05 Nov अफगानिस्तान में बच्चों की शिक्षा पर संकट: यूएन रिपोर्ट
✎ शिक्षा का अधिकार सार्वभौमिक मानवाधिकार (अनुच्छेद 26, 1948) और बाल अधिकार अभिसमय (1989) द्वारा मान्य है, जबकि भारत में यह अनुच्छेद 21क और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के माध्यम से छह से 14 वर्ष के बच्चों के लिए मौलिक अधिकार है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों की भूमिका, पड़ोसी देशों के साथ संबंध और प्रवासन) | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र I — समाज (महिलाओं और बच्चों से संबंधित मुद्दे, लैंगिक असमानता और मानव विकास)
- Prelims: यूनेस्को (UNESCO) — संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन; मुख्यालय पेरिस, यूनिसेफ (UNICEF) — संयुक्त राष्ट्र बाल कोष; स्थापना 1946, बाल अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCRC), 1989 — अनुच्छेद 28 और 29 शिक्षा से संबंधित, सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणा, 1948 — अनुच्छेद 26 शिक्षा का अधिकार, सतत विकास लक्ष्य 4 (SDG 4) — समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, भारत में अनुच्छेद 21क (86वाँ संविधान संशोधन, 2002) और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (6 से 14 वर्ष आयु वर्ग), अनुच्छेद 45 (बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा) और अनुच्छेद 51क(ख) के अंतर्गत माता-पिता का मूल कर्तव्य, अफगानिस्तान में अगस्त 2021 में तालिबान का सत्ता में लौटना
- Essay: शिक्षा मानव अधिकार है: संघर्ष और संक्रमण की स्थितियों में बालिकाओं की शिक्षा का प्रश्न, शिक्षा तक पहुँच बनाम शिक्षा की गुणवत्ता: किसी समाज के भविष्य के निर्माण में शिक्षा की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: शिक्षा का अधिकार सार्वभौमिक मानवाधिकार (अनुच्छेद 26, 1948) और बाल अधिकार अभिसमय (1989) द्वारा मान्य है, जबकि भारत में यह अनुच्छेद 21क और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के माध्यम से छह से 14 वर्ष के बच्चों के लिए मौलिक अधिकार है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों यूनेस्को (UNESCO) और यूनिसेफ (UNICEF) द्वारा जारी अफगानिस्तान शिक्षा स्थिति रिपोर्ट के अनुसार अफगानिस्तान में प्राथमिक विद्यालय की आयु वर्ग के लगभग आधे से अधिक बच्चे औपचारिक शिक्षा से बाहर हैं। रिपोर्ट के अनुसार सात से 18 वर्ष की आयु के विद्यार्थियों की जनसंख्या 2019 में लगभग 1.04 करोड़ से बढ़कर 2024 में 1.15 करोड़ हो गई, जबकि विद्यालयों, शिक्षकों और शिक्षा सेवाओं पर पहले से ही दबाव है। अगस्त 2021 में तालिबान की वापसी के बाद छठी कक्षा से आगे की पढ़ाई से 26 लाख से अधिक बालिकाएँ वंचित हैं। पाकिस्तान और ईरान से लौटे लोगों में इसी वर्ष 10 लाख से अधिक वापसी करने वालों में 2.45 लाख से अधिक बच्चे शामिल हैं। रिपोर्ट ने शिक्षा तक पहुँच, गुणवत्ता और बालिकाओं के अधिकार को एक साथ रेखांकित किया है, इसलिए यह समाचार शिक्षा के मानवाधिकार पहलू और अंतरराष्ट्रीय संस्थागत निगरानी दोनों दृष्टियों से महत्त्वपूर्ण है।
पृष्ठभूमि
- अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद बालिकाओं और महिलाओं की औपचारिक शिक्षा पर गंभीर प्रतिबंध लगे, और उच्च शिक्षा में महिलाओं का प्रवेश रोक दिया गया।
- पाकिस्तान और ईरान से बड़ी संख्या में अफगान नागरिकों की वापसी ने शिक्षा सेवाओं, आवास और संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव डाला है।
- समुदाय-आधारित कक्षाएँ, साक्षरता और कौशल विकास कार्यक्रम, दूरस्थ और डिजिटल शिक्षा तथा निजी ट्यूशन जैसे विकल्प मौजूद हैं, परंतु रिपोर्ट के अनुसार ये औपचारिक विद्यालयी शिक्षा का विकल्प नहीं बन सकते।
- शिक्षा की गुणवत्ता भी चिंता का विषय है: एक राष्ट्रीय आकलन में आठ से नौ वर्ष के बच्चों में से आधे से कम चौथी कक्षा के छात्र भाषा में न्यूनतम दक्षता तक पहुँच सके।
- सतत विकास लक्ष्य 4 के अंतर्गत 2030 तक सभी के लिए समावेशी और समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना वैश्विक लक्ष्य है, और यूनेस्को इसकी निगरानी के प्रमुख संस्थागत मंच के रूप में कार्य करता है।
शिक्षा का अधिकार क्या है?
- शिक्षा का अधिकार वह मानवाधिकार है जिसके अंतर्गत प्रत्येक बालक-बालिका को गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है। सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणा, 1948 के अनुच्छेद 26 में इसका उल्लेख है।
- बाल अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCRC), 1989 के अनुच्छेद 28 और 29 में राज्यों से प्राथमिक शिक्षा को सभी के लिए अनिवार्य और निःशुल्क बनाने तथा शिक्षा के उद्देश्यों को मानव व्यक्तित्व के पूर्ण विकास से जोड़ने की अपेक्षा की गई है।
- भारत में 86वें संविधान संशोधन (2002) द्वारा अनुच्छेद 21क जोड़ा गया, जिसके अंतर्गत छह से 14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा मौलिक अधिकार है। इसका विधिक ढाँचा शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 है।
- अनुच्छेद 45 में राज्य को छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा का प्रयास करने का निर्देश है, जबकि अनुच्छेद 51क(ट) के अंतर्गत माता-पिता या अभिभावक का छह से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना मूल कर्तव्य है।
- यूनिसेफ की स्थापना 1946 में संयुक्त राष्ट्र बाल आपातकालीन कोष के रूप में हुई थी और यह बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और संरक्षण के लिए कार्य करता है। यूनेस्को की स्थापना 1945 में हुई थी।
- शिक्षा के अधिकार का मूल्यांकन केवल नामांकन से नहीं होता; पहुँच (Access), समानता (Equity), गुणवत्ता (Quality) और निरंतरता (Transition) के चारों आयाम साथ देखे जाते हैं। रिपोर्ट इसी ढाँचे पर बल देती है।
- संघर्ष और संक्रमण की स्थितियों में शिक्षा को बनाए रखना मानवीय सहायता का अनिवार्य भाग माना जाता है, क्योंकि शिक्षा से वंचित पीढ़ी देश के पुनर्निर्माण और विकास को प्रभावित करती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| स्कूल-आयु जनसंख्या (7-18 वर्ष) | 2019 में लगभग 1.04 करोड़ से बढ़कर 2024 में लगभग 1.15 करोड़ हो गई, जिससे पहले से दबाव में चल रहे स्कूलों और शिक्षकों पर भार और बढ़ा |
| प्राथमिक शिक्षा में नामांकन | पिछले वर्ष लगभग 66 लाख बच्चे सार्वजनिक प्राथमिक विद्यालयों में दाखिल हुए, जो 2022 से लगभग 5.6 लाख अधिक है, फिर भी जनसंख्या वृद्धि की तुलना में यह गति अपर्याप्त है |
| छठी कक्षा के बाद लड़कियों की शिक्षा | रिपोर्ट के अनुसार 26 लाख से अधिक लड़कियों को छठी कक्षा के बाद विद्यालय जाने से रोका गया है, जो लैंगिक असमानता का सबसे गंभीर संकेतक है |
| वैकल्पिक एवं सामुदायिक शिक्षा | लगभग 5,300 सामुदायिक कक्षाओं में लगभग 1.62 लाख शिक्षार्थी हैं, जिनमें 64 प्रतिशत लड़कियाँ हैं; रिपोर्ट इन्हें औपचारिक शिक्षा का विकल्प नहीं मानती |
| उच्च शिक्षा | वर्तमान में लगभग 2.08 लाख छात्र नामांकित हैं, जबकि 2020 में यह संख्या लगभग 4.3 लाख थी; महिलाओं के विश्वविद्यालय प्रवेश पर रोक इसका मुख्य कारण है |
| स्वदेश वापसी (Returnees) | पाकिस्तान और ईरान से इस वर्ष 10 लाख से अधिक लोग लौटे, जिनमें 2.45 लाख से अधिक बच्चे हैं, जो स्कूल प्रणाली पर अतिरिक्त भार डाल रहे हैं |
महत्व
सामाजिक एवं मानवीय
- शिक्षा से वंचित बच्चों की बड़ी संख्या मानव पूँजी के निर्माण को सीधे प्रभावित करती है और भविष्य की पीढ़ी के कौशल-स्तर को कमजोर करती है
- लड़कियों की शिक्षा पर रोक स्वास्थ्य, बाल विवाह की दर और पारिवारिक आय जैसे सामाजिक संकेतकों से सीधे जुड़ी है
- रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा से वंचित पीढ़ी भविष्य में समाज के पुनर्निर्माण में बाधा बन सकती है
मानवाधिकार एवं अंतरराष्ट्रीय दायित्व
- बाल अधिकार अभिसमय (Convention on the Rights of the Child) का अनुच्छेद 28 शिक्षा के अधिकार को मान्यता देता है, और इस संधि के पक्षकारों से अपेक्षा है कि वे सभी बच्चों तक इसकी पहुँच सुनिश्चित करें
- सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals – SDGs) का लक्ष्य 4 समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए है, और यह रिपोर्ट इस लक्ष्य से देश की दूरी को दर्शाती है
- संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों द्वारा आंकड़ों का प्रकाशन नीति-निर्माण में पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय निगरानी का माध्यम है
आर्थिक एवं विकासात्मक
- कुशल श्रमशक्ति के अभाव में आर्थिक संवृद्धि और पुनर्प्राप्ति की संभावना सीमित रहती है
- माध्यमिक और उच्च शिक्षा में कमी से शिक्षक, चिकित्सक, इंजीनियर और प्रशासनिक कर्मियों की आपूर्ति पर असर पड़ता है
क्षेत्रीय एवं प्रवासन संबंधी
- पाकिस्तान और ईरान से बड़ी संख्या में स्वदेश वापसी से पड़ोसी देशों के बीच प्रवासन प्रबंधन का प्रश्न सामने आता है
- भारत की पड़ोस नीति और मानवीय सहायता से जुड़े विमर्श में अफगानिस्तान की शिक्षा स्थिति एक प्रासंगिक संदर्भ है
चुनौतियाँ
1. लड़कियों और महिलाओं की शिक्षा पर प्रतिबंध
- अगस्त 2021 में सत्ता परिवर्तन के बाद छठी कक्षा से आगे लड़कियों की स्कूली शिक्षा पर रोक लगी, जिससे लाखों लड़कियाँ औपचारिक शिक्षा से बाहर हैं
- महिलाओं के विश्वविद्यालय प्रवेश पर रोक से उच्च शिक्षा का ढाँचा 2021 की तुलना में काफी छोटा रह गया है
- रिपोर्ट इसे मौलिक मानव अधिकार के हनन के रूप में रेखांकित करती है और पूर्ण बहाली की माँग करती है
यूपीएससी लिंक: GS-2: मानवाधिकार, अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ और उनकी भूमिका
2. जनसंख्या दबाव और अपर्याप्त निवेश
- स्कूल-आयु जनसंख्या में वृद्धि की तुलना में स्कूलों, शिक्षकों और कक्षाओं की संख्या नहीं बढ़ी है
- आवर्ती आपदाओं और सीमित सार्वजनिक निवेश के कारण शिक्षा अवसंरचना कमजोर बनी हुई है
- नामांकन में वृद्धि के बावजूद बड़ी संख्या में बच्चे प्राथमिक स्तर से बाहर हैं
यूपीएससी लिंक: GS-1: जनसंख्या की गतिकी; GS-2: सामाजिक क्षेत्र की योजनाएँ और निवेश
3. स्वदेश वापसी से बढ़ता दबाव
- एक वर्ष में 10 लाख से अधिक लोगों की वापसी से स्थानीय विद्यालयों और सेवाओं पर अचानक भार बढ़ा है
- 2.45 लाख से अधिक बच्चों का स्कूल में दाखिला और उनके लिए भाषा व पाठ्यक्रम की व्यवस्था एक अलग चुनौती है
- वापसी के समय शिक्षा का निरंतर बना रहना सुनिश्चित करना प्रवासन प्रबंधन का अनिवार्य पक्ष है
यूपीएससी लिंक: GS-1: प्रवासन; GS-2: पड़ोसी देशों से संबंध और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन
4. शिक्षा की गुणवत्ता का संकट
- राष्ट्रीय मूल्यांकन में चौथी कक्षा के आधे से कम छात्र भाषा में न्यूनतम दक्षता तक पहुँच सके
- शिक्षकों का प्रशिक्षण, वेतन और कक्षा सामग्री पर निवेश अपर्याप्त बताया गया है
- साक्षरता और कौशल विकास के सीमित अवसर रोजगार के मार्ग को संकरा बनाते हैं
यूपीएससी लिंक: GS-2: शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता और समावेशन; GS-3: कौशल विकास
5. वैकल्पिक शिक्षा के आँकड़ों की अपूर्णता
- निजी, इस्लामी और वैकल्पिक शिक्षा संस्थानों के बारे में पर्याप्त और विश्वसनीय आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं
- सामुदायिक कक्षाएँ और दूरस्थ शिक्षा औपचारिक शिक्षा का विकल्प नहीं बन सकतीं, फिर भी इन्हें नीति में पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता
- आँकड़ों की कमी से नीति-निर्माण और लक्षित हस्तक्षेप कठिन हो जाते हैं
यूपीएससी लिंक: GS-2: सरकारी नीतियों के आँकड़े और मूल्यांकन; शासन में सूचना की भूमिका
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का बहिष्करण | छठी कक्षा के बाद 26 लाख से अधिक लड़कियाँ विद्यालय से बाहर हैं, जिससे उच्च शिक्षा और रोजगार का मार्ग बंद हो जाता है |
| नामांकन और जनसंख्या में असंतुलन | बच्चों की संख्या बढ़ने की गति की तुलना में नामांकन की वृद्धि धीमी है, जिससे बड़ी संख्या में बच्चे प्राथमिक स्तर से भी बाहर हैं |
| स्वदेश वापसी का दबाव | 10 लाख से अधिक लोगों और 2.45 लाख से अधिक बच्चों की वापसी से स्थानीय शिक्षा सेवाएँ और अधिक दबाव में हैं |
| शिक्षा की गुणवत्ता | चौथी कक्षा में आधे से कम छात्र भाषा में न्यूनतम दक्षता तक पहुँचते हैं, जो आगे की पढ़ाई की नींव को कमजोर करता है |
| उच्च शिक्षा का सिकुड़ता ढाँचा | लगभग 2.08 लाख छात्र नामांकित हैं, जबकि 2020 में लगभग 4.3 लाख थे, जिससे शिक्षित मानव संसाधन की कमी बढ़ेगी |
आगे की राह
- लड़कियों और महिलाओं की औपचारिक शिक्षा की पूर्ण बहाली सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा संवाद और निगरानी को निरंतर रखना चाहिए
- प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर स्कूलों, शिक्षकों और कक्षा सामग्री में जनसंख्या वृद्धि के अनुरूप निवेश बढ़ाया जाना चाहिए
- शिक्षक प्रशिक्षण और भाषा-दक्षता पर केंद्रित कार्यक्रम अपनाकर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया जाना चाहिए
- सामुदायिक कक्षाओं और दूरस्थ शिक्षा को औपचारिक शिक्षा के पूरक के रूप में मानकीकृत और मान्य किया जाना चाहिए
- स्वदेश लौटे बच्चों के लिए स्कूल में प्रवेश, भाषा सहायता और प्रमाणपत्र मान्यता की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए
- निजी, इस्लामी और वैकल्पिक शिक्षा संस्थानों के विश्वसनीय आँकड़े जुटाकर नीति-निर्माण का आधार मजबूत किया जाना चाहिए
- पड़ोसी देशों के साथ प्रवासन और शिक्षा के समन्वय के लिए क्षेत्रीय स्तर पर संवाद को बढ़ावा देना चाहिए
- आपदा-प्रवण क्षेत्रों में शिक्षा सेवाओं की निरंतरता के लिए आपातकालीन शिक्षा योजना तैयार की जानी चाहिए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
शिक्षा का अधिकार (Right to Education) · अनुच्छेद 21क (Article 21A) · बाल अधिकार अभिसमय (UN Convention on the Rights of the Child) · सतत विकास लक्ष्य 4 (SDG 4) · यूनेस्को (UNESCO) · यूनिसेफ (UNICEF) · बालिका शिक्षा · प्रत्यावर्तन (Returnees) · सामुदायिक शिक्षा (Community-based Education) · मानव पूंजी (Human Capital) · सक्षमता दृष्टिकोण (Capability Approach) · शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009)
अवधारणा प्रवाह
सत्ता परिवर्तन (अगस्त 2021) और नीतिगत प्रतिबंधों से लड़कियों की माध्यमिक और उच्च शिक्षा तक पहुँच सीमित हुई → स्कूल-आयु जनसंख्या (1.04 करोड़ से 1.15 करोड़) बढ़ने से पहले से कमजोर शिक्षा ढाँचे पर दबाव बढ़ा → पाकिस्तान और ईरान से बड़ी संख्या में स्वदेश वापसी से स्थानीय विद्यालयों और सेवाओं पर अतिरिक्त भार पड़ा → निवेश की कमी और आवर्ती आपदाओं से शिक्षक, कक्षा और सामग्री की उपलब्धता घटी → गुणवत्ता में कमी (चौथी कक्षा में भाषा दक्षता) से आगे की पढ़ाई और कौशल विकास की नींव कमजोर हुई → प्राथमिक से माध्यमिक, उच्च शिक्षा और रोजगार का मार्ग संकरा होकर पूरी पीढ़ी के पीछे छूटने का जोखिम बना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21क, संविधान (छियासीवाँ संशोधन) अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया, जिसके अंतर्गत छह से चौदह वर्ष आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार दिया गया है।
2. बाल अधिकार अभिसमय (UN Convention on the Rights of the Child) का अनुच्छेद 28 राज्य पक्षकारों से अपेक्षा करता है कि वे प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य बनाएँ और सभी के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराएँ।
3. संविधान का अनुच्छेद 45 संशोधन द्वारा मौलिक अधिकार बना दिया गया है, जिससे चौदह वर्ष तक के बच्चों की शिक्षा राज्य पर न्यायालय में प्रवर्तनीय दायित्व है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- उपर्युक्त सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: अनुच्छेद 21क 86वें संशोधन (2002) से जुड़ा है और छह से चौदह वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार देता है। कथन 2 सही है: CRC का अनुच्छेद 28 प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य और निःशुल्क बनाने की बात करता है। कथन 3 गलत है: 86वें संशोधन ने अनुच्छेद 45 को बदलकर प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा का निर्देश दिया; यह मौलिक अधिकार नहीं है, बल्कि राज्य नीति का निदेशक तत्व है।
Q2. निम्नलिखित अभिकथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): शिक्षा का अधिकार अंतरराष्ट्रीय विधि में एक मानवाधिकार के रूप में मान्य है।
कारण (R): आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदा (ICESCR) का अनुच्छेद 13 प्रत्येक व्यक्ति के शिक्षा के अधिकार को मान्यता देता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
- (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सत्य हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सत्य है, परंतु (R) असत्य है
- (A) असत्य है, परंतु (R) सत्य है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — ICESCR (1966; प्रभाव में 1976) का अनुच्छेद 13 शिक्षा के अधिकार को मान्यता देता है और प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य तथा निःशुल्क बनाने का लक्ष्य रखता है। यही प्रावधान शिक्षा को मानवाधिकार के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति का आधार है, इसलिए (R), (A) की सही व्याख्या है।
Q3. निम्नलिखित सूचियों का सुमेलन कीजिए:
सूची-I (संस्था)
A. UNESCO
B. UNICEF
C. UNHCR
D. UNDP
सूची-II (मुख्य कार्यक्षेत्र)
1. मानव विकास रिपोर्ट का प्रकाशन
2. बालकों के अधिकार और कल्याण
3. शरणार्थियों का संरक्षण
4. शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति को बढ़ावा
सही सुमेलन चुनिए:
- A-4, B-2, C-3, D-1
- A-1, B-2, C-3, D-4
- A-4, B-3, C-2, D-1
- A-2, B-4, C-3, D-1
उत्तर: A-4, B-2, C-3, D-1 — UNESCO शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति के लिए संयुक्त राष्ट्र संगठन है (A-4)। UNICEF बच्चों के अधिकार और कल्याण से जुड़ी एजेंसी है (B-2)। UNHCR शरणार्थियों के संरक्षण का कार्य देखता है (C-3)। UNDP मानव विकास रिपोर्ट प्रकाशित करता है (D-1)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ किसी समाज में शिक्षा का अधिकार केवल विधिक घोषणा से सुनिश्चित नहीं होता, उसके लिए पहुँच, समानता और संस्थागत क्षमता आवश्यक है। बालिकाओं की माध्यमिक और उच्च शिक्षा तक पहुँच पर लगी बाधाओं के संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार विधि और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही स्पष्ट कीजिए कि भारत में अनुच्छेद 21क और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 प्रवर्तनीय शिक्षा-अधिकार के डिज़ाइन के लिए क्या सबक देते हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: 1. भूमिका और तथ्य: UNESCO-UNICEF की अफ़ग़ानिस्तान शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (4 नवंबर 2026) के आँकड़े देना: 7 से 18 वर्ष की आयु वर्ग की जनसंख्या 1.04 करोड़ (2019) से बढ़कर 1.15 करोड़ (2024) हुई; अगस्त 2021 के बाद लगभग 26 लाख बालिकाएँ छठी कक्षा के बाद स्कूल से बाहर हैं; 5,300 सामुदायिक कक्षाओं में लगभग 1,62,000 शिक्षार्थी (64% बालिकाएँ); उच्च शिक्षा में नामांकन लगभग 2 लाख 8 हज़ार (2026) बनाम लगभग 4 लाख 30 हज़ार (2020); एक वर्ष में 10 लाख से अधिक प्रत्यावर्तित लोग, जिनमें 2.45 लाख बच्चे।
2. अंतरराष्ट्रीय विधिक ढाँचा: सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणा (UDHR) का अनुच्छेद 26; ICESCR का अनुच्छेद 13; बाल अधिकार अभिसमय (CRC) के अनुच्छेद 28 और 29; महिलाओं के प्रति भेदभाव उन्मूलन अभिसमय (CEDAW) का अनुच्छेद 10; सतत विकास लक्ष्य 4 और शिक्षा 2030 इंचियॉन घोषणा (2015)।
3. समालोचनात्मक परीक्षण: इन संधियों में प्रत्यक्ष प्रवर्तन की सीमा; CRC समिति जैसी निगरानी संस्थाओं की रिपोर्टिंग-आधारित प्रणाली; संप्रभुता और मानवीय हस्तक्षेप के बीच तनाव; UN एजेंसियों का कार्यक्रम-आधारित हस्तक्षेप (सामुदायिक कक्षाएँ, साक्षरता) बनाम औपचारिक शिक्षा का प्रतिस्थापन न हो पाना; रिपोर्ट के अनुसार ‘nothing can replace in-person schooling’ का तर्क। अमर्त्य सेन का सक्षमता दृष्टिकोण: शिक्षा को क्षमता-विस्तार का साधन मानना।
4. भारत का अनुभव: मोहिनी जैन बनाम कर्नाटक राज्य (1992) में शिक्षा को अनुच्छेद 21 के जीवन के अधिकार में निहित माना गया; उन्नी कृष्णन बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (1993) ने इसे 14 वर्ष तक सीमित किया; 86वाँ संशोधन (2002) से अनुच्छेद 21क और मौलिक कर्तव्य अनुच्छेद 51क(ट) जुड़े; अनुच्छेद 45 में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल का निर्देश; RTE अधिनियम, 2009 की धारा 3 (निःशुल्क शिक्षा), धारा 12(1)(ग) (25% आरक्षण); सोसाइटी फ़ॉर अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स ऑफ़ राजस्थान बनाम भारत संघ (2014) में धारा 12(1)(ग) की संवैधानिक वैधता।
5. सबक और संतुलित निष्कर्ष: विधिक प्रवर्तनीयता, वित्तीय प्रावधान, शिक्षक और संसाधन, बहुमार्गी विकल्प (सामुदायिक शिक्षा) और लिंग-संवेदी नीति का समन्वय; यह तर्क कि अंतरराष्ट्रीय दबाव और आंतरिक नीति दोनों आवश्यक हैं; निष्कर्ष में मानव पूंजी और आर्थिक संवृद्धि पर दीर्घकालिक प्रभाव।
स्रोत: news.un.org
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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