31 Oct राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना 2026-27: आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी
✎ राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना कक्षा IX से XII तक मेधावी किंतु आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को 12 हजार रुपये प्रतिवर्ष की DBT छात्रवृत्ति देती है, जो माध्यमिक स्तर पर शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करने का…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय (Social Justice): कमजोर वर्गों के लिए शिक्षा और शैक्षिक सशक्तिकरण | GS Paper II — राजव्यवस्था (Polity): अनुच्छेद 21A, 41 और 46 के नीति-निर्देशक तत्व | GS Paper II — शासन व्यवस्था (Governance): केंद्र प्रायोजित योजनाएं, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और डिजिटल पोर्टल आधारित प्रशासन
- Prelims: राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना (NMMSS) — कक्षा IX से XII तक, पात्रता: कक्षा VII में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक और माता-पिता की वार्षिक आय 3.5 लाख रुपये से अधिक न हो, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को अंकों में 5 प्रतिशत की छूट, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे बैंक खातों में राशि, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (National Scholarship Portal) और OTR पंजीकरण, केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) — केंद्र और राज्य की संयुक्त वित्तीय भागीदारी, अनुच्छेद 21A (शिक्षा का अधिकार) बनाम अनुच्छेद 46 (दुर्बल वर्गों के शैक्षिक हितों का संवर्धन), शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 — आयु वर्ग 6 से 14 वर्ष
- Essay: शिक्षा में अवसर की समानता: प्राथमिक से माध्यमिक स्तर तक निरंतरता की चुनौती, वित्तीय सहायता और मेधा का संतुलन: क्या छात्रवृत्ति योजनाएं सामाजिक गतिशीलता बढ़ाती हैं?
त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना कक्षा IX से XII तक मेधावी किंतु आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को 12 हजार रुपये प्रतिवर्ष की DBT छात्रवृत्ति देती है, जो माध्यमिक स्तर पर शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करने का अनुच्छेद 46 आधारित साधन है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना (National Means-cum-Merit Scholarship Scheme) के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 15 नवंबर 2026 कर दी है, ताकि पात्र विद्यार्थियों को राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर आवेदन पूरा करने का अतिरिक्त समय मिल सके। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार संस्थान नोडल अधिकारी (एल 1) का सत्यापन 30 नवंबर 2026 तक और जिला नोडल अधिकारी (एल 2) का सत्यापन 15 दिसंबर 2026 तक होगा। 30 अक्टूबर 2026 तक इस योजना में 90 हजार 483 नए और 1 लाख 99 हजार 531 नवीनीकरण आवेदन जमा हो चुके थे। आवेदन प्रक्रिया 1 जून 2026 से शुरू हुई थी। यह समाचार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह योजना आठवीं के बाद बारहवीं तक की शिक्षा को प्रोत्साहित करती है, जो शिक्षा का अधिकार अधिनियम के दायरे से बाहर का चरण है।
पृष्ठभूमि
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के अंतर्गत 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा की कानूनी गारंटी है, जिसका आधार 86वें संविधान संशोधन (2002) द्वारा जोड़ा गया अनुच्छेद 21A है। माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर यह गारंटी सीधे लागू नहीं होती।
- माध्यमिक स्तर पर ड्रॉप-आउट (Dropout) की समस्या आर्थिक कारणों से अधिक गंभीर मानी जाती है, क्योंकि इस आयु में विद्यार्थी अक्सर घरेलू आय में योगदान देने लगते हैं। इसी अंतराल को भरने के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं बनाई गईं।
- राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मेधावी विद्यार्थियों को कक्षा IX में प्रवेश के समय चयन परीक्षा के माध्यम से छात्रवृत्ति दी जाती है, जिसका आयोजन राज्य या केंद्र शासित प्रदेश सरकारें करती हैं।
- छात्रवृत्ति की राशि 12 हजार रुपये प्रतिवर्ष है, जो प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer — DBT) द्वारा सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है। इससे बिचौलियों की भूमिका घटती है और वितरण में पारदर्शिता आती है।
- अनुच्छेद 46 राज्य को समाज के दुर्बल वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के शैक्षिक और आर्थिक हितों के संवर्धन का निर्देश देता है। यह योजना इसी नीति-निर्देशक सिद्धांत की व्यावहारिक अभिव्यक्ति है।
राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना क्या है?
- यह केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मेधावी विद्यार्थियों को आठवीं कक्षा के बाद बारहवीं कक्षा तक पढ़ाई जारी रखने में सहायता देना है।
- हर वर्ष कक्षा IX में प्रवेश लेने वाले पात्र विद्यार्थियों को एक लाख नई छात्रवृत्तियां दी जाती हैं। चयन राज्य या केंद्र शासित प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित चयन परीक्षा के आधार पर होता है।
- पात्रता के मुख्य मानदंड हैं: कक्षा VII में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक या समकक्ष ग्रेड, तथा माता-पिता की वार्षिक आय 3.5 लाख रुपये से अधिक न होना। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को अंकों में 5 प्रतिशत की छूट मिलती है।
- छात्रवृत्ति का नवीनीकरण कक्षा X से XII तक हर वर्ष किया जाता है, बशर्ते विद्यार्थी निर्धारित शैक्षणिक मानदंड पूरे करे।
- आवेदन राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर किया जाता है। इससे पहले विद्यार्थी को पोर्टल पर एक बार पंजीकरण (OTR — One Time Registration) करना होता है।
- सत्यापन की दो स्तरीय व्यवस्था है: संस्थान नोडल अधिकारी (एल 1) पहला सत्यापन करता है और जिला नोडल अधिकारी (एल 2) अंतिम सत्यापन करता है। यह व्यवस्था प्रशासनिक जवाबदेही और अपात्र आवेदनों की रोकथाम के लिए है।
- राज्य सरकारों, सरकार से सहायता प्राप्त स्कूलों और स्थानीय निकायों द्वारा संचालित स्कूलों के पात्र विद्यार्थी इस योजना के दायरे में आते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| योजना का स्वरूप | राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना (National Means-cum-Merit Scholarship Scheme – NMMSS) केंद्र सरकार की केंद्र प्रायोजित योजना है, जो आठवीं कक्षा के बाद बारहवीं तक की पढ़ाई के लिए सहायता देती है। इसका लक्ष्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मेधावी विद्यार्थियों को विद्यालय में बनाए रखना है। |
| चयन की प्रक्रिया | हर वर्ष नौवीं कक्षा में प्रवेश लेने वाले पात्र विद्यार्थियों के लिए 1 लाख नई छात्रवृत्तियां दी जाती हैं। इसके लिए राज्य या केंद्र शासित प्रदेश सरकार की चयन परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। |
| नवीनीकरण की शर्त | दसवीं से बारहवीं कक्षा तक छात्रवृत्ति का नवीनीकरण निर्धारित शैक्षणिक मानदंड पूरे करने पर होता है। इससे छात्रवृत्ति को प्रदर्शन से जोड़ा गया है। |
| वित्तीय सहायता और भुगतान | पात्र विद्यार्थियों को हर वर्ष 12 हजार रुपये की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer – DBT) के माध्यम से सीधे बैंक खाते में दी जाती है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होती है और भुगतान पारदर्शी रहता है। |
| पात्रता के मानदंड | सातवीं कक्षा में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक या समकक्ष ग्रेड, और माता-पिता की वार्षिक आय साढ़े तीन लाख रुपये से अधिक न होना आवश्यक है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को अंकों में 5 प्रतिशत की छूट है। |
| आवेदन की प्रणाली | आवेदन राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर होता है, जिसकी प्रक्रिया 1 जून 2026 से शुरू हुई। आवेदन से पहले एक बार पंजीकरण (One Time Registration – OTR) अनिवार्य है। |
महत्व
सामाजिक और मानव संसाधन महत्व
- आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ने की प्रवृत्ति को रोकने में सहायक, जिससे माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर पर नामांकन बना रहता है।
- आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मेधावी बच्चों को अवसर की समानता का ठोस आधार मिलता है।
- मानव पूंजी के निर्माण में योगदान, क्योंकि प्रतिभा का उपयोग आर्थिक पृष्ठभूमि पर निर्भर नहीं रहता।
शासन और प्रशासनिक महत्व
- सत्यापन के दो स्तर (संस्थान नोडल अधिकारी और जिला नोडल अधिकारी) से आवेदनों की जांच में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ती है।
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण से राज्य और केंद्र के बीच वित्तीय प्रवाह का डिजिटल रिकॉर्ड बनता है।
- राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर केंद्रीकृत आंकड़े नीति-निर्माण के लिए उपयोगी हैं।
संघीय ढांचे से संबंध
- शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए चयन परीक्षा राज्य या केंद्र शासित प्रदेश सरकारें आयोजित करती हैं जबकि वित्तीय ढांचा केंद्र का सहयोग दर्शाता है।
- केंद्र और राज्य के बीच साझा जिम्मेदारी का यह उदाहरण सहकारी संघवाद की भावना से जुड़ता है।
चुनौतियाँ
1. आवेदन और सत्यापन की समय-सीमा
- आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने की आवश्यकता बताती है कि पंजीकरण और दस्तावेज़ीकरण में व्यावहारिक कठिनाइयां हैं।
- संस्थान स्तर पर सत्यापन के बाद जिला स्तर पर दोबारा सत्यापन होता है, जिससे प्रक्रिया लंबी होती है और भुगतान में विलंब की आशंका रहती है।
- 30 अक्टूबर 2026 तक 90 हजार 483 नए और 1 लाख 99 हजार 531 नवीनीकरण आवेदन जमा हुए थे, जिससे सत्यापन का भार बढ़ता है।
यूपीएससी लिंक: सुशासन, प्रशासनिक सुधार और लोक सेवा प्रदायगी
2. डिजिटल पहुंच और डिजिटल विभाजन
- पोर्टल आधारित आवेदन और एक बार पंजीकरण के लिए इंटरनेट, स्मार्टफोन और डिजिटल साक्षरता आवश्यक है।
- ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के परिवारों तथा अभिभावकों को तकनीकी सहायता पहुंचाना चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: डिजिटल शासन, ई-गवर्नेंस और डिजिटल विभाजन
3. आठवीं के बाद ड्रॉपआउट की समस्या
- आर्थिक दबाव, घरेलू जिम्मेदारियां और रोजगार की ओर झुकाव बच्चों को आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर कर सकते हैं।
- छात्रवृत्ति के बावजूद परिवहन, किताबों और अन्य खर्चों का भार बना रहता है, जो पूरी तरह दूर नहीं होता।
यूपीएससी लिंक: शिक्षा का अधिकार, मानव संसाधन विकास और सामाजिक न्याय
4. सीमित संख्या और चयन परीक्षा का प्रभाव
- हर वर्ष केवल 1 लाख नई छात्रवृत्तियां उपलब्ध हैं, जबकि पात्र विद्यार्थियों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
- चयन परीक्षा में प्रदर्शन पर निर्भरता से वे बच्चे पीछे रह सकते हैं जिन्हें गुणवत्तापूर्ण कोचिंग या सहायक वातावरण नहीं मिलता।
यूपीएससी लिंक: समावेशी शिक्षा, शैक्षिक असमानता और सामाजिक न्याय
5. आय सीमा और राशि का पुनरीक्षण
- माता-पिता की वार्षिक आय की सीमा साढ़े तीन लाख रुपये निर्धारित है। महंगाई और आय में बदलाव के साथ इसका पुनरीक्षण ज़रूरी हो सकता है।
- 12 हजार रुपये की वार्षिक राशि स्थिर है। बढ़ती मुद्रास्फीति (Inflation) में इसका वास्तविक मूल्य घटता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक कल्याण योजनाएं, वास्तविक और अंकित मूल्य की अवधारणा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सत्यापन की दोहरी प्रक्रिया | संस्थान और जिला स्तर के सत्यापन में देरी से छात्रवृत्ति का भुगतान प्रभावित हो सकता है। |
| डिजिटल पहुंच | ग्रामीण और वंचित परिवारों के लिए पोर्टल पर पंजीकरण कठिन हो सकता है। |
| सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों तक सीमित पात्रता | राज्य सरकार, सरकार से सहायता प्राप्त, और स्थानीय निकाय संचालित स्कूलों के विद्यार्थी ही इसमें शामिल हैं, इसलिए अन्य स्कूलों के पात्र बच्चे बाहर रह सकते हैं। |
| सीमित सीटें | हर वर्ष 1 लाख नई छात्रवृत्तियां सीमित हैं और चयन परीक्षा कड़ी प्रतिस्पर्धा बनाती है। |
| राशि और आय सीमा की समीक्षा | स्थिर राशि और निश्चित आय सीमा समय के साथ लाभार्थियों के वास्तविक कल्याण को प्रभावित कर सकती है। |
| ड्रॉपआउट का जोखिम | आठवीं के बाद आर्थिक और सामाजिक कारणों से बच्चे पढ़ाई छोड़ सकते हैं, जिसे केवल छात्रवृत्ति से पूरी तरह नहीं रोका जा सकता। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना (National Means-cum-Merit Scholarship Scheme – NMMSS)
आगे की राह
- सत्यापन प्रक्रिया की समय-सीमा का सख्ती से पालन हो, ताकि पात्र विद्यार्थियों का भुगतान समय पर सुनिश्चित हो सके।
- ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सामान्य सेवा केंद्रों और स्कूल स्तर पर सहायता केंद्र स्थापित किए जाएं, जिससे पोर्टल पर पंजीकरण सरल हो।
- आठवीं कक्षा में ही ड्रॉपआउट के संकेतों की पहचान के लिए शैक्षणिक निगरानी प्रणाली विकसित हो।
- आय सीमा और छात्रवृत्ति राशि की नियमित समीक्षा हो, ताकि महंगाई और आर्थिक बदलाव के अनुरूप लाभ का वास्तविक मूल्य बना रहे।
- चयन परीक्षा के अलावा अन्य मानदंडों, जैसे उपस्थिति और निरंतर मूल्यांकन, पर विचार करके पात्रता का दायरा व्यापक किया जा सके।
- पोर्टल पर आवेदन की स्थिति की जानकारी स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराई जाए, ताकि अभिभावक प्रक्रिया को स्वयं समझ सकें।
- छात्रवृत्ति योजना को राज्य की शिक्षा नीतियों और स्कूल सुधारों के साथ समन्वित किया जाए, ताकि केवल वित्तीय सहायता तक सीमित न रहे।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना (National Means-cum-Merit Scholarship Scheme) · अनुच्छेद 21A (Article 21A) और निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार · अनुच्छेद 46 (Article 46) और दुर्बल वर्गों के शैक्षिक-आर्थिक हित · प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer, DBT) · माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट (Dropout) · केंद्र-प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध · राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (National Scholarship Portal, NSP) · मेधा और आर्थिक पात्रता का संतुलन · समावेशी शिक्षा और सामाजिक न्याय · राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (National Education Policy 2020)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21A: 6 से 14 वर्ष के बच्चों का निःशुल्क शिक्षा का अधिकार
- अनुच्छेद 46: कमजोर वर्गों के शैक्षिक हितों का संवर्धन
अवधारणा प्रवाह
आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के मेधावी विद्यार्थी का आठवीं कक्षा तक का प्रदर्शन और सातवीं में 55 प्रतिशत अंक → राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की चयन परीक्षा में सफलता और नौवीं कक्षा में 1 लाख नई छात्रवृत्तियों में चयन → राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर OTR पंजीकरण और ऑनलाइन आवेदन, जिसकी प्रक्रिया 1 जून 2026 से शुरू हुई → संस्थान नोडल अधिकारी (L1) द्वारा सत्यापन और फिर जिला नोडल अधिकारी (L2) द्वारा अंतिम सत्यापन → प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से 12 हजार रुपये वार्षिक राशि का सीधे बैंक खाते में हस्तांतरण → दसवीं से बारहवीं कक्षा तक निर्धारित शैक्षणिक मानदंडों के आधार पर छात्रवृत्ति का नवीनीकरण → बारहवीं तक शिक्षा की निरंतरता, जिससे ड्रॉपआउट में कमी और मानव संसाधन विकास को बल
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 46 राज्य को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य दुर्बल वर्गों के शैक्षिक एवं आर्थिक हितों के संवर्धन का निर्देश देता है।
2. अनुच्छेद 21A छह से चौदह वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा को मूल अधिकार बनाता है।
3. 86वें संविधान संशोधन के बाद संशोधित अनुच्छेद 45 का मुख्य निर्देश चौदह वर्ष तक के सभी बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: अनुच्छेद 46 राज्य नीति का निदेशक तत्व है, जो अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य दुर्बल वर्गों के शैक्षिक-आर्थिक हितों की रक्षा का निर्देश देता है। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 21A (86वें संशोधन, 2002) छह से चौदह वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा को मूल अधिकार बनाता है। कथन 3 गलत है: संशोधित अनुच्छेद 45 अब छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा से संबंधित है, जबकि चौदह वर्ष तक की शिक्षा का अधिकार अनुच्छेद 21A में है।
Q2. निम्नलिखित में से प्रत्येक में एक कथन (A) और एक तर्क (R) दिया गया है।
कथन (A): राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों का चयन राज्य या केंद्र शासित प्रदेश सरकारों द्वारा आयोजित चयन परीक्षा के माध्यम से होता है।
तर्क (R): इस योजना का संचालन विकेंद्रीकृत है और चयन परीक्षा का आयोजन राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के दायित्व में है।
सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — योजना के अंतर्गत चयन परीक्षा राज्य या केंद्र शासित प्रदेश सरकारें आयोजित करती हैं, इसलिए (A) सही है। इसी विकेंद्रित संचालन ढांचे के कारण चयन की जिम्मेदारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर है, अतः (R) (A) की सही व्याख्या करता है। यह योजना केंद्र-प्रायोजित योजना के रूप में राज्यों के साथ मिलकर लागू होती है।
Q3. निम्नलिखित सुमेलन (मिलान) पर विचार कीजिए:
स्तंभ I (संविधान का अनुच्छेद):
1. अनुच्छेद 15(5)
2. अनुच्छेद 21A
3. अनुच्छेद 46
4. अनुच्छेद 45
स्तंभ II (प्रावधान):
a. छह से चौदह वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का मूल अधिकार
b. निजी सहित शिक्षण संस्थानों में सामाजिक-शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए विशेष प्रावधान (अल्पसंख्यक संस्थानों को छोड़कर)
c. छह वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा
d. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य दुर्बल वर्गों के शैक्षिक-आर्थिक हितों का संवर्धन
सही सुमेलन चुनिए:
- 1-b, 2-a, 3-d, 4-c
- 1-a, 2-b, 3-c, 4-d
- 1-b, 2-c, 3-a, 4-d
- 1-d, 2-b, 3-a, 4-c
उत्तर: 1-b, 2-a, 3-d, 4-c — अनुच्छेद 15(5) (93वां संशोधन) शिक्षण संस्थानों में पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए विशेष प्रावधान की अनुमति देता है, अतः 1-b। अनुच्छेद 21A छह से चौदह वर्ष के बच्चों के निःशुल्क शिक्षा के अधिकार से संबंधित है, अतः 2-a। अनुच्छेद 46 दुर्बल वर्गों के शैक्षिक-आर्थिक हितों का निदेश देता है, अतः 3-d। संशोधित अनुच्छेद 45 छह वर्ष से कम आयु की बाल्यावस्था देखभाल से संबंधित है, अतः 4-c।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना (National Means-cum-Merit Scholarship Scheme) जैसी मेधा-सह-आर्थिक पात्रता पर आधारित छात्रवृत्ति योजनाएँ आठवीं कक्षा के बाद विद्यार्थियों को विद्यालय में बनाए रखने का साधन हैं। इस दृष्टिकोण का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए कि क्या ऐसी लक्षित योजनाएँ संवैधानिक समता और शिक्षा के अधिकार के उद्देश्य को प्रभावी ढंग से पूरा करती हैं। साथ ही बताइए कि यदि चयन परीक्षा का स्तर राज्यों पर छोड़ा जाए और सत्यापन में विलंब हो, तो योजना के लक्ष्य पर क्या प्रभाव पड़ता है। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की संरचना इस प्रकार हो:
1. भूमिका: अनुच्छेद 21A (86वां संशोधन, 2002; शिक्षा का मूल अधिकार) और अनुच्छेद 46 (राज्य नीति का निदेशक तत्व) को उद्धृत कीजिए। अनुच्छेद 15(5) का उल्लेख कीजिए, जो शिक्षण संस्थानों में विशेष प्रावधान की अनुमति देता है। उन्नीकृष्णन बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (1993) का संदर्भ दीजिए, जिसमें शिक्षा के अधिकार को अनुच्छेद 21 से जोड़ा गया था, और मोहिनी जैन बनाम कर्नाटक राज्य (1992) का उल्लेख कीजिए।
2. योजना का तथ्यात्मक ढांचा: आठवीं के बाद बारहवीं तक लक्षित छात्रवृत्ति; नौवीं में प्रवेश पर हर वर्ष एक लाख नई छात्रवृत्तियाँ; राज्य/केंद्र शासित प्रदेश स्तर की चयन परीक्षा; दसवीं से बारहवीं तक शैक्षणिक मानदंडों पर नवीनीकरण; 12,000 रुपये वार्षिक राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) से; सातवीं में 55 प्रतिशत अंक (अनुसूचित जाति/जनजाति हेतु 5 प्रतिशत छूट); माता-पिता की वार्षिक आय 3.5 लाख रुपये से अधिक न हो। राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) पर ओटीआर (One Time Registration) अनिवार्य है।
3. आलोचनात्मक विश्लेषण (पक्ष): माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट को रोकने में आर्थिक सहायता की भूमिका; मेधा और आर्थिक दोनों मानदंडों से लक्षित समर्थन; DBT से रिसाव में कमी की संभावना; अमर्त्य सेन का क्षमता दृष्टिकोण (Capability Approach) शिक्षा को स्वतंत्रता का साधन मानता है।
4. आलोचनात्मक विश्लेषण (विपक्ष/सीमाएँ): परीक्षा-आधारित चयन में ग्रामीण और वंचित विद्यार्थियों का पिछड़ना; सातवीं कक्षा के अंकों को पात्रता का आधार बनाने से प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता का प्रश्न; आय-प्रमाणन की कठिनाइयाँ; कोठारी आयोग (1964-66) की 6 प्रतिशत GDP शिक्षा-व्यय की अनुशंसा के सापेक्ष वास्तविक व्यय; सार्वभौमिक बनाम लक्षित योजना की बहस। सेकेंडरी स्तर पर ड्रॉपआउट के नवीनतम UDISE+ आँकड़ों से तुलना कीजिए।
5. दूसरा भाग (परिणाम): राज्य-स्तरीय परीक्षा और सत्यापन विलंब (संस्थान नोडल अधिकारी स्तर L1 और जिला नोडल अधिकारी स्तर L2) से समय पर लाभ न पहुँचना, डिजिटल पहुँच की असमानता और समय-सीमा का बार-बार विस्तार योजना के लक्ष्य को कमजोर कर सकते हैं। केंद्र-प्रायोजित योजना में केंद्र-राज्य वित्त-पोषण साझेदारी और वित्त आयोग की भूमिका का उल्लेख कीजिए।
6. निष्कर्ष: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सार्वभौमिक सकल नामांकन अनुपात (GER) लक्ष्य के संदर्भ में समावेशी सुधारों का सुझाव (प्रक्रिया सरलीकरण, समय पर सत्यापन, स्थानीय सहायता केंद्र) देते हुए संतुलित निष्कर्ष लिखिए।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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