07 Nov चक्रवात मुरुसु: आंध्र प्रदेश में बिजली बहाली व मूल्य नियंत्रण के निर्देश
✎ आपदा के बाद राहत केवल भौतिक पुनर्निर्माण नहीं, बल्कि क्षति-आकलन, बिजली बहाली, आवश्यक वस्तुओं के मूल्य नियंत्रण (आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955) और SDRF से वित्तीय सहायता का समन्वित तंत्र है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — आपदा प्रबंधन (Disaster Management): चक्रवात के बाद राहत, पुनर्वास और क्षति आकलन की प्रशासनिक प्रक्रिया | GS Paper II — शासन एवं संघीय ढांचा: राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की भूमिका तथा केंद्र-राज्य वित्तीय सहायता | GS Paper III — अर्थव्यवस्था: आवश्यक वस्तुओं के मूल्य नियंत्रण और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की भूमिका
- Prelims: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005), राज्य आपदा मोचन निधि (State Disaster Response Fund — SDRF), आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act, 1955), मूल्य स्थिरीकरण कोष (Price Stabilisation Fund), रायतु बाजार (Rythu Bazaar) — आंध्र प्रदेश की किसान-उपभोक्ता बिक्री व्यवस्था, उचित मूल्य की दुकानें (Fair Price Shops) और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System — PDS), चक्रवात नामकरण की प्रणाली (उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र), भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department — IMD) की चक्रवात श्रेणियाँ
- Essay: आपदा के बाद पुनर्निर्माण: राहत से लचीलेपन (Resilience) तक का सफर, आवश्यक वस्तुओं की कीमत और आपदा-प्रभावित समाज की सुरक्षा: बाज़ार, राज्य और नागरिक की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: आपदा के बाद राहत केवल भौतिक पुनर्निर्माण नहीं, बल्कि क्षति-आकलन, बिजली बहाली, आवश्यक वस्तुओं के मूल्य नियंत्रण (आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955) और SDRF से वित्तीय सहायता का समन्वित तंत्र है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने चक्रवात मुरासु से प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं पुनर्स्थापना कार्यों को तेज़ करने, पीड़ित परिवारों को शीघ्र वित्तीय सहायता देने और आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ने से रोकने के निर्देश दिए हैं। समीक्षा बैठक में बताया गया कि लगभग 92 प्रतिशत बागवानी फसलों के क्षति-आकलन पूरे हो चुके हैं, जबकि कृषि फसलों का आकलन 9 नवंबर तक पूरा होने की संभावना है। 1,825 गाँवों में बिजली बहाली का काम जारी है और अब तक 7,850 क्षतिग्रस्त खंभों की मरम्मत हुई है। इसके अलावा 3.82 लाख प्रभावित परिवारों तक आवश्यक वस्तुएँ पहुँचाई गई हैं। प्याज़, चावल, पाम तेल, अरहर दाल और गेहूँ के आटे के मूल्य नियंत्रण के लिए रायतु बाजार और उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से रियायती बिक्री की व्यवस्था की गई है, तथा मूल्य निर्देशों के उल्लंघन पर 204 व्यापारियों के विरुद्ध मामले दर्ज हुए हैं। यह घटना दर्शाती है कि चक्रवात के बाद आपदा प्रबंधन केवल भौतिक क्षति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसमें आजीविका, बाज़ार और खाद्य आपूर्ति का प्रबंधन भी शामिल होता है।
पृष्ठभूमि
- भारत में आपदा प्रबंधन का मुख्य विधिक आधार आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 है, जिसके तहत राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority — NDMA) और राज्य स्तर पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (State Disaster Management Authority — SDMA) गठित होते हैं। राज्य स्तर पर SDMA की अध्यक्षता सामान्यतः मुख्यमंत्री करते हैं।
- चक्रवात जैसी आपदाओं में राहत और पुनर्वास के लिए राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) का उपयोग होता है, जिसमें केंद्र और राज्य का अंशदान निर्धारित अनुपात में होता है। राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर आपदाओं के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि का प्रावधान भी है।
- बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उठने वाले चक्रवात भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों को प्रभावित करते हैं। अक्टूबर-दिसंबर का समय उत्तर-पूर्वी मानसून के साथ बंगाल की खाड़ी में चक्रवात उत्पत्ति के लिए अधिक सक्रिय माना जाता है, इसलिए आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र इस दौरान विशेष रूप से संवेदनशील रहते हैं।
- आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत केंद्र और राज्य सरकारें खाद्य पदार्थों की आपूर्ति, भंडारण और मूल्य पर नियंत्रण रख सकती हैं। आपदा के समय जमाखोरी और कालाबाज़ारी रोकने में यह अधिनियम प्रमुख उपकरण है।
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत राज्य सरकारें उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से रियायती दर पर अनाज और अन्य वस्तुएँ उपलब्ध कराती हैं। आंध्र प्रदेश में रायतु बाजार जैसी राज्य-स्तरीय व्यवस्थाएँ सब्ज़ियों और अन्य वस्तुओं की सीधी बिक्री के लिए जानी जाती हैं।
चक्रवात के बाद आपदा प्रबंधन का ढांचा क्या है?
- आपदा प्रबंधन चक्र में तीन चरण होते हैं: आपदा से पहले की तैयारी (Preparedness), आपदा के समय का प्रतिक्रिया-कार्य (Response) और आपदा के बाद का पुनर्वास व पुनर्निर्माण (Recovery and Reconstruction)। इस समाचार में मुख्य रूप से प्रतिक्रिया और पुनर्वास चरण दिखाई देता है।
- क्षति आकलन (Damage Assessment) राहत-वितरण की पहली कड़ी है। बागवानी और कृषि फसलों का अलग-अलग आकलन इसलिए होता है क्योंकि दोनों के मुआवज़े और सहायता के मानदंड भिन्न हो सकते हैं।
- बिजली आपूर्ति की बहाली मुख्यतः राज्य के वितरण तंत्र और बिजली विभाग के माध्यम से होती है। चक्रवात में खंभों और तारों की क्षति सबसे आम होती है, इसलिए प्राथमिक स्तर पर सड़कों और अस्पतालों जैसी आवश्यक सुविधाओं को पहले जोड़ा जाता है।
- आवश्यक वस्तुओं पर मूल्य नियंत्रण का उद्देश्य आपदा के बाद आपूर्ति बाधित होने पर होने वाली मूल्य-वृद्धि और जमाखोरी को रोकना है। इसके लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के प्रावधान, निर्धारित मूल्य सूची और उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई जैसे उपाय अपनाए जाते हैं।
- सीधी बिक्री केंद्र (जैसे रायतु बाजार) और उचित मूल्य की दुकानें उपभोक्ताओं तक रियायती दर पर वस्तुएँ पहुँचाने का माध्यम हैं। भारत में मूल्य-स्थिरीकरण के लिए केंद्र सरकार का मूल्य स्थिरीकरण कोष भी प्रयोग में लाया जाता है, जो प्याज़ और दालों जैसी वस्तुओं के मूल्य-उतार-चढ़ाव को संतुलित करने में सहायक होता है।
- राज्य आपदा मोचन निधि से राहत-सहायता दी जाती है। आपदा-प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुँचाने की गति और पारदर्शिता को शासन की प्रभावशीलता का महत्वपूर्ण मानदंड माना जाता है।
- भारत में चक्रवातों के नामकरण की प्रणाली उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र के सदस्य देशों द्वारा प्रस्तावित नामों पर आधारित है, जिसे विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और संयुक्त राष्ट्र एशिया-प्रशांत आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (UN ESCAP) के सहयोग से लागू किया जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| घटना | चक्रवात मुरासु (Cyclone Murasu) के कारण आंध्र प्रदेश के कई क्षेत्रों में बिजली, फसल और आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई। मुख्यमंत्री ने राहत, पुनर्स्थापन और मूल्य नियंत्रण की समीक्षा बैठक की। |
| विद्युत पुनर्स्थापन | 1,825 गाँवों में पुनर्स्थापन कार्य जारी है और 7,850 क्षतिग्रस्त विद्युत खंभे मरम्मत किए जा चुके हैं। पिछले चक्रवात (Cyclone Arnav) के लगभग 30,000 खंभों की मरम्मत भी बताई गई है। |
| फसल क्षति आकलन | बागवानी फसलों के नुकसान का लगभग 92% आकलन पूरा हो चुका है, जबकि कृषि फसलों का आकलन 9 नवंबर तक पूरा होने का लक्ष्य है। आकलन के आधार पर वित्तीय सहायता तय होती है। |
| आवश्यक वस्तुओं का वितरण | 3.82 लाख प्रभावित परिवारों को आवश्यक वस्तुएँ दी जा चुकी हैं। यह आपदा के बाद खाद्य सुरक्षा बनाए रखने का प्रत्यक्ष उपाय है। |
| मूल्य नियंत्रण उपाय | प्याज़ (₹35 प्रति किलो), चावल (₹47 से ₹82 प्रति किलो), पाम तेल, अरहर दाल और गेहूँ के आटे के लिए सरकारी मूल्य तय किए गए हैं। आवश्यक वस्तु कानून के तहत व्यापारियों के विरुद्ध 204 मामले दर्ज हुए हैं। |
| सब्सिडी वाले चावल का विक्रय | रायथु बाज़ार के 150 काउंटरों से सब्सिडी वाला चावल बेचा जा रहा है। अब तक 27,430 क्विंटल चावल बिक चुका है, जिससे 1.03 लाख परिवारों को लाभ पहुँचा है। |
महत्व
प्रशासनिक और आपदा प्रबंधन
- आपदा के बाद पुनर्स्थापन, आकलन और राहत वितरण का समन्वित क्रम आपदा प्रबंधन की व्यावहारिक कसौटी है।
- फील्ड-स्तर की निगरानी और समयबद्ध आकलन से राहत राशि का वितरण तेज़ और पारदर्शी होता है।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (State Disaster Management Authority) की भूमिका इसी प्रकार की योजना और समन्वय में निहित है।
आर्थिक
- आपदा के बाद आपूर्ति बाधित होने पर वस्तुओं के दाम बढ़ने की आशंका रहती है, इसलिए मूल्य नियंत्रण आवश्यक हो जाता है।
- बागवानी और कृषि फसलों का नुकसान किसानों की आय और आगामी उत्पादन दोनों को प्रभावित करता है।
- सरकारी मूल्य पर बिक्री और बाज़ार हस्तक्षेप से उपभोक्ता मूल्य स्थिर रहते हैं और मुद्रास्फीति (Inflation) के दबाव में कमी आती है।
सामाजिक-मानवीय
- खाद्यान्न और दालों की सस्ती उपलब्धता से गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों की खाद्य सुरक्षा बनी रहती है।
- बिजली की बहाली से पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय आजीविका पर पड़ने वाला दबाव कम होता है।
संघीय और विधिक
- विद्युत और आपूर्ति जैसे विषयों में राज्य सरकारें प्राथमिक प्रशासनिक भूमिका निभाती हैं, जबकि केंद्र सरकार आपदा के बड़े पैमाने पर सहायता देती है।
- आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत व्यापारियों के विरुद्ध कार्रवाई राज्य प्रशासन की नियामक शक्ति को दर्शाती है।
चुनौतियाँ
1. आपूर्ति शृंखला का टूटना
- चक्रवात से सड़कें, गोदाम और परिवहन बाधित होते हैं, जिससे आवश्यक वस्तुएँ समय पर बाज़ार तक नहीं पहुँच पातीं।
- ऐसी स्थिति में स्थानीय स्तर पर कृत्रिम कमी और दाम बढ़ने का खतरा रहता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: आपदा प्रबंधन और आपदा-पश्चात आपूर्ति प्रबंधन
2. मूल्य नियंत्रण और जमाखोरी
- सरकारी मूल्य तय होने के बावजूद व्यापारियों द्वारा मानदंडों का उल्लंघन होना प्रवर्तन की चुनौती दिखाता है।
- दर्ज मामलों की संख्या बताती है कि निगरानी और दंड तंत्र लगातार सक्रिय रखना पड़ता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: आवश्यक वस्तु अधिनियम और बाज़ार नियमन
3. क्षति आकलन में विलंब
- कृषि फसलों का आकलन 9 नवंबर तक पूरा होने का लक्ष्य है, जबकि आकलन में देरी से वित्तीय सहायता का वितरण भी प्रभावित होता है।
- सटीक आकलन के लिए राजस्व और कृषि विभागों के बीच समन्वय आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: आपदा प्रबंधन और कृषि क्षति आकलन
4. बुनियादी ढाँचे की कमज़ोरी
- बड़ी संख्या में विद्युत खंभे गिरना तटीय क्षेत्रों के विद्युत नेटवर्क की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
- बार-बार होने वाली आपदाओं के बीच मरम्मत लागत और समय दोनों बढ़ते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-3: आपदा-रोधी आधारभूत संरचना
5. सहायता वितरण का दायरा और पहुँच
- 3.82 लाख परिवारों तक पहुँच के बावजूद सभी पात्र परिवारों तक लाभ पहुँचाना प्रशासनिक चुनौती है।
- रायथु बाज़ार जैसे काउंटरों पर भीड़ और सीमित पहुँच से दूरस्थ गाँवों के लोग वंचित रह सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-2: सामाजिक न्याय और लक्षित लाभ वितरण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| समस्या | चिंता |
|---|---|
| विद्युत बहाली | 1,825 गाँवों में कार्य जारी है; दूरस्थ और तटीय क्षेत्रों में खंभों की मरम्मत में समय लग सकता है। |
| मूल्य नियंत्रण का प्रवर्तन | 204 व्यापारियों पर मामले दर्ज होना निरंतर निगरानी की आवश्यकता दर्शाता है। |
| फसल क्षति आकलन | कृषि फसलों का आकलन पूरा होने में विलंब से किसानों को सहायता मिलने में देरी हो सकती है। |
| खाद्य पदार्थों की उपलब्धता | चावल, दाल और खाद्य तेल की आपूर्ति बनाए रखना सीमित भंडार में कठिन होता है। |
| लक्षित वितरण | सब्सिडी वाले चावल का वितरण सीमित काउंटरों से होने पर कुछ परिवार वंचित रह सकते हैं। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System)
- रायथु बाज़ार (Rythu Bazaar)
आगे की राह
- क्षति आकलन की समय-सीमा तय कर उसकी नियमित निगरानी की जाए, ताकि फसल सहायता में विलंब न हो।
- विद्युत विभाग और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय से बिजली बहाली का कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।
- मूल्य निगरानी के लिए बाज़ार-स्तर पर रिपोर्टिंग तंत्र मज़बूत किया जाए, ताकि दाम बढ़ने की प्रारंभिक सूचना मिल सके।
- आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रवर्तन में पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए और व्यापारियों के लिए स्पष्ट नियम सार्वजनिक किए जाएँ।
- सब्सिडी वाले वितरण के लिए अतिरिक्त काउंटर और मोबाइल वितरण व्यवस्था पर विचार किया जाए, ताकि दूरस्थ परिवार वंचित न रहें।
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली में लाभार्थियों का सत्यापन नियमित रूप से हो, ताकि सहायता पात्र परिवारों तक पहुँचे।
- आपदा-रोधी विद्युत नेटवर्क और भूमिगत केबल जैसे विकल्पों के आकलन से भविष्य की क्षति कम की जा सकती है।
- राहत, पुनर्वास और मूल्य नियंत्रण की समेकित कार्ययोजना बनाकर आपदा-पूर्व तैयारी को सुदृढ़ किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) · राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority) · राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (State Disaster Management Authority) · राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि (State Disaster Response Fund) · आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act, 1955) · मूल्य नियंत्रण और जमाखोरी निवारण · सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System) · विद्युत अधिनियम, 2003 (Electricity Act, 2003) · आपदा शमन और तैयारी · सेंडाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework for Disaster Risk Reduction) · सहकारी संघवाद · राहत और पुनर्वास में केंद्र-राज्य समन्वय
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 246 — संघ और राज्य के विधायी शक्ति का विभाजन
- सातवीं अनुसूची, समवर्ती सूची, प्रविष्टि 33 — खाद्य पदार्थों के व्यापार और आपूर्ति का नियमन
- अनुच्छेद 47 — आवश्यक खाद्य वितरण से पोषण सुरक्षा
अवधारणा प्रवाह
चक्रवात मुरासु से तटीय क्षेत्रों में तेज़ हवाएँ और वर्षा होती है। → विद्युत खंभे और फसलें क्षतिग्रस्त होती हैं, तथा सड़कों व परिवहन में बाधा आती है। → राज्य प्रशासन फसल क्षति का आकलन करता है और विद्युत पुनर्स्थापन कार्य शुरू करता है। → आपूर्ति बाधित होने से दाम बढ़ने का खतरा बनता है, जिसे रोकने के लिए मूल्य नियंत्रण लागू किया जाता है। → सब्सिडी वाले वितरण और रायथु बाज़ार के माध्यम से आवश्यक वस्तुएँ प्रभावित परिवारों तक पहुँचाई जाती हैं। → नियमों के उल्लंघन पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत व्यापारियों के विरुद्ध कार्रवाई होती है। → आकलन पूरा होने के बाद राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष से वित्तीय सहायता दी जाती है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है।
2. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का अध्यक्ष राज्य का मुख्यमंत्री होता है।
3. आपदा प्रबंधन संघ सूची (Union List) का एक विशिष्ट विषय है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राष्ट्रीय प्राधिकरण का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है। कथन 2 भी सही है: राज्य प्राधिकरण का अध्यक्ष मुख्यमंत्री होता है। कथन 3 गलत है, क्योंकि आपदा प्रबंधन मुख्यतः राज्य का विषय है और इसमें केंद्र-राज्य सहयोग की व्यवस्था है; इसे संघ सूची का विषय मानना त्रुटिपूर्ण है। अतः उत्तर केवल दो है।
Q2. निम्नलिखित में से प्रत्येक अधिनियम को उसके वर्ष से सुमेलित कीजिए:
सूची I (अधिनियम)
A. आवश्यक वस्तु अधिनियम
B. विद्युत अधिनियम
C. आपदा प्रबंधन अधिनियम
सूची II (वर्ष)
1. 2003
2. 1955
3. 2005
सही सुमेलन चुनिए:
- A-2, B-1, C-3
- A-1, B-2, C-3
- A-3, B-1, C-2
- A-2, B-3, C-1
उत्तर: A-2, B-1, C-3 — आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत उत्पादन, आपूर्ति, वितरण और मूल्य के नियमन के आदेश जारी किए जा सकते हैं (A-2)। विद्युत अधिनियम, 2003 विद्युत क्षेत्र के नियमन का मुख्य विधिक ढाँचा है (B-1)। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 आपदा प्रबंधन की संस्थागत व्यवस्था देता है (C-3)।
Q3. कथन (A): किसी प्राकृतिक आपदा के दौरान राज्य सरकार आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और मूल्य के नियंत्रण हेतु आदेश जारी कर सकती है।
कारण (R): आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 केंद्र और राज्य सरकारों को वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण और मूल्य के नियमन की शक्ति देता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है। — आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत केंद्र और राज्य सरकारें नियंत्रण आदेश जारी कर सकती हैं, जिनमें मूल्य निर्धारण, भंडारण सीमा और वितरण का नियमन शामिल है। इसी विधिक शक्ति के आधार पर संकट-काल में मूल्य नियंत्रण संभव होता है, इसलिए (R), (A) की सही व्याख्या है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ आपदा के बाद राहत, विद्युत आपूर्ति की बहाली और आवश्यक वस्तुओं के मूल्य नियंत्रण की व्यवस्था मूलतः राज्य स्तरीय प्रशासनिक क्षमता पर निर्भर करती है। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या वर्तमान केंद्र-राज्य समन्वय की व्यवस्था इन दायित्वों के निर्वहन के लिए पर्याप्त है? इस पर अपने तर्क दीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर के लिए अपेक्षित बिंदु:
1. भूमिका: चक्रवात मुरासु के बाद आंध्र प्रदेश में राहत, विद्युत बहाली और मूल्य नियंत्रण की समीक्षा बैठक का तथ्यात्मक संदर्भ (1,825 गाँवों में बहाली कार्य, 3.82 लाख परिवारों को आवश्यक वस्तुओं का वितरण, प्याज ₹35 प्रति किग्रा पर रायतु बाज़ार के माध्यम से बिक्री, 204 व्यापारियों के विरुद्ध मामले दर्ज)।
2. आपदा प्रबंधन संरचना: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (अध्यक्ष: प्रधानमंत्री), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (अध्यक्ष: मुख्यमंत्री) और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (अध्यक्ष: जिलाधिकारी) का त्रि-स्तरीय ढाँचा; राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि तथा राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया निधि की वित्तीय व्यवस्था, जिसके मानदंड वित्त आयोग की सिफारिशों से तय होते हैं।
3. मूल्य नियंत्रण: आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत भंडारण सीमा, मूल्य-आदेश और जमाखोरी पर नियंत्रण; सार्वजनिक वितरण प्रणाली तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत सस्ते अनाज का वितरण; राज्य सिविल आपूर्ति विभाग की भूमिका।
4. विद्युत बहाली: विद्युत अधिनियम, 2003 के अंतर्गत वितरण कंपनियों (DISCOM) की जिम्मेदारी और आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना की आवश्यकता।
5. न्यायिक और संवैधानिक आयाम: अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार में भोजन के अधिकार की व्याख्या (PUCL बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका); अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत राज्य के नीति-निदेशक तत्व।
6. केंद्र-राज्य समन्वय: सहकारी संघवाद की अवधारणा; सरकारिया आयोग (1983-87) और पुंछी आयोग (2007-10) की सिफारिशें; केंद्रीय सहायता बनाम राज्य की वित्तीय क्षमता; अंतर-राज्य परिषद की भूमिका।
7. अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ: सेंडाई फ्रेमवर्क (2015-2030) की प्राथमिकताएँ, विशेषकर आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर बल (ex-ante) बनाम आपदा-पश्चात राहत (ex-post)।
8. संतुलित दृष्टिकोण और निष्कर्ष: (क) समर्थन पक्ष: स्थानीय प्रशासन की तत्परता, स्पष्ट वैधानिक ढाँचा, प्रत्यक्ष लाभ-हस्तांतरण; (ख) आलोचनात्मक पक्ष: राहत पर अधिक और शमन पर कम व्यय, आपदा-पूर्व तैयारी की कमी, मूल्य नियंत्रण से आपूर्ति-संकट का जोखिम, आँकड़ों व अंतर-विभागीय समन्वय की कमी; (ग) निष्कर्ष: विधिक ढाँचे के साथ जोखिम-आधारित नियोजन, डेटा-आधारित निगरानी और केंद्र-राज्य वित्तीय सामंजस्य को जोड़कर ही समग्र उत्तर दिया जा सकता है।
स्रोत: The Hindu
Andhra Pradesh PCS (APPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: हाल ही में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने चक्रवात ‘मुरसु’ के बाद त्वरित बिजली बहाली और मूल्य नियंत्रण उपायों का आदेश दिया। ‘मुरसु’ शब्द क्या दर्शाता है?
- A. एक नया सरकारी कार्यक्रम
- B. एक चक्रवात का नाम
- C. एक कृषि योजना
- D. एक तटीय शहर का नाम
उत्तर: B. एक चक्रवात का नाम — चक्रवात ‘मुरसु’ हाल ही में आंध्र प्रदेश को प्रभावित करने वाला एक उष्णकटिबंधीय चक्रवात है, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने राहत उपायों का आदेश दिया।
Mains: आंध्र प्रदेश में चक्रवात ‘मुरसु’ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन में राज्य सरकार द्वारा अपनाए गए त्वरित बिजली बहाली और मूल्य नियंत्रण उपायों के महत्व का विश्लेषण करें। आंध्र प्रदेश के संदर्भ में आपदा प्रबंधन में ऐसी नीतियों की प्रभावशीलता पर चर्चा करें।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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