07 Nov भारत-हंगरी संबंध: व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी में सहयोग

✎ यूरोपीय संघ में व्यापार नीति संघ के अधिकार में है, जबकि निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग में सदस्य देशों के साथ द्विपक्षीय संवाद अधिक प्रत्यक्ष भूमिका निभाता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (भारत और यूरोपीय देशों के द्विपक्षीय संबंध; भारत-यूरोपीय संघ संबंध) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (विदेशी प्रत्यक्ष निवेश, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, व्यापार समझौते)
- Prelims: हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट; यूरोपीय संघ और नाटो (NATO) के सदस्य, विसेग्राद समूह (Visegrad Group) — मध्य यूरोप के चार देशों का क्षेत्रीय मंच, अनुच्छेद 207 (TFEU) — यूरोपीय संघ के अंतर्गत व्यापार नीति पर अनन्य अधिकार, भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और निवेश समझौता (BTIA) वार्ता — जून 2022 में पुनः आरंभ, द्विपक्षीय निवेश संधि (Bilateral Investment Treaty) और दोहरा कराधान परिहार समझौता (DTAA), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (DPIIT), विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) और स्थलरुद्ध देश की अवधारणा
- Essay: आर्थिक कूटनीति: द्विपक्षीय साझेदारी बहुपक्षीय व्यापार वार्ताओं की पूरक कैसे बन सकती है?, क्षेत्रीय व्यापार ब्लॉकों के युग में देश-स्तरीय निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: यूरोपीय संघ में व्यापार नीति संघ के अधिकार में है, जबकि निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग में सदस्य देशों के साथ द्विपक्षीय संवाद अधिक प्रत्यक्ष भूमिका निभाता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद की हंगरी यात्रा की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इस यात्रा का उद्देश्य व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करना है। उपलब्ध विज्ञप्ति में यात्रा के विशिष्ट परिणामों, हस्ताक्षरित समझौतों या आंकड़ों का उल्लेख नहीं है, इसलिए परीक्षा की दृष्टि से इस समाचार का केंद्र यह है कि भारत यूरोपीय संघ के भीतर एक सदस्य देश के साथ आर्थिक संबंधों को किस प्रकार विकसित कर रहा है। यूरोपीय संघ में व्यापार नीति का अधिकार संघ के पास है, जबकि निवेश, नवाचार और तकनीकी सहयोग में सदस्य देशों की भूमिका अधिक प्रत्यक्ष होती है। इसी संदर्भ में यह यात्रा महत्त्वपूर्ण है।
पृष्ठभूमि
- भारत और हंगरी के बीच राजनयिक संबंध 1948 से स्थापित हैं। दोनों देशों के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक और तकनीकी सहयोग की एक लंबी परंपरा रही है।
- हंगरी यूरोपीय संघ का सदस्य है (2004 से) और नाटो का सदस्य भी है। मध्य यूरोप में वह भारत के लिए एक प्रवेश-द्वार के रूप में देखा जाता है।
- यूरोपीय संघ में व्यापार वार्ता का अधिकार संघ के पास है। इसलिए भारत की प्रमुख व्यापार वार्ता यूरोपीय संघ के स्तर पर होती है, जबकि सदस्य देशों के साथ निवेश, उच्च प्रौद्योगिकी और उद्योग-सहयोग पर अलग से बल दिया जाता है।
- भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और निवेश समझौते की वार्ता जून 2022 में पुनः आरंभ हुई थी। इस पृष्ठभूमि में सदस्य देशों के साथ द्विपक्षीय आर्थिक संवाद का महत्त्व बढ़ा है।
- स्थलरुद्ध (landlocked) होने के बावजूद हंगरी डेन्यूब नदी और यूरोपीय परिवहन गलियारों के कारण मध्य यूरोप का एक महत्त्वपूर्ण औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स केंद्र माना जाता है।
द्विपक्षीय आर्थिक कूटनीति क्या है?
- द्विपक्षीय आर्थिक कूटनीति का अर्थ है दो देशों के बीच व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और उद्योग के क्षेत्र में संस्थागत और नीतिगत संवाद के माध्यम से आर्थिक हितों को आगे बढ़ाना।
- इसमें मंत्री-स्तरीय यात्राएँ, संयुक्त आर्थिक आयोग, व्यापार प्रतिनिधिमंडल और व्यावसायिक संगठनों के बीच संवाद जैसे उपकरण प्रयुक्त होते हैं।
- व्यापार नीति और निवेश नीति अलग-अलग विषय हैं। व्यापार समझौते प्रायः शुल्क और बाज़ार पहुँच से संबंधित होते हैं, जबकि निवेश संधियाँ निवेशकों के संरक्षण और विवाद समाधान पर केंद्रित होती हैं।
- यूरोपीय संघ की सदस्यता के कारण हंगरी की व्यापार नीति संघ के साझा नियमों से बंधी है, परंतु निवेश आकर्षण, अनुसंधान एवं विकास सहयोग और तकनीकी साझेदारी में उसकी अपनी भूमिका होती है।
- प्रौद्योगिकी सहयोग में सूचना प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्टार्टअप, उन्नत विनिर्माण और अर्धचालक जैसे क्षेत्र प्रायः प्राथमिकता में रहते हैं।
- भारत के लिए ऐसी साझेदारी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के स्रोतों में विविधता लाने, विनिर्माण क्षमता बढ़ाने और आपूर्ति शृंखला को संतुलित करने में सहायक मानी जाती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| यात्रा का स्वरूप | वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के राज्य मंत्री द्वारा द्विपक्षीय आर्थिक कूटनीति (Economic Diplomacy) का उच्चस्तरीय संपर्क |
| तीन केंद्रीय क्षेत्र | व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी, अर्थात द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के तीनों स्तंभ एक साथ |
| हंगरी की भौगोलिक-आर्थिक स्थिति | यूरोपीय संघ (European Union, EU) का सदस्य देश होने के कारण मध्य यूरोप के बड़े बाजार तक पहुँच का माध्यम |
| संस्थागत मंच | संयुक्त आर्थिक आयोग, निवेश संवर्धन वार्ता और व्यापार संवर्धन संवाद जैसे द्विपक्षीय तंत्रों के माध्यम से नीतिगत समन्वय |
| नीतिगत उद्देश्य | यूरोप के भीतर भारत के आर्थिक संबंधों का विविधीकरण और आपूर्ति शृंखला में जोखिम का संतुलन |
महत्व
आर्थिक
- द्विपक्षीय व्यापार और निवेश प्रवाह को बढ़ाकर भारत की आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) में योगदान
- यूरोपीय बाजार में भारतीय निर्यातकों के लिए प्रवेश की संभावनाओं को सुदृढ़ करना
- निर्माण, ऑटोमोबाइल और फार्मा जैसे क्षेत्रों में संयुक्त उपक्रम और निवेश के अवसर खोलना
प्रौद्योगिकीय
- नवाचार, अनुसंधान एवं विकास (Research and Development, R&D) और उच्च प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ावा
- डिजिटल और औद्योगिक प्रौद्योगिकी में साझेदारी से भारत की उत्पादन क्षमता का उन्नयन
सामरिक एवं कूटनीतिक
- मध्य और पूर्वी यूरोप के देशों के साथ भारत के संबंधों में विस्तार और संतुलन
- यूरोपीय संघ के साथ व्यापक आर्थिक संबंधों के लिए द्विपक्षीय स्तर पर अनुकूल वातावरण तैयार करना
बहुपक्षीय
- भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement, FTA) की वार्ता के संदर्भ में द्विपक्षीय अनुभवों का उपयोगी प्रयोग
- विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization, WTO) के नियमों के अनुरूप व्यापार संबंधों को सुदृढ़ करना
चुनौतियाँ
1. यूरोपीय संघ के नियमों के साथ तालमेल
- हंगरी के माध्यम से होने वाले व्यापार पर यूरोपीय संघ के साझा नियम, मानक और शुल्क नीति लागू होती है
- द्विपक्षीय पहल और संघ-स्तरीय वार्ता के बीच समन्वय की आवश्यकता होती है
यूपीएससी लिंक: GS-2: भारत के हित और यूरोपीय संघ के साथ संबंध
2. गैर-शुल्क बाधाएँ और मानक
- तकनीकी मानक, स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता उपाय तथा प्रमाणन प्रक्रियाएँ निर्यात में अड़चन बन सकती हैं
- छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए अनुपालन लागत अधिक होती है
यूपीएससी लिंक: GS-3: अंतरराष्ट्रीय व्यापार और उद्योग
3. निवेश वातावरण और नियामकीय पारदर्शिता
- निवेशकों के लिए कर संरचना, अनुमति प्रक्रिया और विवाद समाधान तंत्र की स्पष्टता आवश्यक है
- द्विपक्षीय निवेश संधियों का प्रभावी क्रियान्वयन निवेशक विश्वास के लिए महत्वपूर्ण है
यूपीएससी लिंक: GS-3: निवेश मॉडल और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (Foreign Direct Investment, FDI)
4. प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और बौद्धिक संपदा अधिकार
- उन्नत प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण में बौद्धिक संपदा अधिकारों की संरक्षा और लाइसेंसिंग शर्तों पर संतुलन आवश्यक है
- घरेलू नवाचार क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए संयुक्त अनुसंधान का ढाँचा स्पष्ट होना चाहिए
यूपीएससी लिंक: GS-3: विज्ञान-प्रौद्योगिकी और बौद्धिक संपदा अधिकार
5. व्यापार असंतुलन और आपूर्ति शृंखला की निर्भरता
- द्विपक्षीय व्यापार में असमान संरचना से भारत के पक्ष में व्यापार संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है
- महत्वपूर्ण घटकों के लिए किसी एक देश या क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता का जोखिम बना रहता है
यूपीएससी लिंक: GS-3: आपूर्ति शृंखला की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| यूरोपीय संघ नियम | द्विपक्षीय पहल और संघ-स्तरीय नीति के बीच असंगति का जोखिम |
| गैर-शुल्क बाधाएँ | तकनीकी मानक और प्रमाणन से निर्यात लागत और समय में वृद्धि |
| निवेश पारदर्शिता | नियामकीय अनिश्चितता से दीर्घकालिक निवेश पर प्रभाव |
| बौद्धिक संपदा | प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में अधिकार और लाभ का असंतुलन |
| व्यापार असंतुलन | एकपक्षीय निर्यात संरचना से व्यापार घाटे की स्थिति |
आगे की राह
- द्विपक्षीय व्यापार संवाद में गैर-शुल्क बाधाओं की पहचान कर उनके समाधान के लिए संयुक्त कार्य समूह गठित किए जाएँ
- भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय संघ के मानकों और प्रमाणन प्रक्रियाओं की जानकारी देने हेतु क्षमता-निर्माण कार्यक्रम चलाए जाएँ
- निवेश संधियों के क्रियान्वयन में विवाद समाधान तंत्र को स्पष्ट और समयबद्ध बनाया जाए
- संयुक्त अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं में बौद्धिक संपदा के साझा स्वामित्व और लाभ-वितरण की स्पष्ट व्यवस्था हो
- एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) को यूरोपीय आपूर्ति शृंखला से जोड़ने के लिए सहायक ढाँचा विकसित किया जाए
- व्यापार असंतुलन को कम करने हेतु उच्च मूल्य-वर्धित उत्पादों के निर्यात पर बल दिया जाए
- आपूर्ति शृंखला के विविधीकरण के लिए हंगरी जैसे मध्य यूरोपीय भागीदारों के साथ दीर्घकालिक योजना बनाई जाए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade) · विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (Foreign Direct Investment) · मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement) · व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (Comprehensive Economic and Trade Agreement) · यूरोपीय संघ (European Union) · द्विपक्षीय निवेश संधि (Bilateral Investment Treaty) · संधि-निर्माण शक्ति (Treaty-making Power) · आर्थिक कूटनीति (Economic Diplomacy) · प्रौद्योगिकी सहयोग (Technology Cooperation) · आपूर्ति शृंखला लचीलापन (Supply Chain Resilience) · व्यापार उपचार (Trade Remedies) · विसेग्राद समूह (Visegrad Group)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 51: अंतरराष्ट्रीय संधि दायित्वों के सम्मान का निर्देश
- अनुच्छेद 253: संधियों के क्रियान्वयन हेतु संसद की विधायी शक्ति
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 14: विदेशों के साथ संधियों में प्रवेश
अवधारणा प्रवाह
भारत और हंगरी के बीच द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को गहरा करने का नीतिगत उद्देश्य तय होता है → वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के राज्य मंत्री के स्तर पर व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी के मुद्दों पर संवाद होता है → संवाद से व्यापार और निवेश बाधाओं की पहचान और समाधान की दिशा तय होती है → संयुक्त पहल और निवेश अवसरों से द्विपक्षीय व्यापार एवं प्रौद्योगिकी सहयोग में वृद्धि की संभावना बनती है → यूरोपीय संघ के बाजार तक पहुँच और आपूर्ति शृंखला के विविधीकरण से भारत की आर्थिक संवृद्धि को सहायता मिलती है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हंगरी यूरोपीय संघ का सदस्य देश है और शेंगेन क्षेत्र का भी हिस्सा है।
2. हंगरी की मुद्रा यूरो है।
3. हंगरी विसेग्राद समूह का सदस्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: हंगरी 2004 से यूरोपीय संघ का सदस्य है और शेंगेन क्षेत्र में शामिल है। कथन 2 गलत है, क्योंकि हंगरी की आधिकारिक मुद्रा फ़ोरिंट (Forint) है, यूरो नहीं। कथन 3 सही है, क्योंकि हंगरी विसेग्राद समूह (पोलैंड, चेक गणराज्य, स्लोवाकिया और हंगरी) का सदस्य है।
Q2. निम्नलिखित में से प्रत्येक को कथन (A) और कारण (R) के रूप में दिया गया है।
कथन (A): द्विपक्षीय निवेश संधियाँ विदेशी निवेशकों को एक स्तर तक कानूनी सुरक्षा प्रदान करती हैं।
कारण (R): ऐसी संधियों में आम तौर पर न्यायसंगत एवं समान व्यवहार (Fair and Equitable Treatment) और अधिग्रहण की स्थिति में क्षतिपूर्ति से जुड़े प्रावधान होते हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं है
- (A) सही है, लेकिन (R) गलत है
- (A) गलत है, लेकिन (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है — द्विपक्षीय निवेश संधियाँ निवेशक-संरक्षण का प्रमुख साधन हैं और इनमें न्यायसंगत व्यवहार तथा अधिग्रहण पर उचित क्षतिपूर्ति जैसे प्रावधान शामिल होते हैं। कारण (R) इसी संरक्षण की विषय-वस्तु को सही तरह से समझाता है, इसलिए (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है।
Q3. निम्नलिखित सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए:
सूची-I
A. व्यापार उपचार महानिदेशालय (Directorate General of Trade Remedies)
B. विसेग्राद समूह (Visegrad Group)
C. शेंगेन क्षेत्र (Schengen Area)
सूची-II
i. मध्य यूरोपीय देशों का सहयोग-मंच
ii. पाटनरोधी एवं प्रतिकारी शुल्क से जुड़ी जाँच
iii. सीमा-नियंत्रण के बिना आवाजाही वाला यूरोपीय क्षेत्र
सही सुमेलन चुनिए:
- A-i, B-ii, C-iii
- A-ii, B-i, C-iii
- A-iii, B-i, C-ii
- A-ii, B-iii, C-i
उत्तर: A-ii, B-i, C-iii — व्यापार उपचार महानिदेशालय पाटनरोधी (Anti-dumping) और प्रतिकारी शुल्क (Countervailing Duty) से जुड़ी जाँच करता है, इसलिए A-ii सही है। विसेग्राद समूह मध्य यूरोपीय देशों का सहयोग-मंच है (B-i) और शेंगेन क्षेत्र में सीमा-नियंत्रण के बिना आवाजाही होती है (C-iii)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत का यूरोपीय संघ के किसी सदस्य देश के साथ द्विपक्षीय आर्थिक जुड़ाव और संघ के स्तर पर व्यापार वार्ताएँ एक साथ चल सकती हैं। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या ऐसे द्विपक्षीय प्रयास संघ-स्तरीय वार्ता के पूरक हैं या उसमें बाधा बन सकते हैं? भारत की संधि-निर्माण की संवैधानिक प्रक्रिया के संदर्भ में उत्तर दीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की रूपरेखा: (1) भूमिका: हंगरी यात्रा जैसे द्विपक्षीय संपर्कों को व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग के संदर्भ में रखें; हंगरी यूरोपीय संघ का सदस्य है (2004 से), इसलिए उसके साथ व्यापार नीति के कुछ निर्णय संघ-स्तर पर होते हैं। (2) संवैधानिक ढाँचा: अनुच्छेद 246 के अंतर्गत विषय-वितरण; संघ सूची की प्रविष्टि 41 (विदेशों के साथ व्यापार और वाणिज्य; सीमा-शुल्क पार आयात-निर्यात) का उल्लेख करें; अनुच्छेद 73 के अंतर्गत संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार; अनुच्छेद 253 के अंतर्गत संसद द्वारा अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने की शक्ति; और यह स्पष्ट करें कि संधि-निर्माण कार्यपालिका का विशेषाधिकार है, जबकि उसे लागू करने हेतु विधायी समर्थन आवश्यक हो सकता है। (3) संस्थागत पक्ष: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, वाणिज्य विभाग, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) तथा व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) की भूमिकाएँ। (4) समकालीन संदर्भ: भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार वार्ताओं का पुनरारंभ (2022) और भारत-EFTA व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (TEPA) का लागू होना, जिनके साथ द्विपक्षीय संपर्क तुलनात्मक दृष्टि से रखें। (5) पक्ष-विपक्ष: द्विपक्षीय संपर्क से तकनीकी सहयोग, निवेश-प्रवाह और आपूर्ति शृंखला विविधीकरण बढ़ता है; दूसरी ओर संघ-स्तरीय मानकों, विनियामक एकरूपता और शुल्क-रियायतों में असंगति की चुनौती उठ सकती है। (6) निष्कर्ष: संतुलित दृष्टिकोण अपनाएँ, जिसमें द्विपक्षीय संपर्क को संघ-स्तरीय वार्ता के पूरक के रूप में देखा जाए और विधायी-कार्यपालिका समन्वय पर बल दिया जाए।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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