केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 मनाया जाएगा

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सतर्कता जागरूकता सप्ताह प्रक्रियाभ्रष्टाचार/अनियमिततासंभावना घटनाशिकायत/लोकहितCVC या विभागजाँच अन्वेषणसीबीआईकार्रवाई सिफारिशअनुशासन अभियोजननिवारक सुधारभविष्य रोकथामजागरूकता प्रसारनैतिकता जवाबदेही
सतर्कता जागरूकता सप्ताह प्रक्रिया

✎ केंद्रीय सतर्कता आयोग संविधान से नहीं, बल्कि केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 से शक्ति प्राप्त एक परामर्शी और निवारक सांविधिक निकाय है; सतर्कता जागरूकता सप्ताह उसकी जागरूकता-आधारित पहल है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन (Governance) एवं सांविधिक निकाय: केंद्रीय सतर्कता आयोग की संरचना, कार्य और स्वायत्तता  |  GS Paper IV — सत्यनिष्ठा (Integrity), लोक सेवा में नैतिकता और जवाबदेही
  • Prelims: केंद्रीय सतर्कता आयोग (Central Vigilance Commission, CVC), केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (Prevention of Corruption Act, 1988) और 2018 का संशोधन, सार्वजनिक हित प्रकटीकरण एवं सूचनादाता संरक्षण संकल्प, 2004 (PIDPI), सत्यनिष्ठा प्रतिज्ञा (Integrity Pledge), मुख्य सतर्कता अधिकारी (Chief Vigilance Officer, CVO), संथानम समिति (Santhanam Committee), लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013
  • Essay: भ्रष्टाचार-मुक्त शासन: नियम-आधारित तंत्र बनाम नैतिक नेतृत्व, सतर्कता, विश्वास और नागरिक-राज्य संबंध: पारदर्शी प्रशासन की चुनौतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: केंद्रीय सतर्कता आयोग संविधान से नहीं, बल्कि केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 से शक्ति प्राप्त एक परामर्शी और निवारक सांविधिक निकाय है; सतर्कता जागरूकता सप्ताह उसकी जागरूकता-आधारित पहल है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय सतर्कता आयोग (Central Vigilance Commission, CVC) ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 का आयोजन किया। यह सप्ताह प्रतिवर्ष मनाया जाता है और इसका उद्देश्य सरकारी कार्यों में ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही की संस्कृति को सुदृढ़ करना है। इस पत्र सूचना कार्यालय (PIB) की विज्ञप्ति में आयोजन की सामान्य सूचना दी गई है; सप्ताह की विस्तृत विषयवस्तु या कार्यक्रमों का ब्योरा इसमें उपलब्ध नहीं है। परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण यह है कि आयोग का संवैधानिक आधार, उसकी भूमिका और निवारक सतर्कता की अवधारणा स्पष्ट हो।

पृष्ठभूमि

  • संथानम समिति (K. Santhanam Committee) की सिफारिश पर फरवरी 1964 में केंद्रीय सतर्कता आयोग की स्थापना कार्यकारी संकल्प के माध्यम से की गई थी।
  • केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 के द्वारा आयोग को वैधानिक दर्जा मिला; इससे पहले इसकी स्थिति मुख्यतः प्रशासनिक आदेशों पर आधारित थी।
  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 में 2018 के संशोधन द्वारा रिश्वत देने वाले व्यक्ति को भी दंडनीय अपराध बनाया गया, जिससे भ्रष्टाचार-निरोध का दायरा बढ़ा।
  • सतर्कता जागरूकता सप्ताह का आयोजन प्रतिवर्ष अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में होता है, ताकि सार्वजनिक सेवकों और नागरिकों में ईमानदारी के प्रति चेतना बढ़े।
  • लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के लागू होने के बाद उच्च पदस्थ लोक सेवकों के भ्रष्टाचार की जाँच हेतु लोकपाल की व्यवस्था भी अस्तित्व में आई; यह संस्था केंद्रीय सतर्कता आयोग से भिन्न है।

केंद्रीय सतर्कता आयोग क्या है?

  • केंद्रीय सतर्कता आयोग केंद्र सरकार के प्रशासन में भ्रष्टाचार की रोकथाम और सतर्कता-संबंधी कार्यों के लिए शीर्ष निकाय है। संविधान में इसका उल्लेख नहीं है; इसकी शक्तियाँ संसद द्वारा पारित केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 से प्राप्त होती हैं।
  • आयोग में एक केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और अधिकतम दो सतर्कता आयुक्त होते हैं, जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। कार्यकाल चार वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तक होता है।
  • आयोग का कार्य मुख्यतः परामर्शी और पर्यवेक्षी है। वह भ्रष्टाचार की शिकायतों की जाँच का पर्यवेक्षण करता है और अनुशासनात्मक प्राधिकारियों को दंड या कार्रवाई के संबंध में सिफारिश देता है; अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी का होता है।
  • निवारक सतर्कता (Preventive Vigilance) में प्रक्रियाओं का सरलीकरण, पारदर्शी निर्णय-प्रणाली और प्रणालीगत सुधार शामिल हैं, जबकि दंडात्मक सतर्कता (Punitive Vigilance) में अनियमितताओं की जाँच और दंडात्मक कार्रवाई आती है।
  • प्रत्येक मंत्रालय, विभाग और सार्वजनिक उपक्रम में मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) नियुक्त किया जाता है, जो संस्थागत स्तर पर सतर्कता कार्यों का समन्वय करता है।
  • सत्यनिष्ठा प्रतिज्ञा एक स्वैच्छिक व्यवस्था है, जिसमें सार्वजनिक सेवक और नागरिक ईमानदारी के सिद्धांतों के पालन का संकल्प लेते हैं।
  • सार्वजनिक हित प्रकटीकरण एवं सूचनादाता संरक्षण संकल्प, 2004 के अंतर्गत भ्रष्टाचार की सूचना देने वालों की पहचान की सुरक्षा हेतु केंद्रीय सतर्कता आयोग को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
  • केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) के भ्रष्टाचार-संबंधी मामलों के पर्यवेक्षण में भी आयोग की भूमिका है, परंतु सीबीआई और आयोग के कार्य अलग-अलग हैं।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
संस्था की स्थिति केंद्रीय सतर्कता आयोग (Central Vigilance Commission) केंद्र सरकार की सर्वोच्च सतर्कता संस्था है। इसे सांविधिक दर्जा केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 से मिला है, जबकि इसकी स्थापना 1964 में संथानम समिति की सिफारिश पर हुई थी।
सतर्कता जागरूकता सप्ताह सतर्कता जागरूकता सप्ताह हर वर्ष लगभग 31 अक्टूबर के आसपास मनाया जाता है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही के मूल्यों को बढ़ावा देना तथा नागरिकों और सरकारी कर्मचारियों दोनों में भ्रष्टाचार के विरुद्ध चेतना पैदा करना है।
निवारक सतर्कता सतर्कता का कार्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और जोखिम-रहित बनाकर भ्रष्टाचार की संभावना घटाना भी है। इसे निवारक सतर्कता (Preventive Vigilance) कहा जाता है।
शिकायत तंत्र लोक हित प्रकटन और मुखबिर संरक्षण संकल्प, 2004 के अंतर्गत CVC को भ्रष्टाचार की शिकायतें प्राप्त करने और उनकी जाँच हेतु नामित एजेंसी बनाया गया है। इससे गोपनीय और सुरक्षित शिकायत की व्यवस्था मजबूत होती है।
जाँच पर निगरानी CVC केंद्रीय सरकारी विभागों और उपक्रमों के सतर्कता तंत्र की निगरानी करता है तथा सीबीआई (CBI) के भ्रष्टाचार-रोधी कार्यों के पर्यवेक्षण की भूमिका निभाता है।

महत्व

शासन और प्रशासनिक

  • सतर्कता जागरूकता सप्ताह प्रशासन में नैतिक आचरण और नियम-पालन की संस्कृति को सुदृढ़ करने का वार्षिक माध्यम है।
  • सरकारी कार्यालयों में निर्णय-प्रक्रिया की पारदर्शिता बढ़ने से जनता का प्रशासन पर विश्वास मजबूत होता है।
  • निवारक उपायों पर जोर देने से दंडात्मक कार्रवाई पर निर्भरता घटती है और प्रक्रियागत कमियाँ पहले ही दूर होती हैं।

विधिक और संस्थागत

  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित, 2018) रिश्वत देने और लेने दोनों को अपराध मानता है, और सतर्कता तंत्र इसके प्रभावी क्रियान्वयन का आधार है।
  • लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के बाद उच्च पदों के भ्रष्टाचार की जाँच का ढाँचा विकसित हुआ है, जिसमें CVC की भूमिका अन्य संस्थाओं के साथ समन्वय की है।
  • सांविधिक दर्जा संस्था को स्वायत्तता और निरंतरता देता है, जिससे उसके कार्य किसी एक सरकार के कार्यकाल तक सीमित नहीं रहते।

सामाजिक और नैतिक

  • भ्रष्टाचार के विरुद्ध सामूहिक चेतना नागरिक-राज्य संबंधों में विश्वास और सामाजिक पूँजी को बढ़ाती है।
  • सार्वजनिक सेवा में सत्यनिष्ठा का संदेश युवा अभ्यर्थियों और नए सिविल सेवकों के लिए आचार-संहिता की व्यावहारिक समझ देता है।

चुनौतियाँ

1. जागरूकता से आचरण तक का अंतर

  • सप्ताह के दौरान शपथ, संगोष्ठी और प्रचार-सामग्री से चेतना बनती है, पर स्थायी आचरण-परिवर्तन के लिए निरंतर प्रशिक्षण और उत्तरदायित्व तंत्र आवश्यक है।
  • कार्यक्रमों का प्रभाव प्रायः मापा नहीं जाता, जिससे वार्षिक आयोजन औपचारिकता बनकर रह सकते हैं।

2. जाँच और अभियोजन में विलंब

  • सतर्कता जाँच, विभागीय कार्यवाही और अभियोजन स्वीकृति के बीच लंबा समय लगने से दोषियों पर समय पर कार्रवाई नहीं हो पाती।
  • लंबित मामलों का बोझ और समन्वय की कमी निवारक प्रभाव को कमजोर करती है।

3. सेवा-सुरक्षा और दंड प्रक्रिया का संतुलन

  • संविधान सिविल सेवकों को अनुच्छेद 311 के अंतर्गत पर्याप्त सुरक्षा देता है, जिसके कारण अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए उचित प्रक्रिया अनिवार्य है।
  • निष्पक्ष प्रक्रिया और ईमानदार अधिकारियों के संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौती है, ताकि न तो भ्रष्ट बच निकलें और न ही ईमानदार अधिकारी भयवश निर्णय लेने से बचें।

4. संस्थागत स्वायत्तता और समन्वय

  • CVC, सीबीआई और विभागीय सतर्कता इकाइयों के बीच अधिकार-क्षेत्र और समन्वय की स्पष्टता आवश्यक है।
  • जाँच एजेंसियों की स्वतंत्रता और जवाबदेही दोनों सुनिश्चित करना सुधार का केंद्रीय प्रश्न है।

5. शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा

  • लोक हित प्रकटन के बावजूद मुखबिरों पर प्रतिशोध का खतरा बना रहता है, जिससे लोग शिकायत करने से हिचकते हैं।
  • शिकायत प्रक्रिया की गोपनीयता और तेज़ कार्रवाई पर संदेह हो तो व्यवस्था की विश्वसनीयता घटती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
जाँच में विलंब लंबी जाँच और अभियोजन स्वीकृति से दंड की निश्चितता घटती है और निवारक प्रभाव कमजोर होता है।
जागरूकता बनाम आचरण वार्षिक अभियानों का प्रभाव स्थायी व्यवहार-परिवर्तन में बदलना कठिन है।
मुखबिर संरक्षण शिकायतकर्ताओं की पहचान सुरक्षित रखने और प्रतिशोध रोकने की व्यवस्था पर भरोसा कम होने का खतरा है।
एजेंसियों में समन्वय CVC, सीबीआई और विभागीय सतर्कता इकाइयों के बीच दोहराव या अंतराल से जाँच की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
सेवा-सुरक्षा का संतुलन अनुच्छेद 311 के तहत उचित प्रक्रिया और ईमानदार अधिकारियों के संरक्षण में संतुलन बनाना आवश्यक है।

आगे की राह

  • जागरूकता सप्ताह के कार्यक्रमों का प्रभाव मापने के लिए स्पष्ट संकेतक तय किए जाएँ, ताकि आयोजन औपचारिकता न रहें।
  • शिकायत निपटान की समय-सीमा निर्धारित कर उसकी नियमित समीक्षा की जाए।
  • लोक हित प्रकटन और मुखबिर संरक्षण व्यवस्था को अधिक सशक्त बनाया जाए, जिसमें पहचान की गोपनीयता और प्रतिशोध-विरोधी उपाय शामिल हों।
  • CVC, सीबीआई और विभागीय सतर्कता इकाइयों के बीच समन्वय तंत्र को संस्थागत रूप दिया जाए।
  • सार्वजनिक खरीद, अनुज्ञा और लाइसेंसिंग जैसे अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण और पारदर्शिता बढ़ाई जाए।
  • सरकारी सेवकों के लिए नैतिकता और सत्यनिष्ठा पर नियमित प्रशिक्षण को सेवाकालीन प्रशिक्षण का अनिवार्य भाग बनाया जाए।
  • नागरिकों के लिए शिकायत-प्रक्रिया की जानकारी सरल भाषा और स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराई जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

केंद्रीय सतर्कता आयोग (Central Vigilance Commission) · सतर्कता जागरूकता सप्ताह (Vigilance Awareness Week) · भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (Prevention of Corruption Act, 1988) · धारा 17A (Section 17A) और भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 · सत्यनिष्ठा करार (Integrity Pact) · विनीत नारायण बनाम भारत संघ, 1997 (Vineet Narain Case) · सांविधिक दर्जा और संस्थागत स्वायत्तता · सीबीआई पर अधीक्षण (Superintendence over CBI) · संथानम समिति (Santhanam Committee) · द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (Second Administrative Reforms Commission) और नैतिकता · सार्वजनिक जीवन में सत्यनिष्ठा और शासन-पारदर्शिता · व्हिसलब्लोअर संरक्षण (Whistle Blowers Protection)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 311: सेवा से हटाने और दंड की प्रक्रिया की सुरक्षा
  • अनुच्छेद 320(3)(ग): अनुशासनात्मक मामलों में UPSC से परामर्श

अवधारणा प्रवाह

भ्रष्टाचार या प्रक्रियागत अनियमितता की संभावना या घटना उत्पन्न होती है।  →  लोक हित प्रकटन या शिकायत के माध्यम से मामला CVC या संबंधित विभाग के संज्ञान में आता है।  →  सतर्कता जाँच और आवश्यकता होने पर सीबीआई द्वारा अन्वेषण किया जाता है।  →  जाँच के आधार पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई या अभियोजन की सिफारिश की जाती है।  →  निवारक सतर्कता के माध्यम से प्रक्रियाओं में सुधार कर भविष्य की अनियमितताएँ रोकी जाती हैं।  →  सतर्कता जागरूकता सप्ताह के माध्यम से नैतिकता और जवाबदेही का सार्वजनिक संदेश फैलाया जाता है।  →  जागरूकता और जवाबदेही मिलकर प्रशासन में विश्वास और सुशासन को सुदृढ़ करते हैं।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केंद्रीय सतर्कता आयोग की स्थापना संथानम समिति की सिफारिशों के आधार पर की गई थी।
2. केंद्रीय सतर्कता आयोग को केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 के द्वारा सांविधिक दर्जा प्रदान किया गया है।
3. केंद्रीय सतर्कता आयोग को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 से संबंधित अपराधों के संबंध में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के कार्यकरण पर अधीक्षण का अधिकार प्राप्त है।
4. केंद्रीय सतर्कता आयोग स्वयं किसी लोक सेवक के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति देने का अंतिम अधिकार रखता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी चार

उत्तर: केवल तीन — कथन 1, 2 और 3 सही हैं। केंद्रीय सतर्कता आयोग की स्थापना 1964 में संथानम समिति (1962-64) की सिफारिशों पर हुई थी, और इसे केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 द्वारा सांविधिक दर्जा मिला। आयोग भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित अपराधों में सीबीआई के अधीक्षण का कार्य करता है। कथन 4 गलत है, क्योंकि अभियोजन की स्वीकृति सक्षम प्राधिकारी देता है, आयोग का निर्णय अंतिम नहीं होता; आयोग परामर्शी और जाँच-निगरानी की भूमिका निभाता है।

Q2. कथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए:
कथन (A): केंद्रीय सतर्कता आयोग को सांविधिक दर्जा देने की प्रक्रिया विनीत नारायण मामले (1997) में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से आरंभ हुई।
कारण (R): न्यायालय ने भ्रष्टाचार-निरोध संस्थाओं की स्वतंत्रता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए सरकार को उपयुक्त वैधानिक ढाँचा बनाने का निर्देश दिया था।
उपर्युक्त के संदर्भ में सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, किंतु (R) सही है।

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — विनीत नारायण मामले (1997) में सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई और केंद्रीय सतर्कता आयोग की स्वायत्तता तथा सांविधिक आधार के लिए निर्देश दिए, जिसके परिणामस्वरूप केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 बना। अतः कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या है। दोनों कथन सही हैं और कारण, कथन का कारण स्पष्ट करता है।

Q3. सत्यनिष्ठा करार (Integrity Pact) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक सही है?

  1. यह सरकारी क्रय-प्रक्रिया में भाग लेने वाले सरकारी विभाग और बोलीदाताओं के बीच ऐसा समझौता है, जिसमें दोनों पक्ष भ्रष्ट आचरण से दूर रहने की प्रतिबद्धता लेते हैं और स्वतंत्र बाह्य निगरानीकर्ता (Independent External Monitor) की व्यवस्था होती है।
  2. यह किसी लोक सेवक के विरुद्ध अभियोजन चलाने की वैधानिक स्वीकृति का नाम है, जो केवल न्यायालय द्वारा दी जाती है।
  3. यह राष्ट्रीय सूचना आयोग द्वारा सार्वजनिक प्राधिकारियों की सूचना देने की बाध्यता का एक ढाँचा है।
  4. यह संविधान के अनुच्छेद 320 के अंतर्गत लोक सेवा आयोग द्वारा भर्ती की पारदर्शी प्रक्रिया है।

उत्तर: यह सरकारी क्रय-प्रक्रिया में भाग लेने वाले सरकारी विभाग और बोलीदाताओं के बीच ऐसा समझौता है, जिसमें दोनों पक्ष भ्रष्ट आचरण से दूर रहने की प्रतिबद्धता लेते हैं और स्वतंत्र बाह्य निगरानीकर्ता (Independent External Monitor) की व्यवस्था होती है। — सत्यनिष्ठा करार (Integrity Pact) केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता के लिए प्रोत्साहित किया गया एक उपकरण है, जिसमें स्वतंत्र बाह्य निगरानीकर्ता (Independent External Monitor) की नियुक्ति होती है। अन्य विकल्प अलग संस्थाओं या प्रावधानों से जुड़े हैं: अभियोजन स्वीकृति सक्षम प्राधिकारी देता है, सूचना का अधिकार अधिनियम का दायित्व सूचना आयोगों से जुड़ा है, और अनुच्छेद 320 लोक सेवा आयोगों के परामर्श से संबंधित है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ केंद्रीय सतर्कता आयोग (Central Vigilance Commission) भ्रष्टाचार-निरोध की सर्वोच्च केंद्रीय संस्था है, किंतु उसकी प्रभावशीलता केवल सांविधिक दर्जे पर निर्भर नहीं करती। आयोग की संवैधानिक एवं वैधानिक स्थिति का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 17A जैसे प्रावधान जाँच की प्रक्रिया और सत्यनिष्ठा की संस्थागत व्यवस्था को किस सीमा तक प्रभावित करते हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की रूपरेखा:
1. भूमिका: सतर्कता जागरूकता सप्ताह (Vigilance Awareness Week) जैसे आयोजनों का उद्देश्य निवारक सतर्कता और नागरिक जागरूकता को बढ़ाना है; किंतु संस्थागत प्रभावशीलता का प्रश्न संरचना और अधिकारों से जुड़ा है।
2. आयोग की उत्पत्ति और स्थिति: संथानम समिति (1962-64) की सिफारिश पर 1964 में स्थापना; विनीत नारायण बनाम भारत संघ (1997) में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश; केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 द्वारा सांविधिक दर्जा।
3. शक्तियाँ और कार्य: धारा 8 के अंतर्गत कार्य; भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 से संबंधित अपराधों में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) पर अधीक्षण; सतर्कता प्रशासन में केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की भूमिका; मुख्य तकनीकी परीक्षक संगठन (CTE) के माध्यम से निर्माण-कार्यों की जाँच।
4. स्वायत्तता के पक्ष-विपक्ष: नियुक्ति समिति, निश्चित कार्यकाल तथा सेवा-शर्तें स्वायत्तता का आधार हैं; परंतु आयोग की सिफारिशें अधिकतर बाध्यकारी न होकर परामर्शी प्रकृति की हैं, और उनके क्रियान्वयन की निर्भरता संबंधित विभागों पर है।
5. धारा 17A का विश्लेषण: लोक सेवक के निर्णयों से संबंधित जाँच के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति का प्रावधान। समर्थक मत: ईमानदार नौकरशाही को अनावश्यक उत्पीड़न से बचाने और नीति-निर्णय में साहस बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है। आलोचक मत: यह भ्रष्टाचार की जाँच में विलंब और निष्क्रियता को बढ़ा सकता है तथा निर्णय और अपराध के बीच की रेखा धुँधली करता है।
6. अन्य संदर्भ: सत्यनिष्ठा करार (Integrity Pact) का प्रसार; व्हिसलब्लोअर संरक्षण (Whistle Blowers Protection) व्यवस्था का क्रियान्वयन; द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (Second Administrative Reforms Commission, 2005) की चौथी रिपोर्ट ‘शासन में नैतिकता’ की सिफारिशें।
7. सुधार-सुझाव: जाँच-स्वीकृति की समय-सीमा, आयोग की सिफारिशों पर अनुपालन-रिपोर्ट की बाध्यता, जाँच एजेंसियों की संस्थागत स्वायत्तता, और डिजिटल निगरानी तंत्र।
8. निष्कर्ष: सांविधिक ढाँचा आवश्यक है, किंतु प्रभावशीलता के लिए प्रक्रियात्मक सुधार, जवाबदेही और नैतिक संस्कृति का समानांतर विकास आवश्यक है।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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