20 Oct ग्रीन दिवाली 2026: पर्यावरण मंत्रालय और WWF ने पटाखे-मुक्त दिवाली के लिए अभियान शुरू किया
✎ ग्रीन दिवाली अभियान (20 अक्टूबर-8 नवंबर 2026) मिशन लाइफ के अनुरूप जन-जागरूकता का कार्यक्रम है, जो NCAP के 130 शहरों पर केंद्रित है; यह बाध्यकारी विधि नहीं, बल्कि नागरिक-सहभागिता का साधन है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (वायु प्रदूषण नियंत्रण, शहरी पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन शमन) | GS Paper II — शासन (पर्यावरण से संबंधित सरकारी योजनाएं और नागरिक-सहभागिता के तंत्र, केंद्र सरकार के मंत्रालय और उनके कार्यक्रम) | GS Paper I — समाज (त्योहारों से जुड़ी सामाजिक प्रथाएं और जीवनशैली में परिवर्तन)
- Prelims: राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP), मिशन लाइफ (Mission LiFE), EIACP (पर्यावरण सूचना, जागरूकता एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम), राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS), PM2.5 और PM10, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), हरित पटाखे और CSIR-NEERI, वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981
- Essay: त्योहार, उपभोग और पर्यावरण: क्या सामूहिक जीवनशैली परिवर्तन शहरी वायु प्रदूषण का स्थायी समाधान हो सकता है?, स्वच्छ हवा नागरिकों का अधिकार: जन-जागरूकता, कानून और सामुदायिक भागीदारी की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: ग्रीन दिवाली अभियान (20 अक्टूबर-8 नवंबर 2026) मिशन लाइफ के अनुरूप जन-जागरूकता का कार्यक्रम है, जो NCAP के 130 शहरों पर केंद्रित है; यह बाध्यकारी विधि नहीं, बल्कि नागरिक-सहभागिता का साधन है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सहयोग से डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के प्रोग्राम सेंटर-रिसोर्स पार्टनर (PC-RP) ने 20 अक्टूबर से 8 नवंबर 2026 तक राष्ट्रव्यापी ग्रीन दिवाली अभियान शुरू किया है। इसके अंतर्गत नागरिकों से पटाखे न जलाने और मिशन लाइफ के अनुरूप स्वच्छ एवं हरित दिवाली मनाने की अपील की गई है। अभियान का विशेष केंद्र राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के अंतर्गत आने वाले 130 शहर हैं, जहां दीपावली की अवधि में वायु गुणवत्ता में गिरावट एक बार-बार उभरने वाली चुनौती रही है। अभियान स्कूलों, कॉलेजों, शिक्षण संस्थानों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों और स्थानीय समुदायों तक पहुंचाया जाएगा। इसमें नागरिकों को कार्बन फुटप्रिंट सर्वेक्षण में भाग लेने और अपनी रोज़मर्रा की आदतों के पर्यावरणीय प्रभाव को समझने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। गतिविधियों का विवरण ऑनलाइन फॉर्म के माध्यम से जमा करने और चुनी गई प्रविष्टियों को EIACP की वेबसाइटों व सोशल मीडिया पर प्रदर्शित करने की व्यवस्था है।
पृष्ठभूमि
- वायु प्रदूषण के नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने जनवरी 2019 में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) आरंभ किया, जिसमें वर्ष 2017 को आधार वर्ष मानकर 2024 तक PM10 सांद्रता में 20-30 प्रतिशत कमी का लक्ष्य रखा गया था। यह कार्यक्रम पर्यावरण मंत्रालय के अंतर्गत चलता है।
- परिवेश वायु की गुणवत्ता को मापने के लिए राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS) निर्धारित हैं, जिनमें PM2.5 और PM10 जैसे कणीय पदार्थों के मानक शामिल हैं। इन मानकों की निगरानी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करते हैं।
- त्योहारों के दौरान पटाखों से निकलने वाले धुएं और कणों के कारण शहरों में वायु प्रदूषण अस्थायी रूप से बढ़ता है। इसी संदर्भ में न्यायालयों और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने पटाखों के उपयोग को नियंत्रित करने संबंधी निर्देश दिए हैं, और CSIR-NEERI द्वारा विकसित ‘हरित पटाखे’ की अवधारणा को प्रोत्साहित किया गया है।
- प्रधानमंत्री द्वारा 2022 में आरंभ किया गया मिशन लाइफ (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) सतत उपभोग और व्यक्तिगत आदतों में परिवर्तन पर बल देता है, जिसका उद्देश्य जलवायु कार्रवाई को जन-आंदोलन बनाना है।
- EIACP पर्यावरण सूचना, जागरूकता और क्षमता निर्माण के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय का कार्यक्रम है, जिसके प्रोग्राम सेंटर-रिसोर्स पार्टनर (PC-RP) के रूप में गैर-सरकारी संगठन भी काम करते हैं।
ग्रीन दिवाली और उससे जुड़ा नीतिगत ढांचा क्या है?
- ग्रीन दिवाली का अर्थ पर्यावरण-अनुकूल दिवाली है, जिसमें पटाखे न जलाना, दीयों और कम ऊर्जा खपत वाली लाइटों का उपयोग करना, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक से बचना और कचरे को स्रोत पर ही अलग-अलग छांटना शामिल है।
- यह अभियान जन-जागरूकता पर आधारित है; इसका कोई दंडात्मक या विधिक तंत्र नहीं है। पटाखों पर प्रतिबंध या नियमन संबंधी बाध्यकारी प्रावधान राज्य सरकारों और न्यायिक आदेशों के माध्यम से लागू होते हैं।
- वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 वायु प्रदूषण नियंत्रण के मूल विधिक आधार हैं।
- संविधान का अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार की न्यायिक व्याख्या का आधार बना है, जबकि अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण संरक्षण का और अनुच्छेद 51A(छ) नागरिकों को पर्यावरण की रक्षा का मूल कर्तव्य सौंपता है।
- NCAP एक समय-आधारित, गैर-बाध्यकारी (non-statutory) ढांचा है, जो गैर-अनुपालन वाले शहरों (non-attainment cities) पर केंद्रित है और स्थानीय कार्य योजनाओं के माध्यम से काम करता है।
- हरित पटाखे वे पटाखे हैं जिनमें प्रदूषक तत्वों की मात्रा कम रखी जाती है; इन्हें CSIR-NEERI द्वारा विकसित तकनीक से जोड़ा जाता है और इनके उपयोग की शर्तें न्यायालयों और सरकारी आदेशों से तय होती हैं।
- कार्बन फुटप्रिंट किसी व्यक्ति, परिवार या संस्था की गतिविधियों से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का माप है, जो व्यक्तिगत आदतों को जलवायु परिवर्तन से जोड़ने का साधन है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अभियान की अवधि | 20 अक्टूबर 2026 से 8 नवंबर 2026 तक, यानी दीपावली के आसपास की लगभग तीन सप्ताह की अवधि, जिसमें पटाखा-मुक्त आचरण पर केंद्रित संदेश दिया जा रहा है |
| संस्थागत ढांचा | केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सहयोग से डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया का प्रोग्राम सेंटर-रिसोर्स पार्टनर (PC-RP) इसका संचालन कर रहा है, जो पर्यावरण सूचना, जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यक्रम (EIACP) से जुड़ा है |
| लक्षित समूह | स्कूल, कॉलेज, शिक्षण संस्थान, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और स्थानीय समुदाय, यानी सीधे नागरिक-स्तर पर व्यवहार परिवर्तन का लक्ष्य |
| भौगोलिक फोकस | राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme, NCAP) के अंतर्गत आने वाले 130 शहरों पर विशेष ध्यान, जहां वायु गुणवत्ता सुधार के लिए पहले से लक्षित कार्ययोजनाएं लागू हैं |
| नीतिगत संबद्धता | मिशन लाइफ (Mission LiFE – Lifestyle for Environment) की भावना के अनुरूप जीवनशैली-आधारित पर्यावरण संरक्षण, जिसमें सरकारी नियमन के साथ नागरिक-आचरण पर बल दिया गया है |
| प्रतिक्रिया तंत्र | गतिविधियों का ऑनलाइन विवरण, जियो-टैग की गई तस्वीरें, प्रतिभागियों की संख्या और संक्षिप्त रिपोर्ट जमा कराना, जिससे कार्यक्रम के प्रभाव का दस्तावेजीकरण संभव होता है |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- दीपावली के दौरान पटाखों से निकलने वाले कण-पदार्थ (particulate matter) और सल्फर डाइऑक्साइड जैसे प्रदूषक वायु गुणवत्ता में अल्पकालिक किंतु तीव्र गिरावट का कारण बनते हैं, इसलिए त्योहारी अवधि में उत्सर्जन घटाना सीधा प्रभाव डालता है
- दीयों और कम बिजली खपत वाली लाइटों के उपयोग से ऊर्जा की मांग और उससे जुड़े उत्सर्जन में कमी आती है
नीतिगत और प्रशासनिक महत्व
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के लक्ष्यों को जन-भागीदारी से जोड़ना, क्योंकि केवल तकनीकी और प्रशासनिक उपायों से शहरी वायु सुधार सीमित रहता है
- सरकारी मंत्रालय और गैर-सरकारी संगठन के बीच प्रोग्राम सेंटर-रिसोर्स पार्टनर मॉडल का उपयोग, जिससे सूचना प्रसार और क्षमता निर्माण का विकेंद्रित ढांचा बनता है
सामाजिक और व्यवहारिक महत्व
- परिवार और पड़ोस स्तर पर प्रेरणा देने की रणनीति से सामूहिक आचरण परिवर्तन को बढ़ावा मिलता है, जो नियम-प्रवर्तन से अधिक टिकाऊ माना जाता है
- कार्बन फुटप्रिंट सर्वेक्षण के माध्यम से नागरिक अपनी दैनिक खपत और पर्यावरणीय प्रभाव को माप सकते हैं, जिससे स्थायी आदतों की समझ विकसित होती है
शैक्षिक महत्व
- विद्यालय और महाविद्यालय स्तर पर संकल्प अभियान, रैलियां और कक्षा-गतिविधियां पर्यावरण शिक्षा को व्यवहारिक रूप देती हैं, जो मौलिक कर्तव्य की भावना को मजबूत करती है
चुनौतियाँ
1. पटाखों के प्रति सांस्कृतिक और सामाजिक आग्रह
- दीपावली के साथ पटाखे की परंपरा गहराई से जुड़ी है, इसलिए केवल अपील से व्यवहार बदलना कठिन है
- परिवारों और समुदायों के भीतर सामाजिक दबाव और उत्सव-संस्कृति के कारण व्यक्तिगत निर्णय सीमित हो जाते हैं
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे; सांस्कृतिक विविधता और पर्यावरण नीति का संबंध
2. वायु प्रदूषण का बहुस्रोती स्वरूप
- पटाखे केवल एक स्रोत हैं; वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण, निर्माण धूल और पराली दहन भी शहरी वायु को प्रभावित करते हैं
- इसलिए एक त्योहारी अभियान से वर्ष भर की वायु गुणवत्ता समस्या का समाधान नहीं हो सकता
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रदूषण; वायु प्रदूषण नियंत्रण की बहुक्षेत्रीय चुनौतियां
3. नियमन और प्रवर्तन की सीमा
- वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत प्रदूषण नियंत्रण संभव है, परंतु राज्य स्तर पर प्रवर्तन की क्षमता असमान है
- स्वैच्छिक अभियान और वैधानिक प्रतिबंधों के बीच तालमेल न होने से अपील का प्रभाव सीमित रह सकता है
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण विधि; केंद्र-राज्य प्रशासनिक समन्वय
4. आंकड़ों और प्रभाव-मूल्यांकन की कमी
- स्वैच्छिक गतिविधियों की संख्या और तस्वीरों से कार्यक्रम की पहुंच का अनुमान लगता है, पर वायु गुणवत्ता पर वास्तविक प्रभाव मापना अलग कार्य है
- स्वयं-रिपोर्टिंग पर आधारित डेटा में एकरूपता और सत्यापन की चुनौती रहती है
यूपीएससी लिंक: शासन में साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण; मूल्यांकन तंत्र
5. आर्थिक और आजीविका संबंधी पहलू
- पटाखा उद्योग और उससे जुड़े छोटे व्यापारियों तथा श्रमिकों की आजीविका पर प्रभाव एक संवेदनशील प्रश्न है
- इसलिए संक्रमण के लिए वैकल्पिक उत्पादन और रोजगार की योजना आवश्यक है, अन्यथा नीति का विरोध बढ़ सकता है
यूपीएससी लिंक: समावेशी विकास; हरित संक्रमण में न्यायपूर्ण परिवर्तन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सांस्कृतिक आग्रह | पटाखों की परंपरा से जुड़ाव के कारण स्वैच्छिक परिवर्तन धीमा हो सकता है |
| बहुस्रोती प्रदूषण | पटाखे केवल एक कारण हैं; वाहन, उद्योग और निर्माण धूल की भूमिका बनी रहती है |
| प्रवर्तन का अंतर | वैधानिक प्रावधानों और जमीनी अमल के बीच राज्यों में असमानता है |
| प्रभाव मापन | भागीदारी के आंकड़े और वायु गुणवत्ता में सुधार के बीच सीधा संबंध स्थापित करना कठिन है |
| आजीविका प्रभाव | पटाखा निर्माण और बिक्री से जुड़े श्रमिकों के लिए वैकल्पिक अवसर आवश्यक हैं |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme, NCAP)
- मिशन लाइफ (Mission LiFE – Lifestyle for Environment)
- पर्यावरण सूचना, जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यक्रम (Environment Information, Awareness and Capacity Building Programme, EIACP)
आगे की राह
- पटाखा-मुक्त आचरण को स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर वायु गुणवत्ता कार्ययोजना से जोड़ा जाए, ताकि अभियान और नियमन एक दिशा में काम करें
- प्रवर्तन के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की निगरानी क्षमता बढ़ाई जाए और पटाखा-संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित हो
- हरित विकल्पों, जैसे कम उत्सर्जन वाले पटाखों के मानकीकरण और प्रमाणन, पर शोध और विकास को प्रोत्साहित किया जाए
- पटाखा उद्योग से जुड़े श्रमिकों और व्यापारियों के लिए कौशल विकास और वैकल्पिक आजीविका की योजना बनाई जाए
- अभियान के प्रभाव को वायु गुणवत्ता आंकड़ों से जोड़कर मापा जाए, केवल भागीदारी संख्या पर निर्भर न रहा जाए
- शिक्षण संस्थानों में पर्यावरण शिक्षा को पाठ्यक्रम और व्यवहारिक गतिविधियों के माध्यम से निरंतर बनाया जाए
- कार्बन फुटप्रिंट जैसे सर्वेक्षणों के परिणामों को नागरिकों के लिए सरल व्यवहारिक सुझावों में बदला जाए
- वायु प्रदूषण से जुड़ी जानकारी को स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराकर ग्रामीण और शहरी दोनों समुदायों तक पहुंच बढ़ाई जाए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme) · वायु गुणवत्ता सूचकांक (National Air Quality Index) · मिशन लाइफ (Mission LiFE: Lifestyle for Environment) · ग्रीन दिवाली (Green Diwali) · सूक्ष्म कण पदार्थ (Particulate Matter: PM2.5 और PM10) · प्रदूषक-भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle) · सावधानी सिद्धांत (Precautionary Principle) · अनुच्छेद 21 और स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार · अनुच्छेद 51क(छ) (Article 51A(g)) · पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 (Environment Protection Act, 1986) · व्यवहार-परिवर्तन संचार (Behaviour Change Communication) · पर्यावरण सूचना, जागरूकता एवं क्षमता-निर्माण कार्यक्रम (EIACP)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: स्वच्छ वायु को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना गया
- अनुच्छेद 48A: राज्य का पर्यावरण संरक्षण का दायित्व
- अनुच्छेद 51A(छ): नागरिकों का प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का मौलिक कर्तव्य
अवधारणा प्रवाह
पटाखों और ऊर्जा-गहन प्रकाश से दीपावली के दौरान कण-पदार्थ और अन्य प्रदूषकों का उत्सर्जन बढ़ता है → एनसीएपी के 130 शहरों में पहले से मौजूद वायु गुणवत्ता की चुनौती और अधिक गंभीर हो जाती है → स्कूलों, समुदायों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों के माध्यम से संकल्प और सूचना का प्रसार होता है → नागरिक पटाखा न जलाने, दीये और कम खपत वाली लाइट अपनाने तथा कचरा छांटने जैसे आचरण अपनाते हैं → कार्बन फुटप्रिंट सर्वेक्षण और ऑनलाइन रिपोर्टिंग से व्यवहार-परिवर्तन दर्ज होता है और दीर्घकालिक स्थायी आदतों की ओर बढ़ा जाता है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) वर्ष 2019 में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा आरंभ किया गया था।
2. मिशन लाइफ (LiFE) की घोषणा संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा की गई थी।
3. संविधान का अनुच्छेद 51क(छ) नागरिकों पर वनों, झीलों, नदियों और वन्यजीवों सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और संवर्धन का मूल कर्तव्य अधिरोपित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: NCAP 2019 में आरंभ हुआ और इसमें 2017 के आधार वर्ष की तुलना में PM10 सांद्रता में 2024 तक 20 से 30 प्रतिशत कमी का लक्ष्य रखा गया था। कथन 2 गलत है: मिशन लाइफ की घोषणा भारत के प्रधानमंत्री ने वर्ष 2021 में ग्लासगो में COP26 सम्मेलन में की थी, UNEP द्वारा नहीं। कथन 3 सही है, जो मूल कर्तव्य से संबंधित है।
Q2. निम्नलिखित में से प्रत्येक में एक अभिकथन (A) और एक कारण (R) दिया गया है।
अभिकथन (A): दीवाली की रात वायु गुणवत्ता में अल्पकालिक किंतु तीव्र गिरावट देखी जाती है।
कारण (R): पटाखों के दहन से सूक्ष्म कण पदार्थ तथा बेरियम और स्ट्रोंशियम जैसी धातुएँ वायुमंडल में उत्सर्जित होती हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
(क) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(ख) (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
(घ) (A) गलत है, किंतु (R) सही है।
- (क) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (ख) (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (ग) (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
- (घ) (A) गलत है, किंतु (R) सही है।
उत्तर: (क) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — पटाखों के दहन से PM2.5 और PM10 के स्तर में अचानक वृद्धि होती है, जिससे दीवाली के आसपास वायु गुणवत्ता अल्पकाल में बिगड़ती है। आतिशबाज़ी में रंगों के लिए बेरियम, स्ट्रोंशियम, तांबा जैसे धातु लवणों का प्रयोग होता है, इसलिए R, A की सही व्याख्या करता है।
Q3. निम्नलिखित सूचियों का मिलान कीजिए:
सूची I (संस्था/योजना/सूचकांक)
A. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम
B. मिशन लाइफ
C. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM)
D. राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक
सूची II (विवरण)
1. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती क्षेत्रों के लिए वैधानिक आयोग
2. आठ प्रदूषकों पर आधारित वायु गुणवत्ता की दैनिक रिपोर्टिंग प्रणाली
3. पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने का राष्ट्रीय अभियान
4. गैर-प्राप्ति (non-attainment) वाले शहरों के लिए शहर-स्तरीय प्रदूषण न्यूनीकरण योजना
सही मिलान का चयन कीजिए:
- A-4, B-3, C-1, D-2
- A-2, B-3, C-4, D-1
- A-4, B-1, C-3, D-2
- A-3, B-4, C-1, D-2
उत्तर: A-4, B-3, C-1, D-2 — NCAP शहर-स्तरीय लक्ष्यों वाली योजना है, इसलिए A-4। मिशन LiFE व्यवहार-परिवर्तन का अभियान है, इसलिए B-3। CAQM का गठन वर्ष 2021 के अधिनियम के तहत हुआ और यह NCR के लिए वैधानिक आयोग है, इसलिए C-1। राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक CPCB द्वारा आठ प्रदूषकों पर आधारित है, इसलिए D-2।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए भारत में विधिक-नियामक उपायों के साथ-साथ जन-सहभागिता और जीवनशैली-आधारित अभियानों पर भी बल दिया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम और मिशन लाइफ जैसे प्रयासों के संदर्भ में इस दृष्टिकोण का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या केवल स्वैच्छिक जीवनशैली-परिवर्तन पर्याप्त है, और यदि नहीं, तो राज्य की नियामक भूमिका को किस प्रकार सुदृढ़ किया जाना चाहिए? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संकेत-बिंदु:
1. परिचय: दीवाली जैसे अवसरों पर PM2.5 और PM10 में अल्पकालिक वृद्धि; NCAP के अंतर्गत 130 शहरों का चिन्हांकन (गैर-प्राप्ति शहर) और स्थानीय कार्ययोजनाओं की आवश्यकता।
2. विधिक-नियामक ढाँचा: वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981; पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 के अंतर्गत केंद्र की व्यापक शक्तियाँ; राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (CPCB); वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के अंतर्गत CAQM; NCAP का 2017 आधार वर्ष से 2024 तक 20 से 30 प्रतिशत कण-कमी का लक्ष्य और उसकी समीक्षा।
3. न्यायिक दृष्टिकोण: अनुच्छेद 21 के अंतर्गत स्वच्छ वायु का अधिकार (M.C. Mehta प्रकरण, दिल्ली वाहन प्रदूषण); प्रदूषक-भुगतान सिद्धांत और सावधानी सिद्धांत (Vellore Citizens Welfare Forum, 1996); पटाखा-नियमन से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के आदेश तथा ‘ग्रीन पटाखों’ की अवधारणा (CSIR-NEERI)।
4. जीवनशैली-आधारित दृष्टिकोण: अनुच्छेद 51क(छ) के मूल कर्तव्य; मिशन LiFE (COP26, 2021) के ‘प्रो-प्लैनेट पीपल’ विचार; व्यवहार-अर्थशास्त्र में Thaler और Sunstein की ‘नज’ (Nudge) अवधारणा; स्वैच्छिकता की सीमाएँ, जैसे उपभोग-असमानता और सामाजिक-आर्थिक बाधाएँ।
5. संतुलित मत: जन-जागरूकता नीति-क्रियान्वयन का पूरक है, विकल्प नहीं; सामान्य व्यक्ति पर मूल कर्तव्य का नैतिक दायित्व है, किंतु प्रदूषणकारी उद्योगों और स्रोतों पर विधिक दायित्व राज्य का है।
6. सुझाव: प्रवर्तन की विश्वसनीयता, स्थानीय निकायों की क्षमता, डेटा-आधारित जवाबदेही (CAAQMS नेटवर्क), प्रोत्साहन-आधारित नीतियाँ, और सामुदायिक निगरानी।
7. निष्कर्ष: स्वैच्छिक आचरण और सशक्त नियामक तंत्र के समन्वय से ही सतत वायु-गुणवत्ता सुधार संभव है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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