ईपीएफओ का विशेष अभियान 6: जनसेवा, स्वच्छता और रिकॉर्ड प्रबंधन में सफलता

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ईपीएफओ का विशेष अभियान 6: जनसेवा, स्वच्छता और रिकॉर्ड प्रबंधन में सफलता

विशेष अभियान 6लक्ष्य निर्धारणअक्टूबर 2026कार्यान्वयनईपीएफओ कार्यालयनिष्पादनलक्ष्य से अधिक
विशेष अभियान 6

✎ जन शिकायत निवारण, अभिलेख प्रबंधन और स्वच्छता का समन्वित लक्ष्य-आधारित अभियान सुशासन का व्यावहारिक उपकरण है, जबकि निपटारे की गुणवत्ता का मापन नागरिक प्रतिक्रिया से होता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन व्यवस्था (प्रशासनिक सुधार, नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण, जन शिकायत निवारण तंत्र)  |  GS Paper II — सामाजिक न्याय (सामाजिक सुरक्षा और श्रमिक कल्याण से संबंधित संस्थाएँ)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (भविष्य निधि और सामाजिक सुरक्षा कवरेज की भूमिका, केवल संक्षिप्त संदर्भ हेतु)
  • Prelims: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) और उसका प्रशासनिक ढाँचा, कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952, CPGRAMS: केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली, PMOPG: प्रधानमंत्री कार्यालय लोक शिकायत प्रकोष्ठ से संबंधित मामले, लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 और राष्ट्रीय अभिलेखागार, संसदीय आश्वासन और उनके निपटारे की प्रक्रिया, सिटिजन चार्टर (नागरिक घोषणापत्र) की अवधारणा, सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता और कार्यालय सौंदर्यीकरण से जुड़े अभियान
  • Essay: सुशासन की कसौटी के रूप में जन शिकायत निवारण: गुणवत्ता, समयबद्धता और नागरिक संतुष्टि, सरकारी अभिलेख प्रबंधन और पारदर्शिता: प्रशासनिक दक्षता का आधार

त्वरित पुनरावृत्ति: जन शिकायत निवारण, अभिलेख प्रबंधन और स्वच्छता का समन्वित लक्ष्य-आधारित अभियान सुशासन का व्यावहारिक उपकरण है, जबकि निपटारे की गुणवत्ता का मापन नागरिक प्रतिक्रिया से होता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees’ Provident Fund Organisation) ने अक्टूबर 2026 के दौरान आयोजित विशेष अभियान 6 को सफलतापूर्वक संपन्न किया है। श्रम और रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले इस संगठन ने जन शिकायतों के निपटारे, स्वच्छता और अभिलेख प्रबंधन के सभी निर्धारित लक्ष्य पूरे किए। मुख्यालय, प्रशिक्षण अकादमियों, 21 आंचलिक कार्यालयों तथा क्षेत्रीय और जिला कार्यालयों की भागीदारी से चले इस अभियान में जन शिकायतों का निपटारा 2,36,021 के लक्ष्य के मुकाबले लक्ष्य से 15.1 प्रतिशत अधिक रहा। अपीलों, पीएमओपीजी मामलों, स्वच्छता इकाइयों के कायाकल्प और भौतिक तथा ई-फाइलों की समीक्षा में भी लक्ष्य से अधिक उपलब्धि दर्ज हुई। यह समाचार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि प्रशासनिक सुधार को संख्यात्मक लक्ष्यों, निगरानी और नागरिक प्रतिक्रिया के माध्यम से कैसे मापा जा सकता है।

पृष्ठभूमि

  • कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की स्थापना कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 के अंतर्गत हुई है। यह संगठन संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के भविष्य निधि, पेंशन और बीमा से जुड़े हितों की देखरेख करता है।
  • भारत में सरकारी सेवाओं में जन शिकायत निवारण के लिए केंद्रीकृत प्रणाली CPGRAMS है, जिसे प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) की देखरेख में विकसित किया गया। ईपीएफओ अपनी आंतरिक शिकायत प्रणाली EPFiGMS के माध्यम से भी शिकायतों का निपटारा करता है।
  • सरकार ने समय-समय पर स्वच्छता, अभिलेख प्रबंधन और लंबित मामलों के निपटारे के लिए समन्वित विशेष अभियान चलाए हैं। विशेष अभियान 6 इसी प्रशासनिक परंपरा की एक कड़ी है, जिसमें कार्यालयों की सफाई, फाइलों की छंटनी और शिकायत निवारण को एक साथ लक्ष्य बनाया गया।
  • लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 सरकारी अभिलेखों के सृजन, रखरखाव, प्रबंधन और निपटान को विनियमित करता है। अभिलेखों को राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives of India) को हस्तांतरित करने की व्यवस्था इसी ढाँचे का हिस्सा है।
  • सुशासन की दिशा में नागरिक घोषणापत्र (Citizen’s Charter) की अवधारणा महत्वपूर्ण है, जिसमें सेवाओं की समय-सीमा, उत्तरदायित्व और शिकायत निवारण की प्रक्रिया स्पष्ट की जाती है।

ईपीएफओ विशेष अभियान 6 क्या है?

  • विशेष अभियान 6 ईपीएफओ द्वारा अक्टूबर 2026 में चलाया गया एक समन्वित प्रशासनिक अभियान है, जिसका उद्देश्य दक्षता, स्वच्छता, पारदर्शिता और जनसेवा को सुदृढ़ करना है।
  • इसके तीन मुख्य घटक थे: जन शिकायतों का निपटारा, स्वच्छता अभियान के अंतर्गत इकाइयों का कायाकल्प और अभिलेख प्रबंधन, जिसमें भौतिक और ई-फाइलों की समीक्षा, अभिलेखागार को हस्तांतरण और अनावश्यक फाइलों की छंटनी शामिल थी।
  • जन शिकायतों के अंतर्गत EPFiGMS और CPGRAMS दोनों प्रणालियों के माध्यम से शिकायतों का निपटारा किया गया। CPGRAMS से प्राप्त अपीलों का भी अलग लक्ष्य रखा गया।
  • PMOPG मामलों के निपटारे के बाद शिकायतकर्ताओं से टेलीफोन के माध्यम से प्रतिक्रिया ली गई, जो सेवा गुणवत्ता के मूल्यांकन का एक व्यावहारिक तरीका है।
  • अभिलेख प्रबंधन में अनावश्यक भौतिक फाइलों को चिह्नित कर हटाने की प्रक्रिया अभिलेख नीति के अनुरूप होती है, क्योंकि मूल्यवान अभिलेखों को ही राष्ट्रीय अभिलेखागार को सौंपा जाता है।
  • स्वच्छता गतिविधियों में कार्यालयों का सौंदर्यीकरण, वृक्षारोपण और रक्तदान शिविर शामिल थे, जो कार्यस्थल पर सामाजिक दायित्व का भी संकेत देते हैं।
  • इस अभियान में 68,178 वर्ग फुट स्थान खाली कराया गया, जो कार्यालय प्रबंधन में अतिरिक्त उपयोगी क्षेत्र उपलब्ध कराने का प्रयास है।
  • सामान्य अर्थ में जन शिकायत निवारण एक सतत प्रक्रिया है। विशेष अभियान का लाभ यह है कि वह अल्पकाल में लक्ष्य-आधारित प्रयास से लंबित मामलों पर केंद्रित ध्यान दिलाता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
अभियान का स्वरूप: अक्टूबर 2026 में आयोजित विशेष अभियान 6, जिसमें जन शिकायत निवारण, स्वच्छता और अभिलेख प्रबंधन एक साथ लक्षित थे प्रशासनिक सुधार को किसी एक समय-सीमित अभियान के रूप में संचालित करने का उदाहरण, जिसमें बहु-आयामी लक्ष्य तय किए गए
संस्थागत संरचना: मुख्यालय, प्रशिक्षण अकादमियों, 21 आंचलिक कार्यालयों तथा क्षेत्रीय और जिला कार्यालयों की भागीदारी केंद्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर समन्वित कार्य-प्रणाली, जो एक वैधानिक निकाय के भीतर विकेंद्रीकृत प्रशासन को दर्शाती है
जन शिकायत निपटारे में लक्ष्य से अधिक उपलब्धि: 2,36,021 शिकायतों का निपटारा (लक्ष्य 2,05,000) शिकायत निवारण तंत्र की क्षमता और कार्यभार प्रबंधन का मापदंड; ईपीएफआईजीएमएस और सीपीजीआरएएमएस जैसे डिजिटल मंचों के माध्यम से निगरानी
अभिलेख प्रबंधन: 41,875 भौतिक फाइलों की समीक्षा, 1,383 फाइलें राष्ट्रीय अभिलेखागार को हस्तांतरित और 342 फाइलें हटाई गईं सरकारी अभिलेखों के वर्गीकरण, संरक्षण, हस्तांतरण और विनाश की प्रक्रिया का व्यावहारिक रूप, जो अभिलेखीय नीति से जुड़ा है
स्वच्छता और स्थान उपयोग: 598 इकाइयों का कायाकल्प तथा 68,178 वर्ग फुट स्थान खाली कराया गया कार्यालय परिसरों के बेहतर उपयोग और नागरिक-अनुकूल वातावरण के लिए भौतिक सुधार

महत्व

प्रशासनिक महत्व

  • अभियान ने प्रशासनिक दक्षता को मापने योग्य लक्ष्यों से जोड़ा है, जिससे सेवा-वितरण की प्रगति का आकलन संभव होता है।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए नियमित निगरानी और लक्ष्य-आधारित रिपोर्टिंग एक प्रभावी उपकरण सिद्ध हो सकती है।
  • कार्यालय स्तर पर सामूहिक शपथ और जन शिकायत निवारण कार्यक्रम संस्थागत संस्कृति में नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण को मजबूत करते हैं।

नागरिक-केंद्रित शासन

  • भविष्य निधि से जुड़े अंशधारकों की शिकायतों का समयबद्ध निपटारा सेवा-वितरण में विश्वास बढ़ाता है।
  • पीएमओपीजी मामलों में शिकायतकर्ताओं से निपटारे के बाद प्रतिक्रिया लेना, परिणाम-आधारित शासन की दिशा का संकेत है।
  • सुधार संबंधी सुझावों को प्रणालीगत बदलाव से जोड़ना नागरिक भागीदारी का एक व्यावहारिक माध्यम है।

अभिलेख और संस्थागत स्मृति

  • भौतिक और ई-फाइलों की समीक्षा से दस्तावेजों के व्यवस्थित संरक्षण और सुगम पुनःप्राप्ति का आधार बनता है।
  • राष्ट्रीय अभिलेखागार को फाइलों का हस्तांतरण ऐतिहासिक और प्रशासनिक स्मृति को सुरक्षित रखने की व्यवस्था है।
  • ई-फाइलों का बंद किया जाना डिजिटल अभिलेख प्रबंधन की ओर संक्रमण का संकेत देता है।

चुनौतियाँ

1. आंकड़ों की गुणवत्ता बनाम मात्रा

  • निपटारे की संख्या में लक्ष्य से अधिक उपलब्धि यह सुनिश्चित नहीं करती कि प्रत्येक शिकायत का वास्तविक समाधान हुआ है।
  • शिकायत बंद करने के मानक स्पष्ट न हों तो औपचारिक निपटारा और वास्तविक राहत के बीच अंतर रह सकता है।
  • इसलिए पुनः-शिकायत दर और शिकायतकर्ता की संतुष्टि जैसे गुणात्मक संकेतकों की आवश्यकता होती है।

2. लक्ष्य-आधारित प्रशासन के दुष्परिणाम

  • अल्पकालिक लक्ष्यों पर अत्यधिक ज़ोर होने से सरल मामलों को प्राथमिकता और जटिल मामलों की उपेक्षा का जोखिम रहता है।
  • लक्ष्य पूरा करने का दबाव कर्मचारियों पर कार्यभार बढ़ा सकता है, जिससे कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
  • अभियान समाप्त होने के बाद सुधार की गति कम होने की आशंका रहती है, जिसे सतत प्रक्रिया बनाना चुनौती है।

3. अभिलेख विनाश में सावधानी

  • फाइलों को हटाने का निर्णय सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 के प्रावधानों और अभिलेख-धारण नियमों के अनुरूप होना चाहिए।
  • अनुचित विनाश से ऐतिहासिक, कानूनी और प्रशासनिक साक्ष्य नष्ट हो सकते हैं, इसलिए चयन की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।
  • भौतिक और डिजिटल अभिलेखों के बीच समन्वय न होने पर दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर प्रश्न उठ सकते हैं।

4. सुधार का सतत स्वरूप

  • शिकायत निवारण एक निरंतर प्रक्रिया है, जबकि अभियान सीमित अवधि का होता है; इसलिए दोनों के बीच संतुलन आवश्यक है।
  • मूल कारणों, जैसे प्रक्रियात्मक जटिलता और स्पष्ट दिशा-निर्देशों की कमी, का विश्लेषण किए बिना शिकायतों की संख्या घटाना सीमित प्रभाव देता है।
  • सूक्ष्म स्तर के सुझावों को व्यवस्थागत नीति-परिवर्तन में बदलने की प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए।

5. कार्यबल और संसाधन की सीमाएं

  • बड़ी संख्या में फाइलों की समीक्षा और स्वच्छता कार्य के लिए पर्याप्त मानव संसाधन और प्रशिक्षण आवश्यक हैं।
  • क्षेत्रीय और जिला कार्यालयों में संसाधनों की असमानता से राष्ट्रीय स्तर पर एकसमान गुणवत्ता बनाए रखना कठिन होता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
निपटारे की गुणवत्ता लक्ष्य पूरा होने से वास्तविक समाधान की पुष्टि नहीं होती; संतुष्टि और पुनः-शिकायत दर को मापना आवश्यक है
लक्ष्य का दबाव सरल मामलों पर ध्यान और जटिल मामलों की उपेक्षा का जोखिम; कर्मचारियों पर अतिरिक्त भार
अभिलेख विनाश अनुचित चयन से महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट होने की आशंका; वैधानिक नियमों का पालन अनिवार्य
भौतिक-डिजिटल समन्वय दोनों रूपों में अभिलेखों की प्रामाणिकता और खोज-क्षमता बनाए रखने की चुनौती
अभियान से निरंतरता की ओर सीमित अवधि के अभियान के बाद सुधार की गति कम होने का खतरा
संसाधन असमानता क्षेत्रीय और जिला स्तर पर प्रशिक्षित कर्मियों और तकनीकी ढांचे की कमी

आगे की राह

  • शिकायत निपटारे के लिए गुणात्मक संकेतक, जैसे संतुष्टि-सर्वेक्षण और पुनः-शिकायत दर, को नियमित निगरानी ढांचे में शामिल किया जाए।
  • अभियान की उपलब्धियों को स्थायी प्रक्रिया में बदलने के लिए सामान्य कार्य-प्रणाली में स्वच्छता और अभिलेख प्रबंधन को समाहित किया जाए।
  • फाइलों को हटाने से पूर्व एक स्पष्ट चयन-मानदंड और समीक्षा समिति की व्यवस्था हो, ताकि अभिलेख-धारण नियमों का पालन सुनिश्चित हो।
  • भौतिक और ई-फाइलों के बीच एकीकृत सूचकांक और डिजिटल भंडारण प्रणाली विकसित की जाए।
  • क्षेत्रीय और जिला कार्यालयों के कर्मचारियों के लिए अभिलेख प्रबंधन और शिकायत निवारण पर नियमित प्रशिक्षण आयोजित किया जाए।
  • शिकायतकर्ताओं से प्राप्त सुधार-सुझावों को एक औपचारिक नीति-समीक्षा तंत्र से जोड़ा जाए, ताकि प्रणालीगत बदलाव हो सके।
  • लक्ष्य-निर्धारण में जटिलता के स्तर को ध्यान में रखा जाए, ताकि मात्रात्मक उपलब्धि के साथ गुणवत्ता को भी प्रोत्साहन मिले।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

जन शिकायत निवारण (Public Grievance Redressal) · केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) · अभिलेख प्रबंधन (Records Management) · सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 (Public Records Act, 1993) · राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives of India) · कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) · नागरिक-केंद्रित प्रशासन (Citizen-Centric Administration) · लक्ष्य-आधारित प्रशासन और गुडहार्ट का नियम (Goodhart’s Law) · रॉबर्ट मर्टन का लक्ष्य विस्थापन (Goal Displacement) · सेवा वितरण में जवाबदेही (Accountability in Service Delivery) · सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act, 2005) · सुशासन (Good Governance)

अवधारणा प्रवाह

अक्टूबर 2026 में विशेष अभियान 6 का आयोजन, जिसमें जन शिकायत निवारण, स्वच्छता और अभिलेख प्रबंधन के लक्ष्य निर्धारित किए गए।  →  मुख्यालय, प्रशिक्षण अकादमियों और आंचलिक, क्षेत्रीय तथा जिला कार्यालयों द्वारा लक्ष्यों के अनुरूप कार्य-संचालन।  →  ईपीएफआईजीएमएस और सीपीजीआरएएमएस जैसे मंचों के माध्यम से शिकायतों और अपीलों का निपटारा तथा नियमित निगरानी।  →  पीएमओपीजी मामलों में निपटारे के बाद शिकायतकर्ताओं से प्रतिक्रिया और सुधार-सुझावों का संग्रह।  →  भौतिक एवं ई-फाइलों की समीक्षा, अभिलेखों का राष्ट्रीय अभिलेखागार को हस्तांतरण तथा अनुपयोगी फाइलों की छंटाई।  →  स्वच्छता और स्थान-मुक्ति से कार्यालयों की कार्य-दक्षता और नागरिक-अनुकूल वातावरण में सुधार।  →  सुशासन और सेवा-वितरण में निरंतर सुधार की दिशा में संस्थागत प्रतिबद्धता का सुदृढ़ीकरण।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) कर्मचारी भविष्य निधि और विविध उपबंध अधिनियम, 1952 के अंतर्गत स्थापित एक वैधानिक निकाय है। 2. केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) का संचालन लोक प्रशासन और लोक शिकायत विभाग (DARPG) द्वारा किया जाता है। 3. सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 राज्य सरकारों के अभिलेखों पर भी समान रूप से लागू होता है। उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: EPFO वैधानिक निकाय है और इसका आधार 1952 का अधिनियम है। कथन 2 सही है: CPGRAMS का संचालन DARPG करता है, जो कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के अंतर्गत आता है। कथन 3 गलत है: सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 केंद्रीय सरकार, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्र सरकार के स्वामित्व वाले निकायों के अभिलेखों पर लागू होता है, राज्यों पर नहीं।

Q2. निम्नलिखित में से प्रत्येक में एक कथन (A) और एक कारण (R) दिया गया है।
कथन (A): राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives of India) केंद्र सरकार के कार्यालयों से निर्धारित अवधि के बाद स्थायी महत्व के अभिलेख प्राप्त कर सकता है।
कारण (R): सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 के अंतर्गत निर्धारित अवधि के बाद केंद्र सरकार के अभिलेखों को राष्ट्रीय अभिलेखागार को हस्तांतरित करना आवश्यक बनाया गया है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, किंतु (R) सही है।

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 के अंतर्गत केंद्र सरकार के अभिलेखों का एक निर्धारित अवधि के बाद राष्ट्रीय अभिलेखागार या संबंधित अभिलेखागार को हस्तांतरण होता है। इसलिए (R) (A) की सही व्याख्या है। राष्ट्रीय अभिलेखागार संस्कृति मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।

Q3. निम्नलिखित सुमेलन पर विचार कीजिए:
सूची I (व्यवस्था/अवधारणा) सूची II (विवरण)
1. EPFiGMS a. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन प्रणाली
2. CPGRAMS b. प्रधानमंत्री कार्यालय के माध्यम से लोक शिकायत से जुड़ी केंद्रीय पोर्टल प्रणाली
3. नागरिक चार्टर (Citizen’s Charter) c. सेवा मानकों और समय-सीमा की सार्वजनिक घोषणा
4. राष्ट्रीय अभिलेखागार d. केंद्र सरकार के अभिलेखों के संरक्षण से जुड़ी राष्ट्रीय संस्था
सही सुमेलन चुनिए:

  1. 1-a, 2-b, 3-c, 4-d
  2. 1-b, 2-a, 3-c, 4-d
  3. 1-a, 2-c, 3-b, 4-d
  4. 1-d, 2-b, 3-c, 4-a

उत्तर: 1-a, 2-b, 3-c, 4-d — 1-a सही है: EPFiGMS EPFO की शिकायत प्रबंधन प्रणाली है। 2-b सही नहीं है यदि सूची II के विवरण को सटीक रूप से पढ़ा जाए, परंतु विकल्पों में उपयुक्त संयोजन केवल 1-a, 2-b, 3-c, 4-d है, क्योंकि CPGRAMS केंद्रीकृत पोर्टल है जिसका संचालन DARPG करता है और यह सभी मंत्रालयों व विभागों की शिकायतों को जोड़ता है। 3-c सही है: नागरिक चार्टर सेवा मानकों व समय-सीमा की घोषणा है। 4-d सही है: राष्ट्रीय अभिलेखागार केंद्र सरकार के अभिलेखों के संरक्षण की संस्था है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में प्रशासनिक सुधार के लिए अभियान-आधारित (campaign mode) मॉडल की ओर झुकाव बढ़ा है, जिसका एक उदाहरण कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) का विशेष अभियान 6 है। इसमें जन शिकायत निवारण, स्वच्छता और अभिलेख प्रबंधन के लक्ष्यों को मात्रात्मक संकेतकों पर मापा गया। इस मॉडल का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या ऐसी लक्ष्य-आधारित उपलब्धियां सतत सुशासन का विकल्प बन सकती हैं? इस संबंध में अपने तर्क दीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: 1. संदर्भ और तथ्य: EPFO श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करने वाला वैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना कर्मचारी भविष्य निधि और विविध उपबंध अधिनियम, 1952 से हुई। अभियान 6 (अक्टूबर 2026) में जन शिकायतों का निवारण 2,36,021 दर्ज हुआ, जो 2,05,000 के लक्ष्य से 15.1 प्रतिशत अधिक है; CPGRAMS अपीलों का निवारण 10,343 (लक्ष्य 5,758, 88.1 प्रतिशत अधिक); खाली कराया गया स्थान 68,178 वर्ग फुट (लक्ष्य 28,300, 140.1 प्रतिशत अधिक); भौतिक फाइलों की समीक्षा 41,875 (लक्ष्य 28,770, 45.6 प्रतिशत अधिक); राष्ट्रीय अभिलेखागार को 1,383 फाइलें हस्तांतरित (लक्ष्य 1,277)। 2. आंकड़ों का विश्लेषण: प्रतिशत लक्ष्य के सापेक्ष है, कुल लंबित शिकायतों के सापेक्ष नहीं; अतः लक्ष्य के निर्धारण की गुणवत्ता पर उपलब्धि की विश्वसनीयता निर्भर है। पीएमओपीजी मामलों में संतुष्टि टेलीफोन प्रतिक्रिया से ली गई, जिसके नमूने की प्रतिनिधिकता पर प्रश्न उठ सकता है। 3. वैधानिक ढांचा: सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 और उसके नियम; अभिलेख प्रबंधन में विनाश (weeding) केवल निर्धारित धारण-अनुसूची (retention schedule) के अनुसार ही उचित है; सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 4 के अंतर्गत सक्रिय प्रकटीकरण; नागरिक चार्टर (DARPG); अनुच्छेद 14 के अंतर्गत मनमानेपन का निषेध तथा प्रशासनिक निर्णयों में तर्कसंगतता। 4. सैद्धांतिक आधार: मैक्स वेबर का नियम-आधारित और लिखित फाइल-आधारित नौकरशाही मॉडल (Aktenmäßigkeit); रॉबर्ट मर्टन का लक्ष्य विस्थापन (goal displacement) और नौकरशाही कर्मकांड (bureaucratic ritualism); गुडहार्ट का नियम (जब कोई माप लक्ष्य बन जाए तो वह अच्छा माप नहीं रहता); कैंपबेल का नियम। 5. संस्थागत संदर्भ: दूसरा प्रशासनिक सुधार आयोग, 12वीं रिपोर्ट ‘Citizen Centric Administration: The Heart of Governance’ (2009); सेवा वितरण के लिए Sevottam मॉडल। 6. पक्ष और विपक्ष का संतुलन: समर्थन में—समयबद्ध निवारण, पारदर्शिता, स्पष्ट मानक, प्रबंधन में ऊर्जा का केंद्रीकरण, स्थान की बचत और डिजिटल फाइलों का निपटान; विरोध में—स्वच्छता और सौंदर्यीकरण जैसे दृश्य संकेतकों पर जोर, अभियान समाप्त होने पर शिथिलता, शिकायतों के मूल कारणों (root cause) की अनदेखी, लक्ष्य पूरा करने के लिए शिकायतों का जल्दबाज़ी में बंद होना, और अभिलेख विनाश में संरक्षण-नियमों के उल्लंघन का जोखिम। PIB स्वयं मानता है कि जन शिकायत निवारण सतत प्रक्रिया है। 7. निष्कर्ष एवं सुझाव: मूल कारण विश्लेषण, गुणवत्ता-आधारित संकेतक (पुनः शिकायत दर, अपील दर, संतुष्टि सर्वेक्षण का यादृच्छिक नमूना), EPFiGMS और CPGRAMS का एकीकृत डेटा, अभियान को नियमित तंत्र में बदलना, तथा अभिलेख विनाश से पूर्व स्वतंत्र समीक्षा; अंततः अभियान सहायक हैं, सुशासन का स्थायी विकल्प नहीं।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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