31 Oct विशेष अभियान 6.0: आईसीएआर द्वारा स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन अभियान में तेजी
✎ विशेष अभियान 6.0 में स्रोत पर कचरा पृथक्करण, ई-अपशिष्ट और धातु-प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक निपटान, 3R सिद्धांत तथा डिजिटलीकरण पर बल है, जो सरकारी संस्थानों में स्वच्छता को संस्थागत आदत बनाने का प्रयास है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण (ठोस अपशिष्ट, ई-अपशिष्ट और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन; 3R सिद्धांत) | GS Paper II — शासन (सरकारी कार्यालयों में प्रशासनिक सुधार, डिजिटलीकरण और अभिलेख प्रबंधन; केंद्र सरकार के स्वायत्त संस्थानों की भूमिका) | GS Paper III — कृषि (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की संस्थागत संरचना और कार्य)
- Prelims: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE), स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission), ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 (E-Waste (Management) Rules, 2022), ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 (Solid Waste Management Rules, 2016), प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 (Plastic Waste Management Rules, 2016), विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility — EPR), 3R सिद्धांत: कमी करना, पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण
- Essay: ‘स्वच्छता आदत बने, केवल अभियान नहीं’: सार्वजनिक संस्थानों में स्वच्छता संस्कृति का निर्माण, सरकारी कार्यालयों में अपशिष्ट प्रबंधन और डिजिटलीकरण: दक्ष शासन की ओर कदम
त्वरित पुनरावृत्ति: विशेष अभियान 6.0 में स्रोत पर कचरा पृथक्करण, ई-अपशिष्ट और धातु-प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक निपटान, 3R सिद्धांत तथा डिजिटलीकरण पर बल है, जो सरकारी संस्थानों में स्वच्छता को संस्थागत आदत बनाने का प्रयास है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने ‘विशेष अभियान 6.0’ को तेज़ किया है। इसका उद्देश्य अपने संस्थानों और कार्यालय परिसरों में स्वच्छता, स्थायी अपशिष्ट प्रबंधन और बेहतर कार्य वातावरण सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत कचरे का पृथक्करण और वैज्ञानिक निपटान, इस्तेमाल योग्य सामग्री का पुनः उपयोग, ई-कचरा और कबाड़ का निपटान, अभिलेख प्रबंधन, डिजिटलीकरण और पौधारोपण जैसे कार्य शामिल हैं। संस्थानों ने परिसर और आसपास के गंदगी-प्रवण स्थानों की पहचान कर उन्हें साफ़ किया, जागरूकता शिविर और निःशुल्क चिकित्सा शिविर लगाए, तथा खेतों और आसपास की सड़कों पर सफ़ाई अभियान चलाया। सभी स्तर के अधिकारियों की भागीदारी और धातु व प्लास्टिक कचरे को सामान्य कचरे से अलग रखने पर विशेष बल दिया गया है। यह समाचार प्रधानतः प्रशासनिक और पर्यावरणीय व्यवहार से जुड़ा है, इसलिए परीक्षा की दृष्टि से इसे सरकारी संस्थानों में अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्थित प्रक्रिया के रूप में समझना उपयोगी है।
पृष्ठभूमि
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एक स्वायत्त संस्था है जो कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के माध्यम से कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है। देश भर में इसके अनेक अनुसंधान संस्थान, कृषि विश्वविद्यालय और क्षेत्रीय केंद्र हैं।
- स्वच्छ भारत मिशन का आरंभ 2 अक्टूबर 2014 को हुआ था, जिसने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में खुले में शौच से मुक्ति, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और जन-जागरूकता पर बल दिया। सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता के लिए समय-समय पर ‘विशेष अभियान’ की शृंखला चलती रही है, जिसका यह अगला चरण है।
- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अंतर्गत कचरे को गीले, सूखे और घरेलू खतरनाक श्रेणियों में अलग करने और स्रोत पर ही पृथक्करण की व्यवस्था है। प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 और ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 में उत्पादकों पर विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व की व्यवस्था की गई है।
- भारत में ई-अपशिष्ट का निपटान अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं के माध्यम से किया जाना अनिवार्य है, क्योंकि अनुचित तरीके से जलाने या तोड़ने से भूमि, जल और वायु प्रदूषण होता है तथा स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
- सरकारी कार्यालयों में अभिलेखों का डिजिटलीकरण और कागज़ का कम उपयोग प्रशासनिक दक्षता और पर्यावरणीय संरक्षण, दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
विशेष अभियान 6.0 क्या है?
- विशेष अभियान 6.0 केंद्र सरकार के संस्थानों में स्वच्छता और कार्यालय सुधार पर केंद्रित एक समयबद्ध अभियान है, जिसे इस मामले में DARE/ICAR ने अपने संस्थानों में लागू किया है।
- इसके मुख्य घटक हैं: कचरे का स्रोत पर पृथक्करण, वैज्ञानिक निपटान, इस्तेमाल योग्य सामग्री का पुनः उपयोग और कबाड़ का व्यवस्थित निपटान।
- ई-अपशिष्ट प्रबंधन के अंतर्गत पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अधिकृत संग्राहकों और पुनर्चक्रणकर्ताओं को सौंपना आवश्यक है।
- धातु और प्लास्टिक कचरे को सामान्य कचरे से अलग रखना पुनर्चक्रण की दक्षता बढ़ाता है और निपटान की लागत घटाता है।
- अभिलेख प्रबंधन और डिजिटलीकरण से कागज़ की खपत घटती है, फ़ाइलों की खोज आसान होती है और कार्यालय का वातावरण अधिक व्यवस्थित बनता है।
- पौधारोपण, परिसर के सौंदर्यीकरण और गलियारों की सफ़ाई से कार्यस्थल का वातावरण बेहतर होता है तथा कर्मचारियों और आगंतुकों में स्वच्छता की आदत विकसित होती है।
- जागरूकता शिविर, निःशुल्क चिकित्सा शिविर और सफ़ाई मित्रों का सम्मान इस अभियान के सामाजिक आयाम हैं, जो कर्मचारियों, किसानों और स्थानीय समुदाय को जोड़ते हैं।
- 3R सिद्धांत (कमी करना, पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण) इस अभियान की मूल अवधारणा है, जो सतत अपशिष्ट प्रबंधन का आधार है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अभियान का स्वरूप | कार्यालय परिसर, परिसर के आसपास के खेतों और सड़कों तक सफाई का व्यापक कार्यक्रम; अपशिष्ट के पृथक्करण और उचित निपटान पर बल |
| धातु, प्लास्टिक एवं ई-अपशिष्ट (E-Waste) | सामान्य अपशिष्ट से अलग संग्रह से पुनर्चक्रण और अधिकृत निपटान संभव होता है |
| रिकॉर्ड प्रबंधन एवं डिजिटलीकरण | कागज़ी अपशिष्ट में कमी आती है और प्रशासनिक दक्षता बढ़ती है |
| जागरूकता एवं सामुदायिक भागीदारी | कर्मचारी, किसान और स्थानीय लोगों को स्वच्छता के महत्व से जोड़ा जाता है |
| पौधारोपण एवं पर्यावरण-अनुकूल आचरण | हरित परिसर का विकास होता है और पारिस्थितिक संतुलन को सहारा मिलता है |
| संस्थागत संदर्भ | भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research, ICAR) के अधीन संस्थानों, जैसे केंद्रीय शीतोष्ण बागवानी संस्थान, श्रीनगर में लागू |
महत्व
प्रशासनिक एवं शासकीय महत्व
- सार्वजनिक संस्थाओं में कार्य-संस्कृति और कार्यालय वातावरण को व्यवस्थित करने का व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत होता है
- हर स्तर के अधिकारियों की भागीदारी से नेतृत्व-आधारित जवाबदेही को बल मिलता है
- रिकॉर्ड प्रबंधन और डिजिटलीकरण से सूचना की पुनःप्राप्ति और पारदर्शिता बढ़ती है
पर्यावरणीय महत्व
- ठोस अपशिष्ट का स्रोत पर पृथक्करण पुनरुपयोग और पुनर्चक्रण की नींव है
- ई-अपशिष्ट में सीसा और पारा जैसे विषैले तत्व होते हैं, इसलिए उसका वैज्ञानिक निपटान भूमि और जल की सुरक्षा से जुड़ा है
- पौधारोपण और हरित परिसर से स्थानीय जैव-विविधता और सूक्ष्म-जलवायु पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है
कृषि एवं ग्रामीण महत्व
- खेतों और उनके आसपास की सड़कों की सफाई से मृदा और जल स्रोतों के प्रदूषण की रोकथाम होती है
- कृषि संस्थानों द्वारा किसानों तक स्वच्छता संदेश पहुँचाना प्रसार-सेवाओं की भूमिका को दर्शाता है
सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्व
- निःशुल्क चिकित्सा शिविर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच को स्थानीय स्तर तक ले जाते हैं
- अपशिष्ट का खुला जमाव मच्छर-जनित और जल-जनित रोगों का स्रोत बन सकता है, इसलिए उसका नियंत्रण रोग-निवारण से जुड़ा है
चुनौतियाँ
1. ई-अपशिष्ट का वैज्ञानिक निपटान
- ई-अपशिष्ट (E-Waste) (Management) नियम, 2022 के अनुसार उपभोक्ता और संस्थान ऐसा अपशिष्ट अधिकृत उत्पादकों या पुनर्चक्रकों को सौंपने के लिए बाध्य हैं
- अनौपचारिक क्षेत्र में खुले में जलाने और तोड़ने से विषैली गैसें और भारी धातुएँ निकलती हैं
- संस्थानों के पास निपटान का प्रमाण और रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था न हो तो नियम-पालन की जाँच कठिन हो जाती है
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी; नियामक ढाँचा
2. अभियान बनाम स्थायी व्यवहार-परिवर्तन
- विशेष अभियानों के दौरान सफाई तीव्र होती है, परंतु उसके बाद व्यवहार पुराने ढर्रे पर लौट सकता है
- स्थायी अपशिष्ट प्रबंधन के लिए नियमित निगरानी, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन की संस्थागत व्यवस्था आवश्यक है
- परिणामों को मापने के स्पष्ट संकेतक न होने से अभियान की प्रभावशीलता का आकलन कठिन होता है
यूपीएससी लिंक: सुशासन; लोक प्रशासन में प्रदर्शन-मूल्यांकन
3. स्रोत पर पृथक्करण में व्यवहारगत बाधाएँ
- पृथक्करण की समझ, प्रशिक्षण और अलग कूड़ेदानों की उपलब्धता के बिना मिश्रित अपशिष्ट बना रहता है
- सुविधाओं की कमी और जागरूकता के अभाव में कर्मचारी भी नियमों का पालन नहीं कर पाते
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे; जन-भागीदारी और शासन
4. अधिकार-क्षेत्र और स्थानीय समन्वय
- परिसर के बाहर के खेत और सड़कें स्थानीय निकायों या पंचायतों के अधिकार-क्षेत्र में आ सकती हैं
- बाहरी क्षेत्र में सफाई के बाद अपशिष्ट का निपटान किसके द्वारा होगा, यह स्पष्ट न हो तो समस्या पुनः उत्पन्न होती है
यूपीएससी लिंक: स्थानीय शासन; पंचायती राज और नगरपालिका व्यवस्था
5. डिजिटलीकरण का पर्यावरणीय पक्ष
- कागज़ी अपशिष्ट घटता है, परंतु कंप्यूटर और उपकरणों का जीवनचक्र पूरा होने पर ई-अपशिष्ट बढ़ता है
- उपकरणों के पुनरुपयोग, मरम्मत और उचित निपटान की नीति के बिना डिजिटल प्रगति नया पर्यावरणीय दबाव बनाती है
यूपीएससी लिंक: विकास और पर्यावरण; सतत विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| ई-अपशिष्ट का निपटान | अनौपचारिक क्षेत्र में असुरक्षित प्रसंस्करण से मृदा और वायु प्रदूषण का खतरा |
| अभियान की निरंतरता | विशेष अभियान के बाद सफाई का स्तर गिरने की संभावना |
| स्रोत पर पृथक्करण | प्रशिक्षण और सुविधाओं के अभाव में मिश्रित अपशिष्ट की समस्या |
| अधिकार-क्षेत्र | परिसर के बाहर की सफाई और निपटान की जिम्मेदारी का अस्पष्ट होना |
| परिणाम मापन | स्पष्ट संकेतकों के अभाव में प्रभाव का वस्तुनिष्ठ आकलन कठिन |
आगे की राह
- स्रोत पर अपशिष्ट पृथक्करण के लिए मानक प्रक्रिया और अलग संग्रह-व्यवस्था सभी संस्थानों में एक समान रूप से लागू की जाए
- ई-अपशिष्ट के निपटान का मात्रा-वार रिकॉर्ड और अधिकृत पुनर्चक्रकों से लिया गया प्रमाण-पत्र अनिवार्य रूप से रखा जाए
- कबाड़ और पुराने उपकरणों के पुनरुपयोग एवं निपटान की स्पष्ट नीति बनाई जाए
- अभियान की प्रगति मापने के लिए पृथक्कृत अपशिष्ट की मात्रा, पुनर्चक्रित सामग्री और शिकायत-निवारण जैसे संकेतक तय किए जाएँ
- परिसर के बाहर के क्षेत्रों में पंचायत और नगर निकायों के साथ लिखित समन्वय से जिम्मेदारी का स्पष्ट विभाजन हो
- कर्मचारियों और सफाई मित्रों के लिए नियमित प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण और उचित कार्य-दशाएँ सुनिश्चित की जाएँ
- कागज़ रहित कार्यालय की दिशा में डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली के साथ उपकरणों के जीवनचक्र प्रबंधन की योजना बनाई जाए
- पौधारोपण में स्थानीय और देशी प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाए ताकि हरित परिसर पारिस्थितिक दृष्टि से भी लाभकारी हो
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
ई-अपशिष्ट प्रबंधन (E-waste Management) · विस्तारित उत्पादक दायित्व (Extended Producer Responsibility) · परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) · 3R सिद्धांत (Reduce, Reuse, Recycle) · ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 (Solid Waste Management Rules, 2016) · पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 (Environment (Protection) Act, 1986) · अनुच्छेद 48A, 51A(g) एवं अनुच्छेद 21 का पर्यावरणीय विस्तार · राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal) · स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) · सार्वजनिक संस्थानों में शासन-आधारित स्वच्छता · भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) · व्यवहार परिवर्तन और सामुदायिक भागीदारी
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 48A: पर्यावरण संरक्षण और वन-वन्यजीव सुरक्षा का राज्य का दायित्व
- अनुच्छेद 51A(छ): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार का मौलिक कर्तव्य
अवधारणा प्रवाह
कार्यालय और परिसर में अपशिष्ट की पहचान तथा गंदगी वाले स्थानों का सर्वेक्षण → स्रोत पर अपशिष्ट का पृथक्करण: धातु, प्लास्टिक, ई-अपशिष्ट और सामान्य अपशिष्ट अलग-अलग → पृथक्कृत सामग्री का पुनरुपयोग, पुनर्चक्रण या अधिकृत एजेंसी द्वारा निपटान → रिकॉर्ड प्रबंधन और डिजिटलीकरण से कागज़ी अपशिष्ट में कमी और प्रशासनिक पारदर्शिता में वृद्धि → जागरूकता शिविरों और सामुदायिक भागीदारी से कर्मचारियों, किसानों और स्थानीय लोगों के व्यवहार में परिवर्तन → निरंतर निगरानी और संकेतकों से स्थायी अपशिष्ट प्रबंधन तथा सुव्यवस्थित कार्य-वातावरण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण की रक्षा और सुधार तथा वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा का निर्देश देता है।
2. मौलिक कर्तव्यों में अनुच्छेद 51A(g) के अंतर्गत प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और उसमें सुधार करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
3. मौलिक कर्तव्यों को अनुच्छेद 32 के अंतर्गत न्यायालय में प्रत्यक्ष रूप से लागू कराया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। अनुच्छेद 48A और 51A(g) दोनों 42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा जोड़े गए। कथन 3 गलत है, क्योंकि मौलिक कर्तव्य न्यायोचित (Justiciable) नहीं हैं और उनके प्रवर्तन के लिए सीधे अनुच्छेद 32 की याचिका का आधार नहीं बनते; अनुच्छेद 48A राज्य नीति का निदेशक तत्व है, जो न्यायोचित नहीं है।
Q2. निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 में उत्पादकों पर विस्तारित उत्पादक दायित्व की बाध्यताएँ लागू की गई हैं।
कारण (R): विस्तारित उत्पादक दायित्व के अंतर्गत उत्पादक अपने उत्पाद के उपयोग-समाप्ति (End-of-life) चरण तक के संग्रह और पर्यावरण-सम्मत निपटान के लिए उत्तरदायी होते हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत बनाए गए हैं और उत्पादकों पर विस्तारित उत्पादक दायित्व लागू करते हैं। कारण में दी गई परिभाषा इस दायित्व का सार है, इसलिए (R) (A) की सही व्याख्या है।
Q3. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- यह संसद के किसी विशेष अधिनियम द्वारा गठित एक सांविधानिक निकाय है
- यह कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के अधीन एक स्वायत्त निकाय है
- यह पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन कार्य करता है
- यह राष्ट्रीय हरित अधिकरण का अपीलीय निकाय है
उत्तर: यह कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के अधीन एक स्वायत्त निकाय है — ICAR कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के अधीन एक स्वायत्त निकाय है, जो कृषि अनुसंधान और शिक्षा के समन्वय के लिए कार्य करता है। यह न तो संविधान द्वारा गठित है और न ही पर्यावरण मंत्रालय के अधीन है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण एक वैधानिक न्यायाधिकरण है और ICAR से उसका कोई संबंध नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ संस्थागत स्तर पर चलाए जाने वाले स्वच्छता अभियान, जैसे विशेष अभियान 6.0, तभी स्थायी सुधार ला सकते हैं जब वे कानूनी ढांचे और व्यवहार परिवर्तन से जुड़े हों। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि क्या सार्वजनिक संस्थानों के विरुद्ध स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रवर्तित कराया जा सकता है और उपलब्ध उपचार क्या हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल उत्तर संरचना: (1) भूमिका: विशेष अभियान 6.0 में कार्यालय परिसर, कचरे का पृथक्करण, धातु व प्लास्टिक कचरे का अलग रखना, ई-कचरा, कबाड़ निपटान, रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण, पौधारोपण और जागरूकता शिविरों का उल्लेख; ICAR के अधीन केंद्रीय शीतोष्ण बागवानी संस्थान, श्रीनगर का उदाहरण। (2) संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 48A (निदेशक तत्व, न्यायोचित नहीं), अनुच्छेद 51A(g) (मौलिक कर्तव्य, न्यायोचित नहीं), अनुच्छेद 21 की न्यायिक व्याख्या द्वारा स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार; सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य (1991) और एम.सी. मेहता के वाद। (3) विधिक ढांचा: पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986; ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016; प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016; ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 (विस्तारित उत्पादक दायित्व); राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के अंतर्गत अपील और क्षतिपूर्ति; सार्वजनिक सुनवाई और सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के माध्यम से जवाबदेही। (4) सैद्धांतिक ढांचा: 3R सिद्धांत, परिपत्र अर्थव्यवस्था; ग्रेडेड दृष्टि से स्रोत पर पृथक्करण बनाम अंत में निपटान। (5) समालोचना: अभियान-आधारित प्रयास (मौसमी और प्रतीकात्मक सफाई) बनाम प्रणालीगत अनुपालन; क्षमता, बजट, निगरानी के आंकड़ों की कमी; स्थायित्व के लिए कर्मचारी प्रशिक्षण, ठेका-श्रमिकों की स्थिति और वार्षिक ऑडिट की आवश्यकता। (6) दूसरा भाग: अनुच्छेद 21 के अंतर्गत रिट (अनुच्छेद 32/226), राष्ट्रीय हरित अधिकरण में वाद, मुआवजा और ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ (Polluter Pays Principle) तथा सावधानी सिद्धांत (Precautionary Principle) का प्रयोग। (7) निष्कर्ष: अभियान प्रेरक हैं, पर स्थायी सुधार के लिए विधिक बाध्यता, व्यवहार परिवर्तन और न्यायिक-प्रशासनिक निगरानी का संयोजन आवश्यक है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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