मछुआरों की मृत्यु: मानवाधिकार आयोग ने जांच रिपोर्ट मांगी, जानिए पूरा मामला

मछुआरों की मृत्यु: मानवाधिकार आयोग ने जांच रिपोर्ट मांगी, जानिए पूरा मामला

मछुआरों की मृत्यु: कारण और परिणामविषैली गैस निर्माणअमोनियाबंद स्थान में प्रवेशअकुशल श्रमिकमृत्यु/गंभीर स्थितिसीपीआर के बावजूद
मछुआरों की मृत्यु: कारण और परिणाम

✎ सीमित स्थान में प्रवेश से पहले वायु-परीक्षण, वेंटिलेशन और प्रशिक्षित बचाव-व्यवस्था अनिवार्य है, क्योंकि अमोनिया जैसी विषैली गैसें बिना चेतावनी के जानलेवा सिद्ध हो सकती हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन एवं सामाजिक न्याय (राज्य मानवाधिकार आयोग की भूमिका; कमज़ोर वर्गों और प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (नीली अर्थव्यवस्था, मत्स्य क्षेत्र और रोज़गार में व्यावसायिक सुरक्षा)
  • Prelims: राज्य मानवाधिकार आयोग (State Human Rights Commission — SHRC) और स्वप्रेरणा से संज्ञान (Suo Motu), मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 — राज्य आयोगों से संबंधित प्रावधान (धारा 29), अनुच्छेद 21 — जीवन और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार, अनुच्छेद 42 — कार्य की न्यायोचित और मानवोचित दशाएँ (राज्य नीति का निदेशक तत्व), व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता, 2020 (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020), मत्स्यन का विधायी विभाजन — राज्य सूची की प्रविष्टि 21 और संघ सूची की प्रविष्टि 57 (क्षेत्रीय जल से परे), अमोनिया और हाइड्रोजन सल्फ़ाइड जैसी विषैली गैसें; सीमित स्थान (Confined Space) में प्रवेश से जुड़े जोखिम, कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) और आपातकालीन चिकित्सा सहायता
  • Essay: विकास की कीमत: असंगठित क्षेत्र के प्रवासी श्रमिकों का जीवन और राज्य का दायित्व, नीली अर्थव्यवस्था में मानव सुरक्षा और सतत विकास का संतुलन

त्वरित पुनरावृत्ति: सीमित स्थान में प्रवेश से पहले वायु-परीक्षण, वेंटिलेशन और प्रशिक्षित बचाव-व्यवस्था अनिवार्य है, क्योंकि अमोनिया जैसी विषैली गैसें बिना चेतावनी के जानलेवा सिद्ध हो सकती हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केरल राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) ने कोझिकोड ज़िले के बेपोर बंदरगाह पर एक मछली पकड़ने वाली नाव के भंडार-कक्ष में विषैली गैस से साँस लेने के कारण दो प्रवासी श्रमिकों की मृत्यु पर स्वप्रेरणा से संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया है। आयोग ने ज़िला कलेक्टर और मत्स्य निदेशक को घटना की व्यापक जाँच कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। घटना 9 अक्टूबर 2026 को हुई, जब श्रमिक नाव के भंडार-कक्ष से माल निकाल रहे थे। हवा के अभाव में वे बेहोश हो गए, और उन्हें अचेत अवस्था में बाहर निकाला गया। पश्चिम बंगाल के सचिन दास का 11 अक्टूबर को उपचार के दौरान निधन हो गया। इस घटना ने उसी बंदरगाह पर इस वर्ष 18 अप्रैल को हुई एक समान घटना की याद दिला दी है, जिसमें दो मछुआरों की मृत्यु हुई थी। इससे मछली पकड़ने वाली नावों पर, विशेषकर सीमित भंडारण-स्थानों में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न उठे हैं।

पृष्ठभूमि

  • अप्रैल 2026 में बेपोर बंदरगाह पर पश्चिम बंगाल के दो मछुआरों, रिपन दास और सहदेब दास, की मृत्यु नाव के भीतर आपातकालीन मरम्मत कार्य के दौरान संदिग्ध विषैली गैस से साँस लेने से हुई थी।
  • मछली के भंडारण-टैंकों में मछली के सड़ने से अमोनिया जैसी गैसें बनती हैं, जो बंद स्थान में जमा होकर जानलेवा हो सकती हैं। प्रवासी श्रमिकों को अक्सर ऐसे स्थानों में भेजा जाता है, जहाँ इन खतरों की पूर्व जानकारी या सुरक्षा उपकरण नहीं होते।
  • घटना-स्थल पर मौजूद अग्निशमन एवं बचाव सेवा के कर्मियों ने नाव-संचालकों से अकुशल प्रवासी श्रमिकों से खतरनाक कार्य कराते समय विशेष सावधानी बरतने का आग्रह किया।
  • सेवानिवृत्त मत्स्य विभाग के एक अधिकारी ने मछुआरों के लिए तत्काल प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा केरल की समुद्री एम्बुलेंस ‘करुण्य’ को चिकित्सा कर्मियों के साथ तैयार रखने का सुझाव दिया है।
  • ऐसे मामलों में बचाव-तंत्र की भूमिका अहम होती है। इस घटना में श्रमिकों को एम्बुलेंस में CPR दिया गया, फिर भी दोनों की स्थिति गंभीर बनी रही।

स्वप्रेरणा से संज्ञान (Suo Motu) क्या है?

  • स्वप्रेरणा से संज्ञान का अर्थ है कि कोई न्यायिक या अर्ध-न्यायिक संस्था किसी पीड़ित द्वारा शिकायत किए बिना, समाचार या अन्य सूचना के आधार पर स्वयं मामले का संज्ञान ले।
  • राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत राज्य स्तर पर होता है। यह अधिनियम राज्य आयोगों के गठन, कार्य और शक्तियों का प्रावधान करता है।
  • मानवाधिकार आयोग की सिफ़ारिशें सामान्यतः बाध्यकारी न्यायिक आदेश नहीं होतीं, बल्कि वे प्रशासन को जवाबदेह बनाने और उपचारात्मक कार्रवाई के लिए दिशा देती हैं।
  • आयोग किसी घटना की जाँच का निर्देश ज़िला प्रशासन और संबंधित विभाग को दे सकता है। यहाँ ज़िला कलेक्टर और मत्स्य निदेशक को रिपोर्ट देने का निर्देश इसी शक्ति का उदाहरण है।
  • जीवन के अधिकार की व्याख्या में सुरक्षित कार्य-दशाएँ भी शामिल मानी गई हैं, इसलिए ऐसे मामलों को अनुच्छेद 21 से जोड़ा जाता है।
  • सीमित स्थान (Confined Space) वह बंद या अर्ध-बंद स्थान है जहाँ वायु-संचार सीमित हो और जहाँ जोखिम भरी गैसें जमा हो सकती हैं। इसमें प्रवेश से पहले वायु-परीक्षण, वेंटिलेशन और प्रशिक्षित बचाव-दल की व्यवस्था आवश्यक मानी जाती है।
  • मत्स्यन के विषय पर विधायी अधिकार बँटे हुए हैं। अंतर्देशीय और राज्य-सीमा के भीतर मत्स्यन राज्य सूची में आता है, जबकि क्षेत्रीय जल से परे मत्स्यन संघ सूची का विषय है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
स्वप्रेरणा से मामला (Suo Motu Case) केरल राज्य मानवाधिकार आयोग (Kerala State Human Rights Commission – SHRC) ने किसी शिकायत के बिना स्वयं संज्ञान लेकर मामला दर्ज किया। इससे स्पष्ट है कि आयोग कार्यस्थल की असुरक्षित दशाओं को मानवाधिकार के प्रश्न के रूप में देख रहा है।
जाँच का दायरा जिला कलेक्टर (District Collector) और मत्स्य निदेशक (Director of Fisheries) को एक सप्ताह के भीतर व्यापक जाँच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। इससे प्रशासनिक जवाबदेही और तत्काल तथ्य-संग्रह सुनिश्चित होता है।
घटना की प्रकृति बंद भंडारण डिब्बे (Confined Space) में ताज़ी हवा का अभाव और सड़ती मछलियों से बनी अमोनिया जैसी विषैली गैस के कारण दम घुटना (Asphyxiation) संभावित कारण है। श्रमिक बेहोश मिले और CPR देना पड़ा।
प्रवासी श्रमिकों की स्थिति पश्चिम बंगाल के अकुशल प्रवासी श्रमिकों को जोखिमपूर्ण कार्य में लगाया गया था। प्रशिक्षण, गैस-परीक्षण और सुरक्षा उपकरणों की अनुपस्थिति इस संकट का मूल कारण बताई जा रही है।
घटना की पुनरावृत्ति अप्रैल में इसी बंदरगाह पर आपातकालीन मरम्मत के दौरान दो और श्रमिकों की मृत्यु हुई थी। यह अलग-थलग घटना न होकर एक दोहराया जाने वाला व्यावसायिक जोखिम है।
आपातकालीन चिकित्सा सेवा करुण्या मरीन एम्बुलेंस (Karunya Marine Ambulance) को चिकित्सा कर्मियों के साथ तैयार रखने का सुझाव दिया गया है, ताकि समुद्री या बंदरगाह क्षेत्र की आपात स्थिति में त्वरित उपचार संभव हो।

महत्व

मानवाधिकार एवं विधिक

  • जीवन का अधिकार (अनुच्छेद 21) में सुरक्षित कार्यदशा का अधिकार अंतर्निहित माना गया है, और यह मामला उसी से जुड़ा है।
  • राज्य मानवाधिकार आयोग मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 (Protection of Human Rights Act, 1993) के अंतर्गत जाँच कर सकता है और सरकार को सिफारिशें दे सकता है।
  • स्वप्रेरणा से संज्ञान यह दर्शाता है कि मानवाधिकार संस्थाएँ निजी क्षेत्र के कार्यस्थलों पर भी जवाबदेही की निगरानी कर सकती हैं।

सामाजिक एवं श्रम सुरक्षा

  • असंगठित और प्रवासी श्रमिक प्रायः सामाजिक सुरक्षा और औपचारिक संरक्षण से बाहर रहते हैं, इसलिए उनका जोखिम अधिक होता है।
  • व्यावसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा (Occupational Health and Safety) के मानकों की व्यावहारिक पालना इस घटना से सीधे जुड़ी है।

आर्थिक

  • मत्स्य क्षेत्र की आर्थिक संवृद्धि मानव संसाधन की सुरक्षा और उत्पादकता पर निर्भर है; दुर्घटनाएँ श्रम-आपूर्ति और परिचालन को प्रभावित करती हैं।
  • सुरक्षित कार्य-पद्धति अपनाने से मत्स्य व्यापार की विश्वसनीयता और निर्यात-उन्मुख गुणवत्ता मानकों को भी बल मिलता है।

प्रशासनिक एवं संघीय

  • मत्स्य पालन संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची का विषय है, इसलिए प्राथमिक जवाबदेही राज्य और जिला प्रशासन की होती है।
  • जिला स्तर पर संयुक्त जाँच (कलेक्टर और मत्स्य निदेशक) राज्य-स्तरीय विभागीय समन्वय का उदाहरण है।

चुनौतियाँ

1. बंद स्थानों में जोखिमपूर्ण प्रवेश

  • भंडारण डिब्बों में ऑक्सीजन की कमी और विषैली गैसों की पहचान के लिए गैस-परीक्षण की व्यवस्था प्रायः नहीं होती।
  • आपातकालीन मरम्मत या सामान निकालने के लिए बिना प्रशिक्षण के श्रमिकों को भीतर भेजा जाता है।

2. प्रवासी श्रमिकों का असुरक्षित रोज़गार

  • अकुशल प्रवासी श्रमिक भाषा, जानकारी और सौदेबाज़ी की क्षमता की कमी के कारण जोखिम स्वीकार करने को बाध्य होते हैं।
  • अनौपचारिक अनुबंधों में बीमा, मुआवज़ा और चिकित्सा सुविधा की स्पष्ट जिम्मेदारी तय नहीं होती।

3. प्रशिक्षण और आपातकालीन तैयारी का अभाव

  • मत्स्य कार्य से जुड़े लोगों में गैस-जोखिम और प्राथमिक चिकित्सा (जैसे CPR) का वैज्ञानिक प्रशिक्षण बहुत कम है।
  • समुद्री या बंदरगाह क्षेत्र में चिकित्सा एम्बुलेंस और अस्पताल के बीच समन्वय की कमी से उपचार में देरी होती है।

4. प्रवर्तन और निरीक्षण की कमी

  • बंदरगाह पर नियमित सुरक्षा-निरीक्षण और नियोक्ता की जवाबदेही सुनिश्चित करने वाली निगरानी व्यवस्था कमज़ोर है।
  • पूर्व घटना (अप्रैल) के बाद भी समान जोखिम बने रहना निरीक्षण तंत्र की प्रभावशीलता पर प्रश्न उठाता है।

5. स्वप्रेरणा से संज्ञान और कार्यान्वयन के बीच अंतर

  • मानवाधिकार आयोग की सिफारिशें बाध्यकारी न होकर परामर्शी स्वरूप की होती हैं, इसलिए उनका पालन सुनिश्चित करना चुनौती है।
  • रिपोर्ट का समय पर आना और उसके आधार पर दोषी नियोक्ता पर कार्रवाई होना, दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं।

6. राज्य-सूची विषय में समन्वय

  • मत्स्य पालन राज्य का विषय होने के कारण केंद्रीय सुरक्षा मानकों और राज्य नियमों के बीच स्पष्ट समन्वय आवश्यक है।
  • प्रवासी श्रमिकों के मूल राज्य और कार्यस्थल राज्य के बीच प्रशासनिक सहयोग की व्यवस्था सीमित है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
बंद स्थानों में प्रवेश गैस-परीक्षण और सुरक्षा उपकरणों के बिना भंडारण डिब्बों में प्रवेश से जानलेवा दम घुटना।
प्रवासी श्रमिकों की असुरक्षा अकुशल और असंगठित श्रमिकों के पास सामाजिक सुरक्षा और मुआवज़े का स्पष्ट अधिकार नहीं।
प्रशिक्षण का अभाव जोखिम पहचानने और प्राथमिक चिकित्सा देने की क्षमता बहुत कम कर्मियों में है।
आपातकालीन सेवा में देरी समुद्री क्षेत्र में चिकित्सा एम्बुलेंस की तत्परता के बिना जीवन-रक्षा का समय निकल जाता है।
निरीक्षण तंत्र की कमज़ोरी पूर्व घटना के बाद भी समान जोखिम बने रहना नियमित निरीक्षण की विफलता का संकेत है।
सिफारिशों का कार्यान्वयन आयोग की सिफारिशों और जाँच रिपोर्ट के आधार पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करना चुनौती है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • करुण्या मरीन एम्बुलेंस (Karunya Marine Ambulance)

आगे की राह

  • भंडारण डिब्बों और बंद स्थानों में प्रवेश से पहले ऑक्सीजन और विषैली गैस के परीक्षण को अनिवार्य किया जाए।
  • मत्स्य श्रमिकों और नौका-चालकों के लिए गैस-जोखिम, बचाव और CPR का प्रशिक्षण नियमित रूप से दिया जाए।
  • प्रवासी श्रमिकों के नियोजन से पहले उनका पंजीकरण और कार्य-अनुबंध लिखित रूप में सुनिश्चित किया जाए।
  • करुण्या मरीन एम्बुलेंस को चिकित्सा कर्मियों के साथ तैयार रखने और बंदरगाह के अस्पतालों से समन्वय की व्यवस्था बनाई जाए।
  • बंदरगाहों पर नियमित सुरक्षा-निरीक्षण और नियोक्ता की जवाबदेही तय करने वाला तंत्र सुदृढ़ किया जाए।
  • जिला स्तर की जाँच रिपोर्ट के निष्कर्षों को सार्वजनिक करके समयबद्ध सुधारात्मक कार्रवाई की निगरानी की जाए।
  • असंगठित और प्रवासी मत्स्य श्रमिकों को बीमा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने के लिए राज्य स्तर पर समन्वय बढ़ाया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मानव अधिकार आयोग · असंगठित क्षेत्र के श्रमिक · कार्यस्थल सुरक्षा · श्रमिकों के अधिकार · अनुच्छेद 21 · राज्य मानवाधिकार आयोग · व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य · प्रवासी श्रमिक · सामाजिक सुरक्षा · मछुआरों की सुरक्षा · जहरीली गैस · सुओ मोटो

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21: जीवन और सुरक्षित कार्यदशा का अधिकार
  • अनुच्छेद 39(e): श्रमिकों के स्वास्थ्य और शक्ति की रक्षा का निर्देश
  • सातवीं अनुसूची, राज्य सूची की प्रविष्टि 21: मत्स्य पालन राज्य का विषय

अवधारणा प्रवाह

बंद भंडारण डिब्बे में ताज़ी हवा का अभाव और सड़ती मछलियों से अमोनिया जैसी विषैली गैस का जमाव  →  बिना प्रशिक्षण और गैस-परीक्षण के अकुशल प्रवासी श्रमिकों को भीतर भेजना  →  श्रमिकों का बेहोश होना, सीमित आपातकालीन सहायता और अस्पताल पहुँचने में देरी  →  दो श्रमिकों की मृत्यु और राज्य मानवाधिकार आयोग द्वारा स्वप्रेरणा से संज्ञान  →  जिला कलेक्टर और मत्स्य निदेशक द्वारा एक सप्ताह में जाँच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश  →  सुरक्षा मानकों, प्रशिक्षण और आपातकालीन सेवा के सुदृढ़ीकरण से भविष्य की पुनरावृत्ति रोकने की नीति

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत का संविधान सभी व्यक्तियों को जीवन के अधिकार (Right to Life) की गारंटी देता है, जिसमें सुरक्षित कार्यस्थल का अधिकार भी शामिल है।
2. राज्य मानवाधिकार आयोग (State Human Rights Commission) किसी भी मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में स्वतः संज्ञान (suo motu) ले सकता है।
3. व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, 2020 (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020) असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों पर लागू नहीं होती है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार शामिल है, जिसमें सुरक्षित कार्यस्थल भी निहित है।
कथन 2 सही है। राज्य मानवाधिकार आयोग को मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों में स्वतः संज्ञान लेने की शक्ति प्राप्त है।
कथन 3 गलत है। व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, 2020 का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र सहित सभी श्रमिकों के लिए सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों में सुधार करना है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद भारत में श्रमिकों के लिए सुरक्षित और मानवीय कार्य स्थितियों को सुनिश्चित करने में राज्य की जिम्मेदारी से संबंधित है?

  1. अनुच्छेद 39 (क)
  2. अनुच्छेद 42
  3. अनुच्छेद 43
  4. अनुच्छेद 43 (क)

उत्तर: अनुच्छेद 42 — अनुच्छेद 42 राज्य को काम की न्यायसंगत और मानवीय स्थितियों तथा मातृत्व राहत के लिए प्रावधान करने का निर्देश देता है। यह श्रमिकों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करने में राज्य की जिम्मेदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, विशेषकर मछुआरों के लिए कार्यस्थल सुरक्षा सुनिश्चित करने में राज्य मानवाधिकार आयोग की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संबंध में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और उनकी प्रभावशीलता पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर की रूपरेखा:
1. परिचय: असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, विशेषकर मछुआरों के सामने आने वाली कार्यस्थल सुरक्षा चुनौतियों का संक्षिप्त उल्लेख करें और हाल की घटनाओं का संदर्भ दें।
2. राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) की भूमिका:
क. स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेने की शक्ति और जाँच का आदेश देना।
ख. सिफारिशें करना और रिपोर्ट प्रस्तुत करवाना।
ग. मानवाधिकारों के उल्लंघन की निगरानी और रोकथाम।
घ. जागरूकता बढ़ाना और नीतिगत बदलावों की वकालत करना।
ङ. संवैधानिक प्रावधानों (अनुच्छेद 21) के तहत जीवन के अधिकार की रक्षा।
3. सरकार द्वारा उठाए गए कदम:
क. व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, 2020 (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020) जैसे कानून।
ख. सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ (जैसे प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना)।
ग. मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए विशिष्ट योजनाएँ (जैसे प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना)।
घ. प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम।
ङ. आपदा प्रबंधन और बचाव सेवाओं का प्रावधान (जैसे करुण्या समुद्री एम्बुलेंस)।
4. इन कदमों की प्रभावशीलता का समालोचनात्मक विश्लेषण:
क. कानूनों का अपर्याप्त प्रवर्तन और जागरूकता की कमी।
ख. असंगठित क्षेत्र की प्रकृति के कारण निगरानी में चुनौतियाँ।
ग. प्रवासी श्रमिकों की विशिष्ट समस्याएँ (भाषा, जानकारी का अभाव)।
घ. संसाधनों की कमी और बुनियादी ढाँचे का अभाव।
ङ. हितधारकों के बीच समन्वय की कमी।
5. निष्कर्ष: कार्यस्थल सुरक्षा में सुधार के लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दें, जिसमें मजबूत कानून, प्रभावी प्रवर्तन, जागरूकता, प्रशिक्षण और सभी हितधारकों का सहयोग शामिल हो।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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