23 Oct बंगाल की खाड़ी में चक्रवात बन सकता है, 28 अक्टूबर तक ओडिशा-आंध्र तट पार करेगा
✎ चक्रवात की पूर्व चेतावनी IMD की श्रेणी-आधारित घोषणाओं पर आधारित होती है, और राज्य स्तर पर जीवन-रक्षा का आधार समय पर निकासी, आश्रय-स्थल और आपदा बलों की पूर्व-तैनाती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (उष्णकटिबंधीय चक्रवात की उत्पत्ति, मानसून-पश्चात वर्षा और तटीय भूआकृतियों पर प्रभाव) | GS Paper III — आपदा प्रबंधन (चक्रवात की पूर्व चेतावनी, निकासी और राहत तंत्र, संस्थागत ढाँचा) | GS Paper II — शासन (केंद्र-राज्य समन्वय, राष्ट्रीय और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की भूमिका)
- Prelims: चक्रवात की श्रेणियाँ और IMD के पवन-वेग मानक, निम्न दाब क्षेत्र, अवदाब, गहरा अवदाब और चक्रवाती तूफान का क्रम, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), ओडिशा आपदा त्वरित कार्य बल (ODRAF), गोपालपुर और काकीनाडा तट, उत्तर-पूर्वी मानसून और बंगाल की खाड़ी में चक्रवात की मौसमी आवृत्ति, स्टॉर्म सर्ज (तूफानी लहर) और भूस्खलन के बीच अंतर
- Essay: आपदा की पूर्व चेतावनी से जीवन-रक्षा तक: भारत में चक्रवात प्रबंधन की सफलता के सबक, तटीय राज्यों में जलवायु-जनित आपदाओं के बढ़ते जोखिम के बीच विकास और सुरक्षा का संतुलन
त्वरित पुनरावृत्ति: चक्रवात की पूर्व चेतावनी IMD की श्रेणी-आधारित घोषणाओं पर आधारित होती है, और राज्य स्तर पर जीवन-रक्षा का आधार समय पर निकासी, आश्रय-स्थल और आपदा बलों की पूर्व-तैनाती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department, IMD) के भुवनेश्वर मौसम केंद्र के अनुसार बंगाल की खाड़ी के पूर्व-मध्य और दक्षिण-पूर्वी भाग में बना निम्न दाब क्षेत्र 24 अक्टूबर 2026 तक अवदाब, फिर गहरे अवदाब और 26 अक्टूबर की सुबह तक चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। इसके 28 अक्टूबर तक दक्षिणी ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तट को पार करने की संभावना है। इसी को देखते हुए ओडिशा सरकार ने तैयारी के तहत सभी सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियाँ रद्द कीं, मछुआरों को तट पर लौटने की सलाह दी गई और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल तथा ओडिशा आपदा त्वरित कार्य बल को स्टैंडबाय पर रखा गया। 27 अक्टूबर के लिए पुरी, गंजाम और गजपति जिलों में रेड अलर्ट जारी हुआ है। यह समाचार इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह चक्रवात की पूर्व चेतावनी से लेकर निकासी, संसाधन तैनाती और प्रशासनिक समन्वय तक के पूरे आपदा प्रबंधन चक्र को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- बंगाल की खाड़ी विश्व के सबसे सक्रिय उष्णकटिबंधीय चक्रवात क्षेत्रों में से एक है। मानसून-पश्चात की अवधि, विशेषकर अक्टूबर-नवंबर, में इसके तटों पर चक्रवात की आवृत्ति अपेक्षाकृत अधिक रहती है, जबकि अरब सागर की तुलना में बंगाल की खाड़ी में चक्रवात अधिक बनते हैं।
- ओडिशा के तट का चक्रवात-संवेदनशील होना ऐतिहासिक है। वर्ष 1999 के ओडिशा सुपर चक्रवात ने भारी जन-धन की हानि की थी, जिसके बाद चक्रवात की पूर्व चेतावनी, तटीय आश्रय-स्थलों के निर्माण और निकासी-व्यवस्था पर व्यापक ध्यान दिया गया।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की स्थापना हुई और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) का गठन हुआ। राज्यों में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और राज्य स्तर के आपदा मोचन बल कार्य करते हैं। जिला कलेक्टर आपदा के समय बल की सेवाएँ माँग सकते हैं।
- IMD द्वारा चक्रवात की श्रेणी तय करने के लिए निश्चित पवन-वेग की सीमाएँ निर्धारित हैं। इसलिए मौसम तंत्र के हर चरण (निम्न दाब क्षेत्र से चक्रवाती तूफान तक) की घोषणा से प्रशासन को क्रमिक रूप से तैयारी का समय मिलता है।
- पूर्व चेतावनी के बाद भी जोखिम तब तक बना रहता है जब तक लैंडफॉल का सटीक क्षेत्र तय न हो। इसी कारण से समाचार में बताया गया है कि IMD अभी लैंडफॉल का सटीक क्षेत्र घोषित नहीं कर पाया है और राज्य विभिन्न मॉडलों के आधार पर तैयारी कर रहा है।
उष्णकटिबंधीय चक्रवात क्या है?
- उष्णकटिबंधीय चक्रवात निम्न दाब का वह तंत्र है जिसमें केंद्र के चारों ओर तेज़ पवनें चक्राकार रूप में चलती हैं। इसे उत्तरी गोलार्ध में घड़ी की विपरीत दिशा में घूमते हुए देखा जाता है।
- उत्पत्ति की अनुकूल परिस्थितियों में 26-27 डिग्री सेल्सियस से अधिक समुद्री सतह तापमान, विषुवत रेखा से लगभग 5 डिग्री अक्षांश दूर होने के कारण कोरिऑलिस बल की उपस्थिति, निम्न वायुमंडलीय दाब तथा ऊर्ध्वाधर पवन-कर्तन (Wind Shear) का कम होना शामिल हैं।
- IMD चक्रवात की श्रेणियाँ पवन-वेग के आधार पर तय करता है। निम्न दाब क्षेत्र, अवदाब (31-49 किमी/घंटा), गहरा अवदाब (50-61 किमी/घंटा), चक्रवाती तूफान (62-88 किमी/घंटा), गंभीर चक्रवाती तूफान (89-117 किमी/घंटा), अति गंभीर चक्रवाती तूफान (118-166 किमी/घंटा), अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान (167-221 किमी/घंटा) और सुपर चक्रवाती तूफान (221 किमी/घंटा से अधिक)।
- लैंडफॉल वह बिंदु है जहाँ चक्रवात स्थल पर पहुँचता है। स्थल पर पहुँचने के बाद वह अपनी ऊर्जा की आपूर्ति समुद्र से खो देता है और धीरे-धीरे कमज़ोर होता है, परंतु भारी वर्षा और बाढ़ का खतरा बना रहता है।
- स्टॉर्म सर्ज (तूफानी लहर) समुद्र के असामान्य रूप से ऊपर उठने की घटना है, जो चक्रवात के समय तटीय क्षेत्रों में सबसे अधिक विनाशकारी होती है और जिससे जन-हानि का बड़ा हिस्सा होता है।
- तैयारी के प्रमुख उपाय हैं: पूर्व चेतावनी का प्रसार, तटीय गाँवों से समय पर निकासी, चक्रवात आश्रय-स्थल, मछुआरों के लिए समुद्र में न जाने की चेतावनी, बिजली और संचार का प्रबंधन तथा आपदा बलों की पूर्व-तैनाती।
- भारत में चक्रवात की पूर्व चेतावनी IMD जारी करता है। आपदा के समय राहत, बचाव और निकासी का अभियान राज्य सरकार और जिला प्रशासन के नेतृत्व में चलता है, जबकि NDRF जैसे बल उनके सहायक के रूप में कार्य करते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| प्रणाली का विकास क्रम | निम्न दाब क्षेत्र से अवदाब, फिर गहरा अवदाब और अंततः चक्रवाती तूफ़ान में विकसित होने की संभावना है। यह क्रम IMD के पूर्वानुमान का आधार है। |
| संभावित स्थल-पात क्षेत्र | ओडिशा के गोपालपुर और आंध्र प्रदेश के काकीनाडा के बीच का तटीय क्षेत्र। अंतिम स्थल-पात क्षेत्र का निर्धारण IMD द्वारा अभी किया जाना शेष है। |
| चेतावनी का स्तर | पुरी, गंजम और गजपति जिलों के लिए 27 अक्टूबर को भारी वर्षा हेतु लाल चेतावनी। 26 अक्टूबर से कई जिलों में भारी से अति भारी वर्षा का अनुमान। |
| स्थल-पात के बाद की दिशा | प्रणाली के अवदाब के रूप में भीतरी ओडिशा से होते हुए झारखंड और छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ने का अनुमान। इससे तटीय क्षेत्रों के साथ अंतर्देशीय क्षेत्रों में भी वर्षा-जनित आपदा का खतरा। |
| प्रशासनिक तैयारी | सभी सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियाँ रद्द, मछुआरों को तट पर लौटने की सलाह, तथा NDRF और ODRAF को स्टैंडबाय पर रखा गया है। |
| जिला प्रशासन की भूमिका | जिला कलेक्टर संकट के समय आपदा प्रतिक्रिया बलों की सेवाएँ माँग सकते हैं। जन-हानि कम करने के लिए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर निकालने की योजना। |
महत्व
आपदा प्रबंधन और शासन
- यह घटना आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) के तहत बहु-स्तरीय ढाँचे की व्यावहारिक परीक्षा है, जिसमें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), राज्य स्तर और जिला स्तर की संस्थाएँ समन्वय से काम करती हैं।
- जिला कलेक्टर को आपदा प्रतिक्रिया बलों की सेवाएँ माँगने का अधिकार होना यह दिखाता है कि आपदा के समय निर्णय-क्षमता जिला स्तर तक विकेंद्रित रहती है।
- पूर्वानुमान, चेतावनी और निकासी का समयबद्ध क्रम जन-हानि घटाने की प्रमुख कसौटी है।
मौसम विज्ञान और पूर्वानुमान
- भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department) के भुवनेश्वर स्थित क्षेत्रीय केंद्र द्वारा निम्न दाब क्षेत्र से चक्रवात तक के चरणों की क्रमिक चेतावनी दी गई है।
- मॉडल-आधारित अनुमानों में स्थल-पात बिंदु की अनिश्चितता बनी रहती है, इसलिए चेतावनी को लगातार अद्यतन करना आवश्यक होता है।
आर्थिक और आजीविका
- मछली पकड़ने वाले समुदायों के लिए गहरे समुद्र में जाने पर रोक और ट्रॉलर संचालकों को चेतावनी, आजीविका और जीवन-रक्षा के बीच संतुलन का उदाहरण है।
- खड़ी फसलों, तटीय बुनियादी ढाँचे और आवासों को होने वाली क्षति का प्रभाव आर्थिक संवृद्धि के स्थानीय स्तर पर महसूस होता है।
चुनौतियाँ
1. पूर्वानुमान की अनिश्चितता
- IMD ने अभी तक स्थल-पात का सटीक क्षेत्र घोषित नहीं किया है, जबकि विभिन्न मॉडल भिन्न संकेत दे रहे हैं।
- अनिश्चितता के कारण बड़े क्षेत्र में निकासी की तैयारी करनी पड़ती है, जिससे संसाधनों का दबाव बढ़ता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: आपदा प्रबंधन; मौसम पूर्वानुमान की भूमिका
2. तटीय जन-निकासी और जन-हानि
- निचले तटीय इलाकों और कच्चे मकानों में रहने वाली आबादी सबसे अधिक जोखिम में रहती है।
- निकासी के दौरान परिवहन, आश्रय-स्थल और चिकित्सा सुविधा का समय पर उपलब्ध होना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: GS-1 और GS-2: भेद्यता, शासन और संवेदनशील समुदाय
3. मछुआरा समुदाय का जोखिम
- समुद्र में फँसे मछुआरों तक चेतावनी पहुँचाना सबसे कठिन कार्यों में है, क्योंकि कई नौकाओं में संचार के साधन सीमित होते हैं।
- गहरे समुद्र में मछली पकड़ने पर रोक से तत्काल आय घटती है, जिसकी क्षतिपूर्ति के उपाय सीमित हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-3: आजीविका जोखिम; GS-2: सामाजिक सुरक्षा
4. बहु-खतरा प्रभाव
- चक्रवात के अंतर्देशीय क्षेत्रों में प्रवेश से तटीय तूफ़ानी हवाओं के साथ नदी-बाढ़ और भूस्खलन का संयुक्त खतरा बनता है।
- झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में अचानक वर्षा से बाढ़ की स्थिति बन सकती है, जिसकी तैयारी सामान्यतः तटीय राज्यों की तुलना में कम होती है।
यूपीएससी लिंक: GS-1: भौगोलिक विशेषताएँ और आपदाएँ; GS-3: बाढ़ प्रबंधन
5. प्रशासनिक उपलब्धता
- त्योहारों के दौरान कई सरकारी कर्मचारी अपने कार्यस्थल से बाहर होते हैं, जिससे प्रारंभिक प्रतिक्रिया में देरी की आशंका रहती है।
- छुट्टियाँ रद्द करने जैसे अस्थायी उपाय प्रभावी होते हैं, पर दीर्घकालिक रूप से स्थानीय स्वयंसेवी और समुदाय आधारित ढाँचा भी आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: प्रशासनिक सुधार और मानव संसाधन प्रबंधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| समस्या | चिंता |
|---|---|
| स्थल-पात बिंदु की अनिश्चितता | निकासी और तैनाती का क्षेत्र बड़ा करना पड़ता है, जिससे संसाधन बँट जाते हैं। |
| तटीय आबादी की भेद्यता | कच्चे मकान और निचले क्षेत्र अधिक जोखिम में हैं; समय पर निकासी न हुई तो जन-हानि की आशंका। |
| मछुआरों तक सूचना पहुँचना | समुद्र में फँसी नौकाओं तक चेतावनी पहुँचाने के साधन सीमित हैं। |
| अंतर्देशीय बाढ़ का खतरा | प्रणाली के भीतर की ओर बढ़ने से झारखंड और छत्तीसगढ़ में अचानक वर्षा-बाढ़ की संभावना। |
| आजीविका और फसल हानि | मत्स्य व्यवसाय में आय का नुकसान और खड़ी फसलों की क्षति का स्थानीय आर्थिक प्रभाव। |
| प्रशासनिक तैयारी में देरी | त्योहार-काल में कर्मचारियों की अनुपस्थिति से प्रारंभिक प्रतिक्रिया प्रभावित हो सकती है। |
आगे की राह
- IMD के चरणबद्ध पूर्वानुमान को ज़िला और ग्राम स्तर तक सरल भाषा और स्थानीय भाषा में पहुँचाया जाए, ताकि अनिश्चितता के बावजूद समय पर कार्रवाई हो सके।
- मछुआरों के लिए नौकाओं में संचार उपकरण और सुनिश्चित सूचना-प्रणाली को प्राथमिकता दी जाए।
- तटीय और अंतर्देशीय दोनों क्षेत्रों के लिए एकीकृत आपदा योजना बने, जिसमें बाढ़ और तूफ़ानी हवाओं के संयुक्त जोखिम का आकलन हो।
- निकासी मार्ग, आश्रय-स्थल और चिकित्सा सुविधाओं की पूर्व-पहचान और नियमित अभ्यास (मॉक ड्रिल) सुनिश्चित किया जाए।
- स्थानीय स्वयंसेवकों और स्वयं-सहायता समूहों को प्रशिक्षित कर प्रारंभिक प्रतिक्रिया का सामुदायिक आधार मजबूत किया जाए।
- आपदा के समय प्रशासनिक उपलब्धता के लिए त्योहार-काल की ड्यूटी योजना पहले से बनाई जाए।
- प्रभावित परिवारों की आजीविका के लिए मत्स्य और कृषि क्षेत्र में क्षति आकलन और त्वरित राहत की प्रक्रिया स्पष्ट हो।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
चक्रवात (Cyclone) और IMD की तीव्रता-श्रेणियाँ · निम्न दाब क्षेत्र से चक्रवात तक का विकास-क्रम · भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department) की चेतावनी प्रणाली · आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) · राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य स्तरीय बल · तटीय भेद्यता और तूफानी लहर (Storm Surge) · सेंडाई आपदा जोखिम न्यूनीकरण ढांचा (Sendai Framework) · आपदा-पूर्व तैयारी बनाम आपदा-पश्चात प्रतिक्रिया · चक्रवात आश्रय स्थल और निकासी प्रबंधन · तटीय आजीविका (मछुआरा समुदाय) का संरक्षण · संघीय ढांचे में आपदा प्रबंधन की साझा जिम्मेदारी · जलवायु परिवर्तन और चरम मौसमी घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: जीवन की रक्षा हेतु निकासी और जन-हानि न्यूनतम करना
अवधारणा प्रवाह
बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) के मध्य-पूर्वी भाग में निम्न दाब क्षेत्र बनता है और उसी क्षेत्र में बना रहता है। → वायुमंडलीय परिस्थितियाँ अनुकूल होने पर यह क्रमशः अवदाब, गहरे अवदाब और फिर चक्रवाती तूफ़ान में विकसित होता है। → प्रणाली उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़कर ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटों के निकट पहुँचती है। → IMD चेतावनी जारी करता है और राज्य सरकार छुट्टियाँ रद्द करने, मछुआरों को लौटाने तथा बलों को स्टैंडबाय पर रखने जैसे कदम उठाती है। → जिला प्रशासन निकासी और राहत-शिविरों की व्यवस्था करता है, तथा NDRF और ODRAF आवश्यकता पड़ने पर तैनात किए जाते हैं। → स्थल-पात के बाद प्रणाली अवदाब के रूप में अंतर्देशीय क्षेत्रों में बढ़ती है, जिससे बाढ़ और आजीविका की क्षति का दूसरा चरण शुरू होता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए, जो बंगाल की खाड़ी में बनने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवातों से संबंधित हैं:
1. IMD के वर्गीकरण में निम्न दाब क्षेत्र, अवदाब (Depression), गहरा अवदाब (Deep Depression) और चक्रवाती तूफान (Cyclonic Storm) तीव्रता के क्रमिक चरण हैं।
2. IMD के वर्गीकरण के अनुसार, चक्रवाती तूफान की स्थिति में सतही हवाओं की निरंतर गति 62 से 88 किलोमीटर प्रति घंटा होती है।
3. उत्तर हिंद महासागर में उठने वाले चक्रवातों का नाम केवल IMD द्वारा तय किया जाता है और उनका नाम केवल भारत सरकार द्वारा ही हटाया जा सकता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: IMD के क्रम में निम्न दाब क्षेत्र से अवदाब, गहरा अवदाब और फिर चक्रवाती तूफान बनता है। कथन 2 सही है: चक्रवाती तूफान की सतही हवा की गति 62-88 किमी/घंटा मानी जाती है। कथन 3 गलत है: उत्तर हिंद महासागर के चक्रवातों के नाम क्षेत्र के सदस्य देशों द्वारा प्रस्तावित किए जाते हैं (WMO/ESCAP पैनल के अंतर्गत), और नाम हटाने का कोई एकल-सरकारी अधिकार नहीं है।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों (A और R) पर विचार कीजिए:
कथन (A): भारत में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की स्थापना एक वैधानिक प्रावधान के अंतर्गत की गई है।
कारण (R): आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 44 केंद्र सरकार को NDRF के गठन का अधिकार देती है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
विकल्प:
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है। — NDRF का गठन आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 44 के तहत हुआ है, इसलिए (A) और (R) दोनों सही हैं। धारा 44 ही NDRF के लिए वैधानिक आधार देती है, अतः (R) (A) की सही व्याख्या है।
Q3. निम्नलिखित सूचियों को सुमेलित कीजिए:
सूची-I (IMD के चक्रवाती वर्गीकरण)
1. गहरा अवदाब (Deep Depression)
2. चक्रवाती तूफान (Cyclonic Storm)
3. गंभीर चक्रवाती तूफान (Severe Cyclonic Storm)
4. अति गंभीर चक्रवाती तूफान (Very Severe Cyclonic Storm)
सूची-II (सतही हवा की निरंतर गति)
A. 89 से 117 किमी/घंटा
B. 62 से 88 किमी/घंटा
C. 118 से 165 किमी/घंटा
D. 50 से 61 किमी/घंटा
सही सुमेलन चुनिए:
- 1-B, 2-D, 3-A, 4-C
- 1-D, 2-B, 3-A, 4-C
- 1-D, 2-A, 3-B, 4-C
- 1-C, 2-B, 3-A, 4-D
उत्तर: 1-D, 2-B, 3-A, 4-C — गहरा अवदाब 50-61 किमी/घंटा (1-D), चक्रवाती तूफान 62-88 किमी/घंटा (2-B), गंभीर चक्रवाती तूफान 89-117 किमी/घंटा (3-A) और अति गंभीर चक्रवाती तूफान 118-165 किमी/घंटा (4-C) की सीमा में आते हैं। अतः सही सुमेलन 1-D, 2-B, 3-A, 4-C है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत के पूर्वी तट पर चक्रवात-पूर्व पूर्वानुमान, निकासी और आपदा-बल की तैनाती से जनहानि में उल्लेखनीय कमी आई है, फिर भी घरों, फसलों और मछुआरा समुदाय की आजीविका को होने वाली क्षति बनी हुई है। भारत के आपदा प्रबंधन संस्थागत ढांचे का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही स्पष्ट कीजिए कि तटीय आजीविका के संरक्षण के लिए केवल आपदा-प्रतिक्रिया पर्याप्त क्यों नहीं है। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर संरचना (Model-Answer Skeleton):
1. भूमिका: बंगाल की खाड़ी में निम्न दाब क्षेत्र से चक्रवात तक का विकास और ओडिशा-आंध्र प्रदेश तट पर प्रभाव; पूर्वानुमान, रेड अलर्ट, छुट्टी रद्द करना और मछुआरों को तट पर लौटने की सलाह जैसे तैयारी-उपाय।
2. संस्थागत ढांचा: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), राष्ट्रीय कार्यकारी समिति और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण; धारा 44 के तहत NDRF; राज्य स्तर पर ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF) और जिला कलेक्टर की बल-अनुरोध शक्ति।
3. पूर्वानुमान और चेतावनी: IMD के बुलेटिन, मॉडल-आधारित अनुमानों की सीमाएँ (लैंडफॉल का सटीक क्षेत्र घोषित होने में देरी का उल्लेख), चेतावनी के अंतिम-मील प्रसार की चुनौती।
4. सफलता का उदाहरण: अक्टूबर 2013 के फैलिन चक्रवात में ओडिशा की निकासी-आधारित तैयारी बनाम 1999 के सुपर साइक्लोन की भारी जनहानि की तुलना; राष्ट्रीय चक्रवात जोखिम न्यूनीकरण परियोजना (NCRMP) और चक्रवात आश्रय स्थलों की भूमिका।
5. सीमाएँ: संपत्ति, फसल और आजीविका (मछली पकड़ने पर रोक से होने वाली आय-हानि) की क्षति; आपदा-पश्चात राहत पर निर्भरता; तटीय भेद्यता (घर, बुनियादी ढांचा, अनौपचारिक बस्तियाँ) और बीमा/आजीविका-सहायता की कमी।
6. संघीय पक्ष: आपदा प्रबंधन में केंद्र और राज्य की साझा भूमिका; राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी और केंद्र की वित्तीय व तकनीकी सहायता के बीच समन्वय।
7. वैश्विक ढांचा: सेंडाई आपदा जोखिम न्यूनीकरण ढांचा (2015-2030) की प्राथमिकताएँ, विशेषकर आपदा-पूर्व जोखिम-न्यूनीकरण पर बल।
8. निष्कर्ष: प्रतिक्रिया-केंद्रित से जोखिम-न्यूनीकरण-केंद्रित दृष्टिकोण की ओर बदलाव, मछुआरा और तटीय समुदायों की आजीविका-सुरक्षा (बीमा, वैकल्पिक आजीविका, पुनर्वास) को आपदा नीति का अंग बनाना।
स्रोत: The Hindu
Odisha PCS (OPSC (OAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: अक्टूबर 2023 में बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहे मौसम प्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह प्रणाली चक्रवात में परिवर्तित हो सकती है। 2. इसके 28 अक्टूबर तक ओडिशा-आंध्र प्रदेश तटों को पार करने की संभावना है। 3. ओडिशा सरकार ने आपदा तैयारी के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमों को तैनात किया है। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रही मौसम प्रणाली के चक्रवात में परिवर्तित होने तथा 28 अक्टूबर तक ओडिशा-आंध्र प्रदेश तटों को पार करने की संभावना है। ओडिशा सरकार ने आपदा तैयारी के लिए NDRF टीमों को तैनात किया है।
Mains: ओडिशा राज्य में चक्रवात जैसी आपदाओं के प्रभावी प्रबंधन हेतु राज्य सरकार द्वारा अपनाई जाने वाली पूर्व-तैयारी एवं शमन रणनीतियों का वर्णन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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