30 Sep गुजरात ATS ने EEZ में 526 किलो नशीली दवाओं की जब्ती कर इतिहास रचा
✎ भारत सरकार नशीले पदार्थों के खिलाफ एक बहु-एजेंसी और बहु-आयामी रणनीति के साथ प्रतिबद्ध है, जिसमें कानून प्रवर्तन, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सामुदायिक जागरूकता शामिल है, ताकि 'नशा मुक्त भारत' का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, सामाजिक न्याय | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा, अर्थव्यवस्था
- Prelims: नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ), भारतीय तटरक्षक बल (ICG), गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS), ड्रग कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026–2029)
- Essay: नशा मुक्त भारत: चुनौतियाँ और समाधान, भारत की समुद्री सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा के अंतर्संबंध
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत सरकार नशीले पदार्थों के खिलाफ एक बहु-एजेंसी और बहु-आयामी रणनीति के साथ प्रतिबद्ध है, जिसमें कानून प्रवर्तन, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सामुदायिक जागरूकता शामिल है, ताकि ‘नशा मुक्त भारत’ का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने घोषणा की कि गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS), भारतीय तटरक्षक बल और केन्द्रीय खुफिया एजेंसियों के एक संयुक्त अभियान में भारत के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में एक ईरानी नाव से 526 किलोग्राम मेथम्फेटामाइन और हेरोइन जब्त की गई है। इस कार्रवाई में पाँच पाकिस्तानी नागरिकों को भी गिरफ्तार किया गया, जो नशीले पदार्थों के खिलाफ भारत की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण सफलता है। यह अभियान विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच उत्कृष्ट समन्वय और सहयोग का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
पृष्ठभूमि
- भारत भौगोलिक रूप से ऐसे क्षेत्र में स्थित है जहाँ दो प्रमुख अफीम उत्पादक क्षेत्र, ‘स्वर्ण त्रिभुज’ (Golden Triangle) और ‘स्वर्ण अर्धचंद्र’ (Golden Crescent), मौजूद हैं, जिससे यह नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए एक पारगमन बिंदु बन जाता है।
- नशीले पदार्थों की तस्करी न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि यह आतंकवाद और संगठित अपराध को भी बढ़ावा देती है, जिससे आंतरिक सुरक्षा को गंभीर चुनौती मिलती है।
- भारत सरकार ने ‘नशा मुक्त भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बहु-आयामी रणनीति अपनाई है, जिसमें कानून प्रवर्तन को मजबूत करना, आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करना और मांग को कम करना शामिल है।
- नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985, भारत में नशीले पदार्थों से संबंधित अपराधों के लिए मुख्य कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
- नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) भारत में नशीले पदार्थों के नियंत्रण के लिए नोडल एजेंसी है, जो विभिन्न केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करती है।
- समुद्री मार्ग भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी का एक प्रमुख मार्ग बन गया है, जिससे तटीय सुरक्षा एजेंसियों, जैसे भारतीय तटरक्षक बल, की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
भारत में नशीले पदार्थों के नियंत्रण हेतु प्रमुख पहलें
- नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985: यह अधिनियम नशीले पदार्थों के उत्पादन, कब्ज़े, बिक्री, खरीद, परिवहन, भंडारण और खपत को प्रतिबंधित करता है।
- नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB): 1986 में स्थापित, यह भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी का मुकाबला करने और NDPS अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए शीर्ष एजेंसी है।
- नशा मुक्त भारत अभियान: यह अभियान 2020 में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के बारे में जागरूकता बढ़ाना, प्रभावित व्यक्तियों को उपचार प्रदान करना और पुनर्वास सेवाओं को मजबूत करना है।
- ड्रग कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026–2029): यह दस्तावेज़ कानून प्रवर्तन व्यवस्था को मजबूत करने, ड्रग नेटवर्क को तोड़ने और युवाओं व समाज को नशीले पदार्थों से बचाने के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रदान करता है।
- अंतर-एजेंसी समन्वय: विभिन्न केंद्रीय और राज्य एजेंसियों, जैसे भारतीय तटरक्षक बल, ATS, राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के बीच समन्वय और सहयोग को मजबूत किया जा रहा है ताकि नशीले पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाया जा सके।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: भारत नशीले पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य अंतर्राष्ट्रीय मंचों के माध्यम से विभिन्न देशों के साथ सहयोग करता है।
- अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में निगरानी: भारत का EEZ, जो तटरेखा से 200 नॉटिकल मील तक फैला हुआ है, समुद्री सुरक्षा एजेंसियों द्वारा नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए गहन निगरानी में रहता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| नशीले पदार्थों की बड़ी खेप की ज़ब्ती | 526 किलोग्राम मेथम्फेटामाइन और हेरोइन की बरामदगी, जो देश में नशीले पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करने में महत्वपूर्ण है। |
| संयुक्त अभियान | गुजरात ATS, भारतीय तटरक्षक बल और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय और सहयोग का प्रदर्शन। |
| अभियान की अवधि और स्थान | 16 दिनों तक चला यह अभियान भारत के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में लक्षद्वीप और मुंबई के पास संचालित किया गया, जो समुद्री सुरक्षा में खुफिया जानकारी के महत्व को दर्शाता है। |
| अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी | ईरानी नाव और 5 पाकिस्तानी नागरिकों की गिरफ्तारी, जो नशीले पदार्थों की तस्करी में अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क की संलिप्तता को उजागर करती है। |
| ड्रग कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026-2029) | यह दस्तावेज़ नशीले पदार्थों के नेटवर्क को तोड़ने और युवाओं को बचाने के लिए एक व्यापक नीतिगत ढांचा प्रदान करता है। |
महत्व
राष्ट्रीय सुरक्षा
- नशीले पदार्थों की तस्करी अक्सर आतंकवाद और अन्य संगठित अपराधों से जुड़ी होती है, इसलिए इसकी रोकथाम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
- समुद्री सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अवैध गतिविधियों को रोकना देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए आवश्यक है।
सामाजिक प्रभाव
- नशीले पदार्थों की उपलब्धता में कमी से युवाओं और समाज को इसके हानिकारक प्रभावों से बचाने में मदद मिलती है।
- नशा-मुक्त भारत का लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण में सुधार होता है।
अंतर-एजेंसी समन्वय
- विभिन्न सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के बीच प्रभावी तालमेल और सहयोग, जटिल चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक है।
- यह अभियान भविष्य में ऐसे ही संयुक्त अभियानों के लिए एक मिसाल कायम करता है, जिससे सुरक्षा तंत्र की दक्षता बढ़ती है।
आर्थिक प्रभाव
- नशीले पदार्थों की तस्करी से उत्पन्न काला धन अर्थव्यवस्था को अस्थिर कर सकता है और अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दे सकता है।
- इस तरह की ज़ब्ती से अवैध व्यापार को नुकसान पहुंचता है और वैध अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
चुनौतियाँ
1. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का अभाव
- नशीले पदार्थों की तस्करी एक सीमा-पार समस्या है, जिसके लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता होती है। कुछ देशों के साथ अपर्याप्त सहयोग चुनौती बन सकता है।
- खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त कार्रवाई के लिए वैश्विक स्तर पर अधिक समन्वय की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, आंतरिक सुरक्षा
2. समुद्री निगरानी की जटिलता
- भारत की विशाल तटरेखा और अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की निगरानी करना एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए उन्नत प्रौद्योगिकी और पर्याप्त संसाधनों की आवश्यकता होती है।
- खुले समुद्र में संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाना और उन पर कार्रवाई करना मुश्किल होता है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा, आपदा प्रबंधन
3. नशीले पदार्थों के नेटवर्क की जटिलता
- नशीले पदार्थों के तस्कर अक्सर परिष्कृत तरीकों का उपयोग करते हैं और उनके नेटवर्क अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैले होते हैं, जिससे उनका पता लगाना और उन्हें तोड़ना मुश्किल हो जाता है।
- वित्तीय लेनदेन और लॉजिस्टिक्स को ट्रैक करना एक जटिल कार्य है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा, संगठित अपराध
4. कानूनी और न्यायिक प्रक्रियाएँ
- गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों के खिलाफ सबूत इकट्ठा करना और उन्हें दोषी ठहराना एक लंबी और जटिल कानूनी प्रक्रिया हो सकती है।
- अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और प्रत्यर्पण संधियों का पालन करना भी एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: न्यायपालिका, कानून और व्यवस्था
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| खुफिया जानकारी का एकीकरण | विभिन्न एजेंसियों से प्राप्त खुफिया जानकारी को प्रभावी ढंग से एकत्र करना, विश्लेषण करना और साझा करना। |
| प्रौद्योगिकी का उपयोग | नशीले पदार्थों की तस्करी का मुकाबला करने के लिए आधुनिक निगरानी और पहचान तकनीकों का अभाव या अपर्याप्त उपयोग। |
| पुनर्वास और जागरूकता | नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से प्रभावित व्यक्तियों के लिए पर्याप्त पुनर्वास सुविधाओं और समाज में जागरूकता कार्यक्रमों की कमी। |
| सीमा-पार तस्करी | पड़ोसी देशों से नशीले पदार्थों की लगातार घुसपैठ, जो भारत को एक पारगमन बिंदु और गंतव्य दोनों बनाती है। |
| भ्रष्टाचार की संभावना | कानून प्रवर्तन एजेंसियों के भीतर भ्रष्टाचार की संभावना, जो नशीले पदार्थों के व्यापार को बढ़ावा दे सकती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- ड्रग कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026-2029)
आगे की राह
- समुद्री निगरानी और गश्त को मजबूत करने के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी (जैसे ड्रोन, उपग्रह निगरानी) का उपयोग बढ़ाना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना, विशेष रूप से पड़ोसी देशों और उन देशों के साथ जो नशीले पदार्थों के स्रोत या पारगमन बिंदु हैं।
- खुफिया जानकारी साझा करने और विश्लेषण के लिए एक केंद्रीकृत तंत्र स्थापित करना, जिससे विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय हो सके।
- नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत कानूनी प्रावधानों को मजबूत करना और त्वरित न्यायिक प्रक्रियाओं को सुनिश्चित करना।
- नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ जन जागरूकता अभियान चलाना और प्रभावित व्यक्तियों के लिए पर्याप्त पुनर्वास और परामर्श सेवाएं प्रदान करना।
- नशीले पदार्थों के व्यापार से जुड़े वित्तीय नेटवर्क को तोड़ने के लिए वित्तीय खुफिया इकाइयों को मजबूत करना।
- सीमावर्ती क्षेत्रों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण को प्राथमिकता देना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
नशीले पदार्थों की तस्करी · मादक द्रव्य नियंत्रण · समुद्री सुरक्षा · अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) · अंतर-एजेंसी समन्वय · राष्ट्रीय सुरक्षा · ड्रग कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट · आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) · भारतीय तटरक्षक बल · नशा मुक्त भारत
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ सूची में रक्षा और सुरक्षा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 253’, ‘note’: ‘अंतर्राष्ट्रीय संधियों का कार्यान्वयन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 261’, ‘note’: ‘सार्वजनिक कार्य, अभिलेख और न्यायिक कार्यवाही’}
अवधारणा प्रवाह
नशीले पदार्थों की तस्करी (अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क) → खुफिया जानकारी का संग्रह और विश्लेषण → एजेंसियों का संयुक्त अभियान (ATS, तटरक्षक बल, खुफिया) → नशीले पदार्थों की ज़ब्ती और तस्करों की गिरफ्तारी → नशीले पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान → राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक कल्याण में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत का अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) आधार रेखा से 200 समुद्री मील तक फैला हुआ है।
2. EEZ के भीतर, तटीय राष्ट्र को सभी प्राकृतिक संसाधनों के अन्वेषण और दोहन का संप्रभु अधिकार प्राप्त है।
3. संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) EEZ की अवधारणा को परिभाषित करती है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 और 2 सही हैं। भारत का EEZ आधार रेखा से 200 समुद्री मील तक फैला है, और इसके भीतर तटीय राष्ट्र को प्राकृतिक संसाधनों के अन्वेषण और दोहन का संप्रभु अधिकार प्राप्त है। कथन 3 भी सही है, क्योंकि UNCLOS ही EEZ की अवधारणा को परिभाषित करती है।
Q2. भारत में नशीले पदार्थों के नियंत्रण से संबंधित निम्नलिखित में से कौन-सा निकाय केंद्रीय स्तर पर प्रमुख एजेंसी है?
- केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)
- नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB)
- प्रवर्तन निदेशालय (ED)
- राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)
उत्तर: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) — नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) भारत में नशीले पदार्थों के नियंत्रण और अवैध तस्करी से निपटने के लिए केंद्रीय स्तर पर प्रमुख एजेंसी है।
Q3. अभिकथन (A): भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण है।
कारण (R): नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे अवैध कार्य अक्सर समुद्री मार्गों से होते हैं और इसके लिए बहु-एजेंसी दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, और कारण (R) अभिकथन (A) का सही स्पष्टीकरण भी है। समुद्री मार्गों से होने वाली अवैध गतिविधियों, विशेषकर नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय आवश्यक है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी एक गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती है। इस संदर्भ में, समुद्री मार्गों से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय के महत्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** नशीले पदार्थों की तस्करी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में परिभाषित करें और समुद्री मार्गों की भूमिका पर प्रकाश डालें।
2. **चुनौती की प्रकृति:** भारत की लंबी तटरेखा, पड़ोसी देशों से निकटता और अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट्स की गतिविधियों के कारण समुद्री तस्करी की जटिलता को समझाएं।
3. **समन्वय का महत्व:**
* **सूचना साझाकरण:** खुफिया एजेंसियों (जैसे IB, RAW) और प्रवर्तन एजेंसियों (जैसे NCB, ATS, भारतीय तटरक्षक बल) के बीच समय पर और सटीक सूचना साझाकरण।
* **संयुक्त अभियान:** विभिन्न एजेंसियों द्वारा समन्वित और संयुक्त अभियानों की आवश्यकता (जैसे हालिया ऑपरेशन)।
* **संसाधनों का इष्टतम उपयोग:** मानव शक्ति, प्रौद्योगिकी और उपकरणों का साझा उपयोग।
* **क्षमता निर्माण:** प्रशिक्षण और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान।
* **अंतर्राष्ट्रीय सहयोग:** पड़ोसी देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों (जैसे UNODC) के साथ समन्वय।
4. **सरकारी पहलें और नीतियां:**
* नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की भूमिका।
* ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ और ‘ड्रग कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026-2029)’ जैसे कार्यक्रम।
* मल्टी-एजेंसी सेंटर (MAC) का महत्व।
5. **चुनौतियाँ और सुधार के क्षेत्र:**
* एजेंसियों के बीच क्षेत्राधिकार संबंधी मुद्दे।
* तकनीकी एकीकरण की कमी।
* भ्रष्टाचार की संभावना।
* न्यायिक प्रक्रिया में देरी।
6. **निष्कर्ष:** एक सुरक्षित, स्वस्थ और नशा-मुक्त भारत के राष्ट्रीय संकल्प को प्राप्त करने के लिए निरंतर और मजबूत अंतर-एजेंसी समन्वय की आवश्यकता पर बल दें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Gujarat PCS (GPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह द्वारा हाल ही में गुजरात ATS, भारतीय तटरक्षक बल और केन्द्रीय खुफिया एजेंसियों की संयुक्त कार्यवाही से किस क्षेत्र में बड़ी सफलता प्राप्त करने की घोषणा की गई?
- A. नशीली दवाओं के अवैध व्यापार पर रोक
- B. आतंकवाद निरोधी अभियान
- C. साइबर अपराध नियंत्रण
- D. सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध प्रवासन
उत्तर: A. नशीली दवाओं के अवैध व्यापार पर रोक — गुजरात ATS, भारतीय तटरक्षक बल और केन्द्रीय खुफिया एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से नशीली दवाओं के अवैध व्यापार के खिलाफ चलाए गए अभियान में बड़ी सफलता प्राप्त हुई है।
Mains: गुजरात राज्य में नशीली दवाओं के अवैध व्यापार के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियानों में केन्द्रीय एजेंसियों तथा राज्य पुलिस बलों के मध्य समन्वय एवं सहयोग की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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