स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-II: अवधि विस्तार और बजटीय आवंटन

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-II: अवधि विस्तार और बजटीय आवंटन

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-II: अवधि विस्तार और बजटीय आवंटन

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-IIअनुमोदनकेंद्रीय मंत्रिमंडलविस्तार अनुरोधDDWS द्वारास्वीकृतिवित्त मंत्रालयसमय-सीमा31 मार्च 2028बजट प्रावधान₹7,000 करोड़
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-II

✎ स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-II को 31 मार्च 2028 तक विस्तारित किया गया है; ओडीएफ प्लस का अर्थ है खुले में शौच से मुक्ति के साथ ठोस-तरल अपशिष्ट प्रबंधन और दृश्य स्वच्छता, और लागत साझेदारी 90:10, 60:40 तथा 100:0 के अनुपात में…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन (Governance): केंद्र-राज्य सहभागिता, योजनाओं का कार्यान्वयन और निगरानी  |  GS Paper II — राजव्यवस्था (Polity): पंचायती राज संस्थाओं की स्वच्छता संबंधी भूमिका और संघीय वित्तीय व्यवस्था  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (Economy): सार्वजनिक व्यय, बजट आवंटन और राजकोषीय संघवाद
  • Prelims: स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-II, ओडीएफ प्लस (ODF Plus) की परिभाषा, पेयजल और स्वच्छता विभाग (DDWS), जल शक्ति मंत्रालय, केंद्र-राज्य लागत साझेदारी अनुपात (90:10, 60:40, 100:0), पंद्रहवाँ वित्त आयोग (15th Finance Commission), संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची, मद 23 (स्वास्थ्य और स्वच्छता), संविधान की सातवीं अनुसूची, राज्य सूची की प्रविष्टि 6 (लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता), अनुच्छेद 47 (पोषण स्तर, जीवन स्तर और लोक स्वास्थ्य में सुधार)
  • Essay: स्वच्छता केवल शौचालय निर्माण नहीं, बल्कि ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन और सतत व्यवहार परिवर्तन का प्रश्न है, सहकारी संघवाद में लक्ष्य-आधारित योजनाएँ और वित्तीय अनुशासन: सार्वजनिक धन के प्रभावी उपयोग की चुनौतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-II को 31 मार्च 2028 तक विस्तारित किया गया है; ओडीएफ प्लस का अर्थ है खुले में शौच से मुक्ति के साथ ठोस-तरल अपशिष्ट प्रबंधन और दृश्य स्वच्छता, और लागत साझेदारी 90:10, 60:40 तथा 100:0 के अनुपात में होती है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-II की अवधि 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दी है। पेयजल और स्वच्छता विभाग (DDWS) ने वित्त मंत्रालय से विस्तार की स्वीकृति माँगी थी, जो मंजूर कर ली गई। इस विस्तार के साथ लगभग 7,000 करोड़ रुपये का प्रावधान संघ बजट 2027-28 में प्रस्तावित बताया गया है। वित्त मंत्रालय के आदेश के अनुसार, शेष गाँवों को 31 मार्च 2028 तक ओडीएफ प्लस प्रमाण-पत्र प्राप्त करना होगा और इसके आगे कोई समय-विस्तार नहीं दिया जाएगा। योजनाकीय डैशबोर्ड के अनुसार 5.86 लाख गाँवों में से 5.70 लाख गाँव अब तक ओडीएफ प्लस घोषित हो चुके हैं।

पृष्ठभूमि

  • स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की शुरुआत 2 अक्टूबर 2014 को हुई थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को खुले में शौच से मुक्त करना और ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन सुनिश्चित करना था। इससे पहले निर्मल भारत अभियान (2012) जैसी पहल चल चुकी थीं।
  • चरण-II को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 19 फरवरी 2020 को मंजूरी दी थी। इसकी मूल अवधि 2024-25 तक थी, जिसे बाद में पंद्रहवें वित्त आयोग की अवधि तक और फिर विस्तारित किया गया।
  • इस चरण का कुल परिव्यय 1,40,881 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था, जिसमें से 52,497 करोड़ रुपये का योगदान DDWS के बजट से तय था। शेष राशि पंद्रहवें वित्त आयोग के अनुदान, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना और राजस्व सृजन मॉडल से जुटाने की योजना थी।
  • 2020-21 से 2025-26 की अवधि में DDWS बजट से 28,726 करोड़ रुपये व्यय हुए हैं और 2026-27 के लिए 7,192 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-II क्या है?

  • यह जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत पेयजल और स्वच्छता विभाग (DDWS) द्वारा संचालित ग्रामीण स्वच्छता की प्रमुख केंद्रीय योजना है।
  • ओडीएफ (Open Defecation Free) का अर्थ है खुले में शौच से मुक्त गाँव; ओडीएफ प्लस (ODF Plus) वह गाँव है जो इस स्थिति को बनाए रखता है, ठोस व तरल अपशिष्ट का प्रबंधन करता है और दृश्य रूप से स्वच्छ है।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची (प्रविष्टि 6) का विषय है, जबकि ग्यारहवीं अनुसूची की मद 23 के अंतर्गत स्वच्छता पंचायतों के कार्यों में शामिल है। इसलिए योजना सहकारी संघवाद के ढाँचे में चलती है।
  • लागत साझेदारी: पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों (जम्मू-कश्मीर सहित) में केंद्र-राज्य अनुपात 90:10, अन्य राज्यों में 60:40 और केंद्र शासित प्रदेशों में 100:0 है।
  • अपशिष्ट प्रबंधन के लिए राजस्व सृजन मॉडल और अन्य योजनाओं के साथ अभिसरण (dovetailing) पर बल दिया गया है, जिससे संसाधनों का समेकित उपयोग हो सके।
  • अनुच्छेद 47 राज्य को लोक स्वास्थ्य में सुधार का नीति-निर्देश देता है, और स्वच्छता इसी उद्देश्य से जुड़ी है। यह नीति-निर्देशक तत्व है, न्यायोचित अधिकार नहीं।
  • इस योजना की सफलता का मापदंड केवल शौचालय संख्या नहीं, बल्कि ओडीएफ स्थिति की निरंतरता और अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
समयसीमा विस्तार योजना का चरण-II मार्च 2028 तक बढ़ाया गया है। वित्त मंत्रालय के आदेश के अनुसार इसके बाद कोई और विस्तार नहीं होगा।
कुल परिव्यय 2020 में अनुमोदित कुल परिव्यय 1,40,881 करोड़ रुपये है। इसमें से 52,497 करोड़ रुपये पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) के बजट से देय हैं।
लक्ष्य का स्वरूप लक्ष्य केवल खुले में शौच से मुक्ति (ODF) नहीं, बल्कि ODF Plus है। इसमें गाँव का स्वच्छ रहना, ठोस अपशिष्ट और द्रव अपशिष्ट का प्रबंधन शामिल है।
वित्तपोषण ढाँचा केंद्र-राज्य लागत अनुपात 90:10 (पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्य), 60:40 (अन्य राज्य) और 100:0 (केंद्र शासित प्रदेश) है।
भौतिक प्रगति डैशबोर्ड के अनुसार 5.86 लाख गाँवों में से 5.70 लाख गाँव ODF Plus घोषित हो चुके हैं।
वित्तीय प्रगति 2020-21 से 2025-26 के बीच DDWS बजट से 28,726 करोड़ रुपये व्यय हुए। 2026-27 के लिए 7,192 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

महत्व

आर्थिक एवं वित्तीय

  • विस्तार के साथ 2027-28 के बजट में लगभग 7,000 करोड़ रुपये का अनुमानित प्रावधान प्रस्तावित है, जो ग्रामीण स्वच्छता पर सार्वजनिक निवेश की निरंतरता दर्शाता है।
  • 15वें वित्त आयोग की निधि, मनरेगा और राजस्व मॉडल के अभिसरण से संसाधनों का बहु-स्रोतीय उपयोग संभव होता है।
  • ठोस और द्रव अपशिष्ट प्रबंधन में राजस्व मॉडल अपनाने से स्थानीय स्तर पर वित्तीय स्थिरता बढ़ सकती है।

स्वास्थ्य एवं पर्यावरण

  • खुले में शौच से मुक्त रहने और अपशिष्ट के उचित निपटान से जल-जनित रोगों के जोखिम में कमी आती है।
  • द्रव अपशिष्ट का नियंत्रित प्रबंधन भूजल और सतही जल स्रोतों के प्रदूषण को सीमित करता है।

शासन एवं संघवाद

  • समयसीमा तय होने से कार्यक्रम में प्रशासनिक जवाबदेही और लक्ष्य-आधारित निगरानी बढ़ती है।
  • वित्त मंत्रालय की स्वीकृति प्रक्रिया यह दर्शाती है कि योजना-विस्तार के लिए व्यय विभाग और वित्त मंत्रालय के बीच समन्वित निर्णय आवश्यक है।
  • राज्यों की हिस्सेदारी के क्षेत्रीय अनुपात से केंद्र और राज्यों के बीच सहकारी संघवाद का व्यावहारिक स्वरूप दिखता है।

सामाजिक

  • घर में शौचालय की उपलब्धता से महिलाओं और बालिकाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
  • गाँव की स्वच्छता सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय नेतृत्व को प्रोत्साहित करती है।

चुनौतियाँ

1. ODF Plus का सतत निर्वहन

  • शौचालय निर्माण से आगे बढ़कर उसका नियमित उपयोग और रखरखाव सुनिश्चित करना कठिन कार्य है।
  • ODF से ODF Plus तक पहुँचने के बाद भी गाँवों में स्वच्छता का पुनः बिगड़ना एक जोखिम है।
  • प्रमाणन के बाद निगरानी तंत्र कमजोर होने पर उपलब्धियाँ टिक नहीं पातीं।

2. ठोस और द्रव अपशिष्ट प्रबंधन की वित्तीय व्यवस्था

  • इस घटक के लिए 15वें वित्त आयोग की निधि, मनरेगा और राजस्व मॉडल पर निर्भरता है, जिनके बीच अभिसरण जटिल है।
  • राजस्व मॉडल की व्यवहार्यता गाँवों के आकार, अपशिष्ट की मात्रा और बाज़ार-संपर्क पर निर्भर करती है।
  • पंचायतों के पास संसाधनों और तकनीकी क्षमता की कमी से परियोजनाएँ धीमी पड़ सकती हैं।

3. समयसीमा का दबाव

  • 5.86 लाख में से लगभग 16,000 गाँव अभी ODF Plus घोषित नहीं हुए हैं और उन्हें 31 मार्च 2028 तक लक्ष्य पूरा करना है।
  • आगे विस्तार न मिलने से शेष गाँवों में तेज़ और समन्वित कार्रवाई आवश्यक है।
  • दूरस्थ, पहाड़ी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में भौगोलिक कठिनाइयाँ समयसीमा के लिए चुनौती बन सकती हैं।

4. राज्यों पर वित्तीय भार और क्षमता का अंतर

  • 60:40 और 90:10 के अनुपात में राज्यों को अपना हिस्सा समय पर देना होता है, जो वित्तीय रूप से कमजोर राज्यों के लिए कठिन हो सकता है।
  • राज्यों की प्रशासनिक क्षमता में भिन्नता से योजना के क्रियान्वयन में असमानता बढ़ सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
ODF Plus का निर्वहन प्रमाणन के बाद स्वच्छता बनाए रखना और सामुदायिक व्यवहार में स्थायी बदलाव लाना
ठोस और द्रव अपशिष्ट ग्राम स्तर पर संग्रहण, प्रसंस्करण और निपटान के लिए स्थायी ढाँचे की कमी
वित्त का अभिसरण 15वें वित्त आयोग, मनरेगा और राजस्व मॉडल के बीच स्पष्ट समन्वय का अभाव
समयसीमा 31 मार्च 2028 के बाद विस्तार न मिलने से शेष गाँवों पर दबाव
राज्यों की क्षमता कमजोर राज्यों के लिए हिस्सेदारी और प्रशासनिक क्षमता की चुनौती
आँकड़ों की विश्वसनीयता डैशबोर्ड की घोषित उपलब्धि और जमीनी स्थिति के बीच सत्यापन की आवश्यकता

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) (Swachh Bharat Mission – Grameen)
  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Scheme)

आगे की राह

  • 31 मार्च 2028 की समयसीमा से पहले शेष लगभग 16,000 गाँवों के ODF Plus सत्यापन के लिए जिला-वार कार्ययोजना बनाई जाए।
  • ठोस और द्रव अपशिष्ट के लिए ग्राम स्तर पर स्थायी संग्रहण, परिवहन और प्रसंस्करण ढाँचा विकसित किया जाए।
  • 15वें वित्त आयोग की निधि, मनरेगा और राजस्व मॉडल के अभिसरण हेतु स्पष्ट दिशानिर्देश और संयुक्त लेखांकन प्रणाली अपनाई जाए।
  • ठोस और द्रव अपशिष्ट से राजस्व सृजन के मॉडल को स्थानीय उद्यमिता और स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जाए।
  • ग्राम पंचायतों और स्वच्छता समितियों की तकनीकी व प्रशासनिक क्षमता का निर्माण किया जाए।
  • ODF Plus प्रमाणन के बाद भी नियमित निरीक्षण और सामुदायिक निगरानी की व्यवस्था बनाई जाए।
  • डैशबोर्ड के आँकड़ों का स्वतंत्र और नमूना-आधारित सत्यापन कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
  • पूर्वोत्तर, हिमालयी और दूरस्थ क्षेत्रों की भौगोलिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर विशेष योजना तैयार की जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-II (Swachh Bharat Mission (Grameen) Phase-II) · ODF Plus (खुले में शौच से मुक्त प्लस) · ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन (Solid and Liquid Waste Management) · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) · वित्तीय हस्तांतरण और वित्त आयोग (Finance Commission) · अभिसरण या समेकन (Dovetailing of Schemes) · केंद्र-राज्य लागत-साझेदारी अनुपात (Cost-sharing Ratio) · अनुच्छेद 243G और ग्यारहवीं अनुसूची (Article 243G and Eleventh Schedule) · जल जीवन मिशन के साथ तालमेल (Convergence with Jal Jeevan Mission) · सतत स्वच्छता और व्यवहार परिवर्तन (Sustainable Sanitation and Behaviour Change)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 47 — लोक स्वास्थ्य सुधार का राज्य का कर्तव्य
  • अनुच्छेद 243G एवं ग्यारहवीं अनुसूची — पंचायतों के स्वच्छता संबंधी कार्य
  • सातवीं अनुसूची, राज्य सूची की प्रविष्टि 6 — लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता
  • अनुच्छेद 280 — 15वें वित्त आयोग की संस्तुति आधार
  • अनुच्छेद 282 — केंद्र द्वारा सशर्त अनुदान हस्तांतरण

अवधारणा प्रवाह

2020 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा चरण-II का अनुमोदन और 1,40,881 करोड़ रुपये का कुल परिव्यय तय  →  ग्रामीण स्वच्छता का लक्ष्य खुले में शौच से मुक्ति (ODF) से आगे बढ़कर ODF Plus तक विस्तारित  →  पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) द्वारा वित्त मंत्रालय से विस्तार का अनुरोध और स्वीकृति  →  योजना की समयसीमा 31 मार्च 2028 तय, जिसके बाद कोई विस्तार नहीं  →  बजट में अनुमानित 7,000 करोड़ रुपये का प्रावधान और केंद्र-राज्य अनुपात के अनुसार वित्तपोषण  →  ठोस व द्रव अपशिष्ट प्रबंधन और गाँव-स्तर की स्वच्छता पर कार्य, डैशबोर्ड द्वारा प्रगति की निगरानी

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘ODF Plus’ गाँव वह है जो अपनी खुले में शौच से मुक्त स्थिति बनाए रखता है, ठोस और तरल अपशिष्ट का प्रबंधन सुनिश्चित करता है तथा दृष्टि से स्वच्छ है।
2. स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-II के अंतर्गत पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों (जम्मू-कश्मीर सहित) के लिए केंद्र और राज्य का लागत-साझेदारी अनुपात 90:10 है।
3. लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता संघ सूची (Union List) की प्रविष्टि है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं: ODF Plus की परिभाषा DDWS की है और पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 अनुपात लागू है। कथन 3 गलत है, क्योंकि लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता सातवीं अनुसूची की राज्य सूची (प्रविष्टि 6) में आता है, संघ सूची में नहीं।

Q2. निम्नलिखित में से प्रत्येक को उचित विकल्प से सुमेलित कीजिए:
सूची-I (योजना/विभाग): (a) विभाग पेयजल एवं स्वच्छता (DDWS) (b) महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (MGNREGA) (c) स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) (SBM-U)
सूची-II (मंत्रालय): 1. जल शक्ति मंत्रालय 2. आवास और शहरी कार्य मंत्रालय 3. ग्रामीण विकास मंत्रालय

  1. (a)-1, (b)-2, (c)-3
  2. (a)-1, (b)-3, (c)-2
  3. (a)-2, (b)-1, (c)-3
  4. (a)-3, (b)-1, (c)-2

उत्तर: (a)-1, (b)-3, (c)-2 — DDWS जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत आता है (a-1)। MGNREGA ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा प्रशासित है (b-3)। SBM-U आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के अंतर्गत है (c-2)। अतः सही सुमेलन (a)-1, (b)-3, (c)-2 है।

Q3. कथन (A): स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-II में कुल व्यय का केंद्र और राज्यों के बीच निश्चित अनुपात में बँटवारा होता है।
कारण (R): लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता राज्य सूची का विषय है, इसलिए संघ सरकार इसमें केंद्र प्रायोजित योजनाओं के माध्यम से सहायता देती है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
  3. (A) सही है, किंतु (R) गलत है
  4. (A) गलत है, किंतु (R) सही है

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — राज्य सूची का विषय होने के कारण संघ सरकार सीधे नियम नहीं बना सकती, इसलिए वह केंद्र प्रायोजित योजनाओं के माध्यम से राज्यों को निश्चित अनुपात में वित्तीय सहायता देती है। अतः (R), (A) की सही व्याख्या है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-II को मार्च 2028 तक विस्तारित करना और ODF Plus लक्ष्य को समय-सीमा के भीतर पूरा करने की शर्त रखना, ग्रामीण स्वच्छता को उपलब्धि-आधारित प्रशासन की ओर ले जाता है। इस दृष्टिकोण की सीमाओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि खुले में शौच से मुक्ति से आगे बढ़कर ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की स्थायित्व-सुनिश्चितता के लिए किन संस्थागत और वित्तीय उपायों की आवश्यकता है। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर-कंकाल (मॉडल उत्तर के बिंदु):
1. भूमिका: 2 अक्टूबर 2014 को प्रारंभ स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का चरण-I ODF लक्ष्य पर केंद्रित था; चरण-II (कैबिनेट अनुमोदन, 1,40,881 करोड़ रुपये का कुल परिव्यय) ODF Plus, अर्थात ODF स्थिरता, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन और दृश्य स्वच्छता पर केंद्रित है। लेख के अनुसार 5.86 लाख गाँवों में से 5.70 लाख गाँव ODF Plus घोषित हो चुके हैं।
2. वित्तीय ढाँचा: DDWS का हिस्सा 52,497 करोड़ रुपये; शेष राशि 15वें वित्त आयोग की निधियों, मनरेगा के अभिसरण और राजस्व-सृजन मॉडल से जुटाने की योजना। 2020-21 से 2025-26 तक DDWS बजट से 28,726 करोड़ रुपये व्यय; 2026-27 में 7,192 करोड़ रुपये आवंटित। यह अंतर दर्शाता है कि वित्तीय सतत्ता अनिश्चित है।
3. संघीय आयाम: स्वच्छता सातवीं अनुसूची की राज्य सूची (प्रविष्टि 6) में है; पंचायतों की भूमिका अनुच्छेद 243G और ग्यारहवीं अनुसूची (प्रविष्टि 23 और 24 के संदर्भ में स्वास्थ्य-स्वच्छता व पेयजल) से जुड़ी है। 60:40 और 90:10 अनुपात में राज्यों पर वित्तीय भार, विशेषकर कमजोर राजकोषीय क्षमता वाले राज्यों के लिए, सहकारी संघवाद की परीक्षा है।
4. समालोचना के बिंदु: (क) समयबद्ध विस्तार और 31 मार्च 2028 के बाद कोई विस्तार न देने की शर्त प्रशासनिक दबाव बढ़ाती है, पर ज़मीनी क्षमता और जल-आपूर्ति पर निर्भर ठोस-तरल प्रबंधन को कम समय में स्थायी बनाना कठिन है; (ख) प्रमाणन-आधारित लक्ष्य (ODF Plus प्रमाणपत्र) बनाम वास्तविक व्यवहार परिवर्तन का अंतर; (ग) विभिन्न योजनाओं के बीच अभिसरण में सीमाएँ; (घ) राजस्व-सृजन मॉडल की व्यवहार्यता, विशेषकर तरल अपशिष्ट के लिए।
5. संस्थागत उपाय: ग्राम पंचायत स्तर पर अपशिष्ट प्रबंधन की योजना और रखरखाव का वित्तपोषण; 15वें और 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के साथ सामंजस्य; स्वच्छ सर्वेक्षण जैसे प्रदर्शन-मूल्यांकन का उपयोग; स्थानीय उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी; सामुदायिक व्यवहार परिवर्तन।
6. संतुलित निष्कर्ष: उपलब्धि-आधारित समय-सीमा प्रशासनिक अनुशासन देती है, पर स्थायित्व के लिए क्षमता-निर्माण, स्थिर वित्त और राज्यों के साथ सहमति-आधारित योजना आवश्यक है। अंत में स्पष्ट कीजिए कि ODF Plus को दीर्घकालिक सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणाम में बदलने के लिए किस प्रकार का संस्थागत सुधार आवश्यक है।

स्रोत: The Indian Express


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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