03 Nov संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट: 2030 तक ‘जीरो हंगर’ लक्ष्य पर संकट

✎ SOFI 2020 के अनुसार 2019 में लगभग 69 करोड़ लोग भुखमरी से प्रभावित थे और सतत विकास लक्ष्य 2 (शून्य भुखमरी) के 2030 तक प्राप्त होने पर संदेह है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंध (संयुक्त राष्ट्र की विशिष्ट एजेंसियाँ, सतत विकास लक्ष्य) | GS Paper II — शासन (खाद्य सुरक्षा से संबंधित संवैधानिक प्रावधान और कानून, सार्वजनिक वितरण प्रणाली) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था और कृषि (खाद्य प्रणाली, खाद्य सुरक्षा, बफर स्टॉक और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला)
- Prelims: शून्य भुखमरी (Zero Hunger) — सतत विकास लक्ष्य 2 (SDG 2), अल्पपोषण का प्रसार (Prevalence of Undernourishment), खाद्य एवं कृषि संगठन (Food and Agriculture Organization — FAO), रोम मुख्यालय, अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (International Fund for Agricultural Development — IFAD), विश्व खाद्य कार्यक्रम (World Food Programme — WFP), रोम मुख्यालय, वैश्विक भुखमरी सूचकांक (Global Hunger Index — GHI), अनुच्छेद 47 (राज्य द्वारा पोषण स्तर और जीवन स्तर को ऊँचा करना, राज्य नीति का निदेशक तत्व), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (National Food Security Act, 2013), पोषण अभियान (Poshan Abhiyaan)
- Essay: भूख-मुक्त विश्व का लक्ष्य: सतत विकास के रास्ते की चुनौतियाँ, महामारी, आर्थिक मंदी और खाद्य प्रणालियों की कमज़ोरियाँ: पोषण सुरक्षा कैसे सुनिश्चित हो?
त्वरित पुनरावृत्ति: SOFI 2020 के अनुसार 2019 में लगभग 69 करोड़ लोग भुखमरी से प्रभावित थे और सतत विकास लक्ष्य 2 (शून्य भुखमरी) के 2030 तक प्राप्त होने पर संदेह है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO), अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD), संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF), विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित वार्षिक रिपोर्ट वैश्विक खाद्य सुरक्षा और पोषण की स्थिति (State of Food Security and Nutrition in the World — SOFI) के 2020 संस्करण में बताया गया कि वर्ष 2019 में लगभग 69 करोड़ (690 million) लोग भुखमरी से प्रभावित थे। यह 2018 की तुलना में 1 करोड़ अधिक और पाँच वर्षों में लगभग 6 करोड़ अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार अनेक देशों में कुपोषण के कई रूप लगातार बने हुए हैं और पौष्टिक आहार अधिकांश लोगों की पहुँच से बाहर है। रिपोर्ट ने कोविड-19 महामारी से जुड़े अनुमान भी दिए, जिनके अनुसार वर्ष 2020 के अंत तक 13 करोड़ (130 million) अतिरिक्त लोग दीर्घकालिक भुखमरी में धकेले जा सकते हैं। इन निष्कर्षों के आधार पर सदस्य देशों के लिए सतत विकास लक्ष्य 2 के तहत 2030 तक शून्य भुखमरी का लक्ष्य प्राप्त करना संदिग्ध माना गया है।
पृष्ठभूमि
- वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों ने 2030 एजेंडा के अंतर्गत सतत विकास लक्ष्य अपनाए। इनमें लक्ष्य 2 भुखमरी समाप्त करने, खाद्य सुरक्षा और बेहतर पोषण सुनिश्चित करने तथा सतत कृषि को बढ़ावा देने से संबंधित है। रिपोर्ट के चेतावनी-वक्तव्य में पाँच एजेंसियों के प्रमुखों ने कहा कि विश्व इस लक्ष्य से अब भी पीछे है।
- दशकों तक वैश्विक भुखमरी में गिरावट आई, लेकिन 2014 के आसपास से इसमें फिर वृद्धि होने लगी। पुराने आँकड़ों के संशोधन के बाद भी यही प्रवृत्ति दिखती है।
- चीन और अन्य अधिक जनसंख्या वाले देशों के नए आँकड़ों से वैश्विक भुखमरी के अनुमान में उल्लेखनीय कटौती हुई, फिर भी प्रवृत्ति में कोई बदलाव नहीं आया।
- क्षेत्रीय असमानता अधिक है। एशिया में सबसे अधिक भूखे लोग रहते हैं (लगभग 38.1 करोड़), जबकि अफ्रीका में भुखमरी की दर सबसे अधिक (19.1 प्रतिशत) है और यह तेज़ी से बढ़ रही है। वर्तमान प्रवृत्ति के अनुसार 2030 तक विश्व के आधे से अधिक दीर्घकालिक भूखे लोग अफ्रीका में होंगे।
- कोविड-19 महामारी के कारण लॉकडाउन और आर्थिक मंदी से खाद्य प्रणालियों की कमज़ोरियाँ उजागर हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2020 में 8.3 करोड़ से 13.2 करोड़ अतिरिक्त लोग भूखे रह सकते हैं।
खाद्य सुरक्षा और पोषण से जुड़ी प्रमुख अवधारणाएँ क्या हैं?
- खाद्य सुरक्षा (Food Security) का अर्थ है कि सभी लोगों को हर समय पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन भौतिक और आर्थिक रूप से उपलब्ध हो, ताकि वे सक्रिय और स्वस्थ जीवन जी सकें।
- भुखमरी (Hunger) को प्रायः दीर्घकालिक अल्पपोषण के रूप में मापा जाता है। FAO अल्पपोषण का प्रसार (Prevalence of Undernourishment) नामक संकेतक से जनसंख्या में भूखे लोगों का अनुपात आँकता है।
- कुपोषण (Malnutrition) में अल्पपोषण के साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी (जैसे आयरन, विटामिन A और ज़िंक की कमी) और अधिक पोषण से उत्पन्न मोटापा भी शामिल हैं।
- खाद्य प्रणाली (Food System) में उत्पादन, प्रसंस्करण, परिवहन, वितरण और उपभोग की सभी गतिविधियाँ आती हैं। इनमें से किसी भी स्तर पर व्यवधान खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करता है।
- सतत विकास लक्ष्य 2 के उपलक्ष्य हैं: भुखमरी समाप्त करना, सभी प्रकार का कुपोषण समाप्त करना, कृषि उत्पादकता और छोटे किसानों की आय बढ़ाना, तथा सतत खाद्य उत्पादन प्रणालियाँ अपनाना।
- भारत के संदर्भ में खाद्य सुरक्षा का संवैधानिक आधार अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) की व्याख्या और अनुच्छेद 47 में निहित है। सर्वोच्च न्यायालय ने PUCL बनाम भारत संघ (2001) में भोजन के अधिकार को जीवन के अधिकार से जोड़ा।
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System — PDS) के माध्यम से रियायती अनाज उपलब्ध कराया जाता है। पोषण अभियान (Poshan Abhiyaan) बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं में कुपोषण कम करने के लिए चलाया जाने वाला राष्ट्रीय कार्यक्रम है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| कुल भूखे लोग (2019) | लगभग 690 million (69 करोड़) लोग अल्पपोषित थे, जो 2018 की तुलना में 1 करोड़ अधिक और पाँच वर्षों में लगभग 6 करोड़ अधिक हैं। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि भूख घट नहीं रही है। |
| वैश्विक व्याप्ति (Prevalence of Undernourishment) | वैश्विक अल्पपोषण व्याप्ति 8.9 प्रतिशत पर लगभग स्थिर है। संख्या बढ़ी है, पर अनुपात लगभग वही है, क्योंकि जनसंख्या भी उसी अनुपात में बढ़ी है। |
| क्षेत्रीय असमानता | एशिया में सबसे अधिक (381 million) अल्पपोषित लोग हैं, पर अफ्रीका में अनुपात सबसे ऊँचा (19.1 प्रतिशत) है और यह तेज़ी से बढ़ रहा है। एशिया का अनुपात 8.3 प्रतिशत और लैटिन अमेरिका व कैरिबियाई क्षेत्र का 7.4 प्रतिशत है। |
| चीन के आँकड़ों का संशोधन | चीन और अन्य जनसंख्या-बहुल देशों के नए आँकड़ों से वैश्विक अनुमान में पर्याप्त कटौती हुई, फिर भी 2000 से संशोधित श्रृंखला दिखाती है कि 2014 से दीर्घकालिक भूख फिर बढ़ने लगी है। |
| कोविड-19 का प्रभाव | आर्थिक मंदी के कारण 2020 में 83 million से 132 million अतिरिक्त लोगों के भूखे रहने का अनुमान है। यह सतत विकास लक्ष्य 2 (शून्य भूख) की प्राप्ति को और कठिन बनाता है। |
| उत्पादक संस्थाएँ | यह रिपोर्ट FAO, IFAD, UNICEF, WFP और WHO द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की जाती है, इसलिए यह वैश्विक भूख और कुपोषण की सबसे प्रामाणिक निगरानी मानी जाती है। |
महत्व
आर्थिक
- भूख और कुपोषण से श्रम-उत्पादकता घटती है, जिससे मानव पूंजी और आर्थिक संवृद्धि दोनों प्रभावित होते हैं।
- रिपोर्ट के अनुसार स्वस्थ आहार उपलब्ध कराना स्वास्थ्य-व्यय और उत्पादकता-हानि की लागत घटाने का प्रभावी उपाय है।
- अधिक कीमतें और कम क्रय-क्षमता के कारण अरबों लोग पौष्टिक भोजन नहीं खरीद पाते, जो बाज़ार-आधारित खाद्य प्रणाली की सीमा को दर्शाता है।
सामाजिक एवं मानवीय
- सबसे अधिक प्रभावित वर्ग बच्चे, गर्भवती महिलाएँ और निर्धन परिवार हैं, इसलिए यह मानव विकास सूचकांकों पर सीधा असर डालता है।
- दीर्घकालिक भूख और कुपोषण का संबंध बाल-विकास और शिक्षा-परिणामों से जुड़ा है।
पर्यावरणीय एवं खाद्य प्रणाली
- खाद्य प्रणाली में उत्पादन, वितरण और उपभोग, तीनों चरणों की कमजोरी एक साथ दिखती है, इसलिए समाधान केवल अनाज उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं हो सकता।
- जलवायु-परिवर्तन और आपदाएँ खाद्य उत्पादन को अस्थिर करती हैं, जिससे अल्पपोषण का खतरा बढ़ता है।
वैश्विक शासन
- सतत विकास लक्ष्य 2 की प्रगति का मूल्यांकन बहुपक्षीय संस्थाओं की संयुक्त निगरानी से होता है, जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग का व्यावहारिक उदाहरण है।
- आँकड़ा-संशोधन की प्रक्रिया यह दर्शाती है कि वैश्विक सूचकांकों की विश्वसनीयता के लिए सांख्यिकीय पारदर्शिता आवश्यक है।
चुनौतियाँ
1. बढ़ती दीर्घकालिक भूख
- 2014 के बाद दीर्घकालिक भूख लगातार बढ़ रही है, जबकि दशकों तक इसमें गिरावट आई थी।
- वैश्विक व्याप्ति स्थिर होने के बावजूद संख्या बढ़ना यह दिखाता है कि प्रगति जनसंख्या-वृद्धि के साथ तालमेल नहीं रख पा रही।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक क्षेत्र और सतत विकास लक्ष्य, GS-II
2. क्षेत्रीय असमानता और अफ्रीका की स्थिति
- अफ्रीका में अल्पपोषण की दर सबसे ऊँची है और आगे चलकर विश्व के आधे से अधिक दीर्घकालिक भूखे लोग वहीं होने का अनुमान है।
- एशिया में संख्या सबसे अधिक है, इसलिए वैश्विक लक्ष्य के लिए दोनों क्षेत्रों पर अलग-अलग रणनीति चाहिए।
यूपीएससी लिंक: वैश्विक संस्थाएँ और विकासशील देशों की चुनौतियाँ, GS-II
3. कोविड-19 से उत्पन्न आर्थिक आघात
- तालाबंदी और आर्थिक मंदी से आय घटी, जिससे निर्धन लोगों की खाद्य-पहुँच कम हुई।
- अनुमानित अतिरिक्त भूखे लोगों की संख्या 83 million से 132 million तक है, और तीव्र भूख के प्रकोप से यह और बढ़ सकती है।
यूपीएससी लिंक: आपदा प्रबंधन और सामाजिक सुरक्षा, GS-III एवं GS-II
4. कुपोषण के सभी रूप
- रिपोर्ट केवल अल्पपोषण नहीं, बल्कि सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी और अधिक वजन सहित सभी रूपों की बात करती है।
- पौष्टिक आहार की ऊँची कीमत और कम सामर्थ्य के कारण स्वस्थ आहार अनेक लोगों की पहुँच से बाहर है।
यूपीएससी लिंक: स्वास्थ्य एवं पोषण, GS-II
5. खाद्य प्रणाली की कमज़ोरियाँ
- खाद्य प्रणाली में उत्पादन, परिवहन, भंडारण और उपभोग के हर चरण पर व्यवधान से भूख बढ़ती है।
- आपूर्ति-शृंखला टूटने से कीमतें अस्थिर होती हैं, जिसका सबसे अधिक असर निर्धन परिवारों पर पड़ता है।
यूपीएससी लिंक: कृषि, खाद्य प्रबंधन और आपूर्ति-शृंखला, GS-III
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| सतत विकास लक्ष्य 2 की प्रगति | 2030 तक शून्य भूख का लक्ष्य पटरी से बाहर है और मौजूदा रुझान इसे कठिन बना रहे हैं। |
| अफ्रीका में बढ़ता अनुपात | अल्पपोषण की दर 19.1 प्रतिशत है और यह बढ़ती जा रही है, जिससे क्षेत्रीय असमानता गहरी हो रही है। |
| कोविड-19 का आर्थिक प्रभाव | 83 million से 132 million अतिरिक्त लोगों के भूखे होने का अनुमान नीति-हस्तक्षेप की तात्कालिकता दर्शाता है। |
| स्वस्थ आहार की सामर्थ्य | पौष्टिक भोजन की ऊँची कीमत के कारण अरबों लोग स्वस्थ आहार नहीं ले पाते। |
| आँकड़ों की विश्वसनीयता | बड़े देशों के आँकड़ों में संशोधन से वैश्विक अनुमान बदलते हैं, इसलिए नियमित और पारदर्शी सांख्यिकी आवश्यक है। |
आगे की राह
- निर्धन और कमज़ोर वर्गों के लिए सार्वजनिक वितरण और सामाजिक सुरक्षा तंत्र को संकट-काल में तेज़ी से विस्तार देने की व्यवस्था हो।
- स्वस्थ आहार की सामर्थ्य बढ़ाने हेतु कीमत-स्थिरता, पोषक-समृद्ध खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और लक्षित सहायता पर ध्यान दिया जाए।
- खाद्य प्रणाली को उत्पादन से उपभोग तक समग्र दृष्टि से देखा जाए, ताकि भंडारण, परिवहन और बाज़ार-पहुँच की कमियाँ दूर हों।
- अफ्रीका जैसे सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में कृषि-उत्पादकता, सिंचाई और ग्रामीण आजीविका में दीर्घकालिक निवेश को प्राथमिकता दी जाए।
- बाल और मातृ-पोषण पर विशेष ध्यान देकर कुपोषण के सभी रूपों के विरुद्ध समन्वित कार्यक्रम चलाए जाएँ।
- आपदा और महामारी के समय खाद्य-सहायता की पूर्व-योजना और आपातकालीन भंडार की व्यवस्था सुदृढ़ की जाए।
- अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों, सरकारों और नागरिक समाज के बीच साझा आँकड़ा-प्रणाली और समन्वय को मज़बूत किया जाए।
- सतत विकास लक्ष्य 2 की प्रगति की नियमित समीक्षा हो और नीति-समायोजन आँकड़ों के आधार पर किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सतत विकास लक्ष्य 2 (Sustainable Development Goal 2) – शून्य भूख (Zero Hunger) · अल्पपोषण (Undernourishment) · कुपोषण (Malnutrition) · खाद्य सुरक्षा (Food Security) · वहनीयता (Affordability) · स्वस्थ आहार (Healthy Diet) · खाद्य प्रणाली (Food Systems) · राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (National Food Security Act, 2013) · सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System) · हकदारी दृष्टिकोण (Entitlement Approach) · कोविड-19 (COVID-19) से उत्पन्न आर्थिक मंदी · पोषण अभियान (Poshan Abhiyaan)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21 — जीवन के अधिकार में गरिमामय जीवन के लिए पर्याप्त भोजन का आशय
- अनुच्छेद 47 — पोषण-स्तर, जीवन-स्तर और लोक-स्वास्थ्य सुधार का राज्य का कर्तव्य
अवधारणा प्रवाह
कोविड-19 महामारी और तालाबंदी से आर्थिक मंदी उत्पन्न होती है। → आय घटने से निर्धन परिवारों की खाद्य और पौष्टिक आहार तक पहुँच कम होती है। → अल्पपोषण और कुपोषण बढ़ते हैं, विशेषकर अफ्रीका और निर्धन वर्गों में। → दीर्घकालिक भूखे लोगों की संख्या बढ़ती है, जिससे वैश्विक भूख-सूचकांक पर दबाव पड़ता है। → सतत विकास लक्ष्य 2 (शून्य भूख) की 2030 तक प्राप्ति संदिग्ध हो जाती है। → बहुपक्षीय संस्थाएँ नीति-हस्तक्षेप, सामाजिक सुरक्षा और खाद्य प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर बल देती हैं।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘विश्व में खाद्य सुरक्षा एवं पोषण की स्थिति’ (State of Food Security and Nutrition in the World) रिपोर्ट का प्रकाशन FAO, IFAD, UNICEF, WFP और WHO द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है।
2. सतत विकास लक्ष्य 2 का उद्देश्य वर्ष 2030 तक भूख समाप्त करना, खाद्य सुरक्षा एवं बेहतर पोषण प्राप्त करना तथा सतत कृषि को बढ़ावा देना है।
3. विश्व बैंक इस रिपोर्ट के सह-प्रकाशक संगठनों में शामिल है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: रिपोर्ट के पाँच सह-प्रकाशक FAO, IFAD, UNICEF, WFP और WHO हैं। कथन 2 सही है: सतत विकास लक्ष्य 2 (शून्य भूख) में भूख समाप्ति, खाद्य सुरक्षा, बेहतर पोषण और सतत कृषि सम्मिलित हैं। कथन 3 गलत है, क्योंकि विश्व बैंक इन पाँच संगठनों में शामिल नहीं है।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों (A और R) पर विचार कीजिए:
कथन (A): विश्व में खाद्य उत्पादन पर्याप्त होने के बावजूद भूख बनी रह सकती है।
कारण (R): भूख केवल खाद्यान्न की उपलब्धता से नहीं, बल्कि लोगों की खाद्य तक पहुँच और उसे खरीदने की वहनीयता से भी जुड़ी होती है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
- (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सत्य हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सत्य है, किंतु (R) असत्य है
- (A) असत्य है, किंतु (R) सत्य है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — खाद्य सुरक्षा के चार आयाम उपलब्धता, पहुँच, उपयोग और स्थिरता हैं, इसलिए पर्याप्त उत्पादन होते हुए भी भूख संभव है। SOFI रिपोर्टों में स्वस्थ आहार की उच्च लागत और वहनीयता के अभाव को भूख और कुपोषण का प्रमुख कारण बताया गया है। अतः (R), (A) की सही व्याख्या है।
Q3. निम्नलिखित सुमेलों पर विचार कीजिए:
सूची I (योजना/अधिनियम/रिपोर्ट) | सूची II (विशेषता)
A. पोषण अभियान (Poshan Abhiyaan) | 1. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित, बच्चों तथा गर्भवती व धात्री माताओं के पोषण पर केंद्रित
B. पीएम पोषण (PM POSHAN) | 2. विद्यालयों में पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने से संबंधित
C. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 | 3. सब्सिडीयुक्त खाद्यान्न पर विधिक हक (legal entitlement)
D. SOFI रिपोर्ट | 4. विश्व में कुपोषण और भूख की वार्षिक निगरानी रिपोर्ट
सही सुमेलन चुनिए।
- A-1, B-2, C-3, D-4
- A-2, B-1, C-3, D-4
- A-1, B-2, C-4, D-3
- A-3, B-2, C-1, D-4
उत्तर: A-1, B-2, C-3, D-4 — पोषण अभियान का आरंभ 2018 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अंतर्गत हुआ और यह बच्चों, गर्भवती व धात्री माताओं के पोषण पर केंद्रित है। पीएम पोषण (2021 में मध्याह्न भोजन योजना का नया नाम) विद्यालयी भोजन से जुड़ा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 सब्सिडीयुक्त अनाज पर विधिक हक देता है, और SOFI वार्षिक वैश्विक निगरानी रिपोर्ट है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सतत विकास लक्ष्य 2 (शून्य भूख) के वर्ष 2030 तक प्राप्त होने पर संदेह व्यक्त किया गया है, जबकि वैश्विक स्तर पर भूख का बढ़ना वर्ष 2014 से जारी है। इस प्रवृत्ति के मूल कारणों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही यह भी बताइए कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 जैसे उपाय खाद्य उपलब्धता के साथ-साथ वहनीयता की चुनौती का किस सीमा तक समाधान करते हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल उत्तर की रूपरेखा: (1) भूमिका: SOFI 2020 (FAO, IFAD, UNICEF, WFP, WHO द्वारा संयुक्त प्रकाशन) के अनुसार वर्ष 2019 में लगभग 690 million (69 करोड़) लोग भूखे थे, जो 2018 की तुलना में 10 million और पाँच वर्षों में लगभग 60 million अधिक हैं; वैश्विक अल्पपोषण दर 8.9 प्रतिशत रही; चीन सहित आँकड़ों के संशोधन के बावजूद प्रवृत्ति वही है और 2014 से वृद्धि जारी है। (2) वितरण: एशिया में सर्वाधिक 381 million, अफ्रीका में 250 million; अफ्रीका में दर 19.1 प्रतिशत (एशिया 8.3 प्रतिशत, लैटिन अमेरिका व कैरेबियाई क्षेत्र 7.4 प्रतिशत); 2030 तक विश्व के आधे से अधिक भूखे अफ्रीका में होने का अनुमान। (3) कारण-विश्लेषण: (क) खाद्य प्रणाली की संरचनात्मक कमियाँ; (ख) वहनीयता: स्वस्थ आहार की ऊँची लागत, जिससे अरबों लोग पौष्टिक आहार नहीं ले पाते; (ग) अमर्त्य सेन की पुस्तक ‘Poverty and Famines’ (1981) का हकदारी दृष्टिकोण, जिसके अनुसार भूख उपलब्धता से अधिक हकदारी/क्रय-क्षमता की विफलता है; (घ) संघर्ष, जलवायु परिवर्तन और COVID-19 से उत्पन्न आर्थिक मंदी, जिससे 83 million से 132 million अतिरिक्त लोग भूख की चपेट में आ सकते हैं। (4) भारत के संदर्भ में उपाय: संविधान का अनुच्छेद 21 (PUCL बनाम भारत संघ, 2001 में सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम आदेशों द्वारा भोजन के अधिकार की व्याख्या) तथा अनुच्छेद 47 (पोषण स्तर और जीवन स्तर उठाना, जन-स्वास्थ्य सुधार का राज्य का कर्तव्य); राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की धारा 3 (प्राथमिकता परिवारों को प्रति व्यक्ति 5 kg प्रति माह) और धारा 5 (अंत्योदय अन्न योजना के अंतर्गत प्रति परिवार 35 kg); सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लक्षित स्वरूप; पोषण अभियान (2018) व पीएम पोषण (2021) जैसे पोषण-केंद्रित कार्यक्रम। (5) समालोचनात्मक पक्ष: लक्षित वितरण में बहिष्करण त्रुटियाँ, अनाज की सीमित पोषण-विविधता (दालें, फल, सब्जियाँ, दूध शामिल न होना), सार्वजनिक वितरण प्रणाली में रिसाव, तथा नकद हस्तांतरण बनाम वस्तु-आधारित पात्रता पर नीतिगत बहस; दोनों पक्षों के तर्कों का संतुलित उल्लेख। (6) निष्कर्ष: NFSA उपलब्धता और न्यूनतम वहनीयता सुनिश्चित करता है, किंतु स्वस्थ आहार, विविधीकरण, मातृ-शिशु पोषण और आजीविका सुदृढ़ीकरण के बिना शून्य भूख का लक्ष्य दूर रहेगा।
स्रोत: who.int
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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