07 Nov तमिलनाडु की ‘வெற்றி’ लैपटॉप योजना: ₹2,000 करोड़ का आवंटन
✎ राज्य का हर व्यय राज्य की संचित निधि (अनुच्छेद 266) से होता है और विधानमंडल द्वारा अनुदान की मांगों की स्वीकृति तथा विनियोग विधेयक के पारित होने के बाद ही किया जा सकता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन (Governance): राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाएँ, राज्य एवं केंद्र की भूमिका, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer / DBT) से जुड़े प्रश्न | GS Paper II — सामाजिक क्षेत्र (Social Sector): शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी हस्तक्षेप और छात्रों के लिए सहायता योजनाएँ | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (Economy): सार्वजनिक व्यय की गुणवत्ता, राजकोषीय प्रबंधन और डिजिटल विभाजन (Digital Divide) का आर्थिक प्रभाव
- Prelims: राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of State) — अनुच्छेद 266, वार्षिक वित्तीय विवरण (Annual Financial Statement) — अनुच्छेद 202, विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) — अनुच्छेद 204, अनुदान की मांगें (Demands for Grants) और विधानमंडल द्वारा उनकी स्वीकृति, अनुच्छेद 282 — संघ या राज्य द्वारा लोक प्रयोजन के लिए व्यय, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer / DBT), डिजिटल विभाजन (Digital Divide), पूरक अनुदान (Supplementary Grants) और अधिक व्यय की प्रक्रिया
- Essay: कल्याणकारी योजनाएँ और राजकोषीय अनुशासन: सीमित संसाधनों में प्राथमिकता का निर्धारण, डिजिटल समावेशन: तकनीक तक पहुँच शिक्षा में समानता का आधार कैसे बन सकती है
त्वरित पुनरावृत्ति: राज्य का हर व्यय राज्य की संचित निधि (अनुच्छेद 266) से होता है और विधानमंडल द्वारा अनुदान की मांगों की स्वीकृति तथा विनियोग विधेयक के पारित होने के बाद ही किया जा सकता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
तमिलनाडु सरकार की वेट्री लैपटॉप योजना (Vetri Laptop Scheme) के लिए रु. 2,000 करोड़ के आवंटन की खबर 7 नवंबर 2026 को सार्वजनिक हुई। यह योजना राज्य की ओर से छात्रों को लैपटॉप उपलब्ध कराने के उद्देश्य से है, और इसका उल्लेख इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इससे राज्य के बजट में डिजिटल शिक्षा के लिए बड़े पैमाने पर धनराशि के प्रावधान का संकेत मिलता है। समाचार रिपोर्ट में योजना के पात्रता मानदंड, लाभार्थियों की संख्या, वितरण की समय-सारणी और कार्यान्वयन की व्यवस्था का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है, इसलिए परीक्षार्थियों को इन बिंदुओं के लिए आधिकारिक सरकारी दस्तावेज़ और बजट विवरण देखने चाहिए।
पृष्ठभूमि
- भारत में राज्य सरकारें शिक्षा और डिजिटल पहुँच से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से छात्रों को सहायता देती रही हैं। तमिलनाडु में इससे पहले भी सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए मुफ़्त लैपटॉप वितरण की योजना लागू रही है, जिसे नई योजना के संदर्भ में तुलनात्मक रूप से समझा जा सकता है।
- राज्य सरकार का कोई भी व्यय राज्य की संचित निधि से होता है। संविधान के अनुच्छेद 266 के तहत राज्य की सभी राजस्व प्राप्तियाँ, उधार और ऋण इसी निधि में जमा होते हैं, और इससे कोई भी व्यय विधानमंडल की स्वीकृति के बिना नहीं किया जा सकता।
- बजट प्रक्रिया में राज्यपाल वार्षिक वित्तीय विवरण प्रस्तुत करवाते हैं (अनुच्छेद 202)। इसके बाद विभिन्न विभागों की अनुदान की मांगों पर विधानसभा में चर्चा और मतदान होता है, और स्वीकृत राशि के लिए विनियोग विधेयक पारित किया जाता है (अनुच्छेद 204)।
- डिजिटल विभाजन आज भी भारत में एक वास्तविक चुनौती है। आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों और ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए व्यक्तिगत उपकरणों तक पहुँच सीमित होती है, जिससे ऑनलाइन शिक्षा और कौशल-विकास के अवसर असमान हो जाते हैं।
- केंद्र सरकार की डिजिटल इंडिया पहल (Digital India) और राज्य स्तर की योजनाएँ मिलकर डिजिटल साक्षरता और अवसंरचना के विस्तार का लक्ष्य रखती हैं, जिससे राज्य-स्तरीय योजनाओं को व्यापक नीतिगत ढाँचे के भीतर देखना उपयोगी होता है।
राज्य बजट में लैपटॉप जैसी योजनाओं के आवंटन की प्रक्रिया क्या है?
- राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of State) से किया गया हर व्यय विधानमंडल की स्वीकृति से होता है, जो संविधान के अनुच्छेद 266 पर आधारित है।
- राज्य का वार्षिक बजट वार्षिक वित्तीय विवरण (Annual Financial Statement) के रूप में राज्यपाल द्वारा विधानमंडल के समक्ष रखवाया जाता है, जैसा अनुच्छेद 202 में वर्णित है।
- विभिन्न योजनाओं के लिए धनराशि अनुदान की मांगों (Demands for Grants) के माध्यम से मांगी जाती है, जिन पर सदन में चर्चा और मतदान होता है।
- स्वीकृत मांगों के आधार पर विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) पारित होता है, जो अनुच्छेद 204 के अंतर्गत आता है और संचित निधि से धनराशि निकालने का वैधानिक आधार देता है।
- यदि बजट में प्रावधान अपर्याप्त पड़े, तो पूरक अनुदान (Supplementary Grants) के माध्यम से अतिरिक्त व्यय की स्वीकृति ली जा सकती है।
- शिक्षा-सहायता योजनाएँ आमतौर पर लाभार्थियों तक प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer / DBT) या वस्तु के सीधे वितरण के माध्यम से पहुँचती हैं; कार्यान्वयन की विधि योजना के दिशानिर्देशों पर निर्भर करती है।
- सार्वजनिक व्यय का औचित्य लोक प्रयोजन के सिद्धांत से जुड़ा है, जिसे अनुच्छेद 282 के संदर्भ में भी समझा जाता है।
- डिजिटल उपकरणों के वितरण से डिजिटल विभाजन को कम करने का लक्ष्य रखा जाता है, परंतु इसकी सफलता इंटरनेट पहुँच, प्रशिक्षण और रखरखाव पर भी निर्भर करती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| घोषित आवंटन | तमिलनाडु सरकार ने वेत्री लैपटॉप योजना (Vetri Laptop Scheme) के लिए ₹2,000 करोड़ का आवंटन किया है। यह राज्य के बजट से किया गया सार्वजनिक व्यय है। |
| योजना का स्वरूप | यह राज्य स्तर की शैक्षिक-डिजिटल योजना है, जिसका उद्देश्य छात्रों तक डिजिटल उपकरणों की पहुँच बढ़ाना है। पात्रता, लाभार्थी संख्या और वितरण प्रक्रिया के विवरण स्रोत में उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए परीक्षा हेतु इन्हें आधिकारिक दिशा-निर्देशों से सत्यापित करें। |
| वित्तीय स्रोत | ऐसी योजनाएँ राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund) से वित्त पोषित होती हैं, जिसके लिए विधानमंडल की स्वीकृति आवश्यक होती है। इसलिए इसका प्रभाव राज्य के बजट और व्यय-प्राथमिकताओं पर दिखता है। |
| नीतिगत क्षेत्र | शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय है, फिर भी राज्य अपने क्षेत्राधिकार में प्रावधान कर सकते हैं। इस दृष्टि से यह राज्य की सक्रिय शैक्षिक भूमिका को दर्शाता है। |
| उद्देश्य-संकेत | डिजिटल उपकरण सीखने के माध्यम, ऑनलाइन संसाधनों और कौशल-विकास तक पहुँच के लिए आवश्यक हैं, अतः यह योजना शिक्षा में अवसर की समानता से जुड़ती है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- डिजिटल उपकरणों तक पहुँच से छात्रों की कौशल क्षमता बढ़ती है, जो मानव पूंजी निर्माण (Human Capital Formation) का आधार है।
- दीर्घकाल में शिक्षित और डिजिटल रूप से दक्ष कार्यबल राज्य की आर्थिक संवृद्धि और सेवा-क्षेत्र के विस्तार में सहायक हो सकता है।
सामाजिक महत्व
- आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा और तकनीकी पाठ्यक्रमों में सहभागिता आसान हो सकती है।
- शिक्षा में अवसर की समानता को सुदृढ़ करने से सामाजिक गतिशीलता (Social Mobility) को बढ़ावा मिलता है।
प्रशासनिक और संघीय महत्व
- राज्य द्वारा अपने बजट से शिक्षा-संबंधी योजना चलाना राज्य की नीतिगत स्वायत्तता और लोक व्यय प्रबंधन का उदाहरण है।
- ऐसी योजनाओं में बजट आवंटन, लक्ष्यीकरण और मूल्यांकन की पारदर्शी प्रक्रिया लोक वित्त प्रबंधन (Public Financial Management) के सिद्धांतों से जुड़ती है।
चुनौतियाँ
1. राजकोषीय दबाव
- ₹2,000 करोड़ जैसे बड़े आवंटन से राज्य के राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) और अन्य विकास-व्यय पर दबाव पड़ सकता है।
- राज्यों की उधारी सीमा और राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) के अनुपात में वित्तीय अनुशासन बनाए रखना आवश्यक होता है।
यूपीएससी लिंक: राज्य वित्त, राजकोषीय संघवाद और उधारी सीमा (GS-3, GS-2)
2. आवर्ती और दीर्घकालिक लागत
- लैपटॉप की खरीद एकमुश्त व्यय है, परंतु मरम्मत, सॉफ़्टवेयर अद्यतन और बैटरी प्रतिस्थापन जैसी आवर्ती लागत बनी रहती है।
- तकनीकी अप्रचलन (Obsolescence) के कारण उपकरण कुछ वर्षों में पुराने हो जाते हैं, जिससे योजना की वास्तविक उपयोगिता घट सकती है।
यूपीएससी लिंक: लोक व्यय की गुणवत्ता और परिसंपत्ति प्रबंधन (GS-3)
3. डिजिटल विभाजन
- उपकरण देने से ही डिजिटल पहुँच सुनिश्चित नहीं होती; इंटरनेट कनेक्टिविटी, बिजली और डिजिटल साक्षरता भी आवश्यक हैं।
- ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में नेटवर्क की कमी से उपकरण का पूर्ण उपयोग सीमित हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: डिजिटल विभाजन और समावेशी विकास (GS-2, GS-3)
4. शिक्षा की गुणवत्ता बनाम उपकरण वितरण
- केवल हार्डवेयर वितरण से अधिगम परिणामों में सुधार स्वतः नहीं होता; शिक्षक प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम एकीकरण अनिवार्य हैं।
- उपकरण का उपयोग शैक्षणिक गतिविधि के बजाय मनोरंजन में होने का जोखिम भी रहता है।
यूपीएससी लिंक: शिक्षा नीति और अधिगम गुणवत्ता (GS-2)
5. लक्ष्यीकरण और पारदर्शिता
- सीमित संसाधनों में पात्र लाभार्थियों की सही पहचान और चयन एक चुनौती है।
- लाभार्थी चयन, खरीद प्रक्रिया और वितरण में पारदर्शिता बनाए रखना लोक प्रशासन की प्रमुख चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: सुशासन, पारदर्शिता और लोक खरीद (GS-2)
6. ई-कचरा और पर्यावरणीय प्रभाव
- पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निस्तारण से ई-कचरा (E-waste) उत्पन्न होता है, जिसके लिए वैज्ञानिक पुनर्चक्रण आवश्यक है।
- उपकरणों के जीवन-चक्र के अंत में पुनर्चक्रण की व्यवस्था योजना की संधारणीयता का हिस्सा होनी चाहिए।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण, ई-कचरा प्रबंधन और सतत विकास (GS-3)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| राजकोषीय संतुलन | बड़े आवंटन से राज्य का राजकोषीय घाटा और अन्य विकास-व्यय प्रभावित हो सकते हैं। |
| डिजिटल पहुँच | इंटरनेट, बिजली और डिजिटल साक्षरता के बिना उपकरण का पूर्ण उपयोग संभव नहीं। |
| अधिगम परिणाम | उपकरण के साथ शिक्षक प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम एकीकरण न होने पर शैक्षिक लाभ सीमित रह सकता है। |
| लाभार्थी चयन | पात्रता के स्पष्ट मानदंड और सत्यापन प्रक्रिया के बिना लक्ष्यीकरण कमज़ोर हो सकता है। |
| तकनीकी अप्रचलन | तेज़ी से बदलती तकनीक में उपकरण जल्दी पुराने हो जाते हैं, जिससे निवेश का प्रतिफल घटता है। |
| ई-कचरा | पुराने उपकरणों के निस्तारण की व्यवस्था न होने पर पर्यावरणीय जोखिम बढ़ते हैं। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- वेत्री लैपटॉप योजना (Vetri Laptop Scheme)
आगे की राह
- योजना के पात्रता मानदंड, लाभार्थी संख्या और वितरण प्रक्रिया को सार्वजनिक दस्तावेज़ों के माध्यम से स्पष्ट किया जाए।
- उपकरण वितरण के साथ शिक्षक प्रशिक्षण और डिजिटल पाठ्यक्रम सामग्री को जोड़ा जाए, ताकि अधिगम परिणामों में वास्तविक सुधार हो।
- ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अन्य विभागों के साथ समन्वय किया जाए।
- उपकरणों की वारंटी, मरम्मत और सेवा-केंद्रों की व्यवस्था योजना के आरंभ से ही तय की जाए।
- योजना के मूल्यांकन हेतु स्वतंत्र प्रभाव अध्ययन (Impact Assessment) कराया जाए, जिसमें नामांकन, उपस्थिति और अधिगम परिणामों को शामिल किया जाए।
- राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने के लिए आवंटन का आवर्ती और एकमुश्त व्यय के आधार पर दीर्घकालिक वित्तीय अनुमान तैयार किया जाए।
- ई-कचरा प्रबंधन के लिए पुराने उपकरणों की वापसी और पुनर्चक्रण की व्यवस्था अनिवार्य रूप से शामिल की जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मुफ़्त उपहार बनाम कल्याणकारी निवेश (Freebies vs Welfare Investment) · योग्यता-वस्तु (Merit Good) · सार्वजनिक वस्तु (Public Good) · संचित निधि (Consolidated Fund) · अनुच्छेद 282 के अंतर्गत सार्वजनिक प्रयोजन व्यय · राजस्व घाटा और राजकोषीय घाटा (Revenue Deficit and Fiscal Deficit) · राज्य वित्तीय उत्तरदायित्व अधिनियम (State Fiscal Responsibility Act) · डिजिटल विभाजन (Digital Divide) · S. Subramaniam Balaji बनाम तमिलनाडु सरकार (2013) निर्णय · आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) · मानव पूंजी निर्माण (Human Capital Formation)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 266: राज्य की संचित निधि से व्यय
- अनुच्छेद 202: वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) प्रस्तुति
- अनुच्छेद 204: विनियोग विधेयक द्वारा व्यय स्वीकृति
- अनुच्छेद 46: कमज़ोर वर्गों की शिक्षा का प्रोत्साहन
अवधारणा प्रवाह
राज्य सरकार ने शिक्षा और डिजिटल पहुँच की आवश्यकता पहचानी। → बजट में ₹2,000 करोड़ का आवंटन किया गया, जो राज्य की संचित निधि से वित्त पोषित होगा। → विधायी स्वीकृति के बाद योजना के दिशा-निर्देशों और लाभार्थी चयन की प्रक्रिया लागू होगी। → पात्र छात्रों को लैपटॉप वितरित होने से डिजिटल उपकरणों तक पहुँच बढ़ेगी। → डिजिटल पहुँच के साथ अधिगम और कौशल विकास में सुधार की संभावना बनेगी। → दीर्घकाल में मानव पूंजी के विकास से राज्य की आर्थिक संवृद्धि और सामाजिक गतिशीलता को सहारा मिल सकता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 282 संघ और राज्य सरकारों को सार्वजनिक प्रयोजन के लिए ऐसा व्यय करने की अनुमति देता है, जो उनकी विधायी क्षमता के विषय-क्षेत्र में न आता हो।
2. राज्य सरकार को प्राप्त सभी राजस्व, उसके द्वारा लिए गए ऋण और ऋण की वापसी में प्राप्त समस्त धनराशि राज्य की संचित निधि में जमा होती है।
3. उच्चतम न्यायालय ने S. Subramaniam Balaji बनाम तमिलनाडु सरकार (2013) मामले में निर्णय दिया कि राजनीतिक दल द्वारा अपने घोषणा-पत्र में मुफ़्त लैपटॉप देने का वादा करना अपने आप में भ्रष्ट आचरण (Corrupt Practice) है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: अनुच्छेद 282 के अंतर्गत संघ या राज्य सार्वजनिक प्रयोजन के लिए ऐसा व्यय कर सकते हैं, भले ही वह विषय उनकी विधायी क्षमता में न हो। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 266(2) के अनुसार राज्य की संचित निधि में ये सभी धनराशियाँ जाती हैं। कथन 3 गलत है: 2013 के निर्णय में न्यायालय ने घोषणा-पत्र के वादों को अपने आप में भ्रष्ट आचरण नहीं माना, बल्कि निर्वाचन आयोग से दिशा-निर्देश बनाने को कहा।
Q2. कथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए:
कथन (A): राज्य सरकार द्वारा छात्रों को निःशुल्क लैपटॉप उपलब्ध कराना एक योग्यता-वस्तु (Merit Good) का उदाहरण है।
कारण (R): योग्यता-वस्तुएँ वे वस्तुएँ हैं जिनके लाभ को उपभोक्ता कम आँकते हैं, इसलिए सरकार उन्हें भुगतान-क्षमता की परवाह किए बिना उपलब्ध कराती है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — रिचर्ड मस्ग्रेव (Richard Musgrave) ने योग्यता-वस्तु की अवधारणा दी, जिसमें उपभोक्ता द्वारा लाभ का कम आकलन होने पर सरकार हस्तक्षेप करती है। शिक्षा और डिजिटल उपकरणों तक पहुँच इसी श्रेणी में आती है, इसलिए (R), (A) की सही व्याख्या है।
Q3. निम्नलिखित स्तंभों का मिलान कीजिए:
स्तंभ I (संविधान के अनुच्छेद): 1. अनुच्छेद 266 2. अनुच्छेद 202 3. अनुच्छेद 275 4. अनुच्छेद 293
स्तंभ II (विषय): A. राज्य द्वारा ऋण लेने की शर्तें B. राज्य का वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) C. राज्य की संचित निधि D. संघ से राज्यों को अनुदान
सही मिलान चुनिए:
- 1-C, 2-B, 3-D, 4-A
- 1-A, 2-C, 3-B, 4-D
- 1-C, 2-A, 3-D, 4-B
- 1-B, 2-C, 3-A, 4-D
उत्तर: 1-C, 2-B, 3-D, 4-A — अनुच्छेद 266 राज्य की संचित निधि से संबंधित है (C)। अनुच्छेद 202 वार्षिक वित्तीय विवरण, अर्थात बजट, से संबंधित है (B)। अनुच्छेद 275 संघ द्वारा राज्यों को दिए जाने वाले अनुदान से संबंधित है (D)। अनुच्छेद 293 राज्य द्वारा ऋण लेने से संबंधित है (A)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राज्य सरकारों द्वारा लैपटॉप जैसी प्रत्यक्ष वस्तु-वितरण योजनाओं को कल्याणकारी निवेश कहना कहाँ तक उचित है? इन्हें योग्यता-वस्तु (Merit Good) की अवधारणा के आधार पर समझाइए और इनके राजकोषीय प्रभावों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि उच्चतम न्यायालय के S. Subramaniam Balaji (2013) निर्णय के आलोक में ऐसी योजनाओं के निर्वाचन-संबंधी आयाम को किस प्रकार परखा जाना चाहिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर-संरचना (MODEL-ANSWER SKELETON):
1. भूमिका (तथ्य-आधार): तमिलनाडु सरकार की वेत्री लैपटॉप योजना (Vetri Laptop Scheme) के लिए ₹2,000 करोड़ के आवंटन का समाचार (News18 Tamil, 7 नवंबर 2026)। नोट: लाभार्थियों की संख्या, पात्रता, वितरण-तंत्र और योजना की अवधि स्रोत में नहीं हैं; उत्तर में इन्हें आधिकारिक शासकीय आदेश (Government Order) और बजट दस्तावेज़ से सत्यापित करके ही प्रयोग करें।
2. सैद्धांतिक आधार:
(क) सार्वजनिक वस्तु (Public Good): गैर-प्रतिस्पर्धी और गैर-अपवर्जनीय, जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा; लैपटॉप व्यक्तिगत लाभ की निजी वस्तु है, अतः शुद्ध सार्वजनिक वस्तु नहीं।
(ख) योग्यता-वस्तु (Merit Good): रिचर्ड मस्ग्रेव (Richard Musgrave, 1959) की अवधारणा। शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल साक्षरता में सकारात्मक बाह्यताएँ (Positive Externalities) होती हैं।
(ग) प्रत्यक्ष वस्तु बनाम नकद अंतरण: प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer, DBT) बनाम वस्तु-आधारित वितरण पर बहस।
3. संवैधानिक ढाँचा:
(क) अनुच्छेद 282: राज्य सरकार सार्वजनिक प्रयोजन के लिए व्यय कर सकती है।
(ख) अनुच्छेद 266(2): राज्य की संचित निधि से ही व्यय होता है; बजट में विनियोग (अनुच्छेद 202, 204) आवश्यक है।
(ग) अनुच्छेद 21A (शिक्षा का अधिकार) और अनुच्छेद 46 (दुर्बल वर्गों के शैक्षिक हित) के नीति-निर्देशक तत्वों से सामाजिक औचित्य।
(घ) अनुच्छेद 14: समान अवसर के सिद्धांत के आधार पर लाभार्थी-चयन की न्यायसंगति।
4. राजकोषीय आयाम:
(क) राजस्व घाटा बनाम राजकोषीय घाटा: यदि ऐसा व्यय राजस्व-व्यय है तो संपत्ति-निर्माण नहीं होता; पूँजीगत व्यय से अंतर।
(ख) तमिलनाडु वित्तीय उत्तरदायित्व अधिनियम, 2003 की राजकोषीय सीमाएँ।
(ग) अनुच्छेद 293 के अंतर्गत राज्य की उधार-सीमा और ब्याज-भार।
(घ) वित्त आयोग की सिफारिशों और राज्य वित्त पर RBI की रिपोर्टों में सब्सिडी-भार पर चिंता।
5. निर्वाचन और न्यायिक आयाम:
(क) S. Subramaniam Balaji बनाम तमिलनाडु सरकार (2013): उच्चतम न्यायालय ने घोषणा-पत्र के वादों को भ्रष्ट आचरण नहीं माना; निर्वाचन आयोग से दिशा-निर्देश बनाने को कहा।
(ख) आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) और अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग की भूमिका।
(ग) अंतर: वैध कल्याणकारी नीति बनाम निर्वाचन-लाभ हेतु अनुचित प्रलोभन, इसके बीच की रेखा।
6. संतुलित दृष्टिकोण:
(क) समर्थक तर्क: मानव पूँजी निर्माण, लैंगिक समानता, छात्रों की डिजिटल पहुँच, और डिजिटल विभाजन (Digital Divide) में कमी।
(ख) आलोचक तर्क: पूँजीगत व्यय पर अवसर-लागत, दीर्घकालिक राजकोषीय स्थिरता, रख-रखाव और ई-कचरे की समस्या, लाभ-परिणाम के मूल्यांकन का अभाव।
7. आगे की राह: परिणाम-आधारित मूल्यांकन (Outcome-based Evaluation), स्वतंत्र तृतीय-पक्ष मूल्यांकन, योजना पर सूर्यास्त-खंड (Sunset Clause), कौशल-विकास और डिजिटल साक्षरता से जोड़ना, तथा निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों में पारदर्शिता।
8. निष्कर्ष: योजना को योग्यता-वस्तु के रूप में न्यायोचित ठहराया जा सकता है, परंतु उसकी राजकोषीय व्यावहारिकता, लक्षित पहुँच और निर्वाचन-निष्पक्षता की कसौटी पर परखना आवश्यक है।
स्रोत: tamil.news18.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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