गुंटूर में चक्रवात प्रभावित धान के खेतों का कलेक्टर ने दौरा, किसानों को भरोसा दिलाया

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गुंटूर में चक्रवात प्रभावित धान के खेतों का कलेक्टर ने दौरा, किसानों को भरोसा दिलाया

चक्रवात प्रभावित धान खेतों का प्रबंधनचक्रवात प्रभावभारी वर्षा, तेज़ हवाएँफसल क्षतिधान गिरना, जलभरावस्थिति आकलनकृषि अधिकारियों द्वारातकनीकी मार्गदर्शननाली साफ, उर्वरक स्थगितराहत एवं बीमाPMFBY के तहत
चक्रवात प्रभावित धान खेतों का प्रबंधन

✎ चक्रवात के बाद धान में जलभराव की निकासी, लॉजिंग वाली फसल को ज़बरदस्ती न उठाना, उर्वरक स्थगित रखना और रोग-कीट की पुष्टि पर ही IPM आधारित छिड़काव करना, यही वैज्ञानिक आपदा-पश्चात प्रबंधन का मूल सूत्र है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण और आपदा प्रबंधन (आपदा प्रबंधन, चक्रवात, कृषि पर प्रभाव)  |  GS Paper III — कृषि (धान की फसल, फसल संरक्षण, एकीकृत कीट प्रबंधन, फसल बीमा)  |  GS Paper II — शासन (राज्य और जिला प्रशासन की भूमिका, संघ-राज्य संबंध में कृषि एक राज्य विषय)
  • Prelims: चक्रवात और उसके प्रकार (Cyclone) — बंगाल की खाड़ी में बनने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवात, फसल लॉजिंग (Crop Lodging) — तेज़ हवा और वर्षा से पौधों का भूमि की ओर झुक जाना, जलभराव (Waterlogging) और जल निकासी का महत्व, एकीकृत कीट प्रबंधन (Integrated Pest Management – IPM) और आर्थिक क्षति स्तर (Economic Threshold Level), धान के प्रमुख रोग: झुलसा रोग (Blast), शीथ ब्लाइट (Sheath Blight) और जीवाणु पत्ती झुलसा (Bacterial Leaf Blight), धान के प्रमुख कीट: तना छेदक (Stem Borer) और पत्ती लपेटक (Leaf Folder), राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (State Disaster Response Fund – SDRF), कृषि राज्य सूची का विषय है (संविधान की सातवीं अनुसूची, राज्य सूची की प्रविष्टि 14)
  • Essay: जलवायु परिवर्तन के दौर में चरम मौसमी घटनाएँ और खाद्य सुरक्षा: किसान की सुरक्षा के लिए तंत्र कैसे सुदृढ़ हो?, आपदा के बाद की पुनर्प्राप्ति: प्रशासनिक तत्परता, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और किसान का विश्वास

त्वरित पुनरावृत्ति: चक्रवात के बाद धान में जलभराव की निकासी, लॉजिंग वाली फसल को ज़बरदस्ती न उठाना, उर्वरक स्थगित रखना और रोग-कीट की पुष्टि पर ही IPM आधारित छिड़काव करना, यही वैज्ञानिक आपदा-पश्चात प्रबंधन का मूल सूत्र है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

आंध्र प्रदेश के गुंटूर ज़िले के कलेक्टर सी.एम. साईकांत वर्मा ने तेनाली मंडल के सोमसुंदरपालेम और कंचरपालेम गाँवों में चक्रवात अर्नब (Cyclone Arnab) से प्रभावित धान के खेतों का निरीक्षण किया। भारी वर्षा और तेज़ हवाओं से फसल के लॉजिंग होने पर किसानों ने चिंता जताई कि इससे अनाज की गुणवत्ता और उपज दोनों पर असर पड़ेगा। कलेक्टर ने कृषि अधिकारियों को तत्काल तकनीकी मार्गदर्शन देने, खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने, मंडल कृषि अधिकारियों द्वारा ज़िले भर में फसल स्थिति का आकलन करने और फसल क्षति वाले क्षेत्रों की रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए। कृषि वैज्ञानिकों ने नाली साफ रखने, लेटी हुई फसल को ज़बरदस्ती उठाने से बचने, जलभराव वाले खेतों में उर्वरक डालना स्थगित करने और रोग-कीट की पुष्टि होने पर ही कीटनाशक व कवकनाशी के प्रयोग की सलाह दी।

पृष्ठभूमि

  • भारत में धान मुख्य खरीफ फसल है, और आंध्र प्रदेश का कृष्णा-गोदावरी डेल्टा क्षेत्र इसके प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में गिना जाता है। गुंटूर ज़िला कृष्णा नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है।
  • बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवात अक्सर तटीय ज़िलों में भारी वर्षा और तेज़ हवाएँ लाते हैं, जिससे खड़ी फसल सबसे अधिक प्रभावित होती है। फसल कटाई के समय की ऐसी आपदा सीधे उपज और गुणवत्ता दोनों को प्रभावित करती है।
  • भारत में आपदा प्रबंधन का वैधानिक ढाँचा आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) पर आधारित है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय, राज्य और ज़िला स्तर पर आपदा प्रबंधन प्राधिकरण बनाए गए हैं। ज़िला स्तर पर ज़िलाधिकारी (कलेक्टर) आपदा प्रबंधन के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी होते हैं।
  • कृषि राज्य सूची का विषय होने के कारण खेतों के निरीक्षण, फसल आकलन और सलाह-सेवा का प्रमुख दायित्व राज्य सरकार और उसके कृषि विभाग पर होता है, जबकि केंद्र सरकार नीति-निर्देश, वित्तीय सहायता और अनुसंधान में सहयोग करती है।
  • फसल क्षति के आकलन के बाद राहत और बीमा दावे का निपटान राज्य स्तर पर होता है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana – PMFBY) के अंतर्गत स्थानीय आपदाओं और प्राकृतिक घटनाओं से हुई क्षति के आकलन की प्रक्रिया लागू होती है।

फसल लॉजिंग, जलभराव और आपदा-पश्चात कृषि प्रबंधन क्या है?

  • फसल लॉजिंग (Crop Lodging) वह स्थिति है जिसमें तेज़ हवा, भारी वर्षा या अत्यधिक उर्वरक के कारण धान के पौधे तने से मुड़कर भूमि की ओर गिर जाते हैं। इससे प्रकाश-संश्लेषण बाधित होता है और दाने भरने की प्रक्रिया पर असर पड़ता है।
  • जलभराव (Waterlogging) की स्थिति में मिट्टी में वायु का संचार घट जाता है, जड़ें कमज़ोर होती हैं और पौधों में रोगों का खतरा बढ़ता है। इसलिए खेतों से अतिरिक्त पानी की तत्काल निकासी आवश्यक है।
  • लॉजिंग वाली फसल को ज़बरदस्ती उठाने से तना और जड़ें और क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, इसलिए उसे धीरे-धीरे सँभालने और कटाई की योजना बनाने की सलाह दी जाती है।
  • जलभराव और नम वातावरण में झुलसा रोग (Blast), शीथ ब्लाइट (Sheath Blight) और जीवाणु पत्ती झुलसा (Bacterial Leaf Blight) जैसे रोगों का प्रसार तेज़ होता है। तना छेदक (Stem Borer) और पत्ती लपेटक (Leaf Folder) जैसे कीटों की निगरानी भी आवश्यक होती है।
  • एकीकृत कीट प्रबंधन (Integrated Pest Management – IPM) के सिद्धांत के अनुसार कीटनाशक और कवकनाशी का प्रयोग तभी किया जाता है जब कीट या रोग का प्रकोप पुष्टि के साथ आर्थिक क्षति स्तर से ऊपर पहुँचे। वर्षा और तेज़ हवा में छिड़काव से बचना चाहिए, ताकि दवा प्रभावी रहे और पर्यावरण पर दबाव कम हो।
  • जलभराव वाले खेतों में नाइट्रोजन उर्वरक का प्रयोग स्थगित करने की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि कमज़ोर पौधों में अधिक वानस्पतिक वृद्धि होने से लॉजिंग का खतरा बढ़ता है और पोषक तत्वों का उपयोग भी ठीक से नहीं हो पाता।
  • आपदा के बाद फसल क्षति का आकलन मंडल कृषि अधिकारी की सहायता से किया जाता है और रिपोर्ट ज़िला प्रशासन के माध्यम से राज्य स्तर पर भेजी जाती है, जिसके आधार पर राहत और बीमा दावे का निर्धारण होता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्त्व
घटना का स्वरूप चक्रवात अर्नब (Cyclone Arnab) से भारी वर्षा और तेज़ हवाओं के कारण गुंटूर जिले के तेनाली मंडल में धान के खेत प्रभावित हुए, जिससे फसल का गिरना (Lodging) हुआ।
प्रशासनिक कार्रवाई जिलाधिकारी (District Collector) ने प्रभावित गाँवों में स्थल निरीक्षण किया और खेतों से जल निकासी, मंडल कृषि अधिकारियों द्वारा सर्वेक्षण तथा फसल हानि की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए।
फसल-विशिष्ट जोखिम धान की फसल में गिरने से दाने की गुणवत्ता और उपज दोनों प्रभावित होते हैं। दाने के खेत में अंकुरित होने का खतरा भी बढ़ जाता है, इसलिए कटाई की योजना समय पर बनाना आवश्यक है।
जलभराव (Waterlogging) की समस्या लगातार वर्षा से खेतों में पानी रुकने पर जड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिलती और रोगों का प्रसार बढ़ता है। इसीलिए नालियों की सफ़ाई और जल निकासी को प्राथमिकता दी गई।
रोग और कीट निगरानी झुलसा (Blast), खोल झुलसा (Sheath Blight), जीवाणु पर्ण झुलसा, तना छेदक और पत्ता लपेटक जैसे रोगों और कीटों की नियमित निगरानी की सलाह दी गई है, ताकि कीटनाशक और कवकनाशी का उपयोग केवल पुष्ट संक्रमण पर ही हो।
वैज्ञानिक परामर्श कृषि वैज्ञानिकों ने पौधों को बलपूर्वक न उठाने, जल-भराव वाले खेतों में उर्वरक (Fertiliser) डालना स्थगित करने और वर्षा तथा तेज़ हवा के दौरान छिड़काव न करने की सलाह दी।

महत्व

आर्थिक महत्त्व

  • धान आंध्र प्रदेश की प्रमुख खाद्यान्न फसल है, इसलिए उपज और दाने की गुणवत्ता में गिरावट का सीधा असर किसानों की आय और बाज़ार मूल्य पर पड़ता है।
  • फसल हानि की समय पर रिपोर्ट से ही राहत और इनपुट सहायता (Input Subsidy) का आकलन संभव होता है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए आवश्यक है।

खाद्य सुरक्षा से जुड़ा महत्त्व

  • दाने के अंकुरण और गुणवत्ता में गिरावट से खाद्यान्न की उपलब्धता और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की आपूर्ति पर अप्रत्यक्ष दबाव आ सकता है।
  • धान उत्पादन में आई कमी का असर चावल की कीमतों और भंडारण की योजना पर भी पड़ सकता है।

आपदा प्रबंधन और प्रशासनिक महत्त्व

  • यह घटना दर्शाती है कि आपदा के बाद जिला स्तर पर तत्काल निरीक्षण, जल निकासी और रिपोर्टिंग की व्यवस्था कितनी महत्त्वपूर्ण है।
  • जिलाधिकारी द्वारा किसानों की शिकायतें सुनना और कृषि विशेषज्ञों से तकनीकी मार्गदर्शन दिलाना सहभागी शासन का उदाहरण है।

चुनौतियाँ

1. फसल हानि का सटीक आकलन

  • लॉजिंग और आंशिक क्षति का आकलन दृश्य निरीक्षण पर निर्भर होता है, जिससे क्षति का प्रतिशत विवादित हो सकता है।
  • मंडल स्तर पर कृषि अधिकारियों की संख्या सीमित होने पर बड़े क्षेत्र का समय पर सर्वेक्षण कठिन हो जाता है।

2. जलभराव और जल निकासी की समस्या

  • लगातार वर्षा से खेतों में पानी रुकने पर जड़ें सड़ती हैं और उपज घटती है।
  • निकासी नालियों का रख-रखाव कमज़ोर होने पर ऐसी समस्या बार-बार उत्पन्न होती है।

3. रोग और कीट प्रकोप का खतरा

  • नमी और वर्षा के वातावरण में झुलसा और जीवाणु जनित रोग तेज़ी से फैलते हैं।
  • आपदा के बाद किसान अक्सर अनावश्यक कीटनाशक का छिड़काव करते हैं, जिससे लागत, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ते हैं।

4. छोटे किसानों की वित्तीय संवेदनशीलता

  • सीमांत और लघु किसानों के पास फसल नुकसान सहने की क्षमता कम होती है, और पुनः बुवाई के लिए पूंजी जुटाना कठिन होता है।
  • ऋण और बीमा दावों की प्रक्रिया में देरी होने पर उनकी वित्तीय स्थिति और कमज़ोर हो जाती है।

5. गुणवत्ता और कटाई प्रबंधन

  • खेत में भीगे और गिरे पौधों से दाने का अंकुरण और टूटन बढ़ती है, जिससे बाज़ार में मूल्य घटता है।
  • समय पर कटाई और सुखाने की सुविधा के अभाव में गुणवत्ता में और गिरावट आ सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

समस्या चिंता का विषय
फसल हानि का आकलन दृश्य निरीक्षण पर निर्भरता से क्षति के आंकड़े विवादित और असमान हो सकते हैं।
जल निकासी नालियों की अवरुद्धता से जलभराव बढ़ता है और जड़ों तथा दानों को नुकसान होता है।
रोग और कीट नम मौसम में झुलसा और तना छेदक जैसे रोग फैल सकते हैं, जिससे उपज और लागत दोनों प्रभावित होते हैं।
अनियंत्रित कीटनाशक प्रयोग बिना पुष्टि के छिड़काव से लागत बढ़ती है और पर्यावरण तथा मिट्टी पर दीर्घकालिक असर पड़ता है।
दाने की गुणवत्ता खेत में अंकुरण और टूटन से बाज़ार मूल्य घटता है और खरीद में कटौती हो सकती है।
किसानों की ऋण और आय स्थिति फसल हानि से ऋण चुकौती प्रभावित होती है और अगली फसल की बुवाई पर संकट आता है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) – स्थानीय आपदाओं और प्राकृतिक आपदाओं से फसल हानि पर बीमा दावों के लिए प्रासंगिक
  • राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (State Disaster Response Fund) – फसल हानि के आकलन के आधार पर राहत और इनपुट सहायता के लिए प्रासंगिक

आगे की राह

  • फसल हानि के आकलन में ड्रोन और उपग्रह आधारित छवियों का प्रयोग कर सर्वेक्षण की गति और पारदर्शिता बढ़ाई जाए।
  • मंडल स्तर पर कृषि अधिकारियों की सूची और सर्वेक्षण क्षमता का सुदृढ़ीकरण हो, ताकि रिपोर्टिंग समय पर पूरी हो सके।
  • नालियों और जल निकासी व्यवस्था का मानसून से पहले नियमित रख-रखाव सुनिश्चित किया जाए।
  • रोग और कीट निगरानी के लिए ग्राम स्तर पर कृषि सहायकों के माध्यम से समय पर चेतावनी प्रणाली विकसित की जाए।
  • एकीकृत कीट प्रबंधन (Integrated Pest Management) को बढ़ावा दिया जाए, ताकि कीटनाशक का उपयोग केवल पुष्ट संक्रमण पर हो।
  • फसल बीमा दावों और राहत राशि के वितरण की समय-सीमा निर्धारित कर उसकी नियमित समीक्षा की जाए।
  • कटाई, सुखाने और भंडारण की अस्थायी सुविधाएँ आपदा-प्रवण क्षेत्रों में उपलब्ध कराई जाएँ, ताकि दाने की गुणवत्ता बनी रहे।
  • किसानों तक वैज्ञानिक परामर्श को स्थानीय भाषा में और समय पर पहुँचाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र (Krishi Vigyan Kendra) की भूमिका बढ़ाई जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

फसल गिरना (Lodging) · जलभराव (Waterlogging) · चक्रवात और फसल-हानि · आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) · जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (District Disaster Management Authority – DDMA) · राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि (State Disaster Response Fund – SDRF) · प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana – PMFBY) · एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन (Integrated Pest Management – IPM) · कटाई-उपरांत हानि (Post-harvest Losses) · जलवायु-सहिष्णु कृषि (Climate-Resilient Agriculture) · कृषि विज्ञान केंद्र (Krishi Vigyan Kendra – KVK) · आपदा न्यूनीकरण (Disaster Mitigation)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 48 (DPSP): कृषि और पशुपालन का आधुनिक आधार पर संगठन
  • सातवीं अनुसूची, राज्य सूची प्रविष्टि 14: कृषि से संबंधित राज्य का विषय

अवधारणा प्रवाह

चक्रवात अर्नब से भारी वर्षा और तेज़ हवाएँ  →  धान के खेतों में फसल का गिरना (Lodging) और जलभराव  →  किसानों की चिंता और जिलाधिकारी द्वारा स्थल निरीक्षण  →  मंडल कृषि अधिकारियों द्वारा सर्वेक्षण और फसल हानि की रिपोर्ट  →  कृषि वैज्ञानिकों का तकनीकी परामर्श: जल निकासी, उर्वरक स्थगन और कीट निगरानी  →  दाने की गुणवत्ता की रक्षा और समय पर कटाई की योजना  →  राहत, बीमा दावे और इनपुट सहायता के माध्यम से किसानों की आय सुरक्षा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. धान में ब्लास्ट (Blast) और शीथ ब्लाइट (Sheath Blight) दोनों कवक-जनित रोग हैं।
2. जीवाणु पत्ती झुलसा (Bacterial Leaf Blight) का कारक एक कवक (Fungus) है।
3. तना छेदक (Stem Borer) और पत्ती मोड़क (Leaf Folder) दोनों कीट हैं।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: ब्लास्ट (Magnaporthe oryzae) और शीथ ब्लाइट (Rhizoctonia solani) दोनों कवक-जनित रोग हैं। कथन 2 गलत है: जीवाणु पत्ती झुलसा का कारक जीवाणु Xanthomonas oryzae pv. oryzae है, कवक नहीं। कथन 3 सही है: तना छेदक और पत्ती मोड़क दोनों कीट हैं, इसलिए केवल कथन 1 और 3 सही हैं।

Q2. निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): जलभराव वाले धान के खेतों में नाइट्रोजनयुक्त उर्वरक का प्रयोग स्थगित रखने की सलाह दी जाती है।
कारण (R): जलमग्न मिट्टी में ऑक्सीजन की कमी होने से नाइट्रोजन का अवायवीय परिस्थितियों में विनाइट्रीकरण (Denitrification) होता है और पौधों द्वारा उसका ग्रहण घट जाता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
  2. A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
  3. A सही है, परंतु R गलत है
  4. A गलत है, परंतु R सही है

उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है — अभिकथन सही है: जलभराव में उर्वरक का प्रयोग जोखिमपूर्ण माना जाता है, क्योंकि नाइट्रोजन का हानि और बहाव बढ़ जाता है। कारण भी सही है: अवायवीय दशा में विनाइट्रीकरण से नाइट्रोजन वायुमंडल में चला जाता है, अतः R, A की सही व्याख्या करता है।

Q3. निम्नलिखित सूचियों का मिलान कीजिए:
सूची I (रोग/कीट): 1. तना छेदक (Stem Borer) 2. पत्ती मोड़क (Leaf Folder) 3. शीथ ब्लाइट (Sheath Blight) 4. जीवाणु पत्ती झुलसा (Bacterial Leaf Blight)
सूची II (जीव-वर्ग): A. कीट (Insect) B. कवक (Fungus) C. जीवाणु (Bacterium)
सही मिलान चुनिए:

  1. 1-A, 2-A, 3-B, 4-C
  2. 1-B, 2-A, 3-C, 4-A
  3. 1-A, 2-C, 3-B, 4-A
  4. 1-C, 2-B, 3-A, 4-B

उत्तर: 1-A, 2-A, 3-B, 4-C — तना छेदक और पत्ती मोड़क दोनों कीट हैं (A)। शीथ ब्लाइट का कारक कवक Rhizoctonia solani है (B)। जीवाणु पत्ती झुलसा का कारक जीवाणु Xanthomonas oryzae pv. oryzae है (C)। अतः 1-A, 2-A, 3-B, 4-C सही मिलान है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ कृषि आपदाएँ, विशेषकर चक्रवात और लगातार वर्षा से होने वाली फसल-हानि, अब बार-बार घटित होने वाली चुनौती बनती जा रही हैं। भारत में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए विद्यमान संस्थागत और वित्तीय तंत्र की समालोचनात्मक परीक्षा कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि क्या यह तंत्र कटाई-उपरांत गुणवत्ता-हानि की समस्या का भी समाधान करता है। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की रूपरेखा: (1) भूमिका: चक्रवात से धान में फसल गिरना (Lodging) और जलभराव से उपज व दाने की गुणवत्ता पर असर; गुंटूर कलेक्टर द्वारा तेलाली मंडल में निरीक्षण का उदाहरण। (2) संस्थागत ढाँचा: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर प्राधिकरण; जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) की भूमिका, जिसमें जिलाधिकारी का केंद्रीय स्थान है; राहत एवं पुनर्वास हेतु SDRF और NDRF का उपयोग। (3) वित्तीय तंत्र: SDRF से इनपुट सहायता के मानदंड राज्य सरकारें और केंद्र द्वारा तय मानदंडों के अनुसार देती हैं; PMFBY के अंतर्गत स्थानीय आपदाओं (जैसे जलभराव) से व्यक्तिगत खेत स्तर की हानि तथा चक्रवात/बेमौसम वर्षा से कटाई-उपरांत हानि (फसल कटने के बाद कुछ दिनों तक खेत में रखी फसल) को कवर करने का प्रावधान; दावा-निपटान में फसल कटाई प्रयोग (Crop Cut Experiments) की भूमिका। (4) समालोचना: राहत का प्रायः आपदा-उपरांत स्वरूप; सूचना और सत्यापन में विलंब; बीमा दावों में देरी, कम पंजीकरण और सर्वेक्षण की सीमाएँ; किसानों की ऋण-निर्भरता। (5) कटाई-उपरांत गुणवत्ता: अंकुरण, दाना-विकृति और सूक्ष्म-जीव संक्रमण से अनाज की गुणवत्ता घटती है; खाद्य सुरक्षा के संदर्भ में FCI के गुणवत्ता मानदंड (FAQ) और खरीद-पूर्व गुणवत्ता जाँच का प्रभाव; अधिकांश बीमा या राहत तंत्र मात्रा-हानि पर केंद्रित हैं, गुणवत्ता-हानि पर कम। (6) समाधान: एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन (IPM) के तहत आवश्यकता पर ही कीटनाशक का प्रयोग; KVK और ICAR के माध्यम से जलवायु-सहिष्णु किस्में व जल निकासी; समय पर पूर्वानुमान और चेतावनी प्रणाली; अमर्त्य सेन के हक-दृष्टिकोण (Entitlement Approach) के आधार पर किसान की आय-सुरक्षा का तर्क। (7) निष्कर्ष: तंत्र की संरचना मौजूद है, पर क्रियान्वयन, समयबद्धता और गुणवत्ता-हानि के समावेश में सुधार आवश्यक है।

स्रोत: The Hindu

Andhra Pradesh PCS (APPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: गुंटूर जिले में चक्रवात प्रभावित धान के खेतों का निरीक्षण करते हुए, किस अधिकारी ने किसानों को सहायता का आश्वासन दिया?

  1. A. गुंटूर पुलिस अधीक्षक
  2. B. गुंटूर कलेक्टर
  3. C. गुंटूर जिला न्यायाधीश
  4. D. गुंटूर जिला पंचायत प्रमुख

उत्तर: B. गुंटूर कलेक्टर — गुंटूर कलेक्टर द्वारा चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर किसानों को सहायता का आश्वासन दिया गया।

Mains: गुंटूर जिले में चक्रवात के कारण धान की फसल को हुए नुकसान से प्रभावित किसानों को राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सहायता एवं पुनर्वास उपायों का वर्णन कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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