05 Nov अग्निवीर योजना में बदलाव: क्या यह नियमित भर्ती की वापसी है?
✎ अग्निपथ संशोधन से सभी अग्निवीरों को नियमित सैनिक बनने का अवसर मिला है, परंतु यह खुली नियमित भर्ती की वापसी नहीं है, क्योंकि चयन मौजूदा अग्निवीरों के बीच, दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा और सैन्य मानदंडों पर आधारित है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — सुरक्षा (Security): रक्षा बल, सशस्त्र बलों में भर्ती और सैन्य सेवा से जुड़े नीतिगत प्रश्न | GS Paper II — शासन (Governance): सरकारी योजनाओं का डिज़ाइन, रोज़गार नीति और सेवानिवृत्ति लाभ से जुड़े प्रावधान
- Prelims: अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) और इसकी आयु सीमा (17 वर्ष 6 माह से 21 वर्ष), अग्निवीर (Agniveer) और चार वर्ष की सेवा अवधि, सेवा निधि (Seva Nidhi) पैकेज और अग्निवीर कोष (Agniveer Corpus Fund), अंशदान का ढांचा: वेतन का 30% कटौती और सरकार का समान योगदान, सेवा-समाप्ति पर एकमुश्त राशि की आयकर से छूट और पेंशन/ग्रेच्युटी का अभाव, सशस्त्र बल (Armed Forces) की तीनों सेवाएँ: थलसेना, नौसेना और वायुसेना, अर्धसैनिक बल (Paramilitary Forces) में अग्निवीरों के लिए आरक्षण का प्रावधान, केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) द्वारा नीतिगत निर्णय की प्रक्रिया
- Essay: राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य पेशेवर दक्षता: अल्पकालिक सेवा बनाम दीर्घकालिक नियमित सेना, युवा रोज़गार, सेवा-पश्चात पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा के बीच संतुलन
त्वरित पुनरावृत्ति: अग्निपथ संशोधन से सभी अग्निवीरों को नियमित सैनिक बनने का अवसर मिला है, परंतु यह खुली नियमित भर्ती की वापसी नहीं है, क्योंकि चयन मौजूदा अग्निवीरों के बीच, दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा और सैन्य मानदंडों पर आधारित है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 नवंबर को अग्निपथ योजना में संशोधन को मंज़ूरी दी, जिसके तहत प्रशिक्षण में लगे सभी अग्निवीर थलसेना, नौसेना और वायुसेना में नियमित सैनिक के रूप में सम्मिलित होने का अवसर पा सकेंगे। यह निर्णय ऐसे समय आया है जब योजना के पहले बैच का चार वर्ष का कार्यकाल इसी महीने पूरा होने वाला है। हालांकि इसे सामान्य नियमित भर्ती की वापसी नहीं माना जा सकता, क्योंकि चयन मौजूदा अग्निवीरों के बीच होगा, सैन्य चयन मानदंडों पर आधारित होगा और इसके लिए दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा अनिवार्य होगी। इसी अंतर को समझना परीक्षा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।
पृष्ठभूमि
- वर्ष 2022 में अग्निपथ योजना शुरू हुई, जिसमें 17 वर्ष 6 माह से 21 वर्ष की आयु के युवाओं को चार वर्ष की अवधि के लिए सशस्त्र बलों में भर्ती किया जाता है।
- महामारी से पहले के वर्षों में सशस्त्र बलों में नियमित भर्ती होती थी, जिसमें सैनिकों को दीर्घकालिक सेवा और सेवानिवृत्ति पर पेंशन जैसे लाभ मिलते थे। अग्निपथ योजना इस परंपरा से भिन्न ढांचे पर आधारित है।
- मूल योजना में चार वर्ष पूरे होने पर केवल 25% अग्निवीरों को योग्यता के आधार पर सेवा में स्थायी रूप से समाहित करने का प्रावधान था, जबकि शेष 75% को सेवा निधि पैकेज के साथ बाहर जाना पड़ता था।
- संशोधन में शेष 75% अग्निवीरों को दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा का विकल्प दिया गया है, जिसके बाद वे सैन्य मानदंडों पर खरे उतरने पर नियमित सैनिक बन सकते हैं।
- वर्तमान में तीन लाख से अधिक अग्निवीर विभिन्न चरणों में प्रशिक्षण या सेवा में हैं, और पहले बैच के अग्निवीरों का कार्यकाल पूरा होने के बाद नीति के क्रियान्वयन का पहला व्यावहारिक परीक्षण सामने आ रहा है।
अग्निपथ योजना क्या है?
- अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) के अंतर्गत चयनित व्यक्ति अग्निवीर (Agniveer) कहलाते हैं, जिनकी सेवा चार वर्ष की अल्पकालिक होती है।
- मूल ढांचे में चार वर्ष के बाद 25% अग्निवीरों को योग्यता आधारित चयन से सशस्त्र बलों में समाहित किया जाता है।
- सेवा निधि (Seva Nidhi) एक अनिवार्य सेवानिवृत्ति और संक्रमण निधि है, जिसमें अग्निवीर के वेतन का 30% हिस्सा हर माह अग्निवीर कोष (Agniveer Corpus Fund) में जमा होता है और उतना ही योगदान सरकार करती है।
- चार वर्ष की सेवा पूरी होने पर लगभग 11.71 लाख रुपये की एकमुश्त राशि (ब्याज सहित) मिलती है, जो आयकर से मुक्त है; परंतु मासिक पेंशन या ग्रेच्युटी का प्रावधान नहीं है।
- संशोधित योजना में अतिरिक्त दो वर्ष की सेवा करने वाले अग्निवीरों को बढ़ा हुआ वेतन मिलेगा और यदि वे सेना में नहीं जुड़ते तो उन्हें बढ़ा हुआ सेवा निधि पैकेज दिया जाएगा।
- विस्तारित अवधि के अग्निवीर अर्धसैनिक बल, सार्वजनिक उपक्रम (Public Sector Undertakings) या राज्य सरकारों की आरक्षित नौकरियों के अवसर से बाहर होंगे।
- नियमित भर्ती में सीधे खुले चयन के माध्यम से सैनिक भर्ती होती है, जबकि इस संशोधन में नियमित सैनिक बनने का अवसर केवल मौजूदा अग्निवीरों को, सैन्य चयन मानदंडों के आधार पर, दिया जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| 25% अग्निवीरों का योग्यता आधारित चयन | चार वर्ष की सेवा के बाद सशस्त्र बलों में समाहित होने का मूल प्रावधान, जो 2022 की अग्निपथ योजना में पहले से था |
| शेष 75% के लिए दो वर्ष का अतिरिक्त कार्यकाल | सेवा पूरी करने वाले सभी अग्निवीरों को नियमित सैनिक बनने का अवसर मिलता है, बशर्ते वे इच्छुक हों और सेना के वस्तुनिष्ठ चयन मानदंड पूरे करें |
| अतिरिक्त अवधि में बढ़ा हुआ वेतन | विस्तार अवधि में सेवारत अग्निवीरों को अधिक वेतन मिलता है, जिससे सेना में अनुभवी कर्मियों को बनाए रखने का प्रोत्साहन बढ़ता है |
| संशोधित सेवा निधि पैकेज | जो अग्निवीर दो वर्ष बाद सेना में नहीं जुड़ते, उन्हें बढ़े हुए सेवा निधि पैकेज के साथ बाहर जाने का विकल्प मिलता है |
| अर्धसैनिक बलों, सार्वजनिक उपक्रमों और राज्य सरकार की आरक्षित नौकरियों से बाहर रहना | विस्तार अवधि वाले अग्निवीरों के लिए ये अवसर उपलब्ध नहीं होंगे, जो नीति का एक महत्वपूर्ण प्रतिबंधात्मक पक्ष है |
महत्व
सैन्य एवं रणनीतिक
- सशस्त्र बलों में प्रशिक्षित और अनुभवी जवानों को लंबे समय तक बनाए रखने का मार्ग खुलता है, जिससे सेवा की निरंतरता बढ़ती है।
- नियमित सैनिक बनने की संभावना से सैन्य बलों को उन युवाओं में से चुनने का विकल्प मिलता है जिनका प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव पहले से हो चुका है।
सामाजिक-आर्थिक
- चार वर्ष के बाद रोजगार की अनिश्चितता कम होती है, क्योंकि अधिकतम अग्निवीरों के लिए सेवा का विस्तार संभव हो जाता है।
- अग्निवीर कॉर्पस फंड के तहत जमा राशि, जिसमें सरकार का अंशदान भी शामिल है, सेवा से बाहर आने वाले युवाओं को एकमुश्त आर्थिक सहारा देती है।
प्रशासनिक एवं नीति-निर्माण
- इस संशोधन से यह स्पष्ट होता है कि सरकार अग्निपथ योजना को पूरी तरह समाप्त किए बिना उसके ढांचे में समायोजन कर रही है, जो नीति-पुनरावलोकन का उदाहरण है।
- मंत्रिमंडल की स्वीकृति से नीति को औपचारिक रूप मिलता है, जिसके क्रियान्वयन के लिए आगे की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्थाएं आवश्यक होंगी।
चुनौतियाँ
1. नियमित भर्ती से भिन्नता का प्रश्न
- कोविड-पूर्व (Pre-Covid) वर्षों की नियमित भर्ती में बड़ी संख्या में युवाओं का सीधे नियमित सैनिक के रूप में चयन होता था।
- नई व्यवस्था में सभी अग्निवीरों को अवसर मिलता है, पर नियमित सैनिक बनना वस्तुनिष्ठ मानदंडों और उपयुक्तता पर निर्भर है, इसलिए यह स्वतः स्थायी रोजगार की गारंटी नहीं है।
- दो वर्ष का विस्तार एक संविदात्मक अवधि है, इसलिए इसे पूर्ण नियमित भर्ती की वापसी नहीं माना जा सकता।
यूपीएससी लिंक: GS-3: रक्षा और सुरक्षा; रोजगार नीति
2. पेंशन और ग्रेच्युटी का अभाव
- अग्निवीरों को सेवा समाप्त होने पर मासिक पेंशन या ग्रेच्युटी नहीं मिलती।
- सेवा निधि के तहत लगभग 11.71 लाख रुपये की एकमुश्त राशि (ब्याज सहित) मिलती है, जो आयकर से मुक्त है, पर यह दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा का विकल्प नहीं है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: सामाजिक न्याय; सामाजिक सुरक्षा
3. विस्तार अवधि के बाद सीमित विकल्प
- दो वर्ष का विस्तार पाने वाले अग्निवीरों के लिए अर्धसैनिक बलों, सार्वजनिक उपक्रमों और राज्य सरकार की आरक्षित नौकरियों के अवसर उपलब्ध नहीं होंगे।
- इससे सेना से बाहर आने वाले युवाओं के लिए पुनर्नियोजन का दायरा सीमित हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: शासन; सार्वजनिक रोजगार में आरक्षण
4. वित्तीय भार और प्रोत्साहन संरचना
- विस्तार अवधि में बढ़ा हुआ वेतन और संशोधित सेवा निधि पैकेज सरकार के व्यय को बढ़ाते हैं, जिसके लिए राजकोषीय प्रबंधन की आवश्यकता होगी।
- सरकार का अंशदान अग्निवीर कॉर्पस फंड के लिए सुनिश्चित है, पर दीर्घकालिक वित्तीय प्रभाव का आकलन आगे की नीति पर निर्भर करेगा।
यूपीएससी लिंक: GS-3: अर्थव्यवस्था; सार्वजनिक वित्त
5. समानता और मनोबल से जुड़े प्रश्न
- अग्निवीरों और नियमित सैनिकों के बीच सेवा शर्तों, वेतन और सामाजिक सुरक्षा में अंतर बना रहता है।
- समान सेवा के बावजूद भिन्न शर्तें नीति के न्यायसंगत होने और सैन्य मनोबल पर प्रश्न उठा सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-2: संवैधानिक प्रावधान; सामाजिक न्याय
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| नियमित भर्ती से अंतर | सभी को अवसर है, पर चयन वस्तुनिष्ठ मानदंडों पर निर्भर है; कोविड-पूर्व जैसी व्यापक नियमित भर्ती की वापसी नहीं हुई है |
| पेंशन और ग्रेच्युटी का अभाव | सेवा समाप्ति पर एकमुश्त राशि के अलावा कोई नियमित आय या सेवानिवृत्ति लाभ नहीं |
| सीमित पुनर्नियोजन विकल्प | विस्तार अवधि वाले अग्निवीरों के लिए अर्धसैनिक बलों, सार्वजनिक उपक्रमों और राज्य आरक्षण का अवसर नहीं |
| वित्तीय भार | बढ़ा वेतन और संशोधित सेवा निधि पैकेज से सरकारी व्यय में वृद्धि |
| सेवा शर्तों में अंतर | नियमित और अग्निवीर सैनिकों के बीच भिन्न शर्तें समानता और मनोबल पर प्रश्न उठा सकती हैं |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme)
- अग्निवीर कॉर्पस फंड (Agniveer Corpus Fund) और सेवा निधि पैकेज (Seva Nidhi Package)
आगे की राह
- नियमित सैनिक बनने के वस्तुनिष्ठ चयन मानदंड पारदर्शी रूप से प्रकाशित किए जाएं, ताकि अग्निवीरों को अपनी स्थिति का पूर्वानुमान हो सके।
- विस्तार अवधि के बाद सेना से बाहर आने वाले अग्निवीरों के लिए कौशल विकास और नागरिक रोजगार में संक्रमण सहायता सुनिश्चित की जाए।
- अग्निवीरों की सेवा, चयन और पुनर्नियोजन से जुड़े आंकड़ों का नियमित संकलन और सार्वजनिक प्रकाशन हो, ताकि नीति का मूल्यांकन संभव हो।
- सेवा समाप्ति पर पेंशन न मिलने की स्थिति में सामाजिक सुरक्षा के वैकल्पिक उपायों पर विचार किया जाए।
- अर्धसैनिक बलों, सार्वजनिक उपक्रमों और राज्य सरकारों के साथ समन्वय करके पुनर्नियोजन के अवसरों का दायरा बढ़ाने पर विचार किया जाए।
- विस्तार अवधि के वेतन और सेवा निधि पैकेज के वित्तीय प्रभाव का दीर्घकालिक आकलन कर राजकोषीय योजना बनाई जाए।
- अग्निवीरों और नियमित सैनिकों की सेवा शर्तों में अंतर के संबंध में शिकायत निवारण की स्पष्ट व्यवस्था हो।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) · अग्निवीर · नियमित भर्ती · सेवा निधि (Seva Nidhi) · अग्निवीर कॉर्पस फंड (Agniveer Corpus Fund) · सशस्त्र सेना और नागरिक-सैन्य संबंध · संघ सूची की प्रविष्टि 2 (Union List Entry 2) · सेवा-शर्तें और सामाजिक सुरक्षा · रक्षा सुधार और रक्षा मंत्रालय का सैन्य कार्य विभाग · युवा जनसांख्यिकीय लाभांश
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 33: सशस्त्र बल कर्मियों के अधिकारों का उपांतरण
- अनुच्छेद 309: संघ के सेवकों की सेवा शर्तों का विनियमन
- अनुच्छेद 14: विभिन्न श्रेणी के सैनिकों के बीच समानता का प्रश्न
अवधारणा प्रवाह
2022 में अग्निपथ योजना के तहत 17.5 से 21 वर्ष के युवाओं की चार वर्ष की सेवा के लिए भर्ती शुरू हुई। → चार वर्ष पूरे होने पर पहले बैच की विदाई का समय आया, जिसमें सेवा निधि पैकेज के तहत एकमुश्त राशि दी जाती है। → केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अग्निवीरों के लिए नियमित सैनिक बनने का मार्ग स्वीकृत किया। → 25% अग्निवीरों का योग्यता आधारित चयन और शेष 75% के लिए दो वर्ष का अतिरिक्त कार्यकाल तय हुआ। → विस्तार अवधि में वेतन बढ़ता है; नियमित सैनिक बनना वस्तुनिष्ठ मानदंडों और उपयुक्तता पर निर्भर है। → जो अग्निवीर सेना में नहीं जुड़ते, उन्हें संशोधित सेवा निधि पैकेज मिलता है, पर अर्धसैनिक, सार्वजनिक उपक्रम और राज्य आरक्षण के अवसर नहीं रहते।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अग्निपथ योजना के अंतर्गत 17 वर्ष 6 मास से 21 वर्ष की आयु के अभ्यर्थी चार वर्ष की अवधि के लिए सशस्त्र सेनाओं में भर्ती हो सकते हैं।
2. सेवा निधि पैकेज के अंतर्गत अग्निवीर अपने वेतन का 30 प्रतिशत अग्निवीर कॉर्पस फंड में जमा करता है, जिसे सरकार द्वारा समान राशि से मिलाया जाता है।
3. चार वर्ष की सेवा पूर्ण करने के बाद अग्निवीरों को मासिक पेंशन और ग्रेच्युटी दोनों का लाभ मिलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: अग्निपथ योजना में आयु सीमा 17 वर्ष 6 मास से 21 वर्ष है और सेवा-अवधि चार वर्ष है। कथन 2 सही है: सेवा निधि के अंतर्गत वेतन का 30 प्रतिशत कटौती के रूप में अग्निवीर कॉर्पस फंड में जाता है और सरकार उतना ही योगदान करती है। कथन 3 गलत है: अग्निवीरों को सेवा-समाप्ति पर मासिक पेंशन या ग्रेच्युटी नहीं मिलती, केवल एकमुश्त राशि (लगभग 11.71 लाख रुपये, ब्याज सहित) मिलती है।
Q2. निम्नलिखित में से प्रत्येक में एक अभिकथन (A) और एक कारण (R) दिया गया है।
अभिकथन (A): भारत की सशस्त्र सेनाएँ संघ के नियंत्रण में रहती हैं।
कारण (R): रक्षा और सशस्त्र बल (नौसेना, सेना और वायु सेना) संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची में सम्मिलित हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — संघ सूची की प्रविष्टि 1 में भारत की रक्षा और प्रविष्टि 2 में नौसेना, सेना, वायु सेना तथा अन्य सशस्त्र बल संघ के विषय हैं। इसी कारण सशस्त्र सेनाएँ संघ के नियंत्रण में हैं, अतः कारण अभिकथन की सही व्याख्या है। रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत सैन्य कार्य विभाग इसी संवैधानिक ढाँचे पर कार्य करता है।
Q3. संविधान का वह अनुच्छेद कौन-सा है, जो संसद को यह शक्ति देता है कि वह विधि द्वारा सशस्त्र बलों के सदस्यों के मूल अधिकारों को, उनके कर्तव्यों के उचित निर्वहन और अनुशासन बनाए रखने के लिए, निर्बंधित या संशोधित कर सके?
(क) अनुच्छेद 19
(ख) अनुच्छेद 23
(ग) अनुच्छेद 33
(घ) अनुच्छेद 368
- अनुच्छेद 19
- अनुच्छेद 23
- अनुच्छेद 33
- अनुच्छेद 368
उत्तर: अनुच्छेद 33 — अनुच्छेद 33 संसद को सशस्त्र बलों, पुलिस बलों और समान सेवाओं के सदस्यों के मूल अधिकारों को विधि द्वारा सीमित या संशोधित करने की शक्ति देता है। अनुच्छेद 19 स्वतंत्रता के अधिकार से, अनुच्छेद 23 शोषण के विरुद्ध अधिकार से और अनुच्छेद 368 संविधान संशोधन की प्रक्रिया से संबंधित है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सरकार द्वारा अग्निपथ योजना में किया गया संशोधन, जिसके अंतर्गत सभी अग्निवीरों को सशस्त्र बलों में नियमित सैनिक के रूप में सम्मिलित होने का अवसर दिया गया है, यह स्पष्ट करता है कि सशस्त्र बल पूर्व-महामारी काल की नियमित भर्ती प्रणाली की ओर लौट रहे हैं। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और संशोधित योजना की नियमित भर्ती से तुलना कर यह भी बताइए कि अल्पकालिक सेवा-मॉडल से नियमित सैन्य-सेवा तक का यह परिवर्तन सशस्त्र बलों की व्यावसायिकता, सामाजिक सुरक्षा और युवा नीति पर क्या प्रभाव डालता है। (15 Marks)
रूपरेखा: MODEL-ANSWER SKELETON:
(1) परिचय: अग्निपथ योजना (जून 2022 में घोषित) के अंतर्गत चार वर्ष की सेवा-अवधि, आयु सीमा 17 वर्ष 6 मास से 21 वर्ष और 2026 के संशोधन का तथ्यात्मक सार; स्पष्ट कीजिए कि यह संशोधन सभी अग्निवीरों के लिए नियमित सैनिक बनने का अवसर खोलता है, किंतु सभी को स्वतः नियुक्ति की गारंटी नहीं देता।
(2) संशोधन की संरचना: 25 प्रतिशत अग्निवीरों का योग्यता के आधार पर चार वर्ष पर अवशोषण (मूल योजना का भाग); शेष 75 प्रतिशत को अतिरिक्त दो वर्ष की सेवा; इस विस्तारित अवधि में बढ़ा हुआ वेतन और सेवा निधि पैकेज; अर्ध-सैनिक बलों, सार्वजनिक उपक्रमों और आरक्षण आधारित राज्य सरकारी नौकरियों के विकल्प समाप्त।
(3) नियमित भर्ती से अंतर: नियमित भर्ती में सैनिक सेवा-काल के आरंभ से दीर्घकालिक पद पर होता है; पेंशन, ग्रेच्युटी और ‘वन रैंक वन पेंशन’ (2015 से लागू) जैसे लाभ लागू होते हैं। संशोधित योजना में सेवा-समाप्ति पर मासिक पेंशन या ग्रेच्युटी नहीं मिलती; केवल एकमुश्त सेवा निधि (लगभग 11.71 लाख रुपये, कर-मुक्त) और 30 प्रतिशत अंशदान पर सरकारी मिलान। अतः पूर्ण पुनर्वापसी नहीं, बल्कि चयन-आधारित संक्रमण है।
(4) संवैधानिक और प्रशासनिक आधार: संघ सूची प्रविष्टि 1 और 2; अनुच्छेद 33 के अंतर्गत सशस्त्र बलों के सदस्यों के अधिकारों पर विधिक सीमा; रक्षा मंत्रालय का सैन्य कार्य विभाग; कार्यकारी शक्ति (अनुच्छेद 73) और मंत्रिपरिषद की सलाह (अनुच्छेद 74) के माध्यम से निर्णय-प्रक्रिया।
(5) सशस्त्र बलों की व्यावसायिकता: कार्य-क्षमता, युवा और तकनीकी दक्षता के लाभ बनाम अनुभवी और प्रशिक्षित जनशक्ति के क्षरण का जोखिम; पूर्व-सैनिकों की रिटेंशन दर का अवलोकन (आँकड़ों का उल्लेख केवल समाचार में दिए गए अनुसार)। शेष 75 प्रतिशत के लिए सेवा-समाप्ति के बाद कौशल और पुनर्नियोजन पर ध्यान।
(6) विभिन्न दृष्टिकोण: समर्थक पक्ष: युवा जनसांख्यिकीय लाभांश, व्यय-नियंत्रण (पेंशन देयता), अनुशासित और आधुनिक बल। आलोचक पक्ष: सेवा-सुरक्षा का अभाव, अनिश्चित करियर, आरक्षण-लाभ का सीमित होना, अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा पर प्रश्न। वेतन-पेंशन और सेवा निधि की तुलना से निष्कर्ष।
(7) निष्कर्ष: संतुलित मत देते हुए बताइए कि संशोधन नियमित भर्ती का प्रतिस्थापन नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सैन्य-जनशक्ति नीति के लिए एक मध्यवर्ती सुधार है, और इसकी सफलता पारदर्शी चयन, पुनर्वास और सेवा-शर्तों की विश्वसनीयता पर निर्भर है।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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