31 Oct उत्तर पूर्वी चक्रवात अरनाब में आंध्र प्रदेश की ‘मन मित्र’ पहल क्यों है आदर्श मॉडल?
✎ चक्रवात में जीवन-हानि घटाने का मूल आधार समय पर चेतावनी, समय पर निकासी और सुदृढ़ आश्रय स्थल हैं, और आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत यह दायित्व राज्य (SDMA) की प्राथमिक जिम्मेदारी तथा केंद्र (NDMA और IMCT) के समन्वय व सहायता के…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — आपदा प्रबंधन (Disaster Management): चक्रवात पूर्व चेतावनी, निकासी और राहत | GS Paper II — शासन (Governance): ई-शासन, नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण और केंद्र-राज्य समन्वय | GS Paper III — सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) का शासन में उपयोग: जन-शिकायत निवारण तंत्र
- Prelims: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority — NDMA) की संरचना और कार्य, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (State Disaster Management Authority — SDMA); आंध्र प्रदेश में APSDMA, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 46 (NDRF) और धारा 48 (SDRF), भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department — IMD) द्वारा चक्रवात का वर्गीकरण; अति गंभीर चक्रवाती तूफान, अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (Inter-Ministerial Central Team — IMCT) और उसकी भूमिका, राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (State Disaster Response Fund — SDRF) एवं राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (National Disaster Response Fund — NDRF), राष्ट्रीय चक्रवात जोखिम न्यूनीकरण परियोजना (National Cyclone Risk Mitigation Project — NCRMP), रियल टाइम गवर्नेंस सोसाइटी (Real Time Governance Society — RTGS), आंध्र प्रदेश
- Essay: प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन में प्रौद्योगिकी की भूमिका: अवसर और सीमाएँ, आपदा-जोखिम न्यूनीकरण में सहकारी संघवाद: केंद्र, राज्य और स्थानीय प्रशासन का समन्वय
त्वरित पुनरावृत्ति: चक्रवात में जीवन-हानि घटाने का मूल आधार समय पर चेतावनी, समय पर निकासी और सुदृढ़ आश्रय स्थल हैं, और आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत यह दायित्व राज्य (SDMA) की प्राथमिक जिम्मेदारी तथा केंद्र (NDMA और IMCT) के समन्वय व सहायता के संयुक्त ढाँचे में आता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
विशाखापत्तनम से लेकर गोदावरी क्षेत्र तक प्रभाव डालने वाले अति गंभीर चक्रवाती तूफान अर्नब के नुकसान का आकलन करने के लिए गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) के संयुक्त सचिव चित्रंजन दाश की अगुवाई में सात सदस्यीय केंद्रीय दल आंध्र प्रदेश पहुँचा। दल ने राज्य सचिवालय में आपदा के नुकसान पर प्रस्तुति देखी और आंध्र प्रदेश सरकार की मन मित्र (Mana Mitra) व्हाट्सएप शासन पहल को अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बताया। अधिकारियों के अनुसार लोगों को चक्रवात से छह दिन पहले सूचित किया गया, RTGS और APSDMA के माध्यम से लगातार चेतावनियाँ जारी हुईं, 20 जिलों में बनाए गए 2,199 चक्रवात आश्रय स्थलों में 34,716 लोगों की निकासी की गई। चक्रवात के दौरान मन मित्र ने नागरिकों को अपनी समस्याएँ दर्ज करने और आपात सहायता माँगने का मंच दिया, और शिकायतों का समाधान आते ही किया गया। दल ने केंद्र सरकार से ऐसी सुविधाएँ अन्य राज्यों में स्थापित करने की सिफारिश करने की बात कही है।
पृष्ठभूमि
- भारत में आपदा प्रबंधन का वर्तमान ढाँचा आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 पर आधारित है, जिसने आपदा प्रबंधन को ‘आपदा की प्रतिक्रिया’ से हटाकर ‘समग्र और बहु-स्तरीय जोखिम प्रबंधन’ की दिशा में ले जाने का प्रयास किया। इसी के तहत NDMA, राज्यों में SDMA और जिलों में DDMA की व्यवस्था बनी।
- भारत का तटीय क्षेत्र, विशेषकर बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से लगे राज्य, चक्रवातों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। अक्टूबर-दिसंबर का मानसून-पश्चात काल चक्रवातों के लिए अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय माना जाता है। ओडिशा (1999 का सुपर चक्रवात) और आंध्र प्रदेश के अनुभव ने प्रारंभिक चेतावनी और निकासी की व्यवस्था को प्राथमिकता दी।
- भारत ने सेंडाई फ्रेमवर्क फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन (2015–2030) को अपनाया है, जो आपदा-जोखिम न्यूनीकरण के लिए ‘सभी खतरों’ और ‘सभी हितधारकों’ के दृष्टिकोण पर बल देता है। इसमें प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों के विस्तार को प्रमुख लक्ष्य माना गया है।
- आपदा के समय केंद्र सरकार आमतौर पर नुकसान का आकलन करने के लिए IMCT भेजती है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर राज्य द्वारा माँगी गई अतिरिक्त केंद्रीय सहायता पर निर्णय लिया जाता है, जबकि नियमित राहत का बड़ा भाग SDRF से दिया जाता है।
- आंध्र प्रदेश में RTGS जैसी संस्थागत व्यवस्था ने शासन के विभिन्न विभागों के आँकड़ों और सेवाओं को एक मंच पर लाने का प्रयास किया है, जिससे चेतावनी, शिकायत निवारण और समन्वय एक ही ढाँचे में हो सकें।
चक्रवात, आपदा प्रबंधन और डिजिटल शासन क्या है?
- चक्रवात निम्न दाब प्रणाली है जिसमें हवाएँ तेज़ी से वृत्ताकार रूप में केंद्र के चारों ओर घूमती हैं। IMD इसे उसकी अधिकतम सतत हवा की गति के आधार पर अवदाब, गहन अवदाब, चक्रवाती तूफान, गंभीर चक्रवाती तूफान, अति गंभीर चक्रवाती तूफान, अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान और सुपर चक्रवाती तूफान में वर्गीकृत करता है।
- आपदा प्रबंधन चक्र में चार चरण माने जाते हैं: शमन (Mitigation), तैयारी (Preparedness), प्रतिक्रिया (Response) और पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण (Recovery and Reconstruction)। चक्रवात में प्रारंभिक चेतावनी और निकासी तैयारी और प्रतिक्रिया, दोनों चरणों से जुड़ी होती है।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत NDMA की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं, जबकि SDMA की अध्यक्षता राज्य के मुख्यमंत्री करते हैं। NDRF का गठन धारा 46 और SDRF का धारा 48 के अंतर्गत होता है। NDRF कोष का निर्माण केंद्र सरकार करती है और SDRF कोष का अंश केंद्र व राज्य दोनों द्वारा योगदान से बनता है।
- NCRMP विश्व बैंक की सहायता से चलाई गई केंद्र सरकार की परियोजना है, जो चक्रवात-प्रवण राज्यों में आश्रय स्थलों, प्रारंभिक चेतावनी और क्षमता-निर्माण को सुदृढ़ करती है।
- डिजिटल शासन से तात्पर्य सरकारी सेवाओं, शिकायत निवारण और सूचना प्रवाह के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग है। आपदा के संदर्भ में इसका उद्देश्य चेतावनी को तेज़ी से पहुँचाना, प्रभावित लोगों की आवश्यकता का तत्काल आँकड़ा जुटाना और राहत वितरण में पारदर्शिता लाना है।
- मन मित्र जैसे प्लेटफ़ॉर्म नागरिक और प्रशासन के बीच द्विपक्षीय संचार का माध्यम बनते हैं। इनकी प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करती है कि शिकायतों का वास्तविक समय में निवारण हो, डेटा विभागों के बीच साझा हो और इंटरनेट/मोबाइल पहुँच कमज़ोर क्षेत्रों तक भी बनी रहे।
- संघीय ढाँचे में आपदा प्रबंधन मूलतः राज्य का विषय है, परंतु संविधान की अनुसूची 7 की संघ सूची व समवर्ती सूची के प्रावधानों और आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत केंद्र को समन्वय, वित्तीय सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन की भूमिका मिली है। इसी कारण केंद्र-राज्य सहयोग का स्वरूप महत्वपूर्ण हो जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्त्व |
|---|---|
| मन मित्रा (Mana Mitra) WhatsApp शासन मंच | नागरिक अपनी समस्याएँ और आपात सहायता के अनुरोध एक ही डिजिटल माध्यम से दर्ज कर सकते हैं, और शिकायतों का निवारण उनके आने के साथ-साथ किया जाता है। |
| छह दिन पूर्व चेतावनी | वास्तविक समय शासन सोसायटी (Real Time Governance Society – RTGS) और आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (APSDMA) के माध्यम से निरंतर चेतावनियाँ जारी की गईं, जिनसे जीवन हानि को न्यूनतम रखने में सहायता मिली। |
| निकासी और आश्रय व्यवस्था | 20 जिलों में स्थापित 2,199 चक्रवात आश्रय स्थलों में 34,716 लोगों की निकासी की गई। यह बड़े पैमाने पर समन्वित निकासी का उदाहरण है। |
| केंद्रीय दल द्वारा क्षति आकलन | गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव के नेतृत्व में सात सदस्यीय केंद्रीय दल ने सचिवालय में PowerPoint प्रस्तुति के आधार पर क्षति का आकलन किया। इसी आकलन के आधार पर राज्य को केंद्रीय सहायता का निर्णय होता है। |
| प्रतिकृति की संभावना | दल ने इस मॉडल को अन्य राज्यों के लिए उपयोगी बताया और केंद्र सरकार से समान सुविधाएँ स्थापित करने की सिफारिश करने की बात कही। यह राज्यों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान का संकेत है। |
महत्व
प्रशासनिक
- नागरिक-शिकायत निवारण को वास्तविक समय में जोड़ने से प्रशासन की प्रतिक्रिया-क्षमता बढ़ती है।
- एक ही मंच पर चेतावनी, निकासी और सहायता अनुरोधों का समन्वय होने से विभिन्न विभागों के बीच सूचना-प्रवाह सुधरता है।
आपदा प्रबंधन
- समय से पूर्व चेतावनी और सामुदायिक निकासी जीवन हानि घटाने की सबसे प्रभावी नीतियों में से हैं।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राज्य प्राधिकरणों की भूमिका को इस उदाहरण में व्यावहारिक रूप में देखा जा सकता है।
डिजिटल शासन
- साधारण और परिचित संचार माध्यम (WhatsApp) का उपयोग डिजिटल पहुँच को आम नागरिकों तक विस्तृत करता है।
- शिकायतों के डिजिटल अभिलेख से जवाबदेही और निगरानी में सुधार संभव है।
संघीय संबंध
- केंद्रीय दल द्वारा क्षति का आकलन राज्य और केंद्र के बीच तथ्य-आधारित सहयोग का माध्यम है।
- एक राज्य की सर्वोत्तम प्रथा का अन्य राज्यों द्वारा अपनाया जाना सहकारी संघवाद की भावना को पुष्ट करता है।
चुनौतियाँ
1. डिजिटल विभाजन
- WhatsApp जैसे मंच पर निर्भरता उन लोगों को सीमित कर सकती है जिनके पास स्मार्टफोन या इंटरनेट की सुविधा नहीं है।
- बुजुर्ग, दिव्यांग और दूरस्थ क्षेत्रों के निवासी इस मंच से वंचित रह सकते हैं, इसलिए पारंपरिक चेतावनी प्रणालियों को साथ रखना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय; डिजिटल शासन और समावेशन
2. सूचना का अधिभार और विश्वसनीयता
- आपात स्थिति में बड़ी संख्या में शिकायतें आने से सत्यापन और प्राथमिकता-निर्धारण कठिन हो जाता है।
- गलत या अपुष्ट सूचनाएँ बचाव कार्यों को भटका सकती हैं, इसलिए सूचना की पुष्टि की प्रणाली मजबूत होनी चाहिए।
यूपीएससी लिंक: आपदा प्रबंधन; सूचना प्रौद्योगिकी और शासन
3. आपात प्रतिक्रिया बनाम दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधार
- चक्रवात के समय की प्रतिक्रिया प्रशंसनीय है, किंतु तटीय भवनों, जल निकासी और पक्के आश्रय स्थलों जैसे दीर्घकालिक उपाय भी उतने ही आवश्यक हैं।
- केवल आपात प्रबंधन पर निर्भरता जलवायु-जनित जोखिम को पूरी तरह कम नहीं कर सकती।
यूपीएससी लिंक: आपदा न्यूनीकरण; जलवायु परिवर्तन और अनुकूलन
4. क्षति आकलन और केंद्रीय सहायता में समन्वय
- राज्य द्वारा प्रस्तुत प्रस्तुतीकरण के आधार पर आकलन होने से तथ्य-सत्यापन और स्वतंत्र मूल्यांकन की आवश्यकता बनी रहती है।
- केंद्रीय सहायता के वितरण में विलंब होने पर राहत और पुनर्वास कार्य प्रभावित होते हैं।
यूपीएससी लिंक: केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध; आपदा प्रबंधन
5. डेटा सुरक्षा और गोपनीयता
- नागरिकों के व्यक्तिगत विवरण, स्थान और समस्याओं का संग्रह होने से डेटा सुरक्षा के प्रश्न उठते हैं।
- डेटा का उपयोग केवल आपदा प्रबंधन के प्रयोजन तक सीमित रहे, इसके लिए स्पष्ट नियम और निगरानी आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण; साइबर सुरक्षा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| डिजिटल पहुँच | स्मार्टफोन और इंटरनेट से वंचित समूह इस मंच के लाभ से बाहर रह सकते हैं। |
| सूचना की विश्वसनीयता | आपात स्थिति में अपुष्ट सूचनाओं का प्रसार बचाव कार्य में बाधा डाल सकता है। |
| संरचनात्मक तैयारी | आपात प्रतिक्रिया के साथ तटीय सुरक्षा और स्थायी आश्रय स्थलों पर निवेश आवश्यक है। |
| केंद्रीय सहायता में विलंब | क्षति आकलन के बाद सहायता राशि के वितरण में देरी से राहत कार्य धीमे पड़ सकते हैं। |
| डेटा गोपनीयता | नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा के संग्रह और उपयोग हेतु सुरक्षा-उपाय स्पष्ट होने चाहिए। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- मन मित्रा (Mana Mitra WhatsApp Governance)
- राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि (State Disaster Response Fund – SDRF)
आगे की राह
- चेतावनी प्रणाली को बहुमाध्यम (SMS, रेडियो, सामुदायिक नेटवर्क) से जोड़ा जाए, ताकि डिजिटल पहुँच से बाहर के लोग भी सूचित हो सकें।
- शिकायत निवारण के लिए स्वचालित सत्यापन और प्राथमिकता-निर्धारण तंत्र विकसित किया जाए।
- आश्रय स्थलों और निकासी मार्गों की स्थिति का नियमित डिजिटल मानचित्रण किया जाए।
- क्षति आकलन के लिए मानकीकृत प्रारूप और समय-सीमा तय की जाए, ताकि केंद्रीय सहायता शीघ्र जारी हो सके।
- डेटा संरक्षण के स्पष्ट दिशा-निर्देश और स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- आपदा न्यूनीकरण के दीर्घकालिक उपायों को आपात प्रतिक्रिया के साथ बजट और योजना में समान महत्त्व दिया जाए।
- राज्यों के बीच ऐसी सर्वोत्तम प्रथाओं के दस्तावेजीकरण और साझा मंच से अन्य राज्य अपने तंत्र को अपनी परिस्थितियों के अनुरूप ढाल सकें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
आपदा प्रबंधन · चक्रवात प्रतिक्रिया · प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली · समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन · डिजिटल शासन · व्हाट्सएप गवर्नेंस · राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण · राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण · केंद्र-राज्य सहयोग · आपदा न्यूनीकरण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21 – जीवन और सुरक्षा के अधिकार का आधार; निकासी और चेतावनी का औचित्य
- अनुच्छेद 282 – सार्वजनिक प्रयोजन हेतु केंद्र द्वारा राज्यों को व्यय हेतु सहायता का विधिक आधार
अवधारणा प्रवाह
चक्रवात का पूर्वानुमान और खतरे का आकलन → RTGS और APSDMA के माध्यम से छह दिन पूर्व निरंतर चेतावनी का प्रसार → चक्रवात आश्रय स्थलों में 34,716 लोगों की निकासी → मन मित्रा मंच पर आपात समस्याओं का दर्ज होना और तत्काल निवारण → केंद्रीय दल द्वारा क्षति का आकलन और राज्य की प्रस्तुति का मूल्यांकन → आकलन के आधार पर केंद्रीय सहायता का निर्णय और राहत-पुनर्वास
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) का गठन आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत किया गया था।
2. भारत में चक्रवातों के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली केवल उपग्रह इमेजरी पर निर्भर करती है।
3. ‘माना मित्र’ पहल का उद्देश्य आपदा के दौरान नागरिकों को आपातकालीन सहायता प्रदान करना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। NDMA का गठन आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत किया गया था। कथन 2 गलत है। भारत में चक्रवातों के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली उपग्रह इमेजरी, मौसम रडार, स्वचालित मौसम स्टेशनों और संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल सहित विभिन्न स्रोतों पर निर्भर करती है। कथन 3 सही है। ‘माना मित्र’ पहल, जैसा कि खबर में बताया गया है, आपदा के दौरान लोगों को अपनी समस्याओं की रिपोर्ट करने और आपातकालीन सहायता प्राप्त करने के लिए एक मंच प्रदान करती है।
Q2. आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- यह केवल राष्ट्रीय स्तर पर आपदा प्रबंधन के लिए एक ढांचा प्रदान करता है।
- यह केंद्र सरकार को राज्य सरकारों की सहमति के बिना किसी भी क्षेत्र को आपदा प्रभावित घोषित करने का अधिकार देता है।
- यह राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) के गठन का प्रावधान करता है।
- यह आपदा प्रबंधन के लिए केवल राहत और पुनर्वास पहलुओं पर केंद्रित है, न कि तैयारी पर।
उत्तर: यह राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) के गठन का प्रावधान करता है। — आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) के गठन का प्रावधान करता है, जो आपदा प्रतिक्रिया के लिए एक विशेष बल है। यह अधिनियम राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तरों पर आपदा प्रबंधन के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करता है, जिसमें तैयारी, न्यूनीकरण, प्रतिक्रिया और पुनर्वास सभी शामिल हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ आपदा प्रबंधन में डिजिटल प्रौद्योगिकियों की भूमिका का परीक्षण करें। ‘माना मित्र’ जैसी पहलों के संदर्भ में, भारत में चक्रवात जैसी आपदाओं के लिए प्रारंभिक चेतावनी और प्रतिक्रिया प्रणालियों को मजबूत करने में डिजिटल शासन के महत्व पर चर्चा करें। (15 अंक)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** आपदा प्रबंधन में डिजिटल प्रौद्योगिकियों की बढ़ती प्रासंगिकता का संक्षिप्त परिचय दें।
2. **डिजिटल प्रौद्योगिकियों की भूमिका:** आपदा प्रबंधन के विभिन्न चरणों (तैयारी, न्यूनीकरण, प्रतिक्रिया, पुनर्वास) में डिजिटल प्रौद्योगिकियों की भूमिका का विस्तार से वर्णन करें। इसमें शामिल हो सकते हैं:
* **प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली:** मौसम पूर्वानुमान मॉडल, उपग्रह इमेजरी, IoT सेंसर का उपयोग।
* **संचार और सूचना प्रसार:** सोशल मीडिया, मोबाइल एप्लिकेशन, SMS अलर्ट।
* **संसाधन जुटाना और समन्वय:** जीआईएस (GIS) आधारित मैपिंग, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन।
* **क्षति आकलन और पुनर्वास:** ड्रोन, AI आधारित विश्लेषण।
3. **’माना मित्र’ पहल का संदर्भ:** ‘माना मित्र’ व्हाट्सएप गवर्नेंस पहल का उदाहरण दें और बताएं कि कैसे इसने चक्रवात ‘अरनब’ के दौरान नागरिकों को समस्याओं की रिपोर्ट करने और आपातकालीन सहायता प्राप्त करने में मदद की।
4. **डिजिटल शासन का महत्व:** भारत में चक्रवात जैसी आपदाओं के लिए प्रारंभिक चेतावनी और प्रतिक्रिया प्रणालियों को मजबूत करने में डिजिटल शासन के महत्व पर चर्चा करें। इसमें शामिल करें:
* वास्तविक समय की जानकारी का प्रसार।
* नागरिकों की सक्रिय भागीदारी (शिकायत निवारण)।
* बेहतर समन्वय और निर्णय लेने की क्षमता।
* जीवन और संपत्ति के नुकसान को कम करना।
* अन्य राज्यों में प्रतिकृति की संभावना।
5. **चुनौतियाँ और आगे का रास्ता:** डिजिटल डिवाइड, तकनीकी साक्षरता, डेटा गोपनीयता और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों पर संक्षिप्त चर्चा करें। इन चुनौतियों का समाधान करने और डिजिटल शासन को और मजबूत करने के लिए सुझाव दें।
6. **निष्कर्ष:** आपदा प्रबंधन में डिजिटल प्रौद्योगिकियों और डिजिटल शासन के भविष्य के महत्व पर एक सकारात्मक टिप्पणी के साथ निष्कर्ष निकालें।
स्रोत: The Hindu
Andhra Pradesh PCS (APPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा चक्रवात ‘अर्नब’ के दौरान शुरू किए गए ‘माना मित्र’ कार्यक्रम को केंद्र सरकार द्वारा किस प्रकार की प्रशंसा मिली है?
- A. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन पुरस्कार के लिए नामांकन
- B. आपदा प्रतिक्रिया के लिए एक मॉडल के रूप में मान्यता
- C. राज्य सरकार को विशेष वित्तीय सहायता
- D. राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम की शुरुआत
उत्तर: B. आपदा प्रतिक्रिया के लिए एक मॉडल के रूप में मान्यता — केंद्र सरकार की टीम ने ‘माना मित्र’ कार्यक्रम को चक्रवात ‘अर्नब’ के दौरान प्रभावी आपदा प्रतिक्रिया के लिए एक मॉडल के रूप में सराहा है।
Mains: आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा चक्रवात ‘अर्नब’ के दौरान लागू किए गए ‘माना मित्र’ कार्यक्रम की सफलता के प्रमुख कारणों का विश्लेषण करते हुए, राज्य में आपदा प्रबंधन प्रणाली को और सुदृढ़ करने के लिए सुझाव दीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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