18 Oct केरल में ‘एग्रीस्टैक आयुक्तालय’ का गठन: कृषि क्षेत्र में डिजिटल क्रांति की ओर एक कदम

✎ एग्रीस्टैक तीन रजिस्ट्रियों — किसान रजिस्ट्री, फसल बुवाई रजिस्ट्री और भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र रजिस्ट्री — पर आधारित डिजिटल कृषि अवसंरचना है, जिसे केंद्र ने डिजिटल कृषि मिशन के अंतर्गत लागू किया है और जिसका संचालन राज्य सूची के…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — शासन, संघवाद और सार्वजनिक नीति (राज्य–केंद्र समन्वय, डिजिटल शासन) | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — कृषि (कृषि सुधार, डिजिटल कृषि) तथा डिजिटल अर्थव्यवस्था व डेटा सुरक्षा
- Prelims: एग्रीस्टैक (AgriStack) के तीन मुख्य रजिस्ट्री: किसान रजिस्ट्री, फसल बुवाई रजिस्ट्री, भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र रजिस्ट्री, डिजिटल कृषि मिशन (Digital Agriculture Mission) और इसका नोडल मंत्रालय (केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय), ‘राज्य कोर हैंडओवर सहायता’ (State Core Handover Support) कार्यक्रम, राज्य एग्रीस्टैक डेटा शासन समिति (SADGC) का संरचना और अध्यक्षता, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (Digital Personal Data Protection Act, 2023), संविधान की सातवीं अनुसूची — राज्य सूची में ‘कृषि’ और ‘भूमि’ विषय, सहकारी संघवाद और राज्यों को केंद्र की योजनाओं में सहभागिता, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) की अवधारणा
- Essay: डिजिटल तकनीक और किसान-केंद्रित शासन: अवसर एवं चुनौतियाँ, संघीय ढाँचे में डेटा का स्वामित्व, गोपनीयता और विश्वास
त्वरित पुनरावृत्ति: एग्रीस्टैक तीन रजिस्ट्रियों — किसान रजिस्ट्री, फसल बुवाई रजिस्ट्री और भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र रजिस्ट्री — पर आधारित डिजिटल कृषि अवसंरचना है, जिसे केंद्र ने डिजिटल कृषि मिशन के अंतर्गत लागू किया है और जिसका संचालन राज्य सूची के विषय ‘कृषि’ के कारण सहकारी संघवाद के माध्यम से राज्यों को सौंपा जा रहा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केरल (Keralam) सरकार ने 13 अक्टूबर के आदेश के माध्यम से राज्य के कृषि विभाग के अंतर्गत ‘एग्रीस्टैक आयुक्तालय’ (AgriStack Commissionerate) का गठन किया है। इसमें निदेशक, कृषि (Director, Agriculture) को चार-स्तरीय आयुक्तालय के लिए एग्रीस्टैक आयुक्त (AgriStack Commissioner) के रूप में नियुक्त किया गया है। राज्य सरकार के अनुसार यह संस्थागत ढाँचा किसान-केंद्रित सेवाओं, शासन की दक्षता और नवाचार के लिए डिजिटल आधार है। इससे पहले जुलाई 2026 में राज्य ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय राज्य एग्रीस्टैक डेटा शासन समिति (SADGC) गठित की थी। यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाती है कि एग्रीस्टैक के संचालन का स्वामित्व धीरे-धीरे राज्यों को सौंपा जा रहा है।
पृष्ठभूमि
- एग्रीस्टैक को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा डिजिटल कृषि मिशन के अंतर्गत लागू किया जाता है। यह मिशन सितंबर 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया था।
- कृषि संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची का विषय है (प्रविष्टि 14), जबकि भूमि-अधिकार और भू-अभिलेख से संबंधित विषय भी मुख्यतः राज्य सूची के अंतर्गत आते हैं। इसलिए केंद्र की डिजिटल पहल का सफल क्रियान्वयन राज्यों के सहयोग पर निर्भर है।
- सितंबर 2025 में केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए परिचालन दिशानिर्देश जारी किए, ताकि वे एग्रीस्टैक की परिचालन रीढ़ का पूर्ण स्वामित्व ग्रहण कर सकें। इसी के तहत ‘राज्य कोर हैंडओवर सहायता’ कार्यक्रम है।
- कृषि से जुड़े किसानों, फसलों और भूमि के डेटा का बड़े पैमाने पर संग्रह और उपयोग होता है, इसलिए डेटा की सुरक्षा, गोपनीयता और उत्तरदायी प्रयोग के प्रश्न उठते हैं। इसी संदर्भ में डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 प्रासंगिक है।
- इससे पहले भारत में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के उदाहरण के रूप में आधार, यूपीआई और डिजिलॉकर जैसे मंचों ने सेवा वितरण में पारदर्शिता बढ़ाने का मॉडल प्रस्तुत किया है, और एग्रीस्टैक इसी दृष्टिकोण को कृषि क्षेत्र में लागू करने का प्रयास है।
एग्रीस्टैक (AgriStack) क्या है?
- एग्रीस्टैक कृषि क्षेत्र के लिए एक डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना है, जिसका उद्देश्य एकीकृत और संघीय (federated) डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना है।
- इसके तीन मुख्य रजिस्ट्री हैं: किसान रजिस्ट्री (Farmers Registry), फसल बुवाई रजिस्ट्री (Crop Sown Registry) और भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र रजिस्ट्री (Geo-referenced Village Maps Registry)।
- यह डिजिटल कृषि मिशन (Digital Agriculture Mission) का एक प्रमुख घटक है, जिसे केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय लागू करता है।
- संघीय ढाँचे में केंद्र मानक, तकनीकी ढाँचा और दिशानिर्देश तय करता है, जबकि राज्य अपने स्तर पर डेटा का संग्रह, सत्यापन और प्रशासनिक उपयोग करते हैं।
- किसान रजिस्ट्री से लाभार्थियों की पहचान और योजनाओं के लक्षित वितरण में सुधार की अपेक्षा की जाती है, जबकि फसल बुवाई रजिस्ट्री से फसल-आँकड़ों की विश्वसनीयता बढ़ती है।
- भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र भूमि-अभिलेखों को भौगोलिक रूप से सटीक बनाते हैं, जिससे फसल और भूमि के बीच संबंध की पुष्टि संभव होती है।
- राज्य एग्रीस्टैक डेटा शासन समिति (SADGC) जैसी संस्थाएँ डेटा के स्वामित्व, पहुँच, सुरक्षा और उपयोग के नियम तय करने का संस्थागत ढाँचा प्रदान करती हैं।
- डेटा शासन में व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता के लिए डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के सिद्धांतों का पालन आवश्यक माना जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| संस्थागत ढाँचा | राज्य कृषि विभाग के अंतर्गत चार स्तरीय ‘AgriStack कमिश्नरेट’ गठित किया गया है, जिसके प्रमुख निदेशक (कृषि) को AgriStack कमिश्नर बनाया गया है। |
| मूल रजिस्ट्री | AgriStack तीन मूल रजिस्ट्रियों पर आधारित है: किसान रजिस्ट्री (Farmers Registry), फसल बुवाई रजिस्ट्री (Crop Sown Registry) और जियो-रेफरेंस्ड ग्राम मानचित्र रजिस्ट्री (Geo-referenced Village Maps Registry)। |
| केंद्रीय कार्यक्रम से संबंध | यह पहल केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा डिजिटल कृषि मिशन (Digital Agriculture Mission) के अंतर्गत लागू की जा रही है, और राज्य इसे अपने क्षेत्र में क्रियान्वित कर रहे हैं। |
| डिजिटल आधार का उद्देश्य | किसान-केंद्रित सेवाओं, शासन की दक्षता और नवाचार के लिए संघीय एवं एकीकृत डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र बनाना इसका लक्ष्य है। |
| राज्य स्तरीय डेटा शासन | जुलाई 2026 में गठित 11 सदस्यीय राज्य AgriStack डेटा शासन समिति (SADGC) की अध्यक्षता मुख्य सचिव करते हैं, जो कृषि क्षेत्र के संवेदनशील डेटा के प्रबंधन का संस्थागत ढाँचा है। |
| स्वामित्व का हस्तांतरण | सितंबर 2025 के परिचालन दिशानिर्देशों के अनुसार राज्यों को ‘राज्य कोर हैंडओवर सहायता’ कार्यक्रम के तहत AgriStack की परिचालन रीढ़ का पूर्ण स्वामित्व सौंपा जा रहा है। |
महत्व
शासन और प्रशासनिक
- विभिन्न विभागों के बीच किसान और भूमि से जुड़े आँकड़ों को एक साझा ढाँचे में लाकर दोहराव और विसंगतियों को कम किया जा सकता है।
- किसान की पहचान और फसल की जानकारी एक ही स्रोत से उपलब्ध होने पर सेवा वितरण में पारदर्शिता और समयबद्धता बढ़ती है।
- समर्पित कमिश्नरेट से जवाबदेही तय होती है, क्योंकि कार्यान्वयन का उत्तरदायित्व एक नामित अधिकारी के पास रहता है।
संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध
- कृषि राज्य सूची का विषय है, इसलिए AgriStack का राज्य द्वारा स्वामित्व ग्रहण करना सहकारी संघवाद की व्यावहारिक अभिव्यक्ति है।
- केंद्र द्वारा मिशन की रूपरेखा और तकनीकी मानक तय करना तथा राज्य द्वारा स्थानीय क्रियान्वयन करना, दोनों के बीच साझेदारी का मॉडल दर्शाता है।
आर्थिक और कृषि विकास
- सटीक फसल-बुवाई आँकड़े नीति-निर्माण, फसल अनुमान और आपदा के बाद क्षति आकलन को अधिक विश्वसनीय बनाते हैं।
- किसान रजिस्ट्री के माध्यम से योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुँच आसान होती है, जिससे कृषि आय और उत्पादकता में सुधार के उपायों का लक्षित प्रसार संभव होता है।
- भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र भूमि उपयोग की योजना और ग्रामीण अवसंरचना के नियोजन में उपयोगी आधार देते हैं।
डेटा शासन और नागरिक अधिकार
- कृषि डेटा के संग्रहण और उपयोग के लिए स्पष्ट संस्थागत जिम्मेदारी तय होने से डेटा के दुरुपयोग के जोखिम का प्रबंधन किया जा सकता है।
- व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा का प्रश्न सीधे नागरिक की गोपनीयता से जुड़ता है, इसलिए यह डेटा शासन का एक महत्वपूर्ण पक्ष है।
चुनौतियाँ
1. डेटा गोपनीयता और सहमति
- किसानों के व्यक्तिगत, भूमि और फसल से जुड़े डेटा का संग्रहण और साझाकरण सूचित सहमति के बिना नहीं होना चाहिए।
- विभिन्न विभागों के बीच डेटा साझा करते समय उद्देश्य-सीमा (purpose limitation) और भंडारण सीमा का पालन सुनिश्चित करना कठिन है।
- सुरक्षा उपायों की कमी होने पर साइबर खतरे और गलत उपयोग की आशंका बनी रहती है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: अनुच्छेद 21 के अंतर्गत निजता का अधिकार; डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023
2. राज्य सूची के विषय पर केंद्रीय पहल का समन्वय
- कृषि राज्य सूची का विषय होने के कारण केंद्र की डिजिटल योजनाओं को राज्यों की प्रशासनिक इकाइयों के साथ समन्वित करना आवश्यक है।
- राज्यों की क्षमता और प्राथमिकताएँ भिन्न हैं, इसलिए एक समान मानक लागू करने में व्यावहारिक कठिनाइयाँ आती हैं।
- राज्य स्तर पर स्वामित्व के हस्तांतरण के बाद वित्तीय और तकनीकी संसाधनों की निरंतरता सुनिश्चित करनी होगी।
यूपीएससी लिंक: GS-2: संघवाद; केंद्र-राज्य संबंध और सहकारी संघवाद; सातवीं अनुसूची की राज्य सूची
3. भूमि अभिलेखों की गुणवत्ता
- भूमि रिकॉर्ड पुराने, अधूरे या विवादित होने की स्थिति में किसान रजिस्ट्री की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
- भू-संदर्भित मानचित्रों का सटीक सर्वेक्षण और अद्यतन होना आवश्यक है, जो समय और संसाधन दोनों की माँग करता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: कृषि क्षेत्र में डिजिटल सुधार; GS-2: शासन में सूचना-प्रौद्योगिकी का उपयोग
4. डिजिटल अंतराल और समावेशन
- छोटे और सीमांत किसानों, बुजुर्गों और दूरस्थ क्षेत्रों के किसानों के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट की सीमित पहुँच हो सकती है।
- डिजिटल साक्षरता के अभाव में किसान सेवाओं का पूरा लाभ नहीं ले पाते, जिससे बहिष्करण का जोखिम बढ़ता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: सामाजिक न्याय और कमजोर वर्गों के लिए सेवाएँ; GS-3: समावेशी विकास
5. क्षमता निर्माण और मानव संसाधन
- ग्राम स्तर के कर्मचारियों और कृषि अधिकारियों को डेटा प्रबंधन और डिजिटल उपकरणों का प्रशिक्षण देना आवश्यक है।
- कमिश्नरेट जैसे नए ढाँचों में पर्याप्त स्टाफ और स्पष्ट कार्य-विभाजन न होने पर कार्यान्वयन में विलंब हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: लोक प्रशासन में क्षमता निर्माण; सिविल सेवा सुधार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| समस्या | चिंता |
|---|---|
| डेटा सुरक्षा | किसानों के संवेदनशील डेटा के दुरुपयोग, रिसाव या साइबर हमले का खतरा। |
| सहमति और उद्देश्य-सीमा | बिना स्पष्ट सहमति के विभिन्न विभागों के बीच डेटा साझा होने की आशंका। |
| केंद्र-राज्य समन्वय | राज्य सूची के विषय पर एकीकृत मानक लागू करने में प्रशासनिक बाधाएँ। |
| भूमि अभिलेखों की शुद्धता | पुराने या त्रुटिपूर्ण भूमि रिकॉर्ड से किसान रजिस्ट्री की विश्वसनीयता घटना। |
| डिजिटल बहिष्करण | छोटे, सीमांत और दूरस्थ किसानों का डिजिटल सेवाओं से वंचित रह जाना। |
| संसाधन की निरंतरता | स्वामित्व हस्तांतरण के बाद तकनीकी रखरखाव और वित्तीय व्यवस्था की अनिश्चितता। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- डिजिटल कृषि मिशन (Digital Agriculture Mission)
- राज्य कोर हैंडओवर सहायता कार्यक्रम (State Core Handover Support)
आगे की राह
- किसान रजिस्ट्री में डेटा संग्रहण से पहले सूचित सहमति की स्पष्ट प्रक्रिया बनाई जाए और डेटा साझाकरण के नियम लिखित रूप में सार्वजनिक किए जाएँ।
- डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के प्रावधानों के अनुरूप डेटा संरक्षण अधिकारी और ऑडिट तंत्र स्थापित किए जाएँ।
- भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और सत्यापन को प्राथमिकता देकर किसान रजिस्ट्री और ग्राम मानचित्रों की शुद्धता सुनिश्चित की जाए।
- राज्य AgriStack डेटा शासन समिति और AgriStack कमिश्नरेट के बीच स्पष्ट उत्तरदायित्व और समयबद्ध समीक्षा तंत्र बनाया जाए।
- ग्राम स्तर के कृषि कर्मचारियों और किसान उत्पादक संगठनों को डिजिटल साक्षरता और डेटा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाए।
- बहुभाषी, सरल और ऑफलाइन-सक्षम सेवाएँ उपलब्ध कराकर छोटे व सीमांत किसानों के डिजिटल बहिष्करण को कम किया जाए।
- राज्यों के बीच अनुभव साझा करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और सर्वोत्तम व्यवहार का दस्तावेजीकरण किया जाए।
- केंद्र और राज्य के बीच वित्तीय एवं तकनीकी संसाधनों की दीर्घकालिक योजना बनाई जाए ताकि स्वामित्व हस्तांतरण के बाद प्रणाली सुचारु चले।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
एग्रीस्टैक (AgriStack) · डिजिटल कृषि मिशन (Digital Agriculture Mission) · किसान रजिस्ट्री (Farmers Registry) · फसल बोई गई रजिस्ट्री (Crop Sown Registry) · भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र रजिस्ट्री (Geo-referenced Village Maps Registry) · डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) · सहयोगी संघवाद (Cooperative Federalism) · राज्य सूची की प्रविष्टि 14 (Entry 14, State List) · डेटा शासन (Data Governance) · डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (Digital Personal Data Protection Act, 2023) · निजता का अधिकार (Right to Privacy) · राज्य मुख्य सहायता हस्तांतरण कार्यक्रम (State Core Handover Support)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: डेटा गोपनीयता और निजता के अधिकार से संबंध
- सातवीं अनुसूची, राज्य सूची की प्रविष्टि 14: कृषि राज्य का विषय
- अनुच्छेद 246: विधायी शक्तियों का केंद्र और राज्य में वितरण
अवधारणा प्रवाह
केंद्र द्वारा डिजिटल कृषि मिशन के तहत AgriStack की रूपरेखा तय करना (तीन मूल रजिस्ट्रियाँ)। → सितंबर 2025 के दिशानिर्देशों के अनुसार राज्यों को ‘राज्य कोर हैंडओवर सहायता’ के तहत परिचालन स्वामित्व सौंपना। → राज्य द्वारा जुलाई 2026 में 11 सदस्यीय AgriStack डेटा शासन समिति का गठन, जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव करते हैं। → 13 अक्टूबर 2026 के आदेश से कृषि निदेशक को AgriStack कमिश्नर बनाकर चार स्तरीय AgriStack कमिश्नरेट का गठन। → कमिश्नरेट के माध्यम से किसान रजिस्ट्री, फसल बुवाई रजिस्ट्री और ग्राम मानचित्र रजिस्ट्री का एकीकृत क्रियान्वयन। → एकीकृत डिजिटल आधार से किसान-केंद्रित सेवाओं, शासन दक्षता और नीति-निर्माण में सुधार।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कृषि संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची का विषय है।
2. एग्रीस्टैक (AgriStack) के तीन मूल रजिस्ट्री घटक हैं: किसान रजिस्ट्री, फसल बोई गई रजिस्ट्री और भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र रजिस्ट्री।
3. डिजिटल कृषि मिशन का क्रियान्वयन केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: कृषि राज्य सूची (सातवीं अनुसूची, प्रविष्टि 14) का विषय है। कथन 2 सही है: एग्रीस्टैक के तीन मूल रजिस्ट्री घटक यही हैं। कथन 3 गलत है: डिजिटल कृषि मिशन का क्रियान्वयन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा किया जाता है, इसलिए केवल दो कथन सही हैं।
Q2. निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
कथन (A): एग्रीस्टैक के अंतर्गत किसानों का एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड बनने से कल्याण योजनाओं के लाभ सीधे और सटीक रूप से पात्र लाभार्थियों तक पहुँचाने में सहायता मिल सकती है।
कारण (R): किसान पहचान, भूमि और फसल से संबंधित आँकड़ों का सत्यापन किसी एक स्थान पर संभव होने से दोहरे लाभ और अपात्र लाभार्थियों की पहचान की संभावना घटती है।
सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — एकीकृत किसान रजिस्ट्री और भूमि-फसल आँकड़ों का सत्यापन ही लाभ-अंतरण की सटीकता बढ़ाने का आधार है, इसलिए कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है। यह डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के शासन-लाभ से संबंधित है।
Q3. निम्नलिखित स्तंभों का मिलान कीजिए:
स्तंभ I
A. सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 14
B. के. एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ (2017) वाद
C. डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023
D. अनुच्छेद 282
स्तंभ II
1. निजता को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता
2. कृषि एवं प्रशासन का राज्य विषय होना
3. व्यक्तिगत डेटा का सहमति-आधारित प्रसंस्करण
4. सार्वजनिक प्रयोजन के लिए केंद्र या राज्य द्वारा अनुदान
सही मिलान चुनिए:
- A-1, B-2, C-3, D-4
- A-2, B-1, C-3, D-4
- A-2, B-3, C-1, D-4
- A-4, B-1, C-2, D-3
उत्तर: A-2, B-1, C-3, D-4 — A-2: राज्य सूची की प्रविष्टि 14 में कृषि आती है। B-1: पुट्टस्वामी वाद में नौ-न्यायाधीशीय पीठ ने निजता को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार माना। C-3: डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 सहमति-आधारित प्रसंस्करण पर बल देता है। D-4: अनुच्छेद 282 सार्वजनिक प्रयोजन के लिए अनुदान से संबंधित है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ एग्रीस्टैक (AgriStack) को डिजिटल कृषि मिशन के अंतर्गत किसान-केंद्रित डिजिटल आधारभूत संरचना के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि कृषि संविधान की राज्य सूची का विषय है। केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति-विभाजन के संदर्भ में इस मॉडल का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि किसान-डेटा के संग्रह, भंडारण और साझेदारी के लिए कौन-से संवैधानिक एवं वैधानिक सुरक्षा-उपाय आवश्यक हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की संरचना:
(1) संवैधानिक आधार: सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 14 (कृषि); अनुच्छेद 246 के अंतर्गत विधायी शक्ति-विभाजन; अनुच्छेद 282 के अंतर्गत केंद्र और राज्य द्वारा सार्वजनिक प्रयोजन के लिए अनुदान; केंद्र द्वारा नीति-दिशा और राज्य द्वारा क्रियान्वयन का व्यावहारिक स्वरूप।
(2) संस्थागत ढाँचा: डिजिटल कृषि मिशन (केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय); तीन मूल रजिस्ट्री (किसान रजिस्ट्री, फसल बोई गई रजिस्ट्री, भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र रजिस्ट्री); केरलम सरकार द्वारा कृषि निदेशक को एग्रीस्टैक आयुक्त बनाकर चार-स्तरीय एग्रीस्टैक आयुक्तालय का गठन (अक्टूबर 2026 का आदेश); मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 11-सदस्यीय राज्य एग्रीस्टैक डेटा शासन समिति (SADGC); सितंबर 2025 के केंद्रीय दिशानिर्देश और राज्य मुख्य सहायता हस्तांतरण कार्यक्रम (State Core Handover Support) के अंतर्गत राज्यों को संचालन-आधार का पूर्ण स्वामित्व।
(3) सहयोगी संघवाद के पक्ष में तर्क: एकीकृत डेटा से लाभ-अंतरण की सटीकता; दोहरे लाभ और अपात्रता पर नियंत्रण; भूमि-फसल आँकड़ों से आपदा-आकलन, बीमा और ऋण-वितरण में सुधार; राज्यों की प्रशासनिक क्षमता का उपयोग; सामान्य मानकों से अंतर-संचालनीयता।
(4) आलोचनात्मक पक्ष: राज्य विषय पर केंद्र की नीति-प्रेरित संरचना से स्वायत्तता पर प्रश्न; राज्यों की वित्तीय और तकनीकी क्षमता में असमानता; डिजिटल विभाजन और छोटे किसानों की बहिष्कार-संभावना; भूमि-अभिलेख की अशुद्धि का डेटा में संचरण।
(5) डेटा सुरक्षा: के. एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ (2017) में निजता को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार घोषित; डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 में सहमति-आधारित प्रसंस्करण, उद्देश्य-सीमा (purpose limitation) और डेटा संरक्षण बोर्ड की भूमिका; किसान-डेटा के स्वामित्व और उपयोग-नियमों की स्पष्टता; न्यूनतम डेटा संग्रह का सिद्धांत।
(6) समग्र निष्कर्ष और सुझाव: केंद्र-राज्य समन्वय के लिए स्पष्ट डेटा-साझेदारी समझौते; स्वतंत्र निगरानी-तंत्र; स्थानीय भाषाओं में किसान-सहभागिता; क्षमता-निर्माण और छोटे किसानों के लिए सहायता-केंद्र; संघीय संतुलन और नागरिक अधिकार दोनों की रक्षा करते हुए एग्रीस्टैक को सहकारी मॉडल के रूप में विकसित करने का तर्क।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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