03 Nov माय भारत: ‘अपना वोट जानें’ अभियान और युवा संवाद का महत्व
✎ भारत में मताधिकार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष है (61वाँ संविधान संशोधन, 1988; अनुच्छेद 326), और युवा संवाद जैसे अभियान इसी अधिकार को सूचित सहभागिता में बदलने का प्रयास हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — राजव्यवस्था (Polity): संविधान की मूल विशेषताएँ, निर्वाचन आयोग की भूमिका और लोक प्रतिनिधित्व कानून | GS Paper II — शासन (Governance): युवाओं से संबंधित सरकारी कार्यक्रम, नागरिक सहभागिता और जागरूकता की नीतियाँ
- Prelims: अनुच्छेद 326 — वयस्क मताधिकार (Adult Suffrage) का संवैधानिक प्रावधान, 61वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1988 — मताधिकार की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष, अनुच्छेद 324 — निर्वाचन आयोग में निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951 — मतदाता सूची तथा चुनाव संचालन से संबंधित प्रावधान, निर्वाचक नामावली में नाम दर्ज कराने हेतु फॉर्म 6 (Form 6), राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल (NVSP) — मतदाता सेवाओं हेतु ऑनलाइन मंच, राष्ट्रीय मतदाता दिवस — 25 जनवरी (निर्वाचन आयोग की स्थापना की स्मृति में), व्यवस्थित मतदाता शिक्षा और निर्वाचक सहभागिता कार्यक्रम (SVEEP) — निर्वाचन आयोग की मतदाता जागरूकता पहल
- Essay: लोकतंत्र की मजबूती में युवा मतदाताओं की भूमिका: अधिकार से सहभागिता तक, सूचित नागरिकता — मतदान केवल अधिकार नहीं, कर्तव्य भी
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत में मताधिकार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष है (61वाँ संविधान संशोधन, 1988; अनुच्छेद 326), और युवा संवाद जैसे अभियान इसी अधिकार को सूचित सहभागिता में बदलने का प्रयास हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
मेरा युवा भारत (माय भारत) ने युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के युवा कार्यक्रम विभाग के अंतर्गत ‘विकसित भारत युवा संवाद: अपना वोट जानें’ अभियान के तहत 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 60 संस्करण आयोजित किए, जिनमें 11,800 से अधिक युवाओं ने भाग लिया। अभियान 26 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक चल रहा है और इसका लक्ष्य 500 विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों व शैक्षणिक संस्थानों को जोड़ना है। अब तक 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कुल 220 युवा संवाद हो चुके हैं, जिनमें 43,995 युवा तथा 220 युवा आइकन शामिल हुए। इसका उद्देश्य विशेषकर पहली बार मतदान करने वाले युवाओं में चुनावी जागरूकता बढ़ाना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी सूचित भागीदारी सुनिश्चित करना है।
पृष्ठभूमि
- भारतीय संविधान ने अनुच्छेद 326 के अंतर्गत वयस्क मताधिकार को अपनाया है, जिसके तहत प्रत्येक वयस्क नागरिक को लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मत देने का अधिकार प्राप्त है।
- 61वें संविधान संशोधन, 1988 द्वारा मताधिकार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई, जिससे बड़ी संख्या में नए युवा मतदाता निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े।
- निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचनों के संचालन और मतदाता सूची की तैयारी का दायित्व निभाता है, जबकि मतदाता जागरूकता के लिए SVEEP जैसे कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
- युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय युवाओं के कौशल विकास, नेतृत्व और नागरिक सहभागिता से जुड़े कार्यक्रम संचालित करता है, और माय भारत इसी व्यापक ढाँचे का एक मंच है।
विकसित भारत युवा संवाद क्या है?
- यह मेरा युवा भारत (माय भारत) द्वारा आयोजित एक संवाद कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य युवाओं को मतदान के अधिकार, चुनावी प्रक्रिया और नागरिक कर्तव्यों से परिचित कराना है।
- कार्यक्रम में युवाओं को निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, युवा आइकनों, खेल हस्तियों और अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों से सीधे संवाद का अवसर मिलता है।
- सत्रों में लोकतांत्रिक शपथ दिलाई जाती है, जिससे जिम्मेदार नागरिकता और सक्रिय भागीदारी के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई जाती है।
- पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के लिए मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने, निर्वाचन प्रक्रिया समझने और मतदान के महत्व पर जानकारी इसका प्रमुख घटक है।
- यह अभियान ‘अपना वोट जानें’ की थीम के साथ चलाया जा रहा है और इसका दायरा उच्च शिक्षण संस्थानों तक विस्तृत किया जा रहा है।
- यह पहल मतदाता जागरूकता को संस्थागत रूप देने का प्रयास है, जो संविधान के मूल्यों और लोकतांत्रिक शासन की सहभागी प्रकृति से जुड़ी है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| आयोजक और नोडल मंत्रालय | मेरा युवा भारत (My Bharat) ने युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के युवा कार्यक्रम विभाग के अंतर्गत यह अभियान चलाया। इससे स्पष्ट होता है कि मतदाता जागरूकता को युवा नीति के क्रियान्वयन से जोड़ा गया है। |
| अभियान का स्वरूप | युवा संवाद में युवाओं का सीधा संवाद निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, युवा आइकनों और खेल हस्तियों से होता है। इससे युवाओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया की प्रत्यक्ष जानकारी मिलती है। |
| पैमाना और पहुंच | 26 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 के बीच 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 60 संस्करण हुए, जिनमें 11,800 से अधिक युवा जुड़े। अब तक 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कुल 220 युवा संवाद हो चुके हैं, जिनमें 43,995 युवा और 220 युवा आइकन शामिल हुए। |
| लक्षित समूह | पहली बार मतदान करने वाले मतदाता इसके मुख्य लक्ष्य समूह हैं। अभियान का दायरा 500 विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। |
| सामूहिक लोकतांत्रिक शपथ | कई स्थानों पर प्रतिभागियों ने सामूहिक लोकतांत्रिक शपथ ली। यह नागरिक कर्तव्यों और सक्रिय मतदान के प्रति प्रतीकात्मक किंतु संस्थागत प्रतिबद्धता का संकेत है। |
महत्व
सांविधानिक और लोकतांत्रिक
- मतदान का अधिकार अनुच्छेद 326 के अंतर्गत वयस्क मताधिकार पर आधारित है। 61वें संविधान संशोधन (1988) द्वारा मताधिकार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई, इसलिए नए मतदाताओं की सूचित भागीदारी लोकतंत्र की गुणवत्ता से सीधे जुड़ी है।
- जनप्रतिनिधियों से संवाद नागरिकों और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच उत्तरदायित्व के संबंध को व्यावहारिक रूप देता है।
- निर्वाचन प्रक्रिया की समझ बढ़ने से मतदान प्रतिशत और मतदाता सूची में नामांकन की गुणवत्ता, दोनों में सुधार की संभावना बनती है।
शासन और नीति-प्रक्रिया
- यह अभियान युवा नीति के उस उद्देश्य से जुड़ता है जिसमें युवाओं को नागरिक जीवन और राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनाना अपेक्षित है।
- केंद्र सरकार के मंत्रालय, संसद सदस्य, विधायक और खेल हस्तियों की एक साथ भागीदारी दिखाती है कि नागरिक शिक्षा बहु-हितधारक दृष्टिकोण से चलाई जा सकती है।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अवसरों की जानकारी देना शासन में डिजिटल पहुंच के उपयोग का उदाहरण है।
सामाजिक और सहभागी
- राजनीति में युवाओं की भूमिका, मतदान के प्रति जागरूकता और खेलों में करियर जैसे विषयों पर संवाद युवाओं की सामाजिक-आर्थिक आकांक्षाओं को लोकतांत्रिक विमर्श से जोड़ता है।
- विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों तक पहुंच से शिक्षा संस्थानों की नागरिक शिक्षा की भूमिका सुदृढ़ होती है।
चुनौतियाँ
1. जागरूकता के विस्तार में असमानता
- 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 220 संवाद हुए हैं, जबकि शेष क्षेत्रों और सभी संस्थानों तक पहुंच अभी अधूरी है।
- पहुंच का बड़ा हिस्सा शहरी और शैक्षणिक परिसरों तक सीमित रह सकता है, जबकि ग्रामीण और वंचित युवाओं तक सूचना सीमित मात्रा में पहुंचती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक क्षेत्र में जन-जागरूकता और सरकारी कार्यक्रमों की पहुंच
2. डिजिटल पहुंच पर निर्भरता
- माय भारत के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्भरता से इंटरनेट और डिजिटल साक्षरता से वंचित युवा पीछे रह सकते हैं।
- डिजिटल माध्यम पर सूचना की गुणवत्ता और सत्यापन की चुनौती बनी रहती है।
यूपीएससी लिंक: डिजिटल विभाजन और ई-शासन की सीमाएं
3. निष्पक्षता और तटस्थता का प्रश्न
- निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि संवाद दलीय प्रचार का मंच न बने।
- मतदाता शिक्षा में निष्पक्षता बनाए रखने की जिम्मेदारी भारत निर्वाचन आयोग की सांविधानिक भूमिका से जुड़ी है।
यूपीएससी लिंक: निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और आदर्श आचार संहिता
4. प्रतीकात्मकता बनाम सतत सहभागिता
- सामूहिक शपथ और एक दिवसीय संवाद से दीर्घकालिक व्यवहार परिवर्तन सुनिश्चित नहीं होता।
- मतदान के बाद भी लोकतांत्रिक भागीदारी बनाए रखने के लिए स्थानीय शासन और नागरिक संगठनों की निरंतर भूमिका आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: नागरिक शिक्षा और लोक प्रशासन में सहभागी शासन
5. नामांकन और मतदाता सूची की गुणवत्ता
- पहली बार मतदान करने वाले युवाओं का मतदाता सूची में नामांकन पूरा न होने से वे मतदान से वंचित रह सकते हैं।
- नए मतदाताओं को नामांकन प्रक्रिया (फॉर्म 6) की जानकारी देना अभियान का व्यावहारिक पूरक है।
यूपीएससी लिंक: निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता सूची का प्रबंधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भौगोलिक विस्तार | 220 संवाद अभी सभी राज्यों और जिलों तक नहीं पहुंचे हैं, जिससे क्षेत्रीय असमानता बनी रह सकती है। |
| डिजिटल पहुंच | डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्भरता से वंचित और ग्रामीण युवा सूचना से दूर रह सकते हैं। |
| तटस्थता | जनप्रतिनिधियों की भागीदारी में दलीय प्रचार से बचना आवश्यक है। |
| दीर्घकालिक प्रभाव | एक दिवसीय संवाद और शपथ से स्थायी व्यवहार परिवर्तन की गारंटी नहीं मिलती। |
| मतदाता नामांकन | नए मतदाताओं का सूची में नामांकन पूरा न होने से उनका अधिकार व्यवहार में बाधित हो सकता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- मेरा युवा भारत (My Bharat)
- व्यवस्थित मतदाता शिक्षा और निर्वाचन सहभागिता कार्यक्रम (SVEEP)
आगे की राह
- ग्रामीण, आदिवासी और सीमावर्ती क्षेत्रों के महाविद्यालयों और पंचायत स्तर के युवा समूहों तक संवाद का विस्तार किया जाए।
- डिजिटल सामग्री को क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराया जाए और ऑफलाइन माध्यमों से भी जोड़ा जाए।
- भारत निर्वाचन आयोग के नेतृत्व में मानक सामग्री और आचार संहिता के अनुरूप संवाद की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए।
- मतदाता पंजीकरण को अभियान का अनिवार्य घटक बनाया जाए, ताकि पहली बार मतदान करने वाले युवा सूची में समय पर शामिल हों।
- राष्ट्रीय मतदाता दिवस (25 जनवरी) जैसे अवसरों को स्थानीय संवाद से जोड़कर वार्षिक निरंतरता बनाई जाए।
- विश्वविद्यालयों में नागरिक शिक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों को पाठ्यक्रम गतिविधियों से जोड़ा जाए।
- अभियान के प्रभाव का मूल्यांकन मतदान भागीदारी और नामांकन आंकड़ों के आधार पर किया जाए, केवल प्रतिभागी संख्या के आधार पर नहीं।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मताधिकार (Right to Vote) · अनुच्छेद 326 (Article 326) · भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) · निर्वाचक नामावली (Electoral Roll) · मतदाता जागरूकता (Voter Awareness) · स्वीप कार्यक्रम (SVEEP) · सहभागी लोकतंत्र (Participatory Democracy) · प्रथम-मतदाता (First-time Voters) · मेरा युवा भारत (MY Bharat) · सूचित मतदान (Informed Voting) · एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स वाद (ADR Case, 2002) · राष्ट्रीय मतदाता दिवस (National Voters’ Day)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 326 – वयस्क मताधिकार का सांविधानिक आधार
- अनुच्छेद 324 – निर्वाचन आयोग का अधीक्षण और नियंत्रण
अवधारणा प्रवाह
युवा कार्यक्रम विभाग के अंतर्गत माय भारत द्वारा अभियान की योजना और क्रियान्वयन → 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 60 संस्करणों के माध्यम से युवाओं से सीधा संवाद → निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, युवा आइकनों और खेल हस्तियों की भागीदारी से चुनावी प्रक्रिया की समझ → पहली बार मतदान करने वाले युवाओं में मतदान के अधिकार और नागरिक जिम्मेदारियों की जागरूकता → सामूहिक लोकतांत्रिक शपथ और सहभागी नागरिकता के प्रति प्रतिबद्धता → मतदाता नामांकन और मतदान भागीदारी में वृद्धि की संभावना → लोकतांत्रिक भागीदारी की गुणवत्ता में सुधार और सांविधानिक मूल्यों का सुदृढ़ीकरण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 326 लोक सभा और राज्य विधान सभाओं के निर्वाचन का आधार वयस्क मताधिकार (Adult Suffrage) घोषित करता है।
2. मतदान की न्यूनतम आयु 61वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1988 द्वारा 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई।
3. भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के सदस्यों की नियुक्ति प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- इनमें से कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: अनुच्छेद 326 वयस्क मताधिकार का प्रावधान करता है। कथन 2 सही है: 61वें संशोधन (1988) ने मतदान आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष की। कथन 3 गलत है: निर्वाचन आयोग के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं (अनुच्छेद 324); प्रधानमंत्री की सिफारिश का कोई संवैधानिक प्रावधान इसमें नहीं है। अतः उत्तर केवल दो है।
Q2. कथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए।
कथन (A): मताधिकार भारतीय संविधान के भाग III में वर्णित एक मौलिक अधिकार है।
कारण (R): संविधान का अनुच्छेद 326 वयस्क मताधिकार का उपबंध करता है, जो भाग III में शामिल है।
सही विकल्प चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) गलत है, किंतु (R) सही है। — कथन (A) गलत है: मताधिकार मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि संवैधानिक (अनुच्छेद 326) और वैधानिक अधिकार है। कारण (R) सही है: अनुच्छेद 326 वयस्क मताधिकार का प्रावधान करता है, परंतु यह भाग III में नहीं, बल्कि भाग XV (निर्वाचन) में आता है। इसलिए विकल्प (घ) सही है।
Q3. निम्नलिखित सुमेलों पर विचार कीजिए:
सूची I (संविधान का अनुच्छेद)
1. अनुच्छेद 324
2. अनुच्छेद 325
3. अनुच्छेद 326
4. अनुच्छेद 329
सूची II (उपबंध)
A. सभी निर्वाचन क्षेत्रों के लिए एक ही सामान्य निर्वाचक नामावली
B. निर्वाचन संबंधी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप पर रोक
C. निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण का निर्वाचन आयोग में निहित होना
D. वयस्क मताधिकार का उपबंध
सही सुमेलन चुनिए:
- 1-A, 2-B, 3-C, 4-D
- 1-C, 2-A, 3-D, 4-B
- 1-B, 2-C, 3-A, 4-D
- 1-D, 2-A, 3-B, 4-C
उत्तर: 1-C, 2-A, 3-D, 4-B — अनुच्छेद 324 निर्वाचन आयोग में निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण को निहित करता है (1-C)। अनुच्छेद 325 एक ही सामान्य निर्वाचक नामावली का प्रावधान करता है (2-A)। अनुच्छेद 326 वयस्क मताधिकार देता है (3-D)। अनुच्छेद 329 निर्वाचन विवादों में न्यायालयों के हस्तक्षेप पर रोक लगाता है (4-B)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ मेरा युवा भारत जैसे संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे युवा संवाद और मतदाता जागरूकता अभियान प्रथम-मतदाताओं की लोकतांत्रिक भागीदारी के लिए आवश्यक तो हैं, परंतु इन्हें पर्याप्त नहीं माना जा सकता। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि जागरूकता से आगे कौन-से संस्थागत उपाय आवश्यक हैं, जिनसे निर्वाचक नामावली में पंजीकरण मतदान में परिवर्तित हो सके। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संकेत:
(1) संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 326 (वयस्क मताधिकार), अनुच्छेद 324 (निर्वाचन आयोग का अधीक्षण), अनुच्छेद 325 (एक ही निर्वाचक नामावली), 61वाँ संशोधन (1988) द्वारा आयु 18 वर्ष; लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (निर्वाचक नामावली) और 1951 (निर्वाचन संचालन); मताधिकार की वैधानिक प्रकृति।
(2) तथ्यात्मक संदर्भ: मेरा युवा भारत (स्वायत्त निकाय, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अधीन) द्वारा 26 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक चले अभियान के 60 संस्करण, 11,800 से अधिक युवा, अब तक 220 युवा संवाद और 43,995 प्रतिभागी; 500 शैक्षणिक संस्थानों तक विस्तार का लक्ष्य।
(3) जागरूकता के पक्ष में तर्क: ECI का स्वीप कार्यक्रम (2009); राष्ट्रीय मतदाता दिवस (25 जनवरी से मनाया जाता है); नामांकन प्रक्रिया (फॉर्म 6) की जानकारी; जनप्रतिनिधियों से संवाद द्वारा सूचित मतदान; हैबरमास का विचार-विमर्शी लोकतंत्र (Deliberative Democracy) और रॉबर्ट डाहल का सहभागी लोकतंत्र (Polyarchy) का संदर्भ।
(4) सीमाएँ: नामांकन और मतदान में अंतर; प्रवासन, पते में बदलाव, निर्वाचक नामावली के पुनरीक्षण में नाम कटना; मतदान केंद्र तक पहुँच; संस्थागत विश्वास; शहरी-ग्रामीण और लैंगिक अंतर; जागरूकता के बावजूद मतदान में सामाजिक-आर्थिक बाधाएँ।
(5) न्यायिक दृष्टिकोण: ADR वाद (2002) में उम्मीदवारों के शपथपत्र से सूचित मतदान का अधिकार; PUCL वाद (2013) में नकारात्मक मतदान (NOTA) को सूचित चयन के अधिकार से जोड़ना।
(6) संतुलित निष्कर्ष: जागरूकता पूर्व-शर्त है, पर्याप्त नहीं; निर्वाचक नामावली की सटीकता, सुगम पंजीकरण, मतदान केंद्रों की सुलभता, प्रवासी मतदाताओं हेतु व्यवस्था, और शिक्षा संस्थानों के साथ सतत सहभागिता जैसे उपायों की आवश्यकता; सभी पक्षों के मत संतुलित रूप से रखें, किसी दल या नेता का पक्ष न लें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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