ईएसआईसी ने नई अम्नेस्टी योजना 2025 की अवधि बढ़ाई: जानें नए नियम

ईएसआईसी ने नई अम्नेस्टी योजना 2025 की अवधि बढ़ाई: जानें नए नियम

ईएसआईसी ने नई अम्नेस्टी योजना 2025 की अवधि बढ़ाई: जानें नए नियम

ईएसआईसी ने नई अम्नेस्टी योजना 2025 की अवधि बढ़ाई: जानें नए नियम — ईएसआईसी नवीन अधिस्थगन योजना 2025 का विस्तार
आरेख: ईएसआईसी नवीन अधिस्थगन योजना 2025 का विस्तार

✎ कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के अंतर्गत त्रिपक्षीय वैधानिक निकाय है, और इसकी क्षमादान योजना 2025 की समय-सीमा 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाई गई है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन व्यवस्था, सामाजिक न्याय (श्रमिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (सामाजिक सुरक्षा, श्रम बाज़ार और अनुपालन तंत्र)
  • Prelims: कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 (Employees’ State Insurance Act, 1948), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC), सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Code on Social Security, 2020), अंशदान की दर और वेतन सीमा (Wage Ceiling), केंद्रीय बोर्ड और राज्य बोर्ड की त्रिपक्षीय संरचना, बीमित व्यक्ति और नियोक्ता की बाध्यताएँ, क्षति-राशि और विलंब पर ब्याज (Damages and Interest) की अवधारणा, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour and Employment)
  • Essay: औपचारिक सामाजिक सुरक्षा का विस्तार: अनुपालन, पारदर्शिता और श्रमिक हित का संतुलन, नियामक क्षमादान योजनाएँ: कल्याण-उन्मुख प्रशासन या अनुपालन की संस्कृति पर प्रभाव?

त्वरित पुनरावृत्ति: कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के अंतर्गत त्रिपक्षीय वैधानिक निकाय है, और इसकी क्षमादान योजना 2025 की समय-सीमा 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाई गई है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) ने नई क्षमादान योजना 2025 की समय-सीमा 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दी है। इस विस्तार से नियोक्ताओं और बीमित व्यक्तियों को अपने लंबित मामले सुलझाने के लिए अधिक समय मिलेगा। यह निर्णय ESIC की उस नीति का हिस्सा है जिसमें विवादित या अधूरे अंशदान-संबंधी मामलों का प्रशासनिक रूप से निपटारा कर बीमा कवरेज को नियमित और व्यवस्थित किया जाए। समाचार विज्ञप्ति में योजना के विस्तृत प्रावधानों का उल्लेख सीमित है, इसलिए परीक्षा की दृष्टि से मुख्य बात समय-सीमा का विस्तार और इसके नीतिगत उद्देश्य को समझना है।

पृष्ठभूमि

  • कर्मचारी राज्य बीमा निगम कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के अंतर्गत स्थापित वैधानिक निकाय है, जो श्रमिकों को बीमारी, प्रसूति, अंग-भंग (विकलांगता), व्यावसायिक क्षति और आश्रितों से जुड़े लाभ प्रदान करता है।
  • इस अधिनियम के तहत नियोक्ताओं का अंशदान और कर्मचारियों का अंशदान वेतन के एक निश्चित प्रतिशत के रूप में जमा होता है। समय पर अंशदान न जमा होने की स्थिति में विलंब-शुल्क और ब्याज जैसी देनदारियाँ उत्पन्न होती हैं, जिससे बड़ी संख्या में विवाद और लंबित मामले बनते हैं।
  • श्रम संहिताओं के अंतर्गत सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 का उद्देश्य अनेक पुराने सामाजिक सुरक्षा कानूनों को एक संहिता में समेकित करना है। इस पृष्ठभूमि में नियोक्ताओं के अनुपालन और लंबित मामलों के निपटारे को सरल बनाने वाली योजनाएँ नीतिगत महत्व रखती हैं।
  • क्षमादान योजनाएँ प्रायः इस उद्देश्य से लाई जाती हैं कि नियामक विवादों का शीघ्र और सौहार्दपूर्ण समाधान हो, प्रशासनिक बोझ घटे और सामान्य अनुपालन की ओर लौटने का अवसर मिले।

कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) और क्षमादान योजना क्या है?

  • कर्मचारी राज्य बीमा निगम एक त्रिपक्षीय निकाय है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारें, नियोक्ता और श्रमिकों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इसका प्रशासनिक नियंत्रण श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के पास है।
  • यह निगम उन औद्योगिक और सेवा-क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देता है, जिनका मासिक वेतन अधिनियम में निर्धारित वेतन सीमा के भीतर है। वेतन सीमा समय-समय पर संशोधित होती रही है।
  • ESIC के अंतर्गत चिकित्सा देखभाल, नकद लाभ (जैसे बीमारी और प्रसूति लाभ), विकलांगता लाभ और आश्रित लाभ प्रमुख हैं।
  • क्षमादान योजना का मूल तत्व यह होता है कि एक निर्धारित अवधि में बकाया अंशदान या लंबित मामलों का निपटारा करने पर नियोक्ता या बीमित व्यक्ति को कुछ रियायत, जैसे क्षति-राशि या ब्याज में छूट, मिल सकती है। ठोस प्रावधान योजना के आधिकारिक दिशा-निर्देशों से ही तय होते हैं।
  • समय-सीमा का विस्तार यह दर्शाता है कि प्रशासनिक निकाय ने पाया कि लंबित मामलों की संख्या या जटिलता के कारण मूल अवधि पर्याप्त नहीं थी, इसलिए अनुपालन का अवसर बढ़ाया गया।
  • इस प्रकार की योजनाएँ नियामक प्रवर्तन (Enforcement) और सहयोगात्मक अनुपालन के बीच संतुलन का उदाहरण हैं। इनका उद्देश्य दंडात्मक कार्रवाई से पहले स्वैच्छिक समाधान को प्रोत्साहित करना होता है।
  • सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के लागू होने के साथ ESIC से जुड़े प्रावधानों का स्वरूप विकसित हो रहा है, इसलिए परीक्षा में अधिनियम और संहिता के संबंध को सही रूप में समझना आवश्यक है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
योजना का नाम और अवधि ईएसआईसी एमनेस्टी योजना 2025 (ESIC Amnesty Scheme 2025) की अवधि 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाई गई है। इससे लंबित मामलों के निपटान के लिए नियोक्ताओं और बीमित व्यक्तियों को अधिक समय मिला है।
संस्थागत आधार कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC: Employees’ State Insurance Corporation) कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 (ESI Act, 1948) के अंतर्गत स्थापित वैधानिक निकाय है। यह श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है।
लक्षित मामले योजना का उद्देश्य ऐसे लंबित विवादों और बकाया प्रकरणों का समाधान है, जिनमें अंशदान (Contribution) की राशि, उस पर लगे ब्याज या हर्जाने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
नियोक्ता और बीमित व्यक्तियों की भूमिका योजना नियोक्ताओं के साथ-साथ बीमित व्यक्तियों के लिए भी खुली है, जिससे लाभ, अंशदान और दावों से जुड़े दोनों पक्षों के मामले सुलझ सकें।
प्रशासनिक लाभ लंबित प्रकरणों के निपटान से निगम पर अभिलेखीय बोझ घटता है, न्यायिक या अर्ध-न्यायिक कार्यवाहियों की संख्या कम होती है और प्रवर्तन पर संसाधन केंद्रित किए जा सकते हैं।

महत्व

सामाजिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से

  • ईएसआईसी सामाजिक बीमा के माध्यम से बीमारी, मातृत्व, विकलांगता और कार्य-जनित दुर्घटना की स्थिति में चिकित्सा और नकद लाभ प्रदान करता है। अंशदान का नियमित भुगतान इस व्यवस्था की निरंतरता की शर्त है।
  • लंबित बकाया के निपटान से अंशदान का रिकॉर्ड अद्यतन होता है और बीमित श्रमिकों के लाभ-अधिकार सुरक्षित रहते हैं।

नियामक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से

  • ऐसी योजनाएँ अनुपालन को बढ़ावा देने का साधन हैं। ब्याज और हर्जाने में छूट का प्रस्ताव देकर नियोक्ताओं को स्वैच्छिक रूप से बकाया चुकाने के लिए प्रेरित किया जाता है।
  • विवादों के शीघ्र निपटान से प्रवर्तन और न्यायिक प्रक्रियाओं पर होने वाला समय व व्यय घटता है।

आर्थिक दृष्टिकोण से

  • औपचारिक क्षेत्र में पंजीकरण और अनुपालन बढ़ने से श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा का दायरा विस्तृत होता है।
  • नियोक्ताओं के लिए अनिश्चितता कम होने से वे अपने वित्तीय दायित्वों की स्पष्ट गणना कर सकते हैं, जिससे व्यावसायिक योजना में सुविधा होती है।

शासन-प्रक्रिया के दृष्टिकोण से

  • समय-सीमा बढ़ाने का निर्णय दर्शाता है कि सांविधिक दायित्वों के प्रवर्तन और सहज अनुपालन के बीच संतुलन बनाना नीति-निर्माण की चुनौती है।

चुनौतियाँ

1. अंशदान का अनौपचारिक क्षेत्र में विस्तार न होना

  • ईएसआईसी का दायरा मुख्यतः औपचारिक क्षेत्र के वेतनभोगी कर्मचारियों तक सीमित है। बड़ी संख्या में असंगठित श्रमिक अब भी इसकी परिधि से बाहर हैं।
  • कई छोटे प्रतिष्ठानों में पंजीकरण और नियमित अंशदान की प्रक्रिया जटिल या अपर्याप्त पाई जाती है।

2. लंबित विवादों का बोझ और न्यायिक-अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया

  • अंशदान की राशि निर्धारण से जुड़े विवाद वर्षों तक लंबित रह सकते हैं, जिससे दोनों पक्षों पर अनिश्चितता और वित्तीय दबाव बढ़ता है।
  • ब्याज और हर्जाने का संचय बकाया राशि को कई गुना बढ़ा देता है, जिससे छोटे नियोक्ताओं के लिए भुगतान कठिन हो जाता है।

3. अनुपालन और दंड के बीच संतुलन

  • दंड कठोर होने पर नियोक्ता अनुपालन से बचते हैं, जबकि अत्यधिक छूट से नियमित अंशदान देने वालों के साथ असमानता पैदा हो सकती है।
  • बार-बार एमनेस्टी योजनाएँ लाने से यह धारणा बन सकती है कि समय पर भुगतान न करने पर लाभ मिल जाएगा, जिससे नैतिक जोखिम (Moral Hazard) उत्पन्न होता है।

4. डिजिटल अभिलेख और डेटा की विश्वसनीयता

  • नियोक्ताओं और बीमित व्यक्तियों के रिकॉर्ड का मिलान, वेतन-सूची और पंजीकरण की सटीकता सुनिश्चित करना अब भी चुनौती है।
  • पुराने प्रकरणों में अभिलेख अधूरे या विसंगत होने से निपटान की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

5. श्रमिक जागरूकता और लाभ तक पहुँच

  • बीमित व्यक्तियों को अपने अधिकारों, अंशदान की स्थिति और दावा प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं होती, जिससे कई पात्र लाभार्थी छूट जाते हैं।
  • प्रवासी और अस्थायी श्रमिकों के लिए पंजीकरण और सेवा-सुविधा की पहुँच सीमित रहती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
अंशदान का अनुपालन कम पंजीकरण और विलंबित भुगतान से सामाजिक बीमा का आधार संकुचित होता है।
लंबित प्रकरण निर्णय में देरी से नियोक्ता और बीमित व्यक्ति दोनों की वित्तीय अनिश्चितता बढ़ती है।
ब्याज और हर्जाने का संचय समय के साथ देयता बढ़ने से छोटे प्रतिष्ठानों पर असहनीय भार पड़ता है।
नैतिक जोखिम बार-बार छूट की अपेक्षा से समय पर भुगतान करने की प्रवृत्ति कमजोर पड़ सकती है।
अभिलेखों की गुणवत्ता पुराने और असंगत रिकॉर्ड निपटान प्रक्रिया को धीमा करते हैं।
श्रमिकों की जागरूकता अधिकारों की जानकारी के अभाव में पात्र व्यक्ति लाभ से वंचित रह जाते हैं।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • ईएसआईसी एमनेस्टी योजना 2025 (ESIC Amnesty Scheme 2025)

आगे की राह

  • लंबित प्रकरणों की पहचान के लिए प्रत्येक क्षेत्रीय कार्यालय स्तर पर समयबद्ध सूची बनाई जाए और उसका सार्वजनिक प्रकाशन हो।
  • नियोक्ताओं के लिए सरल, ऑनलाइन भुगतान और सुलह की प्रक्रिया अपनाई जाए, ताकि समय-सीमा का उपयोग व्यवहार में हो सके।
  • पंजीकरण और वेतन-विवरण के डिजिटल मिलान को बढ़ाकर अभिलेखों की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जाए।
  • छोटे और सूक्ष्म प्रतिष्ठानों के लिए अनुपालन-सहायता और परामर्श व्यवस्था मजबूत की जाए।
  • अंशदान न देने वाले नियोक्ताओं के विरुद्ध प्रवर्तन को पारदर्शी और निश्चित नियमों पर आधारित रखा जाए, ताकि अनुपालन करने वालों के साथ समानता बनी रहे।
  • बीमित व्यक्तियों में अधिकारों और दावा प्रक्रिया के बारे में जागरूकता के लिए श्रम विभागों और सामुदायिक संगठनों की भागीदारी बढ़ाई जाए।
  • असंगठित और अस्थायी श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा के दायरे को धीरे-धीरे विस्तृत करने की दीर्घकालिक रणनीति बनाई जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

कर्मचारी राज्य बीमा निगम (Employees’ State Insurance Corporation) · कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 (Employees’ State Insurance Act, 1948) · सामाजिक सुरक्षा (Social Security) · सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Code on Social Security, 2020) · अनुपालन (Compliance) · शास्ति और ब्याज (Penalty and Interest) · बकाया वसूली (Recovery of Arrears) · नैतिक जोखिम (Moral Hazard) · औपचारिकीकरण (Formalisation) · वेतन सीमा (Wage Ceiling) · राज्य के नीति निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy) · अनुच्छेद 41 और अनुच्छेद 43 (Articles 41 and 43)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 41: काम, शिक्षा और लोक सहायता का अधिकार; बीमारी और विकलांगता में सहायता का निर्देश
  • सातवीं अनुसूची, समवर्ती सूची, प्रविष्टि 24: श्रमिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा का विषय

अवधारणा प्रवाह

नियोक्ता और बीमित व्यक्ति के बीच अंशदान का निर्धारण और भुगतान ESI Act, 1948 के अंतर्गत होता है।  →  भुगतान में विलंब या विवाद होने पर बकाया, ब्याज और हर्जाने की देयता उत्पन्न होती है।  →  प्रकरण लंबित रहने से दोनों पक्षों पर वित्तीय और प्रशासनिक बोझ बढ़ता है।  →  एमनेस्टी योजना के माध्यम से ब्याज और हर्जाने के संबंध में राहत देकर बकाया के स्वैच्छिक निपटान को प्रोत्साहन दिया जाता है।  →  समय-सीमा 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाने से अधिक प्रकरणों का निपटान संभव होता है, जिससे अंशदान रिकॉर्ड और बीमित श्रमिकों का लाभ-अधिकार सुदृढ़ होता है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के अंतर्गत नियोक्ता और कर्मचारी, दोनों अंशदान देते हैं।
2. कर्मचारी राज्य बीमा निगम श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है।
3. कर्मचारी राज्य बीमा योजना में सभी वेतन-वर्ग के कर्मचारी, वेतन-सीमा के भेद के बिना, शामिल होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. उपर्युक्त में से कोई नहीं, क्योंकि सभी गलत हैं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है, क्योंकि ESI योजना में नियोक्ता और कर्मचारी दोनों का अंशदान होता है। कथन 2 सही है, क्योंकि ESIC श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन सांविधिक निकाय है। कथन 3 गलत है, क्योंकि यह योजना एक निर्धारित वेतन-सीमा से कम आय वाले कर्मचारियों पर लागू होती है; अतः सही उत्तर केवल दो है।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): लंबित अंशदान के मामलों में समाधान हेतु चलाई गई अमनेस्टी योजनाएँ नियोक्ताओं को स्वैच्छिक अनुपालन की ओर प्रेरित कर सकती हैं।
कारण (R): शास्ति और विलंब-ब्याज में सीमित छूट देने से विवादों और वसूली-वाद की संख्या घटने की संभावना रहती है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
  3. (A) सही है, किंतु (R) गलत है
  4. (A) गलत है, किंतु (R) सही है

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — अमनेस्टी योजनाएँ लंबित मामलों के निपटान का अवसर देती हैं, इसलिए वे स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा दे सकती हैं। शास्ति और ब्याज में छूट के कारण नियोक्ता बकाया चुकाने के लिए प्रेरित होते हैं, जिससे विवाद और वाद कम होते हैं। अतः (R), (A) की सही व्याख्या है।

Q3. निम्नलिखित सूचियों का सही मिलान कीजिए:
सूची I (संविधान का अनुच्छेद):
1. अनुच्छेद 41
2. अनुच्छेद 42
3. अनुच्छेद 43
4. अनुच्छेद 47

सूची II (विषय):
a. कार्य की न्यायोचित और मानवीय दशाएँ तथा प्रसूति सहायता
b. बीमारी, वृद्धावस्था और निःशक्तता के मामलों में लोक सहायता
c. जीवन-निर्वाह मजदूरी और शिष्ट जीवन-स्तर
d. पोषाहार-स्तर, जीवन-स्तर में सुधार और लोक-स्वास्थ्य

सही मिलान चुनिए:

  1. 1-a, 2-b, 3-c, 4-d
  2. 1-b, 2-a, 3-c, 4-d
  3. 1-b, 2-a, 3-d, 4-c
  4. 1-c, 2-b, 3-a, 4-d

उत्तर: 1-b, 2-a, 3-c, 4-d — अनुच्छेद 41 बीमारी, वृद्धावस्था और निःशक्तता में लोक सहायता से संबंधित है। अनुच्छेद 42 कार्य की न्यायोचित और मानवीय दशाओं तथा प्रसूति सहायता का प्रावधान करता है। अनुच्छेद 43 जीवन-निर्वाह मजदूरी और शिष्ट जीवन-स्तर से जुड़ा है, जबकि अनुच्छेद 47 पोषाहार-स्तर और लोक-स्वास्थ्य से संबंधित है। ये सभी राज्य के नीति निदेशक तत्व हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ कर्मचारी राज्य बीमा योजना के अंतर्गत लंबित मामलों के निपटान के लिए अमनेस्टी योजनाएँ चलाना सामाजिक सुरक्षा के औपचारिकीकरण का एक व्यावहारिक उपाय है। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि यदि ऐसी योजनाएँ बार-बार बढ़ाई जाती हैं, तो नियोक्ताओं के अनुपालन-व्यवहार और सामाजिक सुरक्षा के लक्ष्य पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की संरचना निम्नलिखित बिंदुओं पर आधारित होनी चाहिए:
(1) भूमिका: कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के अंतर्गत कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) द्वारा चिकित्सा, बीमारी, प्रसूति, निःशक्तता और आश्रित-लाभ जैसी सुविधाएँ दी जाती हैं। योजना उन कर्मचारियों पर लागू होती है जिनका वेतन निर्धारित वेतन-सीमा के भीतर है; नियोक्ता और कर्मचारी दोनों अंशदान देते हैं।
(2) अमनेस्टी योजना का तर्क: लंबित अंशदान, विवरणी (returns) और विवादों के निपटान से राजस्व की वसूली, सेवाओं तक पहुँच और प्रशासनिक बोझ में कमी जैसे लाभ। विलंब पर लगने वाली शास्ति और ब्याज में छूट को स्वैच्छिक अनुपालन के प्रोत्साहन के रूप में देखा जा सकता है।
(3) समालोचनात्मक पक्ष: (क) नैतिक जोखिम (Moral Hazard): बार-बार विस्तार से यह संदेश जा सकता है कि समय पर अंशदान न देने पर भी दंड से बचा जा सकता है। (ख) कर्मचारियों के लाभ-अधिकार पर प्रभाव: अंशदान की कमी से कर्मचारियों की पात्रता और चिकित्सा सेवाओं के वित्त-पोषण पर दबाव। (ग) प्रवर्तन की विश्वसनीयता: नियमित शास्ति-व्यवस्था और अनुपालन-निगरानी का कमजोर पड़ना।
(4) संवैधानिक और नीतिगत आधार: अनुच्छेद 41 (बीमारी, वृद्धावस्था और निःशक्तता में लोक सहायता), अनुच्छेद 42 (कार्य की मानवीय दशाएँ और प्रसूति सहायता) तथा अनुच्छेद 43 (जीवन-निर्वाह मजदूरी और शिष्ट जीवन-स्तर) राज्य के नीति निदेशक तत्व हैं, जो सामाजिक सुरक्षा के नीतिगत लक्ष्य तय करते हैं। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 सामाजिक सुरक्षा के विभिन्न कानूनों के समेकन की दिशा में है, जिसका संदर्भ लिया जा सकता है।
(5) संतुलित समाधान: अमनेस्टी को एक बार के अवसर और समयबद्ध प्रक्रिया के रूप में सीमित करना, डिजिटल अनुपालन और पंजीकरण बढ़ाना, नियमित प्रवर्तन के साथ अंशदाता-आधार का विस्तार, तथा नियोक्ता-सहायता (सरल प्रक्रिया, जागरूकता) पर बल देना।
(6) निष्कर्ष: अमनेस्टी योजनाएँ अल्पकालिक राहत और औपचारिकीकरण में सहायक हो सकती हैं, परंतु दीर्घकालिक सफलता नियमित प्रवर्तन, विश्वसनीय अनुपालन-तंत्र और कर्मचारियों के लाभ-अधिकार की सुरक्षा पर निर्भर है। अमनेस्टी का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि उससे बकाया वसूली और पंजीकरण में वास्तविक वृद्धि हुई या नहीं।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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