के लिए सहायता योजना: नए दिशानिर्देश और 2036 ओलंपिक तैयारी

राष्ट्रीय खेल महासंघों के लिए सहायता योजना: नए दिशानिर्देश और 2036 ओलंपिक तैयारी

राष्ट्रीय खेल महासंघों के लिए सहायता योजना: नए दिशानिर्देश और 2036 ओलंपिक तैयारी

राष्ट्रीय खेल महासंघों के लिए सहायता योजनायोजना का संशोधननई सुविधाएँ जोड़ी गईंबजट आवंटन7,386.74 करोड़ रुपयेकार्यान्वयन16वाँ वित्त आयोग
राष्ट्रीय खेल महासंघों के लिए सहायता योजना

✎ राष्ट्रीय खेल महासंघों के लिए सहायता योजना (2026-27 से 2030-31, 7,386.74 करोड़ रुपये) अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेज़बानी और ओलंपिक प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ओलंपिक तथा राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी का मुख्य सरकारी माध्यम है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन: सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप (खेल क्षेत्र की केंद्रीय योजना, वित्तीय आवंटन और कार्यान्वयन तंत्र)  |  GS Paper II — राजव्यवस्था: संघीय ढाँचे में खेल का विषय (राज्य सूची और केंद्र की भूमिका)  |  GS Paper III — अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन और आर्थिक प्रभाव (मेज़बानी से जुड़ा निवेश, पर्यटन और अवसंरचना)
  • Prelims: राष्ट्रीय खेल महासंघ (National Sports Federations) और उनकी मान्यता की भूमिका, ओलंपिक प्रशिक्षण केंद्र (Olympic Training Centre), नेशनल सेंटर्स ऑफ़ एक्सीलेंस (National Centres of Excellence), टार्गेट ओलंपिक पोडियम योजना (Target Olympic Podium Scheme), खेलो इंडिया (Khelo India), राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 (National Sports Governance Act, 2025), प्रदर्शन इवेंट (Demonstration Event) की अवधारणा, सातवीं अनुसूची की राज्य सूची में खेल का विषय (प्रविष्टि 33)
  • Essay: खेल नीति और राष्ट्रीय गौरव: अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेज़बानी से राष्ट्र-निर्माण तक, एलीट खेल प्रदर्शन में आत्मनिर्भरता: विदेशी प्रशिक्षण पर निर्भरता से घरेलू उत्कृष्टता की ओर

त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय खेल महासंघों के लिए सहायता योजना (2026-27 से 2030-31, 7,386.74 करोड़ रुपये) अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेज़बानी और ओलंपिक प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ओलंपिक तथा राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी का मुख्य सरकारी माध्यम है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय ने ‘राष्ट्रीय खेल महासंघों के लिए सहायता योजना’ के संशोधित संस्करण हेतु परिचालन दिशानिर्देश जारी किए हैं। सरकार ने इस योजना को 2026-27 से 2030-31 की अवधि, अर्थात् 16वें वित्त आयोग के चक्र के लिए जारी रखने की मंजूरी दी है, जिसके लिए कुल 7,386.74 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। संशोधित योजना में अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेज़बानी के लिए सहायता में वृद्धि, ओलंपिक प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना, राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के लिए सहायता तथा स्वदेशी खेलों को वैश्विक मंच तक पहुँचाने के प्रावधान जोड़े गए हैं। ये बदलाव भारत के दीर्घकालिक खेल विज़न, 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी और 2036 ओलंपिक की दावेदारी से जोड़े गए हैं।

पृष्ठभूमि

  • खेल संविधान के अनुसार राज्य सूची का विषय है, इसलिए खेल का मुख्य ढाँचा राज्यों के अधीन है; फिर भी राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्टता, अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा और खेल अवसंरचना के लिए केंद्र सरकार सहायता योजनाएँ चलाती है।
  • लक्ष्य-आधारित उच्च प्रदर्शन के लिए टार्गेट ओलंपिक पोडियम योजना (TOPS) और जमीनी स्तर पर प्रतिभा खोज के लिए खेलो इंडिया जैसी पहलें पहले से लागू हैं; यह संशोधित योजना इन्हीं प्रयासों की ‘शीर्ष स्तर की तैयारी’ वाली कड़ी को सुदृढ़ करती है।
  • राष्ट्रीय खेल महासंघ किसी खेल के राष्ट्रीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय महासंघ से संबद्धता के प्रमुख इकाई होते हैं; उनके प्रशासनिक पारदर्शिता और शासन-मानकों को सुधारने हेतु राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 पारित किया गया है।
  • भारत ने 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेज़बानी और 2036 ओलंपिक की दावेदारी के लिए दीर्घकालिक तैयारी का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए अवसंरचना, प्रशिक्षण और आयोजन-प्रबंधन की क्षमता में निरंतर निवेश आवश्यक है।
  • 16वें वित्त आयोग का चक्र (2026-27 से 2030-31) नई वित्तीय अवधि का निर्धारण करता है, इसलिए योजनाओं की पुनर्संरचना और बजट-आवंटन इसी चक्र के अनुरूप किए जा रहे हैं।

राष्ट्रीय खेल महासंघों के लिए सहायता योजना क्या है?

  • यह योजना भारतीय खिलाड़ियों की ओलंपिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल, पैरालंपिक और विश्व चैंपियनशिप जैसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी में सहायता का मुख्य माध्यम है।
  • इसके अंतर्गत राष्ट्रीय कोचिंग शिविर, अकादमियों में प्रशिक्षण, खिलाड़ियों के लिए आवास, स्पोर्ट्स किट, बीमा और स्पोर्ट्स साइंस सेवाएँ दी जाती हैं।
  • विदेशी कोच, हाई परफॉरमेंस डायरेक्टर, फिजियोथेरेपिस्ट, स्पोर्ट्स साइंटिस्ट और चिकित्सकों जैसे सहायक कर्मियों की नियुक्ति तथा विदेशी प्रशिक्षण व प्रतियोगिताओं के अवसर भी इसमें शामिल हैं।
  • संशोधित योजना के नए घटक: अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेज़बानी के लिए प्रति आयोजन 50 करोड़ रुपये तक सहायता, जिसके प्रस्तावों का मूल्यांकन खेल सचिव की अध्यक्षता वाली विशेष समिति करेगी।
  • ओलंपिक प्रशिक्षण केंद्र (Olympic Training Centre) का प्रस्ताव किसी एक खेल को समर्पित होंगे, जहाँ अत्याधुनिक खेल-विज्ञान उपकरण और विशेषज्ञ उपलब्ध होंगे; इससे विदेशी प्रशिक्षण पर निर्भरता घटने की अपेक्षा है।
  • राष्ट्रीय खेलों के आयोजन हेतु 50 करोड़ रुपये तक की सहायता का प्रावधान है, जो खेल उपकरण, टाइमिंग-स्कोरिंग-परिणाम (TSR) सेवाओं, तकनीकी अधिकारियों के पारिश्रमिक और तकनीकी संचालन पर व्यय होगी।
  • स्वदेशी खेलों को ओलंपिक, एशियाई खेलों या राष्ट्रमंडल खेलों में ‘प्रदर्शन इवेंट’ के रूप में शामिल कराने, विदेशों में राष्ट्रीय महासंघ स्थापित करने और भारत में स्थित अंतरराष्ट्रीय महासंघों के सहयोग का प्रावधान भी है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
अवधि और बजट 2026-27 से 2030-31 तक (16वें वित्त आयोग चक्र) के लिए कुल 7,386.74 करोड़ रुपये का आवंटन
प्रमुख लक्ष्य ओलंपिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल, पैरालंपिक और विश्व चैंपियनशिप की तैयारी में भारतीय खिलाड़ियों को सहायता देना
अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेज़बानी आयोजन की प्रकृति, महत्व, देशों और एथलीटों की संख्या के आधार पर राष्ट्रीय खेल महासंघों को 50 करोड़ रुपये तक सहायता; प्रस्तावों का मूल्यांकन खेल सचिव की अध्यक्षता वाली विशेष समिति करेगी
ओलंपिक प्रशिक्षण केंद्र किसी एक खेल के लिए समर्पित, अत्याधुनिक खेल विज्ञान उपकरणों से युक्त केंद्र, जिससे विदेशी प्रशिक्षण पर निर्भरता घटेगी
राष्ट्रीय खेलों के लिए सहायता खेल उपकरण, समय-निर्धारण, स्कोरिंग और परिणाम (TSR) सेवाओं तथा तकनीकी अधिकारियों के पारिश्रमिक हेतु 50 करोड़ रुपये तक का प्रावधान
स्वदेशी खेलों का वैश्विक विस्तार स्वदेशी खेलों को ओलंपिक, एशियाई खेल या राष्ट्रमंडल खेलों में प्रदर्शन इवेंट के रूप में शामिल कराने और विदेशों में महासंघ स्थापित करने हेतु सहायता

महत्व

आर्थिक और संस्थागत महत्व

  • बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेज़बानी के लिए वित्तीय ढाँचा स्पष्ट होने से राष्ट्रीय खेल महासंघों की योजना-क्षमता बढ़ती है।
  • सरकारी सहायता को पाँच वर्षीय वित्तीय चक्र से जोड़ने पर बहु-वर्षीय तैयारी और अनुबंध-आधारित व्यय संभव होता है, जिससे संसाधनों का अनुमान बेहतर बनता है।
  • खेल-आधारित आयोजनों से स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन और खेल उपकरण उद्योग को प्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है।

रणनीतिक और कूटनीतिक महत्व

  • 2030 राष्ट्रमंडल खेल और 2036 ओलंपिक की दावेदारी के अनुरूप तैयारी से भारत की अंतरराष्ट्रीय खेल-मेज़बानी क्षमता की विश्वसनीयता बढ़ती है।
  • विदेशी कोच, हाई परफॉरमेंस डायरेक्टर और खेल विज्ञानियों की नियुक्ति से तकनीकी ज्ञान का अंतरण होता है और अंतरराष्ट्रीय खेल-नेटवर्क मज़बूत होते हैं।
  • स्वदेशी खेलों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुँचाने का प्रयास भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक खेल-विमर्श में स्थान दिलाने से जुड़ता है।

सामाजिक और मानव-संसाधन महत्व

  • ग्रासरूट और जूनियर स्तर के विकास पर बल देने से प्रतिभा का आधार विस्तृत होता है।
  • राष्ट्रीय खेलों और चैंपियनशिप के नियमित आयोजन से राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा और खेल-संस्कृति को प्रोत्साहन मिलता है।
  • खिलाड़ियों को बीमा, आवास और खेल विज्ञान सेवाएँ मिलने से उनकी सुरक्षा और दीर्घकालिक प्रदर्शन में सुधार होता है।

चुनौतियाँ

1. राज्य विषय में केंद्र की भूमिका

  • खेल संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची का विषय है, इसलिए केंद्र की सहायता का आधार अनुच्छेद 282 के अंतर्गत सार्वजनिक प्रयोजन के लिए अनुदान पर टिका है।
  • राज्यों की अपनी खेल नीतियों और केंद्रीय दिशानिर्देशों के बीच समन्वय आवश्यक है, अन्यथा दोहराव या अंतराल उत्पन्न हो सकते हैं।

2. संसाधनों का उपयोग और जवाबदेही

  • 50 करोड़ रुपये तक की सहायता का निर्णय विशेष समिति के मूल्यांकन पर निर्भर है; पारदर्शी मानदंड और सार्वजनिक लेखा-परीक्षा आवश्यक है।
  • बड़े आयोजनों में अधिक राशि लगने से अन्य खेलों और ग्रासरूट कार्यक्रमों के लिए संसाधन सीमित हो सकते हैं।

3. महासंघों का प्रशासन और शासन-सुधार

  • राष्ट्रीय खेल महासंघों की आंतरिक लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली, चुनाव-व्यवस्था और वित्तीय पारदर्शिता पर लगातार प्रश्न उठते रहे हैं।
  • सहायता को शासन-मानकों के पालन से जोड़े बिना दक्षता सुनिश्चित करना कठिन है।

4. खेल विज्ञान और तकनीकी क्षमता का अभाव

  • अत्याधुनिक प्रशिक्षण केंद्रों के लिए उपकरण, प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ और रख-रखाव की दीर्घकालिक व्यवस्था आवश्यक है।
  • देश में खेल विज्ञान, बायोमेकेनिक्स और पोषण में विशेषज्ञों की संख्या अभी सीमित है।

5. ग्रासरूट से शीर्ष स्तर तक की निरंतरता

  • शीर्ष स्तर पर सहायता बढ़ने के साथ स्कूल और ज़िला स्तर की प्रतिभा-खोज कमज़ोर न पड़े, यह सुनिश्चित करना चुनौती है।
  • विदेशी प्रशिक्षण पर निर्भरता घटाने के लक्ष्य के लिए घरेलू कोच-तैयारी की क्षमता विकसित करनी होगी।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
राज्य और केंद्र की भूमिका राज्य विषय होने के कारण केंद्रीय सहायता के दायरे और समन्वय का स्पष्ट होना आवश्यक
व्यय की जवाबदेही बड़ी राशि के आवंटन में पारदर्शिता, मूल्यांकन-प्रक्रिया और परिणाम-मापन की व्यवस्था
महासंघों का शासन आंतरिक चुनाव, वित्तीय प्रबंधन और सहायता की शर्तों का पालन सुनिश्चित करना
तकनीकी संसाधन उपकरणों के रख-रखाव, प्रशिक्षित स्टाफ और खेल विज्ञान सेवाओं की दीर्घकालिक उपलब्धता
ग्रासरूट बनाम शीर्ष स्तर शीर्ष आयोजनों पर केंद्रित व्यय से आधार-स्तरीय विकास के लिए संसाधनों में कमी का जोखिम

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय खेल महासंघों के लिए सहायता योजना (Assistance to National Sports Federations Scheme)

आगे की राह

  • सहायता के मानदंड, मूल्यांकन-प्रक्रिया और व्यय के परिणाम सार्वजनिक रूप से प्रकाशित किए जाएँ, ताकि जवाबदेही बढ़े।
  • महासंघों के लिए आंतरिक चुनाव, वित्तीय लेखा और शासन-मानकों को सहायता की पूर्व-शर्त के रूप में लागू किया जाए।
  • ओलंपिक प्रशिक्षण केंद्रों के लिए रख-रखाव, प्रशिक्षित स्टाफ और उपकरण-नवीनीकरण की स्पष्ट योजना बनाई जाए।
  • खेल विज्ञान में विश्वविद्यालय और अनुसंधान संस्थानों के साथ साझेदारी से घरेलू विशेषज्ञता का आधार विस्तृत किया जाए।
  • ग्रासरूट और जूनियर स्तर के बजट को शीर्ष आयोजनों के बजट के समानांतर सुरक्षित रखा जाए।
  • राज्य सरकारों के साथ समन्वय-तंत्र बनाकर केंद्रीय दिशानिर्देशों और राज्य की खेल नीतियों के बीच तालमेल सुनिश्चित किया जाए।
  • स्वदेशी खेलों के अंतरराष्ट्रीय महासंघों से सहयोग बढ़ाकर उनके मानकीकरण और वैश्विक मान्यता की प्रक्रिया को गति दी जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

राष्ट्रीय खेल महासंघों के लिए सहायता योजना (Scheme of Assistance to National Sports Federations) · सहकारी संघवाद और खेल · राज्य सूची की प्रविष्टि 33 (State List Entry 33) · अनुच्छेद 282 के अंतर्गत अनुदान · वित्त आयोग (अनुच्छेद 280) और 16वाँ वित्त आयोग चक्र · ओलंपिक प्रशिक्षण केंद्र (Olympic Training Centres) · टॉप्स (TOPS – Target Olympic Podium Scheme) · खेलो इंडिया (Khelo India) · राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 (National Sports Governance Act, 2025) · सार्वजनिक निधि की जवाबदेही और CAG लेखा-परीक्षा (अनुच्छेद 149) · स्वदेशी खेल और प्रदर्शन इवेंट

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 282: केंद्र का सार्वजनिक प्रयोजन हेतु अनुदान
  • सातवीं अनुसूची, राज्य सूची की प्रविष्टि 33: खेल राज्य विषय

अवधारणा प्रवाह

दीर्घकालिक खेल विज़न, 2030 राष्ट्रमंडल खेल और 2036 ओलंपिक दावेदारी से तैयारी की आवश्यकता उत्पन्न होती है।  →  इस आवश्यकता के आधार पर 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए 7,386.74 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत होता है।  →  परिचालन दिशानिर्देश सहायता के नए नियम तय करते हैं, जैसे मेज़बानी के लिए 50 करोड़ रुपये तक और राष्ट्रीय खेलों के लिए समान सीमा।  →  राष्ट्रीय खेल महासंघ प्रस्ताव देते हैं, जिनका मूल्यांकन खेल सचिव की अध्यक्षता वाली समिति करती है।  →  स्वीकृत सहायता से ओलंपिक प्रशिक्षण केंद्र, कोचिंग शिविर, खेल विज्ञान सेवाएँ और विदेशी अनुभव उपलब्ध होते हैं।  →  इन घटकों से खिलाड़ियों का प्रदर्शन सुधरता है और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारत की तैयारी और प्रतिष्ठा मज़बूत होती है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए, जो भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय खेल महासंघों के लिए सहायता योजना के संशोधित संस्करण से संबंधित हैं:
1. इस योजना को जारी रखने की स्वीकृति 16वें वित्त आयोग चक्र की अवधि (2026-27 से 2030-31) के लिए दी गई है।
2. खेल संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची (Union List) का विषय है।
3. संघ सरकार, संविधान के अनुच्छेद 282 के अंतर्गत, ऐसे प्रयोजनों के लिए भी अनुदान दे सकती है जो उसकी विधायी क्षमता के भीतर नहीं आते।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: योजना की अवधि 2026-27 से 2030-31 है, जो 16वें वित्त आयोग चक्र से मेल खाती है। कथन 2 गलत है: खेल सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 33 में आता है, इसलिए यह राज्य का मुख्य विषय है, संघ सूची का नहीं। कथन 3 सही है: अनुच्छेद 282 संघ और राज्यों को उन सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए अनुदान देने की शक्ति देता है जो उनकी विधायी क्षमता से बाहर हों। अतः दो कथन सही हैं।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): ओलंपिक प्रशिक्षण केंद्र किसी एक विशिष्ट खेल के लिए समर्पित होंगे, ताकि भारतीय एथलीटों की विदेशी प्रशिक्षण पर निर्भरता घटे।
कारण (R): ऐसे समर्पित केंद्रों में उन्नत खेल विज्ञान उपकरण, विशेषज्ञ कोच और तकनीकी स्टाफ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
उपर्युक्त के संदर्भ में सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सत्य हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सत्य है, किंतु (R) असत्य है।
  4. (A) असत्य है, किंतु (R) सत्य है।

उत्तर: (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — (A) सत्य है: संशोधित योजना में ओलंपिक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है, जो एकल-खेल पर केंद्रित होंगे और विदेशी प्रशिक्षण पर निर्भरता कम करेंगे। (R) भी सत्य है और (A) की सही व्याख्या करता है, क्योंकि एक ही स्थान पर विशेषज्ञता, उपकरण और तकनीकी सहायता का संकेंद्रण ही इन केंद्रों का उद्देश्य है।

Q3. निम्नलिखित सूचियों को सुमेलित कीजिए:
सूची-I (संवैधानिक उपबंध)
A. अनुच्छेद 280
B. अनुच्छेद 282
C. अनुच्छेद 263

सूची-II (विषय)
1. संघ या राज्य द्वारा सार्वजनिक प्रयोजन के लिए विवेकाधीन अनुदान
2. वित्त आयोग का गठन
3. अंतर-राज्यीय परिषद

सही सुमेलन चुनिए:

  1. A-1, B-2, C-3
  2. A-2, B-1, C-3
  3. A-3, B-1, C-2
  4. A-2, B-3, C-1

उत्तर: A-2, B-1, C-3 — अनुच्छेद 280 वित्त आयोग के गठन से संबंधित है, इसलिए A-2। अनुच्छेद 282 विवेकाधीन अनुदान से संबंधित है, इसलिए B-1। अनुच्छेद 263 अंतर-राज्यीय परिषद की व्यवस्था करता है, इसलिए C-3। अतः सही युग्म A-2, B-1, C-3 है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ खेल भारत में राज्य सूची का विषय है, फिर भी राष्ट्रीय खेल महासंघों के लिए संघ सरकार की वित्तीय सहायता का विस्तार हुआ है। इस संदर्भ में संघीय ढाँचे में संघ की भूमिका की समालोचनात्मक परीक्षा कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि सार्वजनिक निधि के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कौन-से संस्थागत उपाय आवश्यक हैं। (15 Marks)

रूपरेखा: MODEL-ANSWER SKELETON:
(1) संवैधानिक आधार: सातवीं अनुसूची की राज्य सूची प्रविष्टि 33 (खेल, मनोरंजन) के अंतर्गत खेल राज्य का विषय है। संघ का हस्तक्षेप अनुच्छेद 282 (विवेकाधीन अनुदान), अनुच्छेद 246 (संघ-सूची/समवर्ती-सूची के विषय) और राष्ट्रीय महत्व के प्रयोजनों पर आधारित है।
(2) वित्तीय ढाँचा: 16वें वित्त आयोग चक्र (2026-27 से 2030-31) के लिए ₹7,386.74 करोड़ का आवंटन; अनुच्छेद 280 के अंतर्गत वित्त आयोग की भूमिका; केंद्र प्रायोजित योजनाओं पर सरकारिया आयोग (1988) और पंछी आयोग (2010) की सिफारिशें, जिनमें अनुदान की सशर्तता और राज्यों की भूमिका पर बल दिया गया।
(3) नीतिगत संदर्भ: राष्ट्रीय खेल नीति, 2025; टॉप्स (2014) और खेलो इंडिया जैसे कार्यक्रम; राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 द्वारा खेल महासंघों के शासन, प्रशासनिक मानकों और राष्ट्रीय खेल बोर्ड की व्यवस्था।
(4) समालोचना के बिंदु: केंद्रीकरण बनाम संघीय विविधता; राज्यों की क्षमता और अवसंरचना में असमानता; ओलंपिक और राष्ट्रमंडल खेलों जैसे संघ-स्तरीय लक्ष्यों की प्राथमिकता; खेल संघों के भीतर प्रशासनिक विवाद और एकाधिकार।
(5) जवाबदेही के उपाय: CAG लेखा-परीक्षा (अनुच्छेद 149); सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की लागू होने की सीमा और सार्वजनिक प्रकटीकरण; प्रदर्शन-आधारित अनुदान, स्वतंत्र मूल्यांकन और समय-बद्ध रिपोर्टिंग; सूक्ष्म-स्तरीय लेखा प्रणाली।
(6) संतुलित निष्कर्ष: सहकारी संघवाद के भीतर राज्यों की भूमिका को सुदृढ़ करते हुए संघ का राष्ट्रीय समन्वयकारी और मानक-निर्धारक दायित्व; बहु-स्तरीय सहभागिता का मॉडल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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