27 Oct एसजीबी 2020-21 सीरीज़ I की समयपूर्व मोचन कीमत 28 अक्टूबर 2026 को जारी
✎ सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का मोचन मूल्य IBJA द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने के समापन मूल्य के तीन कारोबारी दिनों के सरल औसत पर तय होता है, और समयपूर्व मोचन पाँचवें वर्ष के बाद ब्याज भुगतान की तिथि पर ही संभव है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था (बचत का संग्रहण, सरकारी प्रतिभूतियाँ, सार्वजनिक ऋण प्रबंधन) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (सोने की मांग, आयात निर्भरता और भौतिक सोने का वित्तीयकरण)
- Prelims: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond), समयपूर्व मोचन (Premature Redemption), IBJA — 999 शुद्धता वाले सोने के समापन मूल्य का तीन कारोबारी दिनों का सरल औसत, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की ब्याज दर और ब्याज का भुगतान (अर्धवार्षिक), भारतीय रिज़र्व बैंक की भूमिका: सरकार की ओर से बॉन्ड जारी करना और मोचन की व्यवस्था, आठ वर्षीय परिपक्वता अवधि और पाँचवें वर्ष के बाद निकास विकल्प, परिपक्वता तक धारित बॉन्ड पर पूंजीगत लाभ कर से छूट, सोने की भौतिक मांग बनाम वित्तीय बचत (ई-गोल्ड, गोल्ड ETF)
- Essay: भौतिक सोने से वित्तीय बचत की ओर: भारत में सोने की मांग का प्रबंधन, सरकारी योजनाएँ और सार्वजनिक ऋण प्रबंधन में नागरिकों की भागीदारी: एक मूल्यांकन
त्वरित पुनरावृत्ति: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का मोचन मूल्य IBJA द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने के समापन मूल्य के तीन कारोबारी दिनों के सरल औसत पर तय होता है, और समयपूर्व मोचन पाँचवें वर्ष के बाद ब्याज भुगतान की तिथि पर ही संभव है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय रिज़र्व बैंक ने सूचित किया है कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना 2020-21 की सीरीज़ I के लिए समयपूर्व मोचन की अगली देय तिथि 28 अक्टूबर 2026 है। भारत सरकार की 13 अप्रैल 2020 की अधिसूचना के अनुसार इस श्रृंखला का निर्गम 28 अप्रैल 2020 को हुआ था और पाँचवें वर्ष के बाद ब्याज भुगतान की तिथि पर समयपूर्व मोचन की अनुमति है। मोचन मूल्य 14,159 रुपये प्रति यूनिट (प्रति ग्राम) तय किया गया है, जिसका आधार 23, 26 और 27 अक्टूबर 2026 के सोने के समापन मूल्य का सरल औसत है। यह समाचार इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह बताता है कि योजना की शर्तें और मोचन मूल्य निर्धारण का तंत्र किस प्रकार कार्य करता है, जो बॉन्ड धारकों और बाज़ार दोनों के लिए प्रासंगिक है।
पृष्ठभूमि
- सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना को भारत सरकार ने नवंबर 2015 में शुरू किया था। इसका उद्देश्य भौतिक सोने की मांग को कम करना और घरेलू बचत को वित्तीय रूप में परिवर्तित करना था।
- यह बॉन्ड ग्राम में व्यक्त किया जाता है, अर्थात् निवेशक को सोने की मात्रा के बराबर मूल्य का अधिकार मिलता है, और इसे भारतीय रिज़र्व बैंक सरकार की ओर से जारी करता है।
- भौतिक सोने के आयात से देश का चालू खाता घाटा प्रभावित होता है। इसलिए सोने की वित्तीय बचत को प्रोत्साहन देना भुगतान संतुलन के प्रबंधन से भी जुड़ा है।
- पूर्ववर्ती सरकारी योजनाओं में स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (Gold Monetisation Scheme) भी शामिल थी, जिसका उद्देश्य घरों और संस्थाओं में पड़े निष्क्रिय सोने को बैंकिंग प्रणाली में लाना था।
- मोचन मूल्य की गणना के लिए भारतीय बुलियन एवं ज्वेलर्स एसोसिएशन लिमिटेड (India Bullion and Jewellers Association Ltd — IBJA) द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने के समापन मूल्य का उपयोग होता है।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना क्या है?
- सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, भारत सरकार की ओर से भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी सरकारी प्रतिभूति है, जिसका मूल्य सोने की कीमत से जुड़ा होता है।
- निर्गम मूल्य और मोचन मूल्य, दोनों 999 शुद्धता वाले सोने के समापन मूल्य के तीन कारोबारी दिनों के सरल औसत पर आधारित होते हैं।
- बॉन्ड की परिपक्वता अवधि आठ वर्ष है। पाँचवें वर्ष के बाद ब्याज भुगतान की तिथि पर समयपूर्व मोचन की अनुमति दी जाती है।
- निवेशक को निर्धारित दर पर अर्धवार्षिक ब्याज मिलता है। यह ब्याज सोने के मूल्य में होने वाली वृद्धि से अलग, अतिरिक्त आय है।
- परिपक्वता तक बॉन्ड धारण करने पर प्राप्त पूंजीगत लाभ कर-मुक्त होता है। समयपूर्व मोचन की स्थिति में यह छूट सामान्यतः उपलब्ध नहीं होती।
- बॉन्ड को स्टॉक एक्सचेंज पर बेचा जा सकता है, और इसे ऋण के लिए संपार्श्विक (Collateral) के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है।
- यह योजना भौतिक सोने के भंडारण, शुद्धता और चोरी जैसे जोखिमों को समाप्त करती है और सोने में निवेश का सुरक्षित वित्तीय विकल्प प्रदान करती है।
- इस योजना का मुख्य लाभ यह है कि यह घरेलू सोने की मांग को भौतिक रूप से वित्तीय बचत की ओर मोड़कर आयात पर निर्भरता घटाने में सहायक हो सकती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| समय-पूर्व परिशोधन की तिथि | SGB 2020-21 श्रृंखला I का अगला समय-पूर्व परिशोधन 28 अक्टूबर 2026 को देय है। यह तिथि ब्याज भुगतान की तिथि के साथ मेल खाती है, इसलिए निवेशक को ब्याज चक्र के अनुसार निकास का अवसर मिलता है। |
| परिशोधन मूल्य का आधार | मूल्य भारतीय बुलियन एवं ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड (India Bullion and Jewellers Association Ltd) द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने के बंद भाव के सरल औसत पर तय होता है। परिशोधन से पहले के तीन कारोबारी दिनों का औसत लिया जाता है, जिससे किसी एक दिन के उतार-चढ़ाव का प्रभाव कम होता है। |
| घोषित परिशोधन मूल्य | इस परिशोधन के लिए प्रति इकाई मूल्य ₹14,159 तय किया गया है। गणना में 23, 26 और 27 अक्टूबर 2026 के बंद भाव लिए गए हैं। |
| निर्गम और अधिसूचना | यह श्रृंखला 28 अप्रैल 2020 को जारी हुई थी। इसका आधार भारत सरकार की 13 अप्रैल 2020 की अधिसूचना (F.No. 4(4)-B(W&M)/2020) है, जो वित्त मंत्रालय द्वारा जारी की गई थी। |
| जारीकर्ता और प्रबंधन | भारत सरकार की ओर से भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India) इस योजना का प्रबंधन करता है। परिशोधन की घोषणा RBI की प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से की जाती है। |
महत्व
आर्थिक
- सोने की भौतिक मांग को वित्तीय बचत में बदलने का तरीका उपलब्ध कराया गया है। इससे निवेशक भौतिक सोना रखे बिना सोने के मूल्य से जुड़ा लाभ या हानि उठा सकते हैं।
- आयातित सोने पर निर्भरता और चालू खाता घाटे पर दबाव को कम करने की दृष्टि से यह योजना उपयोगी मानी गई है।
- परिशोधन मूल्य बाजार के बंद भाव पर आधारित होने से निवेशक को सोने की पारदर्शी कीमत का सीधा संकेत मिलता है।
वित्तीय और राजकोषीय
- सरकार के लिए यह एक प्रकार का सरकारी ऋण उपकरण है। ब्याज का भुगतान नियत दर पर होता है, जबकि मूल राशि सोने के मूल्य से जुड़ी रहती है।
- परिशोधन के समय भुगतान की राशि संचित निधि से होती है, इसलिए इसका प्रभाव सरकारी वित्त के प्रबंधन में गिना जाता है।
शासन और प्रशासनिक
- समय-पूर्व परिशोधन की शर्तें, तिथियाँ और मूल्य निर्धारण की पद्धति पहले से अधिसूचित होती हैं। इससे नीति में पूर्वानुमेयता बनी रहती है।
- एक तय बाजार संदर्भ (IBJA का बंद भाव) का उपयोग करके परिशोधन मूल्य तय करना पारदर्शी प्रशासनिक प्रक्रिया का उदाहरण है।
चुनौतियाँ
1. सोने के मूल्य पर निर्भर प्रतिफल
- निवेशक का अंतिम लाभ मुख्य रूप से सोने के मूल्य में बदलाव पर निर्भर करता है। मूल्य गिरने पर परिशोधन राशि निवेश मूल्य से कम भी हो सकती है।
- ब्याज नियत होने के बावजूद कुल प्रतिफल का बड़ा हिस्सा बाजार जोखिम से तय होता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: अर्थव्यवस्था, निवेश और वित्तीय बाजार
2. परिशोधन मूल्य निर्धारण की पद्धति
- तीन कारोबारी दिनों का सरल औसत लेने से एकदिनी अस्थिरता घटती है, परंतु प्रवृत्ति-परिवर्तन के समय यह औसत वास्तविक मूल्य से पीछे रह सकता है।
- सरल औसत के स्थान पर भारित या अन्य विधि अपनाने पर निवेशकों के हित पर अलग प्रभाव पड़ सकता है। यह नीति-चयन का विषय है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: वित्तीय संस्थाएँ और मूल्य निर्धारण तंत्र
3. कर व्यवस्था और निकास की शर्तें
- परिपक्वता तक धारण करने पर पूंजीगत लाभ कर से छूट मिलती है, जबकि पहले निकास पर लाभ पर कर लग सकता है।
- निकास की अनुमति केवल तय तिथियों पर मिलती है, इसलिए निवेशक की तरलता सीमित रहती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: कराधान और सार्वजनिक वित्त
4. जन-जागरूकता और वित्तीय साक्षरता
- कई निवेशक समय-पूर्व परिशोधन की शर्तों, कर नियमों और मूल्य गणना की पद्धति से पूरी तरह परिचित नहीं होते।
- सोने के भौतिक निवेश और बॉन्ड आधारित निवेश के बीच अंतर स्पष्ट न होने से गलत अपेक्षाएँ बन सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-2: सरकारी नीतियाँ और जन-हितकारी योजनाएँ
5. सरकारी देयता का प्रबंधन
- सोने के मूल्य में तेज़ वृद्धि होने पर परिशोधन और परिपक्वता पर सरकार की देयता बढ़ जाती है, जिसका नकद प्रवाह पर प्रभाव पड़ता है।
- ऐसी देयताओं का आगे का अनुमान और बजट में प्रावधान एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: राजकोषीय नीति और सार्वजनिक ऋण प्रबंधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| बाजार जोखिम | सोने के मूल्य में गिरावट से निवेशक को मूल राशि से कम प्रतिफल मिल सकता है। |
| मूल्य निर्धारण | तीन दिन के सरल औसत की विधि मूल्य में तेज़ बदलाव को पूरी तरह नहीं दिखा पाती। |
| कर प्रभाव | समय-पूर्व निकास पर लाभ कर योग्य हो सकता है, जिससे शुद्ध प्रतिफल घटता है। |
| तरलता | निकास केवल तय तिथियों पर संभव है, इसलिए आपात नकदी की ज़रूरत पूरी नहीं होती। |
| जागरूकता | शर्तों और गणना की जानकारी की कमी से निर्णय गलत हो सकते हैं। |
| राजकोषीय दायित्व | मूल्य वृद्धि के समय सरकार की नकद देयता बढ़ती है, जिसका बजट में प्रबंधन आवश्यक है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना (Sovereign Gold Bond Scheme)
आगे की राह
- समय-पूर्व परिशोधन की शर्तों, तिथियों और मूल्य गणना की प्रक्रिया को निवेशकों तक सरल भाषा में पहुँचाया जाए।
- परिशोधन मूल्य निर्धारण की पद्धति की समय-समय पर समीक्षा की जाए, ताकि अचानक मूल्य परिवर्तन का प्रभाव संतुलित रहे।
- कर नियमों की स्पष्टता बढ़ाई जाए, विशेषकर समय-पूर्व निकास और परिपक्वता पर छूट के संदर्भ में।
- निवेशकों के लिए भौतिक सोने, गोल्ड ETF और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के बीच तुलनात्मक जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
- सरकारी देयताओं का दीर्घकालिक अनुमान बजट और सार्वजनिक ऋण प्रबंधन नीति में शामिल किया जाए।
- वित्तीय साक्षरता कार्यक्रमों में बॉन्ड आधारित सोने के निवेश के जोखिम और लाभ को शामिल किया जाए।
- परिशोधन के समय लेन-देन की प्रक्रिया और भुगतान तंत्र की दक्षता पर नियमित निगरानी रखी जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सॉवरेन गोल्ड बॉण्ड योजना (Sovereign Gold Bond Scheme) · समय-पूर्व विमोचन (Premature Redemption) · विमोचन मूल्य (Redemption Price) · इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) · 999 शुद्धता का सोना · भौतिक सोने से वित्तीय बचत में रूपांतरण · स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (Gold Monetisation Scheme) · सोने का आयात और चालू खाता घाटा · राजकोषीय दायित्व (Fiscal Liability) · सरकारी प्रतिभूति (Government Security) · बचत का वित्तीयकरण (Financialisation of Savings) · मूल्य-जोखिम (Price Risk)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 266: संचित निधि से परिशोधन भुगतान होता है।
- अनुच्छेद 292: भारत सरकार द्वारा ऋण लेने का संवैधानिक आधार।
अवधारणा प्रवाह
भारत सरकार अप्रैल 2020 में SGB 2020-21 श्रृंखला I जारी करती है और उसका ब्याज नियत दर पर तय होता है। → पाँच वर्ष पूरे होने के बाद, ब्याज भुगतान की तिथि पर समय-पूर्व परिशोधन की अनुमति मिलती है। → परिशोधन से पहले के तीन कारोबारी दिनों के IBJA बंद भाव का सरल औसत निकाला जाता है। → इस औसत के आधार पर प्रति इकाई परिशोधन मूल्य (₹14,159) घोषित होता है। → RBI सार्वजनिक विज्ञप्ति जारी करता है और निवेशक निर्धारित तिथि पर भुगतान प्राप्त करते हैं। → भुगतान सरकारी ऋण दायित्व के रूप में दर्ज होता है और निवेशक का अंतिम प्रतिफल सोने के मूल्य पर निर्भर करता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए, जो सॉवरेन गोल्ड बॉण्ड योजना (Sovereign Gold Bond Scheme) से संबंधित हैं:
1. ये बॉण्ड भारत सरकार की ओर से भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किए जाते हैं।
2. विमोचन मूल्य उस दिन के सोने के बंद भाव (closing price) पर आधारित होता है, जिस दिन विमोचन होता है।
3. समय-पूर्व विमोचन की अनुमति ब्याज भुगतान की तिथि पर, पाँचवें वर्ष के बाद दी जाती है।
4. निवेशक को प्रारंभिक निवेश पर निश्चित दर से ब्याज अर्धवार्षिक आधार पर मिलता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी चार
उत्तर: केवल तीन — कथन 1 सही है: SGB भारत सरकार की ओर से RBI द्वारा जारी होते हैं। कथन 2 गलत है, क्योंकि विमोचन मूल्य विमोचन-तिथि से पूर्व के तीन कारोबारी दिनों के IBJA द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने के बंद भावों के सरल औसत पर तय होता है। कथन 3 और 4 सही हैं। अतः सही उत्तर ‘केवल तीन’ है।
Q2. कथन (A): सॉवरेन गोल्ड बॉण्ड योजना में विमोचन मूल्य विमोचन-तिथि से पूर्व के तीन कारोबारी दिनों के सोने के बंद भावों के सरल औसत से तय होता है।
कारण (R): ऐसी औसत-आधारित गणना से किसी एक दिन के असामान्य मूल्य-उतार-चढ़ाव का विमोचन मूल्य पर प्रभाव कम हो जाता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (a) A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- (b) A और R दोनों सत्य हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- (c) A सत्य है, परंतु R असत्य है।
- (d) A असत्य है, परंतु R सत्य है।
उत्तर: (a) A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है। — A सत्य है, क्योंकि विमोचन मूल्य तीन कारोबारी दिनों के बंद भावों के सरल औसत पर आधारित होता है। R भी सत्य है और A की तार्किक व्याख्या करता है, क्योंकि औसत निकालने से किसी एक दिन की अस्थिरता का प्रभाव घट जाता है।
Q3. निम्नलिखित सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए:
सूची-I (सॉवरेन गोल्ड बॉण्ड योजना की विशेषता)
A. अवधि (Tenor)
B. समय-पूर्व विमोचन का विकल्प
C. विमोचन मूल्य का आधार
D. एक इकाई (Unit) का आकार
सूची-II
1. 1 ग्राम सोना
2. 8 वर्ष
3. पाँचवें वर्ष से, ब्याज भुगतान की तिथि पर
4. विमोचन-पूर्व तीन कारोबारी दिनों के 999 शुद्धता वाले सोने के बंद भावों का सरल औसत
सही कूट चुनिए:
- A-2, B-3, C-4, D-1
- A-3, B-2, C-1, D-4
- A-2, B-1, C-4, D-3
- A-4, B-3, C-2, D-1
उत्तर: A-2, B-3, C-4, D-1 — SGB की अवधि 8 वर्ष (A-2) है और समय-पूर्व विमोचन पाँचवें वर्ष से ब्याज भुगतान-तिथि पर संभव है (B-3)। विमोचन मूल्य तीन कारोबारी दिनों के 999 शुद्धता वाले सोने के बंद भावों के सरल औसत पर आधारित है (C-4)। एक इकाई 1 ग्राम सोने के बराबर होती है (D-1)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सॉवरेन गोल्ड बॉण्ड योजना (Sovereign Gold Bond Scheme) भौतिक सोने की घरेलू मांग को वित्तीय बचत में बदलने का एक नीतिगत साधन है। इस योजना के उद्देश्यों की समालोचनात्मक समीक्षा कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि जब विमोचन मूल्य सोने के बाज़ार-भाव से जुड़ा हो, तब निवेशकों के समय-पूर्व विमोचन (Premature Redemption) और सरकार के राजकोषीय दायित्व पर क्या प्रभाव पड़ते हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की संरचना: (1) परिचय: योजना की शुरुआत नवंबर 2015 में हुई; यह भारत सरकार (वित्त मंत्रालय) की ओर से RBI द्वारा जारी सरकारी प्रतिभूति है और इसका उद्देश्य भौतिक सोने की मांग को वित्तीय बचत में बदलना तथा सोने के आयात पर निर्भरता घटाना है। (2) मुख्य विशेषताएँ: 8 वर्ष की परिपक्वता अवधि; पाँचवें वर्ष के बाद ब्याज-भुगतान तिथि पर समय-पूर्व विमोचन का विकल्प; प्रारंभिक निवेश पर निश्चित 2.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, अर्धवार्षिक भुगतान; एक इकाई 1 ग्राम सोने के बराबर; विमोचन मूल्य IBJA द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता के सोने के विमोचन-पूर्व तीन कारोबारी दिनों के बंद भावों का सरल औसत। वर्तमान उदाहरण: श्रृंखला 2020-21 Series I के समय-पूर्व विमोचन (28 अक्टूबर 2026) का विमोचन मूल्य ₹14,159 प्रति इकाई। (3) उद्देश्य का मूल्यांकन: सोने के आयात में कमी और चालू खाता घाटे पर प्रभाव, बचत का वित्तीय प्रणाली में प्रवेश, तथा स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (Gold Monetisation Scheme) व भौतिक सोने की तुलना। सीमाएँ: निवेशक-आकर्षण में उतार-चढ़ाव, सरकार के लिए आकस्मिक दायित्व, और व्यक्तिगत सीमा (4 किलोग्राम) से बड़े निवेश की अनुमति न होना। (4) समय-पूर्व विमोचन का विश्लेषण: सोने का भाव गिरने पर निवेशक को कम विमोचन मूल्य मिलता है, जबकि भाव बढ़ने पर लाभ; सरकार का नकद प्रवाह और ब्याज-देयता पर प्रभाव; परिपक्वता पर पूंजीगत लाभ कर से छूट का निवेशक-व्यवहार पर प्रभाव। (5) संतुलित दृष्टिकोण और निष्कर्ष: योजना बचत-गतिशीलता का उपयोगी साधन है, पर उसकी सफलता बाज़ार-स्थिरता, पारदर्शी मूल्य-निर्धारण और सरकारी दायित्व के प्रबंधन पर निर्भर है; वर्तमान तथ्यों पर आधारित, दलगत तर्कों से मुक्त विश्लेषण आवश्यक।
स्रोत: RBI
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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