वायु सेना के नए उप प्रमुख: एयर मार्शल इंदरपाल सिंह वालिया की नियुक्ति

वायु सेना के नए उप प्रमुख: एयर मार्शल इंदरपाल सिंह वालिया की नियुक्ति

वायु सेना के नए उप प्रमुख: एयर मार्शल इंदरपाल सिंह वालिया की नियुक्ति

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वायु सेना उप प्रमुख नियुक्ति प्रक्रिया

✎ उप वायु सेना प्रमुख (VCAS) भारतीय वायु सेना में वायु सेना प्रमुख के बाद दूसरा सर्वोच्च पद है, और सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमान अनुच्छेद 53(2) के अंतर्गत राष्ट्रपति में निहित है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — राजव्यवस्था (संघ की कार्यपालिका, सशस्त्र बलों पर संवैधानिक नियंत्रण)  |  GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा एवं रक्षा (भारतीय वायु सेना की संरचना और रक्षा सुधार)
  • Prelims: उप वायु सेना प्रमुख (Vice Chief of the Air Staff, VCAS), वायु सेना प्रमुख (Chief of the Air Staff, CAS), अनुच्छेद 53 (संघ की कार्यपालिका शक्ति और रक्षा बलों की सर्वोच्च कमान), वायु मार्शल (Air Marshal) और एयर चीफ मार्शल (Air Chief Marshal) — रैंक संरचना, वायु सेना अधिनियम, 1950 (Air Force Act, 1950), भारतीय वायु सेना दिवस — 8 अक्टूबर (1932 में स्थापना), मुख्यालय — वायु भवन, नई दिल्ली, रक्षा प्रमुखों की समिति (Chiefs of Staff Committee) और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS)
  • Essay: सशस्त्र बलों पर नागरिक नियंत्रण और लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व, सैन्य नेतृत्व की निरंतरता और संस्थागत सुदृढ़ता: भारत में रक्षा सुधारों की दिशा

त्वरित पुनरावृत्ति: उप वायु सेना प्रमुख (VCAS) भारतीय वायु सेना में वायु सेना प्रमुख के बाद दूसरा सर्वोच्च पद है, और सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमान अनुच्छेद 53(2) के अंतर्गत राष्ट्रपति में निहित है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

भारत सरकार ने एयर मार्शल इंद्रपाल सिंह वालिया की उप वायु सेना प्रमुख के पद पर नियुक्ति की घोषणा की है। वायु सेना में उप वायु सेना प्रमुख वायु सेना प्रमुख के बाद दूसरा सबसे वरिष्ठ पद है और वह प्रमुख के प्रशासनिक एवं परिचालन कार्यों में सहयोग करता है। ऐसी नियुक्तियाँ सशस्त्र बलों के शीर्ष नेतृत्व की निरंतरता सुनिश्चित करती हैं, इसलिए परीक्षा की दृष्टि से इनका संवैधानिक और संस्थागत पक्ष महत्त्वपूर्ण है। समाचार का मुख्य तथ्य केवल नियुक्ति है; इसके अतिरिक्त किसी नीतिगत या विवादास्पद पहलू का उल्लेख स्रोत में नहीं है।

पृष्ठभूमि

  • भारतीय वायु सेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी और इसी तिथि को वायु सेना दिवस मनाया जाता है।
  • भारत में सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमान अनुच्छेद 53(2) के अंतर्गत राष्ट्रपति में निहित है, और इसके प्रयोग का नियमन विधि द्वारा किया जाता है।
  • सशस्त्र बलों के प्रमुखों की नियुक्ति सामान्यतः सरकार द्वारा की जाती है, और इसमें मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (Appointments Committee of the Cabinet) की भूमिका होती है।
  • वर्ष 2019 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का पद सृजित किया गया, जो तीनों सेनाओं के बीच समन्वय के लिए उत्तरदायी है।
  • वायु सेना के प्रशासन और अनुशासन का विधिक आधार वायु सेना अधिनियम, 1950 है।

उप वायु सेना प्रमुख का पद क्या है?

  • उप वायु सेना प्रमुख भारतीय वायु सेना में वायु सेना प्रमुख के बाद दूसरे सबसे वरिष्ठ अधिकारी होते हैं।
  • यह पद सामान्यतः वायु मार्शल (Air Marshal) रैंक का होता है, जो तीन-सितारा (three-star) रैंक है।
  • वायु सेना प्रमुख का पद चार-सितारा रैंक का होता है, जिसे एयर चीफ मार्शल कहा जाता है।
  • वायु सेना प्रमुख की अनुपस्थिति या रिक्ति की स्थिति में उप वायु सेना प्रमुख प्रशासनिक और परिचालन दायित्वों का निर्वहन करते हैं।
  • वायु सेना का मुख्यालय नई दिल्ली में वायु भवन में स्थित है, जहाँ से वायु सेना के प्रशासन, परिचालन और नीति का समन्वय होता है।
  • सशस्त्र बलों के अधिकारी संविधान के अधीन कार्य करते हैं, और उनके कार्य व कर्तव्य सेना से संबंधित विधियों तथा सरकारी निर्देशों से नियंत्रित होते हैं।
  • सशस्त्र बलों पर संसदीय उत्तरदायित्व संसद की रक्षा संबंधी स्थायी समिति (Standing Committee on Defence) तथा बजट और नीति-चर्चाओं के माध्यम से सुनिश्चित होता है।
  • परीक्षा के लिए स्मरण रखें: उप वायु सेना प्रमुख का पद वायु सेना की प्रशासनिक श्रृंखला का दूसरा सर्वोच्च पद है, न कि उसका स्वतंत्र शीर्ष पद।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
पद की स्थिति वायु सेना उप प्रमुख (Vice Chief of the Air Staff) वायु सेना में प्रमुख के बाद सर्वोच्च पद है। यह पद वायु सेना प्रमुख की अनुपस्थिति में कमान संभालने की व्यवस्था सुनिश्चित करता है।
नियुक्ति प्रक्रिया ऐसी नियुक्तियाँ मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (Appointments Committee of the Cabinet) के अनुमोदन से होती हैं और राष्ट्रपति के नाम से आदेश जारी किए जाते हैं। इससे सैन्य नेतृत्व पर निर्वाचित सरकार का संवैधानिक नियंत्रण बना रहता है।
सेवा का विधिक आधार भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) वायु सेना अधिनियम, 1950 के अंतर्गत संचालित होती है। इस अधिनियम में अधिकारियों की सेवा शर्तों, पदोन्नति और अनुशासन के प्रावधान हैं।
उच्च रक्षा संरचना में भूमिका वायु सेना उप प्रमुख सेना प्रमुखों की समिति (Chiefs of Staff Committee) के सदस्य होते हैं। यह समिति तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्त योजना में सहायक होती है।
संवैधानिक ढाँचा अनुच्छेद 53 के अंतर्गत संघ की रक्षा सेनाओं की सर्वोच्च कमान राष्ट्रपति में निहित है। इसका व्यावहारिक अर्थ है कि सैन्य नेतृत्व के स्तर पर भी असैनिक नियंत्रण लागू रहता है।

महत्व

रणनीतिक और रक्षा महत्व

  • वायु सेना उप प्रमुख के रूप में नियुक्ति से वायु शक्ति के नेतृत्व में निरंतरता बनी रहती है, जो सीमा पर परिचालन तत्परता के लिए आवश्यक है।
  • तीनों सेनाओं की समिति में वायु सेना का प्रतिनिधित्व सामरिक नीति-निर्माण और संयुक्त योजना को प्रभावित करता है।

संस्थागत और शासन संबंधी महत्व

  • उच्च सैन्य पदों पर नियुक्ति की स्पष्ट प्रक्रिया से सैन्य नेतृत्व में पारदर्शिता और उत्तराधिकार की व्यवस्था मज़बूत होती है।
  • यह नियुक्ति दिखाती है कि अनुच्छेद 53 के अंतर्गत सर्वोच्च कमान और मंत्रिमंडल के माध्यम से असैनिक नियंत्रण की संवैधानिक व्यवस्था कार्यरत है।

परिचालन और तकनीकी महत्व

  • भारतीय वायु सेना की आधुनिकीकरण योजनाओं, वायु रक्षा और निगरानी क्षमताओं के विकास में उप प्रमुख की भूमिका सीधे प्रभावी होती है।
  • वायु सेना में प्रशिक्षण, मानव संसाधन और सेवा-कल्याण से जुड़े निर्णयों में भी यह पद केंद्रीय भूमिका निभाता है।

चुनौतियाँ

1. नेतृत्व में निरंतरता बनाए रखना

  • वायु सेना प्रमुख और उप प्रमुख के बीच समन्वय न होने पर परिचालन निर्णयों में विलंब हो सकता है।
  • वरिष्ठता, सेवानिवृत्ति आयु और कार्यकाल के बीच संतुलन बनाना एक प्रशासनिक चुनौती है।

2. स्क्वाड्रन संख्या में कमी

  • वायु सेना की स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन की तुलना में उपलब्ध स्क्वाड्रन संख्या कम रही है, जिससे क्षमता-विस्तार की आवश्यकता बनी हुई है।
  • पुराने विमानों की सेवा-निवृत्ति और नए विमानों के समयबद्ध अधिग्रहण में देरी से परिचालन संतुलन पर दबाव बढ़ता है।

3. संयुक्त सैन्य संरचना का प्रश्न

  • तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता बढ़ाने के लिए थिएटर कमान जैसे प्रस्तावों पर विचार चल रहा है, जिसमें अंतर-सेवा समन्वय की व्यावहारिक चुनौतियाँ हैं।
  • वायु शक्ति के संसाधनों का साझा उपयोग तथा सेवा-विशिष्ट प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाना कठिन होता है।

4. असैनिक-सैन्य संबंधों में संतुलन

  • सैन्य नेतृत्व की स्वायत्तता और निर्वाचित सरकार के नियंत्रण के बीच संतुलन संवैधानिक ढाँचे में बनाए रखना आवश्यक है।
  • नीति-निर्माण में सैन्य परामर्श और रक्षा मंत्रालय की भूमिका के बीच स्पष्ट कार्य-विभाजन की आवश्यकता रहती है।

5. सेवा-कल्याण और मानव संसाधन

  • पायलट और तकनीकी कर्मियों की कमी से परिचालन क्षमता पर असर पड़ता है।
  • सैन्य कर्मियों के सेवा-कल्याण, आवास और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
नेतृत्व निरंतरता प्रमुख और उप प्रमुख के बीच समन्वय में कमी से परिचालन निर्णयों में विलंब की आशंका।
स्क्वाड्रन संख्या स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन की तुलना में उपलब्ध संख्या कम, जिससे क्षमता पर दबाव।
अधिग्रहण में देरी नए विमानों और प्रणालियों की समयबद्ध खरीद में विलंब से आधुनिकीकरण प्रभावित।
संयुक्तता थिएटर कमान जैसे सुधारों पर अंतर-सेवा सहमति और कार्य-विभाजन की चुनौती।
असैनिक-सैन्य संतुलन सैन्य स्वायत्तता और संवैधानिक नियंत्रण के बीच स्पष्ट सीमा बनाए रखने की आवश्यकता।

आगे की राह

  • स्वीकृत स्क्वाड्रन संख्या तक पहुँचने के लिए विमान अधिग्रहण की समय-सारणी का नियमित मूल्यांकन किया जाए।
  • स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देकर विमान और रखरखाव की क्षमता आंतरिक स्तर पर विकसित की जाए।
  • तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त योजना और प्रशिक्षण को संस्थागत रूप दिया जाए।
  • थिएटर कमान जैसे सुधारों पर व्यापक परामर्श और स्पष्ट विधिक ढाँचा तैयार किया जाए।
  • वायु सेना के पायलट और तकनीकी कर्मियों की भर्ती, प्रशिक्षण और धारण (retention) नीति को सुदृढ़ किया जाए।
  • उच्च सैन्य पदों पर नियुक्ति और उत्तराधिकार की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखा जाए।
  • असैनिक-सैन्य समन्वय के लिए रक्षा मंत्रालय और सेना मुख्यालय के बीच नियमित संस्थागत संवाद सुनिश्चित किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वायु सेना उप प्रमुख (Vice Chief of the Air Staff) · सशस्त्र बल (Armed Forces) · रक्षा प्रमुख (Chief of Defence Staff) · एकीकृत संचालन (Integrated Operations) · सैन्य नागरिक संबंध (Civil-Military Relations) · अनुच्छेद 53 (Article 53) · सर्वोच्च कमान (Supreme Command) · भारतीय वायु सेना अधिनियम, 1950 (Air Force Act, 1950) · चीफ्स ऑफ स्टाफ समिति (Chiefs of Staff Committee) · रक्षा मंत्रालय में सैन्य मामलों का विभाग (Department of Military Affairs) · थिएटर कमान (Theatre Command) · संसदीय निगरानी (Parliamentary Oversight)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 53: राष्ट्रपति सर्वोच्च सेनापति, असैनिक नियंत्रण का आधार
  • अनुच्छेद 77: राष्ट्रपति के नाम पर नियुक्ति आदेशों का प्रमाणीकरण

अवधारणा प्रवाह

मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति द्वारा वायु सेना उप प्रमुख के पद पर नियुक्ति का अनुमोदन  →  राष्ट्रपति के नाम से नियुक्ति आदेश जारी (अनुच्छेद 77 की प्रक्रिया के अनुसार)  →  वायु सेना उप प्रमुख के रूप में नए अधिकारी का पदभार ग्रहण  →  सेना प्रमुखों की समिति में वायु सेना का प्रतिनिधित्व और संयुक्त योजना में भागीदारी  →  वायु सेना प्रमुख के साथ परिचालन तत्परता, अधिग्रहण और मानव संसाधन पर निर्णय  →  रक्षा मंत्रालय के माध्यम से सरकार की रक्षा नीति में वायु शक्ति का समावेश

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. भारत में सशस्त्र बलों के शीर्ष नेतृत्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रक्षा प्रमुख (CDS) चीफ्स ऑफ स्टाफ समिति का अध्यक्ष होता है।
2. वायु सेना उप प्रमुख चीफ्स ऑफ स्टाफ समिति का स्थायी सदस्य होता है।
3. तीनों सेवाओं के प्रमुख इस समिति के सदस्य होते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: रक्षा प्रमुख को 2019 में सृजित किया गया और वह चीफ्स ऑफ स्टाफ समिति का अध्यक्ष होता है। कथन 2 गलत है: वायु सेना उप प्रमुख इस समिति का स्थायी सदस्य नहीं होता; स्थायी सदस्य तीनों सेवा प्रमुख होते हैं। कथन 3 सही है: थलसेना, नौसेना और वायु सेना के प्रमुख इसके सदस्य होते हैं। अतः उत्तर ‘केवल दो’ है।

Q2. निम्नलिखित में से दो कथनों पर विचार कीजिए, एक कथन अभिकथन (A) है और दूसरा कारण (R) है:
अभिकथन (A): राष्ट्रपति भारत के रक्षा बलों के सर्वोच्च सेनापति होते हैं।
कारण (R): संविधान के अनुच्छेद 53(2) के अंतर्गत संघ की रक्षा बलों की सर्वोच्च कमान राष्ट्रपति में निहित है, जिसका प्रयोग विधि के अनुसार किया जाएगा।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, परंतु (R) सही है।

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — अनुच्छेद 53(1) संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित करता है और अनुच्छेद 53(2) के अनुसार रक्षा बलों की सर्वोच्च कमान राष्ट्रपति में होती है। यह कमान विधि के अनुसार प्रयोग की जाती है, इसलिए कारण अभिकथन की सही व्याख्या है। व्यवहार में राष्ट्रपति यह शक्ति मंत्रिपरिषद की सलाह पर प्रयोग करते हैं।

Q3. निम्नलिखित सूची-I (संविधान के अनुच्छेद) को सूची-II (विषय) से सुमेलित कीजिए:

सूची-I
A. अनुच्छेद 53
B. अनुच्छेद 75
C. अनुच्छेद 148

सूची-II
1. भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
2. मंत्रिपरिषद का संसद के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व
3. संघ की कार्यपालिका शक्ति और रक्षा बलों की सर्वोच्च कमान

सही सुमेलन चुनिए:

  1. A-3, B-2, C-1
  2. A-2, B-3, C-1
  3. A-3, B-1, C-2
  4. A-1, B-2, C-3

उत्तर: A-3, B-2, C-1 — अनुच्छेद 53 संघ की कार्यपालिका शक्ति और रक्षा बलों की सर्वोच्च कमान से संबंधित है (A-3)। अनुच्छेद 75 में मंत्रिपरिषद का लोकसभा के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व वर्णित है (B-2)। अनुच्छेद 148 नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की नियुक्ति से संबंधित है (C-1)।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ वायु सेना उप प्रमुख जैसे पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया सशस्त्र बलों की सेवा-वार संरचना को किस प्रकार प्रभावित करती है, इसकी विवेचना कीजिए। क्या रक्षा प्रमुख के सृजन और संयुक्तता की दिशा में हुए सुधारों ने सैन्य नागरिक संबंधों में संतुलन स्थापित किया है? संसदीय निगरानी और नागरिक नियंत्रण के संदर्भ में तर्क दीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल उत्तर कंकाल (Model-Answer Skeleton):

1. संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 53(1) के अंतर्गत संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है; अनुच्छेद 53(2) के अनुसार रक्षा बलों की सर्वोच्च कमान राष्ट्रपति के पास है, जिसका प्रयोग विधि के अनुसार होता है। अनुच्छेद 33 और 73 के अंतर्गत सशस्त्र बलों से जुड़ी संसदीय और संघीय शक्तियों का उल्लेख करें।

2. वैधानिक ढाँचा: थलसेना अधिनियम, 1950 (Army Act, 1950), नौसेना अधिनियम, 1957 (Navy Act, 1957) और भारतीय वायु सेना अधिनियम, 1950 (Air Force Act, 1950) के अंतर्गत सेवा-वार अनुशासन और नियुक्ति व्यवस्था। उप प्रमुख की भूमिका वायु सेना प्रमुख के सहायक के रूप में और प्रमुख की अनुपस्थिति में दायित्व-निर्वहन के संदर्भ में।

3. सुधार की पृष्ठभूमि: कारगिल समीक्षा समिति (1999, के. सुब्रह्मण्यम अध्यक्ष), मंत्री समूह (Group of Ministers, 2001), नरेश चंद्र कार्य दल (Naresh Chandra Task Force, 2011) की सिफारिशें और लेफ्टिनेंट जनरल डी. बी. शेकतकर समिति (2016) की रिपोर्ट।

4. वर्तमान संरचना: रक्षा प्रमुख का पद (2019 में सृजित), सैन्य मामलों का विभाग (DMA) रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत, एकीकृत रक्षा स्टाफ (IDS) और अंडमान-निकोबार कमान (2001) जैसी त्रि-सेवा इकाइयाँ।

5. पक्ष: संयुक्तता से संसाधन-उपयोग, निर्णय-प्रक्रिया में सुधार, एकीकृत संचालन की क्षमता और नागरिक नियंत्रण की सुदृढ़ता के तर्क।

6. विपक्ष/चिंताएँ: प्रस्तावित थिएटर कमान में वायु शक्ति के केंद्रीकरण और वायु सेना की स्वतंत्र शक्ति-संरचना पर आशंकाएँ; सेवा-प्रमुखों की स्वायत्तता, सेवा-मूल-संस्कृति और कमान-श्रृंखला पर प्रभाव।

7. संसदीय निगरानी: रक्षा संबंधी स्थायी समिति, प्रश्नकाल और बजट-जाँच, लेखा परीक्षा (CAG) की भूमिका; नागरिक सर्वोच्चता के सिद्धांत की व्याख्या।

8. निष्कर्ष: सुधारों की दिशा में संतुलित मत, जिसमें संयुक्तता और सेवा-विशिष्टता के बीच समन्वय तथा नागरिक नियंत्रण की संस्थागत सुदृढ़ता पर बल हो।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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