24 Oct माई भारत अभियान: ग्राम सेवा एवं खेल दिवस के तहत गांवों में Nasha Mukt Yuva Abhiyan
✎ नशा-निवारण के लिए आपूर्ति पक्ष पर NDPS अधिनियम, 1985 तथा माँग पक्ष पर जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता के उपाय साथ-साथ चलते हैं, और इसका संवैधानिक आधार अनुच्छेद 47 है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन व्यवस्था, सामाजिक न्याय और स्वास्थ्य (युवा कल्याण, नशा निवारण, पंचायती राज) | GS Paper I — भारतीय समाज और संस्कृति (पारंपरिक खेल और ग्रामीण सामुदायिक जीवन)
- Prelims: राष्ट्रीय सेवा योजना (National Service Scheme) — स्थापना वर्ष 1969, युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय के अधीन, मेरा युवा भारत (MY Bharat) — युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत युवा संगठन मंच, नशा मुक्त भारत अभियान (Nasha Mukt Bharat Abhiyan) — सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित, अनुच्छेद 47 — राज्य का कर्तव्य: पोषण स्तर और लोक स्वास्थ्य सुधारना तथा हानिकारक मादक पेयों और नशीली दवाओं के सेवन पर रोक (राज्य नीति के निदेशक तत्व), नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सबस्टांसेज़ (NDPS) अधिनियम, 1985, अनुच्छेद 243G — पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाएं लागू करने की शक्ति (संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची), खेलो इंडिया (Khelo India) — जमीनी स्तर पर खेल अवसंरचना और खेल संस्कृति को बढ़ावा
- Essay: युवा शक्ति: नशे की चुनौती से निपटने में समुदाय-आधारित सहभागिता की भूमिका, स्वस्थ युवा, सशक्त राष्ट्र: खेल, सेवा और सामाजिक जागरूकता का समन्वय
त्वरित पुनरावृत्ति: नशा-निवारण के लिए आपूर्ति पक्ष पर NDPS अधिनियम, 1985 तथा माँग पक्ष पर जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता के उपाय साथ-साथ चलते हैं, और इसका संवैधानिक आधार अनुच्छेद 47 है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
पीआईबी की एक विज्ञप्ति के अनुसार राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) ने नशा मुक्त युवा अभियान के सप्ताह 6 के अंतर्गत ‘ग्राम सेवा एवं पारंपरिक खेल दिवस’ का आयोजन देशभर के गांवों में शुरू किया है। इस पहल में युवा स्वयंसेवकों को गांवों में सेवा-कार्य, जागरूकता गतिविधियों और पारंपरिक खेलों के माध्यम से सामुदायिक जुड़ाव से जोड़ा गया है। समाचार का मुख्य बिंदु यह है कि नशा-निवारण को केवल प्रतिबंधात्मक उपायों तक सीमित न रखकर युवाओं की सक्रिय भागीदारी, स्थानीय परंपराओं और ग्रामीण स्तर की संस्थाओं के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। परीक्षा की दृष्टि से यह प्रसंग शासन में जन-भागीदारी और नीति-क्रियान्वयन के सहभागी मॉडल को समझने का अवसर देता है।
पृष्ठभूमि
- भारत में नशे की समस्या के नियंत्रण का संवैधानिक आधार अनुच्छेद 47 में निहित है, जिसे राज्य नीति के निदेशक तत्वों में रखा गया है।
- नशीले पदार्थों से संबंधित अपराधों और उनकी रोकथाम के लिए NDPS अधिनियम, 1985 लागू है, जिसमें नशीले पदार्थों के उत्पादन, विक्रय और तस्करी पर कठोर दंड का प्रावधान है।
- नशा मुक्त भारत अभियान को माँग-कम करने (demand reduction) की दिशा में एक व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम के रूप में आरंभ किया गया, जिसमें शिक्षा, परामर्श और पुनर्वास पर बल है।
- राष्ट्रीय सेवा योजना की स्थापना 1969 में हुई थी और इसका आदर्श वाक्य ‘मम न मम’ (Not Me But You) है, जो निस्वार्थ सेवा की भावना को दर्शाता है।
- मेरा युवा भारत (MY Bharat) युवाओं के लिए एक मंच के रूप में विकसित किया गया है, जो विभिन्न युवा कार्यक्रमों को एक ढांचे में लाने का प्रयास करता है।
- पंचायतें 73वें संविधान संशोधन (1992) के बाद स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं के रूप में सामाजिक न्याय और जन-जागरूकता के कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
नशा मुक्त युवा अभियान और ग्राम-स्तरीय सहभागिता का मॉडल क्या है?
- यह अभियान नशा-निवारण को युवा-केंद्रित बनाने का प्रयास है, जिसमें शिक्षा, जागरूकता और सामुदायिक गतिविधियों को एक साथ जोड़ा जाता है।
- राष्ट्रीय सेवा योजना जैसे युवा संगठन स्वयंसेवकों के माध्यम से गांवों में सेवा-कार्य और सामाजिक जागरूकता के कार्यक्रम चलाते हैं।
- पारंपरिक खेल सामुदायिक एकजुटता और सकारात्मक जीवनशैली को बढ़ावा देने का माध्यम माने जाते हैं, इसलिए उन्हें नशा-निवारण के साथ जोड़ा गया है।
- नशा-निवारण की नीति में दो पक्ष होते हैं: आपूर्ति पक्ष (supply reduction), जिसमें NDPS अधिनियम और प्रवर्तन एजेंसियां आती हैं, और माँग पक्ष (demand reduction), जिसमें जागरूकता, परामर्श और पुनर्वास शामिल हैं।
- माँग-कम करने के उपायों में स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं और समुदाय की भागीदारी को विशेष महत्व दिया जाता है, क्योंकि नीतिगत निर्देश गांव स्तर पर ही व्यवहार में बदलते हैं।
- सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय जैसे विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय इस प्रकार के बहु-क्षेत्रीय अभियानों की सफलता के लिए आवश्यक है।
- परीक्षा की दृष्टि से इस मॉडल को सहभागी शासन (participatory governance) और सार्वजनिक स्वास्थ्य के संदर्भ में समझना उपयोगी है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| कार्यान्वयन ढांचा | राष्ट्रीय सेवा योजना (National Service Scheme) और मेरा युवा भारत (MY Bharat) मंच के माध्यम से गांवों तक पहुंच। दोनों युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अधीन कार्य करते हैं, इसलिए ढांचा पहले से मौजूद स्वयंसेवी नेटवर्क पर आधारित है। |
| अभियान का स्वरूप | नशा मुक्त युवा अभियान के छठे सप्ताह की थीम के रूप में ग्राम सेवा और पारंपरिक खेल दिवस का आयोजन। यह एक बड़े, समयबद्ध सप्ताहवार अभियान का हिस्सा है। |
| ग्राम सेवा घटक | गांव स्तर पर सेवा-आधारित सामुदायिक सहभागिता, जो राष्ट्रीय सेवा योजना के ‘मैं नहीं, आप’ के सेवा-दर्शन से जुड़ी है। |
| पारंपरिक खेल घटक | स्थानीय और पारंपरिक खेलों के जरिये युवाओं को नशे से दूर रखने वाली सकारात्मक गतिविधियों में जोड़ना, और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण। |
| राष्ट्रव्यापी एकरूपता | देशभर के गांवों में एक समान थीम पर आयोजन, जिससे नशामुक्ति का संदेश एकरूप तरीके से फैलता है और स्थानीय स्तर पर अनुकूलन की गुंजाइश भी बनी रहती है। |
महत्व
सामाजिक
- नशा युवाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार-क्षमता को सीधे प्रभावित करता है। इसलिए रोकथाम के लिए सहकर्मी (peer) प्रभाव और सामुदायिक वातावरण का उपयोग सार्थक है।
- खेल और सेवा-गतिविधियां युवाओं का खाली समय रचनात्मक दिशा में लगाती हैं, जो जोखिम-कारकों को कम करने का व्यावहारिक तरीका है।
- ग्रामीण युवाओं तक सीधी पहुंच से वह वर्ग जुड़ता है जो शहरी जागरूकता अभियानों से अक्सर छूट जाता है।
शासन एवं नीति
- मौजूदा संस्थागत ढांचे (राष्ट्रीय सेवा योजना और मेरा युवा भारत) का उपयोग करने से नए ढांचे खड़े करने की लागत और समय दोनों बचते हैं।
- विभिन्न युवा-केंद्रित संस्थाओं के बीच समन्वय से नीति-क्रियान्वयन में विभागीय तालमेल का व्यावहारिक उदाहरण मिलता है।
सांस्कृतिक
- पारंपरिक खेलों का पुनरुद्धार स्थानीय पहचान और सामुदायिक एकजुटता को मजबूत करता है।
- सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से नशे के विरुद्ध संदेश अधिक स्वीकार्य बनता है, क्योंकि वह स्थानीय परंपरा के साथ जुड़ा होता है।
चुनौतियाँ
1. स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण और निरंतरता
- अभियान की सफलता बड़े स्तर पर प्रशिक्षित और प्रेरित स्वयंसेवकों पर निर्भर है। अल्पकालिक सप्ताह-आधारित आयोजनों के बाद गतिविधियों का टिके रहना कठिन होता है।
- स्वयंसेवक अक्सर अध्ययन या रोजगार की व्यस्तता के कारण सीमित समय दे पाते हैं, जिससे सहभागिता में उतार-चढ़ाव आता है।
यूपीएससी लिंक: GS2: सरकारी नीतियों और हस्तक्षेपों का क्रियान्वयन तथा स्वयंसेवी संगठनों की भूमिका
2. नशे की समस्या का बहुआयामी स्वरूप
- नशे की समस्या केवल मांग (demand) से नहीं, बल्कि आपूर्ति (supply) और तस्करी से भी जुड़ी है। केवल जागरूकता से आपूर्ति-पक्ष की चुनौती हल नहीं होती।
- सिंथेटिक और नई पीढ़ी की नशीली दवाओं का प्रसार पारंपरिक नशे से अलग चुनौती पेश करता है, जिसके लिए अलग रणनीति चाहिए।
यूपीएससी लिंक: GS2: सामाजिक क्षेत्र की योजनाएं; GS3: आंतरिक सुरक्षा और मादक द्रव्य तस्करी
3. ग्रामीण अवसंरचना की सीमाएं
- कई गांवों में खेल मैदान, प्रशिक्षित प्रशिक्षक और सामुदायिक स्थल सीमित हैं, जिससे खेल-आधारित रोकथाम का दायरा घटता है।
- स्थानीय स्तर पर आयोजन के लिए संसाधनों और समन्वय का अभाव अभियान की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: GS2: ग्रामीण विकास और सामाजिक अवसंरचना में असमानता
4. प्रभाव का मापन
- जागरूकता गतिविधियों की संख्या आसानी से गिनी जा सकती है, परंतु व्यवहार में स्थायी बदलाव को मापना कठिन है।
- बिना स्पष्ट परिणाम-संकेतकों (outcome indicators) के यह तय करना मुश्किल है कि अभियान कितना प्रभावी रहा।
यूपीएससी लिंक: GS2: नीति-मूल्यांकन और लोक नीति में परिणाम-आधारित निगरानी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| समस्या | चिंता |
|---|---|
| स्वयंसेवकों की निरंतरता | अल्पकालिक आयोजनों के बाद सहभागिता का टिकना कठिन; प्रशिक्षण की गुणवत्ता में अंतर। |
| आपूर्ति-पक्ष की चुनौती | जागरूकता से मांग घट सकती है, पर तस्करी और आपूर्ति पर अलग कार्रवाई आवश्यक। |
| नई नशीली दवाएं | सिंथेटिक नशे का प्रसार पारंपरिक रोकथाम उपायों से अधिक जटिल। |
| ग्रामीण अवसंरचना | खेल मैदान, प्रशिक्षक और सामुदायिक स्थलों की कमी से आयोजन का दायरा सीमित। |
| प्रभाव का मापन | व्यवहार-परिवर्तन के स्थायी परिणाम मापने के स्पष्ट संकेतकों का अभाव। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय सेवा योजना (National Service Scheme)
- मेरा युवा भारत (MY Bharat)
- नशा मुक्त भारत अभियान (Nasha Mukt Bharat Abhiyan)
आगे की राह
- स्वयंसेवकों के लिए नियमित प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए जाएं, जिनमें नशे की पहचान, परामर्श और सामुदायिक संवाद के कौशल शामिल हों।
- सप्ताह-आधारित आयोजनों को स्थायी स्थानीय गतिविधियों से जोड़ा जाए, ताकि प्रभाव अल्पकालिक न रहे।
- आपूर्ति-पक्ष पर प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाया जाए, ताकि जागरूकता और कानूनी कार्रवाई साथ-साथ चलें।
- ग्रामीण खेल-अवसंरचना के विकास को पंचायत स्तर की योजनाओं से जोड़ा जाए।
- परिणाम-संकेतक (जैसे नशा-प्रवृत्ति में बदलाव, सहभागिता दर) तय कर नियमित मूल्यांकन किया जाए।
- स्थानीय पारंपरिक खेलों और सांस्कृतिक प्रतीकों को अभियान सामग्री में शामिल कर स्वीकार्यता बढ़ाई जाए।
- स्कूल, कॉलेज और ग्राम समुदाय के बीच साझेदारी को औपचारिक रूप दिया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
नशा मुक्त युवा अभियान (Nasha Mukt Yuva Abhiyan) · मेरा युवा भारत (MY Bharat) · राष्ट्रीय सेवा योजना (National Service Scheme – NSS) · अनुच्छेद 47 (Article 47) · राज्य नीति के निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy) · मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties) · स्वैच्छिक सेवा और सामुदायिक सहभागिता (Voluntary Service and Community Participation) · पंचायती राज संस्थाएँ और अनुच्छेद 243G (Panchayati Raj Institutions and Article 243G) · एनडीपीएस अधिनियम, 1985 (NDPS Act, 1985) · युवा नीति और जन-स्वास्थ्य (Youth Policy and Public Health) · परम्परागत खेल और सामाजिक एकीकरण (Traditional Sports and Social Integration) · मादक द्रव्य निषेध और मूलभूत अधिकार (Drug Prohibition and Fundamental Rights)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 47 — नशा निषेध और लोक स्वास्थ्य का राज्य कर्तव्य, नीति-निर्देशक तत्व
अवधारणा प्रवाह
नशे की समस्या से युवाओं के स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन पर खतरा → राज्य का लोक स्वास्थ्य और नशा निषेध का नीति-निर्देशक दायित्व (अनुच्छेद 47) → युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सेवा योजना और मेरा युवा भारत का सक्रिय होना → नशा मुक्त युवा अभियान के सप्ताहवार ढांचे में ग्राम सेवा और पारंपरिक खेल दिवस का आयोजन → गांवों में सामुदायिक सहभागिता और खेल-आधारित सकारात्मक गतिविधियों से युवाओं का जुड़ाव → सहकर्मी प्रभाव और स्थानीय संस्कृति के माध्यम से नशे के प्रति जागरूकता और व्यवहार-परिवर्तन → दीर्घकालिक परिणाम के लिए निगरानी, मूल्यांकन और आपूर्ति-पक्ष पर समन्वित कार्रवाई
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 47 राज्य को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नशीले पदार्थों के सेवन पर, चिकित्सकीय प्रयोजन के अतिरिक्त, प्रतिबंध की दिशा में प्रयास करने का निर्देश देता है।
2. मौलिक कर्तव्यों को संविधान में 42वें संविधान संशोधन, 1976 द्वारा जोड़ा गया था, और इसकी सिफारिश स्वर्ण सिंह समिति ने की थी।
3. मौलिक कर्तव्यों का उल्लंघन होने पर न्यायालय उन्हें सीधे लागू करा सकते हैं।
4. अनुच्छेद 51क(ज) नागरिकों से व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता की दिशा में प्रयास करने का आह्वान करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी चार
उत्तर: केवल तीन — कथन 1 सही है: अनुच्छेद 47 (निदेशक तत्व) में मादक पेयों और हानिकारक नशीले पदार्थों के निषेध का उल्लेख है। कथन 2 सही है: 42वें संशोधन (1976) से मौलिक कर्तव्य जुड़े, जिनकी सिफारिश स्वर्ण सिंह समिति ने की थी। कथन 3 गलत है: मौलिक कर्तव्य न्यायालयों द्वारा सीधे लागू नहीं कराए जा सकते; ये नैतिक-संवैधानिक दायित्व हैं। कथन 4 सही है: अनुच्छेद 51क(ज) उत्कृष्टता की दिशा में प्रयास की बात करता है। अतः सही कथन तीन हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
अभिकथन (A): ग्राम स्तर पर युवा सेवा और नशा-निषेध जागरूकता के कार्यक्रम में पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
कारण (R): अनुच्छेद 243G के अंतर्गत विधानमंडल पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाएँ लागू करने की शक्तियाँ प्रदान कर सकते हैं, जिनकी सूची ग्यारहवीं अनुसूची में दी गई है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है — अनुच्छेद 243G पंचायतों को ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध विषयों, जिनमें सामाजिक कल्याण और स्वास्थ्य-स्वच्छता से जुड़े विषय हैं, पर योजनाएँ लागू करने की शक्ति देता है। इसी आधार पर ग्राम स्तर पर नशा-निषेध जागरूकता में पंचायतों की भूमिका बनती है, इसलिए (R) (A) की सही व्याख्या है।
Q3. राष्ट्रीय सेवा योजना (National Service Scheme – NSS) की स्थापना किस वर्ष में हुई थी?
- 1947
- 1969
- 1975
- 1985
उत्तर: 1969 — राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की स्थापना वर्ष 1969 में हुई थी और इसका प्रशासनिक दायित्व युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय के पास है। यह छात्रों के लिए सामुदायिक सेवा का कार्यक्रम है, जिसका आदर्श-वाक्य ‘मम न मम’ (Not Me But You) है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ अनुच्छेद 47 राज्य को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नशीले पदार्थों के निषेध की दिशा में प्रयास करने का निदेश देता है, किंतु यह निदेश न्यायालय में प्रवर्तनीय नहीं है। ऐसी स्थिति में, नशा मुक्ति के लिए ग्राम स्तर पर आयोजित युवा-नेतृत्व वाले सामुदायिक अभियानों की प्रभावशीलता का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि क्या नशा-निषेध को मौलिक अधिकार के रूप में माँगा जा सकता है, और इस संदर्भ में राज्य की नीति-निर्माण क्षमता पर क्या प्रभाव पड़ता है। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर संरचना (लगभग 250 शब्द):
1. भूमिका: अनुच्छेद 47 (पोषाहार स्तर उठाना, जन-स्वास्थ्य, मादक पेयों और हानिकारक नशीले पदार्थों पर निषेध का प्रयास) और अनुच्छेद 37 (निदेशक तत्वों का गैर-प्रवर्तनीय स्वरूप) का उल्लेख। नशा मुक्त युवा अभियान व मेरा युवा भारत (MY Bharat) के अंतर्गत राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के ग्राम स्तरीय आयोजन को समकालीन संदर्भ के रूप में रखें।
2. प्रभावशीलता के पक्ष: (क) अनुच्छेद 51क(क), (ज), (ट) के मौलिक कर्तव्यों से नागरिक-सहभागिता का नैतिक आधार; (ख) स्वैच्छिक सेवा और परम्परागत खेल द्वारा सामाजिक एकीकरण; (ग) अनुच्छेद 243G के अंतर्गत पंचायतों की भूमिका, ग्यारहवीं अनुसूची के सामाजिक कल्याण व स्वास्थ्य-स्वच्छता विषय; (घ) युवा-से-युवा संवाद, जो प्रतिषेधात्मक दृष्टि से व्यावहारिक है।
3. सीमाएँ: (क) अनुच्छेद 47 गैर-प्रवर्तनीय है, इसलिए परिणाम नीति-इच्छाशक्ति और संसाधनों पर निर्भर; (ख) एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के प्रवर्तन (पुलिस, आबकारी, औषधि नियंत्रण) से समन्वय की कमी; (ग) मापन में कठिनाई, जैसे प्रभाव-मूल्यांकन के स्पष्ट मानक का अभाव; (घ) स्वैच्छिक अभियान बनाम संस्थागत उपचार (पुनर्वास, परामर्श) का अंतर।
4. मौलिक अधिकार का प्रश्न: State of Punjab v. Devans Modern Breweries (2004) में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि मादक पेय का व्यापार अनुच्छेद 19(1)(छ) के अंतर्गत मौलिक अधिकार नहीं है, और राज्य इस पर नियंत्रण कर सकता है। ‘नशा-मुक्त जीवन’ को अनुच्छेद 21 के स्वास्थ्य व गरिमा के अधिकार से जोड़कर देखा जा सकता है, किंतु नशा-निषेध को स्वतंत्र मौलिक अधिकार मानना न्यायिक रूप से सीमित है।
5. संतुलित मत: मानवाधिकार-आधारित दृष्टि (पुनर्वास, उपचार) बनाम दंडात्मक दृष्टि; गांधीवादी स्वैच्छिक सेवा परंपरा बनाम राज्य-नेतृत्व वाला प्रवर्तन।
6. निष्कर्ष: सामुदायिक अभियान अनुच्छेद 47 के लक्ष्य को सामाजिक स्तर पर साकार करने का उपयोगी साधन हैं, किंतु उनकी स्थायी प्रभावशीलता के लिए संस्थागत प्रवर्तन, पुनर्वास-सेवाएँ और पंचायत-स्तरीय वित्तीय समर्थन आवश्यक हैं।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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