18 Oct बैंगलुरु टर्फ क्लब की जमीन पर बनेगा कर्नाटक उच्च न्यायालय: कैबिनेट करेगा फैसला
✎ उच्च न्यायालय अनुच्छेद 214 के अंतर्गत प्रत्येक राज्य में स्थापित होता है, जबकि भूमि राज्य सूची की प्रविष्टि 18 का विषय है, इसलिए उच्च न्यायालय भवन हेतु भूमि-आवंटन का निर्णय राज्य सरकार लेती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — राजव्यवस्था (संविधान, न्यायपालिका, संघवाद और राज्य प्रशासन) | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — शासन (विधि-शिक्षा, न्याय तक पहुँच और संस्थागत विकास)
- Prelims: अनुच्छेद 214 — प्रत्येक राज्य के लिए उच्च न्यायालय का प्रावधान, अनुच्छेद 215 — उच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय का दर्जा, अनुच्छेद 226 — उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार, अनुच्छेद 231 — दो या अधिक राज्यों के लिए सामान्य उच्च न्यायालय, अनुच्छेद 233 एवं 234 — अधीनस्थ न्यायपालिका में नियुक्ति, अनुच्छेद 235 — अधीनस्थ न्यायालयों पर उच्च न्यायालय का नियंत्रण, अनुच्छेद 312 — अखिल भारतीय न्यायिक सेवा (अभी तक गठित नहीं), राज्य सूची की प्रविष्टि 18 — भूमि और उस पर अधिकार, जनहित याचिका (PIL) — न्यायिक सक्रियता का साधन
- Essay: न्याय तक पहुँच में संस्थागत अवसंरचना की भूमिका, लोकतंत्र में प्रश्न पूछने का अधिकार और विधि-शिक्षा का दायित्व
त्वरित पुनरावृत्ति: उच्च न्यायालय अनुच्छेद 214 के अंतर्गत प्रत्येक राज्य में स्थापित होता है, जबकि भूमि राज्य सूची की प्रविष्टि 18 का विषय है, इसलिए उच्च न्यायालय भवन हेतु भूमि-आवंटन का निर्णय राज्य सरकार लेती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने घोषणा की है कि राज्य मंत्रिमंडल इसी माह बेंगलुरु टर्फ क्लब (BTC) की रेस कोर्स भूमि पर उच्च न्यायालय के नए भवन हेतु भूमि-आवंटन पर निर्णय लेगा। भवन लगभग 12 से 15 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित है। यह निर्णय जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई से जुड़ा है, जिसमें राज्य सरकार ने जुलाई 2026 में उच्च न्यायालय को शपथ-पत्र के माध्यम से सूचित किया था कि वह इस भूमि के आवंटन हेतु संकल्प पारित करेगी। इसी संदर्भ में बेंगलुरु में राष्ट्रीय विधि स्कूल ऑफ इंडिया विश्वविद्यालय (National Law School of India University — NLSIU) के दक्षिण परिसर का शिलान्यास भी हुआ और न्यायिक सेवा परीक्षाओं की तैयारी हेतु कोचिंग संस्थान स्थापित करने की घोषणा की गई।
पृष्ठभूमि
- फरवरी 2026 में राज्य मंत्रिमंडल ने BTC की रेसों को तुमकुरु जिले के कुनिगल स्टड फार्म में स्थानांतरित करने की योजना को मंज़ूरी दी थी, और BTC ने शहर से बाहर संचालन स्थानांतरित करने पर सहमति जताई है।
- जुलाई 2026 में जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने BTC की भूमि उच्च न्यायालय भवन हेतु आवंटित करने का संकल्प पारित करने की बात कही थी।
- मुख्यमंत्री के अनुसार, कर्नाटक का उच्च न्यायालय उन उच्च न्यायालयों में है जो विधानमंडल भवन के सामने स्थित हैं, और मुख्य न्यायाधीश के अनुरोधों के आधार पर नए भवन की योजना बनाई गई है।
- NLSIU दक्षिण परिसर की आधारशिला नगरभावी, बेंगलुरु में रखी गई। इसके लिए राज्य सरकार ने 7 एकड़ भूमि आवंटित की है, जिसमें 2000 छात्र कक्ष और 90 संकाय एवं कर्मचारी आवास इकाइयाँ प्रस्तावित हैं।
- 17 अक्टूबर 2026 को NLSIU के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश की उपस्थिति में लोकतंत्र में प्रश्न पूछने की भूमिका पर बल दिया गया।
उच्च न्यायालय: संवैधानिक स्थिति और भूमि-आवंटन की व्यवस्था
- उच्च न्यायालय संविधान के भाग VI में अनुच्छेद 214 से 231 के अंतर्गत आते हैं। प्रत्येक राज्य के लिए उच्च न्यायालय का प्रावधान है, किंतु अनुच्छेद 231 के अंतर्गत दो या अधिक राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय हो सकता है।
- अनुच्छेद 215 उच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय का दर्जा देता है। इसकी कार्यवाही और निर्णय अभिलेख के रूप में सुरक्षित रहते हैं और इसके निर्णय अधीनस्थ न्यायालयों के लिए मार्गदर्शक होते हैं।
- भूमि ‘राज्य सूची’ की प्रविष्टि 18 का विषय है। इसलिए उच्च न्यायालय के भवन हेतु भूमि का आवंटन राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, जिसके लिए सामान्यतः मंत्रिमंडल या संबंधित प्राधिकरण का निर्णय आवश्यक होता है।
- जनहित याचिका (PIL) वह याचिका है जो किसी ऐसे व्यक्ति या समूह द्वारा दायर की जाती है जो सार्वजनिक हित में न्यायालय का ध्यान आकर्षित करता है। यह उच्च न्यायालय में अनुच्छेद 226 और उच्चतम न्यायालय में अनुच्छेद 32 के अंतर्गत दायर की जा सकती है।
- अधीनस्थ न्यायपालिका में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल उच्च न्यायालय के परामर्श से करता है (अनुच्छेद 233), जबकि अन्य न्यायिक अधिकारियों की भर्ती राज्यपाल द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार होती है (अनुच्छेद 234)।
- अधीनस्थ न्यायालयों पर प्रशासनिक और नियंत्रण संबंधी अधिकार उच्च न्यायालय के पास होता है (अनुच्छेद 235)। इसी कारण न्यायिक सेवा परीक्षाओं की तैयारी और न्यायिक अवसंरचना से जुड़े प्रश्न राज्य स्तर पर महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं।
- अखिल भारतीय न्यायिक सेवा का प्रावधान अनुच्छेद 312 में है, किंतु अभी तक इसे स्थापित नहीं किया गया है। इसलिए न्यायिक सेवा की भर्ती मुख्यतः राज्य स्तर पर होती है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| नए उच्च न्यायालय भवन हेतु भूमि | बेंगलुरु में 12-15 एकड़ भूमि प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री के अनुसार, कर्नाटक का उच्च न्यायालय देश का एकमात्र ऐसा उच्च न्यायालय है जो विधानमंडल भवन के सामने स्थित है। |
| बेंगलुरु टर्फ क्लब (Bangalore Turf Club) की भूमि | रेस कोर्स परिसर की भूमि के उपयोग में बदलाव का प्रस्ताव है। इससे शहरी भूमि के पुनः उपयोग का प्रश्न जुड़ता है। |
| जनहित याचिका (PIL) और शपथ-पत्र (Affidavit) | जुलाई 2026 में राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय को शपथ-पत्र के माध्यम से सूचित किया कि वह भूमि आवंटन पर संकल्प पारित करेगी। यह मामला न्यायिक प्रक्रिया और कार्यपालिका निर्णय के बीच की कड़ी को दर्शाता है। |
| रेसों का शहर से बाहर स्थानांतरण | फरवरी 2026 में मंत्रिमंडल ने रेसों को तुमकुरु के कुनिगल स्टड फार्म (Kunigal Stud Farm) में स्थानांतरित करने की योजना को मंजूरी दी। बेंगलुरु टर्फ क्लब ने संचालन शहर से बाहर ले जाने पर सहमति जताई है। |
| NLSIU दक्षिण परिसर (NLSIU South Campus) | नागरभावी में 7 एकड़ भूमि पर परिसर का शिलान्यास हुआ। इसमें 2000 छात्र कक्ष और 90 संकाय-कर्मचारी आवास इकाइयाँ प्रस्तावित हैं। |
| न्यायिक सेवा परीक्षा हेतु प्रशिक्षण संस्थान | विधि स्नातकों को न्यायिक सेवा परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षण देने और युवा अधिवक्ताओं की सतत शिक्षा के लिए संस्थान की घोषणा की गई है। |
महत्व
संस्थागत एवं न्यायिक
- उच्च न्यायालय के लिए पर्याप्त और उपयुक्त भवन न्यायिक कार्यकुशलता और वादकारियों की पहुँच से सीधे जुड़ा है।
- संवैधानिक संस्थाओं के भौतिक ढाँचे का नियोजन न्याय व्यवस्था की दीर्घकालिक क्षमता को प्रभावित करता है।
- उच्च न्यायालय का भवन बदलने की प्रक्रिया में यह मामला न्यायालय और राज्य सरकार के बीच सहयोगी संबंध का उदाहरण है।
प्रशासनिक एवं विधिक
- भूमि आवंटन राज्य सरकार की कार्यपालिका शक्ति के अंतर्गत आने वाला निर्णय है, जिसके लिए मंत्रिमंडल का संकल्प आवश्यक होता है।
- भूमि राज्य सूची की प्रविष्टि 18 (State List, Entry 18) में आती है, इसलिए भूमि से जुड़े निर्णय मुख्यतः राज्य के अधिकार क्षेत्र में होते हैं।
- जनहित याचिका के दौरान दाखिल शपथ-पत्र में दिया गया आश्वासन न्यायालय के समक्ष सरकार की प्रतिबद्धता का औपचारिक स्वरूप है।
नगर नियोजन
- शहरी केंद्र में बड़े भूखंड के उपयोग में परिवर्तन से भूमि के सार्वजनिक उपयोग की दिशा तय होती है।
- रेसों के शहर से बाहर जाने से शहरी क्षेत्र के भूमि उपयोग का पुनर्विन्यास संभव होता है।
शैक्षिक एवं विधिक क्षमता-निर्माण
- राष्ट्रीय विधि विद्यालय (NLSIU) के दक्षिण परिसर से विधि शिक्षा में छात्र क्षमता और शोध सुविधाओं का विस्तार होगा।
- न्यायिक सेवा परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षण संस्थान की घोषणा विधि स्नातकों के लिए प्रवेश-मार्ग को सशक्त बनाने से जुड़ी है।
चुनौतियाँ
1. भूमि उपयोग परिवर्तन और हितधारकों के बीच संतुलन
- रेस कोर्स की भूमि का उपयोग बदलने से संबंधित हितधारकों, कर्मचारियों और खेल-आधारित गतिविधियों पर प्रभाव पड़ता है।
- स्थानांतरण की प्रक्रिया में नई जगह की पहुँच, सुविधाएँ और संक्रमण-काल की व्यवस्था चुनौती बनती है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: शासन, सरकारी नीतियाँ एवं हस्तक्षेप; GS-3: शहरी भूमि उपयोग
2. न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच कार्य-विभाजन
- न्यायालय के भवन हेतु भूमि आवंटन कार्यपालिका का निर्णय है, जबकि न्यायालय अपने क्षेत्राधिकार में स्वतंत्र रहता है।
- सरकार और न्यायालय के बीच व्यावहारिक संवाद में यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि न्यायिक निर्णय की स्वतंत्रता प्रभावित न हो।
यूपीएससी लिंक: GS-2: संविधान, न्यायपालिका; शक्तियों का पृथक्करण
3. जनहित याचिका की भूमिका और प्रक्रियात्मक स्पष्टता
- जनहित याचिका के माध्यम से सार्वजनिक हित के मामले न्यायालय तक पहुँचते हैं, परंतु उनके निपटान में समय लगता है।
- न्यायालय के सामने दिए गए आश्वासन को समय-सीमा के भीतर लागू करना प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: न्यायपालिका; जनहित याचिका; सार्वजनिक नीति
4. न्यायिक अवसंरचना के लिए संसाधन और समय-सीमा
- नए उच्च न्यायालय भवन के लिए भूमि आवंटन के बाद निर्माण, वित्तीय प्रबंधन और परियोजना-समय-सीमा का निर्धारण आवश्यक है।
- अवसंरचना में देरी से लंबित वादों के निपटान पर प्रभाव पड़ सकता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: शासन; GS-3: सार्वजनिक अवसंरचना एवं वित्त
5. विधि शिक्षा और न्यायिक सेवा की तैयारी में समानता
- प्रशिक्षण संस्थान का लाभ सभी वर्गों के विधि स्नातकों तक पहुँचना सुनिश्चित करना होगा।
- विधि शिक्षा का विस्तार गुणवत्ता और छात्र-संख्या के बीच संतुलन की माँग करता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: सामाजिक न्याय; शिक्षा और मानव संसाधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| भूमि उपयोग परिवर्तन | रेस कोर्स भूमि के नए उपयोग के लिए हितधारकों के हित और सार्वजनिक हित में संतुलन आवश्यक है। |
| न्यायपालिका-कार्यपालिका संबंध | भूमि आवंटन कार्यपालिका का कार्य है, जबकि न्यायिक स्वतंत्रता बनाए रखनी होगी। |
| जनहित याचिका की समय-सीमा | न्यायालय को दिए गए आश्वासन का समय पर क्रियान्वयन न होने पर वाद की प्रक्रिया लंबी हो सकती है। |
| वित्तीय और परियोजना प्रबंधन | भवन निर्माण के लिए बजट, ठेका-प्रक्रिया और निर्माण-अवधि का स्पष्ट खाका आवश्यक है। |
| रेस-स्थानांतरण का सामाजिक प्रभाव | संबंधित कर्मचारियों और व्यवसायों के पुनर्वास एवं संक्रमण की व्यवस्था चाहिए। |
आगे की राह
- भूमि आवंटन के संकल्प को समयबद्ध रूप से पारित कर न्यायालय को दिए गए शपथ-पत्र के आश्वासन का पालन सुनिश्चित करना चाहिए।
- भूमि उपयोग परिवर्तन से पहले पारदर्शी परामर्श प्रक्रिया अपनाकर सार्वजनिक और हितधारक दोनों की राय दर्ज करनी चाहिए।
- उच्च न्यायालय भवन के निर्माण के लिए विस्तृत परियोजना-रिपोर्ट, बजट और समय-सीमा तय की जानी चाहिए।
- रेस-स्थानांतरण के दौरान कर्मचारियों और संबंधित व्यवसायों के लिए पुनर्वास और संक्रमण-सहायता की व्यवस्था की जानी चाहिए।
- न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संस्थागत संवाद की स्पष्ट प्रक्रिया बनाई जाए, ताकि न्यायिक स्वतंत्रता अक्षुण्ण रहे।
- शहरी भूमि के उपयोग में परिवर्तन को व्यापक नगर नियोजन योजना के साथ जोड़ा जाए।
- विधि शिक्षा के विस्तार के साथ न्यायिक सेवा प्रशिक्षण की पहुँच सभी वर्गों के विधि स्नातकों तक सुनिश्चित की जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
उच्च न्यायालय भवन (High Court Building) · अनुच्छेद 214 और 216 · न्यायिक स्वतंत्रता (Judicial Independence) · शक्तियों का पृथक्करण (Separation of Powers) · अनुच्छेद 50 और अनुच्छेद 235 · राज्य सूची का विषय: भूमि (State List: Land) · जनहित याचिका (PIL) · न्यायिक सेवा और अनुच्छेद 234 · राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (NLSIU) · संवैधानिक मूल्य और लोकतांत्रिक संस्थाएँ · न्यायपालिका की वित्तीय स्वायत्तता · मूल संरचना सिद्धांत (Basic Structure Doctrine)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 214: प्रत्येक राज्य के लिए उच्च न्यायालय का प्रावधान
- अनुच्छेद 226: उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार और जनहित याचिका का मार्ग
- अनुच्छेद 162: राज्य सरकार की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार
- अनुच्छेद 50: न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक् करने का निर्देश
अवधारणा प्रवाह
बेंगलुरु में उच्च न्यायालय के लिए नए भवन की आवश्यकता और विधानमंडल भवन के निकट स्थिति की चुनौती उत्पन्न होती है। → जनहित याचिका के दौरान राज्य सरकार शपथ-पत्र दाखिल कर भूमि आवंटन के लिए संकल्प पारित करने का आश्वासन देती है। → फरवरी 2026 में मंत्रिमंडल द्वारा बेंगलुरु टर्फ क्लब की रेसों को कुनिगल स्टड फार्म, तुमकुरु में स्थानांतरित करने की योजना स्वीकृत होती है। → रेस कोर्स की भूमि खाली होने की संभावना बनती है, जिससे उच्च न्यायालय हेतु भूमि आवंटन का मार्ग खुलता है। → मंत्रिमंडल का संकल्प पारित होने के बाद भूमि आवंटन औपचारिक होता है और भवन-निर्माण की परियोजना आगे बढ़ती है। → आवंटन से न्यायिक अवसंरचना का विस्तार होता है, जिससे न्याय व्यवस्था की कार्यक्षमता और जनसुविधा प्रभावित होती है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 214 प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय की व्यवस्था करता है।
2. अनुच्छेद 216 के अंतर्गत प्रत्येक उच्च न्यायालय में एक मुख्य न्यायाधीश तथा राष्ट्रपति द्वारा समय-समय पर आवश्यक समझे गए अन्य न्यायाधीश होते हैं।
3. अनुच्छेद 235 के अंतर्गत जिला न्यायालयों और उनके अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण उच्च न्यायालय में निहित है।
4. उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्य सरकार अकेले अपने निर्णय से करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी चार
उत्तर: केवल तीन — कथन 1, 2 और 3 संविधान के सही प्रावधान हैं। कथन 4 गलत है, क्योंकि उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति अनुच्छेद 217 के अंतर्गत राष्ट्रपति करते हैं, जो भारत के मुख्य न्यायाधीश और संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श के बाद निर्णय लेते हैं; राज्य सरकार अकेले यह निर्णय नहीं लेती।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए, जिनमें एक अभिकथन (A) और एक कारण (R) दिया गया है:
अभिकथन (A): उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के अंतर्गत मूल अधिकारों के प्रवर्तन तथा अन्य प्रयोजनों के लिए रिट जारी कर सकता है।
कारण (R): अनुच्छेद 32 के अंतर्गत केवल सर्वोच्च न्यायालय ही मूल अधिकारों के प्रवर्तन हेतु रिट जारी कर सकता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है
उत्तर: (A) सही है, परंतु (R) गलत है — अभिकथन (A) सही है, क्योंकि अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को मूल अधिकारों और अन्य विधिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु व्यापक रिट-क्षेत्राधिकार देता है। कारण (R) गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 32 का अधिकार सर्वोच्च न्यायालय को दिया गया है, परंतु यह अधिकार केवल उसी तक सीमित नहीं है; उच्च न्यायालय भी मूल अधिकारों के लिए रिट जारी कर सकता है।
Q3. निम्नलिखित स्तंभों का सुमेलन कीजिए:
स्तंभ I (संविधान का अनुच्छेद):
A. अनुच्छेद 214
B. अनुच्छेद 222
C. अनुच्छेद 233
D. अनुच्छेद 235
स्तंभ II (विषय):
1. उच्च न्यायालय की स्थापना
2. न्यायाधीश का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में स्थानांतरण
3. जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति
4. अधीनस्थ न्यायालयों पर उच्च न्यायालय का नियंत्रण
सही सुमेलन चुनिए:
- A-1, B-2, C-3, D-4
- A-2, B-1, C-4, D-3
- A-1, B-3, C-2, D-4
- A-4, B-2, C-1, D-3
उत्तर: A-1, B-2, C-3, D-4 — अनुच्छेद 214 राज्य के लिए उच्च न्यायालय की व्यवस्था करता है (1)। अनुच्छेद 222 न्यायाधीशों के स्थानांतरण से संबंधित है (2)। अनुच्छेद 233 जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित है (3)। अनुच्छेद 235 अधीनस्थ न्यायालयों पर उच्च न्यायालय के नियंत्रण से संबंधित है (4)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ उच्च न्यायालय के नए भवन के लिए राज्य सरकार द्वारा भूमि आवंटन जैसे प्रशासनिक निर्णय न्यायिक स्वतंत्रता और शक्तियों के पृथक्करण के संदर्भ में किस सीमा तक महत्वपूर्ण हैं? भारत में उच्च न्यायालयों की स्थापना, उनके प्रशासनिक नियंत्रण और न्यायिक अवसंरचना के संवैधानिक आधारों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि न्यायिक अवसंरचना के लिए कार्यपालिका पर निर्भरता न्यायिक स्वतंत्रता को किन परिस्थितियों में प्रभावित कर सकती है। (15 Marks)
रूपरेखा: MODEL-ANSWER SKELETON: (1) भूमिका: कर्नाटक में उच्च न्यायालय भवन के लिए विधानसभा परिसर के समीप स्थित बेंगलुरु टर्फ क्लब की भूमि का प्रस्ताव, जिसमें लगभग 12-15 एकड़ भूमि की बात कही गई है; जनहित याचिका (PIL) में राज्य सरकार का शपथपत्र और फरवरी 2026 में रेस के स्थानांतरण (तुमकुरु के कुनिगल स्टड फार्म) का निर्णय। (2) संवैधानिक ढाँचा: अनुच्छेद 214 (प्रत्येक राज्य हेतु उच्च न्यायालय), अनुच्छेद 216 (गठन), अनुच्छेद 225 (विद्यमान उच्च न्यायालयों का क्षेत्राधिकार), अनुच्छेद 226 (रिट-क्षेत्राधिकार); अनुच्छेद 162 के अंतर्गत राज्य की कार्यपालिका शक्ति और भूमि राज्य सूची का विषय होने का तर्क। (3) न्यायिक स्वतंत्रता के उपाय: अनुच्छेद 50 (न्यायपालिका का कार्यपालिका से पृथक्करण का निर्देश, राज्य नीति का निदेशक तत्व), अनुच्छेद 235 (अधीनस्थ न्यायालयों पर उच्च न्यायालय का नियंत्रण), अनुच्छेद 202(2)(घ) (उच्च न्यायालय का व्यय राज्य की संचित निधि पर भारित)। (4) न्यायिक निर्णय: केशवानंद भारती मामला (1973) में न्यायिक समीक्षा और मूल संरचना सिद्धांत; एस.पी. गुप्ता मामला (1981); द्वितीय न्यायाधीश मामला (1993) और न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) मामला (2015) में न्यायपालिका की स्वायत्तता पर विचार। (5) विचारकों का मत: मॉन्टेस्क्यू की शक्तियों के पृथक्करण की अवधारणा और डॉ. बी.आर. अंबेडकर का संविधान सभा में न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर दृष्टिकोण। (6) संतुलित दृष्टिकोण: भूमि आवंटन स्वाभाविक प्रशासनिक कार्य है, परंतु इसमें न्यायपालिका की सहमति, पारदर्शी प्रक्रिया और न्यायिक अवसंरचना हेतु स्थायी व्यवस्था आवश्यक है; संसाधन-निर्भरता बनाम स्वायत्तता का संतुलन। (7) समापन: न्यायिक स्वतंत्रता के लिए प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता का संस्थागत ढाँचा और विधि-सम्मत प्रक्रिया आवश्यक है।
स्रोत: The Hindu
Karnataka PCS (KPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: कर्नाटक सरकार द्वारा बैंगलुरु टर्फ क्लब की भूमि को उच्च न्यायालय के लिए आवंटित करने के संबंध में हाल ही में लिया गया निर्णय किस मंत्रिमंडल बैठक में लिया गया?
- कर्नाटक राज्य मंत्रिमंडल बैठक (State Cabinet Meeting)
- बैंगलुरु विकास प्राधिकरण (BDA) बोर्ड बैठक
- कर्नाटक उच्च न्यायालय प्रशासनिक बैठक
- कर्नाटक विधानसभा विशेष सत्र
उत्तर: कर्नाटक राज्य मंत्रिमंडल बैठक (State Cabinet Meeting) — कर्नाटक सरकार द्वारा बैंगलुरु टर्फ क्लब की भूमि को उच्च न्यायालय के लिए आवंटित करने का निर्णय राज्य मंत्रिमंडल द्वारा लिया गया था।
Mains: वर्तमान में बैंगलुरु टर्फ क्लब की भूमि को उच्च न्यायालय के लिए आवंटित करने के निर्णय के संदर्भ में, कर्नाटक सरकार द्वारा अपनाई गई भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया एवं इसके कानूनी एवं प्रशासनिक निहितार्थों की विवेचना कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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