अक्टूबर 28 को आएगा चक्रवात, आंध्र प्रदेश में बाढ़ और निकासी की तैयारी

अक्टूबर 28 को आएगा चक्रवात, आंध्र प्रदेश में बाढ़ और निकासी की तैयारी

अक्टूबर 28 को आएगा चक्रवात, आंध्र प्रदेश में बाढ़ और निकासी की तैयारी

चक्रवात चेतावनी एवं निकासी प्रक्रियाचक्रवात उत्पत्ति26-27°C तापमानगहरा अवदाबउत्तर-पश्चिम दिशाअति गंभीर तूफान115-140 किमी/घंटानिकासी तैयारीनिम्न भूमि निवासीआपदा प्रभावबाढ़ एवं तूफानराहत एवं बचावआपदा प्रबंधन
चक्रवात चेतावनी एवं निकासी प्रक्रिया

✎ अति गंभीर चक्रवाती तूफान (115 से 165 किमी प्रति घंटा) IMD की श्रेणी है, जबकि आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत निकासी और तैयारी का दायित्व राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला प्रशासन पर होता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (Geography): उष्णकटिबंधीय चक्रवात की उत्पत्ति, बंगाल की खाड़ी और भारतीय तटीय क्षेत्र की भौगोलिक संवेदनशीलता  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन (Disaster Management): पूर्व-चेतावनी प्रणाली, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत संस्थागत ढाँचा और निकासी व्यवस्था
  • Prelims: अति गंभीर चक्रवाती तूफान (Very Severe Cyclonic Storm) और IMD का चक्रवात वर्गीकरण पैमाना, अवदाब (Depression) और गहरा अवदाब (Deep Depression) के बीच अंतर, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की भूमिका और चेतावनी प्रणाली, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (APSDMA) और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का गठन, यनम (Yanam) — पुदुचेरी का भाग, जो आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र से घिरा है, बंगाल की खाड़ी में चक्रवात की उत्पत्ति के लिए अनुकूल दशाएँ और मानसून-पश्चात मौसम, तूफानी लहर (Storm Surge) और कच्चे मकानों की भेद्यता
  • Essay: प्राकृतिक आपदाओं में पूर्व-चेतावनी से जीवन-रक्षा तक: प्रभावी आपदा प्रबंधन की संस्थागत और सामुदायिक आयाम, जलवायु परिवर्तन के दौर में तीव्र चक्रवातों का बढ़ता जोखिम और तटीय समुदायों का अनुकूलन

त्वरित पुनरावृत्ति: अति गंभीर चक्रवाती तूफान (115 से 165 किमी प्रति घंटा) IMD की श्रेणी है, जबकि आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत निकासी और तैयारी का दायित्व राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला प्रशासन पर होता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 25 अक्टूबर 2026 को जारी पूर्वानुमान में बताया कि बंगाल की खाड़ी के मध्य-पूर्वी भाग में बना अवदाब गहरे अवदाब में बदलकर धीरे-धीरे उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ेगा और 28 अक्टूबर की पूर्वाह्न तक बापटला और विशाखापत्तनम के बीच आंध्र प्रदेश तथा यनम तट से टकराएगा। इस दौरान 115 से 125 किमी प्रति घंटा की हवाएँ चलने और 140 किमी प्रति घंटा तक के झोंकों का अनुमान है, अर्थात यह अति गंभीर चक्रवाती तूफान की श्रेणी में होगा। आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (APSDMA) ने बापटला से विजयनगरम तक की तटीय जिलों में नीची भूमि और कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों को आश्रय स्थलों में निकालने की तैयारी शुरू की है। प्रभाव बापटला, कृष्णा, पश्चिम गोदावरी, डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनसीमा, काकीनाडा, अनकापल्ली, विशाखापत्तनम, विजयनगरम और श्रीकाकुलम जिलों में अपेक्षित है, जबकि तिरुपति और एसपीएसआर नेल्लोर में अपेक्षाकृत कम प्रभाव का अनुमान है। 25 और 26 अक्टूबर को हल्की वर्षा और 27 अक्टूबर से चक्रवात-जनित भारी वर्षा की संभावना बताई गई है।

पृष्ठभूमि

  • बंगाल की खाड़ी में चक्रवात की उत्पत्ति के लिए समुद्र की सतह का तापमान लगभग 26 से 27 डिग्री सेल्सियस से अधिक होना, निम्न ऊर्ध्वाधर पवन कतरन (Vertical Wind Shear) और कोरिऑलिस बल आवश्यक हैं। अक्टूबर-दिसंबर के मानसून-पश्चात काल में बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों की दूसरी प्रमुख सक्रियता देखी जाती है।
  • IMD चक्रवातों को हवा की गति के आधार पर अवदाब, गहरा अवदाब, चक्रवाती तूफान, गंभीर चक्रवाती तूफान, अति गंभीर चक्रवाती तूफान, अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान और सुपर चक्रवाती तूफान में वर्गीकृत करता है।
  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), राज्य स्तर पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) और जिला स्तर पर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) गठित होते हैं। आपदा-पूर्व तैयारी, निकासी और राहत का प्राथमिक दायित्व राज्य और जिला प्रशासन पर होता है।
  • 1999 के ओडिशा सुपर चक्रवात में भारी जनहानि के बाद चक्रवात की पूर्व-चेतावनी, आश्रय स्थलों के निर्माण और समुदाय-आधारित तैयारी पर नीतिगत ध्यान बढ़ा। इसी अनुभव ने तटीय राज्यों में निकासी-आधारित आपदा प्रबंधन को सुदृढ़ करने की दिशा दी।
  • आंध्र प्रदेश की तटरेखा लगभग 970 किलोमीटर लंबी है और यहाँ की नदी-डेल्टा और नीची तटीय पट्टियाँ तूफानी लहर तथा बाढ़ के प्रति संवेदनशील हैं। कच्चे मकानों की संरचनात्मक कमजोरी के कारण ऐसे क्षेत्रों में निकासी को प्राथमिकता दी जाती है।

चक्रवात क्या है?

  • चक्रवात निम्न वायुदाब वाला वह वायुमंडलीय तंत्र है, जिसमें हवाएँ केंद्र के चारों ओर घूमती हुई केंद्र की ओर बढ़ती हैं। उत्तरी गोलार्ध में इसकी हवाएँ घड़ी की सुई की विपरीत दिशा में चलती हैं।
  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात के बनने के लिए गर्म समुद्री सतह, नमी की प्रचुरता, कोरिऑलिस बल, निम्न ऊर्ध्वाधर पवन कतरन और पहले से मौजूद निम्न-दाब क्षेत्र की आवश्यकता होती है।
  • IMD के अनुसार अवदाब से सुपर चक्रवाती तूफान तक की श्रेणियाँ हवा की अधिकतम स्थायी गति के आधार पर तय होती हैं। अति गंभीर चक्रवाती तूफान में हवा की गति लगभग 118 से 165 किमी प्रति घंटा होती है।
  • चक्रवात के तीन प्रमुख खतरे हैं: तेज हवाएँ, भारी वर्षा और तूफानी लहर (Storm Surge), जो समुद्र के जल को तट की ओर धकेलकर निचले इलाकों में बाढ़ उत्पन्न करती है।
  • बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात अपेक्षाकृत अधिक तीव्रता के साथ पूर्वी तट से टकराते हैं, जबकि अरब सागर के चक्रवात अधिकतर पश्चिमी तट को प्रभावित करते हैं। चक्रवातों के नामकरण की व्यवस्था विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और ESCAP के पैनल द्वारा की जाती है।
  • पूर्व-चेतावनी प्रणाली में IMD के पूर्वानुमान, राज्य स्तर पर चेतावनी का प्रसारण, तटीय जिलों में आश्रय स्थलों की पहचान और सामुदायिक जागरूकता शामिल होती है।
  • कच्चे मकान और नीची भूमि पर बसी बस्तियाँ तूफानी हवाओं और बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित होती हैं, इसलिए उनके लिए समय से पहले निकासी आवश्यक मानी जाती है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
प्रणाली की प्रकृति बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दाब क्षेत्र अवदाब (Depression) से गहरे अवदाब और चक्रवाती तूफान (Cyclonic Storm) होते हुए बहुत तीव्र चक्रवाती तूफान (Very Severe Cyclonic Storm) में बदलने का अनुमान है। IMD के वर्गीकरण में यह अत्यधिक शक्तिशाली श्रेणी में आता है।
स्थलपात की अवधि और स्थान भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department (IMD)) के अनुसार 28 अक्टूबर की पूर्वाह्न में आंध्र प्रदेश और यनम तट पर बापटला और विशाखापत्तनम के बीच स्थलपात होगा। पूर्वानुमान में तट से निकटता और स्थलपात-बिंदु का सटीक निर्धारण महत्त्वपूर्ण है।
पवन की गति 115 से 125 किमी प्रति घंटा की अधिकतम स्थिर पवन और 140 किमी प्रति घंटा तक की झोंकेदार (Gusting) पवनें अपेक्षित हैं। तेज़ पवनें कच्चे मकानों, बिजली और संचार ढाँचे तथा फसलों के लिए सबसे अधिक खतरा पैदा करती हैं।
वर्षा की स्थिति 25 और 26 अक्टूबर को हल्की वर्षा और 27 अक्टूबर से चक्रवात-जनित व्यापक वर्षा की संभावना है। वर्षा का समय तट पर जल-जमाव और नदियों के उफान के जोखिम को बढ़ाता है।
प्रभावित जिले और निकासी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार बापटला से विजयनगरम तक के तटीय जिलों में निम्न-भूमि क्षेत्र और कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों को आश्रय-स्थलों पर ले जाया जाएगा। तिरुपति और एसपीएसआर नेल्लोर में प्रभाव कम अपेक्षित है।
प्रशासनिक तैयारी आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (Andhra Pradesh State Disaster Management Authority (APSDMA)) स्थलपात से पहले निकासी योजना लागू कर रहा है। यह आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत राज्य स्तर पर गठित संस्था है।

महत्व

मानव सुरक्षा और सामाजिक प्रभाव

  • निम्न-भूमि क्षेत्रों और कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों का जीवन सबसे अधिक जोखिम में है, इसलिए समय पर निकासी जीवन-रक्षा का प्रमुख उपाय है।
  • आश्रय-स्थलों की व्यवस्था से विस्थापन का अल्पकालिक प्रभाव सीमित किया जा सकता है और असुरक्षित वर्गों की रक्षा होती है।

आर्थिक प्रभाव

  • मछुआरा समुदाय की आजीविका नौकायन और मत्स्यन रोक दिए जाने से प्रभावित होती है।
  • तटीय कृषि, विशेषकर धान की फसल, तेज़ पवनों और जल-जमाव से क्षति उठा सकती है। इससे खाद्य उत्पादन और ग्रामीण आय पर असर पड़ता है।

अवसंरचना और सेवाएँ

  • बिजली की आपूर्ति, दूरसंचार और सड़क संपर्क बाधित होने से राहत कार्यों में कठिनाई आती है।
  • बंदरगाह और तटीय औद्योगिक इकाइयों में संचालन रोकने की आवश्यकता पड़ सकती है।

शासन और आपदा-प्रबंधन दृष्टि

  • पूर्वानुमान, चेतावनी और निकासी के बीच समन्वय यह दर्शाता है कि आपदा प्रबंधन में पूर्व-तैयारी (Preparedness) कितनी निर्णायक है।
  • केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों की भूमिका का स्पष्ट विभाजन राहत कार्यों की गति तय करता है।

चुनौतियाँ

1. सटीक पूर्वानुमान और चेतावनी का संप्रेषण

  • चक्रवात का मार्ग और तीव्रता बदल सकती है, जिससे अंतिम समय में निकासी के निर्णय कठिन हो जाते हैं।
  • चेतावनी को मछुआरों और ग्रामीण समुदायों तक स्थानीय भाषा और माध्यमों में पहुँचाना अक्सर चुनौती बनता है।

2. कमज़ोर आवास और निम्न-भूमि पर बसावट

  • कच्चे मकान तेज़ पवनों में सबसे अधिक क्षतिग्रस्त होते हैं और उनमें रहने वालों का जोखिम बढ़ जाता है।
  • तटीय और निम्न-भूमि क्षेत्रों में अनियोजित बसावट से जोखिम स्थायी रूप से बना रहता है।

3. आश्रय-स्थलों की क्षमता और सुविधाएँ

  • बड़ी संख्या में लोगों की निकासी के लिए पर्याप्त, सुरक्षित और ऊँचाई पर स्थित आश्रय-स्थल आवश्यक हैं।
  • पेयजल, स्वच्छता, चिकित्सा और पशुओं के लिए व्यवस्था न होने पर स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाता है।

4. केंद्र-राज्य समन्वय

  • चक्रवात कई राज्यों और जिलों को प्रभावित कर सकता है, इसलिए अंतर-राज्य और अंतर-एजेंसी समन्वय आवश्यक है।
  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority (NDMA)) और राज्य प्राधिकरण के बीच संसाधनों के त्वरित आवंटन में विलंब की आशंका रहती है।

5. आजीविका की सुरक्षा

  • मछुआरों के लिए नौकाओं और जालों की क्षति से उनकी आय लंबे समय तक प्रभावित रहती है।
  • फसल-क्षति के बाद राहत और पुनर्वास में विलंब ग्रामीण ऋणग्रस्तता को बढ़ा सकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
पूर्वानुमान की अनिश्चितता चक्रवात के मार्ग और तीव्रता में बदलाव से निकासी का समय और क्षेत्र बदल सकता है।
असुरक्षित आवास कच्चे मकानों में रहने वाले परिवार तेज़ पवनों और बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
आश्रय-स्थलों पर दबाव बड़ी संख्या में विस्थापित लोगों के लिए पर्याप्त सुविधाएँ जुटाना कठिन होता है।
संसाधन-समन्वय राज्य, केंद्र और स्थानीय निकायों के बीच त्वरित समन्वय में विलंब से राहत कार्य धीमे पड़ सकते हैं।
आजीविका की क्षति मत्स्यन और कृषि पर निर्भर परिवारों की आय लंबे समय तक प्रभावित रह सकती है।

आगे की राह

  • निम्न-भूमि और कच्चे मकानों वाले परिवारों की सूची पहले से तैयार कर स्थानीय स्तर पर निकासी-योजना को अद्यतन रखा जाए।
  • चेतावनी संदेश स्थानीय भाषा में, मोबाइल संदेश, सायरन और ग्राम-स्तरीय स्वयंसेवकों के माध्यम से समय पर पहुँचाए जाएँ।
  • आश्रय-स्थलों को ऊँचे और सुरक्षित स्थानों पर चिह्नित कर उनमें पेयजल, स्वच्छता और चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित की जाए।
  • तटीय क्षेत्रों में पक्के और चक्रवात-रोधी आवास निर्माण को प्राथमिकता दी जाए।
  • बिजली, दूरसंचार और सड़क संपर्क के लिए आपातकालीन पुनर्स्थापना दल पहले से तैयार रखे जाएँ।
  • मछुआरों के लिए तूफान-पूर्व सूचना, नौकाओं की सुरक्षित वापसी और क्षति के बाद त्वरित मुआवज़े की व्यवस्था की जाए।
  • पूर्वानुमान, निकासी और राहत के बाद की समीक्षा को नीति-निर्माण में शामिल कर स्थानीय आपदा योजनाओं को सुदृढ़ किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

चक्रवात · आपदा प्रबंधन · भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) · राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) · तटीय भेद्यता · पूर्व चेतावनी प्रणाली · जलवायु परिवर्तन · आपदा न्यूनीकरण · राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) · समुद्री चक्रवात

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21: जीवन और सुरक्षा के अधिकार का आधार निकासी।
  • अनुच्छेद 355: केंद्र का राज्यों की रक्षा का कर्तव्य।

अवधारणा प्रवाह

बंगाल की खाड़ी में निम्न दाब क्षेत्र बनता है और धीरे-धीरे अवदाब से गहरे अवदाब में बदलता है।  →  तीव्रता बढ़कर चक्रवाती तूफान, फिर बहुत तीव्र चक्रवाती तूफान का रूप लेती है।  →  भारत मौसम विज्ञान विभाग पूर्वानुमान और चेतावनी जारी करता है।  →  राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण निम्न-भूमि और कच्चे मकानों के लोगों की निकासी करता है।  →  28 अक्टूबर को बापटला और विशाखापत्तनम के बीच स्थलपात होता है, जिससे तेज़ पवनें और वर्षा तटीय जिलों को प्रभावित करती हैं।  →  स्थलपात के बाद राहत, पुनर्वास और क्षति-आकलन की प्रक्रिया शुरू होती है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उष्णकटिबंधीय चक्रवात केवल समुद्र के ऊपर बनते हैं जहाँ समुद्री सतह का तापमान 26.5°C से अधिक होता है।
2. चक्रवात की आँख (eye) शांत और मेघ रहित क्षेत्र होती है।
3. भारत में चक्रवातों का नामकरण विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) द्वारा स्थापित क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र (RSMC) के दिशानिर्देशों के अनुसार किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीनों
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 सही है। उष्णकटिबंधीय चक्रवात गर्म समुद्री जल पर बनते हैं, जहाँ तापमान 26.5°C से अधिक होता है और गहराई कम से कम 50 मीटर होती है। कथन 2 सही है। चक्रवात की आँख केंद्र में एक शांत, साफ और अपेक्षाकृत गर्म क्षेत्र होती है। कथन 3 गलत है। भारत में चक्रवातों का नामकरण भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा किया जाता है, जो विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और एशिया तथा प्रशांत के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) के क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्रों (RSMCs) में से एक है।

Q2. भारत में चक्रवातों के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?

  1. बंगाल की खाड़ी में अरब सागर की तुलना में अधिक चक्रवात आते हैं।
  2. चक्रवातों की तीव्रता को मापने के लिए सैफिर-सिम्पसन स्केल का उपयोग किया जाता है।
  3. चक्रवात के कारण होने वाली अधिकांश मौतें तूफान के कारण आने वाली बाढ़ (storm surge) से होती हैं।
  4. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) केवल चक्रवात की भविष्यवाणी करता है, आपदा प्रबंधन का कार्य नहीं करता है।

उत्तर: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) केवल चक्रवात की भविष्यवाणी करता है, आपदा प्रबंधन का कार्य नहीं करता है। — भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) चक्रवात की भविष्यवाणी करने के साथ-साथ आपदा प्रबंधन एजेंसियों के साथ मिलकर काम करता है ताकि पूर्व चेतावनी और तैयारियों में सहायता मिल सके। इसलिए, यह कथन सही नहीं है। अन्य सभी कथन सही हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन में पूर्व चेतावनी प्रणालियों और सामुदायिक भागीदारी के महत्व का परीक्षण कीजिए। इन प्रणालियों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत भारत में चक्रवातों की आवृत्ति और उनके प्रभावों का संक्षिप्त परिचय देकर करें। पहले भाग में, पूर्व चेतावनी प्रणालियों (जैसे IMD की भूमिका, डॉप्लर रडार, उपग्रह इमेजरी) और सामुदायिक भागीदारी (जैसे स्थानीय स्वयंसेवक, जागरूकता कार्यक्रम, निकासी) के महत्व पर प्रकाश डालें। दूसरे भाग में, इन प्रणालियों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उठाए जा सकने वाले कदमों पर चर्चा करें, जिसमें प्रौद्योगिकी का उन्नयन, अंतिम-मील कनेक्टिविटी, क्षमता निर्माण, अंतर-एजेंसी समन्वय, और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखना शामिल है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) की भूमिकाओं का भी उल्लेख करें।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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