06 Oct हज़ार स्तंभ मंदिर में द्वारपालों का पुनरुद्धार: ASI की पहल
✎ हजार स्तंभ मंदिर, काकतीय वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसका जीर्णोद्धार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा पारंपरिक प्रतिमा विज्ञान और मूर्तिकला सिद्धांतों का पालन करते हुए किया जा रहा है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भारतीय विरासत और संस्कृति, कला के रूप | GS Paper I — भारतीय इतिहास — प्राचीन से आधुनिक काल तक के महत्वपूर्ण घटनाक्रम, व्यक्तित्व, विषय
- Prelims: हजार स्तंभ मंदिर, काकतीय राजवंश, द्वारपाल मूर्तियां, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), हनमकोंडा, तेलंगाना, मंदिर वास्तुकला
- Essay: भारत की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और संवर्धन, स्थानीय कला और स्थापत्य का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: हजार स्तंभ मंदिर, काकतीय वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसका जीर्णोद्धार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा पारंपरिक प्रतिमा विज्ञान और मूर्तिकला सिद्धांतों का पालन करते हुए किया जा रहा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने तेलंगाना के हनमकोंडा स्थित ऐतिहासिक हजार स्तंभ मंदिर में द्वारपाल (Dwarapala) मूर्तियों के जीर्णोद्धार और संरक्षण का कार्य शुरू किया है। यह पहल मंदिर की मूल्यवान मूर्तिकला विरासत को संरक्षित करने के बड़े अभियान का हिस्सा है। इस कार्य में पारंपरिक प्रतिमा विज्ञान (iconometry) और मूर्तिकला (iconography) के सिद्धांतों का पालन किया जा रहा है, ताकि मूर्तियों के सही अनुपात, मुद्रा, विशेषताओं और शैलीगत चरित्र को बनाए रखा जा सके।
पृष्ठभूमि
- हजार स्तंभ मंदिर का निर्माण काकतीय राजवंश के राजा रुद्रदेव ने 12वीं शताब्दी में करवाया था।
- यह मंदिर भगवान शिव, विष्णु और सूर्य को समर्पित है और काकतीय वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
- मंदिर को ‘त्रिदेवालयम’ के नाम से भी जाना जाता है, जो तीन देवताओं को समर्पित होने का प्रतीक है।
- इसकी वास्तुकला में चालुक्य, पल्लव और होयसल शैलियों का प्रभाव देखा जा सकता है, जो उस समय की क्षेत्रीय कलात्मक परंपराओं के संगम को दर्शाता है।
- मंदिर अपनी बारीक नक्काशी, पॉलिश किए गए बेसाल्ट स्तंभों और अद्वितीय ‘सैंडबॉक्स’ नींव के लिए प्रसिद्ध है, जो इसे भूकंप प्रतिरोधी बनाती है।
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) देश में पुरातात्विक स्थलों और स्मारकों के संरक्षण, रखरखाव और उत्खनन के लिए जिम्मेदार प्रमुख सरकारी एजेंसी है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और विरासत संरक्षण
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India – ASI) संस्कृति मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख संगठन है, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत के पुरातात्विक अनुसंधान और संरक्षण के लिए जिम्मेदार है।
- इसकी स्थापना 1861 में अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा की गई थी, जिन्हें ‘भारतीय पुरातत्व का जनक’ माना जाता है।
- ASI का मुख्य कार्य राष्ट्रीय महत्व के प्राचीन स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों का रखरखाव करना है।
- यह प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 (Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Act, 1958) के प्रावधानों के तहत कार्य करता है।
- ASI देश भर में 3,600 से अधिक प्राचीन स्मारकों, पुरातात्विक स्थलों और राष्ट्रीय महत्व के अवशेषों का प्रबंधन करता है।
- इसके कार्यों में पुरातात्विक उत्खनन, पुरातात्विक स्थलों का संरक्षण, स्मारकों का जीर्णोद्धार, पुरातात्विक सर्वेक्षण और संग्रहालयों का रखरखाव शामिल है।
- यह सांस्कृतिक विरासत के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसे भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| द्वारपाल मूर्तियों का जीर्णोद्धार | काकतीय युग की मूर्तिकला विरासत का संरक्षण सुनिश्चित करता है। |
| पारंपरिक प्रतिमा विज्ञान और प्रतिमा लक्षण विज्ञान का पालन | मूर्तियों के सही अनुपात, मुद्रा, विशेषताओं और शैलीगत चरित्र को बनाए रखता है। |
| संगत पत्थर का उपयोग | मूल रंग, बनावट, दाने और भौतिक विशेषताओं से मेल खाता है, जिससे मूर्तियों में एकरूपता बनी रहती है। |
| उद्यान विकास और भूनिर्माण | स्मारक की समग्र प्रस्तुति और आगंतुक अनुभव को बेहतर बनाता है। |
| तकनीकी मार्गदर्शन और विशेषज्ञ सहयोग | भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधिकारियों और मास्टर मूर्तिकारों की विशेषज्ञता का लाभ उठाता है। |
महत्व
सांस्कृतिक महत्व
- यह जीर्णोद्धार कार्य काकतीय कला और स्थापत्य शैली के संरक्षण में महत्वपूर्ण है, जो दक्षिण भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक अभिन्न अंग है।
- हजार स्तंभ मंदिर जैसे ऐतिहासिक स्थल भारत की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक हैं और इनका संरक्षण भावी पीढ़ियों के लिए आवश्यक है।
पर्यटन और आर्थिक महत्व
- मंदिर परिसर का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण पर्यटकों को आकर्षित करेगा, जिससे स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
- पर्यटन में वृद्धि से स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और संबंधित उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा।
संरक्षण और विरासत प्रबंधन
- यह परियोजना भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India – ASI) द्वारा विरासत स्थलों के वैज्ञानिक संरक्षण और प्रबंधन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
- पारंपरिक तकनीकों और आधुनिक संरक्षण सिद्धांतों का संयोजन अन्य विरासत स्थलों के लिए एक मॉडल प्रस्तुत करता है।
चुनौतियाँ
1. प्रामाणिकता बनाए रखना
- जीर्णोद्धार में मूल मूर्तियों की कलात्मक और ऐतिहासिक प्रामाणिकता को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है।
- नया पत्थर लगाते समय यह सुनिश्चित करना कि वह मूल के साथ पूरी तरह से मेल खाता हो, अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: कला एवं संस्कृति: भारतीय विरासत का संरक्षण
2. कुशल कारीगरों की उपलब्धता
- पारंपरिक प्रतिमा विज्ञान और प्रतिमा लक्षण विज्ञान के सिद्धांतों का पालन करने के लिए अत्यधिक कुशल मूर्तिकारों और संरक्षण विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है।
- ऐसे विशेषज्ञ कारीगरों की कमी जीर्णोद्धार कार्यों में बाधा बन सकती है।
यूपीएससी लिंक: कला एवं संस्कृति: पारंपरिक शिल्प और कौशल
3. दीर्घकालिक रखरखाव और निधि
- जीर्णोद्धार के बाद भी इन स्मारकों के दीर्घकालिक रखरखाव और संरक्षण के लिए पर्याप्त धन और संसाधनों की आवश्यकता होती है।
- जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय कारकों से होने वाले नुकसान से बचाव के लिए निरंतर निगरानी आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: शासन: सार्वजनिक वित्त प्रबंधन
4. सामग्री की संगतता
- मूल पत्थर के रंग, बनावट, दाने और भौतिक विशेषताओं से मेल खाने वाले संगत पत्थर का चयन करना एक जटिल कार्य है।
- गलत सामग्री का उपयोग स्मारक की संरचनात्मक अखंडता और सौंदर्य को प्रभावित कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: सामग्री विज्ञान
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| कलात्मक प्रामाणिकता | जीर्णोद्धार के दौरान मूल कलाकृति की शैली और भावना को बनाए रखना। |
| सामग्री की उपलब्धता | मूल संरचना से मेल खाने वाले संगत पत्थर को खोजना और उसका उपयोग करना। |
| विशेषज्ञता की कमी | पारंपरिक प्रतिमा विज्ञान और संरक्षण तकनीकों में कुशल कारीगरों और विशेषज्ञों की सीमित संख्या। |
| पर्यावरणीय प्रभाव | प्रदूषण, मौसम और अन्य प्राकृतिक कारकों से होने वाले क्षरण से स्मारक की रक्षा करना। |
| निधि और संसाधन | संरक्षण और रखरखाव के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता और मानव संसाधनों की निरंतर उपलब्धता। |
आगे की राह
- विरासत संरक्षण में उन्नत तकनीकों और पारंपरिक ज्ञान के संयोजन को बढ़ावा देना।
- संरक्षण विशेषज्ञों और कुशल कारीगरों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना।
- निजी क्षेत्र और नागरिक समाज संगठनों को विरासत संरक्षण परियोजनाओं में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करना।
- विरासत स्थलों के आसपास स्थायी पर्यटन मॉडल विकसित करना जो स्थानीय समुदायों को लाभान्वित करें।
- जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के प्रभावों से विरासत स्थलों की रक्षा के लिए अनुसंधान और अनुकूलन रणनीतियों में निवेश करना।
- स्मारकों के दीर्घकालिक रखरखाव के लिए एक स्थायी वित्तपोषण तंत्र स्थापित करना।
- जनता के बीच विरासत के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पुरातत्व सर्वेक्षण · मंदिर संरक्षण · काकतीय वास्तुकला · सांस्कृतिक विरासत · पुनर्स्थापना तकनीकें · हजार स्तंभ मंदिर · ऐतिहासिक स्मारक · संरक्षण सिद्धांत · आइकनोग्राफी · पर्यटन संवर्धन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 49’: ‘राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों का संरक्षण’}
अवधारणा प्रवाह
समाचार: हजार स्तंभ मंदिर में द्वारपाल जीर्णोद्धार → भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षण कार्य → पारंपरिक प्रतिमा विज्ञान और संगत पत्थर का उपयोग → सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और संवर्धन → पर्यटन को बढ़ावा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ → विरासत प्रबंधन और स्थायी विकास
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) संस्कृति मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
2. हजार स्तंभ मंदिर तेलंगाना के वारंगल में स्थित एक काकतीय-युग का मंदिर है।
3. द्वारपाल मूर्तियों का संरक्षण पारंपरिक आइकनोग्राफी और आइकोनोमेट्री के सिद्धांतों के अनुसार किया जा रहा है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) संस्कृति मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और देश की सांस्कृतिक विरासत के पुरातात्विक अनुसंधान और संरक्षण के लिए प्रमुख संगठन है। कथन 2 गलत है। हजार स्तंभ मंदिर तेलंगाना के हनमकोंडा में स्थित है, न कि वारंगल में। यह काकतीय-युग का एक महत्वपूर्ण मंदिर है। कथन 3 सही है। द्वारपाल मूर्तियों का संरक्षण पारंपरिक आइकनोग्राफी (Iconography) और आइकोनोमेट्री (Iconometry) के सिद्धांतों के अनुसार किया जा रहा है, ताकि मूर्तियों के सही अनुपात, मुद्रा, विशेषताओं और शैलीगत चरित्र को बनाए रखा जा सके।
Q2. हजार स्तंभ मंदिर के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- यह काकतीय राजवंश द्वारा निर्मित एक महत्वपूर्ण स्मारक है।
- मंदिर भगवान शिव, विष्णु और सूर्य को समर्पित है।
- हाल ही में, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इसके द्वारपालों के संरक्षण का कार्य शुरू किया है।
- यह मंदिर पूरी तरह से ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित है और इसमें कोई बलुआ पत्थर का उपयोग नहीं किया गया है।
उत्तर: यह मंदिर पूरी तरह से ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित है और इसमें कोई बलुआ पत्थर का उपयोग नहीं किया गया है। — हजार स्तंभ मंदिर काकतीय राजवंश द्वारा निर्मित एक महत्वपूर्ण स्मारक है जो भगवान शिव, विष्णु और सूर्य को समर्पित है। ASI ने हाल ही में इसके द्वारपालों के संरक्षण का कार्य शुरू किया है। यह मंदिर मुख्य रूप से बलुआ पत्थर से निर्मित है, न कि पूरी तरह से ग्रेनाइट से। इसमें बलुआ पत्थर का व्यापक उपयोग हुआ है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की भूमिका का परीक्षण कीजिए। हजार स्तंभ मंदिर में चल रहे संरक्षण कार्यों के विशेष संदर्भ में, विरासत संरचनाओं की बहाली में अपनाई जाने वाली प्रमुख तकनीकों और सिद्धांतों पर प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का संक्षिप्त परिचय और भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में इसकी समग्र भूमिका।
2. **ASI की भूमिका:**
* प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत कार्य।
* स्मारकों का रखरखाव, पुरातात्विक उत्खनन, अन्वेषण और संरक्षण।
* संग्रहालयों का प्रबंधन और सांस्कृतिक विरासत का दस्तावेजीकरण।
* विश्व विरासत स्थलों की पहचान और संरक्षण में भूमिका।
3. **हजार स्तंभ मंदिर में संरक्षण कार्य:**
* द्वारपालों की बहाली और संरक्षण का उल्लेख।
* बागवानी विकास और भू-दृश्य गतिविधियों का समावेश।
4. **विरासत संरचनाओं की बहाली में अपनाई जाने वाली तकनीकें और सिद्धांत:**
* **पारंपरिक आइकोनोमेट्री और आइकनोग्राफी:** मूर्तियों के सही अनुपात, मुद्रा और शैलीगत चरित्र को बनाए रखना।
* **संगत पत्थर का चयन:** मूल पत्थर के रंग, बनावट, दाने और भौतिक विशेषताओं से मेल खाते पत्थर का उपयोग।
* **क्षतिग्रस्त भागों को हटाना और प्रतिस्थापन:** सावधानीपूर्वक क्षतिग्रस्त हिस्सों को हटाना और सटीक फिटिंग के साथ नए भागों को जोड़ना।
* **जोड़ों का उपचार और समेकन:** संरचनात्मक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए जोड़ों का उचित उपचार।
* **तकनीकी मार्गदर्शन:** विशेषज्ञ पुरातत्वविदों और संरक्षण इंजीनियरों की देखरेख में कार्य।
* **न्यूनतम हस्तक्षेप का सिद्धांत:** मूल संरचना को यथासंभव बनाए रखना।
* **उत्क्रान्तिशीलता (Reversibility) का सिद्धांत:** यह सुनिश्चित करना कि कोई भी हस्तक्षेप भविष्य में बिना नुकसान के पूर्ववत किया जा सके।
5. **निष्कर्ष:** सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के महत्व और ASI जैसे संगठनों के निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: The Hindu
Telangana PCS (TGPSC (TSPSC)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: हाल ही में ASI द्वारा हनुमकोंडा स्थित सहस्र स्तंभ मंदिर में किस प्रकार की मूर्ति के जीर्णोद्धार कार्य को शुरू किया गया है?
- द्वारपाल मूर्ति
- नटराज मूर्ति
- गणेश मूर्ति
- भगवान विष्णु मूर्ति
उत्तर: द्वारपाल मूर्ति — ASI द्वारा हनुमकोंडा स्थित सहस्र स्तंभ मंदिर में द्वारपाल मूर्ति के जीर्णोद्धार कार्य को शुरू किया गया है।
Mains: हनुमकोंडा स्थित सहस्र स्तंभ मंदिर के ऐतिहासिक एवं स्थापत्य महत्व पर प्रकाश डालते हुए, इस मंदिर से जुड़े धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहलुओं का वर्णन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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