24 Oct आरबीआई का ओडिशा डेटा सेंटर: अर्थव्यवस्था के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?
✎ RBI का ओडिशा (जटनी, खोरधा) स्थित डेटा केंद्र खारघर (नवी मुंबई) के प्राथमिक केंद्र का द्वितीयक/बैकअप केंद्र है, जो आपदा पुनर्प्राप्ति, साइबर सुरक्षा और व्यवसाय निरंतरता के लिए भौगोलिक पृथक्करण के सिद्धांत पर बना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था (Economy): केंद्रीय बैंक के कार्य, भुगतान एवं निपटान प्रणाली, वित्तीय बुनियादी ढाँचा | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा (Internal Security): साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा | GS Paper III — आपदा प्रबंधन (Disaster Management) एवं पर्यावरण (Environment): भूकंप-प्रवण क्षेत्रों से दूरी, जल-संसाधन पर प्रभाव, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन
- Prelims: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) — स्थापना: 1 अप्रैल 1935, नियामक ढाँचा: RBI अधिनियम, 1934, भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (Payment and Settlement Systems Act, 2007) — RBI को भुगतान प्रणालियों का विनियमन, डेटा स्थानीयकरण (Data Localisation) — RBI का अप्रैल 2018 का निर्देश: भुगतान प्रणाली का डेटा केवल भारत में संग्रहीत करना, व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (Digital Personal Data Protection Act, 2023), CERT-In — सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 70B के अंतर्गत राष्ट्रीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल, आपदा पुनर्प्राप्ति (Disaster Recovery) और व्यवसाय निरंतरता (Business Continuity) में अंतर, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment) — पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत EIA अधिसूचना, 2006, जलभृत (Aquifer) और भूजल-दोहन से संबंधित मूल अवधारणाएँ
- Essay: वित्तीय अवसंरचना में लचीलापन: एकल-स्थल निर्भरता से बहु-स्थल व्यवस्था तक, डिजिटल अर्थव्यवस्था में साइबर सुरक्षा, आँकड़ा संप्रभुता और विकास के बीच संतुलन
त्वरित पुनरावृत्ति: RBI का ओडिशा (जटनी, खोरधा) स्थित डेटा केंद्र खारघर (नवी मुंबई) के प्राथमिक केंद्र का द्वितीयक/बैकअप केंद्र है, जो आपदा पुनर्प्राप्ति, साइबर सुरक्षा और व्यवसाय निरंतरता के लिए भौगोलिक पृथक्करण के सिद्धांत पर बना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का नया डेटा केंद्र ओडिशा के खोरधा ज़िले में इन्फो वैली-II, जटनी में प्रधानमंत्री द्वारा 25 अक्टूबर 2026 को उद्घाटित किया जाना निर्धारित है। लगभग 169 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बने इस परिसर को नवी मुंबई के खारघर स्थित RBI के प्राथमिक डेटा केंद्र के द्वितीयक या बैकअप केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य मुद्रा प्रबंधन, भुगतान एवं निपटान प्रणाली तथा नियामकीय कार्यों जैसे केंद्रीय बैंक के मूल कार्यों के लिए आँकड़ा प्रबंधन, आपदा पुनर्प्राप्ति, साइबर सुरक्षा और व्यवसाय निरंतरता सुनिश्चित करना है। स्थल-चयन के लिए भौगोलिक स्थिरता और भूकंप-प्रवण क्षेत्रों तथा संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्रों से पृथक्करण को आधार बताया गया है। इसके साथ ही परियोजना के जल-उपयोग, जल-स्रोत और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर स्थानीय स्तर पर प्रश्न उठे हैं, जिन पर अभी सार्वजनिक पुष्टि की प्रतीक्षा है।
पृष्ठभूमि
- RBI अधिनियम, 1934 के अंतर्गत स्थापित RBI देश की मौद्रिक नीति, मुद्रा निर्गमन और भुगतान प्रणालियों के नियमन का मुख्य संस्थान है; भुगतान प्रणालियों का विनियमन भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 से होता है।
- RBI के आंतरिक डिजिटल ढाँचे में प्राथमिक और द्वितीयक डेटा केंद्र की व्यवस्था है, ताकि एक स्थल पर बाधा आने पर भी महत्वपूर्ण सेवाएँ चलती रहें।
- अप्रैल 2018 में RBI ने भुगतान प्रणाली से संबंधित डेटा को केवल भारत में संग्रहीत करने का निर्देश दिया था, जिससे भारत में स्थित अवसंरचना का महत्व बढ़ा।
- परियोजना की आधारशिला 22 मार्च 2023 को तत्कालीन RBI गवर्नर शक्तिकांत दास द्वारा रखी गई थी, जिससे स्पष्ट है कि यह दीर्घकालिक अवसंरचनात्मक योजना है।
- भारत में डिजिटल भुगतान के विस्तार के साथ वित्तीय आँकड़ों की मात्रा और संवेदनशीलता बढ़ी है, इसलिए साइबर सुरक्षा और आपदा-सहिष्णुता को नीति-स्तर पर प्राथमिकता मिली है।
डेटा केंद्र क्या है?
- डेटा केंद्र (Data Centre) वह सुविधा है जहाँ सर्वर, भंडारण उपकरण, नेटवर्क और शीतलन प्रणाली लगाकर संस्थाएँ अपने आँकड़े संग्रहीत, संसाधित और प्रबंधित करती हैं।
- प्राथमिक डेटा केंद्र सामान्य परिचालन चलाता है, जबकि द्वितीयक या बैकअप डेटा केंद्र प्राथमिक केंद्र में बाधा की स्थिति में उसकी भूमिका निभाता है।
- आपदा पुनर्प्राप्ति (Disaster Recovery) से आशय है कि आपदा या तकनीकी विफलता के बाद आँकड़े और प्रणालियाँ कितनी तेज़ी से बहाल हो सकें; व्यवसाय निरंतरता (Business Continuity) इससे व्यापक अवधारणा है, जिसमें सेवाएँ निर्बाध चलती रहें, इसकी योजना शामिल है।
- भौगोलिक पृथक्करण (Geographical Separation) का सिद्धांत यह है कि दोनों केंद्र एक ही भूकंप, बाढ़ या अन्य क्षेत्रीय आपदा से एक साथ प्रभावित न हों।
- डेटा केंद्र के संचालन में विद्युत और शीतलन प्रणाली की बड़ी आवश्यकता होती है; जल-आधारित शीतलन से जल-उपभोग बढ़ सकता है, इसलिए इसका पर्यावरणीय आकलन आवश्यक माना जाता है।
- भारत में साइबर सुरक्षा का समन्वय CERT-In करता है, जबकि व्यक्तिगत डेटा के संरक्षण के लिए व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 में ढाँचा दिया गया है।
- वित्तीय क्षेत्र में डेटा केंद्र की विश्वसनीयता सीधे भुगतान प्रणाली की स्थिरता और वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) से जुड़ी है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्त्व |
|---|---|
| स्थान | ओडिशा की खोरधा जिले में भुवनेश्वर के बाहरी क्षेत्र में, इन्फो वैली-II (Info Valley-II), जटनी में, कोलकाता–चेन्नई राष्ट्रीय राजमार्ग के पास। परिसर लगभग 18.55 एकड़ में फैला है। |
| भूमिका | यह प्राथमिक डेटा केंद्र के लिए द्वितीयक या बैकअप डेटा केंद्र (Secondary/Backup Data Centre) है। प्राथमिक केंद्र नवी मुंबई के खारघर में है। |
| कार्यक्षेत्र | मुद्रा प्रबंधन, भुगतान एवं निपटान प्रणाली (Payment and Settlement Systems) और नियामक कार्यों जैसे केंद्रीय बैंक के मूल कार्यों के लिए डेटा प्रबंधन, आपदा पुनर्प्राप्ति (Disaster Recovery), साइबर सुरक्षा (Cybersecurity) और व्यावसायिक निरंतरता (Business Continuity) सुनिश्चित करना। |
| अनुमानित लागत | लगभग 169 करोड़ रुपये (रिपोर्ट के अनुसार)। |
| स्थल-चयन का आधार | भूवैज्ञानिक स्थिरता और भूकंप-प्रवण क्षेत्रों तथा उच्च जोखिम वाले अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्रों से पृथक्करण, ताकि प्राकृतिक आपदाओं और भू-राजनीतिक जोखिमों का संपर्क कम हो। |
| शिलान्यास | 22 मार्च 2023 को तत्कालीन भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शिलान्यास किया था। उद्घाटन की निर्धारित तिथि 25 अक्टूबर 2026 है। |
महत्व
आर्थिक महत्त्व
- भुगतान एवं निपटान प्रणाली की सतत उपलब्धता से डिजिटल भुगतान और वित्तीय लेन-देन का भरोसा बना रहता है, जो आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) के लिए आवश्यक है।
- मुद्रा प्रबंधन जैसे कार्य बाधित न हों तो मौद्रिक नीति के संचालन और मुद्रा-वितरण में निरंतरता रहती है।
वित्तीय स्थिरता और नियामक महत्त्व
- बैकअप डेटा केंद्र होने से किसी एक स्थान पर विफलता की स्थिति में भी नियामक कार्य चलते रहते हैं, जिससे वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) की रक्षा होती है।
- बैंकिंग क्षेत्र के आँकड़ों और निगरानी तंत्र की सुरक्षित उपलब्धता से समय पर नियामक हस्तक्षेप संभव होता है।
सामरिक और सुरक्षा महत्त्व
- सीमावर्ती क्षेत्रों से दूर स्थान चुनना वित्तीय अवसंरचना की भू-राजनीतिक सुरक्षा का सिद्धांत दर्शाता है।
- साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा के लिए भौगोलिक विविधीकरण (Geographical Diversification) राष्ट्रीय वित्तीय अवसंरचना की लचीलापन क्षमता बढ़ाता है।
क्षेत्रीय विकास
- ओडिशा में उच्च तकनीकी अवसंरचना का विस्तार क्षेत्र में तकनीकी रोजगार और सेवा-क्षेत्र की गतिविधियों को प्रोत्साहित कर सकता है।
- पूर्वी भारत में वित्तीय अवसंरचना का विकेंद्रीकरण महानगरीय केंद्रों पर निर्भरता घटाने की दिशा में एक कदम है।
चुनौतियाँ
1. जल-उपभोग और भूजल पर दबाव
- विपक्षी दल द्वारा उठाई गई चिंता के अनुसार परिसर को प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ लीटर पानी की आवश्यकता हो सकती है, मुख्यतः शीतलन (Cooling) के लिए। रिज़र्व बैंक और राज्य सरकार ने इस आँकड़े और जल-स्रोत की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की है।
- यदि जल भूजल से लिया जाए तो स्थानीय जलभृतों (Aquifers) का क्षरण, कृषि पर प्रभाव और खोरधा जिले में जल-तनाव बढ़ने का खतरा है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण एवं सतत विकास; जल संसाधन प्रबंधन
2. पर्यावरण प्रभाव आकलन की पारदर्शिता
- बड़े अवसंरचना परियोजना के लिए पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment) का सार्वजनिक प्रकाशन लोगों का विश्वास बढ़ाता है।
- जल-स्रोत, ऊर्जा खपत और अपशिष्ट ऊष्मा के प्रबंधन पर स्पष्ट जानकारी न होने से स्थानीय समुदायों की आशंकाएँ बनी रहती हैं।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रभाव आकलन; सार्वजनिक सहभागिता और पारदर्शिता
3. स्थानीय समुदाय और आजीविका
- परियोजना में स्थानीय रोजगार के अवसर और उनकी प्रकृति (कुशल या अकुशल) स्पष्ट न होने से स्थानीय युवाओं की अपेक्षाएँ अनिश्चित हैं।
- किसानों की सुरक्षा के उपाय, जैसे भूजल स्तर की निगरानी, परियोजना के साथ जुड़े होने चाहिए।
यूपीएससी लिंक: समावेशी विकास; स्थानीय रोजगार और कृषि पर प्रभाव
4. साइबर सुरक्षा और परिचालन जोखिम
- बैकअप केंद्र भी उतना ही संवेदनशील होता है जितना प्राथमिक केंद्र, क्योंकि उसमें भी वही महत्त्वपूर्ण वित्तीय डेटा होता है।
- प्राथमिक और बैकअप केंद्रों के बीच डेटा प्रतिकृति (Data Replication) में विलंब या विफलता से परिचालन जोखिम उत्पन्न हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा में साइबर खतरे; वित्तीय क्षेत्र का नियमन
5. भूकंप और प्राकृतिक आपदा जोखिम
- स्थल-चयन में भूकंप-प्रवण क्षेत्रों से दूरी को ध्यान में रखा गया है, किंतु बाढ़, चक्रवात और तटीय क्षेत्र के मौसमी जोखिम का आकलन भी आवश्यक है।
- जलवायु परिवर्तन से चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ने पर आपदा-सहनीय अवसंरचना के मानक लगातार अद्यतन करने होंगे।
यूपीएससी लिंक: आपदा प्रबंधन; जलवायु परिवर्तन और अवसंरचना लचीलापन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| जल की मात्रा | बताई गई लगभग 2 करोड़ लीटर प्रतिदिन की माँग की पुष्टि नहीं हुई है; वास्तविक आवश्यकता का सार्वजनिक खुलासा अपेक्षित है। |
| जल-स्रोत | भूजल पर निर्भरता की स्थिति में जलभृतों और कृषि पर दबाव बढ़ सकता है। |
| पर्यावरणीय प्रभाव आकलन | परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन का सार्वजनिक दस्तावेज़ उपलब्ध कराना आवश्यक है। |
| स्थानीय रोजगार | रोजगार के स्वरूप और संख्या पर स्पष्टता न होने से स्थानीय अपेक्षाएँ अनिश्चित हैं। |
| किसानों की सुरक्षा | सिंचाई और भूजल स्तर पर संभावित प्रभाव के लिए सुरक्षा-उपाय स्पष्ट नहीं हैं। |
| साइबर एवं परिचालन जोखिम | बैकअप केंद्र की सुरक्षा और प्राथमिक केंद्र से डेटा प्रतिकृति की विश्वसनीयता की नियमित जाँच आवश्यक है। |
आगे की राह
- जल की वास्तविक आवश्यकता, जल-स्रोत और शीतलन तकनीक का विवरण सार्वजनिक रूप से जारी किया जाए, ताकि अनुमानों पर आधारित विवाद कम हों।
- परियोजना का पर्यावरणीय प्रभाव आकलन प्रकाशित हो और उसकी स्वतंत्र समीक्षा की व्यवस्था हो।
- यदि भूजल का उपयोग हो तो भूजल स्तर और जलभृतों की नियमित निगरानी के लिए राज्य स्तरीय तंत्र बने।
- शीतलन के लिए शोधित अपशिष्ट जल या वर्षा जल संचयन जैसे विकल्पों का मूल्यांकन किया जाए।
- स्थानीय युवाओं के लिए कौशल-प्रशिक्षण और रोजगार की स्पष्ट योजना घोषित हो।
- साइबर सुरक्षा ऑडिट, नियमित आपदा-पुनर्प्राप्ति अभ्यास और प्राथमिक व बैकअप केंद्रों के बीच नियमित परीक्षण सुनिश्चित हों।
- आपदा-जोखिम मूल्यांकन में बाढ़, चक्रवात और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को शामिल किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India) · द्वितीयक डेटा केंद्र · आपदा पुनर्प्राप्ति · व्यावसायिक निरंतरता · साइबर सुरक्षा · भुगतान एवं निपटान प्रणाली · एकल विफलता बिंदु (Single Point of Failure) · भूकंपीय जोखिम क्षेत्र · भूजल और जलभृत · पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment) · डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (Digital Personal Data Protection Act, 2023) · वित्तीय अवसंरचना का भौगोलिक विविधीकरण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 48A: पर्यावरण संरक्षण का राज्य का दायित्व
- अनुच्छेद 51A(छ): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का मौलिक कर्तव्य
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 36: मुद्रा और कानूनी निविदा
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 45: बैंकिंग
- सातवीं अनुसूची, राज्य सूची प्रविष्टि 17: जल आपूर्ति और जल संसाधन
अवधारणा प्रवाह
ओडिशा के जटनी में RBI के बैकअप डेटा केंद्र का निर्माण और उद्घाटन (25 अक्टूबर 2026 निर्धारित)। → बैकअप केंद्र प्राथमिक केंद्र (खारघर) के समान डेटा को संग्रहीत और प्रतिकृत करता है। → प्राथमिक केंद्र में व्यवधान होने पर आपदा पुनर्प्राप्ति व्यवस्था से मुद्रा प्रबंधन, भुगतान प्रणाली और नियामक कार्य जारी रहते हैं। → वित्तीय प्रणाली की स्थिरता और परिचालन निरंतरता सुनिश्चित होती है। → शीतलन के लिए बड़ी मात्रा में जल की आवश्यकता का अनुमान पर्यावरणीय और जल-संबंधी चिंताएँ उत्पन्न करता है। → पारदर्शी पर्यावरणीय आकलन और जल-प्रबंधन से इन चिंताओं का समाधान होता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अंतर्गत की गई थी।
2. भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को भुगतान प्रणालियों के विनियमन और पर्यवेक्षण का प्राधिकरण नामित किया गया है।
3. भारतीय रिज़र्व बैंक का बैंकिंग विभाग (Banking Department) मुद्रा नोटों के निर्गमन के लिए उत्तरदायी है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: RBI की स्थापना RBI अधिनियम, 1934 के अंतर्गत हुई और यह 1935 से कार्यरत है। कथन 2 सही है: भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 RBI को भुगतान प्रणालियों के विनियमन का प्राधिकरण बनाता है। कथन 3 गलत है: मुद्रा निर्गमन का कार्य निर्गम विभाग (Issue Department) करता है, बैंकिंग विभाग नहीं।
Q2. दिए गए कथनों में एक अभिकथन (Assertion) और एक कारण (Reason) है।
अभिकथन (A): किसी केंद्रीय वित्तीय संस्था के प्राथमिक और द्वितीयक डेटा केंद्र यदि भौगोलिक रूप से भिन्न क्षेत्रों में स्थित हों, तो आपदा की स्थिति में व्यावसायिक निरंतरता बनी रहने की संभावना अधिक होती है।
कारण (R): एक ही भौगोलिक जोखिम क्षेत्र में सभी महत्वपूर्ण अवसंरचना के केंद्रित होने से एकल विफलता बिंदु (Single Point of Failure) का जोखिम बढ़ जाता है।
उपर्युक्त के संदर्भ में सही उत्तर चुनिए:
- (a) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- (b) A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- (c) A सही है, किंतु R गलत है।
- (d) A गलत है, किंतु R सही है।
उत्तर: (a) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन सही है: भौगोलिक विविधीकरण से एक ही आपदा द्वारा दोनों केंद्रों के एक साथ प्रभावित होने की संभावना घटती है। कारण भी सही है और अभिकथन को तार्किक आधार देता है, इसलिए R, A की सही व्याख्या है। RBI के कोलकाता और चेन्नई कनेक्शन जैसे आधुनिक भौगोलिक विचार इसी सिद्धांत पर आधारित हैं।
Q3. निम्नलिखित सुमेलन (Match) कीजिए:
सूची I (संस्था/अधिनियम)
A. भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल (CERT-In)
B. केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (Central Ground Water Authority)
C. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
सूची II (कार्य/क्षेत्र)
1. पर्यावरणीय पर्यवेक्षण और EIA प्रक्रिया के लिए विधिक आधार
2. भूजल के दोहन और विनियमन से संबंधित प्राधिकरण
3. साइबर सुरक्षा घटनाओं पर प्रतिक्रिया और समन्वय
सही सुमेलन चुनिए:
- A-3, B-2, C-1
- A-2, B-3, C-1
- A-1, B-2, C-3
- A-3, B-1, C-2
उत्तर: A-3, B-2, C-1 — CERT-In साइबर सुरक्षा घटनाओं पर प्रतिक्रिया और समन्वय करता है (सूची II-3)। केंद्रीय भूजल प्राधिकरण भूजल के दोहन और विनियमन से जुड़ा है (सूची II-2)। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत जारी EIA अधिसूचना पर्यावरणीय पर्यवेक्षण का विधिक आधार है (सूची II-1)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ वित्तीय अवसंरचना की व्यावसायिक निरंतरता के लिए प्राथमिक केंद्र के साथ केवल अतिरेक (Redundancy) पर्याप्त नहीं है, बल्कि भौगोलिक विविधीकरण आवश्यक है। भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा खोरधा जिले के जटनी में स्थापित किए जा रहे द्वितीयक डेटा केंद्र के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि ऐसे केंद्रों से जुड़ी जल-उपयोग और पर्यावरणीय चिंताओं का समाधान किन उपायों से हो सकता है। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की संरचना: (1) परिचय: RBI का डेटा केंद्र नवी मुंबई के खारघर स्थित प्राथमिक केंद्र का द्वितीयक (बैकअप) केंद्र है; जटनी (इन्फो वैली-II, भुवनेश्वर के बाहरी क्षेत्र) में 18.55 एकड़ परिसर, अनुमानित लागत 169 करोड़ रुपये; आधारशिला 22 मार्च 2023 को तत्कालीन गवर्नर शक्तिकांत दास ने रखी। (2) विधिक एवं संस्थागत आधार: भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934; भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के अंतर्गत RBI का भुगतान प्रणाली पर्यवेक्षण; बैंकिंग संविधान की संघ सूची की प्रविष्टि 45 (Banking) में है, इसलिए यह संघीय विषय है। RBI का साइबर सुरक्षा ढाँचा (2016) और IT अधिनियम, 2000 की धारा 70B के अंतर्गत CERT-In की भूमिका। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 का अनुपालन। (3) समालोचनात्मक विश्लेषण: आपदा पुनर्प्राप्ति और व्यावसायिक निरंतरता में RTO और RPO जैसे मानक; भौगोलिक पृथक्करण से एकल विफलता बिंदु का जोखिम घटता है; भूकंपीय संवेदनशील क्षेत्रों और सीमावर्ती क्षेत्रों से दूरी का तर्क; पर्वतीय/तटीय जोखिम, बिजली और संचार लिंक जैसी व्यावहारिक सीमाएँ। (4) जल-उपयोग और पर्यावरणीय पहलू: शीतलन हेतु जल की माँग का अनुमान (स्थानीय दल द्वारा बताए गए 2 करोड़ लीटर प्रतिदिन के आँकड़े की अभी सरकारी पुष्टि नहीं है, इसे तथ्य के रूप में न लें); जल स्रोत भूजल हो तो जलभृत पर दबाव और कृषि पर प्रभाव; संविधान की राज्य सूची की प्रविष्टि 17 (जल) का संदर्भ, अर्थात राज्य की भूमिका; पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत EIA अधिसूचना, 2006 और केंद्रीय भूजल प्राधिकरण के दिशानिर्देश; पुनर्चक्रित जल, बंद-लूप शीतलन और जल-दक्ष तकनीकों के विकल्प। (5) संतुलित दृष्टिकोण: सामरिक और परिचालन लाभ बनाम स्थानीय संसाधन-भार; स्थानीय रोजगार और पारदर्शिता का महत्व; सार्वजनिक प्रकटीकरण (disclosure) और स्वतंत्र EIA का तर्क। (6) निष्कर्ष: भौगोलिक विविधीकरण और सतत संसाधन प्रबंधन दोनों साथ चलने चाहिए; सुझाव: जल-स्रोत का सार्वजनिक खुलासा, स्वतंत्र पर्यावरणीय मूल्यांकन, भूजल निगरानी और समयबद्ध समीक्षा।
स्रोत: orissapost.com
Odisha PCS (OPSC (OAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ओडिशा में स्थापित किए जा रहे नए डेटा सेंटर का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
- A. राज्य में डिजिटल बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना
- B. RBI के डेटा भंडारण और प्रसंस्करण क्षमताओं को बढ़ाना तथा साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करना
- C. ओडिशा सरकार के लिए नई वित्तीय योजनाओं का निर्माण करना
- D. राज्य में विदेशी निवेश आकर्षित करने हेतु एक मंच विकसित करना
उत्तर: B. RBI के डेटा भंडारण और प्रसंस्करण क्षमताओं को बढ़ाना तथा साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करना — RBI का नया डेटा सेंटर ओडिशा में स्थापित किया जा रहा है ताकि RBI के डेटा भंडारण, प्रसंस्करण एवं साइबर सुरक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ किया जा सके।
Mains: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ओडिशा में स्थापित किए जा रहे नए डेटा सेंटर के राज्य की अर्थव्यवस्था एवं प्रशासनिक ढांचे पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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